Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

नात्सी सोच के खास पहलू कौन-से थे?

Answer»

नात्सी सोच के खास पहलू इस प्रकार थे-
⦁    नाजी दल जर्मनी को अन्य सभी देशों से श्रेष्ठ मानता था और पूरे विश्व पर जर्मनी का प्रभाव जमाना चाहता था।
⦁    इसने युद्ध की सराहना की तथा बल प्रयोग को यशोगान किया।
⦁    इसने जर्मनी के साम्राज्य विस्तार और उन सभी उपनिवेशों को जीतने पर ध्यान केन्द्रित किया जो उससे छीन लिए गए थे।
⦁    ये लोग ‘शुद्ध जर्मनों एवं स्वस्थ नॉर्डिक आर्यों के नस्लवादी राष्ट्र का सपना देखते थे और उन सभी का खात्मा चाहते थे जिन्हें वे अवांछित मानते थे।
⦁    नाजियों की दृष्टि में देश सर्वोपरि है। सभी शक्तियाँ देश में निहित होनी चाहिए। लोग देश के लिए हैं न कि देश लोगों के  लिए।
⦁    नाजी सोच सभी प्रकार की संसदीय संस्थाओं को समाप्त करने के पक्ष में थी और एक महान नेता के शासन में विश्वास रखती थी।
⦁    यह सभी प्रकार के दल निर्माण व विपक्ष के दमन और उदारवाद, समाजवाद एवं कम्युनिस्ट विचारधाराओं के उन्मूलन की पक्षधर थी।
⦁    इसने यहूदियों के प्रति घृणा का प्रचार किया क्योंकि इनका मानना था कि जर्मनों की आर्थिक विपदा के लिए यही लोग जिम्मेदार थे।

2.

1929 ई. तथा 1932 ई. के चुनावों में नात्सी पार्टी को कितने प्रतिशत वोट मिले थे?

Answer»

⦁    1929 के चुनाव में 2.6%,
⦁    1932 के चुनाव में 37%।

3.

हिटलर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

Answer»

हिटलर का जन्म आस्ट्रिया (1889 ई.) हुआ था

4.

नासियों का प्रोपेगैंडा यहूदियों के खिलाफ नफ़रत पैदा करने में इतना असरदार कैसे रहा?

Answer»

हिटलर ने 1933 ई. में तानाशाह बनने के बाद सभी शक्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। हिटलर ने जर्मनी में एक शक्तिशाली केन्द्रीय सरकार का गठन किया। उसने लोकतांत्रिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। एक दल, एक नेता और पूरी तरह अनुशासन उसके शासन का  आधार था। हिटलर ने यहूदियों के विरुद्ध विद्वेषपूर्ण प्रचार शुरू किया जो यहूदियों के प्रति जर्मनों में नफरत फैलाने में सहायक सिद्ध हुआ। यहूदियों के खिलाफ नाजियों के प्रोपेगैंडा के सफल होने के प्रमुख कारण इस प्रकार थे-
⦁    हिटलर ने जर्मन लोगों के दिलो-दिमाग में पहले ही अपना महत्त्वपूर्ण स्थान बना लिया था। जर्मन लोग हिटलर द्वारा कही गयी बातों पर आँख मूंदकर विश्वास करते थे। हिटलर के चमत्कारी व्यक्तित्व के कारण यहूदियों के विरुद्ध नाजी दुष्प्रचार सफल सिद्ध हुआ।
⦁    नाजियों ने भाषा और मीडिया का बहुत सावधानी से प्रयोग किया। नाजियों ने एक नस्लवादी विचारधारा को जन्म दिया कि यहूदी निचले स्तर की नस्ल से संबंधित थे और इस प्रकार वे अवांछित थे।
⦁    नाजियों ने प्रारम्भ से उनके स्कूल के दिनों में ही बच्चों के दिमागों में भी यहूदियों के प्रति नफरत भर दी। जो अध्यापक यहूदी थे उन्हें बर्खास्त कर दिया गया और यहूदी बच्चों को स्कूलों से निकाल दिया गया। इस प्रकार के तरीकों एवं नई विचारधारा के प्रशिक्षण ने नई पीढ़ी के बच्चों में यहूदियों के प्रति नफरत फैलाने और नाजी प्रोपेगैन्डा को सफल बनाने में पूर्णतः सफलता प्राप्त की।
⦁    यहूदियों के प्रति नफरत फैलाने के लिए प्रोपेगैन्डा फिल्मों का निर्माण किया गया। रूढ़िवादी यहूदियों की पहचान की गई एवं उन्हें चिन्हित किया गया। उन्हें उड़ती हुई दाढ़ी और कफ्तान पहने दिखाया जाता था।
⦁    उन्हें केंचुआ, चूहा और कीड़ा कह कर  संबोधित किया जाता था। उनकी चाल की तुलना कुतरने वाले छछंदरी जीवों से की जाती थी।
⦁    ईसा की हत्या के अभियुक्त होने के कारण ईसाइयों की यहूदियों के प्रति पारम्परिक घृणा का नाजियों ने पूरा लाभ उठाया जिससे जर्मन यहूदियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो गए।

5.

रूस में उदारवादियों के प्रमुख उद्देश्य क्या थे?

Answer»

उदारवादियों के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार थे-
⦁    ये लोग सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (सभी नागरिकों को वोट का अधिकार देने) के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि वोट का अधिकार केवल संपत्तिधारियों को ही मिलना चाहिए। वे नहीं चाहते थे कि महिलाओं को भी मतदान का अधिकार मिले।
⦁    वे एक स्वतन्त्र न्यायपालिका चाहते थे।
⦁    उदारवादी एक ऐसा देश चाहते थे जो सभी धर्मों का सम्मान करे।
⦁    उन्होंने वंशवादी शासकों की निरंकुश सत्ता का विरोध किया।
⦁    वे सरकार के समक्ष व्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा करना चाहते थे।
⦁    उन्होंने शासकों एवं अधिकारियों से मुक्त एक प्रतिनिधित्व करने वाली, निर्वाचित संसदीय सरकार की माँग की।

6.

