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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

32201.

भूमि के समीप जलवाष्प के संघनन के कारण धुआँ-सा दिखाई देता है, जिसे कहते हैं-(1) हिमपात(2) कोहरा(3) पाला(4) ओस

Answer»

सही विकल्प है (2) कोहरा

32202.

जाड़े की ऋतु में घास तथा पत्तियों पर पड़ी पानी की बूंदों को कहते हैं-(1) कोहरा(2) ओस(3) पाला(4) ओला

Answer»

सही विकल्प है (2) ओस

32203.

ओले से हमारा जीवन कैसे प्रभावित होता है?

Answer»

ओले से खपरैल के मकान, पेड़-पौधे, फसलें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे बहुत से जीव जन्तु और पक्षी भी मर जाते हैं।

32204.

मौसम प्रभावित होता है।(1) केवल नमी से(2) केवल ताप से(3) केवल वायु की गति से(4) सभी से

Answer»

सही विकल्प है (4) सभी से

32205.

वर्षा ऋतु में गीले कपड़े देर से क्यों सूखते हैं?

Answer»

क्योंकि वर्षा ऋतु में वाष्पन कम होता है।

32206.

जाड़े की ऋतु से संबंधित चार वाक्य लिखिए।

Answer»

जाड़े की ऋतु में मौसम ठंडा होता है अधिक ठंड होने से ओस पड़ जाती है और अधिक ठंड से ओस जम जाती है, जिसे पाला कहते हैं। अधिक ठंड से कभी-कभी धूल और धूल के कणों पर जलवाष्प की संघनन होने से कोहरा पड़ जाता है तथा कुछ भी दिखाई नहीं देता।

32207.

निम्नलिखित को स्पष्ट करें- वाष्पन, संघनन, ओस, कोहरा।

Answer»
  • वाष्पन- जल के गर्म होकर वाष्प में बदलने की क्रिया को वाष्पन कहते हैं।
  • संघनन- जलवाष्प (गैस) के ठंडा होकर द्रव में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।
  • ओस- जाड़े की रातों में फूल, घास, पत्तियों आदि पर वायु में उपस्थित जलवाष्प के संघनन से ओस की बूंदें बनती हैं।
  • कोहरा-अधिक ठंड पड़ने पर वायु की जलवाष्प का धूल और धुएँ के कणों पर संघनन होने से कोहरा बनता है। यह जमीन के निकट धुआँ जैसा दिखाई देता है।
32208.

विधान सभा के सदस्यों को कौन चुनता है?

Answer»

विधान सभा के सदस्यों को जनता चुनती है।

32209.

राणा प्रताप एवं अकबर के बीच युद्ध क्यों हुआ?

Answer»

अधीनता स्वीकार न करने पर अकबर ने राणा प्रताप के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया।

32210.

समुद्र के पास गर्मी में मौसम ठंडा होता है, क्यों?

Answer»

गर्म बालू पर समुद्र के अपेक्षाकृत ठंडे पानी से प्रभावित ठंडी हवाएँ पृथ्वी पर नीचे आती हैं और मौसम ठंडा करती हैं।

32211.

मौसम को प्रभावित करने वाले कौन-कौन से कारक हैं?

Answer»

मौसम को प्रभावित करने वाले कारक सूर्य की ऊष्मा, वायु की नमी, वायु की गति, बादलों का होना न होना, समुद्र की निकटता या दूरी आदि हैं।

32212.

भित्ति चित्र किसे कहते हैं?

Answer»

गुफा की दीवारों पर रंगों से बनाए गए सुंदर चित्र को भित्ति चित्र कहते हैं। जैसे-अजंता की गुफा में बने हुए चित्र।

32213.

रिक्त स्थानों की पूर्ति करो-(1) अकबर की सेना और राणा प्रताप के बीच _____ में युद्ध हुआ।(2) राणा प्रताप ने ____ के सामने घुटने नहीं टेके।(3) राणा प्रताप _____ से प्यार करने वाले एक वीर राजा थे।

Answer»

(1) अकबर की सेना और राणा प्रताप के बीच हल्दीघाटी के मैदान में युद्ध हुआ।

(2) राणा प्रताप ने अकबर के सामने घुटने नहीं टेके।

(3) राणा प्रताप आज़ादी से प्यार करने वाले एक वीर राजा थे।

32214.

अकबर एवं रानी दुर्गावती के बीच लड़ाई क्यों हुई?

Answer»

अकबर रानी दुर्गावती के राज्य गढ़मण्डला को अपने राज्य में मिलाना चाहता था और रानी दुर्गावती इसके लिए तैयार नहीं हुईं। इसलिए रानी दुर्गावती तथा अकबर के बीच लड़ाई हुई।

32215.

रिक्त स्थानों की पूर्ति कोष्ठक में दिए उपयुक्त शब्दों की सहायता से करें।(क) मौसम ___ के कारण बदलता है। (चंद्रमा, सूर्य)(ख) ___ वाष्पन होता है, जब वायु शुष्क एवं गर्म होती है। (कम, अधिक)(ग) वाष्पन तेजी से होता है, जब सुखाई जाने वाली वस्तु ____ होती है। (अधिक फैली, कम फैली)(घ) जलवाष्प को ____ करने से वह पानी में बदल जाती है। (ठंडा, गर्म)

Answer»

(क) मौसम सूर्य के कारण बदलता है।
(ख) अधिक वाष्पन होता है, जब वायु शुष्क एवं गर्म होती है।
(ग) वाष्पन तेजी से होता है, जब सुखाई जाने वाली वस्तु अधिक फैली होती है।
(घ) जलवाष्प को ठंडा करने से वह पानी में बदल जाती है।

32216.

विधान सभा और विधान परिषद के सदस्य क्या कार्य करते हैं?

Answer»

विधान सभा और विधान परिषद् के सदस्य जनता की भलाई के लिए और शासन चलाने के लिए नियम बनाते हैं।

32217.

ऋतुएँ क्यों बदलती हैं?

Answer»

पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने से ऋतुएँ बदलती हैं।

32218.

अकबर ने साहित्य को बढ़ावा देने के लिए क्या किया?

Answer»

अकबर साहित्य प्रेमी था। उसने रामायण, महाभारत और संस्कृत के ग्रन्थों का फारसी में तथा फारसी पुस्तकों का संस्कृत में अनुवाद कराया। अकबर के दरबार में साहित्य के विद्वान भी रहते थे।

32219.

रिक्त स्थान की पूर्ति करें-(क) कम ताप पर ____ अधिक होता है।(ख) अधिक ताप पर ___ अधिक होता है।(ग) तेज वायु में वाष्पन ___ होता है।(घ) ___ ठंडी होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है।

Answer»

(क) कम ताप पर संघनन अधिक होता है।
(ख) अधिक ताप पर वाष्पन अधिक होता है।
(ग) तेज वायु में वाष्पन अधिक होता है।
(घ) भाप ठंडी होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है।

32220.

वाष्पन किसे कहते हैं?

Answer»

जल (द्रव) के गर्म होकर वाष्प में बदलने की क्रिया को वाष्पन कहते हैं।

32221.

