Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

मोहें-जो-दड़ो का अर्थ समझाकर उसके मार्ग की जानकारी दीजिए ।

Answer»

मोहें-जो-दड़ो का अर्थ ‘मरे हुओ के ढेर’ है ।

मार्ग – ‘मोहें-जो-दड़ो’ के मार्ग 9.75 मीटर चौड़े थे । छोटे मार्ग मुख्य मार्ग को समकोण पर मिलते थे । ये इतने चौड़े थे कि एक साथ एक से अधिक वाहन गुजर सकते थे । रास्तों के पास रात्रि प्रकाश के लिए खंभे होते थे । मार्ग सीधे होते थे, कहीं भी मोड़ नहीं थी । राजमार्ग भी थे जिसे अन्य मार्ग समकोण पर मिलते थे ।

2.

Fill in the blanks.1. .…….. gave a major contribution in the development of language.2. .…….. Indian scholars divided ancient Indian literature into parts.3. .………… India’s most ancient script belongs to civilization which has not been deciphered.4. .……….. composed the book ‘Astadhyayi’.5. Rigveda consists of ……….. verses.

Answer»

1. Script

2. two

3. Harappan

4. Panini

5. 1028

3.

कार्तिक पूर्णिमा का मेला …………. में लगता है ।

Answer»

सही उत्तर है सोमनाथ

4.

अहमदाबाद के हठेसिंह जैन देरासर का शिलालेख किस वर्ष का है ?(A) 1747(B) 1847(C) 1947(D) 1565

Answer»

सही विकल्प है (B) 1847

5.

मध्य एशिया से कौन-सी तीन प्रजाएँ भारत में आयी थी ?

Answer»

मध्य एशिया से अल्पाइन, डिनारिक और आर्मेनोइड प्रजाएँ मध्य एशिया से आयी थी ।

6.

मीरादातार का मेला ……… में लगता है ।

Answer»

सही उत्तर है ऊनावा

7.

अजंता की गुफाएँ ……….. पर्वत को काटकर बनाई गयी है ।

Answer»

सही उत्तर है सह्याद्री

8.

……….. के समय गुजरात में अनेक स्तूप और विहारों का निर्माण हुआ था ।

Answer»

सही उत्तर है छत्रपाल

9.

निम्न में से किस स्थान पर पतंगोत्सव होता है ?(A) अहमदाबाद(B) बड़ोदरा(C) वड़नगर(D) मोढेरा

Answer»

सही विकल्प है (A) अहमदाबाद

10.

आर्य …….. की पूजा करते थे ।

Answer»

सही उत्तर है प्रकृति

11.

धूप, दीप और आरती से पूजा किसकी देन है ?(A) आर्य(B) निषाद(C) नेग्रीटो(D) द्रविड

Answer»

सही विकल्प है (D) द्रविड

12.

मोहें-जो-दड़ो संस्कृति के निर्माता कौन थे ?(A) आर्य(B) निषाद(C) नेग्रीटो(D) द्रविड

Answer»

सही विकल्प है (D) द्रविड

13.

विरासत की सुरक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है ।

Answer»

प्रकृति को रम्य दृश्य भारत की भूमि पर सर्जित है । उनकी सुंदरता, पवित्रता और शुद्धता हम सभी साथ में मिलकर, एक नैतिक कर्तव्य समझना चाहिए ।

  • विरासत के निर्माण और क्रमिक विकास भारत को मिली प्राकृतिक रचना पर आधारित है ।
  • प्रकृति द्वारा भारत को अपार समृद्धि प्राप्त हुई है । यह प्राकृतिक विशिष्टता भारत के प्रत्येक क्षेत्र में विकास के लिए अनमोल अवसर प्रदान किये है ।
  • भारत की विरासत हजारों वर्षों से भारत के लोगों द्वारा आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में किये गये विकास का परिणाम है ।
14.

विरासत के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य क्या है ?

Answer»

विरासत की सुंदरता, भव्यता, पवित्रता और शुद्धता को बनाए रखना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है ।

15.

विरासत की सुरक्षा के लिए संविधान के किस अनुच्छेद में निर्देश किया गया है ?

Answer»

संविधान के अनुच्छेद 51 में विरासत की सुरक्षा के लिए नागरिक का कर्तव्य बताया गया है ।

16.

Write whether the following statements are true or false.1. ‘Geetgovind’ was created by Jaydeva.2. Awadhi language is known as the language of Aryans or sages.3. The Buddhist literature is written in Pali.4. The most ancient language of Dravidian family is Telugu.5. Kathasaritsagar was created by Kalhan.

Answer»

1. True

2. False

3. True

4. False

5. False

17.

मंगोलोइड प्रजा भारत में कहाँ से आयी थी ?(A) तिब्बत(B) चीन(C) अफ्रीका(D) अग्नि एशिया

Answer»

सही विकल्प है (A) तिब्बत

18.

