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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

32451.

मध्यिका का अर्थ व गुण बताइए।

Answer»

मध्यिका का अर्थ-मध्यिका आरोही अथवा अवरोही क्रम में अनुविन्यसित समंकमाला के विभिन्न पदों के मध्य का मूल्य होती है और वह समंकमाला को दो भागों में इस प्रकार बाँटती है कि उसके एक ओर के सभी पद उससे कम मूल्य के तथा दूसरी ओर के सब पद उससे अधिक मूल्य के होते हैं।

मध्यिका के गुण – मध्यिका के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं
⦁    यह बहुत सरल है और इसको बड़ी सुगमता से समझा जा सकता है।
⦁    इसका निर्धारण निश्चित और शुद्ध होता है।
⦁    इसे पदों की कुल संख्या मात्र से ज्ञात किया जा सकता है।
⦁    मध्यिका को बिन्दु रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।
⦁    मध्यिका पर चर मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
⦁    मध्य विचलन की गणना में मध्यिका का और अधिक बीजीय विवेचन सम्भव है।
⦁    गुणात्मक विशेषताओं को अध्ययन करने में यह अन्य माध्यों से श्रेष्ठ है।
⦁    मध्यिका से पदों के विचलनों का योग अन्य किसी भी विधि से निकाले गए विचलनों के योग से कम होता है।

32452.

अविच्छिन्न श्रेणी में मध्यिका का सूत्र दीजिए।

Answer»

(i) m = Size of \([ s=2]\frac { N }{ 2 }\)th item की सहायता से निकाला जाएगा। तत्पश्चात् यह सूत्र लगाया जाएगा M = l1 \([ s=2]\frac { i }{ f } (m -c)\)

32453.

मध्यिका की दो सीमाएँ बताइए।

Answer»

⦁    मध्यिका के पदों की संख्या से गुणा करने पर पदों का कुल योग मालूम नहीं होता।
⦁    इसे ज्ञात करने के लिए समस्त पदों को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना पड़ता है।

32454.

बहुलक का गुण नहीं है(क) कभी-कभी एक समूह में दो-या-दो से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं।(ख) गुणात्मक तथ्यों का भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।(ग) यह अति सीमान्त पदों से प्रभावित नहीं होता।(घ) प्रर्तिदर्श के परिवर्तन के साथ बहुलक में परिवर्तन नहीं होता।

Answer»

(क) कभी-कभी एक समूह में दो-या-दो से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं।

32455.

समान्तर माध्य का दोष है(क) इसे निकालते समय समूह के सभी पदों का प्रयोग होता है।(ख) समूह के सभी पदों को उनके आकार के अनुपात में बाँट दिया जाता है।(ग) यह निश्चित और सदा एक ही होता है।(घ) इसकी गणना में असाधारण एवं सीमान्त मूल्य का अधिक प्रभाव रहता है।

Answer»

(घ) इसकी गणना में असाधारण एवं सीमान्त मूल्य का अधिक प्रभाव रहता है।

32456.

विस्तार (Range) किसे कहते हैं?

Answer»

किसी श्रेणी के सबसे बड़े मूल्य (L) और सबसे छोटे मूल्य (S) के अंतर को विस्तार कहते हैं। (L – S)

32457.

समान वितरण रेखा किसे कहते हैं?

Answer»

OX अक्ष के O मापदण्ड को OY अक्ष के मापदण्ड से मिलाने से जो रेखा खींची जाती है, उसे समान वितरण रेखा कहते हैं।

32458.

माध्य विचलने (Mean Deviation) की परिभाषा दीजिए।

Answer»

“श्रृंखला के किसी सांख्यिकीय माध्य (समान्तर माध्य, मध्यिका या भूयिष्ठक) से निकाले गए विभिन्न मूल्यों के विचलनों के समान्तर माध्य को उसका माध्य विचलन कहा जाता है।”

32459.