1917 ई. की रूसी क्रान्ति में लेनिन की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Answer»

लेनिन बोल्शेविक दल का एक नेता था। वह समाज तथा देश में बदलाव के लिए क्रांतिकारी तरीकों में विश्वास करता था। लेनिन मजदूरों में आर्थिक समानता लाना चाहता था। उसके विचार में संसदीय तौर-तरीके रूस जैसे देश में बदलाव नहीं ला सकते थे जहाँ लोकतंत्रात्मक अधिकारों का कोई अस्तित्व नहीं था और कोई संसद नहीं थी। अंततः बोल्शेविक रूस में 1917 ई. में एक सफल क्रान्ति ला सके और उन्होंने देश तथा समाज का ढाँचा पूरी तरह बदल दिया। उसने मजदूरों को 1917 की रूसी क्रांति के लिए एक हथियार के  रूप में संगठित किया। उसने युद्ध का अन्त करने और किसानों को भूमि स्थानान्तरित करने की कोशिश की। केरेंस्की की सरकार के पतन के बाद लेनिन विश्व की प्रथम कम्युनिस्ट सरकार का मुखिया बना।

7.

रूसी क्रान्ति की सफलता के पश्चात् समाजवादी प्रणाली लोगों के लिए किस तरह उपयोगी थी? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

निस्संदेह रूसी क्रान्ति की सफलता के बाद रूस में समाजवादी प्रणाली की स्थापना हुई थी। यह प्रणाली कई कारणों की वजह से लोगों के लिए अच्छी थी जिनमें से चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं जिनके आधार पर क्रांति के उपरांत स्थापित की गई समाजवादी प्रणाली लोकोपयोगी कही जा सकती है।
⦁    नई प्रणाली में निजी सम्पत्ति के स्वामित्व पर प्रतिबन्ध लगा दिया जोकि मूलतः पूँजीपतियों तथा मजदूरों को कम मजदूरी दिए जाने के कारण पैदा होती है।
⦁    रूसी क्रान्ति के बाद भूमि किसानों के पास तथा कारखाने मजदूरों के पास चले गए।
⦁    समाजवादी प्रणाली ने लोगों को स्वेच्छाचारी निरंकुश शासन से मुक्ति दिलाकर उन्हें सर्वहारा वर्ग के अधिनायकवाद के अधीन ला दिया।
⦁    समाजवादी प्रणाली में हर व्यक्ति के लिए काम करना अनिवार्य हो गया। शोषण बन्द हो गया तथा प्रत्येक नागरिक को काम प्राप्त करने का मौलिक अधिकार मिल गया। एक नए समाज का निर्माण हुआ जोकि सामाजिक समानता और न्याय पर आधारित था।

8.

अक्टूबर क्रान्ति के बाद रूस में गृह युद्ध का मार्ग किस प्रकार प्रशस्त हुआ?

Answer»

बोल्शेविकों द्वारा जमीन के पुनर्वितरण का आदेश देने पर रूसी सेना टूटने लगी। सैनिक और किसान जमीन के पुनर्वितरण के लिए घर जाना चाहते थे और अन्ततः उन्होंने सेना छोड़ना शुरू कर दिया। बोल्शेविक समाजवादी, उदारवादी, उनके नेता और राजशाही के समर्थकों ने बोल्शेविकों के विद्रोह की निन्दा की। उनके नेता दक्षिण एशिया में चले गए और बोल्शेविकों (रेड्स) से लड़ने के  लिए टुकड़ियाँ एकत्र करने लगे। 1918 ई. और 1919 ई. के बाद ग्रीन्स (समाजवादी क्रांतिकारी) एवं ‘ह्वाइट्स’ (प्रो-जारीस्ट) ने अधिकतर रूसी साम्राज्य पर नियंत्रण कर लिया। फ्रांसीसी, अमेरिकी, अंग्रेज एवं जापानी टुकड़ियों ने उनकी मदद की। ये सभी सेनाएँ भी रूस में बढ़ रहे समाजवाद से चिंतित थीं। इसलिए वहाँ इन टुकड़ियों एवं बोल्शेविकों के बीच गृह युद्ध हो गया। इसके परिणामस्वरूप लूटपाट, डकैती और भुखमरी आम हो गई।

9.

किसानों की हीन दशा 1917 ई. की रूसी क्रान्ति हेतु उत्तरदायी थी।” स्पष्ट कीजिए।

Answer»

⦁    किसानों पर करों को भारी बोझ होता था और वे सदा ऋण से दबे रहते थे। उन्हें दो वक्त भरपेट भोजन भी प्राप्त नहीं होता था। ऐसे में किसानों के पास सिवाय क्रान्ति के कोई चारा नहीं था। यही कारण था कि किसानों की हीन दशा 1917 ई. की क्रांति का मुख्य कारण बनी।
⦁    1861 ई. से पहले रूस में सामन्तवादी प्रथा थी। किसान भूमि-दासों के रूप में जमीनों को जोतते थे परन्तु उन्हें अपनी उपज का एक बड़ा भाग सामन्तों को देना पड़ता था।
⦁    यद्यपि 1861 ई. में सामंती प्रथा समाप्त कर दी गई थी परन्तु फिर भी किसानों की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। उनके खेत छोटे-छोटे होते थे जिन पर वे पुराने ढंग से खेती करते थे।

10.

समाजवाद की तीन विशेषताएँ बताइए।

Answer»

समाजवाद की तीन प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
⦁    इसमें मजदूरों का शोषण नहीं होता है। समाजवाद के अनुसार सभी को              काम पाने का अधिकार है।
⦁    समाजवाद में समाज वर्गविहीन होता है। इसमें अमीर-गरीब के बीच                  कम-से-कम अन्तर होता है। इसी कारण समाजवाद निजी सम्पत्ति का                 विरोधी है।
⦁    उत्पादन तथा वितरण के साधनों पर पूरे समाज का अधिकार होता है क्योंकि इसका उद्देश्य लाभार्जन नहीं, बल्कि समाज का कल्याण होता है।

11.