नीग्रो प्रजा भारत में कहाँ से आयी थी ?(A) अग्नि एशिया(B) अफ्रीका(C) मध्य एशिया(D) अमेरिका

Answer»

सही विकल्प है (A) अग्नि एशिया

19.

ऑस्ट्रेलाइड प्रजा कहाँ से भारत में आयी थी ?(A) अफ्रीका(B) अग्नि एशिया(C) मध्य एशिया(D) ईरान

Answer»

(B) अग्नि एशिया

20.

भारत की किन जातियों में ऑस्ट्रेलाईड प्रजा के शारीरिक लक्षण पाये जाते है ?

Answer»

भारत की कोल और मुण्डा जाति, असम में खांसी निकाबोर में आस्ट्रेलाईड प्रजा के लक्षण पाये जाते है ।

21.

भावनगर जिले के पालीताणा के ………… पर्वत पर अनेक जैन देरासर है ।

Answer»

सही उत्तर है शेजेज्य

22.

माधवपुर का मेला किस जिले में लगता है ?(A) अहमदाबाद(B) दाहोद(C) भावनगर(D) पोरबंदर

Answer»

सही विकल्प है (D) पोरबंदर

23.

महोबतखान का मकबरा …………… में स्थित है ।

Answer»

सही उत्तर है जूनागढ

24.

गुजरात के मुख्य धार्मिक स्थलों के नाम लिखिए ।

Answer»

भावनगर जिले के पालीताणा के शेव॑जय पर्वत पर अनेक जैन देरासर है ।

  • मेहसाणा जिले के खेरालु तालुके के टीबा गाँव के नजदीक की टेकरियों पर तरंगा तीर्थ है । यहाँ पर तारामाता का मंदिर भी
  • गिर के सोमनाथ जिले में सोमनाथ (शिव) मंदिर और देवभूमि द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर ऐतिहासिक विरासत रखते है ।
25.

नेग्रीटो (हब्सी) प्रजा के विषय में संक्षिप्त टिप्पणी लिखो ।

Answer»

नीग्रो अथवा नेग्रीटो (हब्सी) प्रजा भारत के सबसे प्राचीन निवासी है ।

  • कुछ इतिहासकारों के अनुसार नीग्रो प्रजा भारत में बलुचिस्तान से होकर अफ्रीका से आयी थी ।
  • नीग्रो श्याम वर्ण, 4 से 5 फूट ऊँचे और घुघराले बालवाले थे ।
26.

भारतीय प्राकृतिक विरासत के चार तत्त्वों का वर्णन कीजिए ।

Answer»

(1) भूमिदृश्य: भूमि आकारों द्वारा अनेक भूमि दृश्य सर्जित होते हैं, जैसे हिमालय । हिमालय में अनेक प्रकार की उपयोगी वनस्पति, खनिज, पशु-पक्षी और शिखर बरफ से ढ़के होते है । बारहो महीने बहनेवाली नदियाँ तथा वन उपयोगी होते । हिमालय पर अमरनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ, जैसे धार्मिक स्थल, नंदादेवी जैसे शिखर हिमालय पर स्थित है ।

(2) नदियाँ: प्राचीन काल से नदियाँ प्राकृतिक परिवहन की सुविधा देती थी । भारत की संस्कृति सिंधु और राबी नदी के किनारे पर विकसित हुई है । सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, यमुना, कृष्णा, कावेरी जैसी लगभग अनेक नदियों ने लोकजीवन पर प्रभाव डाला है ।

पीने का पानी, सिंचाई, बीजली, खेती, जलमार्ग जैसी हमारी महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ पूरी करती है । मिट्टी के बर्तन, घर बनाने में तथा मानव जीवन को समृद्ध बनाने में नदियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है ।
हमारी संस्कृति की ऊषा और संध्या नदियों के किनारे पर हुई थी । इसलिए नदियों को हम लोकमाता कहते हैं ।

(3) वनस्पति: भारत की प्रजा आदिकाल से पर्यावरण प्रेमी रही है, जिसका साक्षी उसका वृक्ष प्रेम है । मानव, प्राणी, पशु-पक्षी
आहार के लिए वनस्पति पर निर्भर करते हैं । भारत में पीपल, वड़, तुलसी आदि की पूजा, धूप-दीप, वटसावित्रि, पीपलपूजा की जाती थी । अनाज, दलहन, तिलहन, धन-धान्य से लहराते खेत वनस्पति से भरे वन और औषधी के लिए उपयोगी पौधों ने अति प्राचीन काल से जीवन को समृद्ध बनाया है । हरड़े, बहेड़ा, आँवला, कुँवारपाठा, उडूसी, नीम औषधी, मोगरा, गुलाब, कमल, सूरजमुखी, चंपा, निशीगंधा, जुई आदि पुष्पों ने मानवजीवन को खूब सुंदर, सुवासित और समृद्ध बनाया है ।