मध्यिका के दो गुण बताइए।

Answer»

⦁    इसका निर्धारण निश्चित और शुद्ध होता है।
⦁    गुणात्मक विशेषताओं का अध्ययन करने में यह अन्य माध्यों से श्रेष्ठ है।

32460.

समान्तर माध्य के दो दोष बताइए।

Answer»

⦁    समंकमाला की आकृति देखकर इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
⦁    समंकमाला का कोई भी मूल्य ज्ञात न होने पर इसकी गणना नहीं की जा सकती।

32461.

समांन्तर माध्य किसे कहते हैं?

Answer»

समान्तर माध्ये वह मूल्य है जो किसी श्रेणी के समस्त पदों के मूल्य के योग में उनकी संख्या का भाग देने से प्राप्त होता है।

32462.

पद विचलन रीति में समान्तर माध्य निकालने का सूत्र लिखिए।

Answer»

X = A + \([s=2]\frac { \Sigma fdx }{ N } \times i\)

32463.

केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप किसे कहते हैं?

Answer»

केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप एक ऐसा प्रतिरूपी मूल्य है जिसका प्रयोग श्रेणी के सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है।

32464.

चतुर्थक विचलने गुणांक (Coefficient of Quartile Deviation) किसे कहते हैं?

Answer»

यह अपकिरण की सापेक्ष माप है। इसका उपयोग दो या दो से अधिक श्रेणी पदों की तुलना के लिए किया जाता है। 

\([ s=2](\frac { { Q }_{ 3 }-{ Q }_{ 1 } }{ { Q }_{ 3 }+{ Q }_{ 1 } } )\)

32465.

विस्तार गुणांक (Coefficient of Range) क्या है?

Answer»

विस्तार गुणांक श्रेणी के सबसे बड़े मूल्य तथा सबसे छोटे मूल्य के अंतर तथा इनके योग का अनुपात है। \([ s=2](\frac { L-S }{ L+S } )\)

32466.

चतुर्थक विचलन (Quartile Deviation) क्या है?

Answer»

चतुर्थक विचलन अंतर चतुर्थक विस्तार का आधा होता है।

\([ s=2](\frac { { Q }_{ 3 }-{ Q }_{ 1 } }{ 2 } )\)

32467.

लॉरेंज वक्र (Lorenz Curve) क्या है?

Answer»

लॉरेंज वक्र समान वितरण रेखा से वास्तविक वितरण के विचलन का बिन्दुरेखीय माप है।

32468.

लॉरेंज वक्र का दूसरा क्या नाम है?

Answer»

लॉरेंज वक्र का दूसरा नाम ‘संचयी प्रतिशत वक्र’ है।

32469.

भूयिष्ठक का अर्थ एवं परिभाषा दीजिए।

Answer»

किसी भी समंकमाला में जो पद सबसे अधिक बार आता है अथवा जिसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है, वही बहुलक कहलाता है। काउडेन के शब्दों में “एक वितरण का बहुलक वह मूल्य है, जिसके निकट श्रेणी की इकाइयाँ अधिक-से-अधिक केन्द्रित होती हैं। उसे मूल्यों की श्रेणी का सबसे अधिक प्रतिरूपी माना जाता है।”

32470.

परास या विस्तार (Range) क्या है? इसके गुण व दोष बताइए।

Answer»

किसी समंकमाला के सबसे बड़े और सबसे छोटे मूल्य के अंतर को विस्तार या परास (Range) कहते हैं। इसमें श्रेणी के अधिकतम मूल्य और न्यूनतम मूल्य ज्ञात किए जाते हैं। 

सूत्र रूप में
R = L - S
यहाँ, R = परास या विस्तार
L = श्रेणी का अधिकतम मूल्य
S = श्रेणी का निम्नतम मूल्य

विस्तार के गुण
⦁    यह अपकिरण की सबसे सरल माप है।
⦁    यह उन सीमाओं को स्पष्ट कर देता है जिसके मध्य ही समंकमाला के समस्त मूल्य फैले रहते हैं।
⦁    गुण नियंत्रण, मूल्यों के उच्चावचन तथा भौगोलिक अध्ययनों में यह बहुत उपयोगी है।