किस कारण उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में समाज परिवर्तन के इच्छुक बहुत सारे कामकाजी स्त्री-पुरुष उदारवादी और रैडिकल समूहों व पार्टियों के इर्द-गिर्द गोलबंद हो गये थे?

Answer»

उदारवादियों और रैडिकल समूहों की मान्यता थी कि यदि हरेक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता दी जाए, गरीबों को रोजगार मिले और जिनके पास पूँजी है उन्हें बिना रोकटोक काम करने का मौका दिया जाए तो समाज तरक्की कर सकता है। इसी कारण उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में समाज  परिवर्तन के इच्छुक बहुत सारे कामकाजी स्त्री-पुरुष उदारवादी और रैडिकल समूहों व पार्टियों के इर्द-गिर्द गोलबंद हो गए थे।

12.

नात्सी यूथ लीग का गठन कब हुआ था?

Answer»

नात्सी यूथ लीग का गठन सन् 1922 हुआ था

13.

युंगफोक क्या था?

Answer»

युंगफोक, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का नात्सी युवा संगठन था।

14.

जर्मनी पर …………………………… युद्धदण्ड लादा गया ।(A) 1.5 अरब(B) 6.5 अरब(C) 50 करोड़(D) 75 लाख

Answer»

सही विकल्प है (B) 6.5 अरब

15.

‘नवम्बर के अपराधी’ शब्द किसके लिए प्रयोग किया जाता था?

Answer»

वाइमर सरकार को।

16.

महामंदी ने नाजीवाद को जन-आन्दोलन बनाने में क्या भूमिका निभायी? 

Answer»

नाजीवाद 1930 ई. के दशक में अधिक लोकप्रिय नहीं बन पाया किन्तु मंदी के दौरान नाजीवाद एक जनआंदोलन बन गया। 1929 ई. के बाद बैंक दिवालिया हो चुके थे, काम-धन्धे बन्द होते जा रहे थे, मजदूर बेरोजगार हो रहे थे और मध्यवर्ग को लाचारी और भुखमरी का डर सता रहा था। ऐसे में लोगों को नाजी प्रोपेगैन्डा में एक बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देती थी। 1929 में नाजियों को जर्मन संसद ‘राइख्सटाग’ में केवल 2.6 प्रतिशत वोढ़ मिले। 1932 ई. तक यह सबसे बड़ा दल बन गई और इसे 27 प्रतिशत  वोट मिले।
इस दौरान नाजियों ने अनेक बड़ी रैलियों का आयोजन किया। हिटलर का जनसमर्थन दिखाने और लोगों में एकता की भावना का संचार करने के लिए जनसभाओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिटलर ने बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने तथा युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का वायदा किया।

17.

जनसामान्य की नाजीवाद के प्रति क्या धारणा थी?

Answer»

⦁    बहुत से लोग नाजीवाद की निरंकुश पुलिस, दमन एवं हत्याओं के विरुद्ध खड़े हो गए।
⦁    अधिकतर जर्मनीवासी निष्क्रिय मूकदर्शक एवं उदासीन बने रहे। वे इतने भयभीत थे कि न तो वे कुछ कर पाए, न मतभेद जता पाए और न ही विरोध कर पाए।
⦁    कई लोगों ने नाजियों की दृष्टि से देखा और नाजियों की भाषा में उनके मस्तिष्क की बातें बताईं। उन्होंने यहूदियों के प्रति गुस्सा और घृणा विकसित कर ली थी। यहूदियों के घर चिह्नित किए गए और संदिग्ध पड़ोसी के रूप में उनकी शिकायत की गई। उनका विश्वास था कि नाजीवाद खुशहाली लाएगा और उनके जीवन को सुखी बना देगा।

18.

हिटलर यूथ संगठन में छात्रों को क्या सिखाया जाता था?

Answer»

⦁    युद्ध की उपासना,
⦁    आक्रामकता की भावना,
⦁    हिंसा,
⦁    लोकतंत्र तथा साम्यवाद की निंदा,
⦁    यहूदियों तथा अन्य अवांछितों से घृणा।

19.

नात्सी लोग यहूदियों से क्यों घृणा करते थे?

Answer»

जर्मन लोगों द्वारा यहूदियों से घृणा करने की निम्न वजह थी-
⦁    नात्सी विचारधारा के अनुसार नस्ली श्रेष्ठता के आधार पर यहूदी विश्व की सबसे निम्न स्तरीय नस्ल है तथा जर्मनी की सभी समस्याओं का मूल कारण यहूदी ही हैं।
⦁    यहूदी लोग जर्मन समाज से बिलकुल अलग बस्तियों में रहते थे जिन्हें घेटो’ कहा जाता था।
⦁    जर्मनों के अनुसार यहूदी आदतन हत्यारे और सूदखोर थे।
⦁    यहूदी लोग मुख्य रूप से व्यापार और धन उधार देने का धन्धा करते थे।
⦁    जर्मन ईसाई धर्म के अनुयायी थे और ईसाइयों का आरोप था कि ईसा मसीह को यहदियों ने ही मारा था। इसीलिए मध्यकाल तक जर्मनी में यहूदियों को जमीन का मालिक बनने की मनाही थी।

20.

नात्सीवादी शासन में वांछित बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को किस प्रकार पुरस्कृत किया गया?

