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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

32501.

वृत्तीय चित्र से क्या आशय है?

Answer»

वृत्तीय चित्र वह चित्र है जिसमें एक वृत्त (circle) को कई भागों में बाँटकर आँकड़ों के भिन्न-भिन्न प्रतिशत या सापेक्ष मूल्यों को प्रस्तुत किया जाता है।

32502.

इनमें से कौन नीरस समंकों को अर्थपूर्ण, रोचक व अधिक बोधगम्य बनाते हैं?(क) शब्द(ख) अंक(ग) लेख(घ) चित्र

Answer»

सही विकल्प है  (घ) चित्र

32503.

दण्ड चित्र क्या है?

Answer»

दण्ड चित्र वह चित्र है जिसमें आँकड़ों को दण्डों या आयतों के रूप में प्रकट किया जाता है।

32504.

किसमें एक ही प्रकार के संख्यात्मक तथ्यों के विभिन्न मूल्यों को दण्डों के द्वारा प्रकट किया जाता है?(क) सरल दण्ड चित्र में(ख) बहुगुणी दण्ड चित्र में(ग) अन्तर्विभक्त दण्ड चित्र में(घ) आवृत्ति आयत चित्र में

Answer»

सही विकल्प है  (क) सरल दण्ड चित्र में

32505.

एकविमा चित्र से क्या आशय है?

Answer»

वे चित्र जिनके बनाने में केवल एक ही विस्तार अथवा ऊँचाई को (चौड़ाई अथवा मोटाई का नहीं) प्रयोग किया जाता है, एकविमा चित्र कहलाते हैं।

32506.

एक अच्छी सांख्यिकीय श्रेणी का गुण नहीं है(क) सारणी का आकार उचित एवं सन्तुलित होना चाहिए(ख) तुलनात्मक समंकों को दूरवर्ती खानों में रखा जाना चाहिए(ग) बड़ी संख्याओं का उपसादन कर लेना चाहिए।(घ) प्रत्येक वर्ग तथा उपवर्ग का योग दिया जाना चाहिए

Answer»

(ख) तुलनात्मक समंकों को दूरवर्ती खानों में रखा जाना चाहिए।

32507.

पाठ्य प्रस्तुतीकरण से क्या आशय है?

Answer»

पाठ्य प्रस्तुतीकरण में आँकड़े अध्ययन की विषय-वस्तु के वर्णन का एक अंश होते हैं। इसे वर्णनात्मक प्रस्तुतीकरण भी कहते हैं।

32508.

“एक सांख्यिकीय सारणी आँकड़ों का स्तम्भों तथा पंक्तियों में आँकड़ों का व्यवस्थित संगठन है।” यह परिभाषा किसने दी है?(क) प्रो० मार्शल(ख) प्रो० रोबिन्स(ग) प्रो० नीसवेंजर(घ) प्रो० कॉनर

Answer»

सही विकल्प है  (ग) प्रो० नीसवेंजर

32509.

अंकगणितीय रेखाचित्र के द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों से निम्न को समझने में मदद मिलती है(क) दीर्घकालिक प्रवृत्ति(ख) आँकड़ों में चक्रीयता(ग) आँकड़ों में कालिकता(घ) ये सभी

Answer»

सही विकल्प है  (क) दीर्घकालिक प्रवृत्ति

32510.

आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण से क्या आशय है?

Answer»

आँकड़ों को स्पष्ट तथा व्यवस्थित रूप से इस प्रकार से प्रस्तुत करना कि उन्हें सभी व्यक्ति सरलतापूर्वक समझ सकें और उनसे उचित परिणाम निकाल सकें, आँकड़ों का प्रस्तुतीकरण कहलाता है।

32511.

पाठ्य प्रस्तुतीकरण किस दशा में उपयुक्त रहता है?

Answer»

पाठ्य प्रस्तुतीकरण तब उपयुक्त रहता है जब आँकड़ों की संख्या अधिक न हो तथा अध्ययन की विषय-वस्तु के रूप में आँकड़ों का आकार छोटा हो।

32512.

वुडवर्थ के अनुसार बुद्धि में कितने तत्त्व होते हैं ?(क) दो(ख) तीन(ग) चार(घ) पाँच

Answer»

सही विकल्प है  (ग) चार

32513.

बहुगुणी सारणी किसे कहते हैं?

Answer»

जब किसी घटना अथवा तथ्य से सम्बन्धित तीन से अधिक गुणों एवं विशेषताओं का प्रदर्शन एक-साथ किया जाता है तो इसे ‘बहुगुणी सारणी’ कहा जाता है।

32514.

