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नाजियों के अधीन शिक्षण संस्थाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

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एडोल्फ हिटलर ने इस बात का अनुभव किया कि बच्चों को नाजी विचारधारा सिखाकर ही नाजी समाज का निर्माण संभव है। अतः बच्चों को नाजी विचारधारा में प्रशिक्षित करने के लिए विद्यालयों को माध्यम बनाया। इसके लिए नाजियों ने निम्न प्रयास किए-
⦁    नाजियों ने सभी स्कूलों में सफाई और शुद्धीकरण किया जिसका आशय था कि वे अध्यापक जो यहूदी थे अथवा जो राजनैतिक रूप से विश्वसनीय नहीं थे, बर्खास्त कर दिए गए।
⦁    विद्यालयों में जर्मनों और यहूदियों को एक साथ बैठने-खेलने की मनाही थी।
⦁    नाजियों द्वारा यूथ लीग की स्थापना 1922 ई. में की गयी जिसका नाम बदलकर बाद में हिटलर ने ‘यूथ’ रख दिया।
⦁    ‘अवांछित बच्चे’, यहूदी, शारीरिक विकलांग, जिप्सी आदि को स्कूलों से बाहर निकाल दिया गया और अंततः 1940 ई. में इन्हें गैस चैम्बरों में ले जाया गया।
⦁    स्कूलों की पाठ्य पुस्तकें पुनः लिखी गईं। नस्ल के बारे में नाजी विचारधारा को सही ठहराने के लिए नस्ल विज्ञान विषयं लागू किया गया।
⦁    यहाँ तक कि गणित की कक्षाओं के जरिए भी यहूदियों की खास छवि गढ़ने का प्रयास किया जाता।
⦁    बच्चों को वफादार, आज्ञाकारी बनना, यहूदियों से घृणा करना और हिटलर की पूजा करना सिखाया जाता था।
⦁    खेल सिखाने का उद्देश्य बच्चों में हिंसा एवं आक्रामकता पैदा करना था। हिटलर का विश्वास था कि मुक्केबाजी लड़कों को पत्थरदिल, मजबूत एवं मर्दाना बना देगी।
⦁    युवा संगठनों को जर्मन युवकों को राष्ट्रीय समाजवाद की भावना से लैस करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
⦁    10 वर्ष की आयु के बच्चों को गुंगफ्रोक (14 वर्ष से कम आयु के नाजी बच्चों का संगठन) में दाखिल कराया ..’ जाता। 14 वर्ष की आयु में सभी लड़कों को नाजी युवा संगठन हिटलर यूथ का सदस्य बनना पड़ता जहाँ वे युद्ध की पूजा, हिंसा व आक्रामकता को गौरवान्वित करने, लोकतन्त्र की निन्दा करने, यहूदियों, कम्युनिस्टों, जिप्सी और अन्य इसी प्रकार के अवांछित वर्ग के लोगों से घृणा करना सीखते थे।
⦁    18 वर्ष की आयु में वे लेबर सर्विस में शामिल हो जाते जिसके बाद उन्हें सेना में काम करना पड़ता था और किसी ‘एक नाजी संगठन की सदस्यता लेनी पड़ती थी।



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