विस्तार के दोष
⦁    इससे समंकमाला के केवल उच्चतम और न्यूनतम मूल्य पर ही ध्यान दिया जाता है तथा अन्य मूल्यों की उपेक्षा की जाती है।
⦁    यह अपकिरण की एक संतोषजनक माप नहीं है।
⦁    इसके द्वारा श्रेणी की बनावट के बारे में जानकारी नहीं होती है।
⦁    यह अपकिरण की एक अस्थिर माप है।

32471.

प्रमाप विचलन का गुणांक (Coefficient of Standard Deviation) क्या है?

Answer»

प्रमाप विचलन का गुणांक प्रमाप विचलन तथा समान्तर माध्य का अनुपात है। 

\([ s=2](\frac { \sigma }{ \overline { X } } )\)

32472.

“औसत वह संख्या है जो समस्त वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है।’ कथन है(क) प्रो० कॉनर का(ख) प्रो० यूल का(ग) बोडिंगटन का(घ) क्लार्क का

Answer»

सही विकल्प है (घ) क्लार्क को

32473.

अंतर चतुर्थक विस्तार (Inter Quartile Range) किसे कहते हैं?

Answer»

किसी श्रेणी के तृतीय (Q3) तथा प्रथम चतुर्थक Q5) के अंतर को अंतर चतुर्थक विस्तार कहते हैं। (Q3 – Q1)

32474.

निम्नलिखित का अर्थ एवं गुणन क्रिया समझाइए(i) अंतर चतुर्थक विस्तार,(ii) चतुर्थक विचलन,(iii) चतुर्थक विचलन गुणांक।

Answer»

(i) अंतर चतुर्थक विस्तार
समंक श्रेणी के तृतीय चतुर्थक और प्रथम चतुर्थक के अंतर को ‘अंतर चतुर्थक विस्तार’ कहते हैं। गणन क्रिया निम्नलिखित प्रकार से है

⦁    पहले दोनों चतुर्थक ज्ञात किए जाते हैं।
⦁    निम्नांकित सूत्र का प्रयोग किया जाता है
I.R. =Q3 – Q1

(ii) चतुर्थक विचलन
तृतीय चतुर्थक वः प्रथम चतुर्थक के अंतर के आधे को चतुर्थक विचलन’ (Quartile deviation) या ‘अर्द्ध-अंतर चतुर्थक विस्तार’ (Semi-inter quartile range) कहते हैं। सूत्र रूप में
QD =Q3  – Q1

(iii) चतुर्थक विचलन गुणांक
विभिन्न श्रेणियों के चतुर्थक विचलन की तुलना करने के लिए इसका सापेक्ष माप निकाला जाता है। यह सापेक्ष माप चतुर्थक विचलन गुणांक’ कहलाता है। सूत्र निम्न प्रकार है
Coeffi. of QD = \( [ s=2]\frac { { Q }_{ 3 }-{ Q_{ 1 } } }{ { Q }_{ 3 }+{ Q_{ 1 } } }\)

32475.

समंकमाला के पदों के जोड़ में उनकी संख्या 6, 2, 5, 3 का भाग देने से जो मूल्य प्राप्त होता है वह ……….. कहलाता है।(क) बहुलक(ख) मध्यिका(ग) समान्तर माध्य(घ) कल्पित माध्य

Answer»

सही विकल्प है (ग) समान्तर माध्य।

32476.

लॉरेंज वक्र का प्रयोग सर्वप्रथम किस अर्थशास्त्री ने किया था?(क) प्रो० मार्शल ने(ख) कार्ल पियर्सन ने(ग) आरूकेण्ड्यू पिट ने(घ) डॉ० मैक्स लॉरेंज ने

Answer»

सही विकल्प है (घ) डॉ० मैक्स लॉरेंज ने।

32477.

