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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

32251.

1805 में अंग्रेज अफसर बेंजमिन होइन ने बंगलोर में बनने वाली चीजों की एक सूची बनाई थी, जिसमें निम्नलिखित उत्पाद भी शामिल थे-⦁    अलग-अलग किस्म और नाम वाले जनाना कपड़े।⦁    मोटी छींट।⦁    मखमल।⦁    रेशमी कपड़े।बताइए कि बीसवीं सदी के प्रारंभिक दशकों में इनमें से कौन-कौन से किस्म के कपड़े प्रयोग से बाहर चले गए होंगे, और क्यों?

Answer»

20वीं सदी के प्रारंभिक देशकों में इनमें से रेशमी और मखमल के कपड़ों का प्रयोग सीमित हो गया होगा क्योंकि-

⦁    यह कपड़े यूरोपीय कपड़ों की तुलना में बहुत महंगे थे।

⦁    स्वदेशी आंदोलन ने लोगों में रेशमी वस्त्रों का त्याग करने को प्रेरित किया।

⦁    इस समय तक इंग्लैण्ड के कारखानों में बना सूती कपड़ा भारत के बाजारों में बिकने लगा था। यह कपड़ा देखने में सुंदर, हल्का व सस्ता था।

32252.

कॉन्स्टेनटाइन के प्रमुख सुधार लिखिए।

Answer»

कॉन्स्टेनटाइन के प्रमुख सुधार निम्नखित थे :

⦁    इसका प्रमुख सुधार मौद्रिक क्षेत्र में है। उसने ‘सॉलिड्स’ नामक एक नया सिक्का चलाया जो 4.5 ग्राम शुद्ध सोने का बना था। यह सिक्का रोम साम्राज्य के पतन के बाद भी चलता रहा।
⦁    ये सॉलिड्स सिक्के बड़े पैमाने पर ढाले जाते थे और करोड़ों की संख्या में चलन में थे।
⦁    कॉन्स्टेनटाइन की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि कुस्तुनतुनिया नगर का निर्माण है। यह नवीन राजधानी तीन ओर से समुद्र से घिरी हुई और सुरक्षित थी।
⦁    उसके काल में तेल मिलों और शीशे के कारखानों सहित ग्रामीण उद्योग-धंधों स्क्रूप्रेसों आदि का विकास हुआ।
⦁    इन सबसे उसके साम्राज्य में व्यापार की खूब उन्नति हुई।

32253.

अगर सम्राट त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने में वास्तव में सफल रहे होते और रोमवासियों का इस देश पर अनेक सदियों तक कब्जा रहा होता तो क्या आप सोचते हैं कि भारत वर्तमान समय के देश से किस प्रकार भिन्न होता?

Answer»

त्राजान भारत पर विजय प्राप्त करने के लिए निकला था किन्तु सफल नहीं हो सका। यदि वह सफल हो जाता और रोमवासियों का अनेक सदियों तक कब्जा होता तो ऐसा भारत वर्तमान भारत से बिल्कुल अलग होता। वह भारत वैसा होता जैसा ब्रिटिश शासनकाल में था। रोम के निवासी एक गुलाम देश के समान व्यवहार करते और भारत के संसाधनों का दोहन करते। भारतीयों को किसी प्रकार का अधिकार प्रदान नहीं किया जाता उन्हें अपमानजनक दशाओं में जीवन व्यतीत करना पड़ता। उल्लेखनीय है कि उस काल में सोना रोम से भारत आता था और भारत सम्पन्न देश था। रोमवासियों की अधीनता स्वीकार हो जाने पर यह सम्भव नहीं होता। भारत के सभी क्षेत्रों में विकास रुक जाता।

32254.

सीनेट क्या है?

Answer»

सीनेट धनी कुलीन वर्ग का समूह था जो शासन चलाता था।

32255.

कल्पना कीजिए कि आप रोम की एक गृहिणी हैं जो घर की जरूरत की वस्तुओं की खरीदारी की सूची बना रही हैं? अपनी सूची में आप कौन-सी वस्तुएँ शामिल करेंगी?

Answer»

यदि मैं रोम की गृहिणी होती तो अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निम्नलिखित वस्तुएँ मॅगाती
⦁     रोटी और मक्खन
⦁     सब्जियाँ
⦁     दूध
⦁    अण्डे तथा मांस
⦁    चीनी
⦁     तेल
⦁    बच्चों के लिए आवश्यक वस्तुएँ
⦁    सौन्दर्य प्रसाधन
⦁    कपड़े धोने तथा नहाने का साबुन
⦁    कपड़े, दवाइयाँ आदि

32256.

