This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं? |
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Answer» तालिका में दी गई पाद टिप्पणी से लाभ यह है कि उससे तालिका के स्रोत की जानकारी हो जाती है तथा अन्य संकेतों का पता चलता है। |
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ओजाइव एक विधि है जिसमें(क) साधारण आवृत्ति नापी जाती है(ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है(ग) साधारण आवृत्ति अंकित की जाती है(घ) संचयी आवृत्ति अंकित की जाती है। |
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Answer» (ख) संचयी आवृत्ति नापी जाती है। |
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बिन्दु विधि के गुण व दोषों को समझाइए। |
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Answer» बिन्द विधि के गण ⦁ मात्रात्मक वितरण मानचित्र बनाने की सभी विधियों में बिन्दु विधि वितरण को सर्वाधिक शुद्ध रूप से प्रस्तुत करती है। बिन्दु विधि के दोष ⦁ बिन्दु मानचित्रों की रचना कठिन होती है, अत: अभ्यास और कुशलता के बिना इन्हें नहीं लगाया जा सकता। |
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आँकड़ा और सूचना के बीच अन्तर। |
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Answer» आँकड़ा- आँकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाषित किया गया है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं। सूचना- सूचना को एक प्रश्न के अर्थपूर्ण उत्तर अथवा अर्थपूर्ण उद्दीपक के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे अगले प्रश्नों में सोपानित किया जा सकता है। |
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आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्जी विधि क्या है? |
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Answer» आवृत्ति वर्गीकरण की अपवर्जी विधि में एक वर्ग के उच्च मूल्य को उसी वर्ग में शामिल किया जाता है। |
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साक्षात्कार लेते समय बरती जाने वाली सावधानियों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» साक्षात्कार लेते समय बरती जाने वाली सावधानियाँ-साक्षात्कार लेते समय शोधकर्ता के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक है ⦁ जिस व्यक्ति का साक्षात्कार लेना है उसके साथ मैत्रीपूर्वक मेलजोल स्थापित करना चाहिए। |
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आँकड़ों से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» किसी लक्षण के सम्बन्ध में प्राप्त मात्रात्मक सूचनाओं को, जो स्थान, समय या दशा से जुड़ी हुई होती हैं, ‘आँकड़े’ कहलाती हैं। |
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| 32558. |
साक्षात्कार प्रविधि की सीमाएँ बताइए। |
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Answer» साक्षात्कार प्रविधि की सीमाएँ निम्नलिखित हैं ⦁ साक्षात्कार में सूचनादाता पर निर्भरता होती है। |
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आँकड़ों के प्राथमिक स्रोतों से आपका क्या तात्पर्य है? |
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Answer» जो आँकड़े प्रथम बार व्यक्तिगत रूप से अथवा व्यक्तियों के समूह/संस्था अथवा संगठन द्वारा एकत्रित किए जाते हैं, आँकड़ों के प्राथमिक स्रोत कहलाते हैं। |
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| 32560. |
आँकड़ों से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» आँकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाषित किया गया है जो यथार्थ विश्व के मापन को प्रदर्शित करती हैं। |