बहुलक (भूयिष्ठक) को परिभाषित कीजिए। इसके गुण व दोष बताइए।

Answer»

बहुलक या भूयिष्ठक का अर्थ एवं परिभाषाएँ

किसी भी समंकमाला में जो पद सबसे अधिक बार आता है अथवा जिसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है, वही ‘बहुलक’ कहलाता है। यह ‘सर्वाधिक घनत्व की स्थिति का द्योतक है और इसे प्रायः मूल्यों के ‘अधिकतम संकेन्द्रण का बिन्दु’ भी कहते हैं। काउडेन के शब्दों में-“एक वितरण को बहुलक वह मूल्य है, जिसके निकट श्रेणी की इकाइयाँ अधिक-से-अधिक केन्द्रित होती हैं। उसे मूल्यों की श्रेणी का सबसे अधिक प्रतिरूपी माना जाता है।” जिजेक के अनुसार-“बहुलक वह मूल्य है, जो पदों की श्रेणी अथवा समूह में सबसे अधिक बार आता है तथा जिसके चारों ओर सबसे अधिक घनत्व के पदों का वितरण रहता है।” कैने तथा कीपिंग के अनुसार-“बहुलक वह मूल्य है जो श्रेणी में सबसे अधिक बार आता हो अर्थात् जिसँकी सर्वाधिक आवृत्ति हो।” डॉ० बाउले के अनुसार–‘किसी सांख्यिकीय समूह में वर्गीकृत मात्रा का वह मूल्य, जहाँ पर पंजीकृत संख्याएँ सबसे अधिक हों, ‘बहुलक’ या ‘सबसे अधिक घनत्व का स्थान’ अथवा ‘सबसे महत्त्वपूर्ण मूल्य’ कहलाता है।”

बहुलक के गुण
⦁    यह एक सरल एवं लोकप्रिय माध्य है। कुछ दशाओं में यह केवल निरीक्षण द्वारा ही ज्ञात किया जा सकता है।
⦁    इसका मूल्य रेखाचित्र द्वारा भी निर्धारित किया जा सकता है।
⦁    यह वितरण में सर्वाधिक सम्भावित मूल्य होता है।
⦁    गुणात्मक तथ्यों का भी बहुलक ज्ञात किया जा सकता है।
⦁    यह अति सीमान्त पदों से प्रभावित नहीं होता।
⦁    यह श्रेणी के एक महत्त्वपूर्ण भाग का वास्तविक मूल्य होता है।
⦁    यह समूह का सर्वोत्तम प्रतिनिधि होता है।
⦁    प्रतिदर्श के परिवर्तन के साथ बहुलक में परिवर्तन नहीं होता।

बहुलक के दोष
⦁    यदि श्रेणी के सभी पदों की आवृत्तियाँ समान हैं तो बहुलक का निर्धारण नहीं किया जा सकता।
⦁    कभी-कभी एक समूह में दो-या-दो से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं।
⦁    यदि श्रेणी का वितरण अनियमित है तो इसे शुद्ध रूप में नहीं निकाला जा सकता।
⦁    यह चरम सीमाओं की उपेक्षा करता है जो कि गणितीय दृष्टि से उचित नहीं है।
⦁    सभी पदों पर आधारित न होने के कारण इसका बीजीय विवेचन सम्भव नहीं है।
⦁    यह श्रेणी का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व नहीं करता।
⦁    वर्ग विस्तार में परिवर्तन कर देने पर बहुलक भी बदल जाएगा।

बहुलक के उपयोग
उपर्युक्त दोषों के बावजूद दैनिक जीवन तथा व्यापारिक क्षेत्र में बहुलक का बहुत अधिक उपयोग किया जाता है। यह शीघ्रता व सरलता से समझ में आ जाता है, इसलिए व्यावसायिक जीवन में इसका प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। व्यापारिक पूर्वानुमानों में यह एक महत्त्वपूर्ण पथ-प्रदर्शक है। उद्योग व प्रशासन के क्षेत्र में इसकी सहायता से औसत उत्पादने ज्ञात किया जाता है तथा विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता की तुलना की जाती है। किसी वस्तु के उत्पादन में उसकी लागत का अनुमान बहुलक समय के निर्धारण द्वारा आसानी से लगाया जा सकता है। विभिन्न वस्तुओं की लोकप्रियता का अध्ययन बहुलक द्वारा ही किया जाता हैं मौसम सम्बन्धी पूर्वानुमानों में भी इसी का प्रयोग होता है।

32478.