सारणीयन का अर्थ बताइए। इसके उद्देश्य, उपयोगिता एवं सीमाओं को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

सारणीयन : अर्थ एवं परिभाषा आँकड़ों को एकत्र कोर लेने के पश्चात् उन्हें एक तार्किक क्रम में रखा जाता है। इस प्रक्रिया को सारणीयन कहा जाता है। सारणीयन में वर्गीकृत आँकड़ों को कॉलमों या स्तम्भों एवं पंक्तियों में दिखाया जाता है। इसको निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित किया गया है–

⦁    प्रो० नीसवेंजर के अनुसार – “एक सांख्यिकीय सारणी आँकड़ों का स्तम्भों (कॉलम) तथा पंक्तियों में आँकड़ों का व्यवस्थित संगठन है।”
⦁    प्रो० कॉनर के अनुसार – “सारणीयन किसी विचाराधीन समस्या को स्पष्ट करने के उद्देश्य से किया जाने वाला सांख्यिकीय तथ्यों का क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित प्रस्तुतीकरण है।”

सारणीयन के उद्देश्य
सारणीयन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

⦁    आँकड़ों को सुव्यवस्थित बनाना – सारणीयन का प्रमुख उद्देश्य एकत्रित सामग्री का वर्गीकरण , कर लेने के पश्चात् इसे अधिक व्यवस्थित रूप प्रदान करना है ताकि निर्वचन की प्रक्रिया सरल हो सके।
⦁    आँकड़ों को बोधगम्य बनाना – सारणीयन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य आँकड़ों को सरल रूप से कॉलमों एवं कतारों में दिखाकर इन्हें अधिक बोधगम्य बनाना है।
⦁    आँकड़ों की विशेषताओं को स्पष्ट करना – सारणी का एक प्रमुख उद्देश्य एकत्रित आँकड़ों की विविध प्रकार की विशेषताओं को प्रदर्शित करना है।
⦁    आँकड़ों का संक्षिप्तीकरण करना – सारणीयन का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य विस्तृत सामग्री का कम-से-कम स्थान पर प्रदर्शन करना है।
⦁    आँकड़ों को तुलना योग्य बनाना – सारणीयन का अन्तिम उद्देश्य आँकड़ों की तुलना करने में सहायता देना है।

सारणीयन की उपयोगिता
सारणीयन की उपयोगिता को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है
⦁    सारणीयन आँकड़ों को सुव्यवस्थित करता है।
⦁    सारणीयन विस्तृत आँकड़ों को संक्षिप्त रूप प्रदान करता है।
⦁    सारणीयन तुलना को सरल बनाता है।
⦁    सारणीयन सांख्यिकीय विश्लेषण में सहायक है।।
⦁    सारणीयन में न केवल समय व श्रम की बचत होती है अपितु उसमें स्पष्टता आ जाती है।
⦁    सारणीयन सांख्यिकीय गणनाओं व विश्लेषण में सहायक होता है।
⦁    सारणीबद्ध समंकों का निर्वचन करना व रेखाचित्रों द्वारा प्रदर्शित करना सरल एवं सुविधाजनक हो जाता है।

सारणीयन की सीमाएँ
सारणीयन की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं
⦁    सारणीयन द्वारा केवल गणनात्मक आँकड़ों का ही प्रदर्शन किया जा सकता है, गुणात्मक तथ्यों का नहीं।
⦁    सारणीयन द्वारा जिन आँकड़ों का प्रदर्शन किया जाता है, उन्हें सामान्य व्यक्तियों द्वारा समझने में कठिनाई हो सकती है। वास्तव में, इसका उपयोग केवल विशिष्ट एवं उच्च ज्ञान वाले व्यक्तियों तक ही सीमित है।
⦁    सारणीयन का महत्त्व सीमित है क्योंकि एक सारणी में सम्पूर्ण सामग्री का प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।

32515.

सारणीयन की परिभाषा दीजिए।

Answer»

सारणीयन आँकड़ों के सांख्यिकीय विश्लेषण की प्रक्रिया को वह भाग है, जिससे विभिन्न श्रेणियों में आने वाले आँकड़ों को गिना एवं दिखाया जाता है।

32516.

आवृत्ति वक्र (Frequency Polygon) क्या है?

Answer»

आवृत्ति वक्र आवृत्ति बहुभुज को मुक्त हस्त रीति से खींचा हुआ सरल रूप है।

32517.

