This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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तैमूर ने भारत पर आक्रमण क्यों किया? |
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Answer» तैमूर के आक्रमण का उद्देश्य केवल भारत पर आक्रमण करना और लूट का सामान मध्य एशिया ले जाना था। |
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पानीपत का प्रथम युद्ध किनके मध्ये लड़ा गया। |
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Answer» पानीपत का प्रथम युद्ध बाबर और इब्राहिम लोदी के मध्य लड़ा गया। |
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बहमनी राज्ये टूटकर कौन-कौन से राज्यों में बँट गया? |
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Answer» बहमनी राज्य टूटकर पाँच राज्यों में बँट गया – अहमदनगर, गोलकुंडा, बीजापुर, बरार और बीदर। |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (पूर्ति करके)-(क) हसन गंगू (बहमन शाह) ने _____ को राजधानी बनाया।(ख) विजयनगर साम्राज्य की राजधानी _____ थी।(ग) विजयनगर साम्राज्य का प्रमुख शासक _____ था।(घ) रायचूर दोआब कृष्णा और _____ नदियों के बीच का क्षेत्र था। |
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Answer» (क) हसन गंगू (बहमन शाह) ने गुलबर्ग को राजधानी बनाया। |
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कृष्णदेव राय के बारे में आप क्या जानते हैं? |
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Answer» कृष्ण देव राय विजयनगर राज्य के महत्वपूर्ण शासक थे। |
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| 32406. |
लोदी वंश का संस्थापक कौन था? |
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Answer» लोदी वंश का संस्थापक बहलोल लोदी था। |
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| 32407. |
बहमनी एवं विजयनगर राज्यों में किन कारणों से युद्ध होता रहता था? |
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Answer» बहमनी एवं विजयनगर राज्यों में निम्न कारणों से युद्ध होता रहता था|
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विजयनगर साम्राज्य की नींव किसने रखी थी? |
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Answer» विजयनगर साम्राज्य की नींव हरिहर और बुक्का नाम के दो भाइयों ने रखी थी। |
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| 32409. |
लोदी वंश में कौन-कौन से शासकों ने शासन किया? |
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Answer» लोदी वंश में बहलोल लोदी, सिंकदर लोदी तथा इब्राहिम लोदी आदि शासकों ने शासन किया। |
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सिकन्दर लोदी की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» सिकन्दर लोदी की उपलब्धियाँ- सिकन्दर लोदी (सन 1489 ई. से 1517 ई.) ने पश्चिम बंगाल तक गंगा की घाटी पर अपना अधिकार किया। 1504 ई. में उसने अपनी राजधानी दिल्ली से हटकर नए नगर में स्थापित की, जो बाद में आगरा के नाम से प्रसिद्ध हुई। जनता की भलाई के लिए अनेक कार्य किए तथा प्रजा को राजभक्त और राज्य को शक्तिशाली बनाने का प्रयत्न किया। वस्तुओं का मूल्य घटाकर और मूल्य पर नियंत्रण करके उसने राज्य की आर्थिक दशा को सुधारने का प्रयास किया। उसने अलाउद्दीन के गज में सुधार किया और भूमि की माप द्वारा भू-राजस्व निर्धारित किया। |
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| 32411. |
बहलक के उपयोग के क्या लाभ हैं? |
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Answer» बहुलक के प्रयोग से गणना आसान हो जाती है और इसे समझना आसान हो जाता है (इसे निरीक्षण द्वारा ही ज्ञात कर लिया जाता है)। |