संघनन किसे कहते हैं?

Answer»

जलवाष्प (गैस) के ठंडा होकर द्रव में बदलने की क्रिया को संघनन कहते हैं।

32222.

हमारे पास यह कहने के क्या आधार हैं कि परमाण्विक हथियारों से लैस कुछ देशों पर तो विश्वास किया जा सकता है, परन्तु कुछ पर नहीं?

Answer»

हम निम्नलिखित दो आधारों पर कह सकते हैं कि परमाण्विक हथियारों से लैस कुछ देशों पर तो विश्वास नहीं किया जा सकता है लेकिन कुछ पर नहीं-

(1) जो देश परमाणु शक्ति-सम्पन्न बिरादरी के पुराने सदस्य हैं, वे कहते हैं कि यदि बड़ी शक्तियों के पास परमाणु हथियार हैं तो उनमें ‘अपरोध’ का पारस्परिक भय होगा जिसके कारण वे इन हथियारों का प्रथम प्रयोग नहीं करेंगे।
(2) परमाणु बिरादरी के देश परमाणुशील होने की दावेदारी करने वाले देशों पर यह दोष लगाते हैं कि वे आतंकवादियों की गतिविधियाँ रोक नहीं सकते। यदि कोई गलत व्यक्ति या सेनाध्यक्ष राष्ट्राध्यक्ष बन गया तो इसके काल में परमाणु हथियार किसी गलत व्यक्ति के हाथों में जा सकते हैं जो अपने पागलपन से पूरी मानव जाति को खतरे में डाल सकता है।

32223.

मौसम शुष्क होने पर वाष्पन होता है-(अ) कम(ब) अधिक(स) बिल्कुल नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ब) अधिक

32224.

शासकों के बारे में दो-दो वाक्य लिखो।रानी दुर्गावतीराणा प्रतापछत्रपति शिवाजीगुरु गोविंद सिंह

Answer»
  1. रानी दुर्गावती – गढ़मंडला की वीरांगना रानी थी, जिसने अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और मुगलों से युद्ध करती हुई वीरगति को प्राप्त हुई। स्वयं अकबर ने उसके युद्ध-कौशल की प्रशंसा की।
  2. राणा प्रताप – अकबर के समकालीन मेवाड़ के वीर राजपूत महाराणा थे, जिन्होंने अकबर से हल्दीघाटी में लोहा लिया और अंतिम साँस तक स्वतंत्र रहकर राजपूती शान को बरकरार रखा।
  3. छत्रपति शिवाजी – प्रथम मराठा राजा थे, जिन्होंने एक संगठित मराठा राज्य की स्थापना की और औरंगजेब से लोहा लिया। उन्होंने छापामार युद्ध नीति अपनाई। वे कुशल शासक थे।
  4. गुरु गोविंद सिंह – सिक्खों के दसवें गुरु थे। वे त्याग और बलिदान की साक्षात् मूर्ति थे। वे साहित्यकार और हिंदी के कवि भी थे। शिवाजी की तरह गुरु गोविंद सिंह ने भी औरंगजेब से लड़ाइयाँ लड़ी और उसकी कट्टरता से संघर्ष किया। उनके दो पुत्र युद्ध में मारे गए और दो को जिंदा दीवार में चुनवा दिया गया।
32225.

तंजौर के वृहदेश्वर मंदिर में नटराज की मूर्ति का निर्माण कराया-(अ) चंद्रगुप्त विक्रमादित्य(ब) कृष्णदेव राय(स) राजेंद्र चोल(द) रानी दुर्गावती

Answer»

सही विकल्प है (स) राजेंद्र चोल

32226.

शासकों के बारे में दो-दो वाक्य लिखो।अलाउद्दीन खलजीशेरशाह सूरीअकबर

Answer»
  1. अलाउद्दीन खलजी – आज से ७०० वर्ष पूर्व खलजी वंश का प्रतापी सुलतान था, जिसने अपनी विजयों के बल पर भारत में एक साम्राज्य स्थापित किया।
  2. शेरशाह सूरी – इसने करीब ४५० वर्ष पहले हुमायूँ को हराकर एक संगठित राज्य की स्थापना की। ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण कराया और प्रजा हित के अनेक कार्य किए।
  3. अकबर – शेरशाह सूरी के बाद मुगल वंश का महान शासक हुआ। इसके दरबार में नवरत्न थे जिसमें बीरबल, टोडरमल और तानसेन प्रसिद्ध हैं। इसका साम्राज्य बहुत बड़ा था।
32227.

शासकों के बारे में दो-दो वाक्य लिखो।चंद्रगुप्त विक्रमादित्यहर्षवर्धनराजेंद्र चोलकृष्णदेवरायपृथ्वीराज चौहान

Answer»
  1. चंद्रगुप्त विक्रमादित्य – उज्जैन के गुप्तवंश के महान राजा थे। यह काल इतिहास में स्वर्ण-युग कहा जाता है। इस काल में महान कवि कालिदास और खगोल के प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्यभट्ट हुए।
  2. हर्षवर्धन – अंति: महान हिंदू सम्राट था। वह दानी, वीर, विद्वान और प्रजा पालक था।
  3. राजेंद्र चोल – १००० वर्ष पहले यह दक्षिण का प्रतापी राजा था। इसने उत्तरी भारत में उड़ीसा और बंगाल को जीतकर गंगईकोंड की उपाधि धारण की।
  4. कृष्णदेवराय – तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे विजयनगर का प्रतापी राजा था। संस्कृत और तेलुगू का अच्छा विद्वान था। इसके दरबार में आठ प्रसिद्ध विद्वान थे, जिन्हें ‘अष्ट दिग्गज’ कहते हैं।
  5. पृथ्वीराज चौहान – दिल्ली और अजमेर का प्रतापी राजपूत राजा था। उसने मुहम्मद गौरी से लोहा लिया।
32228.

समुद्र के जल के वाष्प बनकर उड़ने तथा बादलों के बरसने में कौन-सी क्रिया होती है?

Answer»

समुद्र के जल के वाष्प बनकर उड़ने से वाष्पन और बादलों के बरसने से संघनन क्रिया होती है।

32229.

यह कैसे पता करेंगे कि अधिक ताप में वाष्पन अधिक होता है?

Answer»

अधिक गर्मी या तेज धूप में कपड़े जल्दी सूख जाते हैं।

32230.

अकबर ने फतेहपुर सीकरी में बनवाया-(अ) बुलन्द दरवाजा(ब) महरौली का स्तंभ(स) दिल्ली का लालकिला(द) इलाहाबाद का किला।

Answer»

सही विकल्प है (अ) बुलन्द दरवाजा

32231.