वर्धा शिक्षा योजना कब प्रस्तुत की गई?(क) अगस्त 1929 में।(ख) अक्टूबर 1930 में(ग) अक्टूबर 1937 में(घ) जनवरी 1939 में।

Answer»

सही विकल्प है (ग) अक्टूबर 1937 में

32257.

जेकोबिन क्लब्ज़ के सदस्य स्वयं को क्या कहते थे?

Answer»

जेकोबिन क्लब्ज के लोग स्वयं को सेन्स क्लोट्टीज कहते थे।

32258.

बहुदेववाद का क्या अर्थ है?

Answer»

बहुदेववाद का अर्थ है अनेक देवी-देवताओं की पूजा-उपासना करना

32259.

विक्टोरिया कालीन समाज में महिलाओं व पुरुषों की वस्त्र शैलियों की भिन्नता को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

ब्रिटेन में महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों की शैलियों में पर्याप्त भिन्नता थी। इस काल में महिलाओं को बचपन से सुशील और आज्ञाकारी होने की शिक्षा दी जाती थी। आदर्श नारी उसे माना जाता था जो तमाम दुःख दर्द को सह कर भी चुप रहे। जहाँ पुरुषों से धीर-गंभीर, बलवान, आजाद और आक्रामक होने की उम्मीद की जाती थी वहीं औरतों को छुईमुई, निष्क्रिय व दब्बू माना जाता था। पहनावे के रस्मो-रिवाज में भी यह अंतर स्पष्ट रूप से झलकता था। बचपन से ही लड़कियों को सख्त फीतों से बँधे कपड़ों-स्टेज में  कसकर बाँधा जाता था जिससे उनका बदन इकहरा रहे। थोड़ी बड़ी होने पर लड़कियों को बदन से चिपके कॉर्सेट (चुस्त भीतरी कुर्ती) पहनने होते थे। टाइट फीतों से कसी पतली कमर वाली महिलाओं को आकर्षक, शालीन व सौम्य समझा जाता था। इस तरह विक्टोरियाई महिलाओं की अलग छवि बनाने में पोशाक ने अहम् भूमिका निभाई।

32260.

सेंट ऑगस्टाइन कौन था?

Answer»

सेंट ऑगस्टाइन उत्तरी अफ्रीका के हिप्पो नामक नगर का बिशप था और चर्च के बौद्धिक इतिहास में उसका उच्चतम स्थान था।

32261.

सीनेट नामक संस्था के विषय में आप क्या जानते हैं?

Answer»

रोम में सीनेट कुलीन वर्ग के लोगों का एक समूह था जिसमें धनी परिवारों के लोग शामिल थे। गणतंत्र की वास्तविक सत्ता सीनेट नामक निकाय में ही निहित थी। कुलीन वर्ग के लोग सीनेट के माध्यम से ही सरकार चलाते थे। सीनेट की सदस्यता जीवन भर चलती थी। इसके लिए जन्म के स्थान पर धन और पद प्रतिष्ठा को अधिक महत्त्व दिया जाता था। जूलियस सीजर के दत्तक पुत्र तथा उत्तराधिकारी ऑक्टेवियन ने गणतंत्र को समाप्त कर दिया।

32262.

“रोमवासी बहुदेववादी थे।” इस कथन को समझाइए।

Answer»

यूनान और रोमवासियों की पारम्परिक धार्मिक संस्कृति बहुदेववादी थी। ये लोग अनेक पन्थों एवं उपासना पद्धतियों में विश्वास रखते थे और जुपीटर, जूनो, मिनर्वा और मॉर्स जैसे अनेक रोमन इतालवी देवों और यूनानी तथा पूर्वी देवी-देवताओं की पूजा किया करते थे जिसके लिए उन्होंने साम्राज्य भर में हजारों मंदिर-मठ और देवालय बना रखे थे। ये बहुदेववादी स्वयं को किसी एक नाम से नहीं पुकारते थे।

32263.

कॉन्स्टेनटाइन ने अपनी दूसरी राजधानी कहाँ बनाई?(क) कुस्तुनतुनिया में(ख) वेनिस में(ग) इटली में(घ) गैलीनस में

Answer»

सही विकल्प है (क) कुस्तुनतुनिया में

32264.

