This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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बहुल कार्यपालिका का एक लक्षण बताइए। |
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Answer» इस व्यवस्था में कार्यकारिणी सम्बन्धी शक्तियाँ एक व्यक्ति के हाथों में निहित न होकर अनेक व्यक्तियों की एक परिषद् अथवा अनेक अधिकारियों के समूह में निहित होती हैं। |
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शक्ति-पृथक्करण के सिद्धान्त का प्रतिपादक कौन था? |
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Answer» मॉण्टेस्क्यू शक्ति-पृथक्करण सिद्धान्त का प्रतिपादक व समर्थक है। |
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‘न्यायिक सक्रियतावाद’ से क्या आशय है?या‘न्यायिक सक्रियतावाद’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» न्यायिक सक्रियतावाद का आशय है- “संविधान, कानून और अपने दायित्वों के प्रसंग में कानूनी व्याख्या से आगे बढ़कर सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक न्याय की आवश्यकता को दृष्टि में रखते हुए संविधान और कानून की रचनात्मक व्याख्या करते हुए न्यायपालिका का जनसाधारण के हितों की रक्षा के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना।” न्यायिक सक्रियतावाद के विविध रूप और मान्यताएँ इस प्रकार हैं- न्यायिक सक्रियतावाद के आधार पर न्यायपालिका ने सम्बद्ध देशों की समस्त राजव्यवस्था में बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण स्थिति प्राप्त कर ली है। |
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सरकार के शक्ति-विभाजन की उपयोगिता बताइए। |
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Answer» इसमें नागरिक निरंकुश नहीं हो पाता तथा शासन में सुगमता व कार्यकुशलता की वृद्धि होती है। |
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व्यवस्थापिका का महत्त्व लिखिए। |
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Answer» व्यवस्थापिका का महत्त्व |
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न्यायपालिका के दो कार्यों का उल्लेख कीजिए तथा स्वतन्त्र न्यायपालिका के पक्ष में दो तर्क प्रस्तुत कीजिए।यालोकतन्त्रात्मक शासन में स्वतन्त्र न्यायपालिका की आवश्यकता एवं महत्ता पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» किसी लोकतन्त्रात्मक शासन में एक स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका सर्वथा अनिवार्य है। इसे आधुनिक और प्रगतिशील संविधानों एवं शासन-व्यवस्था का प्रमुख लक्षण माना जाता है। न्यायपालिका की स्वतन्त्रता के महत्त्व को निम्नलिखित रूपों में प्रकट किया जा सकता है। 1. लोकतन्त्र की रक्षा हेतु – लोकतन्त्र के अनिवार्य तत्त्व स्वतन्त्रता और समानता हैं। नागरिकों की स्वतन्त्रता और कानून की दृष्टि से व्यक्तियों की समानता—इन दो उद्देश्यों की प्राप्ति स्वतन्त्र न्यायपालिका द्वारा ही सम्भव है। इस दृष्टि से स्वतन्त्र न्यायपालिका को ‘लोकतन्त्र का प्राण’ कहा जाता है। न्यायपालिका के दो कार्य न्यायपालिका के दो कार्य निम्नलिखित हैं- |
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व्यवस्थापिका के चार कार्य बताइए। या व्यवस्थापिका के दो कार्य बताइए। |
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Answer» ⦁ कानूनों का निर्माण करना, |
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एक सदनात्मक व्यवस्थापिका के दो लाभ स्पष्ट कीजिए।याएक-सदनात्मक व्यवस्थापिका के दो गुण बताइए।या“एक-सदनात्मक व्यवस्थापिका में जहाँ धन व समय की बचत होती है वहीं कार्य में गतिरोध भी कम आता है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» एक-सदनात्मक व्यवस्थापिका वाले देशों में व्यवस्थापन-कार्य में धन और समय की पर्याप्त बचत हो जाती है, क्योंकि एक ही सदन होने से विधेयक को दूसरे सदन में भेजने की आवश्यकता नहीं रह जाती। इससे दूसरे सदन में होने वाली समय और धन की बर्बादी को रोका जा सकता है। लॉर्ड ब्राइस के शब्दों में, “यदि द्वितीय सदन प्रथम सदन का विरोध करता है तो अहितकर है और यदि वह उसके साथ सहयोग करता है तो अनावश्यक है। |
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द्वि-सदनात्मक व्यवस्थापिका के पक्ष में दो तर्क दीजिए। |
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Answer» ⦁ द्वि-सदनात्मक व्यवस्थापिका में द्वितीय सदन प्रथम सदन की निरंकुशता पर रोक लगाता है। |
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भारत में राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है? |
