This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख चार कारक बताइए। |
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Answer» सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख चार कारक निम्नवत् हैं – ⦁ कच्चे माल की सुलभता – सूती वस्त्र के लिए कंपास कच्चा माल है। यह एक हल्का पदार्थ है, जिसका परिवहन सरलता से सम्भव है। ⦁ आर्द्र जलवायु – सूती धागा व कपड़ा बनाने के लिए आर्द्र समुद्री जलवायु उपयुक्त रहती है। शुष्क जैलवायु में धागा टूटता है। ⦁ पर्याप्त जल की प्राप्ति – सूत की धुलाई, रँगाई, कपड़े की छपाई आदि में स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है। प्रायः नदियों व झीलों के किनारे सूती वस्त्र उद्योग स्थापित होते हैं। ⦁ शक्ति के साधन – कारखानों को चलाने के लिए कोयला अथवा. सस्ती जल-विद्युत आवश्यक है। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा स्थान सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है? (क) बीजिंग।(ख) मानचेस्टर(ग) पिट्सबर्ग(घ) किम्बलें |
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Answer» (ख) मानचेस्टर |
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विश्व के लौह-अयस्क उत्पादन के क्षेत्रों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ सुपीरियर झील क्षेत्र (संयुक्त राज्य अमेरिका) तथा |
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कागज के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के निर्यातक देशों के नाम बताइए। |
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Answer» कागज के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के निर्यातक देश हैं- ⦁ कनाडा |
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विश्व के लौह-अयस्क उत्पादन के दो क्षेत्रों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ रूर बेसिन तथा |
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कृत्रिम रेशम कैसे तैयार की जाती है? |
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Answer» कृत्रिम रेशम अधिकतर स्पूस एवं पाइन लकड़ी से प्राप्त किये गये सेल्यूलोज लकड़ी की लुग्दी और कारखानों की बनी हुई रद्दी कपास से तैयार की जाती है। |
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रेशम प्राप्त किया जाता है –(क) पेड़ों से(ख) फलों से(ग) रेशम के कीड़ों से(घ) इनमें से किसी से नहीं |
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Answer» (ग) रेशम के कीड़ों से। |
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सूती व्यवसाय के केन्द्र बहुधा नदियों और झीलों के किनारे ही क्यों स्थापित किये गये हैं? |
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Answer» सूत की धुलाई, रँगाई और अन्य कई प्रकार के कार्यों के लिए शुद्ध एवं मीठे जल की आवश्यकता पड़ती है। इसी कारण नदियों या झीलों के किनारे सूती व्यवसाय के केन्द्र स्थापित किये गये हैं। |
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नेपानगर का औद्योगिक महत्त्व बताइए। |
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Answer» नेपानगर कागज उद्योग के लिए विख्यात है। |
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संयुक्त राज्य अमेरिका के महान झील क्षेत्र के उद्योगों के विकास में उस क्षेत्र में प्राप्त खनिजों का योगदान समझाइए। |
