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Answer» आर्थिक मंदी का जर्मन अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा। इस प्रभाव को निम्न रूप में प्रकट किया जा सकता है- ⦁ औद्योगिक उत्पादन 1929 ई. के मुकाबले 1932 ई. में 40 प्रतिशत तक घट गया। ⦁ जैसे-जैसे मुद्रा का अवमूल्यन होता जा रहा था, मध्यवर्ग, खासतौर से वेतनभोगी कर्मचारी और पेंशनधारियों की बचत भी सिकुड़ती जा रही थी। ⦁ कारोबार ठप्प हो जाने से छोटे-मोटे व्यवसायी, स्वरोजगार में लगे लोग और खुदरा व्यापारियों की हालत भी खराब होती जा रही थी। ⦁ बड़ा व्यापार भी संकट में था। ⦁ किसानों का एक बहुत बड़ा वर्ग कृषि उत्पादों की कीमतों में बेहिसाब गिरावट की वजह से परेशान था। महिलाएँ अपने बच्चों का पेट भर पाने में असफल हो रहीं थीं। ⦁ मजदूर या तो बेरोजगार हो गए या उन्हें घटी हुई मजदूरी मिली। ⦁ बेरोजगारी एक गम्भीर समस्या बन गई। बेरोजगार नौजवान या तो ताश खेलते पाए जाते थे या नुक्कड़ों पर झुंड लगाए रहते थे या फिर रोजगार दफ्तरों के बाहर लम्बी-लम्बी कतार में खड़े पाए जाते थे।
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