निम्नलिखित के विषय में आप क्या जानते हैं?⦁    जूलिसय सीजर⦁     ऑगस्टस⦁     मार्कस ओरिलियस

Answer»

⦁    जूलियस सीजर (46 ई० पू० से 44 ई० पू०) : जूलियस सीजर मौलिक रूप से रोम का एक महान् सेनापति था जिसने अनेक युद्धों तथा रोमन दासों के विद्रोह को कुचलने के पश्चात् अपने प्रतिद्वंद्वी पाम्पी की मिस्र में हत्या करा दी। उसने 46 ई० पू० में एक तानाशाह के रूप में रोम की गद्दी को प्राप्त किया था।
⦁    ऑगस्टस : ऑगस्टस या ऑक्टेवियन जूलियस सीजर का ही वंशज था। वह 37 ई० पू० में | रोम साम्राज्य का सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्ति हो गया। उसने ऑगस्टस (पवित्र) और इम्पेरेटर  (राज्य का प्रथम नागरिक) नामक पदवियाँ ग्रहण कीं और 24 वर्ष तक रोम पर शासन-किया।
⦁    मार्कस ओरिलियस : ऑगस्टस के पश्चात् के शासकों में सबसे योग्य शासक मार्कस | ओरिलियस थी। उसने लगभग 20 वर्षों तक राज्य किया। वह योग्य सेनापति, कुशल प्रशासक व महान् दार्शनिक था।

32265.

चौथी सदी ईसवी के उत्तरार्द्ध में सिकंदर के सैन्य अभियानों का क्या प्रभाव पड़ा?

Answer»

चौथी सदी ईसवी के उत्तरार्द्ध में मेसीडोन राज्य के शासक सिकंदर ने कई सैन्य अभियान किए। सिकंदर के नियंत्रण में सभी क्षेत्रों में यूनानी संस्कृति, विचार तथा आदर्शों को सम्मिश्रण हो गया। पूरे क्षेत्र का यूनानीकरण हो गया। सिकंदर ने उत्तर अफ्रीका, पश्चिम एशिया तथा ईरान के अनेक भागों को जीत लिया। उसके इन अभियानों के फलस्वरूप ईरानी तथा मिस्त्री क्षेत्रों के साथ सिन्धु घाटी तक विस्तृत प्रांत एक हो गए।

32266.

हिप्पो शहर के प्रमुख बिशप कौन थे?(क) मार्टिन लूथर(ख) सेंट ऑगस्टाइन(ग) कोलूमेल्ला(घ) कॉन्स्टेनटाइन

Answer»

सही विकल्प है (ख) सेंट ऑगस्टाइन

32267.

रोमवासी किन-किनं देवताओं की पूजा करते थे?

Answer»

(i) जुपीटर
(ii) जूना
(iii) मिनर्वा
(iv) मार्स

32268.

पैपाइरस के विषय में आप क्या जानते हैं ?

Answer»

पैपाइरस एक सरकण्डे जैसा पौधा था। यह पौधा मिस्र में नील नदी के किनारे उगता था। इस । पौधे से लेखन सामग्री तैयार की जाती थी। इसका उपयोग व्यापक रूप में किया जाता था। पैपाइरस पत्रों पर हजारों संविदाएँ, लेख, पत्र तथा सरकारी दस्तावेज लिखे हुए पाए गए हैं। इन्हें पैपाइरस विज्ञानियों द्वारा प्रकाशित किया गया है।

32269.

पैपाइरस पत्र का प्रयोग किस कार्य में होता था?

Answer»

पैपाइरस पत्र का प्रयोग लेखन कार्य के लिए होता था।

32270.

टॉलमी किस विषय का ज्ञाता था?(क) खगोल व भूगोल(ख) गणित(ग) भाषा(घ) आयुर्वेद

Answer»

सही विकल्प है (क) खगोल व भूगोल

32271.

बेसिक शिक्षा-प्रणाली के पाठ्यक्रम में सम्मिलित नहीं किया गया है(क) हस्तकलाओं की शिक्षा को(ख) गणित की शिक्षा को(ग) धार्मिक शिक्षा को(घ) सामाजिक विषयों की शिक्षा को

Answer»

सही विकल्प है (ग) धार्मिक शिक्षा को

32272.

बेसिक शिक्षा-प्रणाली के अन्तर्मत सामान्य शिक्षा सम्बद्ध है(क) धार्मिक जीवन से ।(ख) भौतिक जीवन से(ग) व्यावहारिक जीवन से(घ) काल्पनिक जीवन से

Answer»

सही विकल्प है (ग) व्यावहारिक जीवन से

32273.