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रिक्त स्थानों की पूर्ति करो (पूर्ति करके)।(क) सुल्तान ____ तुगलक वंश का अन्तिम शासक था।(ख) गज-ए-सिकन्दरी की लम्बाई _____ इंच होती थी।(ग) तैमूर की राजधानी ____ थी।(घ) सैय्यद वंश की स्थापना _____ ने की थी। |
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Answer» (क) सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद तुगलक वंश का अन्तिम शासक था। |
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बहमनी वंश का संस्थापक कौन था? |
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Answer» बहमनी वंश का संस्थापक हसन गंगू था। |
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बहुलक की विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» बहुलक की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ बहुलक में सर्वाधिक आवृत्ति होती है। |
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अपकिरण किसे कहते हैं? |
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Answer» सरल भाषा में अपकिरण विभिन्न इकाइयों का माध्य मूल्य से विचलन को कहते हैं। अपकिरण माध्य मूल्य से प्रसार, बिखराव, प्रकीर्णन परिक्षेपण आदि हैं। कोनर के अनुसार, “जिस सीमा तक व्यक्तिगत पद-मूल्यों में भिन्नता होती है, उसके माप को अपकिरण कहते हैं।” |
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एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» एक आदर्श माध्य के आवश्यक तत्त्व/विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ आदर्श माध्य की स्थिर परिभाषा होती है। |
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माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» माध्य की उपयोगिता तथा उद्देश्य निम्नलिखित हैं ⦁ माध्य संक्षिप्तीकरण में सहायक है। |
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सहसम्बन्ध को परिभाषित कीजिए। |
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Answer» चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव की माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहते हैं। |
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सहसम्बन्ध की अधिकतम सीमाएँ क्या हैं? |
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Answer» सहसम्बन्ध की अधिकतम विस्तार (सीमा) 1 (एक) है। |
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माध्य, माध्यिका तथा बहुलक की उपयोगिता पर टिप्पणी कीजिए (संकेत : उनके गुण तथा दोषों से)। |
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Answer» (I) माध्य माध्य के गुण माध्य के निम्नलिखित गुण हैं ⦁ सरल-इसकी गणना करना तथा इसे समझना बहुत सरल है। माध्य के दोष माध्य के निम्नलिखित दोष हैं ⦁ चरम मूल्यों का प्रभाव-माध्य पर चरम मूल्यों का अधिक प्रभाव होता है। (II) माध्यिका माध्यिका के गुण माध्यिका के निम्नलिखित गुण हैं ⦁ सरल-माध्यिका को समझना और ज्ञात करना सरल है। माध्यिका के दोष माध्यिका के निम्नलिखित दोष हैं. ⦁ समंकों का क्रम-समंकों को क्रम में जमाने में अधिक समय लगता है। (III) बहुलक बहुलक के गुण बहुलक के निम्नलिखित गुण हैं ⦁ सरल गणना- इसकी गणना बड़ी सरल है। बहुलक के दोष बहलक के निम्नलिखित दोष हैं ⦁ अनिश्चित माध्य-बहुलक सबसे अधिक अनिश्चित व अस्पष्ट माध्य है। |
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| 32421. |
आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन से आप क्या समझते हैं ? रेखाचित्र द्वारा आँकड़ों के प्रदर्शन का क्या महत्त्व है ? यासमंकों के चित्रमय प्रदर्शन से आप क्या समझते हैं। आर्थिक अध्ययनों में इसके उपयोग बताइए।यादण्ड आरेख से आप क्या समझते हैं ? दण्ड आरेख के प्रकारों की विवेचना कीजिए।याआँकड़ों के चित्र सहित प्रदर्शन की उपयोगिता (महत्त्व) की विवेचना कीजिए। यासमंकों के रेखाचित्रीय निरूपण के लाभों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» सांख्यिकी का यह महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है कि जटिल और विशाल आँकड़ों को इस रूप में प्रस्तुत करना कि वे समझने में सरल हो जाएँ। वर्गीकरण और सारणीयन के अन्तर्गत भी यही उद्देश्य निहित होता है। कभी-कभी अंकों का यह जमघट मस्तिष्क को भारी कर देता है। इसीलिए सांख्यिकीय आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन की आवश्यकता समझी गयी। आँकडों के चित्रमय प्रदर्शन का महत्त्व या लाभ उपयोगिता) 1. चित्र समंकों को सरल व सुबोध बनाते हैं – जब समंक लम्बे-चौड़े दिये होते हैं तब उन्हें समझना कठिन होता है। बड़े-बड़े समंकों को देखकर मस्तिष्क परेशान हो जाता है तथा कोई भी निष्कर्ष नहीं निकल पाता है। सांख्यिकीय आँकड़े चित्रों, आकृतियों व आलेखों द्वारा निरूपित किये जाने से सरल तथा सुबोध हो जाते हैं। |
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माध्य क्या है? |
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Answer» माध्य- इसे औसत भी कहते हैं। आँकड़ों को समझने और उनकी तुलना करने में औसत सर्वाधिक प्रभावशाली है। माध्य या औसत एक ऐसी अकेली संख्या है जो पूरी श्रृंखला के सभी आँकड़ों का प्रतिनिधित्व करती है। औसत तो अधिकतम और न्यूनतम मूल्यों के बीच का एक मूल्य या मद होती है जो अधिक या कम सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व कर देती है। |
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पूर्ण सहसम्बन्ध किसे कहते हैं? |
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Answer» सहसम्बन्ध पूरा 1 (एक) होने पर (चाहे धनात्मक हो या ऋणात्मक) इसे ‘पूर्ण सहसम्बन्ध’ कहते हैं। |
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समंकों को रेखाचित्रों द्वारा प्रदर्शित करने की विभिन्न विधियाँ बताइए।यादण्ड-चित्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» सांख्यिकी में सामान्यत: निम्नलिखित प्रकार के रेखाचित्रों का प्रयोग किया जाता है ⦁ एक विमा (विस्तार) वाले चित्र (One dimensional diagrams), एक विमा (विस्तार) वाले चित्र (क) रेखाचित्र (Line Diagram) – आँकड़ों के चित्रमय प्रदर्शन के अन्तर्गत यह चित्र प्रदर्शन में सबसे सरल है। इस चित्र का प्रयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ किसी तथ्य से सम्बन्धित आँकड़ों की संख्या बहुत अधिक हो, लेकिन उनमें अन्तर बहुत कम हो। इस चित्र में समंकों को दर्शाने के लिए खड़ी रेखाओं का प्रयोग किया जाता है। इस चित्र का लाभ यह है कि समंकों के बीच तुलना आसानी से हो जाती है। यह चित्र आकर्षक नहीं दिखाई पड़ता, इसलिए इसका प्रयोग कम किया जाता है। (पाठ्यक्रम में इसको सम्मिलित नहीं किया गया है।) (क) आयत चित्र (Rectangular Diagram) – आयत चित्र उस चित्र को कहते हैं, जिसमें आयत की लम्बाई तथा चौड़ाई दोनों का महत्त्व होता है और दोनों दो भिन्न-भिन्न तथ्यों को स्पष्ट करते हैं। उत्पादन लागत विश्लेषण तथा पारिवारिक बजटों के चित्रण में आयत चित्रों का प्रयोग किया जाता है। |
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| 32425. |
प्रकीर्णन का कौन-सा माप सबसे अधिक अस्थिर है तथा क्यों? |
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Answer» परिसर अथवा विस्तार किसी श्रृंखला में अधिकतम तथा न्यूनतम मानों के बीच अन्तर को परिसर (Range) कहते हैं। इसकी गणना निम्नलिखित सूत्र के द्वारा की जाती है, अर्थात् परिसर, परिवर्तनशीलता का अशोधित (crude) माप है और इसे सावधानी से केवल उसी परिस्थिति में प्रयोग करना चाहिए जहाँ आँकड़े लगातार तथा नियमित हों। |
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सहसम्बन्ध किसे कहते हैं? इसके प्रकारों को समझाइए। |