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आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ . आरेखों की उपयोगिता/महत्त्व/लाभ अग्रलिखित हैं 1. सुबोध और सरल सूचना- आँकड़ों की लम्बी-लम्बी नीरस सूचनाएँ आरेखों द्वारा सहज ही समझ में आ जाती हैं। एक दृष्टि डालते ही बहुत-सी विशेषताएँ पता चल जाती हैं। 2. चिरस्मरणीय- इनके द्वारा प्रस्तुत आँकड़े लम्बे समय तक याद रहते हैं। 3. विशेषज्ञता आवश्यक नहीं- आरेखों को समझने के लिए किसी विशेष ज्ञान या प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती है। सामान्य व्यक्ति भी इनको समझ सकता है। 4. आकर्षक और प्रभावशाली- आरेख चित्रमय होते हैं। इन्हें आकर्षक बनाया जाता है। 5. समय व श्रम की बचत- आरेखों द्वारा आँकड़ों को समझने से अपेक्षाकृत कम समय लगता है तथा श्रम भी कम करना पड़ता है। एक चीनी कहावत है कि “एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है।” छोटे से आकार का आरेख कई पृष्ठों पर लिखे विवरण की जानकारी दे देता है। 6. तुलना में सहायक- आरेखों से तथ्यों की तुलना करना सरल है। 7. सूचना के साथ मनोरंजन– इनसे मनोरंजन भी होता है। 8. अनुमान में सहायक- इनके द्वारा भावी प्रवृत्ति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। |
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ओजाइव क्या है? |
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Answer» ओजाइव-जब आवृत्ति को जोड़ दिया जाता है, उन्हें संचयी आवृत्ति कहा जाता है और जिस सारणी में सूचीगत किए जाते हैं, उसे संचयी आवृत्ति सारणी कहते हैं। संचयी आवृत्ति द्वारा प्राप्त किए गए वक्र को ‘ओजाइव’ कहते हैं। इसका निर्माण या तो कमतर विधि या अधिकतर विधि द्वारा करते हैं।] |
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द्वितीयक आँकड़ों के पाँच स्रोत बताइए। |
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Answer» द्वितीयक आँकड़ों के पाँच स्रोत हैं ⦁ सरकारी प्रकाशन |
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प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं प्राथमिक आँकड़ों की विशेषताएँ ⦁ ये आँकड़े विस्तृत क्षेत्र और विस्तृत जानकारी के लिए उपयुक्त हैं। द्वितीयक आँकड़ों की विशेषताएँ ⦁ द्वितीयक आँकड़े मौलिक नहीं होते, क्योंकि अनुसन्धानकर्ता अन्य एजेन्सियों द्वारा एकत्रित आँकड़ों का प्रयोग करते हैं। |
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सूचकांक की उपयोगिता एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» सूचकांक की उपयोगिता एवं महत्त्व निम्नलिखित हैं ⦁ सूचकांक की उपयोगिता सार्वभौमिक है। |
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समावेशी विधि से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» समावेशी विधि-समावेशी विधि में एक मूल्य जो वर्ग की उच्च सीमा के मूल्य के समान होता है, उसे उसी वर्ग में रखा जाता है; इसीलिए इस विधि को ‘समावेशी विधि’ कहते हैं। इस विधि में वर्गों को अलग प्रकार से प्रदर्शित किया जाता है। साधारणतया वर्ग की उच्च सीमा में अगले वर्ग की निम्न सीमा से 1 का अंतर होता है। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस विधि में वर्ग का विस्तार 10 इकाइयों तक होता है।. |
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साक्षात्कार प्रविधि का महत्त्व समझाइए। |
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Answer» साक्षात्कार प्रविधि का महत्त्व निम्नलिखित है ⦁ साक्षात्कार से सभी प्रकार की सूचनाओं का संकलन होता है। |
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सारणीयन के लाभों पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» सारणीयन के निम्नलिखित लाभ हैं ⦁ सारणीयन से अंकों की गणना आदि करने में आसानी रहती है। |
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द्वितीयक आँकड़ों के स्रोतों के नाम बताइए। |
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Answer» द्वितीयक आँकड़ों के दो स्रोत हैं (1) प्रकाशित एवं 1. प्रकाशित एवं ⦁ सरकारी प्रकाशन 2. अप्रकाशित स्रोत ⦁ सरकारी प्रलेख |
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निरपेक्ष आँकड़ा क्या है? |
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Answer» जब आँकड़े अपने मूल रूप में पूर्णांक की तरह प्रस्तुत किए जाते हैं, उन्हें ‘निरपेक्ष आँकड़े’ (कच्चे आँकड़े) कहा जाता है। |
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प्राथमिक आँकड़ों को एकत्रित करने के स्रोतों के नाम बताइए। |
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Answer» ⦁ प्रत्यक्ष व्यक्तिगत साक्षात्कार द्वारा |
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प्राथमिक व द्वितीयक आँकड़ों में क्या अन्तर है? |