Answer»

इस समयावधि में प्रजातीय आधार पर वांछित दिखने वाले बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को पुरस्कार दिया भण्डार जाता था। ऐसी माताओं को चिकित्सालयों में विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं, दुकानों में सामान खरीदने पर उन्हें अधिक छूट दी जाती थी। इसके साथ ही थियेटर व रेलगाड़ी के टिकट सस्ती दर पर दिए जाते थे। हिटलर ने ढेर सारे बच्चों को जन्म देने वाली माताओं को उसी प्रकार पदकों से  सम्मानित करने की व्यवस्था की थी जिस प्रकार सेना में शौर्य प्रदर्शित करने वाले सैनिकों को सम्मानित किया जाता था। चार बच्चे पैदा करने वाली माँ को कांस्य पदक, छः बच्चे पैदा करने वाली माँ को रजत पदक तथा आठ या उससे अधिक बच्चे पैदा करने वाली माँ को सोने के पदक दिए जाते थे।

21.

वर्साय की संधि की प्रमुख चार शर्तों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

मित्र देशों (इंग्लैण्ड, फ्रांस और रूस) ने जर्मनी को प्रथम विश्व युद्ध में पराजित करने के बाद उसे वर्साय सन्धि नामक एक शान्ति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए विवश किया। इस सन्धि की शर्ते जर्मनी के लिए अत्यन्त अपमानजनक और कठोर थीं।
सन्धि के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे-
⦁    युद्ध अपराधबोध अनुच्छेद के तहत युद्ध के कारण मित्र देशों को हुई हानि और सारी तबाही के लिए जर्मनी को जिम्मेदार ठहराया गया। इसके एवज में उस पर छः अरब पौंड का जुर्माना लगाया गया।
⦁    खनिज संसाधनों वाले राईनलैण्ड पर भी बीस के दशक में ज्यादातर मित्र राष्ट्रों का ही कब्जा रहा।
⦁    जर्मनी को अपने समुद्र पार के उपनिवेश, 13 प्रतिशत भू-भाग, 75 प्रतिशत लौह-भण्डार, 26 प्रतिशत कोयला भण्डार फ्रांस, पोलैण्ड, डेनमार्क और  लिथुआनिया के हवाले करने पड़े।
⦁    जर्मनी की रही-सही ताकत खत्म करने के लिए मित्र राष्ट्रों ने उसकी सेना भी भंग कर दी।

22.

जर्मन अर्थव्यवस्था पर आर्थिक मंदी का प्रभाव बताइए।

Answer»

आर्थिक मंदी का जर्मन अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इस प्रभाव को निम्न रूप में प्रकट किया जा सकता है-
⦁    औद्योगिक उत्पादन 1929 ई. के मुकाबले 1932 ई. में 40 प्रतिशत तक घट गया।
⦁    जैसे-जैसे मुद्रा का अवमूल्यन होता जा रहा था, मध्यवर्ग, खासतौर से वेतनभोगी कर्मचारी और पेंशनधारियों की बचत भी सिकुड़ती जा रही थी।
⦁    कारोबार ठप्प हो जाने से छोटे-मोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग और खुदरा व्यापारियों की हालत भी खराब होती जा रही थी।
⦁    बड़ा व्यापार भी संकट में था।
⦁    किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट की वजह से परेशान था। महिलाएँ अपने बच्चों का पेट भर पाने में असफल हो रहीं थीं।
⦁    मजदूर या तो बेरोजगार हो गए या उन्हें घटी हुई मजदूरी मिली।
⦁    बेरोजगारी एक गम्भीर समस्या बन गई। बेरोजगार नौजवान या तो ताश खेलते पाए जाते थे या नुक्कड़ों पर झुंड लगाए रहते थे या फिर रोजगार दफ्तरों के बाहर लम्बी-लम्बी कतार में खड़े पाए जाते थे।

23.

नात्सीवाद की विजय के प्रमुख परिणामों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

नात्सीवाद की विजय के प्रमुख परिणाम-
⦁    जर्मनी में सैन्यकरण का कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किया गया तथा युद्ध की तैयारियाँ बड़े जोर-शोर से शुरू की गयीं।
⦁    जर्मनी में अन्य सभी साहित्य को जला दिया गया जिसमें उदारवाद, समाजवाद व लोकतंत्र के विचारों की प्रशंसा की गई थी।
⦁    हिटलर व नात्सी पार्टी का उत्थान द्वितीय विश्वयुद्ध का प्रमुख कारण बना।
⦁    जर्मनी में हिटलर के नेतृत्व में नात्सी पार्टी की तानाशाही स्थापित हो गई। इससे वहाँ आतंकवाद छा गया तथा नात्सी विरोधी नेताओं की बड़े पैमाने पर हत्या कर दी गई।
⦁    जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। समाजवादियों व साम्यवादियों का भी विरोध किया गया।

24.

विशेषाधिकार अधिनियम के प्रावधान बताइए।

Answer»

3 मार्च, 1933 को पारित विशेषाधिकार अधिनियम के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे-
⦁    नाजियों व उनके सहयोगियों को छोड़ कर अन्य सभी राजनैतिक दलों व ट्रेड यूनियनों पर प्रतिबंध लगा दिया।
⦁    अर्थव्यवस्था, मीडिया, सेना और न्यायपालिका पर राज्य ने पूर्ण रूप से नियंत्रण कर लिया।
⦁    इसने जर्मनी में तानाशाही स्थापित कर दी।
⦁    इसने संसद को दरकिनार करते हुए हिटलर को डिक्री से शासन करने की सारी शक्तियाँ दे दी।

25.

जर्मनी में नासीवाद का प्रसार किस प्रकार किया गया?