बेसिक शिक्षा प्रणाली का निर्धारण किया गया है(क) अन्तर्राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर(ख) तत्कालीन भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर(ग) औद्योगिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर(घ) कृषि सम्बन्धी दशाओं को ध्यान में रखकर

Answer»

(ख) तत्कालीन भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर

32274.

भारतीय पहनावे पर स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव बताइए।

Answer»

भारत में 20वीं शताब्दी के प्रथम दशक में बंगाल विभाजन के विरोधस्वरूप देश भर में स्वदेशी को अपनाने तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने के निमित्त एक जन-आंदोलन आरंभ हुआ। इस आंदोलन के मूल में वस्त्रों की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। सस्ते और हल्के ब्रिटिश कपड़ों के प्रचलन के कारण बड़ी संख्या में भारतीय बुनकर बेरोजगार हो गए थे। जब लॉर्ड कर्जन ने 1905 ई० में बंगाल को विभाजित करने का फैसला किया तो ‘बंग-भंग की प्रतिक्रिया में स्वदेशी आंदोलन ने जोर पकड़ा। देशवासियों से अपील की गई कि वे तमाम तरह के विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करें और माचिस तथा सिगरेट जैसी चीजों को बनाने के लिए खुद उद्योग लगाएँ। खादी का इस्तेमाल देशभक्ति का कर्तव्य बन गया। महिलाओं से अनुरोध किया गया कि रेशमी कपड़े व काँच की चूड़ियों को फेंक दें और शंख की चूड़ियाँ पहनें। हथकरघे पर बने मोटे कपड़े को लोकप्रिय बनाने के लिए अनेक प्रयास किए गए।

32275.

‘पादुका सम्मान’ विवाद क्या था?

Answer»

ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा 19वीं सदी की शुरुआत में शिष्टाचार की पालन करते हुए, शासन कर रहे देशी राजाओं व नवाबों के दरबार में जूते उतार कर जाने की परंपरा प्रचलित थी तत्कालीन कुछ अंग्रेज अधिकारी भारतीय वेशभूषा भी धारण करते थे। लेकिन सन् 1830 में सरकारी समारोहों में उन्हें भारतीय परिधान धारण करके जाने से मनाकर दिया गया। दूसरी ओर भारतीयों को भारतीय वेशभूषा ही धारण करनी होती थी। गवर्नर लार्ड एमहर्ट (1824-1828) इस बात पर दृढ़ रहा कि उसके सम्मुख उपस्थित होने वाले भारतीय सम्मान प्रदर्शित करने के लिए नंगे पाँव आए, लेकिन उसने इस नियम को कठोरतापूर्वक लागू नहीं किया।

लेकिन लॉर्ड डलहौजी ने भारत का गवर्नर जनरल बनने पर इस नियम को दृढ़तापूर्वक लागू किया। अब भारतीयों को किसी भी सरकारी संस्था में प्रविष्ट होते समय जूते उतारने पड़ते थे। इस रस्म को ‘पादुका सम्मान’ कहा गया। जो लोग यूरोपीय परिधान धारण करते थे, उन्हें इस नियम से छूट प्राप्त थी। सरकारी सेवा में कार्यरत बहुत से भारतीय इस नियम से स्वयं को पीड़ित महसूस करने लगे थे। | 1862 ई० में सूरत की फौजदारी अदालत में लगाने आँकने वाले के पद पर कार्यरत मनोकजी कोवासजी एन्टी ने सत्र न्यायाधीश की अदालत में जूते उतारने से इन्कार कर दिया। अदालत में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई और उन्होंने विरोध जताते हुए बंबई के गवर्नर को पत्र लिखा।

इसके जवाब में अंग्रेजों का कहना था कि चूंकि भारतीय किसी भी पवित्र स्थान या घर में घुसने से पहले जूते उतारते ही हैं, तो वे अदालत में भी वैसा ही क्यों न करें। इस पर भारतीयों ने कहा कि पवित्र जगहों या घर पर जूते उतारने के दो कारण थे। घर पर वे धूल या गंदगी अंदर न जाने पाए इसलिए जूते उतारते थे और पवित्र स्थानों पर वे देवी-देवताओं के प्रति आदर प्रकट करने के लिए जूते उतारते थे और उनका रिवाज था। किन्तु अदालत जैसी सार्वजनिक जगह घरों से अलग थे।

32276.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोपीय महिलाओं के परिधान में क्या परिवर्तन आए?