सारणीयन सांख्यिकीय विश्लेषण में ……. है।(क) सहायक(ख) असहायक(ग) कभी-कभी सहायक(घ) (क) और (ख) दोनों

Answer»

सही विकल्प है  (क) सहायक

32518.

आँकड़ों के पाठ-विषयक प्रस्तुतीकरण पर एक नोट लिखिए।

Answer»

आँकड़ों के पाठ-विषयक प्रस्तुतीकरण में आँकड़ों का विवरण पाठ में ही दिया जाता है। जब आँकड़ों का परिमाण बहुत अधिक न हो तो प्रस्तुतीकरण का यह स्वरूप अधिक उपयोगी होता है। उदाहरण-उत्तर प्रदेश के एक शहर मेरठ में 5 सितम्बर, 2006 को महँगाई के विरोध में एक बन्द आयोजित किया गया। इस दौरान 6 बाजार खुले तथा 28 बाजार बन्द पाए गए। 25 प्राथमिक विद्यालय खुले किन्तु 17 माध्यमिक विद्यालय, 7 महाविद्यालय बन्द रहे। उपयुक्तता—यह विधि उस समय उपयुक्त होती है जब आँकड़े संख्या में कम और आकार में सीमित हों। दोष—इसे समझने के लिए पूरे पाठ का अध्ययन आवश्यक है। पढ़ते समय महत्त्वपूर्ण बिन्दु छूट सकते

32519.

सारणीयन की दो उपयोगिता बताइए।

Answer»

⦁    सारणीयम आँकड़ों को सुव्यवस्थित करता है।
⦁    सारणीयन सांख्यिकीय विश्लेषण में सहायक है।

32520.

तोरण अथवा ओजाइव अथवा संचयी आवृत्ति वक्र से क्या आशय है?

Answer»

तोरण अथर्वा संचयी आवृत्ति वक्र (Ogive) वह वक्र है जो ग्राफ पेपर पर संचयी आवृत्तियों को अंकित करके बनाया जाता है।

32521.

सारणीयन में प्रयुक्त वर्गीकरण के प्रकार बताइए।

Answer»

सारणीयन में प्रयुक्त वर्गीकरण के चार प्रकार होते हैं

⦁    गुणात्मक वर्गीकरण-जब वर्गीकरण गुणात्मक विशेषताओं के आधार पर किया जाए; जैसे–सामाजिक स्थिति, राष्ट्रीयता आदि।
⦁    मात्रात्मक वर्गीकरण-जब वर्गीकरण उन विशेषताओं के आधार पर किया जाए जिन्हें मापा जा सकता है; जैसे—आयु, लम्बाई, उत्पादन, आय आदि।।
⦁    कालिक वर्गीकरण-जब वर्गीकरण समय के आधार पर किया जाए; जैसे-घण्टे, दिन, सप्ताह, माह, वर्ष आदि।
⦁    स्थानिक वर्गीकरण–जब वर्गीकरण स्थान के आधार पर किया जाए; जैसे–गाँव, कस्बा, जिला, राज्य, देश आदि।

32522.

सारणी का निर्माण करते समय क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए? इसके सामान्य नियम क्या हैं?

Answer»

सारणी का निर्माण करते समय सावधानियाँ किसी भी सारणी का निर्माण करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतनी चाहिए