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Answer» जब शोधकर्ता स्वयं क्षेत्र में या आँकड़ों के स्रोत पर पहुँचकर मात्रात्मक सूचनाएँ प्राप्त करता है तो उन्हें ‘प्राथमिक आँकड़े’ कहते हैं। सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, व्यक्तिगत प्रकाशनों तथा पत्र-पत्रिकाओं, रिपोर्टों से प्राप्त आँकड़े ‘द्वितीयक आँकड़े’ कहलाते हैं। |
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प्राथमिक आँकड़ों के साधनों का विस्तृत वर्णन कीजिए। |
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Answer» प्राथमिक आँकड़ों के साधन प्राथमिक आँकड़ों के साधन हैं— व्यक्तिगत प्रेक्षण, साक्षात्कार, प्रश्नावली अथवा अनुसूची एवं अन्य विधियाँ। 1. व्यक्तिगत प्रेक्षण- इस विधि में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा क्षेत्र में प्रत्यक्ष प्रेक्षण द्वारा आँकड़े एकत्रित किए जाते हैं। प्रेक्षक स्वयं क्षेत्र में जाकर सूचनाएँ एकत्रित करता है। प्रेक्षणकर्ता को विषय का सैद्धान्तिक ज्ञान होना आवश्यक है, ताकि मूल्यांकन वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष हो सके। 2. साक्षात्कार- इस विधि में शोधकर्ता उत्तर देने वाले व्यक्ति के साथ प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित करता है और संवाद तथा बातचीत द्वारा सूचनाएँ अथवा आँकड़े प्राप्त करता है। 3. प्रश्नावली- इस विधि में वांछित सूचना से सम्बन्धित साधारण प्रश्नों को उनके सम्भावित उत्तरों के साथ एक सादे कागज पर लिखा जाता है और उत्तर देने वाले व्यक्ति को दिए गए विकल्पों में सही उत्तर पर निशान लगाने को कहा जाता है। 4. अनुसूची- अनुसूची लगभग प्रश्नावली जैसी ही होती है, क्योंकि इसमें भी जाँच-पड़ताल से सम्बन्धित प्रश्न दिए हुए होते हैं। इन दोनों में अन्तर केवल यह है कि प्रश्नावली में उत्तर देने वाला प्रश्नावलियों को स्वयं भरता है, जबकि अनुसूची में परिगणक उत्तर देने वाले से प्रश्न पूछकर स्वयं भरता है। 5. अन्य विधियाँ- उपर्युक्त विधियों के अलावा कुछ अन्य विधियों की सहायता से भी आँकड़े एकत्रित किए जा सकते हैं। |
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सूचकांक से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» सूचकांक-सूचकांक चर अथवा एक सांख्यिकीय माप है जिसे चर अथवा समय भौगोलिक स्थिति या दूसरी विशेषताओं के सन्दर्भ में सम्बन्धित चरों के सम्बन्धित समूह में परिवर्तन को दर्शाने के लिए अभिकल्पित किया जाता है। सूचकांक न केवल समय के साथ हुए परिवर्तनों की माप करता है बल्कि विभिन्न स्थानों, उद्योगों, नगरों अथवा देशों की आर्थिक दशाओं की तुलना भी करता है। |
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सारणीयन के उद्देश्यों को समझाइए। |
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Answer» सारणीयन के निम्नलिखित उद्देश्य हैं ⦁ सारणीयन का प्रमुख उद्देश्य अनुसन्धान द्वारा प्राप्त सामग्री को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना है। |
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एक मिलान चिह्न में, फोर एवं क्रॉसिंग फिफ्थ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं(क) फोर एंड क्रॉस विधि(ख) मिलान चिह्न विधि(ग) आवृत्ति अंकित विधि(घ) समावेश विधि। |
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Answer» (क) फोर एंड क्रॉस विधि। |
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आँकड़ों के द्वितीयक स्रोत का अप्रकाशित साधन है(a) सरकारी प्रलेख(b) अर्द्धसरकारी प्रलेख(c) निजी प्रलेख(d) उपर्युक्त सभी। |
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Answer» (d) उपर्युक्त सभी। |
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प्राथमिक आँकड़ों का साधन नहीं है(a) साक्षात्कार(b) प्रश्नावली(c) अनुसूची(d) सरकारी प्रकाशन। |
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Answer» (d) सरकारी प्रकाशन। |
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आँकड़े एकत्रित करने के स्रोत हैं(a) दो(b) तीन(c) चार(d) पाँच। |
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Answer» सही विकल्प है (a) दो। |
