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Answer» आर्य संस्कृति: - भारत में आर्य सभ्यता के निर्माता आर्य (जोर्डिक) थे ।
- प्राचीन भारत के हिन्दू आर्य कहलाते थे । वे जिन प्रदेशों में रहते थे उसे ‘आर्यवर्त’ नाम दिया गया था ।
- प्राचीन समय में आर्य जनसंख्या वायव्य भारत में थी, वहाँ सात नदियाँ बहती थी, इसलिए उसे ‘सप्तसिंधु’ नाम दिया गया ।
- उत्तर वैदिककाल में आर्यावर्त के पूर्व में मिथिला (बिहार) तक और दक्षिण में विंध्याचल तक फैले थे ।
- अन्य समकालीन प्रजाओं में आर्य सबसे विकसीत प्रजा थी ।
- आर्य भरत राजा और भरत जाति के नाम से यह विशाल प्रदेश भरतभूमि, भारत उपमाद्वीप, भारत वर्ष जैसे नाम से पहचाना
जाने लगा । - आर्य प्रकृति प्रेमी थे । वे वृक्षों, पर्वतों, सूर्य, वायु, नदियों, वर्षा आदि की पूजा-अराधना करते थे । जिन्होंने स्तुतियों (ऋचाओं) की रचना की थी।
- आर्यों ने वेदपठन प्रचलित किया, धार्मिक विधियों, यज्ञादियों को शुरू किया ।
- भारत में आयी विविध प्रजाओं के साथ आर्यों ने मिश्रित – समन्वयी संस्कृति का निर्माण किया था ।
द्रविड़ संस्कृति: - द्रविड़ भारत के मूल नागरिक थे । उन्हें मोहें-जो-दड़ो की सिंधु संस्कृति के सर्जक और पाषाण संस्कृति के निर्माता माना जाता है ।
- द्रविड़ माता के रूप में देवी (पार्वती) और पितृरुप में परमात्मा (शिव) की आराधना करते थे ।
- धूप, दीप और आरती से पूजा की परंपरा द्रविड़ प्रजा ने शुरू की थी ।
- द्रविड़ों के मूलदेवता आर्यों ने स्वीकार की थी, समय बीतने पर उत्तर के प्रचंड प्रभाव के अधीन द्रविड़ों में आर्य संस्कृति गहराई तक व्याप्त हो गयी । अंतरजातीय विवाह भी प्रसारित किये ।
- द्रविड़ों में मातृ परिवार प्रथा प्रचलित थी । वे अवकाशीय ग्रहों के क्षेत्र में और विविध कलाओं जैसे कताई-बुनाई, रंगना, नाव निर्माण जैसे क्षेत्रों में उनका योगदान महत्त्वपूर्ण हैं ।
- आज दक्षिण भारत में द्रविड़ कुल की तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसे भाषाएँ बोलनेवाले लोग बसते है ।
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