⦁    शीर्षक (Heading)—प्रत्येक सारणी का संक्षिप्त, स्पष्ट एवं पूर्ण शीर्षक होना चाहिए।
⦁    स्तम्भ अथवा कॉलम (Columns)—सारणी का निर्माण करते समय स्तम्भों के आकार व संख्या का ध्यान रखना चाहिए। स्तम्भ अधिक नहीं होने चाहिए तथा इनका आकार समान अनुपात में तथा समान आधार पर निश्चित किया जाना चाहिए।
⦁    अनुशीर्षक (Captions)-अनुशीर्षक संक्षिप्त एवं स्पष्ट होना चाहिए।
⦁    कतारें अथवा पंक्तियाँ (Rows)-क्षैतिज रेखाओं द्वारा बने खानों को ‘कतारे” कहा ज़ात है। कतारों में सूचना का आधार आँकड़ों का कोई भी गुण हो सकता है।
⦁    स्तम्भों का क्रम (Sequence of Columns)-स्तम्भों का क्रम सोच-समझकर निर्धारित करना चाहिए। सर्वाधिक महत्त्व की सूचनाएँ बायीं ओर के स्तम्भों से शुरू की जानी चाहिए। तुलना किए जाने वाले स्तम्भों को साथ-साथ रखा जाना चाहिए।
⦁    टिप्पणियाँ (Notes)-यदि सारणी में दिए गए तथ्यों के बारे में विशेष सूचना देना आवश्यक हो और उसका प्रदर्शन सम्भव न हो तो सारणी में दिखाए गए आँकड़ों पर कोई संकेत जैसे * या + आदि देकर नीचे इसी प्रकार का संकेत बनाकर टिप्पणी लिखी जाती है।
⦁    खानों की रूलिंग (Ruling of Columns)-विषय-सामग्री का महत्त्वपूर्ण भाग मोटी या दोहरी रेखाओं से बनाया जाना चाहिए।
⦁    योग (Total)–विभिन्न खानों की संख्याओं का योग दिया जाना चाहिए। योग की व्यवस्था दोनों ओर से होनी चाहिए।
⦁    स्रोत (Source)-सारणी के नीचे समंकों का स्रोत स्पष्ट किया जाना चाहिए।
⦁    सामान्य नियम-
⦁    सारणी में अत्यधिक तथ्यों का समावेश नहीं होना चाहिए।
⦁    संख्याओं को उपसादित करने के बाद ही लिखा जाना चाहिए। इस सम्बन्ध में आवश्यक टिपपणी भी दी जानी चाहिए।
⦁    सारणी उपलब्ध स्थान के अनुसार ही नियोजित की जानी चाहिए।
⦁    तुलनात्मक समंकों को निकटवर्ती खानों में रखा जाना चाहिए।
⦁    साप की इकाई को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
⦁    अनुमानित अथवा उपलब्ध न होने वाली संख्याओं के सम्बन्ध में टिप्पणी देनी चाहिए।
⦁    सारणी का रूप आकर्षक होना चाहिए।
⦁    संख्याओं को लिखते समय उनके स्थानीय मान को ध्यान में रखना चाहिए।

32523.

चित्रों की दो सीमाएँ बताइए।

Answer»

⦁    चित्रों द्वारा यथार्थ संख्यात्मक प्रदर्शन सम्भव नहीं है। वे सन्निकट मूल्यों पर आधारित होते हैं।
⦁    चित्रों की सहायता से विभिन्न मूल्यों का सूक्ष्म अन्तर प्रदर्शित करना असम्भव है।

32524.

चित्रमय प्रदर्शन की प्रमुख सीमाएँ बताइए।

Answer»

चित्रमय प्रदर्शन की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं

⦁    चित्रों की उपयोगिता सामान्य व्यक्ति के लिए है, किसी विशेषज्ञ के लिए नहीं।
⦁    चित्रों के माध्यम से विभिन्न मूल्यों का सूक्ष्म अन्तर प्रदर्शित करना सम्भव नहीं होता।
⦁    चित्र अनेक प्रकार की तुलना करने में अनुपयोगी होते हैं।
⦁    जब मापों के मध्य विशाल अन्तर होता है तो उस अन्तर को चित्रों द्वारा प्रदर्शित करना कठिन हो जाता है।
⦁    चित्रों का और अधिक निर्वचन करना सम्भव नहीं होता।
⦁    गलत मापदण्ड पर बने चित्र भ्रामक होते हैं।
⦁    चित्र निष्कर्ष निकालने का केवलएक साधन हैं; अत: इनका प्रयोग सारणियों के साथ किया जाना चाहिए। 
⦁    सन्निकट मूल्यों पर आधारित होने के कारण चित्र तथ्यों का यथार्थ प्रदर्शन नहीं कर पाते।
⦁    तुलनात्मक अध्ययन के लिए समंकों का सजातीय होना आवश्यक है।

32525.

चित्र रचना के सामान्य नियम क्या हैं? चित्रमय प्रदर्शन की सीमाएँ बताइए।

Answer»

चित्र रचना के सामान्य नियम
चित्रे रचना एक कला है। इसे अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन करना होता है। ये सामान्य नियम निम्नलिखित हैं—