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Answer» भारत में राष्ट्रपति का चुनाव जनता द्वारा अप्रत्यक्ष तरीके से किया जाता है। एक निर्वाचन मण्डल के सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। |
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स्वतन्त्र न्यायपालिका के दो गुणों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ निष्पक्ष न्याय की प्राप्ति तथा |
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एक-सदनीय व्यवस्थापिका के दो दोष बताइए। |
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Answer» ⦁ सदन के निरंकुश होने की आशंका तथा |
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द्वि-सदनात्मक विधानमण्डल (व्यवस्थापिका) की दो मुख्य विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ इस व्यवस्था में दोनों सदन एक-दूसरे पर नियन्त्रण रखते हैं। |
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द्वि-सदनीय व्यवस्थापिका के दो दोष लिखिए। |
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Answer» ⦁ दोनों सदनों के बीच प्रायः टकराव की सम्भावना बनी रहती है। |
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द्वि-सदनीय व्यवस्थापिका के दो लाभ बताइए। |
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Answer» ⦁ प्रथम सदन की निरंकुशता पर नियन्त्रण तथा |
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अध्यक्षात्मक शासन में राष्ट्रपति विधि-निर्माण को कैसे प्रभावित कर सकता है? |
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Answer» अध्यक्षात्मक शासन में राष्ट्रपति व्यवस्थापिका को सन्देश भेजकर और ‘विलम्ब निषेधाधिकार का प्रयोग करके सीमित रूप से विधि-निर्माण को प्रभावित कर सकता है। |
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न्यायपालिका के दो कार्य बताइए। |
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Answer» न्यायपालिका के दो कार्य हैं- ⦁ कानूनों की व्याख्या करना तथा निर्णय देना एवं |
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एक-सदनीय व्यवस्थापिका के दो गुण बताइए। |
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Answer» ⦁ प्रबल उत्तरदायित्व की भावना तथा |
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न्यायपालिका के कार्यों का वर्णन कीजिए। याआधुनिक काल में न्यायपालिका के कार्यों में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि हो गई है।” इस कथन के आलोक में न्यायपालिका के कार्यों का वर्णन कीजिए। याआधुनिक राजनीतिक व्यवस्था में न्यायपालिका के कार्यों की समीक्षा कीजिए।यान्यायपालिका की स्वतन्त्रता क्यों आवश्यक है? इसकी स्वतन्त्रता बनाए रखने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए? याआधुनिक लोकतन्त्र में स्वतन्त्र न्यायपालिका का क्या महत्त्व है? न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाये जाने चाहिए? याआधुनिक राज्य में न्यायपालिका के कार्यों एवं उसकी बढ़ती हुई महत्ता की व्याख्या कीजिए। न्यायपालिका की स्वतन्त्रता को बनाए रखने हेतु क्या व्यवस्था की जानी चाहिए? याआधुनिक लोकतान्त्रिक राज्यों में न्यायपालिका के कार्यों तथा स्वतन्त्र न्यायपालिका के महत्त्व का वर्णन कीजिए। |
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Answer» न्यायपालिका के कार्य न्यायपालिका का महत्त्व न्यायपालिका की स्वतन्त्रता बनाये रखने हेतु उपाय |
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कार्यपालिका का एक न्यायिक कार्य बताइए। |
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Answer» प्रशासनिक विभाग द्वारा अर्थदण्ड देना, कार्यपालिका का एक न्यायिक कार्य है। |
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न्यायाधीशों की स्वतन्त्रता बनाये रखने के दो उपाय बताइए। |
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Answer» ⦁ योग्य व प्रतिभावान न्यायाधीशों की नियुक्तियाँ तथा |
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एक आदर्श न्यायाधीश के दो प्रमुख गुण लिखिए। |
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Answer» ⦁ निष्पक्षता तथा |
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किस देश में उच्च सदन के सदस्य सरकार द्वारा मनोनीत किये जाते हैं ?(क) इंग्लैण्ड में(ख) भारत में(ग) अमेरिका में(घ) कनाडा में |
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Answer» सही विकल्प है (घ) कनाडा में |