(4) वन्य जीवन: प्राचीन काल से ही भारत प्राणी प्रेमवाली संस्कृतिवाला देश है । वाघ, सिंह, गेंडा, हाथी, चिता, शियाल, हिरण, रीछ, रोज, साबर, खरगोश, अजगर, साँप, नाग, नेवला जैसे जीव भारत में पाये जाते है । विश्व में एशियाई सिंह मात्र गिर के जंगलों में पाया जाता है । हमारी धार्मिक मान्यताएँ कुछ वन्यजीवों मोर, बाघ, मगर, गरूड़ आदि को देवी-देवताओं के वाहन के रूप में स्थान दिया है । हमारी राष्ट्रीय मुद्रा में भी चार सिंह, घोड़ा तथा बैल की आकृति देकर उनका मूल्य दर्शाया है ।

27.

कौन-सी चिकित्सा पद्धतियाँ प्राकृतिक विरासत से संबंध रखती है ?

Answer»

निसर्गोपचार, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियाँ प्राकृतिक विरासत पर आधारित है ।

28.

भारत की संस्कृति किसका अनुसरण करनेवाली है ?

Answer»

भारत की संस्कृति सत, चित और आनन्द के अनुभूति करनेवाली है ।

29.

भारतीय संस्कृति में किन वृक्षों को पवित्र मानकर पूजा जाता है ?

Answer»

भारतीय संस्कृति में वड़, पीपल, नीम, तुलसी, केला के वृक्षों को पवित्र मानकर पूजा जाता है ।

30.

भारत की संस्कृति ने किन नदियों के किनारे पर पोषण प्राप्त किया है ?

Answer»

भारत की संस्कृति ने सिंधु से राबी नदियों के किनारे पर पालनपोषण प्राप्त किया है ।

31.

आर्य और द्रविड़ संस्कृति की जानकारी दीजिए ।

Answer»

आर्य संस्कृति:

  • भारत में आर्य सभ्यता के निर्माता आर्य (जोर्डिक) थे ।
  • प्राचीन भारत के हिन्दू आर्य कहलाते थे । वे जिन प्रदेशों में रहते थे उसे ‘आर्यवर्त’ नाम दिया गया था ।
  • प्राचीन समय में आर्य जनसंख्या वायव्य भारत में थी, वहाँ सात नदियाँ बहती थी, इसलिए उसे ‘सप्तसिंधु’ नाम दिया गया ।
  • उत्तर वैदिककाल में आर्यावर्त के पूर्व में मिथिला (बिहार) तक और दक्षिण में विंध्याचल तक फैले थे ।
  • अन्य समकालीन प्रजाओं में आर्य सबसे विकसीत प्रजा थी ।
  • आर्य भरत राजा और भरत जाति के नाम से यह विशाल प्रदेश भरतभूमि, भारत उपमाद्वीप, भारत वर्ष जैसे नाम से पहचाना
    जाने लगा ।
  • आर्य प्रकृति प्रेमी थे । वे वृक्षों, पर्वतों, सूर्य, वायु, नदियों, वर्षा आदि की पूजा-अराधना करते थे । जिन्होंने स्तुतियों (ऋचाओं) की रचना की थी।
  • आर्यों ने वेदपठन प्रचलित किया, धार्मिक विधियों, यज्ञादियों को शुरू किया ।
  • भारत में आयी विविध प्रजाओं के साथ आर्यों ने मिश्रित – समन्वयी संस्कृति का निर्माण किया था ।

द्रविड़ संस्कृति:

  • द्रविड़ भारत के मूल नागरिक थे । उन्हें मोहें-जो-दड़ो की सिंधु संस्कृति के सर्जक और पाषाण संस्कृति के निर्माता माना जाता है ।
  • द्रविड़ माता के रूप में देवी (पार्वती) और पितृरुप में परमात्मा (शिव) की आराधना करते थे ।
  • धूप, दीप और आरती से पूजा की परंपरा द्रविड़ प्रजा ने शुरू की थी ।
  • द्रविड़ों के मूलदेवता आर्यों ने स्वीकार की थी, समय बीतने पर उत्तर के प्रचंड प्रभाव के अधीन द्रविड़ों में आर्य संस्कृति गहराई तक व्याप्त हो गयी । अंतरजातीय विवाह भी प्रसारित किये ।
  • द्रविड़ों में मातृ परिवार प्रथा प्रचलित थी । वे अवकाशीय ग्रहों के क्षेत्र में और विविध कलाओं जैसे कताई-बुनाई, रंगना, नाव निर्माण जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण हैं ।
  • आज दक्षिण भारत में द्रविड़ कुल की तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसे भाषाएँ बोलनेवाले लोग बसते है ।
32.