Answer»

प्रथम विश्व युद्ध (1914) के शुरू होने के साथ ही महिलाओं के पारंपरिक महिला परिधानों की समाप्ति हो गयी।

इन परिवर्तनों के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं-

⦁    उन्नीसवीं शताब्दी तक बच्चो के नए स्कूल सादे वस्त्रों पर बल देने और साज-श्रृंगार को निरुत्साहित करने लगे। व्यायाम और खेलकूद लड़कियों के पाठ्यक्रम का अंग बन गए। खेल के समय लड़कियों को ऐसे वस्त्र पहनने पड़ते थे जो इनकी गतिविधि में बाधा न डालें। जब वे काम पर जाती थीं तो वे आरामदेह और सुविधाजनक वस्त्र पहनती थीं।

⦁    अनेक यूरोपीय महिलाओं ने आभूषणों तथा विलासमय वस्त्रों का परित्याग कर दिया। फलस्वरूप सामाजिक बंधन टूट गए और उच्च वर्ग की महिलाएँ अन्य वर्गों की महिलाओं के समान दिखाई देने लगीं।

⦁    प्रथम विश्व युद्ध की अवधि में अनेक व्यावहारिक आवश्यकताओं के कारण वस्त्रे छोटे हो गए। 1917 ई0 तक ब्रिटेन में 7,00,000 महिलाएँ गोला-बारूद के कारखानों में काम करने लगीं। कामगर महिलाएँ ब्लाउज, पतलून के अतिरिक्त स्कार्फ पहनती थीं जो बाद में खाकी ओवरआल और टोपी में परिवर्तित हो गया। स्कर्ट की लंबाई कम हो गई। शीघ्र ही पतलून पश्चिमी महिलाओं की पोशाक का अनिवार्य अंग बन गई जिससे उन्हें चलने-फिरने में अधिक आसानी हो गई।

⦁    भड़कीले रंगों का स्थान सादे रंगों ने ले लिया। अनेक महिलाओं ने सुविधा के लिए अपने बाल छोटे करवा लिए।

32277.

रोम में गणतंत्र दिवस कब तक चला?

Answer»

रोम में गणतंत्र दिवस 509 ई० पू० से 27 ई० पू० तक चला।

32278.

एम्फोरा क्या थे?

Answer»

एम्फोरा ढुलाई के ऐसे मटके अथवा कन्टेनर्स थे जिनमें शराब, जैतून का तेल और दूसरे तरल पदार्थ लाए व ले जाए जाते थे।

32279.

सहयोग मूलक सुरक्षा में भी बल प्रयोग की अनुमति कब दी जा सकती है?

Answer»

सहयोग मूलक सुरक्षा में भी अन्तिम उपाय के रूप में बल प्रयोग किया जा सकता है। अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय उन सरकारों से निपटने के लिए बल प्रयोग की अनुमति दे सकती है जो अपनी ही जनता पर अत्याचार कर रही हो अथवा निर्धनता, महामारी एवं प्रलयकारी घटनाओं की मार झेल रही जनता के दुःख-दर्द की उपेक्षा कर रही हो।

ऐसी स्थिति में किसी एक देश द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय एवं स्वयंसेवी संगठनों आदि की इच्छा के विरुद्ध बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए बल्कि सामूहिक स्वीकृति से तथा सामूहिक रूप से सम्बन्धित घटना के लिए जिम्मेदार देश पर बल प्रयोग किया जाना चाहिए।

32280.

इंग्लैण्ड में नेशनल डेस सोसाइटी’ की स्थापना कब की गयी?

Answer»

इंग्लैण्ड में सन् 1881 में नेशनल ड्रेस सोसाइटी की स्थापना की गयी।

32281.

पैपाइरस पत्र को प्रयोग किस रूप में किया जाता था?(क) ईंधन के रूप में(ख) कागज के रूप में(ग) औषधि के रूप में(घ) कलम के रूप में

Answer»

सही विकल्प है (ख) कागज के रूप में

32282.

फ्रांसिसी क्रान्ति के बाद परिधान संहिता में क्या परिवर्तन हुए?

Answer»

सन् 1789 में फ्रांस में हुई क्रान्ति ने विभिन्न वर्गों के बीच व्याप्त पहनावे के अंतर को लगभग समाप्त कर दिया।

इस परिवर्तन का विवरण इस प्रकार है-

⦁    लाल टोपी को स्वतंत्रता की निशानी के रूप में पहना जाने लगा।

⦁    कीमती वस्त्रों के स्थान पर सादगीपूर्ण वस्त्रों का प्रचलन आरंभ हुआ, जिससे समानता की भावना प्रदर्शित होती थी।

⦁    तिरछी टोपियाँ (कॉकेड) और लंबी पतलून भी प्रचलन में आ गई थी। फ्रांसिसी क्रांति के उपरांत यद्यपि परिधान संबंधी कानूनों का अंत हो गया था परंतु आर्थिक विभिन्नता के कारण अब भी निम्न वर्ग उच्च वर्गों के समान वस्त्र नहीं पहन सकता था।

⦁    इस परिवर्तन का आरंभ जैकोबिन क्लब के सदस्यों द्वारा हुआ जब उन्होंने कुलीन वर्ग के फैशनदार घुटन्ना पहनने वाले लोगों से अलग दिखने के लिए धारीदार लंबी पतलून पहनने का निर्णय किया। इन सदस्यों को सौं कुलॉत’ (बिना घुटने वाले) कहा जाता था।

⦁    महिलाओं और पुरुषों ने ढीले-ढाले आरामदेह वस्त्रों को पहनना आरंभ कर दिया।

⦁    वस्त्रों के रंगों के चयन में फ्रांसिसी तिरंगों के तीनों रंगों (नीला, सफेद, लाल) को अधिक महत्त्व दिया जाने लगा। इन्हें पहनना देशभक्ति का पर्याय बन गया।

32283.

स्वदेशी आंदोलन ने किस बात पर विशेष बल दिया?

Answer»

भारत में बने माल का अधिक-से-अधिक देशवासियों द्वारा प्रयोग और विदेशी माल का बहिष्कार।

32284.

सुरक्षा की पारम्परिक धारणा से क्या अभिप्राय है?

Answer»

बाहरी सुरक्षा की पारम्परिक धारणा से आशय राष्ट्रीय सुरक्षा की धारणा से है। इसमें सैन्य खतरे को किसी देश के लिए सर्वाधिक घातक माना जाता है। इस खतरे का स्रोत कोई दूसरा देश होता है, जो सैन्य हमले की धमकी देकर सम्प्रभुता, स्वतन्त्रता तथा क्षेत्रीय अखण्डता को प्रभावित करता है। सैन्य कार्रवाई से जनसाधारण का जीवन भी प्रभावित होता है।

32285.

ऑगस्टस का शासनकाल क्यों याद किया जाता है?

Answer»

ऑगस्टस का शासनकाल शान्ति के लिए याद किया जाता है।

32286.

यूरोपीय पोशाक संहिता और भारतीय पोशाक संहिता के बीच दो फर्क बताइए।

Answer»

यूरोपीय और भारतीय पोशाक संहिता के बीच दो अंतर निम्नलिखित हैं-

⦁    यूरोपीय पोशाक संहिता में तंग वस्त्रों को महत्त्व दिया जाता था जबकि भारतीय पोशाक संहिता में आरामदेह तथा ढीले- ढाले वस्त्रों को अधिक महत्त्व दिया जाता था।

⦁    यूरोपीय पोशाक संहिता कानूनी समर्थन पर आधारित थी, जबकि भारतीय पोशाक संहिता को सामाजिक समर्थन प्राप्त था।

⦁    यूरोप के लोग हैट पहनते थे जिसे वे स्वयं से उच्च सामाजिक स्तर के लोगों के सामने सम्मान प्रकट करने के लिए उतारते थे जबकि भारत के लोग अपने को गर्मी से बचाने के लिए पगड़ी पहनते थे और यह सम्मान का सूचक थी। इसे इच्छानुसार बार-बार नहीं उतारा जाता था।

32287.

ब्रिटेन में 1915 ई० से पहले ब्रिटेन की महिलाओं के वस्त्रों में होने वाले प्रमुख परिवर्तन कौन-कौन से थे?

Answer»

इस अवधि में महिलाओं के परिधानों में निम्नलिखित परिवर्तन हुए-

⦁    1600 के बाद भारत के साथ व्यापार के कारण भारत की सस्ती, सुंदर तथा आसान रख-रखाव वाली भारतीय छींट इंग्लैंड (ब्रिटेन) पहुँचने लगी। अनेक यूरोपीय महिलाएँ इसे आसानी से खरीद सकती थीं और पहले से अधिक वस्त्र जुटा सकती थीं।

⦁    19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के समय बड़े पैमाने पर सूती वस्त्रों का उत्पादन होने लगा। वह भारत सहित विश्व के अनेक भागों को सूती वस्त्रों का निर्यात भी करने लगा। इस प्रकार सूती कपड़ा बहुत बड़े वर्ग को आसानी से उपलब्ध होने लगा।
20वीं शताब्दी के आरंभ तक कृत्रिम रेशों से बने वस्त्रों को और अधिक सस्ता कर दिया। इनकी धुलाई तथा उनको संभालना अधिक आसान था।

⦁    17वीं शताब्दी से पहले ब्रिटेन की अति साधारण महिलाओं के पास बहुत ही कम वस्त्र होते थे। ये फ्लैक्स, लिनिन तथा ऊन के बने होते थे जिनकी धुलाई कठिन थी इसलिए उन्होंने उन वस्त्रों को अपनाना आरंभ कर दिया जिनकी धुलाई तथा रख-रखाव अपेक्षाकृत सरल था।

⦁    1870 ई0 के दशक के अंतिम वर्षों में भारी भीतरी वस्त्रों का धीरे-धीरे त्याग कर दिया गया। अब वस्त्र पहले से अधिक हल्के, अधिक छोटे और अधिक सादे हो गए। फिर भी 1914 ई0 तक वस्त्रों की लंबाई में कमी नहीं आई। परंतु 1915 तक स्कर्ट की लंबाई एकाएक कम हो गई। अब यह घुटनों तक पहुँच गई थी।

32288.

भारत में स्वदेशी आंदोलन पर टिप्पणी लिखिए।

Answer»

लॉर्ड कर्जन ने ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति बढ़ते विरोध को नियंत्रित करने के लिए बंगाल विभाजन का निर्णय किया। बंगाल विभाजन के इस कदम ने भी भारत में स्वेदशी आंदोलन को बढ़ावा दिया। लोगों ने भारत में प्रचलित प्रत्येक प्रकार के विदेशी सामान का विरोध और बहिष्कार करना आरंभ किया। उन्होंने खादी का प्रयोग करना प्रारंभ कर दिया, यद्यपि यह मोटी, महँगी तथा रखरखाव में कठिन होती थी। उन्होंने माचिस एवं सिगरेट आदि सामानों के लिए अपने स्वयं के उद्योग स्थापित कर दिए। खादी का प्रयोग देशभक्ति के लिए कर्तव्य बन गया। महिलाओं ने अपने रेशमी कपड़े व काँच की चूड़ियाँ फेंक दीं और सादी शंख की चूड़ियाँ धारण करने लगीं। खुरदरे घर में बनाए गए कपड़ों को लोकप्रिय बनाने के लिए गीतों एवं कविताओं के माध्यम से इनका गुणगान किया गया। इसकी खामियों के बावजूद स्वदेशी के तजुर्बे ने महात्मा गाँधी को यह महत्त्वपूर्ण सीख अवश्य दी कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रतीकात्मक हथियार के रूप में कपड़े की कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

32289.

निम्नलिखित में से कौन एक गाँधी जी की शिक्षा योजना नहीं है?(क) बेसिक शिक्षा(ख) वर्धा योजना(ग) नयी तालीम(घ) हस्तशिल्प

Answer»

सही विकल्प है (ग) नयी तालीम

32290.

कौन-सी शिक्षा प्रणाली शिल्प-केन्द्रित है?(क) बेसिक शिक्षा(ख) डाल्टन प्लान(ग) मॉण्टेसरी विधि(घ) प्रोजेक्ट विधि

Answer»

सही विकल्प है (क) बेसिक शिक्षा

32291.

“जिस प्रकार वायु और जल पर सबका अधिकार है और सभी इन्हें समान रूप से प्रयोग में ला सकते हैं, उसी प्रकार शिक्षा भी सबके लिए सुलभ हो और निर्धन भी शिक्षा प्राप्त कर सके। इसको अनिवार्य एवं निःशुल्क होना जरूरी है।” यह मान्यता किसकी है?(क) मैडम मॉण्टेसरी।(ख) महात्मा गाँधी(ग) मदन मोहन मालवीय(घ) डॉ० राधाकृष्णन

Answer»

सही विकल्प है (ख) महात्मा गाँधी

32292.

1870 ई0 के दशक में अमेरिका में पोशाक सुधार के समर्थकों के क्या विचार थे?

Answer»

⦁    कपड़ों को सरल बनाया जाए।

⦁    कार्सेट का परित्याग किया जाए।

⦁    स्कर्ट की लंबाई छोटी की जाए।

32293.

सम्प्चुअरी कानूनों के अंतर्गत राजा-रजवाड़े किस तरह की पोशाक पहन सकते थे?

Answer»

इस कानून के अन्तर्गत राजा-रजवाड़े एर्माइन, रेशम, फर, मखमल या जरी की बनी पोशाक ही पहन सकते थे।

32294.

त्रावणकोर रियासत की शनार जाति पर लागू प्रतिबन्धों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

⦁    ऊँची जाति वालों के सामने शनार स्त्री-पुरुष शरीर के ऊपरी भाग को नहीं ढंक सकते थे।

⦁    शनार लोग सोने के आभूषण नहीं पहन सकते थे।

⦁    शंनार लोग जूते नहीं पहन सकते थे।

⦁    शनार लोग छतरी लेकर नहीं चल सकते थे।

32295.

विभिन्न भारतवासियों द्वारा राष्ट्रीय पोशाक का डिजाइन तैयार करने के प्रयासों का विवरण प्रस्तुत कीजिए।

Answer»

भारत में 19वीं सदी के अंत तक राष्ट्रीयता की भावना प्रबल रूप से बलवती हो उठी थी। ऐसे में अनेक भारतवासी राष्ट्रीय एकता की अभिव्यक्ति करने वाले सांस्कृतिक प्रतीकों के सृजन को तत्पर हो गए। इसी काल खण्ड में राष्ट्रीय पोशाक की खोज राष्ट्र की पहचान को प्रतीकात्मक ढंग से परिभाषित करने की प्रक्रिया का एक हिस्सा बन गयी। विभिन्न भारतवासियों द्वारा राष्ट्रीय पोशाक का डिजाइन तैयार करने के लिए अनेक प्रयास किए गए। 1870 ई0 के दशक में टैगोर खानदान ने भारतीय पुरुषों और महिलाओं के लिए राष्ट्रीय पोशाक  डिजाइन करने का प्रयास किया। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सुझाव प्रस्तुत किया कि भारतीय व यूरोपीय पोशाक का मेल करने के बजाय हिन्दू और मुसलमान पोशाक, का मेल करके भारतीय राष्ट्रीय पोशाक निर्मित की जाए। इस तरह बटनदार लंबा कोट-पुरुषों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया। इसी तरह पृथक्-पृथक् क्षेत्रों की पारंपरिक वेशभूषा से प्रेरणा ली गयी।

32296.

ब्रह्मिका साड़ी देश के किस भाग में अधिक लोकप्रिय थी?

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यह साड़ी प्रमुख रूप से बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय थी।

32297.

युद्ध की पारम्परिक धारणा में विश्वास बहाली के उपायों की चर्चा कीजिए।

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सुरक्षा की पारम्परिक धारणा में विश्वास बहाली के प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं-

⦁    विश्वास बहाली के दोनों देशों के मध्य हिंसा को कम किया जा सकता है।
⦁    विश्वास बहाली की प्रक्रिया में सैन्य टकराव एवं प्रतिद्वन्द्विता वाले देशों के बीच सूचनाओं एवं विचारों का सीमित आदान-प्रदान किया जाता है।
⦁    दोनों देश एक-दूसरे को अपनी सैन्य सामग्री एवं सैन्य योजनाओं की जानकारी प्रदान करते हैं। ऐसा करके दोनों देश अपने प्रतिद्वन्द्वी को इस बात का विश्वास दिलाते हैं कि वे अपनी तरफ से हमले की कोई योजना नहीं बना रहे हैं।

32298.

रोमन साम्राज्य को कब और क्यों दो भागों में बाँटा गया ?

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350-400 ई० पू० में शासन को बेहतर ढंग से चलाने के लिए रोमन साम्राज्य को पूर्वी तथा , पश्चिमी दो भागों में बाँट दिया गया।

32299.

तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य कौन-सा था?(क) रोम साम्राज्य(ख) ब्रिटिश साम्राज्य(ग) भारतीय साम्राज्य(घ) रूसी साम्राज्य

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सही विकल्प है (क) रोम साम्राज्य

32300.

ऑगस्टस के साम्राज्य को कहते थे(क) प्रिन्सिपेट(ख) गणतन्त्र(ग) यूनियन(घ) संघ

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सही विकल्प है (क) प्रिन्सिपेट