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Answer» सहसम्बन्ध का अर्थ प्रकृति में प्रत्येक तथ्य एवं परिघटना किसी अन्य तथ्य या परिघटना से प्रभावित और संबंधित होती है। इसी कारण दो या दो से अधिक श्रेणियों में परस्पर सम्बन्ध पाया जाता है अर्थात् एक श्रेणी में परिवर्तन आने पर दूसरी श्रेणी में भी परिवर्तन आ जाता है। उदाहरण- किसी स्थान पर तापमान बढ़ने से वहाँ का वायुदाब कम होने लगता है। चरों के बीच सम्बन्धों की तीव्रता और उसके स्वभाव के माप को ‘सहसम्बन्ध’ कहा जाता है। सहसम्बन्ध के प्रकार सहसम्बन्ध के दो प्रकार निम्नलिखित हैं 1. धनात्मक सहसम्बन्ध- जब दो चरों में परिवर्तन एक ही दिशा में होता है अर्थात् एक चर के बढ़ने पर दूसरा चर भी बढ़ता है और एक के घटने पर दूसरा भी घटता है तो ऐसे सहसम्बन्ध को ‘धनात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं। 2. ऋणात्मक सहसम्बन्ध- जब दो चरों में परिवर्तन एक-दूसरे की विपरीत दिशाओं में होता है तो इसे ‘ऋणात्मक सहसम्बन्ध’ कहते हैं। |
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सांख्यिकी में चित्रों की आवश्यकता एवं महत्त्व को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सांख्यिकी विज्ञान का एक प्रमुख कार्य विशाल व जटिल समंक समूहों को इस प्रकार प्रस्तुत करना है कि वे सरल, स्पष्ट एवं समझने योग्य हो जाएँ। इस कार्य के लिए अनेक सांख्यिकीय विधियों का प्रयोग किया जाता है। इसमें समंकों का चित्रमय प्रदर्शन एक महत्त्वपूर्ण विधि है। चित्र नीरस समंकों को अर्थपूर्ण, रोचक व अधिक बोधगम्य बनाते हैं। चित्रमय प्रदर्शन की आवश्यकता, महत्त्व अथवा उपयोगिता को निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है 1. आकर्षक एवं प्रभावी – चित्र आकर्षक होते हैं तथा मानव मस्तिष्क पर स्थायी प्रभाव डालते हैं। सामान्य व्यक्ति जो समंकों के जाल में उलझना नहीं चाहता चित्रों का रुचि के साथ अवलोकन करता है। 2. तथ्यों को सरल व बोधगम्य बनाना – चित्र जटिल एवं अव्यवस्थित विशाल तथ्यों को सरल वे सुबोध बनाते हैं। चित्रों के माध्यम से समंकों की समस्त विशेषताएँ स्पष्ट हो जाती हैं। प्रो० स्टीफन कल्फ के शब्दों में–“एक चित्र अधिक स्पष्ट तथा चित्त को सीधे किर्षित करने वाली तस्वीर प्रदान करता है।” 3. तुलना में सहायक – चित्रों से विभिन्न समंक समूहों में तुलना करना सरल हो जाता है। चित्रमय प्रदर्शन का एक प्रमुख उद्देश्य समंकों को तुलनीय बनाना है। 4. समय व श्रम की बचत – चित्रों द्वारा प्रदर्शित समंकों को बिना मस्तिष्क पर अधिक भार डाले ही सरलता से समझा जा सकता है। इससे समय व श्रम की बचत होती है। 5. व्यापक उपयोगिता – समंकों के चित्रमय प्रदर्शन का व्यापक प्रयोग होता है। आर्थिक, व्यापारिक, शासकीय, सामाजिक तथा अन्य क्षेत्रों में समंकों का व्यापक रूप से उपयोग होता है। 6. विशेष ज्ञान व प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं – चित्र समझने में सरल होते हैं। इसके लिए किसी विशेष ज्ञान व प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि विज्ञापन में चित्रों की सहायता ली जाती है। 8. अधिक जानकारी देना – चित्र समंकों को सापेक्ष रूप में प्रस्तुत करते हैं। साथ में वे समंकों में विद्यमान प्रवृत्ति और उस प्रवृत्ति में परिवर्तनों की भी स्पष्ट करते हैं। |
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समंकों के बिन्दुरेखीय प्रदर्शन का महत्त्व बताइए। |
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Answer» आँकड़ों को स्पष्ट, आकर्षक एवं रुचिकर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए सांख्यिकीय अनुसन्धान में बिन्दुरेखीय चित्रों का प्रदर्शन किया जाता है। इनका निर्माण बिन्दुरेखीय पत्र (ग्राफ पेपर) पर किया जाता है। ये चित्र दो चरों के परस्पर सम्बन्ध अथवा परस्पर निर्भरता को अधिक अच्छे ढंग से समझने में सहायक होते हैं। इनके माध्यम से दो चरों में होने वाले परिवर्तन का अनुमान अधिक शीघ्रता से लगाया जा सकता है। बिन्दुरेखीय चित्रों का महत्त्व बिन्दुरेखीय चित्रों के महत्त्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है 1. तुलना करने तथा सह – सम्बन्ध दिखाने में सहायक–बिन्दुरेखीय चित्र समंकों अथवा तथ्यों की तुलना करने में सहायक हैं इनसे केवले तुलना में ही सहायता नहीं मिलती अपितु दो चरों (Variables) में क्या सम्बन्ध है इसका भी पता चला जाता है। 