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किस देश में उच्च सदन का गठन वंश-परम्परा के आधार पर होता है ?(क) इटली में(ख) जापान में(ग) इंग्लैण्ड में(घ) कनाडा में |
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Answer» सही विकल्प है (ग) इंग्लैण्ड में |
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लोकतन्त्र में न्यायपालिका की स्वतन्त्रता का संक्षेप में वर्णन कीजिए।यान्यायपालिका की स्वतन्त्रता को सुनिश्चित करने के दो उपायों का उल्लेख कीजिए। यान्यायपालिका की स्वतन्त्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के दो उपाय लिखिए। |
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Answer» न्यायपालिका की स्वतन्त्रता न्यायपालिका की स्वतन्त्रता सुनिश्चित करने के दो उपाय निम्नलिखित हैं- |
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अध्यक्षात्मक कार्यपालिका है-(क) इंग्लैण्ड में(ख) चीन में(ग) जापान में(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका में |
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Answer» सही विकल्प है (घ) संयुक्त राज्य अमेरिका में |
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नाममात्र की कार्यपालिका है-(क) संयुक्त राज्य अमेरिका में(ख) फ्रांस में(ग) पाकिस्तान में(घ) इंग्लैण्ड में |
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Answer» सही विकल्प है (घ) इंग्लैण्ड में |
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किस प्रकार की शासन प्रणाली में नाममात्र की और वास्तविक कार्यपालिका होती है ? |
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Answer» संसदात्मक शासन प्रणाली में। |
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नाममात्र की कार्यपालिका का एक उदाहरण दीजिए। |
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Answer» भारत का राष्ट्रपति व ब्रिटेन की सम्राज्ञी नाममात्र की कार्यपालिका के उदाहरण हैं। |
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कार्यपालिका के चार कार्यों का वर्णन कीजिए। याआधुनिक राज्यों में कार्यपालिका के किन्हीं चार कार्यों का समुचित उदाहरण सहित उल्लेख कीजिए। |
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Answer» कार्यपालिका के कार्य कार्यपालिका के चार कार्य निम्नवत् हैं- 1. आन्तरिक शासन सम्बन्धी कार्य – प्रत्येक राज्य, राजनीतिक रूप में संगठित समाज है। और इस संगठित समाज की सर्वप्रथम आवश्यकता शान्ति और व्यवस्था बनाये रखना होता है। तथा यह कार्य कार्यपालिका के द्वारा ही किया जाता है। इसके अतिरिक्त व्यापार और यातायात, शिक्षा और स्वास्थ्य से सम्बन्धित सुविधाओं की व्यवस्था और कृषि पर नियन्त्रण, आदि कार्य भी कार्यपालिका द्वारा ही किये जाते हैं। |
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कार्यपालिका के दो प्रमुख कार्य बताइए। |
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Answer» ⦁ कार्यपालिका व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित कानूनों को कार्यान्वित करती है तथा |
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न्यायाधीशों की नियुक्ति की विधियाँ लिखिए। |
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Answer» ⦁ जनता द्वारा निर्वाचन, |
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सर्वप्रथम किस देश में न्यायाधीशों का निर्वाचन जनसाधारण द्वारा किया गया?(क) इंग्लैण्ड में(ख) जर्मनी में(ग) भारत में(घ) फ्रांस में |
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Answer» सही विकल्प है (घ) फ्रांस में |
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न्यायपालिका की स्वतन्त्रता महत्त्वपूर्ण है-(क) लोकतन्त्र की रक्षा हेतु(ख) देश की शान्ति हेतु(ग) देश की बाहरी सुरक्षा हेतु(घ) देश की प्रगति हेतु |
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Answer» सही विकल्प है (क) लोकतन्त्र की रक्षा हेतु |
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भारत की केन्द्रीय व्यवस्थापिका का नाम क्या है? |
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Answer» भारत की केन्द्रीय व्यवस्थापिका का नाम ‘संसद है। |
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कार्यपालिका के निर्माण (नियुक्ति) की प्रमुख विधियों को लिखिए। |