संयुक्त राष्ट्र संघ के विशिष्ट अभिकरणों (संस्थाओं) एवं उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।यायूनेस्को से आप क्या समझते हैं ? इसके कार्य क्या हैं ?याविश्व खाद्य एवं कृषि संगठन पर टिप्पणी लिखिए। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन से आप क्या समझते है ? इसके कार्य क्या हैं ?यायूनेस्को के दो कार्य लिखिए।यायूनेस्को क्या है? इसके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

संयुक्त राष्ट्र संघ ने आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यों के सम्पादन के लिए अनेक विशिष्ट अभिकरणों (संस्थाओं) का निर्माण किया है। इनका विवरण निम्नलिखित है–

1. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization: ILO)—इसकी स्थापना सर्वप्रथम प्रथम विश्वयुद्ध के बाद सन् 1949 ई० में हुई थी। राष्ट्र संघ के पतन के बाद इसे संयुक्त राष्ट्र संघ का अंग बना लिया गया। इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैण्ड) में स्थित है। इसके सदस्यों की कुल संख्या 150 से भी अधिक है। प्रत्येक राष्ट्र के 4 सदस्य इसकी बैठक में भाग लेते हैं। इसका प्रशासनिक विभाग श्रमिक संघ के कार्यों पर नियन्त्रण रखता है। कार्य–

  • विश्व भर के श्रमिकों के हित के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाना,
  • श्रमिकों के शिक्षण और प्रशिक्षण का प्रबन्ध करना,
  • श्रमिकों के समुचित वेतन, आवास, स्वास्थ्य तथा जीवन-स्तर सुधारने के उपाय करना,
  • बाल-श्रम की रोकथाम करना,
  • औद्योगिक विवादों को निर्णय करना तथा श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करना।

2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization : WHO)–विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल, 1948 ई० को ‘जेनेवा’ (स्विट्ज़रलैण्ड) में की गयी थी। इस संस्था के तीन अंग हैं—साधारण सभा, प्रशासनिक बोर्ड तथा सचिवालय। प्रशासनिक बोर्ड के सदस्यों की संख्या 18 है। अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया तथा अन्य देशों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की शाखाएँ स्थापित की गयी हैं। कार्य–

  • सम्पूर्ण विश्व में मानव स्वास्थ्य के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का निर्माण करना,
  • संक्रामक तथा घातक बीमारियों की रोकथाम करना,
  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसन्धानकरना तथा दैवी आपदा से होने वाली हानि को रोकना,
  • अल्प-विकसित देशों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी उपलब्ध कराना,
  • स्वास्थ्य सम्बन्धी साहित्य का प्रकाशन व वितरण करना तथा
  • मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सभी देशों का ध्यान आकर्षित करना।

3. संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization : UNESCO)–संयुक्त राष्ट्र संघ के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन की स्थापना के उद्देश्य से 1 नवम्बर से 6 नवम्बर, 1946 ई० तक ब्रिटिश सरकार ने फ्रांस की सरकार के सहयोग से लन्दन में एक सम्मेलन बुलाया। इसी सम्मेलन में 4 नवम्बर, 1946 ई० को इस संस्था की स्थापना हुई। इस समय इस संस्था के सदस्यों की संख्या 100 से अधिक है। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है। इस संस्था का वर्ष में एक सामान्य सम्मेलन होता है, जिसमें सभी सदस्य देशों के एक-एक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। कार्य-यह संघ की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण संस्था है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं

  • विश्व में शिक्षा और संस्कृति का प्रसार करना,
  • शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन अनुसन्धान करना तथा अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना का विकास करना,
  • अविकसित तथा विकासशील देशों में शैक्षिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाना,
  • विस्थापितों के पुनर्वास की व्यवस्था करना,
  • विश्व के देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की व्यवस्था करना,
  • विशेष समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न देशों में अपने विशेषज्ञ भेजना तथा
  • विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के बीच सम्पर्क और सम्बन्धों की स्थापना करना।

4. खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization : FAO)—इस संस्था की । स्थापना 16 अक्टूबर, 1945 ई० में हुई थी। वर्तमान में 180 से अधिक देश इस संस्था के सदस्य हैं। इसका मुख्यालय इटली की राजधानी रोम में स्थित है। कार्य-

  • अल्पविकसित देशों में कृषि उत्पादन की वृद्धि की योजनाएँ तैयार करना और उन्हें लागू करवाना,
  • कृषि सम्बन्धी सूचनाओं का प्रसार करना,
  • कृषि की नयी तकनीकों की खोज करना,
  • उन्नतशील बीजों की नयी-नयी किस्मों  की खोज करना,
  • पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा तथा बीमारियों की रोकथाम के उपाय करना तथा
  • कृषि सम्बन्धी वैज्ञानिक अनुसन्धानों का प्रकाशन करना।

5. अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (United Nations International Children’s Emergency Fund : UNICEF)-इस संस्था की स्थापना 4 नवम्बर, 1946 ई० को न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हुई थी। प्रारम्भ में इसमें केवल 20 सदस्य थे, लेकिन वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 188 तक पहुँच गयी है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य विश्व भर के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करना है। सन् 1953 ई० से इस संस्था को स्थायी कर दिया गया है। कार्य–

  • संसार के सभी देशों के बच्चों की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आर्थिक सहायता देना,
  • मातृ एवं शिशु-कल्याण स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रशिक्षण व सामग्री की व्यवस्था करना,
  • दैवी आपदाओं के समय माताओं तथा शिशुओं के लिए विशेष प्रबन्ध करना,
  • विभिन्न देशों के चिकित्सालयों तथा स्कूलों में शिशु-कल्याण व प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना करना,
  • शिशुओं की घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए योजनाएँ बनाना तथा उन्हें लागू करना इन संस्थाओं के अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय दूर संचार संघ, अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक आदि अनेक संस्थाएँ संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनता में विश्व के देशों के लिए कल्याणकारी कार्यों का सम्पादन कर रही हैं।

6. विश्व बैंक (World Bank)–विश्व बैंक पाँच वित्तीय संस्थाओं का एक समूह है। ये हैं—वित्त निगम (1956), अन्तर्राष्ट्रीय विकास संघ (1960), बहुपक्षीय निवेश प्रत्याभूति अभिकरण (1988), निवेश सम्बन्धी विवादों के निपटारे के लिए अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र (1966) आदि। ये सभी संस्थाएँ सदस्य-राज्यों को उनकी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण तथा विकास में और देशों के मध्य विषमताओं को घटाने में सहायता करती हैं। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डी०सी० (अमेरिका) में है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Mometary Fund : IMF)-इसकी स्थापना 27 दिसम्बर, 1945 को की गयी थी। इसका मुख्य उद्देश्य भुगतान असन्तुलन की समस्या से ग्रस्त सदस्य राज्यों को अस्थायी ऋण प्रदान करना, विनिमय दर में सन्तुलन स्थापित करना तथा सदस्य-राष्ट्रों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस कोष की व्यवस्था एक प्रशासक-मण्डल करता है। इस कोष में सर्वाधिक कोष देने वाले देश में ही इसका कार्यालय होता है। वर्तमान में, अमेरिका का योगदान सर्वाधिक होने के कारण, इसका कार्यालय वाशिंगटन (अमेरिका) में है।

7. अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी (International Atomic Energy Agency : IAEA)इस संस्था की स्थापना 29 जुलाई, 1956 ई० को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व की शान्ति व्यवस्था और सम्पन्नता में अणुशान्ति के योगदान को बढ़ावा देना तथा यह देखना कि उसके द्वारा दी जाने वाली सहायता का अनैतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग तो नहीं किया जाता है। इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में है।

32232.

