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भारत की साँस्कृतिक विरासत की जानकारी दीजिए ।

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भारत ने जगत को विविधतापूर्ण और समृद्ध विरासत दी है ।

  • साँस्कृतिक विरासत अर्थात् मानवसर्जित विरासत ।
  • मानव ने अपनी योग्यता, बुद्धिचातुर्य, कला-कौशल्य द्वारा प्राप्त करके, साँस्कृतिक विरासत का सर्जन किया है ।
  • आर्यों से लेकर शक, क्षत्रप, कुषाण, हुण, इरानी, तुर्क, अरब, मुगल, पारसी, अंग्रेज, फ्रेन्च आदि विविध जाति, प्रजाति भारत में आयी । इन सभी के बीच आदान-प्रदान से भारतीय संस्कृति समृद्ध बनी है ।
  • प्रागेतिहासिक समय से भारत ने विश्व की प्रजाओं को साँस्कृतिक विरासतों की अपार भेट दी है । उदाहरण : शिल्पकला 5000 जितनी पुरानी है ।
  • देवी-देवताओं की प्रतिमाओं, मानवशिल्पों, पशुओं तथा खिलौनों तथा दाढ़ीवाले पुरुष, शिल्प और नर्तकी की मूर्ति देखकर हम अपनी विरासत के प्रति स्वाभिमान अनुभव करते है ।
  • मौर्य युग की उल्टे कमल की आकृति पर सिंह और वृषभ की शिल्प-बुद्ध की प्रजा परंपिता की शिल्प, सारनाथ की धर्मचक्र प्रवर्तनवाली महात्मा गौतम बुद्धवाली प्रतीमा, जैन तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, राष्ट्रकूट राजाओं की इलोरा की गुफाएँ आदि हमारी साँस्कृतिक विरासत के प्रतीक है ।
  • हमारी साँस्कृतिक विरासत में मंदिरों, शिलालेखों, स्तूपों, विहारों, चैत्यों, मकबरा, मस्जिद, किलों, गुंबजों, राजमहलों, दरवाजों, ईमारतों, उत्खनन के स्थलों का समावेश होता है ।
  • गणितशास्त्र, खगोलशास्त्र, साहित्य, धर्म, युद्धशास्त्र, राज्यशास्त्र, प्राणीशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, वास्तुशास्त्र, न्यायतंत्र, विधिविधान, गणतंत्र आदि विषयों की विरासतीय देन हमें संस्कृति ने दी है ।
  • ब्रह्मदेश में इन प्रजाओं के लक्षण पाये जाते है ।
  • भारत की संस्कृति और सभ्यता के विकास में इस प्रजा का विशेष योगदान पाया जाता है ।
  • वे मिट्टी के बर्तन बनाने, कृषि करने, सुत्ती कपड़े बनाने जैसे कौशल्यों के जानकार थे । वे अपनी धार्मिक मान्यताएँ रखते थे ।


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