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Answer» आधुनिक समय में कार्यपालिका की नियुक्ति विभिन्न देशों में अलग-अलग पद्धतियों से की जाती है। इस विषय में निम्नलिखित पद्धतियाँ प्रमुख हैं- 1. वंशानुगत पद्धति – इस पद्धति का सम्बन्ध राजतन्त्रीय शासन से है। इसमें पद की अवधि आजीवन होती है और उत्तराधिकार ज्येष्ठाधिकार कानून द्वारा शासित होता है। प्राचीन व मध्य युग में कार्यपालिका के निर्माण की यह सर्वाधिक प्रचलित पद्धति रही है। यद्यपि वर्तमान समय में यह पद्धति लोकप्रिय नहीं है, किन्तु ब्रिटेन, स्वीडन, डेनमार्क, जापान आदि देशों में नाममात्र की कार्यपालिका की नियुक्ति वंशानुगत पद्धति के आधार पर की जाती है। |
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नाममात्र की और वास्तविक कार्यपालिका में अन्तर किस सरकार का लक्षण है?(क) संसदात्मक(ख) अध्यक्षात्मक(ग) राजतन्त्र(घ) संघात्मक |
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Answer» सही विकल्प है (क) संसदात्मक |
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निम्नलिखित में से कौन-सा सरकार का आवश्यक अंग है?(क) राजनीतिक दल(ख) न्यायपालिका(ग) जनमत(घ) निर्वाचन आयोग |
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Answer» सही विकल्प है (ख) न्यायपालिका |
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व्यवस्थापिका द्वारा कार्यपालिका को नियन्त्रित करने का एक साधन लिखिए। |
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Answer» काम रोको प्रस्ताव रखकर। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा सरकार का अंग नहीं है? (क) कार्यपालिका(ख) व्यवस्थापिका(ग) लोकमत(घ) न्यायपालिका |
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Answer» सही विकल्प है (ग) लोकमत |
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व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर किस प्रकार नियन्त्रण रखती है? विवेचना कीजिए।यासंसदीय व्यवस्था में कार्यपालिका तथा व्यवस्थापिका के मध्य उचित सम्बन्धों की विवेचना कीजिए। यासंसदीय शासन-प्रणाली में व्यवस्थापिका किस प्रकार कार्यपालिका को नियन्त्रित करती है? |
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Answer» सरकार के तीनों अंगों में व्यवस्थापिका का स्थान महत्त्वपूर्ण समझा जाता है, क्योंकि व्यवस्थापिका द्वारा निर्मित कानूनों के आधार पर ही कार्यपालिका शासन करती है तथा न्यायपालिका न्याय प्रदान करती है। इस प्रकार व्यवस्थापिका शासन का मूलाधार है। इसके अतिरिक्त व्यवस्थापिका जनता द्वारा निर्वाचित संस्था है, यह जन-आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। इस कारण भी लोकतन्त्र में इसका बहुत अधिक महत्त्व होना नितान्त स्वाभाविक है। ⦁ कार्यपालिका की विधायी शक्तियाँ और उसका व्यवस्थापिका पर नियन्त्रण। 1. कार्यपालिका की विधायी शक्तियाँ और उसका व्यवस्थापिका पर नियन्त्रण- कार्यपालिका कई प्रकार से विधायी अर्थात् कानून- निर्माण सम्बन्धी कार्यों में भाग लेती है। संसदीय शासन-प्रणाली वाले देशों में कार्यपालिका को व्यवस्थापिका का अधिवेशन बुलाने, उसको स्थगित करने तथा समाप्त करने का अधिकार होता है। वह निम्न सदन को भंग करके नये चुनाव के लिए आदेश दे सकती है, परन्तु अध्यक्षात्मक शासन-प्रणाली वाले देशों में कार्यपालिका व्यवस्थापिका को समय-समय पर देश की कानून सम्बन्धी आवश्यकताओं से अवगत कराती रहती है और उसका उचित नेतृत्व और पथ-प्रदर्शन करती है। कार्यपालिका समस्त विधेयकों का प्रारूप (Draft) तैयार करती है और व्यवस्थापिका में उन्हें प्रस्तुत करती है तथा विपक्ष की आलोचनाओं को सहन करती हुई पारित कराती है। अध्यक्षात्मक प्रणाली में कार्यपालिका अप्रत्यक्ष रूप से विधायी कार्य को प्रभावित करती है। दूसरे शब्दों में, इस प्रणाली में राष्ट्रपति को केवल सन्देशों के माध्यम से ही व्यवस्थापिका का ध्यान आलोचनाओं की ओर आकर्षित करने का अधिकार होता है। अमेरिका के राष्ट्रपति को व्यवस्थापिका (काँग्रेस) को सन्देश भेजने का अधिकार है। 2. व्यवस्थापिका की प्रशासनिक शक्तियाँ और उसका व्यवस्थापिका पर नियन्त्रण – दूसरी ओर कार्यपालिका भी कई प्रकार से व्यवस्थापिका द्वारा नियन्त्रित होती है। संसदीय प्रणाली में यह नियन्त्रण अध्यक्षात्मक प्रणाली की अपेक्षा अधिक होता है। संसदीय प्रणाली में कार्यपालिका का जीवन व्यवस्थापिका की इच्छा पर निर्भर होता है। दूसरे शब्दों में, कार्यपालिका उस समय तक अपने पद पर बनी रहती है जब तक कि उसे व्यवस्थापिका का विश्वास प्राप्त है। व्यवस्थापिका अविश्वास प्रस्ताव पारित करके, कार्यपालिका के शासन सम्बन्धी आचरण की निन्दा का प्रस्ताव स्वीकृत करके, अनुदान स्वीकार करके अथवा सरकार द्वारा प्रस्तुत किसी प्रस्ताव को अस्वीकृत करके मन्त्रिमण्डल को अपने पद से हटा सकती है। अध्यक्षात्मक शासन-प्रणाली में इस प्रकार के नियन्त्रण उपलब्ध नहीं होते हैं। इसमें कार्यपालिका को नियन्त्रित करने के दूसरे साधन हैं। अमेरिका में लोक सदन (House of Representatives) राष्ट्रपति को महाभियोग द्वारा पद से हटा सकता है। इसी प्रकार सीनेट को कार्यपालिका द्वारा की गयी उच्च नियुक्तियों को स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार है तथा राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक सन्धि के लिए उसकी अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होता है। |