2. सभी प्रकार के व्यक्तियों के लिए उपयोगी – बिन्दुरेखीय चित्र साधारण व्यक्तियों तथा सांख्यिकीय के छात्रों और अनुसन्धानकर्ता सभी प्रकार के व्यक्तियों के लिए उपयोगी हैं क्योंकि इनसे हमें तथ्यों का सरसरी ज्ञान मात्र ही नहीं होता अपितु चरों के पारस्परिक सम्बन्धों तथा परिवर्तन की दिशाओं का पता भी सरलता से हो जाता है। 3. आँकों के परिशुद्ध प्रदर्शन में सहायक – बिन्दुरेखीय चित्र अधिक स्पष्ट, सुबोध एवं परिशुद्ध होते हैं क्योंकि इनमें प्रत्येक बिन्दु तथा रेखा को अपना विशिष्ट महत्त्व होता है। 4. सांख्यिकीय अनुमापन में सहायक – बिन्दुरेखीय चित्रों से हमें भूयिष्ठक तथा मध्यका का भी अनुमान हो जाता है। छूटी हुई संख्या का पता लगाने अथवा किसी विशेषता की व्याख्या करने में बिन्दुरेखीय चित्र सहायक हैं। 5. आँकड़ों की विवेचना में सहायक – बिन्दुरेखीय चित्रों से समय-क्रम (Time series), सतत पदमालाओं (Continuous series) तथा आवृत्ति वितरण (Frequency distribution) का प्रदर्शन भी सम्भव हैं आन्तरगणन (Interpolation) का भी इन चित्रों से पता चल जाता है। इस . प्रकार ये आँकड़ों की विवेचना में भी सहायक हैं। 6. समय तथा धन की बचत – बिन्दुरेखीय चित्र अन्य चित्रों की अपेक्षा सरलता से बनाए जा सकते हैं, इसलिए समय तथा धन की बचत होती है। इनमें केवल ग्राफ पेपर, पेंसिल, रबर तथा पैमाने की ही आवश्यकता पड़ती है। 7. आकर्षक व प्रभावशाली – बिन्दुरेखीय चित्र बहुत ही आकर्षक होते हैं। उन्हें देखकर कोई भी व्यक्ति आसानी से प्रभावित हो जाता है। 8. समझने में सरल – समंकों की अव्यवस्थित एवं विशाल राशि बिन्दुरेख के द्वारा सरल व सुबोध बन जाती है जिसे साधारण व्यक्ति भी सरलता से समझ लेता है। 9. स्थायी प्रभाव – संख्या सम्बन्धी सूचनाओं को हम कुछ समय उपरान्त भूल जाते हैं किन्तु बिन्दुरेखाओं को प्रभाव पर्याप्त अंशों में स्थायी होता है। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा समूह भारत की निर्यात वस्तुओं को प्रदर्शित करता है?(क) पेट्रोलियम, स्वर्ण एवं चाँदी(ख) खाद, तेल, उर्वरक(ग) मोती एवं बहुमूल्य पत्थर, पूँजीगत वस्तुएँ(घ) सिले-सिलाए वस्त्र, समुद्री उत्पाद |
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Answer» (घ) सिले-सिलाए वस्त्र, समुद्री उत्पाद। |
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निम्नलिखित वस्तुओं में से भारत किसका आयात नहीं करता है? (क) उर्वरक(ख) पेट्रोलियम पदार्थ(ग) चाय(घ) मशीनें |
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Answer» सही विकल्प है (ग) चाय। |
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विचरण गुणांक और प्रमाप विचलन में क्या अंतर है? |
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Answer» विचरण गुणंक माध्य में होने वाला प्रतिशत विचरण है जबकि प्रमाप विचलन माध्य में होने वाला कुल विचरण है। |
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विचरण गुणांक (Coefficient of variation) क्या है? |
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Answer» विचरण गुणांक प्रमाप विचलन का प्रतिशत रूप है। \([ s=2](\frac { \sigma }{ \overline { X } } \times 100)\) |
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| 32433. |
विचरण गुणांक क्या है? इसका सूत्र लिखिए। |