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों तथा उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों का उल्लेख कीजिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा किए जाने वाले किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए।याद्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व शान्ति की स्थापना के लिए किस अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की गयी ?याइसके किन्हीं दो अंगों के नाम लिखिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ का कौन-सा अंग युद्ध रोकने में सक्रिय भूमिका निभाता है?यावह कैसे गठित होता है? उसके सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?यासंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के सम्बन्ध में एक टिप्पणी लिखिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ के तीन प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।याविश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है? इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?यासंयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् का गठन कैसे होता है?याउसके स्थायी सदस्य देशों के नाम लिखिए। उन्हें कौन-सा अधिकार मिला है?यासंयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित अंगों के गठन और कार्यों को संक्षेप में लिखिए-(क) महासभा, (ख) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय, (ग) आर्थिक व सामाजिक परिषद्

Answer»

संयुक्त राष्ट्र संघ मानवीय बुद्धि द्वारा परिकल्पित श्रेष्ठतम अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है। द्वितीय विश्वयुद्ध के भयंकर और विनाशकारी परिणामों को देखकर विश्व के राजनीतिज्ञों ने मानव-जाति को समूल विनाश से बचाने के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना को अनिवार्य समझा। इसी उद्देश्य से 24 अक्टूबर, 1945 ई० को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गयी।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग

संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर; जिसमें 19 अध्याय और 111 अनुच्छेद हैं; के अध्याय 3 के सातवें अनुच्छेद में इस संस्था के निम्नलिखित अंगों का उल्लेख है–

  • साधारण सभा या महासभा (General Assembly)
  • सुरक्षा परिषद् (Security Council)
  • न्यास परिषद् (Trusteeship Council)
  • सचिवालय (Secretariat)
  • आर्थिक और सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council)
  • अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालये (International , Court of Justice)

इन अंगों को संगठन तथा कार्य इस प्रकार हैं

1. महासभा– संघ के सभी सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि इस महासभा में बैठते हैं। प्रत्येक सदस्य- राष्ट्र महासभा के लिए पाँच प्रतिनिधि तक भेज सकता है, परन्तु उनका ‘मत’ (Vote) एक ही माना जाता है। वर्ष में कम-से-कम एक बार महासभा का अधिवेशन सितम्बर माह में अवश्य होता है। सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर इसका असाधारण अधिवेशन कभी भी बुलाया जा सकता है। इस महासभा में एक निर्वाचित अध्यक्ष एवं सात उपाध्यक्ष होते हैं। साधारण सभा या महासभा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  • नये सदस्यों की भर्ती करना।
  • संघ का बजट पास करना।
  • सुरक्षा परिषद् के 10 अस्थायी सदस्यों, आर्थिक और सामाजिक परिषद् के 54 सदस्यों, न्यास परिषद् के 6 सदस्यों तथा अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों का निर्वाचन करना।
  • वर्ण, जाति, रंग, भाषा अथवा धर्म का भेदभाव किये बिना मानवीय अधिकारों और स्वतन्त्रता दिलाने में सहायता करना।
  • सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासचिव का निर्वाचन करना।
  • अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का निर्माण करना।
  • अपने सभापति का निर्वाचन करना।

2. सुरक्षा परिषद्संघ का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग सुरक्षा परिषद् है। इसमें कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी हैं। सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। स्थायी सदस्यों में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा के दो-तिहाई बहुमतं द्वारा प्रति दूसरे वर्ष किया जाता है। कोई अस्थायी सदस्य अवधि समाप्त होने पर पुनः निर्वाचन में खड़ा नहीं हो सकता। सुरक्षा परिषद् के प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार है। परिषद् के प्रत्येक स्थायी सदस्य को वीटो (निषेधाधिकार) प्राप्त है। इस अधिकार का प्रयोग करके कोई भी स्थायी सदस्य परिषद् के निर्णय को रद्द कर सकता है। किसी भी वाद-विवाद का अन्तिम निर्णय पाँच स्थायी और चार अस्थायी सदस्यों की सहमति के बाद ही माना जाता है। भारत भी 1-1-1993 से 1-1-1995 तक सुरक्षा परिषद् का अस्थायी सदस्य था।

सुरक्षा परिषद् के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं

  • सुरक्षा परिषद् को प्रमुख कार्य विश्व-शान्ति और सुरक्षा को बनाये रखना है।
  • सुरक्षा परिषद् विभिन्न देशों के संरक्षण में रखे जाने वाले प्रदेशों पर नियन्त्रण रखती है।
  • अन्तर्राष्ट्रीय संघर्षों को रोकने के लिए सुरक्षा परिषद् सैनिक कार्यवाही करने का आदेश दे सकती
  • सुरक्षा परिषद् निरस्त्रीकरण के लिए भी प्रस्ताव पारित करती है।
  • नये राष्ट्रों को सदस्यता प्रदान करना भी इसका कार्य है।
  • महासचिव की नियुक्ति के लिए सिफारिश भी सुरक्षा परिषद् ही करती है।
  • रक्षा परिषद् संघ के सैनिक स्टाफ की सहायता से युद्ध विराम करवाती है।

3. न्यास परिषद्न्यास परिषद् में 12 सदस्य हैं, जिनमें चार प्रबन्धकर्ता देश (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, अमेरिका और ब्रिटेन), 3 सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य (रूस, चीन और फ्रांस) और 5 निर्वाचित सदस्य हैं। इस परिषद् का उद्देश्य संरक्षित प्रदेशों का शासन-प्रबन्ध करने वाले राष्ट्रों के कार्य-कलापों की जाँच तथा उन पर नियन्त्रण रखना है। पलाऊ की स्वतन्त्रता के बाद न्यास परिषद् का कार्य लगभग समाप्त हो गया है।

4. सचिवालय– सचिवालय संघ का प्रशासनिक अंग है। इसका मुख्य अधिकारी महासचिव कहलाता है, जिसकी नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की जाती है। महासचिव की सहायता के लिए विभिन्न देशों के बहुत-से कर्मचारी (लगभग 10,000) होते हैं। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। सचिवालय का व्यय-भार सभी राष्ट्र मिलकर उठाते हैं। सचिवालय के आठ विभाग हैं। प्रत्येक विभाग का अधिकारी सहायक सचिव होता है। सचिवालय संघ के समस्त कार्यों का लेखा रखता है और आँकड़ों का संग्रह, तथा प्रकाशन करता है। महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा करती है। महासचिव का कार्य संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों की रिपोर्ट तैयार कर प्रति वर्ष साधारण सभा (महासभा) में प्रस्तुत करना होता है। शान्ति एवं सुरक्षा को भंग होता देखकर सुरक्षा परिषद् को सूचना देना महासचिव का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य होता है। इसके निवर्तमान महासचिव कोफी अन्नान और वर्तमान महासचिव बान की-मून हैं।

