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भारतीय प्राकृतिक विरासत के चार तत्त्वों का वर्णन कीजिए । |
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Answer» (1) भूमिदृश्य: भूमि आकारों द्वारा अनेक भूमि दृश्य सर्जित होते हैं, जैसे हिमालय । हिमालय में अनेक प्रकार की उपयोगी वनस्पति, खनिज, पशु-पक्षी और शिखर बरफ से ढ़के होते है । बारहो महीने बहनेवाली नदियाँ तथा वन उपयोगी होते । हिमालय पर अमरनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ, जैसे धार्मिक स्थल, नंदादेवी जैसे शिखर हिमालय पर स्थित है । (2) नदियाँ: प्राचीन काल से नदियाँ प्राकृतिक परिवहन की सुविधा देती थी । भारत की संस्कृति सिंधु और राबी नदी के किनारे पर विकसित हुई है । सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, यमुना, कृष्णा, कावेरी जैसी लगभग अनेक नदियों ने लोकजीवन पर प्रभाव डाला है । पीने का पानी, सिंचाई, बीजली, खेती, जलमार्ग जैसी हमारी महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ पूरी करती है । मिट्टी के बर्तन, घर बनाने में तथा मानव जीवन को समृद्ध बनाने में नदियों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है । (3) वनस्पति: भारत की प्रजा आदिकाल से पर्यावरण प्रेमी रही है, जिसका साक्षी उसका वृक्ष प्रेम है । मानव, प्राणी, पशु-पक्षी (4) वन्य जीवन: प्राचीन काल से ही भारत प्राणी प्रेमवाली संस्कृतिवाला देश है । वाघ, सिंह, गेंडा, हाथी, चिता, शियाल, हिरण, रीछ, रोज, साबर, खरगोश, अजगर, साँप, नाग, नेवला जैसे जीव भारत में पाये जाते है । विश्व में एशियाई सिंह मात्र गिर के जंगलों में पाया जाता है । हमारी धार्मिक मान्यताएँ कुछ वन्यजीवों मोर, बाघ, मगर, गरूड़ आदि को देवी-देवताओं के वाहन के रूप में स्थान दिया है । हमारी राष्ट्रीय मुद्रा में भी चार सिंह, घोड़ा तथा बैल की आकृति देकर उनका मूल्य दर्शाया है । |
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