⦁    चित्र आकर्षक, स्वच्छ व प्रभावशाली होने चाहिए।
⦁    ज्यामितीय आकृतियों की माप शुद्ध एवं अनुपात के हिसाब से होनी चाहिए अन्यथा निष्कर्ष भ्रामक होंगे।
⦁    चित्र न तो बहुत बड़ा होना चाहिए और न बहुत छोटा।
⦁    चित्र रेखापत्र के मध्य में होना चाहिए।
⦁    कागज के आकार तथा समंकों की प्रकृति के आधार पर मापदण्ड का उल्लेख चित्र के एक कोने में होना चाहिए।
⦁    प्रत्येक चित्र के ऊपर उचित परन्तु स्पष्ट व संक्षिप्त शीर्षक होना चाहिए। आवश्यकतानुसार उपशीर्षक भी दिए जाने चाहिए।
⦁    पटरी, परकार व चाँदे की सहायता से चित्र शुद्ध बनाए जाने चाहिए। निर्धारित मापदण्ड का पूर्णत: पालन किया जाना चाहिए।
⦁    चित्र के ऊपर कोने में उपयुक्त चिह्नों द्वारा विभिन्न तथ्यों के संकेत दिए जाने चाहिए।
⦁    विभिन्न प्रकार के समंकों को चित्रित करने के लिए उपयुक्त विधि का चुनाव करना चाहिए।
⦁    चित्र बनाने में साधन एवं शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
⦁    चित्रों को मोटी या दोहरी रेखाओं से घेर देना चाहिए।
⦁    चित्र में आँकड़ों के महत्त्वपूर्ण अंशों को गहरे रंग से प्रदर्शित करना चाहिए।

चित्रमय प्रदर्शन की सीमाएँ
चित्र तथ्यों को केवल मोटे रूप में प्रस्तुत करते हैं; अतः चित्र उन व्यक्तियों के लिए भ्रामक होते हैं जो सावधानीपूर्वक अध्ययन किए बिना ही उनसे निष्कर्ष निकाल लेते हैं। एम० जे० मोरोने के शब्दों में-“किसी चित्र का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त चौकन्ना रहना आवश्यक होता है। वह इतना सरल, इतना स्पष्ट तथा इतना मनभावी होती है कि असावधान व्यक्ति आसानी से मूर्ख बन जाता है।” चित्रमय प्रदर्शन की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिखित हैं

⦁    चित्रों की उपयोगिता सामान्य व्यक्ति के लिए है, किसी विशेषज्ञ के लिए नहीं।
⦁    चित्रों के माध्यम से विभिन्न मूल्यों का सूक्ष्म अन्तर प्रदर्शित करना सम्भव नहीं होता।
⦁    चित्र अनेक प्रकार की तुलना करने में अनुपयोगी होते हैं।
⦁    जब मापों के मध्य विशाल अन्तर होता है तो उस अन्तर को चित्रों द्वारा प्रदर्शित करना कठिन हो जाता है।
⦁    चित्रों को और अधिक निर्वचन करना सम्भव नहीं होता। 6. गलत मापदण्ड पर बने चित्र भ्रामक होते हैं।
⦁    चित्र निष्कर्ष निकालने का केवल एक साधन है; अत: इसका प्रयोग सारणियों के साथ किया जाना चाहिए।
⦁    सन्निकट मूल्यों पर आधारित होने के कारण चित्र तथ्यों का यथार्थ प्रदर्शन नहीं कर पाते।
⦁    तुलनात्मक अध्ययन के लिए समंकों का सजातीय होना आवश्यक है।

32526.

सांख्यिकी में किसी वर्ग की ऊपरी सीमा तथा निचली सीमा के अन्तर को कहते हैं (क) वर्ग-बारम्बारता(ख) वर्ग-अन्तराल(ग) मध्य बिन्दु(घ) वर्ग सीमाएँ

Answer»

सही विकल्प है  (ख) वर्ग-अन्तराल।

32527.

किसी आयत स्तम्भ के शीर्ष भुजाओं के मध्य बिन्दुओं को मुक्त-हस्त वक्र से मिलाने पर प्राप्त आलेख होगा(क) तोरण(ख) बारम्बारता वक्र(ग) बारम्बारता बहुभुज(घ) स्तम्भ चार्ट

Answer»

सही विकल्प है  (क) तोरण।

32528.

यदि बारम्बारता बहुभुज में प्राप्त मध्यमान बिन्दुओं को सरल रेखा से न मिलाकर निष्कोण कर दिया जाए तो प्राप्त आलेख होगा(क) बारम्बारता वक्र(ख) तोरण(ग) स्तम्भ चार्ट(घ) बारम्बारता बहुभुज

Answer»

सही विकल्प है  (क) बारम्बारता वक्र।

32529.