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व्यवस्थापिका के दो कार्यों का उल्लेख कीजिए तथा किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए जिनसे व्यवस्थापिका कार्यपालिका पर नियन्त्रण स्थापित करती है। याव्यवस्थापिका द्वारा कार्यपालिका पर नियन्त्रण के दो साधन बताइए। याकार्यपालिका पर नियन्त्रण रखने के लिए विधायिका कौन-से साधन अपनाती है? ऐसे किन्हीं चार साधनों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सरकार के तीनों अंगों द्वारा महत्त्वपूर्ण कार्य किये जाते हैं, लेकिन इन तीनों में व्यवस्थापक विभाग सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। सामान्यतया व्यवस्थापिका निम्नलिखित साधनों से कार्यपालिका पर नियन्त्रण करती है। ⦁ आर्थिक नियन्त्रण – वर्तमान समय में व्यवस्थापिका कानून-निर्माण के साथ-साथ राष्ट्रीय वित्त पर नियन्त्रण करने का कार्य भी करती है। व्यवस्थापिका की स्वीकृति के बिना, कार्यपालिका आय-व्यय से सम्बन्धित कोई कार्य नहीं कर सकती। व्यवस्थापिका के दो कार्य |
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सरकार के अंगों की संख्या कितनी है?(क) एक(ख) दो(ग) तीन(घ) चार |
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Answer» सही विकल्प है (ग) तीन |
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किन देशों में व्यवस्थापिका के दोनों सदनों द्वारा कार्यपालिका के अध्यक्ष या समिति का चुनाव होता है? |
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Answer» स्विट्जरलैण्ड, यूगोस्लाविया और तुर्की। |
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व्यवस्थापिका का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य है-(क) कानून बनवाना(ख) कार्यपालिका पर नियन्त्रण(ग) संविधान संशोधन(घ) बजट पास करना |
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Answer» सही विकल्प है (क) कानून बनवाना |
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प्रत्येक साझेदार को लाभ मिलना ही चाहिए । |
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Answer» साझेदारी पेढ़ी धन्धाकीय प्रवृत्ति करती है । साझेदारी का उद्देश्य कानूनी रूप से चलनेवाले धन्धे का लाभ बाँटना है । लाभ का वितरण करार में निश्चित किये गये अनुसार किया जाता है । अगर करार में निश्चित न किया गया हो तो लाभ सभी साझेदार के बीच समान हिस्से में बाँट लिया जाता है । प्रत्येक साझेदार को लाभ मिलना चाहिए । |
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इनमें से कौन-सा साझेदार संस्था में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेता ?(A) अवयस्क साझेदार(B) सक्रिय साझेदार(C) नाम मात्र का साझेदार(D) निष्क्रिय साझेदार |
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Answer» सही विकल्प है (D) निष्क्रिय साझेदार |
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कार्यपालिका का कार्य है- (क) कानून बनाना(ख) विधानसभा के अध्यक्ष का चुनाव करना(ग) बजट पारित करना(घ) प्रशासन चलाना या विधि को लागू करना |
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Answer» (घ) प्रशासन चलाना या विधि को लागू करना |
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पूँजी प्रकार के खर्च कहाँ दर्शाये जाते है ?(अ) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति पक्ष में(ब) आर्थिक चिट्ठा में जिम्मेदारी पक्ष में(क) उपज-खर्च खाते के उधार पक्ष में(ड) आवक-जावक खाते के उधार पक्ष में |
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Answer» सही विकल्प है (अ) आर्थिक चिट्ठा के संपत्ति पक्ष में |
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आवक-जावक खाता यह ………………………… खाता जैसा है, जबकि उपज-खर्च खाता यह, ……………………………. खाता जैसा है ।(अ) लाभ-हानि, रोकड़(ब) आर्थिक चिट्ठा, लाभ-हानि(क) लाभ-हानि, आर्थिक चिट्ठा(ड) रोकड़, लाभ-हानि |
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Answer» सही विकल्प है (ड) रोकड़, लाभ-हानि |
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