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राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरणों की चर्चा कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं। |
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Answer» राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय अभिकरण निम्नलिखित हैं जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्र किए जा सकते हैं (1) सरकारी प्रकाशन- केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकारों के अनेक मंत्रालय तथा विभाग और जिलों के बुलेटिन द्वितीय सूचनाओं के महत्त्वपूर्ण साधन हैं। (2) अर्द्ध-सरकारी प्रकाशन- इनमें नगर विकास प्राधिकरणों और विभिन्न नगरों और शहरों के नगर-निगमों और जिला परिषदों के प्रकाशन और रिपोर्ट आते हैं। (3) अन्तर्राष्ट्रीय प्रकाशन- इसमें वार्षिकी, संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न अभिकरणों; जैसे—संयुक्त राष्ट्र, अभिकरण, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, विश्व स्वास्थ्य संगठन, खाद्य व कृषि परिषद् आदि द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट और मोनोग्राफ शामिल किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के कुछ महत्त्वपूर्ण आवधिक प्रकाशन भी हैं जिनमें डैमोग्राफिक इयर बुक, स्टेटिस्टीकल इयर बुक और मानव विकास रिपोर्ट आदि महत्त्वपूर्ण हैं। |
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यदि वर्ग के दोनों अन्त आवृत्ति समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं(क) बहिष्कार विधि(ख) समावेशी विधि(ग) चिह्न विधि(घ) सांख्यिकीय विधि। |
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Answer» (ख) समावेशी विधि। |
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द्वितीयक आँकड़े को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» द्वितीयक आँकड़े-द्वितीयक आँकड़े प्रयोगकर्ता द्वारा स्वयं एकत्रित नहीं किए जाते हैं। ये बहुधा प्रकाशित होते हैं। कई बार अप्रकाशित साधनों से भी द्वितीयक आँकड़े प्राप्त किए जाते हैं। प्रयोगकर्ता ऐसे आँकड़ों को लेकर उन्हें सही व विश्वसनीय मानते हुए अपना निष्कर्ष निकालते हैं। |
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प्राथमिक आँकड़े को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» प्राथमिक आँकड़े-वे आँकड़े जो क्षेत्र से सीधे किसी तत्त्व की गणना द्वारा अथवा लोगों से साक्षात्कार करके प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें प्राथमिक आँकड़े’ कहते हैं। प्राथमिक आँकड़ों का मुख्य स्रोत सर्वेक्षण होता है। ये आँकड़े प्रथम बार व्यक्तिगत रूप से अथवा व्यक्तियों के समूह, संस्था/संगठन आदि द्वारा एकत्रित किए जाते हैं। |
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एकल आधार सामग्री एकमात्र माप है(क) तालिका(ख) आवृत्ति(ग) वास्तविक संसार(घ) सूचना। |
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Answer» सही विकल्प है (क) तालिका। |
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एक संख्या अथवा लक्षण जो मापन को प्रदर्शित करता है, कहते हैं(क) अंक(ख) आँकड़े(ग) संख्या(घ) लक्षण। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) आँकड़े। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है-(क) जल प्रदूषण(ख) भूमि प्रदूषण(ग) शोर प्रदूषण(घ) वायु प्रदूषण। |
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Answer» सही विकल्प है (घ) वायु प्रदूषण। |
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किस प्रदूषण से अम्ल वर्षा होती है? |
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Answer» वायु प्रदूषण से अम्ल वर्षा होती है। |
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ध्वनि स्तर के मापन को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ध्वनि स्तर का मापन–ध्वनि की तीव्रता को मापने की इकाई ‘डेसीबल’ (dB) कहलाती है। डेसीबल रिकॉर्ड करने वाला उपकरण ‘साउंड मीटर’ कहलाता है। ध्वनि मापन में ध्वनि तरंगों को विद्युतीय तरंगों में बाँटा जाता है। शून्य डेसीबल वह सबसे मन्द ध्वनि है जो सामान्य कान द्वारा सुनी जा सके। 25 डेसीबल तक खामोशी, 65 डेसीबल तक शान्त, 65-75 डेसीबल तक साधारण आवाज व 75 डेसीबल के ऊपर शोर शुरू होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 45 डेसीबल ध्वनि को मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना है। 90 डेसीबल से ऊपर 8 घण्टे तक का शोर दिमाग की नसें फाड़ सकता है। |