चित्रमय प्रदर्शन की सीमाओं पर टिप्पणी लिखिए।

Answer»

सांख्यिकीय चित्रों में अनेक गुण होने के बावजूद इनकी कुछ सीमाएँ भी होती हैं। चित्रमय प्रदर्शन की कुछ सीमाएँ निम्नलिखित हैं

⦁    चित्रों द्वारा समंकों का पूर्ण निरूपण नहीं होता। चित्र तो समंकों का अनुमानित रूप में प्रदर्शन करते हैं; अतः वे उन्हीं क्षेत्रों में उपयुक्त होते हैं जहाँ किसी विषय की सरल रूप में सामान्य व्यक्तियों को जानकारी देनी आवश्यक हो।
⦁    चित्रों की सहायता से संख्याओं के सूक्ष्म अन्तर को दिखाना असम्भव है।
⦁    चित्रों की सहायता से तुलना तभी उपयुक्त हो सकती है जब वे समंकों के समान गुण के आधार पर बनायें जाएँ।
⦁    केवल चित्र का कोई महत्त्व नहीं होता, वरन् चित्रों के द्वारा आपसी तुलनात्मक अध्ययन सम्भव होता है।
⦁    चित्रों द्वारा पूर्ण सत्य निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। ये तो निष्कर्ष की ओर पहुँचने के साधन मात्र हैं।
⦁    चित्रों द्वारा बहुमुखी विशेषताओं का प्रदर्शन नहीं हो सकता। वर्गीकरण व सारणीयन के द्वारा अनेक प्रकार की सूचनाएँ या विशेषताएँ प्रदर्शित की जा सकती हैं, लेकिन चित्रों के द्वारा किसी एक विशेषता का ही प्रदर्शन किया जा सकता है।
⦁    अनुचित एवं अशुद्ध चित्र बनाकर उनका आसानी से दुरुपयोग किया जा सकता है।
⦁    प्रत्येक प्रकार के अनुसन्धान में चित्र नहीं बनाये जा सकते। यदि बनाये भी जाएँगे तो कोई स्पष्ट भाव व्यक्त नहीं करेंगे।
⦁    यदि चित्र बनाने वाले को विषय तथा चित्र बनाने के नियमों का सम्यक् ज्ञान नहीं है तो उसके द्वारा बनाये गये चित्रों से स्थिति का वास्तविक ज्ञान नहीं हो सकेगा।

32530.

आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन करते समय अथवा रेखाचित्र बनाते समय क्या-क्या सावधानियाँ रखी जानी चाहिए?याआँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के सामान्य नियमों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Answer»

रेखाचित्र बनाते समय निम्नलिखित सावधानियाँ रखी जानी चाहिए

⦁    चित्र बनाने से पूर्व चित्र के लिए पैमाना निर्धारित कर लेना चाहिए जो सरल एवं स्पष्ट हो।
⦁    रेखाचित्र बनाते समय उसके आकार की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। चित्र ने तो अधिक छोटा और न ही अधिक बड़ा होना चाहिए। चित्र का आकार कागज के आकार के ऊपर निर्भर करता है। अत: जिस कागज पर रेखाचित्र बनाया जा रहा है, उसी के अनुपात को ध्यान में रखकर रेखाचित्र का निर्माण किया जाना चाहिए।
⦁    चित्रे आकर्षक होना चाहिए। अत: चित्र बनाते समय इस बात की पूरी सावधानी रखनी चाहिए कि चित्र स्वच्छ तथा प्रभावशाली हो, जिससे देखने वालों का मस्तिष्क चित्र की ओर शीघ्र ही आकर्षित हो जाए।
⦁    रेखाचित्रों की शुद्धता की ओर ध्यान रखना परम आवश्यक है। चित्रों को पटरी, परकार तथा पेन्सिल व चाँदे आदि की सहायता से सावधानीपूर्वक बनाना चाहिए। चित्र बनाने के लिए ग्राफ पेपर का प्रयोग उत्तम होता है।
⦁    रेखाचित्र में सरलता का गुण होना चाहिए, जिससे कि देखते ही चित्र का अर्थ एवं निष्कर्ष समझ में आ सके।
⦁    रेखाचित्रों के पास ही वह सारणी (पैमाना) भी बनी होनी चाहिए, जिसके आधार पर रेखाचित्र बनाया गया है।
⦁    रेखाचित्र बनाते समय, समय तथा साधनों का ध्यान होना भी आवश्यक है। चित्र मितव्ययी होने चाहिए।
⦁    यदि समंकों को स्तम्भ चित्रों में दर्शाया जा रहा हो तब स्तम्भों में अन्तर की दूरी समान होनी चाहिए।
⦁    रेखाचित्र बनाते समय कागज पर चारों ओर पर्याप्त स्थान छोड़ना चाहिए जिससे उसका शीर्षक, पैमाना, संकेत आदि प्रदर्शित किये जा सकें।
⦁    चित्र को अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक बनाने के लिए रंगों का उपयोग भी किया जा सकता है।
⦁    प्रत्येक चित्र के ऊपर पूर्ण, स्पष्ट संक्षिप्त शीर्षक दिया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि चित्र में क्या प्रदर्शित किया जा रहा है।
⦁    सांख्यिकीय आँकड़ों के प्रदर्शन के लिए अनेक प्रकार के चित्र बनाये जाते हैं, जिनकी अलग-अलग विशेषताएँ होती हैं; अतः समंकों के विश्लेषण के बाद उनके लिए कौन-सा चित्र उचित होगा, यह विचार करके ही चित्रों को बनाना चाहिए।