Answer»

जर्मनी में नात्सीवाद का प्रसार इस प्रकार किया गया-
(क) हिटलर ने 1921 ई. में नासी दल का गठन किया था। उसने जर्मन राजधानी बर्लिन की ओर एक अभियान जारी कर सत्ता हासिल करने की योजना बनायी थी, किन्तु वह पकड़ा गया तथा उसे जेल में डाल दिया गया। लेकिन सजा की अवधि पूरी होने से पहले ही उसे छोड़ दिया गया।
(ख) जेल में ही उसने एक पुस्तक ‘मेरा संघर्ष’ लिखी। इस पुस्तक में उसने नात्सी आन्दोलन के दर्शन और डरावने विचार व्यक्त किए। इस पुस्तक में उसने बल प्रयोग, बर्बरतापूर्ण व्यवहार, महान् नेता द्वारा शासन की महिमा का गुणगान करने के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीयता, लोकतंत्र वे शान्ति का मजाक उड़ाया। उसने जर्मन यहूदियों के प्रति बहूत ज्यादा घृणा का प्रचार किया और उन्हें न सिर्फ प्रथम विश्वयुद्ध में  जर्मनी की हार के लिए बल्कि उसकी अनेक आर्थिक समस्याओं के लिए पूरा उत्तरदायी ठहराया। उसने उग्र राष्ट्रवाद का प्रचार किया।
(ग) हिटलर के सत्तारूढ़ होने से पूर्व जर्मनी में चुनाव हुए जिसमें नात्सी दल को समाजवादियों व कम्युनिस्टों को कुल मिलाकर जितने मत मिले थे, उससे भी कम मत मिले थे। वह और उसका दल 650 स्थानों में से केवल 196 स्थान ही ले सका। हिटलर राजनीतिक षड्यंत्रों के जरिए सत्ता में आया। चुनावों में विफलता के बावजूद जर्मनी के राष्ट्रपति हिंडेनबर्ग ने 30 जनवरी, 1933 ई. को उसे जर्मनी वा चांसलर नियुक्त किया। हिटलर के सत्ता में आने के कुछ
ही सप्ताहों के भीतर जर्मनी में जनतंत्र का ढाँचा छिन्न-भिन्न हो गया।
(घ) सत्ता में आते ही हिटलर ने चुनाव कराने के आदेश दिए तथा आतंक का राज्य स्थापित किया। नात्सी-विरोधी नेताओं की हत्या बड़े पैमाने पर कराई गई। नात्सी लोगों ने 27 फरवरी, 1933 ई. को संसद भवन में आग लगा दी। अग्निकाण्ड के लिए जर्मनी की कम्युनिस्ट पार्टी पर दोषारोपण कर उसे कुचल दिया गया। नात्सी लोगों द्वारा आतंक फैलाने के बावजूद नात्सी दल को संसद में बहुसंख्यक स्थान नहीं मिल पाए। फिर भी, हिटलर ने तानाशाही अधिकार ग्रहण कर लिए तथा वह राष्ट्रपति भी बन गया।
श्रमिक संघों को प्रतिबन्धित कर दिया गया। हजारों समाजवादियों, कम्युनिस्टों और नात्सी-विरोधी राजनीतिक नेताओं को मंत्रणा शिविरों में भेज दिया गया। नासी लोगों ने पुस्तकों को जलाना शुरू कर दिया। उन्होंने जर्मनी एवं अन्य देशों के प्रतिष्ठित लेखकों की रचनाओं को आग के हवाले कर दिया। समाजवादियों, कम्युनिस्टों, यहूदियों को अपमानित एवं प्रताड़ित किया गया। देश में सैन्यीकरण का एक विशाल  कार्यक्रम आरम्भ किया गया। नात्सीवाद की विजय न केवल जर्मन लोगों के लिए, बल्कि सम्पूर्ण यूरोप एवं विश्व के लिए विपत्ति सिद्ध हुई। द्वितीय विश्व युद्ध को आरम्भ करने में इसकी प्रमुख भूमिका थी।

26.

नाजियों के अधीन शिक्षण संस्थाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Answer»

एडोल्फ हिटलर ने इस बात का अनुभव किया कि बच्चों को नाजी विचारधारा सिखाकर ही नाजी समाज का निर्माण संभव है। अतः बच्चों को नाजी विचारधारा में प्रशिक्षित करने के लिए विद्यालयों को माध्यम बनाया। इसके लिए नाजियों ने निम्न प्रयास किए-
⦁    नाजियों ने सभी स्कूलों में सफाई और शुद्धीकरण किया जिसका आशय था कि वे अध्यापक जो यहूदी थे अथवा जो राजनैतिक रूप से विश्वसनीय नहीं थे, बर्खास्त कर दिए गए।
⦁    विद्यालयों में जर्मनों और यहूदियों को एक साथ बैठने-खेलने की मनाही थी।
⦁    नाजियों द्वारा यूथ लीग की स्थापना 1922 ई. में की गयी जिसका नाम बदलकर बाद में हिटलर ने ‘यूथ’ रख दिया।
⦁    ‘अवांछित बच्चे’, यहूदी, शारीरिक विकलांग, जिप्सी आदि को स्कूलों से बाहर निकाल दिया गया और अंततः 1940 ई. में इन्हें गैस चैम्बरों में ले जाया गया।
⦁    स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें पुनः लिखी गईं। नस्ल के बारे में नाजी विचारधारा को सही ठहराने के लिए नस्ल विज्ञान विषयं लागू किया गया।
⦁    यहाँ तक कि गणित की कक्षाओं के जरिए भी यहूदियों की खास छवि गढ़ने का प्रयास किया जाता।
⦁    बच्चों को वफादार, आज्ञाकारी बनना, यहूदियों से घृणा करना और हिटलर की पूजा करना सिखाया जाता था।
⦁    खेल सिखाने का उद्देश्य बच्चों में हिंसा एवं आक्रामकता पैदा करना था। हिटलर का विश्वास था कि मुक्केबाजी लड़कों को पत्थरदिल, मजबूत एवं मर्दाना बना देगी।
⦁    युवा संगठनों को जर्मन युवकों को राष्ट्रीय समाजवाद की भावना से लैस करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
⦁    10 वर्ष की आयु के बच्चों को गुंगफ्रोक (14 वर्ष से कम आयु के नाजी बच्चों का संगठन) में दाखिल कराया ..’ जाता। 14 वर्ष की आयु में सभी लड़कों को नाजी युवा संगठन हिटलर यूथ का सदस्य बनना पड़ता जहाँ वे युद्ध की पूजा, हिंसा व आक्रामकता को गौरवान्वित करने, लोकतन्त्र की निन्दा करने, यहूदियों, कम्युनिस्टों, जिप्सी और अन्य इसी प्रकार के अवांछित वर्ग के लोगों से घृणा करना सीखते थे।
⦁    18 वर्ष की आयु में वे लेबर सर्विस में शामिल हो जाते जिसके बाद उन्हें सेना में काम करना पड़ता था और किसी ‘एक नाजी संगठन की सदस्यता लेनी पड़ती थी।

27.