प्रमाप विचलन के गुण व दोष बताइए।

Answer»

प्रेमाप विचलन के गुण-
⦁    यह श्रेणी के सभी मूल्यां पर आधारित होता है।
⦁    यह विशुद्ध गणितीय विधि पर आधारित है; अत: उच्चतर गणितीय रीतियों में इसका काफी प्रयोग होता है।
⦁    अपकिरण की अन्य मापों की अपेक्षा प्रमाप विचलन पर निदर्शन परिवर्तनों का सबसे कम प्रभाव होता है।
⦁    यह अपकिरण का एक स्पष्ट और निश्चित माप है जो प्रत्येक स्थिति में ज्ञात किया जा सकता है।
⦁    इसके द्वारा सामान्य वक्र के क्षेत्र का निर्धारण स्पष्ट रूप से हो जाता है।
⦁    इसका बीजीय विवेचन संभव है।
⦁    अपकिरण का निम्नलिखित क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोग किया जाता है
⦁    विभिन्न समूहों के विचरण की तुलना करने में।
⦁    दैव न्यादर्शों में विभिन्न मापों की अर्थपूर्णता की जाँच करने में।
⦁    प्रसामान्य वक्र के अधीनस्थ क्षेत्रफल की जाँच करने में।
⦁    सहसंबंध विश्लेषण में।
⦁    श्रेणी में मूल्य वितरण की सीमाएँ निर्धारित करने में।

प्रमाप विचलन के दोष-
⦁    अन्य मापों की अपेक्षा समझने में यह कठिन है।
⦁    यह चरम मूल्यों को अत्यधिक महत्त्व देता है।

32479.

प्रमाप विचलन किसे कहते हैं? प्रमाप विचलन की विशेषताएँ बताइए।

Answer»

प्रमाप विचलन अपकिरण की एक आदर्श माप है। इसका आशय उसा माप से होता है जो कि पदों के समान्तर माध्य से लिए गए विचलनों के वर्गों के समान्तर माध्य का वर्गमूल है। विशेषताएँ-

⦁    इसके अंतर्गत विचलन सदैव समान्तर माध्य से ही लिए जाते हैं क्योंकि यह माध्य से केन्द्रीय प्रवृत्ति का सर्वश्रेष्ठ माप समझा जाता है।
⦁    इस माप के अंतर्गत बीजगणितीय चिह्न (+) तथा (-) को छोड़ा नहीं जाता बल्कि मूल्यों का वर्ग करने पर वे स्वयं ही धनात्मक हो जाते हैं।
⦁    विचलनों के वर्गों के योग में पदों की संख्या का भाग दिया जाता है तथा प्राप्त मूल्य का वर्गमूल निकाला जाता है। यही प्रमाप विचलन होता है।

32480.

गुणात्मक मापन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त औसत है(क) समान्तर माध्य।(ख) मध्यिका(ग) बहुलक(घ) ज्यामितीय माध्य(ङ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ख) मध्यिका।

32481.

माध्य विचलन को प्रमुख दोष बताइए।

Answer»

इसमें श्रेणी के औसत मूल्य से प्राप्त सभी विचलनों को धनात्मक मान लिया जाता है जबकि कुछ विचलन ऋणात्मक भी होते हैं।

32482.

चरंम मदों की उपस्थिति से कौन-सा औसत सर्वाधिक प्रभावित होता है(क) मध्यिका(ख) बहुलक(ग) समान्तर माध्य(घ) ज्यामितीय माध्य(ङ) हरात्मक माध्ये

Answer»

सही विकल्प है (ग) समान्तर माध्य।

32483.