32531.

दण्ड चित्रों के किन्हीं दो प्रकारों का नामोल्लेख कीजिए।

Answer»

(1) सरल दण्ड चित्र

ये दो प्रकार के होते हैं – 

(i) उदग्र दण्ड चित्र, 

(ii) क्षैतिज दण्डचित्र।

(2) बहु दण्ड चित्र।
 

32532.

आयत चित्र किसे कहते हैं?

Answer»

किसी बारम्बारता बंटन में वर्ग-अन्तराल और संगत बारम्बारता को किसी आयत की दो संलग्न भुजाएँ मानकर जो आयत बनाते हैं उन्हें आयत चित्र कहते हैं।

32533.

निम्नलिखित चित्र की सहायता से नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए(i) अधिकतम बारम्बारता वाला वर्ग- अन्तराल बताइए।(ii) वह वर्ग-अन्तराल बताइए जिसकी बारम्बारता 15 है।(iii) न्यूनतम वर्ग- अन्तराल वाला वर्ग-अन्तराल बताइए।(iv) वह वर्ग-अन्तराल बताइए जिसकी संचयी बारम्बारता 60 है।(v) वर्ग- अन्तराल (50-60) की बारम्बाता बताइए।

Answer»

(i) अधिकतम बारम्बारता वाला वर्ग-अन्तराल 60-70 है।

(ii) वह वर्ग-अन्तराल 20-30 से 40-50 है जिसकी बारम्बारता 15 है।

(iii) न्यूनतम वर्ग–अन्तराल वाला वर्ग-अन्तराल 30-40 है।

(iv) वह वर्ग – अन्तराल (50-60) है जिसकी संचयी बारम्बारता 60 है।

(v) वर्ग-अन्तराल (50-60) की बारम्बारता 25 है।

32534.

द्विविमा चित्रों से आप क्या समझते हैं?

Answer»

द्विविमा चित्र-द्विविमा चित्र उन चित्रों को कहते हैं, जिनमें समंकों का चित्रण दो विस्तारों ऊँचाई और चौड़ाई को ध्यान में रखकर किया जाता है, इसलिए इन्हें क्षेत्रफल चित्र अथवा धरातल चित्र भी कहा जाता है।

32535.

दण्ड चित्रों के किन्हीं दो प्रकारों को संक्षेप में लिखिए।

Answer»

दण्ड चित्रों के दो प्रकार निम्नलिखित हैं –

(1) उदग्र (Vertical) 

(2) क्षैतिज (Horizontal)

⦁    उदग्र दण्ड चित्र – जब दण्ड सीधे बनाये जाते हैं तो वे उदग्र दण्ड चित्र कहलाते हैं। इसको बनाते समय यह प्रयास करना चाहिए कि सबसे बड़ा दण्ड बायीं ओर अथवा दायीं ओर बने।
⦁    क्षैतिज दण्ड चित्र – जब दण्ड खड़े न होकर लेटी दशा में बनाये जाते हैं तो उन्हें क्षैतिज दण्ड चित्र कहते हैं।

32536.

बारम्बारता वक्र किस प्रकार बनाये जाते हैं?

Answer»

यदि बारम्बारता बहुभुज में प्राप्त मध्यमान बिन्दुओं को सरल रेखा से न मिलाकर निष्कोण कर दिया जाए तो बारम्बारता वक्र बन जाता है। बारम्बारता वक्र के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह बारम्बारता बहुभुज के प्रत्येक शीर्ष से होकर जाए, परन्तु जहाँ तक हो सके, उसे बारम्बारता बहुभुज के प्रत्येक शीर्ष से होकर जाना चाहिए।

32537.