वर्साय संधि के प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

वर्साय संधि के प्रमुख प्रावधानों का विवरण इस प्रकार है-
⦁    जर्मनी भविष्य में आक्रमणकारी नीति का अनुकरण कर पुनः युद्ध न छेड़ दे, इसको रोकने के लिए जर्मनी की सैनिक शक्ति को घटा दिया गया। जर्मनी में लामबंदी और अनिवार्य सैनिक शिक्षा की मनाही कर दी। उसकी सेना की संख्या एक लाख निश्चित की गई। शस्त्र बनाने, उन्हें बाहर भेजने या बाहर से मँगवाने पर भी पाबंदी लगा दी गई। जर्मनी के सैनिक विभाग की शक्ति सीमित कर दी गई। राइनलैण्ड और कील के क्षेत्रों को सेना-रहित क्षेत्र करार दिया गया।
⦁    जर्मनी की जल-शक्ति में भी भारी कमी कर दी गई। उसे पनडुब्बियाँ रखने की मनाही कर दी गई। उसे केवल 6 लड़ाई के जहाज, 6 हल्के और 12 टारपीडो किश्तियाँ रखने का अधिकार दिया गया।
⦁     युद्ध की सारी जिम्मेदारी जर्मनी पर डाली गई। उसे युद्ध क्षतिपूर्ति के रूप में 6 अरब 10 करोड़ पौंड की बड़ी धनराशि मित्र राष्ट्रों को देने के लिए विवश किया गया।
⦁    जर्मनी ने 10 लाख टन कोयला प्रतिवर्ष फ्रांस को और 80 लाख टन कोयला प्रतिवर्ष बेल्जियम और इटली को देना स्वीकार किया।
⦁    युद्ध के लिए जर्मनी के सम्राट कैसर विलियम को जिम्मेदार ठहराया गया। उस पर मुकद्दमा चलाने का निर्णय किया गया परन्तु वह जर्मनी से भाग कर हालैण्ड चला गया। अन्तः इस दिशा में कोई कदम न उठाया जा सका। इस प्रकार जर्मनी के लिए यह संधि बड़ी अपमानजनक और घातक सिद्ध हुई और इसने जर्मनी को आर्थिक व सैनिक दृष्टि से असहाय बना दिया।
⦁    आल्सेस और लोरेन के प्रांत फ्रांस को, यूपेन, मोर्सनेट और माल्मेडी के तीन जिले बेल्जियम को, मेमल का तटवर्ती बंदरगाह लिथूनिया को और संपूर्ण  पश्चिमी प्रशिया के प्रदेश पोलैण्ड को दिए गए।
⦁    सार की घाटी की कोयले की खानों का अधिकार फ्रांस को दिया गया। सार का शासन-प्रबन्ध 15 वर्ष के लिए लीग ऑफ नेशंस की अधीनता में एक अन्तर्राष्ट्रीय कमीशन को सौंपा गया। 1935 में वहाँ जनमत हुआ और उसके आधार पर सार की घाटी को जर्मनी के साथ मिला दिया गया।
⦁    राइनलैण्ड को सेना-रहित कर दिया गया। इस प्रदेश में किलेबंदी तोड़ दी गई और भविष्य में जर्मनी को इसकी किलेबंदी करने की मनाही कर दी गई।
⦁    डैजिग को लीग ऑफ नेशंस के अधीन एक स्वतन्त्र नगर रखा गया। पोलैण्ड के विशेषाधिकारों को इसमें मान्यता दी गई।
⦁    हेलिगोलैंड और ड्यून की बंदरगाहों तथा उनकी किलेबंदी को समाप्त कर दिया गया।।
⦁    बेल्जियम, पोलैण्ड और चैकोस्लोवाकिया को स्वतंत्र राज्यों की मान्यता जर्मनी को देनी पड़ीं। पोलैंड को समुद्र तक पहुँचने के लिए जर्मनी के प्रदेशों में से एक संत रास्ता दिया गया।
⦁    जर्मनी से उसका औपनिवेशिक साम्राज्य छीन लिया गया और लीग ऑफ नेशन्स के अधीन इसका शासन विभिन्न मित्र-राष्ट्रों को सौंपा गया। पश्चिमी अफ्रीका में जर्मन-उपनिवेश इंग्लैण्ड को दिए गए। कैमरून और टोगोलैण्ड को फ्रांस और इंग्लैण्ड में बाँटा गया। सैमोया द्वीप न्यूजीलैण्ड को तथा शांतुग और क्याओ-चाओ जापान को प्राप्त हुए।

28.

नासीवाद की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Answer»