5. आर्थिक और सामाजिक परिषद्इस परिषद् में महासभा द्वारा निर्वाचित 54 सदस्य होते हैं। इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 3 वर्ष है। परिषद् के एक-तिहाई सदस्य प्रतिवर्ष पद-मुक्त होते रहते हैं। इसकी एक वर्ष में कम-से-कम 2 बैठकें अवश्य होती हैं। आवश्यकता होने पर विशेष अधिवेशन भी बुलाये जा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस अंग की स्थापना का उद्देश्य पिछड़े हुए राष्ट्रों को आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति के लिए सहायता देना है। यह परिषद् अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न कार्यों का सम्पादन करती है। इसका प्रमुख कार्य सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक, सामाजिक, शिक्षा-स्वास्थ्य, विज्ञान-कला आदि के क्षेत्र से ज्ञान प्राप्त करके महासभा को सूचित करना है। यह परिषद् मानव-कल्याण की अन्तर्राष्ट्रीय योजनाओं का मसविदा भी तैयार करती है। इस परिषद् के अधीन अनेक संस्थाएँ कार्य करती हैं।

6. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय– अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र संघ की न्यायपालिका है। इसमें 15 न्यायाधीश हैं, जिनकी नियुक्ति महासभा सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर करती है। न्यायाधीशों का कार्यकाल 9 वर्ष का होता है। न्यायालय की कार्यवाही फ्रेंच तथा अंग्रेजी भाषा में की जाती है। | अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का प्रमुख कार्यालय हेग (हॉलैण्ड) में है। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्य कार्य दो या दो से अधिक राष्ट्रों के मध्य उत्पन्न विवाद या झगड़े के विषय में निर्णय देना है। इसके अतिरिक्त इसका कार्य परामर्श देने का भी है।

32233.

संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख उपलब्धियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए। या संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व शान्ति के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए।

Answer»

संयुक्त राष्ट्र संघ की उपलब्धियाँ संयुक्त राष्ट्र संघ विश्व की एक महत्त्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय संस्था है। इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं—

1. फिलिस्तीन की समस्या– सन् 1947 ई० में फिलिस्तीन की समस्या उत्पन्न हुई। संघ ने इस समस्या के समाधान के लिए एक आयोग नियुक्त किया, जिसने अरबों तथा यहूदियों के मध्य देश के विभाजन | का प्रस्ताव रखा। यहूदियों ने स्वतन्त्र फिलिस्तीन की घोषणा कर दी, किन्तु अरबों ने वहाँ अपनी मुक्ति सेना भेज दी। संघ के प्रयासों से उस समय वहाँ युद्धविराम हो गया था, परन्तु वर्तमान में यह समस्या पुन: उत्पन्न हो गयी है।

2. इण्डोनेशिया की समस्या– सन् 1947 ई० में जावा, सुमात्रा आदि डच उपनिवेशों के क्रान्तिकारियों ने अपने देश को स्वतन्त्र कराने के लिए एक सशस्त्र क्रान्ति कर दी। भारत आदि देशों ने इस क्रान्ति का समर्थन किया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसमें हस्तक्षेप करके युद्धविराम कराया तथा सन् 1949 ई० में इण्डोनेशिया तथा हॉलैण्ड का एक संघ बनाया। इण्डोनेशिया इस संघ का स्वतन्त्र सदस्य बन गया।

3. कश्मीर की समस्या– सन् 1948 ई० में पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण किया, परन्तु संघ के पर्यवेक्षकों की देख-रेख में कुछ समय उपरान्त ही युद्धविराम हो गया। इसी प्रकार 1965 ई० तथा 1971 ई० में पाकिस्तानी आक्रमणों के समय भी संघ ने युद्धविराम कराया तथा पाकिस्तान और भारत के बीच समस्या के स्थायी हल का प्रयास किया।

4. कोरिया की समस्या– सन् 1945 ई० से 1953 ई० तक कोरिया की समस्या के समाधान में संघ ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। सन् 1950 ई० में उत्तरी कोरिया ने दक्षिणी कोरिया पर आक्रमण कर दिया, लेकिन संघ ने हस्तक्षेप करके इनमें युद्धविराम करा दिया। इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की उल्लेखनीय
सफलता माना जाता है।

5. हिन्दचीन की समस्या– हिन्दचीन (वियतनाम) में युद्धविराम कराने के लिए सन् 1954 ई० में जेनेवा में एक सम्मेलन हुआ, जिसमें दोनों पक्षों से युद्धविराम करने की अपील की गयी। इस अपील पर युद्धविराम हो गया तथा वहाँ पर शान्ति स्थापित हुई।

6. कांगो की समस्या– सन् 1962 ई० में कांगो-कटंगा संघर्ष की समस्या भी संघ के समक्ष प्रस्तुत हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रयास करके गृहयुद्ध को समाप्त कर दिया और वहाँ पर शान्ति स्थापित करने में सफलता प्राप्त की।

7. मिस्र की समस्यासन् 1956 ई० में स्वेज नहर के विवाद ने महायुद्ध का रूप धारण कर लिया, क्योंकि मिस्र ने इस पर अधिकार कर लिया था। परिणामतः फ्रांस, ब्रिटेन तथा इजराइल ने मिलकर मिस्र पर आक्रमण कर दिया। संघ के हस्तक्षेप से वहाँ भी युद्धविराम हो गया और शान्ति स्थापित कराने में सफलता प्राप्त की जा सकी।

8. क्यूबा की समस्या20 अक्टूबर, 1962 ई० को संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा की नाकेबन्दी कर दी, क्योंकि रूस अपने जलपोत तथा प्रक्षेपास्त्र इस देश में भेजना चाहता था। इस स्थिति में संघ ने अपना हस्तक्षेप कर इस क्षेत्र में शान्ति स्थापित की।

9. चेकोस्लोवाकिया संकट- (1968-93 ई०)–सोवियत संघ और वार्सा पैक्ट के अन्य देशों ने चेकोस्लोवाकिया में सैनिक हस्तक्षेप करके विश्व-शान्ति के लिए भीषण संकट उपस्थित कर दिया। सुरक्षा परिषद् ने एक प्रस्ताव पारित्र करके चेकोस्लोवाकिया में विदेशी हस्तक्षेप रोकने का प्रयास किया, परन्तु उसका यह प्रयास विफल रहा। सन् 1992 ई० में सुरक्षा परिषद् ने चेकोस्लोवाकिया संकट को दूर करने के लिए पुनः हस्तक्षेप किया। 1 जनवरी, 1993 ई० को चेक एवं स्लोवाक संघीय
गणराज्य (चेकोस्लोवाकिया) के विघटन के साथ चेक गणराज्य और स्लोवाकिया स्वतन्त्र हुए।

10. सोमालिया की समस्या (1993 ई०)-अफ्रीकी देश सोमालिया अनेक वर्षों से गृह-युद्ध का शिकार । था। सन् 1991 ई० में राष्ट्रपति मोहम्मद सैयद के अपदस्थ होने के बाद गृह-युद्ध में तेजी आ गयी और हजारों लोग मरने लगे। इस हत्याकाण्ड को रोकने के लिए संघ के आदेश पर 1700 अमेरिकी सैनिक सोमालिया पहुँचे। जनवरी, 1993 ई० में सोमालिया में शान्ति स्थापित हो गयी।