किसी समंकमाला में सबसे बड़े पद’ तथा ‘सबसे छोटे पद’ के मूल्य के अंतर को क्या कहते हैं?(क) विस्तार(ख) प्रमाप(ग) विचरण(घ) बहुलक

Answer»

सही विकल्प है (क) विस्तार।

32484.

परिक्षेपण का कौन-सा माप सर्वोत्तम है और कैसे?

Answer»

परिक्षेपण के चार प्रमुख माप हैं

(क) परास (विस्तर),
(ख) चतुर्थक विचलन,
(ग) माध्य विचलन तथा
(घ) प्रमाप मानक विचलन।
उपर्युक्त में से कोई भी परिक्षेपण की माप-सीमाओं से परे नहीं है। प्रत्येक परिक्षेपण माप’ की अपनी विशेषताएँ एवं कमियाँ हैं। फिर भी मानक विचलन परिक्षेपण की मापों में सर्वाधिक उपयुक्त माप है, क्योंकि

⦁    यह सभी मानों पर आधारित होता है। इसलिए किसी भी माने में परिवर्तन, मानक विचलन के मान को प्रभावित करता है।
⦁    यह उद्गम से स्वतन्त्र है परन्तु पैमाने से नहीं।
⦁    यह कुछ उच्च सांख्यिकीय विधियों में भी प्रयुक्त होता है।
⦁    इसका बीजगणितीय विवेचन सम्भव है।

32485.

किसी बारम्बारता वितरण के समझने में परिक्षेपण का माप केन्द्रीय मान का एक अच्छा सम्पूरक है।’ टिप्पणी करें।

Answer»

परिक्षेपण यह दर्शाता है कि वितरण का मान उसके औसत मान से कितना भिन्न है। केन्द्रीय माप अथवा औसत प्रतिनिधि माप तो होता है किन्तु यह मान आँकड़ों में विद्यमान परिवर्तनशीलता को नहीं दर्शाता है। दूसरे शब्दों में, औसत वितरण के केवल एक पहलू के बारे में बताता है अर्थात् यह मूल्यों का एक प्रतिनिधि आकार है। इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए मूल्यों अथवा मानों के प्रसरण को जानना अत्यन्त आवश्यक है। इसके विपरीत, परिक्षेपण के माप आँकड़ों में बिखराव अथवा फैलाव के बारे में बताते हैं और वितरण के मामले में बेहतर जानकारी प्रदान करते हैं। अतः परिक्षेपण की माप आँकड़ों के वितरण को समझने में केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप का एक अच्छा सम्पूरक है।

32486.

‘परिक्षेपण के कुछ माप मानों के प्रसरण पर निर्भर करते हैं, लेकिन कुछ, केन्द्रीय मान से | मानों के विचरण को परिकलित करते हैं। क्या आप सहमत हैं?

Answer»

परिक्षेपण के माप दो प्रकार के होते हैं-

1. परिक्षेपण के निरपेक्ष माप तथा
2. परिक्षेपण के सापेक्ष माप।

1. परिक्षेपण के निरपेक्ष माप – ये हैं–विस्तार, चतुर्थक विचलन, माध्य विचलन और प्रमाप विचलन। ये माप उसी इकाई में होते हैं जिसमें मौलिक मूल्य होते हैं। इसलिए जब मूल्यों में ज्यादा बिखराब पाया जाता है तो ये माप आँकड़ों के वितरण के बारे में भ्रम पैदा कर सकते हैं।

2. परिक्षेपण के सापेक्ष माप – ये हैं–विस्तार गुणांक, चतुर्थक विचलन गुणांक, माध्य विचलन गुणांक, मानक विचलन गुणांक एवं विचरण गुणांक। इन मूल्यों की इकाई नहीं होती। परिक्षेपण के निरपेक्ष माप आँकड़ों के बिखराव से प्रभावित होते हैं जबकि परिक्षेपण के सापेक्ष माप केन्द्रीय प्रवृत्ति से विचरण को मापते हैं।

32487.