नात्सीवाद का उदय जर्मनी में हुआ था। नात्सी लोगों ने एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में आधुनिक काल की सर्वाधिक बर्बर तानाशाही की जर्मनी में स्थापना की।
नात्सीवाद की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
⦁    यहूदी नस्ल सबसे घटिया नस्ल है तथा संसार की अन्य सभी नस्लें यहूदी और जर्मन के बीच की नस्लें हैं।
⦁    हिटलर का मानना था कि लोगों को बसाने के लिए ज्यादा से ज्यादा इलाकों पर कब्जा करना जरूरी है। इससे मातृदेश का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा और नए इलाकों में जाकर बसने वालों को अपने जन्म स्थान से सम्बन्ध बनाए रखने में कोई समस्या नहीं आएगी।
⦁    वह पूर्व में जर्मनी की सीमाओं को फैलाना चाहता था ताकि सारे जर्मनों को भौगोलिक दृष्टि से एक ही जगह इकट्ठा किया जा सके।
⦁    नात्सीवाद के अनुसार राज्य सबसे ऊपर है। लोग राज्य के लिए हैं न कि राज्य लोगों के लिए।
⦁    नात्सीवाद लोकतंत्र तथा साम्यवाद को जड़ से मिटा देना चाहता था।
⦁    नात्सीवाद युद्ध तथा शक्ति के प्रयोग को राज्य के विस्तार के लिए आवश्यक मानता था।
⦁    नात्सीवाद के अनुसार ब्लाँड, नीली आँखों वाले नॉर्डिक जर्मन आर्य सर्वश्रेष्ठ नस्ल है। उसे अपनी शुद्धता बनाए रखनी चाहिए तथा उसे ही पूरी दुनिया पर वर्चस्व स्थापित करने का हक है।

29.

विश्व व्यापार संगठन का सदस्य बनने से भारत को होनेवाले लाभों की जानकारी दीजिए ।

Answer»
  • विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा 0.5% था । अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि होने से हमारे निर्यातों में वृद्धि हुई और जिसके कारण विश्व व्यापार में हमारा हिस्सा बढ़कर 1% हो गया ।
  • WTO का सदस्य बनने से हमारी तैयार वस्तुओं का निर्यात बढेगा ।
  • WTO का सदस्य बनने से भारत अपनी कृषि उपजों के निर्यात में वृद्धि करेगा ।
  • निर्यात में वृद्धि होने से आयात पर दबाव घटेगा और विदेशी मुद्रा में वृद्धि होगी ।
30.

युरोप के देशों के उपनिवेश स्थापित करने की शुरूआत क्यों हुई ?

Answer»

पश्चिमी युरोप के राष्ट्रों की साम्राज्यवादी भूख और प्रदेश लालसा के कारण उन्होंने एशिया और अफ्रीका के देशों उपनिवेश और सत्ता का विस्तार किया ।

31.

अफ्रीका में सर्वप्रथम किस देश ने साम्राज्य (उपनिवेश) स्थापित किया ?(A) स्पेन(B) जर्मनी(C) इंग्लैण्ड(D) पूर्तगाल

Answer»

सही विकल्प है (A) स्पेन

32.

छः दशको तक गैर यूरोपियन देशों में उपनिवेश स्थापित करने का एकाधिकार किस देश का था ?(A) इंग्लैण्ड(B) फ्रांस(C) स्पेन(D) जर्मनी

Answer»

सही विकल्प है (C) स्पेन

33.

अस्थायी रूसी सरकार किसके नेतृत्व में बनी थी?

Answer»

अस्थायी रूसी सरकार प्रिंस केरेंस्की के नेतृत्व में बनी थी।

34.

पश्चिम युरोप और एशिया-अफ्रीका में उपनिवेश स्थापित करने की प्रक्रिया का वर्णन करों ।

Answer»

पश्चिमी युरोप में साम्राज्यवाद (उपनिवेशवाद):

  • साम्राज्यवादी लालसा ने उनके पड़ोसी राष्ट्रों पर अधिकार जमाया था । जैसे स्पेन ने नेदरलैण्ड, बेल्जियम और लक्जमबर्ग पर अधिकार जमाया ।
  • पूर्तगाल पर भी स्पेन ने अधिकार जमाया था ।
  • इसी तरह फ्रांस और ऑस्ट्रिया की प्रदेश भूख के शिकार इटली तथा जर्मनी बने ।

एशिया में उपनिवेशवाद:

  • इंग्लैण्ड ने भारत, श्रीलंका, म्यानमार, सिंगापुर, मलाया आदि में साम्राज्य स्थापित किया ।
  • इंग्लैण्ड ने अफीम युद्ध से चीन के पाँच बन्दरगाह प्राप्त कर लिये थे ।
  • चीन की कमजोरी का फायदा लेकर जापान, रूस, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और अमेरिका ने व्यापारिक, राजनैतिक अधिकार प्राप्त किये ।
  • पश्चिमी एशिया में इंग्लैण्ड, जर्मनी, रूस और अमेरिका ने ईरान, इराक, कुवैत, सउदी अरब और बहेरीन में तेल कंपनियाँ स्थापित करके अपने हितों की सुरक्षा करने का प्रयास किया ।

अफ्रीका में उपनिवेशवाद:

  • पंद्रहवी सदी में सर्वप्रथम अफ्रिका के दक्षिण में डचो, फिर इंग्लैण्ड ने केप और फ्रांस ने उत्तरी अफ्रिका के अल्जीरिया में व्यापारिक केन्द्र स्थापित किया ।
  • इंग्लैण्ड ने इजिप्त, पूर्व अफ्रीका के कई प्रदेश तथा दक्षिण अफ्रिका के देशों में राज्य स्थापित किया ।
  • फ्रांस ने ट्युनिशिया, मोरक्को और पश्चिम अफ्रीका में अपना राज्य स्थापित किया ।
  • इटली ने लालसागर के आसपास के क्षेत्रों पर कब्जा किया ।
  • स्पेन, पूर्तगाल ने भी अफ्रीका के कुछ प्रदेशों पर कब्जा किया ।
  • प्रादेशिक स्पर्धा के बीच बर्लिन में यूरोपियन राज्यों की एक परिषद 1984-85 में हुई । जिसमें अफ्रीका के अलग-अलग क्षेत्रों को बाँट लिया गया ।
  • इसके अनुसार समस्त अफ्रीका में युरोप के विविध देशों का साम्राज्य स्थापित किया ।
35.

किस देश ने रूस को सन् 1904-05 में युद्ध में हराया ?(A) जापान(B) जर्मनी(C) फ्रांस(D) इटली

Answer»

सही विकल्प है (A) जापान

36.