11. अन्य उपलब्धियाँ– संयुक्त राष्ट्र संघ की उपर्युक्त सफलताओं के अतिरिक्त कुछ अन्य उपलब्धियाँ
निम्नलिखित हैं

  • संयुक्त राष्ट्र संघ ने निशस्त्रीकरण के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 10 दिसम्बर, 1948 ई० को मानव-अधिकारों की घोषणा की गयी।
  • संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1964 ई० ॐ साइप्रस के गृह-युद्ध को समाप्त कराया।
  • संघ ने समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं से पीड़िते लोगों की सहायता की।
  • संघ ने विकासशील देशों में बच्चों तथा महिलाओं के कल्याण की व्यवस्था की।
  • संघ ने प्रदूषण रोकने, आवास की समस्या को हल करने तथा जनसंख्या को नियन्त्रित करने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।
  • मई-जून, 1999 ई० में संघ ने भारतीय सीमा में पाक घुसपैठ के विरुद्ध भारत द्वारा छेड़े गये ‘कारगिल विजय अभियान’ को अपना समर्थन दिया तथा भारतीय सीमाओं के अतिक्रमण के लिए पाकिस्तान को दोषी घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र संघ का यह कदम साम्राज्यवाद के विरुद्ध विश्व जनमत का प्रतीक है।

इसमें सन्देह नहीं कि अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा को बनाये रखने में संयुक्त राष्ट्र संघ ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। फिर भी हम संयुक्त राष्ट्र संघ को एक आदर्श संस्था के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते, क्योंकि इस संस्था में महाशक्तियों के प्रभुत्व का बोलबाला है। वर्ष 2003 की अन्तर्राष्ट्रीय घटनाएँ सिद्ध करती हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ केवल वाद-विवाद के आधार पर युद्ध को कुछ समय तक के लिए टाल भर सकता है। वह ऐसी किसी भी समस्या का निराकरण करने में अक्षम है, जिसमें महाशक्तियों का स्वार्थ उलझा हुआ हो। खाड़ी युद्ध के पूर्व का घटनाक्रम इस तथ्य की पुष्टि करता है।

32234.

शक्ति सन्तुलन को कैसे बनाए रखा जा सकता है?

Answer»

परम्परागत सुरक्षा नीति का एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व शक्ति सन्तुलन है। शक्ति सन्तुलन को बनाए रखने के लिए सैन्य शक्ति को बढ़ाना अति आवश्यक है लेकिन आर्थिक एवं प्रौद्योगिकी विकास भी महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि सैन्य शक्ति का यही आधार है। प्रत्येक सरकार दूसरे देशों से अपने शक्ति सन्तुलन को लेकर अत्यन्त संवेदनशील रहती है।

32235.

संघनन को प्रभावित करने वाले दो कारक लिखो।

Answer»

(1) संघनन पर ताप का प्रभाव होता है। कम ताप पर अधिक संघनन और अधिक ताप पर कम संघनन होता है।
(2) बड़े तल क्षेत्र पर संघनन अधिक होता है।

32236.

दिल्ली में और कौन-कौन सी ऐतिहासिक इमारतें हैं? सूची बनाओ।

Answer»

दिल्ली में निम्नलिखित ऐतिहासिक इमारतें हैं- लाल किला, पुराना किला, कुतुबमीनार, हुमायूँ का मकबरा इत्यादि।

32237.

संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों में भारत ने क्या योगदान दिया ? संक्षेप में लिखिए।याविश्व शान्ति में भारत की भूरिका का वर्णन कीजिए।

Answer»

संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का योगदान

भारत एक गुट-निरपेक्ष देश है। यह विश्व में स्थायी शान्ति का समर्थक है। इसने अन्तर्राष्ट्रीय विवादों तथा झगड़ों को समाप्त कराने का सदैव प्रयास किया है। भारत ने विश्व-शान्ति बनाये रखने में सक्रिय भूमिका निभाकर तथा अनेक प्रमुख समस्याओं के समाधान में संयुक्त राष्ट्र संघ की सहायता की है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के योगदान के प्रमुख उदाहरण निम्नवत् हैं

1. कांगो की समस्याकांगो के प्रधानमन्त्री की हत्या की जाँच की माँग करके तथा अपनी सैनिक टुकड़ी भेजकर भारत ने 1964 ई० में कांगो को स्वतन्त्र कराया। कांगो की समस्या से अन्तर्राष्ट्रीय तनाव पैदा हो सकता था; अत: भारत ने अपने सहयोग से इस समस्या का समाधान कराया।

2. कोरिया की समस्याउत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में 1950 ई० में युद्ध छिड़ने पर भारत ने ही संयुक्त राष्ट्र संघ में युद्धविराम तथा युद्धबन्दियों की अदला-बदली में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जुलाई, 1953 ई० को तीन वर्ष के पश्चात् कोरिया में शान्ति स्थापित कराने का श्रेय भी भारत को मिला।

3. साइप्रस की समस्यासन् 1964 ई० में साइप्रस में गृहयुद्ध छिड़ने पर भारतीय सेना की एक टुकड़ी भेजी गयी, जिससे वहाँ शान्ति स्थापित हो सकी तथा यूनानियों एवं तुर्कियों का युद्ध समाप्त हुआ और साइप्रस को ब्रिटेन के आधिपत्य से सदैव के लिए छुटकारा मिल गया।

4. हिन्दचीन की समस्या- उत्तरी तथा दक्षिणी वियतनाम में शान्ति की स्थापना हेतु भारत, पोलैण्ड तथा कनाड़ा के सदस्यों को अन्तर्राष्ट्रीय आयोग का सदस्य बनाया गया। भारत की अध्यक्षता में यहाँ युद्ध | बन्द कराने तथा अस्थायी शान्ति का प्रस्ताव पारित कराकर शान्ति स्थापित की गयी। इस प्रकार भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के सहयोग से वियतनाम में शान्ति स्थापित करने का भरसक प्रयास किया।

5. स्वेज नहर विवाद– भारत ने स्वेज नहर विवाद के समय मिस्र, इंग्लैण्ड, फ्रांस तथा इजराइल के मध्य विशेष दबाव डालकर युद्ध रोका तथा समझौता कराकर इस विवाद का अंन्त कराया।

6. निरस्त्रीकरणभारत ने सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र संघ में निरस्त्रीकरण का प्रस्ताव रखा जो भारी बहुमत से पारित किया गया। इस प्रकार परमाणु शस्त्रों पर व्यय होने वाली राशि का प्रयोग विश्व-कल्याण की योजनाओं में लगाया जाने लगा। भारत का प्रयास है कि परमाणु शक्ति का प्रयोग रचनात्मक कार्यों के लिए ही किया जाए।