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अम्लीय वर्षा होने के प्रमुख कारणों को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ज्वालामुखी विस्फोट से वायुमण्डल में जहरीली गैस या राख के कारण जो वर्षा होती है वह ‘अम्ल वर्षा’ कहलाती है। |
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भारत में गन्दी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भारत में गन्दी बस्तियों की प्रमुख समस्याएँ भारत में गन्दी बस्तियों की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं- ⦁ ऐसी बस्तियाँ सामान्यतः नागरिक सुविधाओं; जैसे—पार्क, सड़क, स्कूल आदि की भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई जाती हैं। |
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संदूषित जल के उपयोग के कारण जनित कोई दो रोगों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ पीलिया एवं |
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भूमि निम्नीकरण के पर्यावरणीय व समाजार्थिक प्रभाव को समझाइए। |
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Answer» भूमि निम्नीकरण के पर्यावरणीय व समाजार्थिक प्रभाव निम्नलिखित हैं- ⦁ पर्यावरणीय प्रभाव |
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भूमि निम्नीकरण के कारणों को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» भूमि निम्नीकरण के निम्नलिखित कारण हैं- ⦁ वनों की अन्धाधुन्ध कटाई, |
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भू-निम्नीकरण के कोई दो कारण बताइए। |
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Answer» ⦁ मृदा अपरदन एवं |
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निम्नलिखित में से कौन-सा रोग जलजन्य है-(क) नेत्रश्लेष्मला शोथ(ख) अतिसार(ग) श्वसन संक्रमण(घ) श्वासनली शोथ। |
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Answer» सही विकल्प है (ख) अतिसार। |
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भूमि निम्नीकरण का क्या अर्थ है? |
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Answer» भूमि निम्नीकरण-भूमि निम्नीकरण मानव प्रेरित या प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो किसी पारितन्त्र में भूमि को प्रभावशाली ढंग से कार्य करने की क्षमता को घटा देती है अर्थात् भूमि की जैविक अथवा आर्थिक उत्पादकता में कमी आ जाती है। फसलों का प्रति हैक्टेयर उत्पादन घट जाता है। किसानों को आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। वनों और चरागाहों की उत्पादकता भी घट जाती है। |
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ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोतों को समझाइए। |
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Answer» ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत-ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोतों में ज्वालामुखी का फटना, बिजली का कड़कना, बादलों का गरजना, आँधी-तूफान, समुद्री लहरों की आवाज, तेज गति की पवनें आदि शामिल हैं। |
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ध्वनि प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत बताइए। (कोई दो) |
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Answer» ⦁ ज्वालामुखी का फटना एवं |
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भारत में जल प्रदूषण के दो प्राकृतिक स्रोत बताइए। |
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Answer» ⦁ मृदा अपरदन एवं |
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निम्नलिखित में से सर्वाधिक प्रदूषित नदी कौन-सी है—(क) ब्रह्मपुत्र(ख) सतलुज(ग) यमुना(घ) गोदावरी। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) यमुना। |
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