जब X-अक्ष पर बराबर-बराबर स्थान छोड़कर एकसमान चौड़ाई के दण्ड खींचे जाते हैं, तो उसे कहते हैं(क) स्तम्भ चार्ट(ख) आयत चित्र(ग) बारम्बारता बहुभुज(घ) बारम्बारता वक्र

Answer»

सही विकल्प है  (क) स्तम्भ चार्ट।

32538.

बारम्बारता बहुभुज किसे कहते हैं?

Answer»

दो या दो से अधिक बंटनों के तुलनात्मक अध्ययन के लिए जो बहुभुज बनाये जाते हैं, ऐसे बहुभुज में वर्ग–अन्तराल का मध्यमाने ही उस वर्ग के सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करता है।

32539.

क्षैतिज दण्ड-चित्र किस प्रकार बनाये जाते हैं?

Answer»

जब दण्ड खड़े न होकर लेटी दशा में बनाये जाते हैं तो उन्हें क्षैतिज दण्ड कहते हैं। क्षैतिज दण्ड-चित्र बनाते समय सबसे बड़ा दण्ड ऊपर और सबसे छोटा दण्ड नीचे आना चाहिए। परन्तु यदि समंक विपरीत क्रम में हो तो दण्ड भी उसी क्रम में बनाये जाते हैं। क्षैतिज दण्ड चित्र में मापदण्ड की रेखा ऊपर की ओर ली जाती है।

32540.

रेखाचित्रों द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन के चार महत्त्व बताइए। 

Answer»

रेखाचित्रों द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन के चार महत्त्व निम्नलिखित हैं
⦁    रेखाचित्र समंकों के प्रदर्शन का आकर्षक एवं प्रभावशाली साधन है।
⦁    रेखाचित्र समंकों को सरल एवं बोधगम्य बनाते हैं।
⦁    रेखाचित्रों के द्वारा समंकों की तुलना सरलता से की जा सकती है।
⦁    रेखाचित्रों से समय एवं श्रम की बचत होती है।

32541.

किसी बारम्बारता बंटन में वर्ग- अन्तराल और संगत बारम्बारता से बना आलेख होगा(क) स्तम्भ चित्र(ख) आयत चित्र(ग) बारम्बारता बहुभुज(घ) बारम्बारता वक्र

Answer»

सही विकल्प है  (ख) आयत चित्र।

32542.

केन्द्रीय प्रवृत्ति का जो माप चरम मूल्यों से प्रभावित नहीं होता है, वह है(क) माध्य(ख) माध्य तथा बहुलक(ग) बहुलक(घ) माध्यिका।

Answer»

सही विकल्प है (क) माध्य।

32543.

संचयी आवृत्ति वक्र को कहा जाता है(क) ओजाइव(ख) पाई चित्र(ग) दण्ड आरेख(घ) अन्तर्विभक्त दण्ड आरेख

Answer»

सही विकल्प है  (क) ओजाइव।

32544.

आवृत्ति बहुभुज किसे कहते हैं?

Answer»

आवृत्तियों के वितरण का ग्राफ ‘आवृत्ति बहुभुज’ के नाम से जाना जाता है।

32545.

समूहों या वर्गों को तैयार करने के लिए कौन-सी विधि प्रयोग में लायी जाती है(a) समावेशी विधि(b) अपवर्जी विधि(c) (a) व (b) दोनों(d) इनमें से कोई नहीं।

Answer»

(c) (a) व (b) दोनों। 

32546.

साधारण आवृत्ति को प्रदर्शित करने वाला संकेताक्षर है(a)f(b) cf(c) s(d) t.

Answer»

सही विकल्प है (a) f.

32547.

समूहों या वर्गों को तैयार करने के लिए लाई जाने वाली विधियों के नाम बताइए।

Answer»

⦁    अपवर्ती विधि एवं
⦁    समावेशी विधि।

32548.

आवृत्ति किसे कहते हैं?

Answer»

मदों की संख्याएँ ‘आवृत्ति’ कहलाती हैं।

32549.

संचयी आवृत्ति को किससे प्रदर्शित करते हैं?

Answer»

संचयी आवृत्ति को cf से प्रदर्शित करते हैं। 

32550.

प्राथमिक आँकड़ों के साधनों के नाम बताइए।

Answer»

प्राथमिक आँकड़ों के साधन

⦁    व्यक्तिगत प्रेक्षण
⦁    साक्षात्कार
⦁    प्रश्नावली व अनुसूची एवं
⦁    अन्य विधियाँ।