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Answer» विचरण गुणांक,Coefficient of Variation)-दो या दो से अधिक श्रेणियों में विचलन की तुलना करने के लिए विचरण गुणांक का प्रयोग किया जाता है। यह माप विचलन गुणांक का प्रतिशत रूप है। दूसरे शब्दों में, प्रमाप विचलन को समान्तर माध्य से भाग देकर भजनफल में 100 की गुणा करने से प्राप्त प्रतिशत ही ‘विचरण गुणांक’ होता है। सूत्र रूप में निर्वचन – जिस समंक श्रेणी का विचरण गुणांक अधिक होता है उसमें विचरण अधिक होता है और वह श्रेणी अधिक अस्थिर व असंगत मानी जाती है। इसके विपरीत, जिस श्रेणी में विचरण गुणांक कम होता है, वह अधिक स्थिर व संगत मानी जाती है। |
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| 32434. |
मध्यिका को परिभाषित कीजिए तथा उसके गुण, दोष व उपयोग बताइए। अथवा मध्यिका के गुण-दोषों पर टिप्पणी कीजिए। |
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Answer» मध्यिका अर्थ एवं परिभाषा – मध्यिका आरोही अथवा अवरोही क्रम में अनुविन्यसित समंकमाला के विभिन्न पदों के मध्य का मूल्य (middle item) होती है और वह समंकमाला को दो भागों में इस प्रकार बाँटती है। कि उसके एक ओर के सब पद उससे कम मूल्य के तथा दूसरी ओर के सब पद उससे अधिक मूल्य के होते हैं। मध्यिका के गुण मध्यिका के दोष या सीमाएँ मध्यिका के उपयोग |
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| 32435. |
माध्य विचलन का गुणांक कैसे निकाला जाता है? |
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Answer» माध्य विचलन का गुणांक निकालने के लिए माध्य विचलन को उसके औसत से भाग कर दिया जाता है। |
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| 32436. |
प्रमाप विचलन को परिभाषित कीजिए। |
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Answer» “प्रमाप विचलन समान्तर माध्य से श्रृंखला के विभिन्न मूल्यों के विचलनों के वर्गों के माध्य को वर्गमूल है।” |
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समान्तर माध्य, मध्यिका एवं बहुलक में परस्पर सम्बन्ध दर्शाइए। |
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Answer» समान्तर माध्य \(([s=2]\overline { X })\), मध्यिका (M) तथा बहुलक (Z) में सम्बन्ध आवृत्ति वितरण की प्रकृति पर निर्भर करता है। आवृत्ति वितरण दो प्रकार का होता है 1. सममित आवृत्ति वितरण – इस स्थिति में X, M तथा Z के मूल्य एक-दूसरे के समान होते हैं \([ s=2]\overline { X } = M = Z\) 2. असममितीर्य आवृत्ति वितरण – इस स्थिति में (X – Z) सामान्यत: 3(X – M) के बराबर होते हैं अर्थात् \(([ s=2]\overline { X } – Z) = 3([ s=2]\overline { X } – M)\) |
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| 32438. |
सरल व भारित समान्तर माध्य की तुलना कीजिए। |
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Answer» सरल व भारित समान्तर माध्य की तुलना 1. श्रेणी के प्रत्येक मूल्य को समान भार देने की दशा में सरल व भारित समान्तर माध्य बराबर होते हैं। \([s=2]\overline { X } = [ s=2]\overline { X }w\) 2. जब श्रेणी के छोटे मूल्यों को अधिक भार और बड़े मूल्यों को कम भार दिया जाता है, तब सरल समान्तर माध्य भारित समान्तर माध्य से अधिक होता है। \([s=2]\overline { X } > [s=2]\overline { X }w\) 3. जब श्रेणी के छोटे मूल्यों को कम भार तथा बड़े मूल्यों को अधिक भार दिया जाता है, तब सरल समान्तर माध्य भारित समान्तर माध्य से कम होता है। |
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| 32439. |
समान्तर माध्य किसे कहते हैं? समान्तर माध्य के गुण-दोषों की व्याख्या कीजिए। |
