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दण्ड के प्रतिशोधात्मक उद्देश्य का उल्लेख कीजिए।

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प्रतिशोध को उचित दण्ड कहा जाता है। इसके अनुसार जिस व्यक्ति ने जैसा किया है, उसे उसी प्रकार का दण्ड दिया जाना चाहिए। प्राचीनकाल में दण्ड का यह उद्देश्य सर्वमान्य था और जैसे को तैसा (Tit for Tat) का सिद्धान्त प्रचलित था। उस समय प्रतिशोध या बदला लेने के उद्देश्य से दण्ड दिया जाता था। आज भी अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्देश्य से दण्ड दिया जाता है।
राज्य मृत व्यक्ति की आत्मा की शान्ति के लिए तथा उसके परिवार वालों के सन्तोष के लिए हत्यारे को मृत्यु-दण्ड या आजीवन कारावास का दण्ड देता है। अतः दण्ड का यह उद्देश्य नैतिक न्याय की सन्तुष्टि पर आधारित है परन्तु वर्तमान शैक्षिक मान्यताओं के अनुसार बालक के लिए दण्ड की व्यवस्था की यह उद्देश्य उचित नहीं है।



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