22 जनवरी, 1905 के दिन सेन्ट पिट्सबर्ग का जुलूस किसके नेतृत्व में निकाला गया ?(A) जार(B) फादर गोपेन(C) हिटलर(D) मुसोलिनी

Answer»

(B) फादर गोपेन

37.

Discuss the reason for price rise.

Answer»

The reasons for the price rise are as follows:

(i) Increase in the supply of money in the economy takes place when

  1. the government resorts to deficit financing and prints new currency.
  2. Increase in cash transactions in the market.
  3. Additional money made available by reducing the rate of interest on the loans.

The increase in the public expenditure, Expenditure on defence unplanned expenditure, expenditure on welfare scheme lead “to increase in supply of money in the market.’ The increase in supply of money increases the purchasing power of the people. However, the supply of the goods and services do not increase to the extent of demand. This imbalance between the demand and supply results in the price rise.

(ii) Population growth: Population of India has increased from 102.70 crore in 2001 to 121.02 crore in 2011. Additional population means additional demand for goods and services. The imbalance between demand and supply results in the price rise.

(iii) Increase in export: The encouragement given by the government has considerably increased export of the Indian goods. Thereby the availability of the goods in the domestic market has decreased. This results in the shortage/scarcity of goods and increase in price.

(iv) Shortage of raw material: The shortage of raw material leads to increase in the prices of their products. This contributes to price rise in the market.

38.

स्थायी विकास की संकल्पना समझाइए ।

Answer»

स्थायी विकास अर्थात् ‘भावि पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरी करने की क्षमता को नुकसान पहुँचाएँ बिना वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएँ संतुष्ट करना ।इस प्रकार स्थायी विकास में पर्यावरणीय संसाधनों के स्थायित्व पर बल दिया गया है ।

39.

सन् 1918 में कौन-से राष्ट्र मित्र राष्ट्रों की शरण में आये ?

Answer»

सितम्बर, 1918 में बल्गेरिया, अक्टूबर, 1918 में तुर्की और ऑस्ट्रिया मित्र राष्ट्रों की शरण में आ गये ।

40.

रूस की निरंकुश तानाशाही जार कितना कठोर था ?

Answer»

वह व्यक्ति को अधिकार की माँग करने पर अत्याचार, जुल्म और दमन तथा साइबेरिया की हड्डी जमा देनेवाली ठंड में भेजने की सजा दी जाती थी।

41.

‘ब्लेक हेन्ड’ नामक संस्था ने किसकी हत्या की थी ?

Answer»

ब्लेक हेन्ड नामक संस्था ने ऑस्ट्रिया के राजकुमार और उसकी पत्नी की हत्या की थी ।

42.

कौन-सी घटनाएँ राष्ट्रवाद का परिणाम थी ?

Answer»

बेल्जियम और ग्रीस की स्वतंत्रता, इटली तथा जर्मनी का एकीकरण राष्ट्रवाद का परिणाम है ।

43.

प्रथम विश्वयुद्ध के पूर्वगुटों के बीच किस तरह की भावना विकसित हुई ?

Answer»

इन गुटों के बीच ईर्ष्या, शंका, कुशंका, भय तथा तिरस्कार की भावना पैदा हुई ।

44.

आजादी के बाद विकास हेतु भारत में किन नीतियों को घोषित किया गया ?

Answer»

आजादी के बाद समय-समय पर वित्तीय नीति, राजकोषीय नीति और औद्योगिक नीतियों की घोषणा की गयी ।

45.

पश्चिप एशिया के उपनिवेश की जानकारी दीजिए ।

Answer»

पश्चिम एशिया के मरूस्थलीय क्षेत्रों में विपुल मात्रा में निकलनेवाले खनिज तेल ने युरोपीयों को उपनिवेश स्थापित करने के लिए आकर्षित किया ।

  • इंग्लैण्ड, जर्मनी, रूस और अमेरिका ने ईरान, ईराक, कुवैत, सउदी अरब और बेहरीन में तेल कंपनियाँ स्थापित करके अपने हितों की सुरक्षा करने का प्रयास किया ।
46.

22 जनवरी, 1905 को रूस का ‘खूनी रविवार’ के रूप में जाना जाता है ।

Answer»

22 जनवरी, 1905 रविवार के दिन फादर गोपेन नामक पादरी के नेतृत्व में एक विशाल जुलूस के रूप में लोग जार के निवासस्थान विन्टर पैलेस गये । वे लोग निःशस्त्र थे ।

  • कुछ लोगों के हाथ में जार की तस्वीर थी और उसमें ‘रूस के छोटे प्रभु चिरंजीवी हो’ जैसे सूत्र लिखे हुए थे ।
  • उन निर्दोष लोगों पर जार के सैनिकों द्वारा अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गयी ।
  • इसमें हजारों निर्दोष लोग मारे गये और जहाँ जार का महल था उस सेन्ट पिट्सबर्ग का फर्श खून से लाल हो गया ।
  • इसलिए इस दिन को इतिहास में खूनी रविवार के रूप में जाना जाता है ।
47.

जारशाही के पतन के बाद …………………………….. के नेतृत्व में मेन्शेविक पक्ष की सरकार बनी ?(A) फादर गोपेन(B) कार्ल मार्क्स(C) केरेन्स्की(D) लेनिन

Answer»

(C) केरेन्स्की

48.

निम्नलिखित में से कौन-सा विषय नई आर्थिक नीति का नहीं है ?(A) उदारीकरण(B) निजीकरण(C) वैश्विकरण(D) राष्ट्रीयकरण

Answer»

(D) राष्ट्रीयकरण

49.

भारत सरकार ने नयी आर्थिक नीति कब घोषित की थी ?(A) 1951(B) 1971(C) 1991(D) 2001

Answer»

सही विकल्प है (C) 1991

50.

राष्ट्रसंघ की रचना कब हुई ?

Answer»

अमेरिकन राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन के 14 मुद्दों को आगे रखकर ‘पेरिस शांति प्रक्रिया में 10 जनवरी, 1920 को राष्ट्रसंघ की रचना हुई ।