उच्च न्यायालय का स्थान कड़ी रूप है ।

Answer»

भारत की न्यायपालिका के सर्वोच्च न्यायालय और जिला न्यायालय के बीच के स्तर का उच्च न्यायालय होता है ।

  • उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के परामर्श से करता है । यह राज्य के सबसे बड़े न्यायालय के रूप में कार्य करता है ।
  • उच्च न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है तथा सरकार के वे कानून जो नागरिक अधिकारों का हनन करते है उन्हें रद्द करता है ।
  • इस प्रकार केन्द्र और राज्य सरकारों, जनता और सरकार तथा सर्वोच्च और जिला न्यायालयों के बीच की कड़ी उच्च न्यायालय है ।
33.

आर्य प्रजा अन्य किन नामों से पहचानी जाती थी ?

Answer»

आर्य प्रजा नोर्डिक नाम से पहचानी जाती थी । इनकी अधिक जनसंख्यावाले क्षेत्रों को आर्यावर्त और सप्तसिंधु नाम से पहचाना जाता था ।

34.

प्राकृतिक विरासत का अर्थ समझाइए । भारत की प्राकृतिक विरासत में शामिल होनेवाली बातों की जानकारी दीजिए ।

Answer»

‘प्राकृतिक, पर्यावरण और मानवजीवन के बीच निकट संबंधों का परिणाम अर्थात् प्राकृतिक विरासत ।’ प्राकृतिक विरासत प्राकृति की भेट है ।

  • भारत की प्राकृतिक विरासत विशिष्ट और वैविध्यपूर्ण है । जिसमें ऊँचे पर्वत, नदियाँ, सागर, झरने, लम्बे समुद्री किनारे, विशाल
    समुद्री खाईयाँ, उपजाऊ मैदान, घाटियों, रेगिस्तान आदि का समावेश होता है ।
  • वृक्षों, वनस्पति, जीवजंतुओं, ऋतुओं, पशु-पक्षियों और वैविध्यपूर्ण भूमि-दृश्यों, विविध प्रकार की चट्टानों, खनिजों आदि का समावेश होता है ।
  • हम प्रकृति का आहार, पानी, शुद्ध वायु तथा निवास जैसी लगभग सभी आवश्यकताओं के लिए सुंदर व्यवस्था की है ।
  • प्रकृति के साथ हमारा व्यवहार श्रद्धापूर्ण होने का उदाहरण पंचतंत्र की कहानियों और बौद्ध जातक कथाओं में दिखाई देता है ।
  • हमारे लोकगीत और शास्त्रीय संगीत भी ऋतुओं और प्रकृति के साथ जुड़े हुए है ।
  • हमारे गीत, त्यौहार, कविताओं, चित्रों में प्रकृति और ऋतुचक्र का निरूपण दिखाई देता है ।
  • निसर्गोपचार, आयुर्वेद, युनानी जैसी चिकित्सा पद्धतियाँ भी प्रकृति पर आधारित है ।
35.

गुजरात के साँस्कृतिक विरासत के स्थलों पर टिप्पणी लिखिए ।

Answer»

प्रस्तावना : गुजरात शिल्प स्थापत्य कला में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है । यहाँ गुफाएँ, मंदिर, मस्जिदों, किलों, वाव, तोरण जैसी बहुविध स्थापत्य पायी जाती है ।

गजरात के सांस्कृतिक विरासत के स्थल:

(1) धोलावीरा – धोलावीरा सिंधु घाटी सभ्यता का नगर था । यह कच्छ के भचाऊ तालुके के खदीरबेट में आया हुआ है । धोलावीरा उसकी आदर्श नगररचना और हड़प्पीय संस्कृति के व्यापार-वाणिज्य के लिए प्रसिद्ध था ।

आज से लगभग 500 वर्ष पहले इस नगर में जैवरात बनाने तथा माणेक बनाने के केन्द्र पाये गये हैं ।

(2) लोथल – यह भी सिंधुघाटी सभ्यता का प्राचीन नगर है । लोथल अहमदाबाद-भावनगर हाईवे के नजदीक आया एक पुरातत्त्वीय स्थल है ।

 यह प्राचीन समय में व्यापार-वाणिज्य और सुविधाओं से सज्ज हड़प्पीयन संस्कृति का बंदरगाह था ।

36.

