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संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों तथा उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों का उल्लेख कीजिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा किए जाने वाले किन्हीं दो कार्यों का वर्णन कीजिए।याद्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व शान्ति की स्थापना के लिए किस अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना की गयी ?याइसके किन्हीं दो अंगों के नाम लिखिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ का कौन-सा अंग युद्ध रोकने में सक्रिय भूमिका निभाता है?यावह कैसे गठित होता है? उसके सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?यासंयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के सम्बन्ध में एक टिप्पणी लिखिए।यासंयुक्त राष्ट्र संघ के तीन प्रमुख अंगों के नाम लिखिए।याविश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है? इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?यासंयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् का गठन कैसे होता है?याउसके स्थायी सदस्य देशों के नाम लिखिए। उन्हें कौन-सा अधिकार मिला है?यासंयुक्त राष्ट्र के निम्नलिखित अंगों के गठन और कार्यों को संक्षेप में लिखिए-(क) महासभा, (ख) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय, (ग) आर्थिक व सामाजिक परिषद् |
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Answer» संयुक्त राष्ट्र संघ मानवीय बुद्धि द्वारा परिकल्पित श्रेष्ठतम अन्तर्राष्ट्रीय संगठन है। द्वितीय विश्वयुद्ध के भयंकर और विनाशकारी परिणामों को देखकर विश्व के राजनीतिज्ञों ने मानव-जाति को समूल विनाश से बचाने के लिए एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था की स्थापना को अनिवार्य समझा। इसी उद्देश्य से 24 अक्टूबर, 1945 ई० को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की गयी। संयुक्त राष्ट्र संघ के अंग संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर; जिसमें 19 अध्याय और 111 अनुच्छेद हैं; के अध्याय 3 के सातवें अनुच्छेद में इस संस्था के निम्नलिखित अंगों का उल्लेख है–
इन अंगों को संगठन तथा कार्य इस प्रकार हैं 1. महासभा– संघ के सभी सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि इस महासभा में बैठते हैं। प्रत्येक सदस्य- राष्ट्र महासभा के लिए पाँच प्रतिनिधि तक भेज सकता है, परन्तु उनका ‘मत’ (Vote) एक ही माना जाता है। वर्ष में कम-से-कम एक बार महासभा का अधिवेशन सितम्बर माह में अवश्य होता है। सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर इसका असाधारण अधिवेशन कभी भी बुलाया जा सकता है। इस महासभा में एक निर्वाचित अध्यक्ष एवं सात उपाध्यक्ष होते हैं। साधारण सभा या महासभा के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
2. सुरक्षा परिषद्- संघ का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग सुरक्षा परिषद् है। इसमें कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी हैं। सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष का होता है। स्थायी सदस्यों में संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन हैं। अस्थायी सदस्यों का चुनाव महासभा के दो-तिहाई बहुमतं द्वारा प्रति दूसरे वर्ष किया जाता है। कोई अस्थायी सदस्य अवधि समाप्त होने पर पुनः निर्वाचन में खड़ा नहीं हो सकता। सुरक्षा परिषद् के प्रत्येक सदस्य को एक मत देने का अधिकार है। परिषद् के प्रत्येक स्थायी सदस्य को वीटो (निषेधाधिकार) प्राप्त है। इस अधिकार का प्रयोग करके कोई भी स्थायी सदस्य परिषद् के निर्णय को रद्द कर सकता है। किसी भी वाद-विवाद का अन्तिम निर्णय पाँच स्थायी और चार अस्थायी सदस्यों की सहमति के बाद ही माना जाता है। भारत भी 1-1-1993 से 1-1-1995 तक सुरक्षा परिषद् का अस्थायी सदस्य था। सुरक्षा परिषद् के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं
3. न्यास परिषद्- न्यास परिषद् में 12 सदस्य हैं, जिनमें चार प्रबन्धकर्ता देश (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, अमेरिका और ब्रिटेन), 3 सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य (रूस, चीन और फ्रांस) और 5 निर्वाचित सदस्य हैं। इस परिषद् का उद्देश्य संरक्षित प्रदेशों का शासन-प्रबन्ध करने वाले राष्ट्रों के कार्य-कलापों की जाँच तथा उन पर नियन्त्रण रखना है। पलाऊ की स्वतन्त्रता के बाद न्यास परिषद् का कार्य लगभग समाप्त हो गया है। 4. सचिवालय– सचिवालय संघ का प्रशासनिक अंग है। इसका मुख्य अधिकारी महासचिव कहलाता है, जिसकी नियुक्ति 5 वर्ष के लिए की जाती है। महासचिव की सहायता के लिए विभिन्न देशों के बहुत-से कर्मचारी (लगभग 10,000) होते हैं। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है। सचिवालय का व्यय-भार सभी राष्ट्र मिलकर उठाते हैं। सचिवालय के आठ विभाग हैं। प्रत्येक विभाग का अधिकारी सहायक सचिव होता है। सचिवालय संघ के समस्त कार्यों का लेखा रखता है और आँकड़ों का संग्रह, तथा प्रकाशन करता है। महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासभा करती है। महासचिव का कार्य संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों की रिपोर्ट तैयार कर प्रति वर्ष साधारण सभा (महासभा) में प्रस्तुत करना होता है। शान्ति एवं सुरक्षा को भंग होता देखकर सुरक्षा परिषद् को सूचना देना महासचिव का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य होता है। इसके निवर्तमान महासचिव कोफी अन्नान और वर्तमान महासचिव बान की-मून हैं। 5. आर्थिक और सामाजिक परिषद्- इस परिषद् में महासभा द्वारा निर्वाचित 54 सदस्य होते हैं। इसके प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 3 वर्ष है। परिषद् के एक-तिहाई सदस्य प्रतिवर्ष पद-मुक्त होते रहते हैं। इसकी एक वर्ष में कम-से-कम 2 बैठकें अवश्य होती हैं। आवश्यकता होने पर विशेष अधिवेशन भी बुलाये जा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के इस अंग की स्थापना का उद्देश्य पिछड़े हुए राष्ट्रों को आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति के लिए सहायता देना है। यह परिषद् अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न कार्यों का सम्पादन करती है। इसका प्रमुख कार्य सम्पूर्ण विश्व की आर्थिक, सामाजिक, शिक्षा-स्वास्थ्य, विज्ञान-कला आदि के क्षेत्र से ज्ञान प्राप्त करके महासभा को सूचित करना है। यह परिषद् मानव-कल्याण की अन्तर्राष्ट्रीय योजनाओं का मसविदा भी तैयार करती है। इस परिषद् के अधीन अनेक संस्थाएँ कार्य करती हैं। 6. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय– अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र संघ की न्यायपालिका है। इसमें 15 न्यायाधीश हैं, जिनकी नियुक्ति महासभा सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर करती है। न्यायाधीशों का कार्यकाल 9 वर्ष का होता है। न्यायालय की कार्यवाही फ्रेंच तथा अंग्रेजी भाषा में की जाती है। | अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का प्रमुख कार्यालय हेग (हॉलैण्ड) में है। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय का मुख्य कार्य दो या दो से अधिक राष्ट्रों के मध्य उत्पन्न विवाद या झगड़े के विषय में निर्णय देना है। इसके अतिरिक्त इसका कार्य परामर्श देने का भी है। |
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