7. उपनिवेशवाद की समाप्ति में सहयोगसंयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से घिनौने उपनिवेशवाद को समाप्त कराने में भारत की भूमिका विशेष सराहनीय रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की उपनिवेशवाद की। समाप्ति को कार्यरूप प्रदान करने के लिए जो समिति बनी, उसका अध्यक्ष भारत को ही बनाया गया था और भारत ने लीबिया, मलाया, नामीबिया, अल्जीरिया आदि अनेक देशों को स्वतन्त्र कराने में अपना । सक्रिय योगदान दिया।

8. रंग-भेद नीति का विरोध- भारत ने रंग-भेद की नीति को विश्व-शान्ति के लिए खतरा माना है। रंग-भेद पक्षपात का सबसे व्यापक तथा धृष्टतापूर्वक प्रदर्शित उदाहरण एशिया तथा अफ्रीका के काले वर्गों के प्रति गोरों की धारणा थी। रंग-भेद की नीति में दक्षिण अफ्रीका सरकार सबसे आगे है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कई बार रंग-भेद की नीति के विरुद्ध वाज उठायी तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ कन्धे-से-कन्धा मिलाकर कार्य किया।

9. आर्थिक एवं सामाजिक न्याय का विस्तार– भारत का सदा यह विचार रहा है कि विश्व शान्ति | की स्थायी स्थापना तभी हो सकती है जब आर्थिक और सामाजिक अन्याय को समाप्त किया जाए। भारत ने इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। भारत ने आर्थिक व पिछड़े देशों के विकास पर विशेष बल दिया है और विकसित देशों को अविकसित देशों की अधिक-से-अधिक सहायता करने के लिए कहा है।

इस प्रकार भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों में बहुत सहयोग दिया तथा विश्व शान्ति की स्थापना में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। इसके अतिरिक्त भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रमुख संगठनों का सदस्य रहा है तथा पूरी क्षमता के साथ विश्व में शान्ति, न्याय, समता तथा सद्भाव कायम करने के लिए प्रयत्न करता आ रहा है। निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि भारत ने सदैव ही अपने प्रयासों, नीतियों एवं कार्यक्रमों के द्वारा संयुक्त राष्ट्र के अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उसने संयुक्त राष्ट्र संघ के मंचों के माध्यम से रंग-भेद, आतंकवाद, उपनिवेशवाद, जातीय हिंसा, शोषण तथा युद्धों के विरुद्ध अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

32238.

सॉलिड्स सिक्का किसने चलाया था?(क) कॉन्स्टेनटाइन(ख) प्लिनी(ग) कोलुमेल्ला(घ) बिलकिस

Answer»

सही विकल्प है (क)कॉन्स्टेनटाइन्

32239.

बाहरी सुरक्षा गठबन्धन बनाने के क्या उपाय हैं?

Answer»

गठबन्धन पारम्परिक सुरक्षा नीति का एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। एक गठबन्धन में कई देश शामिल होते हैं और सैन्य हमले को रोकने अथवा उससे रक्षा करने के लिए समवेत कदम उठाते हैं। अधिकांश गठबन्धनों को लिखित नियमों एवं उपनियमों द्वारा एक औपचारिक रूप दिया जाता है। कोई भी देश गठबन्धन प्राय: अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए करता है। गठबन्धन राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं एवं राष्ट्रीय हितों के बदलने पर गठबन्धन भी बदल जाते हैं।

32240.

अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसमें से रोमन समाज और अर्थव्यवस्था को आपकी दृष्टि में आधुनिक दर्शाने वाले आधारभूत अभिलक्षण चुनिए।

Answer»

रोमन समाज और अर्थव्यवस्था में दिखने वाले आधारभूत अभिलक्षण निम्नलिखित हैं

⦁    रोमन समाज में नाभिकीय परिवारों (Nuclear Family) का चलन था। वयस्क पुत्र परिवारों के साथ नहीं रहते थे।
⦁    पत्नी अपनी सम्पत्ति को अपने पति को हस्तांतरित नहीं करती थी, वह अपने पैतृक परिवार की सम्पत्ति में अपने पूरे अधिकार बनाए रखती थी। अपने पिता की मुख्य उत्तराधिकारी बनी रहती थी और पिता की मृत्यु होने पर उस सम्पत्ति की स्वतंत्र मालिक बन जाती थी।
⦁    रोम में साक्षरता थी। सभी नगरों में साक्षरता की दर भिन्न-भिन्न थी।
⦁     जैतून के तेल का निर्यात किया जाता था।
⦁    रोम में व्यापार एवं वाणिज्य उन्नति पर था। बैंकिंग व्यवस्था भी प्रचलित थी।
⦁    रोम के विविध प्रांतों में जलशक्ति से कारखाने चलाए जाते थे।
⦁     सोने-चाँदी की खदानों में भी जलशक्ति का उपयोग किया जाता था।

32241.

वर्ष वृत्तान्त से क्या आशय है?

Answer»

समकालीन इतिहासकारों द्वारा लिखा गया इतिहास वर्ष वृत्तान्त कहलाता है। ये वृत्तान्त वार्षिक आधार पर प्रतिवर्ष लिखे जाते थे।

32242.

ऑगस्टस का एक अन्य नाम क्या था?(क) जूलियस सीजर(ख) ब्रूटस(ग) ऑक्टेवियन(घ) एलन

Answer»

सही विकल्प है (ग) ऑक्टेवियन

32243.

आपको क्या लगता है कि रोमन सरकार ने चाँदी में मुद्रा को ढालना क्यों बन्द किया होगा और वह सिक्कों के उत्पादन के लिए कौन-सी धातु का उपयोग करने लगे?

Answer»

रोमन सरकार द्वारा चाँदी में मुद्रा ढालना इस धातु की कमी तथा मूल्यवान होने के कारण बन्द किया होगा। तत्कालीन शासन में स्पेन में चाँदी की खाने समाप्त हो गई थीं तथा सरकार के पास.चाँदी के भण्डार रिक्त हो गए थे। कॉन्स्टेनटाइन ने सोने पर आधारित नई मौद्रिक प्रणाली स्थापित की और परवर्ती सम्पूर्ण पुराकाल में सोने की मुद्राओं का भारी मात्रा में प्रचलन रहा। वस्तुत: रोम में सोने के कई भण्डार थे।

32244.

मानवाधिकारों के हनन की स्थिति में क्या संयुक्त राष्ट्र संघ को हस्तक्षेप करना चाहिए? संक्षेप में लिखिए।

Answer»

मानवाधिकारों के हनन की स्थिति में संयुक्त राष्ट्र संघ को हस्तक्षेप करना चाहिए या नहीं। इस सम्बन्ध में बहस हो रही है-

(1) कुछ लोगों का तर्क है कि संयुक्त राष्ट्र संघ का घोषणा-पत्र अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को अधिकार देता है कि यह मानवाधिकारों की रक्षा के लिए हथियार उठाए अर्थात् संयुक्त राष्ट्र संघ को इस क्षेत्र में हस्तक्षेप करना चाहिए।
(2) कुछ देशों का तर्क है कि यह सम्भव है कि शक्तिशाली देशों के हितों से यह निर्धारित होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ मानवाधिकार उल्लंघन के किस मामले में कार्यवाही करेगा और किसमें नहीं? इससे शक्तिशाली देशों को मानवाधिकार के बहाने उसके अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का सरल रास्ता मिल जाएगा।

32245.

