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संयुक्त राष्ट्र संघ के विशिष्ट अभिकरणों (संस्थाओं) एवं उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।यायूनेस्को से आप क्या समझते हैं ? इसके कार्य क्या हैं ?याविश्व खाद्य एवं कृषि संगठन पर टिप्पणी लिखिए। अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन से आप क्या समझते है ? इसके कार्य क्या हैं ?यायूनेस्को के दो कार्य लिखिए।यायूनेस्को क्या है? इसके किन्हीं दो कार्यों का उल्लेख कीजिए।

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संयुक्त राष्ट्र संघ ने आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक कार्यों के सम्पादन के लिए अनेक विशिष्ट अभिकरणों (संस्थाओं) का निर्माण किया है। इनका विवरण निम्नलिखित है–

1. अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization: ILO)—इसकी स्थापना सर्वप्रथम प्रथम विश्वयुद्ध के बाद सन् 1949 ई० में हुई थी। राष्ट्र संघ के पतन के बाद इसे संयुक्त राष्ट्र संघ का अंग बना लिया गया। इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैण्ड) में स्थित है। इसके सदस्यों की कुल संख्या 150 से भी अधिक है। प्रत्येक राष्ट्र के 4 सदस्य इसकी बैठक में भाग लेते हैं। इसका प्रशासनिक विभाग श्रमिक संघ के कार्यों पर नियन्त्रण रखता है। कार्य–

  • विश्व भर के श्रमिकों के हित के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाना,
  • श्रमिकों के शिक्षण और प्रशिक्षण का प्रबन्ध करना,
  • श्रमिकों के समुचित वेतन, आवास, स्वास्थ्य तथा जीवन-स्तर सुधारने के उपाय करना,
  • बाल-श्रम की रोकथाम करना,
  • औद्योगिक विवादों को निर्णय करना तथा श्रमिकों की समस्याओं का समाधान करना।

2. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization : WHO)–विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल, 1948 ई० को ‘जेनेवा’ (स्विट्ज़रलैण्ड) में की गयी थी। इस संस्था के तीन अंग हैं—साधारण सभा, प्रशासनिक बोर्ड तथा सचिवालय। प्रशासनिक बोर्ड के सदस्यों की संख्या 18 है। अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया तथा अन्य देशों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की शाखाएँ स्थापित की गयी हैं। कार्य–

  • सम्पूर्ण विश्व में मानव स्वास्थ्य के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का निर्माण करना,
  • संक्रामक तथा घातक बीमारियों की रोकथाम करना,
  • स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसन्धानकरना तथा दैवी आपदा से होने वाली हानि को रोकना,
  • अल्प-विकसित देशों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी उपलब्ध कराना,
  • स्वास्थ्य सम्बन्धी साहित्य का प्रकाशन व वितरण करना तथा
  • मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सभी देशों का ध्यान आकर्षित करना।

3. संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization : UNESCO)–संयुक्त राष्ट्र संघ के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन की स्थापना के उद्देश्य से 1 नवम्बर से 6 नवम्बर, 1946 ई० तक ब्रिटिश सरकार ने फ्रांस की सरकार के सहयोग से लन्दन में एक सम्मेलन बुलाया। इसी सम्मेलन में 4 नवम्बर, 1946 ई० को इस संस्था की स्थापना हुई। इस समय इस संस्था के सदस्यों की संख्या 100 से अधिक है। इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है। इस संस्था का वर्ष में एक सामान्य सम्मेलन होता है, जिसमें सभी सदस्य देशों के एक-एक प्रतिनिधि भाग लेते हैं। कार्य-यह संघ की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण संस्था है। इसके कार्य निम्नलिखित हैं

  • विश्व में शिक्षा और संस्कृति का प्रसार करना,
  • शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन अनुसन्धान करना तथा अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना का विकास करना,
  • अविकसित तथा विकासशील देशों में शैक्षिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करवाना,
  • विस्थापितों के पुनर्वास की व्यवस्था करना,
  • विश्व के देशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की व्यवस्था करना,
  • विशेष समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न देशों में अपने विशेषज्ञ भेजना तथा
  • विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों के बीच सम्पर्क और सम्बन्धों की स्थापना करना।

4. खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization : FAO)—इस संस्था की । स्थापना 16 अक्टूबर, 1945 ई० में हुई थी। वर्तमान में 180 से अधिक देश इस संस्था के सदस्य हैं। इसका मुख्यालय इटली की राजधानी रोम में स्थित है। कार्य-

  • अल्पविकसित देशों में कृषि उत्पादन की वृद्धि की योजनाएँ तैयार करना और उन्हें लागू करवाना,
  • कृषि सम्बन्धी सूचनाओं का प्रसार करना,
  • कृषि की नयी तकनीकों की खोज करना,
  • उन्नतशील बीजों की नयी-नयी किस्मों  की खोज करना,
  • पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा तथा बीमारियों की रोकथाम के उपाय करना तथा
  • कृषि सम्बन्धी वैज्ञानिक अनुसन्धानों का प्रकाशन करना।

5. अन्तर्राष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (United Nations International Children’s Emergency Fund : UNICEF)-इस संस्था की स्थापना 4 नवम्बर, 1946 ई० को न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में हुई थी। प्रारम्भ में इसमें केवल 20 सदस्य थे, लेकिन वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या 188 तक पहुँच गयी है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य विश्व भर के बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करना है। सन् 1953 ई० से इस संस्था को स्थायी कर दिया गया है। कार्य–

  • संसार के सभी देशों के बच्चों की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आर्थिक सहायता देना,
  • मातृ एवं शिशु-कल्याण स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रशिक्षण व सामग्री की व्यवस्था करना,
  • दैवी आपदाओं के समय माताओं तथा शिशुओं के लिए विशेष प्रबन्ध करना,
  • विभिन्न देशों के चिकित्सालयों तथा स्कूलों में शिशु-कल्याण व प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना करना,
  • शिशुओं की घातक बीमारियों की रोकथाम के लिए योजनाएँ बनाना तथा उन्हें लागू करना इन संस्थाओं के अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय दूर संचार संघ, अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक आदि अनेक संस्थाएँ संयुक्त राष्ट्र संघ की अधीनता में विश्व के देशों के लिए कल्याणकारी कार्यों का सम्पादन कर रही हैं।

6. विश्व बैंक (World Bank)–विश्व बैंक पाँच वित्तीय संस्थाओं का एक समूह है। ये हैं—वित्त निगम (1956), अन्तर्राष्ट्रीय विकास संघ (1960), बहुपक्षीय निवेश प्रत्याभूति अभिकरण (1988), निवेश सम्बन्धी विवादों के निपटारे के लिए अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र (1966) आदि। ये सभी संस्थाएँ सदस्य-राज्यों को उनकी अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण तथा विकास में और देशों के मध्य विषमताओं को घटाने में सहायता करती हैं। इसका मुख्यालय वाशिंगटन डी०सी० (अमेरिका) में है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Mometary Fund : IMF)-इसकी स्थापना 27 दिसम्बर, 1945 को की गयी थी। इसका मुख्य उद्देश्य भुगतान असन्तुलन की समस्या से ग्रस्त सदस्य राज्यों को अस्थायी ऋण प्रदान करना, विनिमय दर में सन्तुलन स्थापित करना तथा सदस्य-राष्ट्रों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस कोष की व्यवस्था एक प्रशासक-मण्डल करता है। इस कोष में सर्वाधिक कोष देने वाले देश में ही इसका कार्यालय होता है। वर्तमान में, अमेरिका का योगदान सर्वाधिक होने के कारण, इसका कार्यालय वाशिंगटन (अमेरिका) में है।

7. अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी (International Atomic Energy Agency : IAEA)इस संस्था की स्थापना 29 जुलाई, 1956 ई० को हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य विश्व की शान्ति व्यवस्था और सम्पन्नता में अणुशान्ति के योगदान को बढ़ावा देना तथा यह देखना कि उसके द्वारा दी जाने वाली सहायता का अनैतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग तो नहीं किया जाता है। इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में है।



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