प्रमाप विचलन का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?(क) कार्ल पियर्सन ने(ख) प्रो० माल्थस ने(ग) मिल ने(घ) प्रो० मार्शल ने

Answer»

सही विकल्प है (क) कार्ल पियर्सन ने।

32488.

‘प्रथम अपकिरण घात’ कहते हैं(क) बहुलक को(ख) माध्य विचलन को(ग) समान्तर माध्य को(घ) अपकिरण को

Answer»

सही विकल्प है (ख) माध्य विचलन को।

32489.

एक कस्बे में 25% लोग हैं 45,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं जबकि 75% लोग 18,000 से अधिक आय अर्जित करते हैं। परिक्षेपण के निरपेक्ष एवं सापेक्ष मानों का परिकलन कीजिए।

Answer»

अर्जित आय का अधिकतम मूल्य = ₹ 45,000
अर्जित आय का न्यूनतम मूल्य = 18,000
विस्तार = L – S
= 45,000 -18,000 = ₹ 27,000
विस्तार गुणंख = \([ s=2]\frac { l-S }{ l-S } =\frac { 45,000-18,000 }{ 45,000+18,000 }\)
\([ s=2]\frac { 27,000 }{ 63,000 } or\frac { 27 }{ 63 } or\frac { 3 }{ 7 }\)
= 0.43
परिक्षेपण का निरपेक्ष मान = ₹ 27,000
परिक्षेपण का सापेक्ष मान = ₹ 0.43.

32490.

एक अच्छी सांख्यिकीय श्रेणी के गुण बताइए।

Answer»

एक अच्छी सांख्यिकीय श्रेणी के गुण
एक अच्छी सांख्यिकीय श्रेणी (उत्तम सारणी) में निम्नलिखित गुण होने चाहिए

⦁    सारणी का आकार उचित एवं सन्तुलित होना चाहिए।
⦁    तुलनात्मक समंकों को निकटवर्ती खानों में रखा जाना चाहिए।
⦁    अनुपात, प्रतिशत आदि को मूल समंकों के निकट ही लिखा जाना चाहिए और उनके गणनात्मक आधार पर संकेत दिए जाने चाहिए।
⦁    बड़ी संख्याओं का उपसादन कर लेना चाहिए।
⦁    प्रत्येक वर्ग तथा उपवर्ग का योग दिया जाना चाहिए।
⦁    प्रत्येक सारणी के ऊपर संक्षिप्त, स्पष्ट तथा स्वयं परिचायक शीर्षक होना चाहिए।
⦁    उपशीर्ष और अनुशीर्ष सूक्ष्म, स्पष्ट व स्वयं परिचायक होने चाहिए।
⦁    सारणी में पदों की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। पदों में क्रमबद्धता होनी चाहिए।
⦁    प्रत्येक सारणी की संख्या सारणी के सबसे ऊपर दी जानी चाहिए।
⦁    मोटी तथा पतली रेखाओं के प्रयोग से विभिन्न खानों के तथ्यों को प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
⦁    अनुमानित संख्याओं व उपलब्ध न होने वाली संख्याओं के सम्बन्ध में टिप्पणी दी जानी चाहिए।
⦁    समंकों अथवा शब्दों को अधिक स्पष्ट करने के लिए सारणी के नीचे संक्षिप्त टिप्पणियाँ दी जानी चाहिए।
⦁    सारणी के ऊपर एक किनारे पर या एक खाने में माप की इकाई को अवश्य लिखना चाहिए।
⦁    गणन क्रिया का संकेत जैसे (col. 1 + col. 2) आदि दिए जाने चाहिए।’
⦁    सारणी उपलब्ध स्थाने के अनुसार नियोजित की जानी चाहिए।
⦁    सांख्यिकी में अत्यधिक तथ्यों को समावेश नहीं करना चाहिए।
⦁    सारणी के नीचे वह स्रोत दिया जाना चाहिए जहाँ से समंक उपलब्ध किए गए हैं।
⦁    सारणी का रूप आकर्षक होना चाहिए।

32491.