संस्कृति का अर्थ देकर विस्तार से समझाइए ।

Answer»

संस्कृति का अर्थ:

संस्कृति अर्थात् ‘जीवन जीने का तरीका’ । देश और समाज में कालक्रम में बदलाते संजोगों के अनुसार जनजीवन में आनेवाले परिवर्तनों, सुधारों, सामाजिक रीति-रिवाजों आदि के माध्यम से भिन्न संजोगों में संस्कृति बनती है । संस्कृति अर्थात् मानव मन की उपज और उसमें मानव समाज की आदतों, मूल्यों, आचार-विचार, धार्मिक परंपराओं, आवास और जीवन के उच्च उद्देश्यों की ओर ले जानेवाले आदर्शों का योग है ।

भारत की सांस्कृतिक विरासत:

विरासत अर्थात् हमें हमारे पूर्वजों द्वारा प्राप्त अमूल्य भेट ।

भारत की विरासत को दो भागों में बाँट सकते है:

(1) भारत की प्राकृतिक विरासत: ‘प्रकृति, पर्यावरण और मानवजीवन के बीच निकटता के संबंधों का परिणाम अर्थात् प्राकृतिक विरासत ।’ प्राकृतिक विरासत प्राकृतिक भेट है । भारत की प्राकृतिक विरासत विशिष्य और वैविध्यपूर्ण है । जिसमें ऊँचे पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, सागर, लम्बे समुद्री किनारों, विशाल उपजाऊ मैदान, घाटी प्रदेश, रेगिस्तान का समावेश होता है तथा वृक्षों, जीवजन्तुओं, ऋतुओं, पशु-पक्षियों, वैविध्यपूर्ण भूमि दृश्यों का समावेश होता है । हम सभी प्रकृति की संतान है । प्रकृति हमारे आहार, पानी, शुद्ध वायु, निवास जैसी सभी आवश्यकताएँ पूरी करती है ।

(2) भारत की साँस्कृतिक विरासत: भारत ने जगत को विविधतापूर्ण और समृद्ध विरासत की भेट दी है । साँस्कृतिक विरासत अर्थात् मानवसर्जित विरासत । मानव ने अपने ज्ञान, बुद्धिचातुर्य, योग्यता और कला-कौशल्य द्वारा जो कुछ भी विकसित किया और जिसका सर्जन किया उसे साँस्कृतिक विरासत कहते हैं । आर्यों से शुरू करके, क्षत्रप, कुषाण, हुण, इरानियों, तुर्क, अरबों, मुगल, पारसियों, अंग्रेजों, फ्रेन्च आदि विविध जाति, प्रजातियाँ भारत में आयी । इन सभी के बीच आदान-प्रदान से भारतीय संस्कृति समृद्ध बनी है ।

37.

जैन तीर्थ पालीताणा किस जिले में स्थित है ?(A) भावनगर(B) खेड़ा(C) जामनगर(D) कच्छ

Answer»

सही विकल्प है (A) भावनगर

38.

गुजरात के मैलों (कोई दस) की जानकारी दीजिए ।

Answer»
  1. मोढ़ेरा का मेला (महेसाणा जिले में) श्रावण वद अमावस
  2. शामलाजी का कालीया ठाकोर का मेला (अरावली जिला) कार्तिक सुद 11 से अमावस तक
  3. भादरवी पूनम का मेला (अम्बाजी बनासकांठा) भादरवा सुद पुनम
  4. भवनाथ मेला (गीरनार – जूनागढ) महा वद नौवी से बारस
  5. तरणेतर मेला (सुरेन्द्रनगर) भादरवा सुद चौथ से छठ
  6. माधवपुर का मेला (पोरबंदर) चैत्र सुद नौंवी से तेरस
  7. वौठा का मेला (धोलका – अहमदाबाद) कार्तिक सुद पुनम
  8. डांग दरबार का मेला (आहवा – डांग) फागन सुद पुनम ।
  9. कार्तिकी पूर्णिमा का मेला (सोमनाथ गीर) फागण सुद पुनम ___
  10. भांगुरीया का मेला (छोटा उदयपुर – कवांट) होली से रंग पांचम तक प्र.
39.

भारत की साँस्कृतिक विरासत की जानकारी दीजिए ।

Answer»

