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‘गुजरात की साँस्कृतिक विरासत’ – विस्तार से समझाइए ।

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साँस्कृतिक, पौराणिक और पुरातत्त्वीय महत्त्व के स्थलों में लोथल, रंगपुर, धोलावीरा, रोजड़ी और श्रीनाथगढ़ आदि महत्त्वपूर्ण है ।

  • वड़नगर का कीर्ति तोरण, जूनागढ़ में सम्राट अशोक के शिलालेख, मोढ़ेरा का सूर्यमंदिर, चांपानेर का दरवाजा, सिद्धपुर का रुद्रमहल, विरमगाँव का मुनसर तालाब, अहमदाबाद की जामा मस्जिद, झूलता मीनार, सीद्दी सैयद की जाली, हटेसिंह का दहेरा, जूनागढ़ का मोहब्बतखाँ का मकबरा, नवसारी का पारसी अगियारी आदि ऐतिहासिक महत्त्व के देखनेलायक स्थान है ।
  • धार्मिक महत्त्व के स्थानों में द्वारका का द्वारकाधीश मंदिर और जगद्गुरु शंकराचार्य की शारदापीठ, 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ मंदिर, उत्तर गुजरात में अंबाजी, बहुचराजी और महाकाली माताजी पावागढ़, मीरादातार उनाव में, जैन तीर्थ पालीताणा, रणछोड़रायजी मंदिर डाकोर और शामलाजी आदि तीर्थ स्थल है ।
  • गुजरात में प्रसिद्ध धार्मिक, सामाजिक और पर्यटन के स्थलों में पोलो, पतंगोत्सव और कांकरिया कार्निवल, तानारी-री महोत्सव, उत्तरार्ध नृत्य महोत्सव, रणोत्सव आदि का आयोजन होता है ।


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