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Answer» संयुक्त राज्य अमेरिका के महान झीलों के क्षेत्र में अनेक उद्योगों का विकास हुआ है जिससे यहाँ एक महान औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो गया है। यहाँ अनेक खनिज आधारित उद्योग स्थापित हैं, जिनमें, लोहा-इस्पात उद्योग सबसे महत्त्वपूर्ण आधारभूत उद्योग है। इसी के आधार पर यहाँ भारी इन्जीनियरिंग उद्योग, मोटर उद्योग आदि भी विकसित हो गये हैं। इस औद्योगिक विकास की आधारशिला यहाँ प्राप्त होने वाली लौह धातु है, जो मेसाबी, वरमीलियन, कुयुना, गोजेबिक, मिनोमिनी, मारक्वेंट आदि लौह श्रेणियों के रूप में उपस्थित है। इसके अतिरिक्त निकट ही कोयला भी प्राप्त होता है। इन दो खनिजों के आधार पर ही झील क्षेत्र के औद्योगिक प्रदेश का विकास हुआ है। |
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चीनी उद्योग में उल्लेखनीय देशों के नाम बताइए। |
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Answer» चीनी उद्योग में ब्राजील, भारत, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैण्ड, मैक्सिको, फ्रांस, जर्मनी, क्यूबा, पाकिस्तान, तुर्की तथा दक्षिण अफ्रीका उल्लेखनीय देश हैं। |
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मंचूरिया क्षेत्र चीन में लौह-इस्पात का प्रमुख उत्पादक केन्द्र क्यों है? |
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Answer» मंचूरिया में उच्चकोटि के कोकिंग कोयले के विशाल भण्डार हैं तथा लौह-अयस्क के अधिकांश भण्डार भी यहीं हैं। |
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विश्व में सूती वस्त्रोद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना सोदाहरण कीजिए।यासूती वस्त्रोद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करते हुए जापान में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का वर्णन कीजिए। यासूती वस्त्र उद्योग के लिए उपयुक्त स्थानीयकरण के भौगोलिक कारकों की समीक्षा करते हुए इस उद्योग का विश्व में वितरण समझाइए।याजापान के सूती वस्त्र उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए –(क) उपर्युक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ,(ख) प्रमुख उत्पादन क्षेत्र।याग्रेट ब्रिटेन में वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों का उल्लेख कीजिए तथा इसके प्रमुख उत्पादन केन्द्रों का वर्णन कीजिए। यासूती वस्त्र उद्योग के स्थानीकरण के कारकों की विवेचना कीजिए एवं विश्व में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।यासंयुक्त राज्य अमेरिका में सूती वस्त्रोद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए (अ) स्थानीयकरण के कारक(ब) उद्योग के प्रमुख क्षेत्र(स) निर्माण। |
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Answer» सूती वस्त्र उद्योग Cotton Textile Industry वस्त्र मानव की तीन प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक है। वस्त्रों का उपयोग तन ढकने के लिए प्राचीन काल से होता आया है। यह तन ढकने की आवश्यकता से लेकर अब तन सजाने की वस्तु बन गया है। गर्म जलवायु के देशों में सूती वस्त्रों का प्रचलन सर्वाधिक है। वर्तमान समय में सूती वस्त्र निर्माण का कार्य एक सुविकसित उद्योग का रूप ग्रहण कर चुका है। सूती वस्त्रों का निर्माण हाथ व मशीनों दोनों से होता है। अब इस उद्योग में स्वचालित तथा सुधरी हुई मशीनों का उपयोग होने लगा है। सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारक – सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को निम्नलिखित कारकों ने प्रभावित किया है। (1) जलवायु – सूती वस्त्र उद्योग उन्हीं देशों में स्थापित किया जाता है, जहाँ धागा बनाने के लिए नमें जलवायु मिलती है, क्योंकि शुष्क जलवायु में धागा बार-बार टूटता रहता है। अब तो कृत्रिम आर्द्रता उत्पन्न कर कहीं भी बाजार के निकट सूती कपड़े के कारखाने