भारत ने जगत को विविधतापूर्ण और समृद्ध विरासत दी है ।

  • साँस्कृतिक विरासत अर्थात् मानवसर्जित विरासत ।
  • मानव ने अपनी योग्यता, बुद्धिचातुर्य, कला-कौशल्य द्वारा प्राप्त करके, साँस्कृतिक विरासत का सर्जन किया है ।
  • आर्यों से लेकर शक, क्षत्रप, कुषाण, हुण, इरानी, तुर्क, अरब, मुगल, पारसी, अंग्रेज, फ्रेन्च आदि विविध जाति, प्रजाति भारत में आयी । इन सभी के बीच आदान-प्रदान से भारतीय संस्कृति समृद्ध बनी है ।
  • प्रागेतिहासिक समय से भारत ने विश्व की प्रजाओं को साँस्कृतिक विरासतों की अपार भेट दी है । उदाहरण : शिल्पकला 5000 जितनी पुरानी है ।
  • देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, मानवशिल्पों, पशुओं तथा खिलौनों तथा दाढ़ीवाले पुरुष, शिल्प और नर्तकी की मूर्ति देखकर हम अपनी विरासत के प्रति स्वाभिमान अनुभव करते है ।
  • मौर्य युग की उल्टे कमल की आकृति पर सिंह और वृषभ की शिल्प-बुद्ध की प्रजा परंपिता की शिल्प, सारनाथ की धर्मचक्र प्रवर्तनवाली महात्मा गौतम बुद्धवाली प्रतीमा, जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, राष्ट्रकूट राजाओं की इलोरा की गुफाएँ आदि हमारी साँस्कृतिक विरासत के प्रतीक है ।
  • हमारी साँस्कृतिक विरासत में मंदिरों, शिलालेखों, स्तूपों, विहारों, चैत्यों, मकबरा, मस्जिद, किलों, गुंबजों, राजमहलों, दरवाजों, ईमारतों, उत्खनन के स्थलों का समावेश होता है ।
  • गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, साहित्य, धर्म, युद्धशास्त्र, राज्यशास्त्र, प्राणीशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, वास्तुशास्त्र, न्यायतंत्र, विधिविधान, गणतंत्र आदि विषयों की विरासतीय देन हमें संस्कृति ने दी है ।
  • ब्रह्मदेश में इन प्रजाओं के लक्षण पाये जाते है ।
  • भारत की संस्कृति और सभ्यता के विकास में इस प्रजा का विशेष योगदान पाया जाता है ।
  • वे मिट्टी के बर्तन बनाने, कृषि करने, सुत्ती कपड़े बनाने जैसे कौशल्यों के जानकार थे । वे अपनी धार्मिक मान्यताएँ रखते थे ।
40.

‘गुजरात की साँस्कृतिक विरासत’ – विस्तार से समझाइए ।

Answer»

साँस्कृतिक, पौराणिक और पुरातत्त्वीय महत्त्व के स्थलों में लोथल, रंगपुर, धोलावीरा, रोजड़ी और श्रीनाथगढ़ आदि महत्त्वपूर्ण है ।

  • वड़नगर का कीर्ति तोरण, जूनागढ़ में सम्राट अशोक के शिलालेख, मोढ़ेरा का सूर्यमंदिर, चांपानेर का दरवाजा, सिद्धपुर का रुद्रमहल, विरमगाँव का मुनसर तालाब, अहमदाबाद की जामा मस्जिद, झूलता मीनार, सीद्दी सैयद की जाली, हटेसिंह का दहेरा, जूनागढ़ का मोहब्बतखाँ का मकबरा, नवसारी का पारसी अगियारी आदि ऐतिहासिक महत्त्व के देखनेलायक स्थान है ।
  • धार्मिक महत्त्व के स्थानों में द्वारका का द्वारकाधीश मंदिर और जगद्गुरु शंकराचार्य की शारदापीठ, 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर, उत्तर गुजरात में अंबाजी, बहुचराजी और महाकाली माताजी पावागढ़, मीरादातार उनाव में, जैन तीर्थ पालीताणा, रणछोड़रायजी मंदिर डाकोर और शामलाजी आदि तीर्थ स्थल है ।
  • गुजरात में प्रसिद्ध धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन के स्थलों में पोलो, पतंगोत्सव और कांकरिया कार्निवल, तानारी-री महोत्सव, उत्तरार्ध नृत्य महोत्सव, रणोत्सव आदि का आयोजन होता है ।
41.

जैन और बौद्ध यात्रा स्थलों की जानकारी दीजिए ।

Answer»

गुजरात में जैन और बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ है । जिनके आधार पर गुजरात के वड़नगर, तारंगा, खमालीडा, जूनागढ़, शामलाजी, कोटेश्वर, तलाजा, टांक झगडीया आदि स्थानों पर बौद्ध एवं जैन गुफाएँ पायी जाती है ।

42.

न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है ।

Answer»

देश में संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच के विवादों को निबटाने के लिए संघीय शासन व्यवस्था में तटस्थ और निष्पक्ष न्यायपालिका की आवश्यकता होती है ।

  • संविधान की सर्वोपरिता पर कोई प्रभाव न पड़ें इसलिए किसी भी कानून की कलम या उसमें किए गये प्रावधान संविधान के साथ सुसंगत हैं या नहीं इसकी जाँच के लिए, संविधान का अर्थघटन करने के लिए न्यायपालिका महत्त्वपूर्ण अंग है ।
  • विधायिका तथा कार्यपालिका द्वारा संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन न हों, इसकी जाँच के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, तटस्थ तथा निर्भीक न्यायपालिका लोकतंत्र की आधारशिला है ।
43.

मंगोलाइड प्रजा की जानकारी दीजिए ।

Answer»

मंगोलाइड प्रजा पश्चिम चीन से होकर तिब्बत से भारत में आयी थी ।

  • भारत में उत्तर असम, सिक्किम, भूटान, पूर्व बंगाल में बसे थे । समय बीतने पर उनका भारतीयकरण हुआ ।
  • इन प्रजा का वर्ण पीला, चपटा चेहरा, उभरे गाल और बादामी आँखें इनके शारीरिक लक्षण है ।
  • मंगोलाइड प्रजा का पीला रंग होने से उन्हें किरात प्रजा कहते हैं ।
44.

