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Answer» जब किसी व्यक्ति को किसी कार्य के परिणामस्वरूप कष्टदायक अनुभव प्राप्त होता है, चाहे वहु प्रकृति-प्रदत्त हो या अर्जित, तब उसे दण्ड किसी व्यक्ति को अनुचित कार्य करने पर दिया जाता हैं। शिक्षा में दण्ड की उपयोगिता शिक्षा के क्षेत्र, में अनुशासन स्थापित करने में दण्ड का विशेष महत्त्व है। मध्यकालीन शिक्षा में दण्ड’ को अनुशासन स्थापना का प्रमुख साधन समझा जाता था। उस समय उक्ति प्रचलित थी कि डण्डा छूटा बालक बिगड़ा (Spare the rod and spoil the child)। उस समय छात्र द्वारा गलती करने पर उसे कठोरतमै दण्ड दिया जाता था। मध्यकाल में शारीरिक दण्ड की प्रधानता थी। लेकिन बाद में शिक्षा के क्षेत्र में मनोवैज्ञानिक विचारधारा के प्रवेश के फलस्वरूप शारीरिक दण्ड़ की प्रधानता समाप्त हो गयी, किन्तु अन्य प्रकार को दण्ड आज भी प्रचलित है, क्योंकि दण्ड के अभाव में अनुशासन की स्थापना करना एक कल्पना ही है। छात्रों की बुरी आदतों को छुड़ाने, उन्हें अनुचित कार्य करने से रोकने तथा बुराइयों से बचाने के लिए दण्ड अत्यन्त आवश्यक है। दण्ड के स्वरूप को निर्धारित करने में विशेष सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए। दण्ड का उद्देश्य सदैव सुधारात्मक ही होना चाहिए।
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