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Answer» समान्तर माध्य का अर्थ समान्तर माध्य (Arithmetic Mean) केन्द्रीय प्रवृत्ति का सबसे सरल एवं लोकप्रिय माप है। सामान्यतः औसत शब्द का प्रयोग इसी माध्य के लिए किया जाता है। यह सभी माध्यों में उत्तम माना जाता है। इसको इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है-“किसी भी श्रेणी के समस्त पदों के मूल्य के योग में उनकी संख्या का भाग देने से समान्तर मध्य प्राप्त होता है।” साधारण शब्दों में, समंकमाला के पदों के जोड़ में उनकी संख्या का भाग देने से जो राशि प्राप्त होती है, उसे माध्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। किंग के अनुसार-“किसी श्रेणी के पदों के मूल्यों के योग में उनकी संख्या का भाग देने से जो मूल्य प्राप्त होता है, उसे समान्तर माध्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।” मिल के अनुसार-“समान्तर माध्य किसी वितरण का केन्द्रीय मूल्य है।” समान्तर माध्य के गुण समान्तर माध्य के दोष उपर्युक्त दोषों के होते हुए भी इसका प्रयोग सामाजिक तथा आर्थिक समस्याओं के अध्ययन में किया जाता है। |
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बहुलक के दोष बताइए। इसके क्या उपयोग हैं? |
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Answer» बहुलक के दोष-बहुलक के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं– ⦁ यदि श्रेणी के सभी पदों की आवृत्तियाँ समान हैं तो बहुलक का निर्धारण नहीं किया जा सकता। बहुलक के उपयोग – उपर्युक्त दोषों के बावजूद दैनिक जीवन तथा व्यापारिक क्षेत्र में बहुलक का बहुत अधिक उपयोग किया जाता है। यह शीघ्रता व सरलता से समझ में आ जाता है, इसलिए व्यावसायिक जीवन में इसका प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। व्यापारिक पूर्वानुमानों में यह एक महत्त्वपूर्ण पथ-प्रदर्शक है। उद्योग व प्रशासन के क्षेत्र में इसकी सहायता से औसत उत्पादन ज्ञात किया जाता है तथा विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता की तुलना की जाती है। किसी वस्तु के उत्पादन में उसकी लागत का अनुमान बहुलक समय के निर्धारण द्वारा आसानी से लगाया जा सकता है। विभिन्न वस्तुओं की लोकप्रिंयता का अध्ययन बहुलक द्वारा ही किया जाता है। मौसम सम्बन्धी पूर्वानुमानों में भी इसी का प्रयोग होता है। |
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| 32441. |
बहुलक क्या है? बहुलक के गुण बताइए। |
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Answer» बहुलक का अर्थ - बहुलक वह मूल्य है जो समंकमाला में सबसे अधिक बार आता है अथवा जिसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है। बहुलक के गुण-बहुलक के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं ⦁ यह एक सरल एवं लोकप्रिय माध्य है। कुछ दशाओं में तो यह केवल निरीक्षण द्वारा ही ज्ञात किया जा सकता है। |
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मध्यिका के प्रमुख दोष बताइए। मध्यिका के क्या उपयोग हैं? |
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Answer» मध्यिका के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं ⦁ मध्यिका के पदों की संख्या से गुणा करने पर पदों का कुल योग मालूम नहीं होता। मध्यिका के उपयोग – मध्यिका समझने में सरल है; अत: व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए इसका बहुत अधिक उपयोग होता है। इसके द्वारा गुणात्मक तथ्यों जैसे—बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य आदि; का भी अध्ययन : किया जा सकता है। इसी कारण सामाजिक समस्याओं के विश्लेषण में यह अत्यधिक उपयोगी है। यही उन दशाओं में अधिक उपयोगी है, जहाँ अति सीमान्त पदों को महत्त्व नहीं दिया जाता अथवा वितरण विषम होता है। |
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| 32443. |
लॉरेज वक्र क्या है? इसके गुण व दोष बताइए। |
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Answer» लॉरेंज वक्र अपकिरण ज्ञात करने की एक बिंदुरेखीय रीति है। इसे संचयीप्रतिशत वक्र भी कहते हैं। गुण – दोष – |
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| 32444. |
“समान्तर माध्य किसी वितरण का केन्द्रीय मूल्य है।” यह कथन है(क) किंग का(ख) मिल का(ग) मेहता का(घ) पीगू का |