आर्यों के धार्मिक प्रवृत्तियों की जानकारी दीजिए ।

Answer»

आर्य प्रकृति प्रेमी थे । वे वृक्षों, पर्वतों, सूर्य, वायु, नदी, वर्षा आदि की पूजा-आराधना करते थे ।

  • प्रत्येक प्राकृतिक देव की स्तुतियाँ (ऋचाओं) की रचना की थी ।
  • समय बीतते वेदपठन प्रचलित किया, समान्तर में उससे धार्मिक विधियाँ शुरू हुई और बाद में यज्ञादि क्रियाएँ भारत में शुरू हुई ।
45.

गुजरात के साँस्कृतिक-धार्मिक स्थलों की जानकारी दीजिए ।

Answer»

गुजरात में धार्मिक महत्त्व बतानेवाले स्थलों में द्वारका में द्वारकाधीश मंदिर और जगद्गुरु शंकराचार्य का शारदापीठ मुख्य है । सोमनाथ मंदिर (ज्योतिर्लिंग), अंबाजी (बनासकांठा), बहुचराजी (महेसाणा), महाकाली माताजी (पावागढ़), मीरा दातार (पाटण जिला), पालीताणा (भावनगर जिला), रणछोड़राय मंदिर (डाकोर) और शामलाजी (अरावली जिला) आदि मुख्य तीर्थ स्थल है ।

46.

सर्वोच्च न्यायालय संविधान तथा देश के नागरिकों के अधिकारों का रक्षक संरक्षक है ।

Answer»

सर्वोच्च न्यायालय नागरिक के मूलभूत अधिकारों के रक्षण के संदर्भ में कार्यपालिका के किसी भी कदम, कानून या आदेश, जो संविधान के साथ सुसंगत नहीं हैं उन्हें असंवैधानिक घोषित करने तथा ऐसे कानूनों या आदेशों को रद्द करने की सत्ता सर्वोच्च न्यायालय के पास है ।

  • यह सत्ता संवैधानिक अधिकारों के अन्तर्गत सर्वोच्च न्यायालय को दी गयी है । इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय संविधान तथा नागरिकों के अधिकारों का रक्षक तथा संरक्षक की भूमिका निभाता है ।
47.

न्यायिक समीक्षा क्या है? 

Answer»

न्यायिक समीक्षा का अर्थ
न्यायिक समीक्षा का अर्थ है-एक कानून या आदेश की समीक्षा और वैधता निर्धारित करने के लिए न्यायपालिका की शक्ति को प्रदर्शित करना। विधायी कार्यों की न्यायिक समीक्षा का अर्थ वह शक्ति है जो विधायिका द्वारा पारित कानून को संविधान में निहित प्रावधानों और विशेषकर संविधान के भाग-3 के अनुसार सुनिश्चित करती है। निर्णयों की न्यायिक समीक्षा के मामले में, उदाहरण के लिए जब एक कानून को इस आधार पर चुनौती दी गयी कि इसे बिना किसी प्राधिकरण या अधिकार से विधायिका द्वारा पारित किया गया है, विधायिका द्वारा पारित किया गया कानून वैध है। या नहीं, इसके बारे में फैसला लेने का अधिकार अदालत के पास सुरक्षित होता है। इसके अलावा हमारे देश में किसी भी विधायिका के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वे अदालतों द्वारा दिए गए निर्णय की अवज्ञा या उपेक्षा कर सकें।
अदालतों के पास न्यायिक समीक्षा की व्यापक शक्तियाँ हैं। इन शक्तियों का बड़ी सावधानी और नियन्त्रण के साथ प्रयोग किया जाता है। इन शक्तियों की निम्न सीमाएँ हैं-
⦁    इसके पास केवल निर्णय तक पहुँचने में प्रक्रिया का सही ढंग से पालन किया गया है या नहीं देखने की ही अनुमति होती है, लेकिन स्वयं निर्णय लेने की अनुमति नहीं होती है।
⦁    इसे केवल हमारे सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय जैसी अदालतों को सौंपा जाता है।
⦁    जब तक बिल्कुल जरूरी न हो तब तक नीतिगत मामलों और राजनीतिक सवालों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
⦁    एक बार कानून के पारित होने पर यह स्थिति बदलने के साथ असंवैधानिक हो सकता है। यह शायद कानून प्रणाली में खालीपन पैदा कर सकती है। इसलिए यह कहा जा सकता है। कि अदालत द्वारा दिए गए निर्देश तभी बाध्यकारी होंगे जब तक कानून अधिनियमित नहीं हो जाते हैं अर्थात् यह प्राकृतिक रूप से अस्थायी है।
⦁    यह कानून की व्याख्या और उसे अमान्य कर सकता है, लेकिन खुद कानून नहीं बना सकता है।

48.