आवृत्ति बहुभुज (Frequency Polygon) क्या है?

Answer»

बहुभुज आयत चित्र के प्रत्येक आयत के शीर्ष के मध्य बिन्दुओं को सरल रेखाओं द्वारा मिलाकर बनाया जाता है।

32492.

आवृत्ति बहुभुज तथा आवृत्ति वक्र में क्या अन्तर है?

Answer»

आवृत्ति बहुभुज में मध्य बिन्दुओं को एक पैमाने की सहायता से मिलाया जाता है जबकि आवृत्ति वक्र में बिन्दुओं को मुक्त हस्त रीति द्वारा खींची जाने वाली रेखाओं द्वारा मिलाया जाता है।

32493.

दण्ड-आरेख|(क) एकविमी आरेख है।(ख) द्विविमी आरेख है।(ग) विमारहित आरेख है।(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (क) एकविमी आरेख है

32494.

बहुगुणी दण्ड चित्र क्या हैं?

Answer»

बहुगुणी दण्ड चित्र वे दण्ड चित्र हैं जो दो-या-दो से अधिक तथ्यों के आँकड़ों को प्रस्तुत करते हैं। प्रत्येक तथ्य के लिए अलग-अलग दण्ड चित्र बनाए जाते हैं। प्रत्येक दण्ड को भिन्न रंग या चिह्न द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

32495.

आयत चित्र क्या है?

Answer»

आयत चित्र वह रेखाचित्र है जिसमें अखण्डित श्रृंखला (continuous series) से सम्बन्धित मदों तथा उनकी आवृत्तियों को आयतों के रूप में ग्राफ पेपर पर अंकित किया जाता है।

32496.

प्रतिशत दण्ड चित्र क्या है?

Answer»

प्रतिशत दण्ड चित्र प्रदर्शन की वह विधि है जिसमें किसी तथ्य के विभिन्न भागों के मूल्यों को प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है।

32497.

अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र क्या है?

Answer»

अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र वह चित्र है जो किसी तथ्य के कुल मूल्य तथा उपविभाजन को प्रस्तुत करता है। इसमें सम्पूर्ण मूल्य का एक दण्ड बनाकर उसका उपविभाजन कर दिया जाता है और दण्ड के | भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न-भिन्न रंग भर दिए जाते हैं।

32498.

तोरणों के द्वारा आलेखी रूप में निम्न की स्थिति जानी जा सकती है|(क) बेहुलक(ख) माध्य(ग) मध्यिका(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है  (ग) मध्यिकी

32499.

यदि किसी बारम्बारता सारणी में समान वर्ग अन्तरालों की तुलना में वर्ग अन्तराल असमान हों, तो आयत चित्र बनाने की प्रक्रिया किस प्रकार भिन्न होगी?

Answer»

वर्ग अन्तराल के समान होने पर आयत चित्र का आधार एकसमान होता है। आयतों की तुलना संगत आवृत्ति के आधार पर की जाती है। किन्तु जब वर्ग अन्तराल असमान होते हैं तो सर्वप्रथम आयतों की ऊँचाइयों को समायोजित किया जाता है और फिर इनकी तुलना की जाती है। आयतों की ऊँचाइयों के समायोजन की प्रक्रिया है-आवृत्ति घनत्व को वर्ग अन्तराल की चौड़ाई से विभाजित करना। इसमें निरपेक्ष आवृत्तियों का प्रयोग नहीं किया जाता है।

32500.

आयत चित्र के माध्यम से प्रस्तुत किए गए आँकड़ों से आलेखी रूप से निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं(क) माध्य(ख) बहुलक(ग) मध्यिका(घ) ये सभी

Answer»

सही विकल्प है  (ग) मध्यिका