निम्नलिखित पदों को उनके अर्थ से मिलाएँ-AB(1) विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स-CBMs)(क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज।(2) अस्त्र-नियन्त्रण(ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया।(3) गठबन्धन(ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अवरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना।(4) निरस्त्रीकरण(घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश।

Answer»
AB
(1) विश्वास बहाली के उपाय (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स-CBMs)(ख) राष्ट्रों के बीच सुरक्षा मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की नियमित प्रक्रिया।
(2) अस्त्र-नियन्त्रण(घ) हथियारों के निर्माण अथवा उनको हासिल करने पर अंकुश।
(3) गठबन्धन(ग) सैन्य हमले की स्थिति से निबटने अथवा उसके अवरोध के लिए कुछ राष्ट्रों का आपस में मेल करना।
(4) निरस्त्रीकरण(क) कुछ खास हथियारों के इस्तेमाल से परहेज।
32246.

20वीं सदी की शुरुआत में कृत्रिम रेशों से बने कपड़ों की माँग क्यों बढ़ गयी थी?

Answer»

ये कपड़े पूर्व प्रचलित कपड़ों की तुलना में सस्ते, हल्के, आरामदायक होते थे। इन कपड़ों को पहमनी और साफ करना आसान था।

32247.

यदि आप रोम साम्राज्य में रहे होते तो कहाँ रहना पसन्द करते-नगरों में या ग्रामीण क्षेत्रों में? कारण बताइए।

Answer»

यदि मैं रोम साम्राज्य में निवास कर रहा होता तो नगरीय क्षेत्र में ही रहना पसन्द करता, क्योंकि
(i) राम साम्राज्य नगरों का साम्राज्य था। ऐसे में वहाँ गाँवों का बहुत कम महत्त्व था।
(ii) रोम साम्राज्य में नगरों का शासन स्वतन्त्र होता था। इससे व्यक्तित्व के विकास में सहायता मिलती।
(iii) सबसे बड़ा लाभ यह होता कि वहाँ खाद्य पदार्थों की कमी नहीं होती और अकाल के दिनों में भी भोजन प्राप्त हो सकता था।
(iv) नगरों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अन्य सुविधाएँ अधिक और अच्छी थीं।

32248.

विश्व युद्धों के कारण महिला परिधानों में आए किन्हीं दो बदलावों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

विश्व युद्धों के कारण महिला परिधानों में आए दो बदलाव –

⦁    यूरोप में औरतों ने जेवर और बेशकीमती कपड़े पहनने छोड़ दिए।

⦁    चटख रंगों के स्थान पर हल्के रंग के कपड़े पहने जाने लगे।

32249.

शनार महिलाओं के सम्मुख उपस्थित समस्या और उनका समाधान प्रस्तुत कीजिए।

Answer»

दक्षिणी त्रावणकोर के नायर जमींदारों के यहाँ काम करने वाली शनार (नाडर) ताड़ी निकालने वाली एक जाति थी। नीची जाति का माने जाने के कारण इन लोगों को छतरी लेकर चलने, जूते या सोने के गहने पहनने की मनाही थी। नीची जाति की महिलाओं व पुरुषों से अपेक्षा की जाती थी कि स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार ऊँची जाति वाले लोगों के सामने कभी भी ऊपरी शरीर कोई नहीं ढंकेगा।1820 ई0 के दशक में ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आकर धर्मांतरित शनार महिलाओं ने अपने तन को ढंकने के लिए उच्च जाति  की महिलाओं की तरह सिले हुए ब्लाउज व कपड़े पहनना प्रारंभ कर दिया। उच्च जाति के लोगों ने शनार महिलाओं के लिए बहुत सी मुसीबतें खड़ी कीं लेकिन शनार महिलाओं ने कपड़े पहनने के तरीके में बदलाव नहीं किया। अंत में त्रावणकोर सरकार द्वारा एक घोषणा द्वारा शनार महिलाओं–चाहे हिंदू हों या ईसाई – को जैकेट आदि से ऊपरी शरीर को अपनी इच्छानुसार ढंकने की अनुमति मिल गई, लेकिन ठीक वैसे ही नहीं जैसे ऊँची जाति की महिलाएँ ढंकती थीं।

32250.

भारतीय शैली के कपड़ों के प्रति अंग्रेजों की सोच स्पष्ट कीजिए।

Answer»

औपनिवेशिक काल में भारतीय लोग स्वयं को गर्मी के ताप से बचाने के लिए पगड़ी बाँधते थे। पगड़ी को इच्छानुसार कहीं भी उतारा नहीं जाता था। अंग्रेज लोग पगड़ी की जगह हैट पहनते थे जो कि उनके सामाजिक स्तर से ऊपर के लोगों के सामने सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उतारना पड़ता था। इस सांस्कृतिक विविधता ने भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी थी।

ब्रिटिश लोग प्रायः इस बात से अप्रसन्न होते थे कि भारतीय लोग औपनिवेशिक अधिकारियों के सामने अपनी पगड़ी नहीं उतारते। दूसरी ओर कुछ भारतीय राष्ट्रीय अस्मिता को जताने के लिए जान-बूझकर पगड़ी पहनते। उन्नीसवीं सदी के प्रारंभ में ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा शिष्टाचार का पालन करते हुए, शासन कर रहे देशी राजाओं व नवाबों के दरबार में जूते उतारकर जाने की परंपरा थी। 1824-1828 के बीच गवर्नर जनरल एमहर्ट इस बात पर अड़ा रहा कि उसके सामने पेश होने वाले हिंदुस्तानी आदर प्रदर्शित करने के लिए नंगे पाँव आएँ, लेकिन इसको सख्ती से लागू नहीं किया गया। जब लॉर्ड डलहौजी भारत का गवर्नर जनरल बना तो ‘पादुका सम्मान की यह रस्म सख्त हो गई और अब भारतीयों को किसी भी सरकारी संस्था में दाखिल होते समय जूते निकालने पड़ते थे। जो लोग यूरोपीय पोशाक पहनते थे उन्हें इस नियम से छूट मिली हुई थी। सरकारी सेवा में कार्यरत बहुत से भारतीय इस नियम से स्वयं को त्रस्त महसूस करने लगे।
1862 ई० में सूरत की फौजदारी अदालत में लगान आँकने वाले के पद पर कार्यरत मनोकजी कोवासजी एन्टी ने सत्र न्यायाधीश की अदालत में जूते उतारने से इन्कार कर दिया। अदालत में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई और उन्होंने विरोध जताते हुए बंबई के गवर्नर  को पत्र लिखा।

इसके जवाब में अंग्रेजों का कहना था कि चूंकि भारतीय किसी भी पवित्र स्थान या घर में घुसने से पहले जूते उतारते ही हैं, तो वे अदालत में भी वैसा ही क्यों न करें। किन्तु भारतीय उनके इस तर्क को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे।