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संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों में भारत ने क्या योगदान दिया ? संक्षेप में लिखिए।याविश्व शान्ति में भारत की भूरिका का वर्णन कीजिए।

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संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का योगदान

भारत एक गुट-निरपेक्ष देश है। यह विश्व में स्थायी शान्ति का समर्थक है। इसने अन्तर्राष्ट्रीय विवादों तथा झगड़ों को समाप्त कराने का सदैव प्रयास किया है। भारत ने विश्व-शान्ति बनाये रखने में सक्रिय भूमिका निभाकर तथा अनेक प्रमुख समस्याओं के समाधान में संयुक्त राष्ट्र संघ की सहायता की है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के योगदान के प्रमुख उदाहरण निम्नवत् हैं

1. कांगो की समस्याकांगो के प्रधानमन्त्री की हत्या की जाँच की माँग करके तथा अपनी सैनिक टुकड़ी भेजकर भारत ने 1964 ई० में कांगो को स्वतन्त्र कराया। कांगो की समस्या से अन्तर्राष्ट्रीय तनाव पैदा हो सकता था; अत: भारत ने अपने सहयोग से इस समस्या का समाधान कराया।

2. कोरिया की समस्याउत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में 1950 ई० में युद्ध छिड़ने पर भारत ने ही संयुक्त राष्ट्र संघ में युद्धविराम तथा युद्धबन्दियों की अदला-बदली में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जुलाई, 1953 ई० को तीन वर्ष के पश्चात् कोरिया में शान्ति स्थापित कराने का श्रेय भी भारत को मिला।

3. साइप्रस की समस्यासन् 1964 ई० में साइप्रस में गृहयुद्ध छिड़ने पर भारतीय सेना की एक टुकड़ी भेजी गयी, जिससे वहाँ शान्ति स्थापित हो सकी तथा यूनानियों एवं तुर्कियों का युद्ध समाप्त हुआ और साइप्रस को ब्रिटेन के आधिपत्य से सदैव के लिए छुटकारा मिल गया।

4. हिन्दचीन की समस्या- उत्तरी तथा दक्षिणी वियतनाम में शान्ति की स्थापना हेतु भारत, पोलैण्ड तथा कनाड़ा के सदस्यों को अन्तर्राष्ट्रीय आयोग का सदस्य बनाया गया। भारत की अध्यक्षता में यहाँ युद्ध | बन्द कराने तथा अस्थायी शान्ति का प्रस्ताव पारित कराकर शान्ति स्थापित की गयी। इस प्रकार भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के सहयोग से वियतनाम में शान्ति स्थापित करने का भरसक प्रयास किया।

5. स्वेज नहर विवाद– भारत ने स्वेज नहर विवाद के समय मिस्र, इंग्लैण्ड, फ्रांस तथा इजराइल के मध्य विशेष दबाव डालकर युद्ध रोका तथा समझौता कराकर इस विवाद का अंन्त कराया।

6. निरस्त्रीकरणभारत ने सर्वप्रथम संयुक्त राष्ट्र संघ में निरस्त्रीकरण का प्रस्ताव रखा जो भारी बहुमत से पारित किया गया। इस प्रकार परमाणु शस्त्रों पर व्यय होने वाली राशि का प्रयोग विश्व-कल्याण की योजनाओं में लगाया जाने लगा। भारत का प्रयास है कि परमाणु शक्ति का प्रयोग रचनात्मक कार्यों के लिए ही किया जाए।

7. उपनिवेशवाद की समाप्ति में सहयोगसंयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से घिनौने उपनिवेशवाद को समाप्त कराने में भारत की भूमिका विशेष सराहनीय रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की उपनिवेशवाद की। समाप्ति को कार्यरूप प्रदान करने के लिए जो समिति बनी, उसका अध्यक्ष भारत को ही बनाया गया था और भारत ने लीबिया, मलाया, नामीबिया, अल्जीरिया आदि अनेक देशों को स्वतन्त्र कराने में अपना । सक्रिय योगदान दिया।

8. रंग-भेद नीति का विरोध- भारत ने रंग-भेद की नीति को विश्व-शान्ति के लिए खतरा माना है। रंग-भेद पक्षपात का सबसे व्यापक तथा धृष्टतापूर्वक प्रदर्शित उदाहरण एशिया तथा अफ्रीका के काले वर्गों के प्रति गोरों की धारणा थी। रंग-भेद की नीति में दक्षिण अफ्रीका सरकार सबसे आगे है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कई बार रंग-भेद की नीति के विरुद्ध वाज उठायी तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ कन्धे-से-कन्धा मिलाकर कार्य किया।

9. आर्थिक एवं सामाजिक न्याय का विस्तार– भारत का सदा यह विचार रहा है कि विश्व शान्ति | की स्थायी स्थापना तभी हो सकती है जब आर्थिक और सामाजिक अन्याय को समाप्त किया जाए। भारत ने इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है। भारत ने आर्थिक व पिछड़े देशों के विकास पर विशेष बल दिया है और विकसित देशों को अविकसित देशों की अधिक-से-अधिक सहायता करने के लिए कहा है।

इस प्रकार भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों में बहुत सहयोग दिया तथा विश्व शान्ति की स्थापना में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। इसके अतिरिक्त भारत संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रमुख संगठनों का सदस्य रहा है तथा पूरी क्षमता के साथ विश्व में शान्ति, न्याय, समता तथा सद्भाव कायम करने के लिए प्रयत्न करता आ रहा है। निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि भारत ने सदैव ही अपने प्रयासों, नीतियों एवं कार्यक्रमों के द्वारा संयुक्त राष्ट्र के अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति तथा व्यवस्था को सुरक्षित रखने के प्रयासों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उसने संयुक्त राष्ट्र संघ के मंचों के माध्यम से रंग-भेद, आतंकवाद, उपनिवेशवाद, जातीय हिंसा, शोषण तथा युद्धों के विरुद्ध अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।



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