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Answer» व्यवस्थापिका का महत्त्व सरकार के सभी अंगों में व्यवस्थापिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। गार्नर के अनुसार-“राज्य की इच्छा जिन अंगों द्वारा व्यक्त होती है, उनमें व्यवस्थापिका का स्थान नि:सन्देह सर्वोच्च है।” गिलक्रिस्ट का कथन है—“व्यवस्थापिका शक्ति का अधिक भाग है।” वास्तव में व्यवस्थापिका यदि अपने कार्यों को सम्पादित न करे, तो कार्यपालिका और न्यायपालिका भी अपना दायित्व पूरा नहीं कर सकती हैं। व्यवस्थापिका केवल कानूनों का निर्माण ही नहीं करती है, वरन् प्रशासन से सम्बन्धित नीतियों का निर्धारण भी करती है तथा कार्यपालिका की शक्ति पर भी नियन्त्रण स्थापित करती है। संसदात्मक शासन प्रणाली में व्यवस्थापिका के कार्यों में अधिक वृद्धि हो जाती है।
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