कार्यपालिका के विभिन्न प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Answer»

कार्यपालिका के विभिन्न प्रकार कार्यपालिका के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. नाममात्र की कार्यपालिका – वह व्यक्ति जो सैद्धान्तिक रूप से शासन का प्रधान है तथा जिसके नाम से शासन के समस्त कार्य किए जाते हैं एवं स्वयं किसी भी अधिकार का प्रयोग नहीं करता, नाममात्र का कार्यपालक प्रधान होता है और इस प्रकार की कार्यपालिका नाममात्र की कार्यपालिका होती है। उदाहरणार्थ इंग्लैण्ड का सम्राट तथा भारत का राष्ट्रपति नाममात्र की कार्यपालिका हैं। नाममात्र की कार्यपालिका के अधिकारों के प्रयोग मन्त्रिपरिषद् करती है तथा वास्तविक कार्यकारिणी की शक्तियाँ मन्त्रिपरिषद् में निहित होती है।
2. वास्तविक कार्यपालिका – वास्तविक कार्यपालिका उसे कहते हैं, जो वास्तव में कार्यकारिणी की शक्तियों का प्रयोग करती है। इंग्लैण्ड, फ्रांस तथा भारत की मन्त्रिपरिषद् वास्तविक कार्यपालिका का उदाहरण हैं।
3. एकल कार्यपालिका – एकल कार्यपालिका उसे कहते हैं, जिसमें कार्यपालिका की सम्पूर्ण शक्तियाँ एक व्यक्ति के अधिकार में होती हैं। अमेरिका का राष्ट्रपति एकल कार्यपालिका का ही उदाहरण है।
4. बहुल कार्यपालिका – इस प्रकार की कार्यपालिका में कार्यकारिणी शक्ति किसी एक व्यक्ति में निहित न होकर अनेक अधिकारियों के समूह में निहित होती है। इस प्रकार की कार्यपालिका स्विट्जरलैण्ड में है। वहाँ कार्यपालिका-सत्ता सात सदस्यों की एक परिषद् में निहित होती है।

49.

कार्यपालिका और न्यायपालिका में सम्बन्ध बताइए।

Answer»

लोकतन्त्र की सफलता के लिए कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक-दूसरे से पृथक् रहना आवश्यक माना जाता है, परन्तु व्यवहार में इनका पारस्परिक सम्बन्ध घनिष्ठ होता है। क्योंकि न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार कार्यपालिका में निहित होता है। इन दोनों का सम्बन्ध निम्नलिखित रूपों में स्पष्ट किया जा सकता है-

⦁    न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका के प्रधान द्वारा ही की जाती है।
⦁    कार्यपालिका व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित कानूनों को लागू करती है और न्यायपालिका कानूनों का उल्लंघन करने वालों को दण्डित करती है तथा शक्ति का अतिक्रमण करने से कार्यपालिका को रोकती है।
⦁    न्यायपालिका के दण्डात्मक निर्णयों का कार्यान्वयन कार्यपालिका ही करती है।
⦁    न्यायपालिका कार्यपालिका के भ्रष्ट कर्मचारियों को भी दण्डित करने का अधिकार रखती है। तथा कर्तव्यविमुख होने की अवस्था में किसी भी विभाग के विभागाध्यक्ष से आख्या माँग सकती है तथा तत्सम्बन्धित आदेश दे सकती है।
⦁    न्यायपालिका के निर्णयों की आलोचना करने का अधिकार कार्यपालिका को नहीं है।

50.

द्वि-सदनात्मकवाद (द्वि-सदन-पद्धति) का अर्थ बताइए। 

Answer»

द्वि-सदनात्मक प्रणाली ऐतिहासिक विकास तथा संयोग का परिणाम है। यह व्यवस्था ब्रिटिश संवैधानिक विकास की देन है। इंग्लैण्ड की संसद जो विश्व की सबसे प्राचीन संसद है, संयोग से द्वि-सदनात्मक हो गई है। अन्य प्रजातान्त्रिक देशों में भी ब्रिटिश परम्परा का अनुसरण किया गया। पोलस्की के शब्दों में, “यह केवल ऐतिहासिक संयोग की बात है। कि इंग्लैण्ड की व्यवस्थापिका द्वि-सदनात्मक थी और उसी का अनुसरण अन्य देशों में भी किया गया। विलोबी ने कहा है-“यदि ब्रिटिश संसद द्वि-सदनात्मक न होती तो शायद संसार के विधानमण्डल भी द्वि-सदनात्मक नहीं होते।” आज सभी बड़े प्रजातान्त्रिक राज्यों में व्यवस्थापिका के दो सदन होते हैं। एक सदन को उच्च सदन या द्वितीय सदन और दूसरे सदन को निम्न या प्रथम सदन कहते हैं।