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Answer» सही विकल्प है (ख) मिल की। |
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| 32445. |
निम्नलिखित स्थितियों में कौन-सा औसत उपयुक्त होगा(क) तैयार वस्त्रों के औसत आकार।(ख) एक कक्षा में छात्रों की औसत बौद्धिक प्रतिभा।(ग) एक कारखाने में प्रति पाली औसत उत्पादन।(घ) एक कारखाने में औसत मजदूरी।(ङ) जब औसत से निरपेक्ष विचलनों का योग न्यूनतम हो।(च) जब चरों की मात्रा अनुपात में हो।(छ) मुक्तांत बारम्बारता बंटन के मामले में। |
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Answer» (क) बहुलक। (ख) मध्यिका। (ग) बहुलक या समान्तर माध्य। (घ) बहुलक या समान्तर माध्य। (ङ) समान्तर माध्य। (च) मध्यिका। (छ) मध्यिका |
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| 32446. |
अपकिर के सापेक्ष माप से क्या आशय है? |
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Answer» अपकिर के सापेक्ष माप वह होता है जिसमें आँकड़ों के अंतर को अनुपात या प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। |
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बहुलक के दो उपयोग बताइए। अथवा बहुलक का क्या व्यावहारिक प्रयोग है? |
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Answer» ⦁ उद्योग व प्रशासन के क्षेत्र में इसकी सहायता से औसत उत्पादन ज्ञात किया जाता है तथा विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता की तुलना की जाती है। |
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| 32448. |
केन्द्रीय प्रवृत्ति क्या है? परिभाषा लिखिए। |
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Answer» केन्द्रीय प्रवृत्ति से आशय किसी सांख्यिकी श्रृंखला के केन्द्रीय मूल्य या प्रतिनिधि मूल्य से है। किसी भी मनुष्य के लिए आँकड़ों के एक बहुत बड़े समूह को समझना या अपनी स्मृति में रखना कठिन होता है। इसलिए वह ऐसे मूल्य का ज्ञान प्राप्त करना पसन्द करेगा जो किसी श्रेणी के सभी आँकड़ों की विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता हो। इस प्रकार के मूल्य को केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप’ अथवा औसत या माध्य कहा जाता है। उदाहरण के लिए भारत के करोड़ों लोगों के आय सम्बन्धी आँकड़ों को समझना तथा याद रखना कठिन कार्य होगा परन्तु यदि यह कहा जाए कि वर्ष 2012 में भारत के लोगों की औसत आय १ 23,000 प्रतिवर्ष है तो हम सरलता से भारत के अधिकतर लोगों की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगा सकेंगे। इस औसत मूल्य को ही श्रृंखला का केन्द्रीय माप कहा जाता है। इसे स्थिति सम्बन्धी माप भी कहते हैं। अत: केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप से आशय सांख्यिकीय विश्लेषण की उन विधियों से है जिनके द्वारा किसी श्रेणी के चर को ऐसा मूल्य अर्थात् औसत ज्ञात किया जाता है जो समस्त श्रेणी का प्रतिनिधित्व करता है। 1. क्रोक्सटन तथा काउडेन के अनुसार – “आँकड़ों के विस्तार के अन्तर्गत स्थित एक ऐसे मूल्य को जिसका प्रयोग श्रृंखला के सभी मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाता है, औसत कहा जाता है। चूंकि औसत श्रृंखला के विस्तार के अन्तर्गत स्थित होता है इसलिए इसे केन्द्रीय प्रवृत्ति की माप भी कहा जाता है। |
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अविच्छिन्न श्रेणी में बहुलक का सूत्र दीजिए। |
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Answer» सूत्र: Z = \(l_1\,+\frac{f_1\,-\,f_0}{2f_1\,-\,f_0\,-\,f_2}\,\times\,i\) |
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बहुलक के दो दोष बताइए। |
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Answer» ⦁ सभी पदों पर आधारित न होने के कारण इसका बीजीय विवेचन सम्भव नहीं है। |
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