खोले जा सकते हैं। (2) कच्चा माल – सूती कपड़ा बनाने के लिए कपास की आवश्यकता होती है। कपास को गाँठ में बाँधकर कम खर्चे और आसानी के साथ दूर क्षेत्रों को भेजा जा सकता है; अत: आज के सूती कपड़े बनाने वाले प्रमुख देश जापान, इंग्लैण्ड, जर्मनी इसके उदाहरण हैं। (3) पर्याप्त मात्रा में मीठे जल की आवश्यकता – यह सूती कपड़े के लिए बहुत महत्त्व रखती है। सूत की धुलाई, रँगाई और अन्य कई प्रकार के कार्यों के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। इसी कारण नदियों या झीलों के किनारे सूती व्यवसाय के केन्द्र स्थापित किये गये हैं। इंग्लैण्ड में ब्लैकबर्न, बर्नले, लीड्स और लिवरपूल तक नहर के किनारे-किनारे सूती कपड़े के कारखाने पाये जाते हैं। संयुक्त राज्य में भी न्यू-इंग्लैण्ड राज्य में नदियों के किनारे-किनारे सूती वस्त्र के अधिक कारखाने स्थापित किये गये हैं। (4) श्रम – सूती वस्त्र उद्योग कुशल कारीगरों की उपलब्धता पर भी निर्भर करता है। लंकाशायरे और मैनचेस्टर में इस उद्योग के केन्द्रित होने का प्रधान कारण यही है कि वहाँ पहले ऊनी कपड़ा बनाने वाले कुशल कारीगर पाये जाते थे। इसी प्रकार जापान में भी सूती वस्त्र उद्योग को रेशमी कपड़ा बुनने वालों से काफी सहायता मिली है। भारत के मुम्बई और अहमदाबाद केन्द्रों में अधिकांश जुलाहों के कारण उद्योगों का विकास हुआ है। (5) शक्ति के साधन – जहाँ पर्याप्त मात्रा में सस्ती एवं निरन्तर विद्युत शक्ति प्राप्त हो जाती है, वहीं इसका तेजी से विकास होता है। इटली, जापान, कोरिया व चीन में भी विद्युत ऊर्जा की निरन्तर (6) यातायात के साधन एवं बाजार – तैयार माल को खपत के केन्द्रों तक पहुँचाने के लिए सस्ते और उत्तमपरिवहन के साधनों की आवश्यकता पड़ती है। उपनिवेश काल में निर्मित वस्त्र ब्रिटेन से हजारों मील दूर अफ्रीका में भारत भेजे जाते थे। आज तो जिन देशों के पास अपना कच्चा माल एवं स्वयं को विश्व में सूती वस्त्र उद्योग का वितरण सूती धागा उत्पादन की दृष्टि से विश्व के अग्रणी देश क्रमशः चीन (35%), संयुक्त राज्य अमेरिकी (13%), भारत (12%), पाकिस्तान (10%), तुर्की (3%), ब्राजील (3%), इटली (2%), दक्षिण कोरिया (1.5%) आदि हैं। (अ) संयुक्त राज्य अमेरिका का सूती वस्त्र उद्योग मिलों द्वारा निर्मित सूती वस्त्रों के उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका का तीसरा तथा सूती धागा उत्पादन में दूसरा स्थान है। यहाँ सूत कातने एवं वस्त्र बुनने का व्यवसाय पूर्वी भागों में अप्लेशियन पर्वतीय क्षेत्र के पूर्वी राज्यों में होता है, जहाँ इस उद्योग के लिए सभी भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं। सर्वप्रथम सूती वस्त्र उद्योग का विकास न्यू-इंग्लैण्ड राज्यों में हुआ था, परन्तु बाद में दक्षिणी राज्यों (अप्लेशियन पर्वतीय) में इसका सर्वाधिक विकास हुआ है। अतः उत्तरी-पूर्वी संयुक्त राज्य से इसके दक्षिणी-पूर्वी क्षेत्रों की ओर इस उद्योग का खिसकाव हुआ है। Localisation Factors of Cotton Textile Industry in U.S.A. ⦁ अनुकूलतम नम जलवायु। उद्योग के प्रमुख क्षेत्र Main Areas of Industry संयुक्त राज्य में वस्त्र उद्योग संयुक्त रूप से विकसित हुआ है, अर्थात् कताई, बुनाई एवं छपाई आदि कार्य एक साथ ही किये जाते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में सूती वस्त्र उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख हैं – (1) न्यू-इंग्लैण्ड क्षेत्र – न्यू-इंग्लैण्ड में सूती वस्त्र निर्माणक केन्द्र रोड्स द्वीप, कनेक्टीकट, मैसाचुसेट्स एवं हैम्पशायर में हैं। प्रथम सूती मिल की स्थापना सन् 1790 में रोड्स द्वीप के पॉर्टकट नामक स्थान पर की गयी थी। इसके बाद अन्य नगरों में सूती मिलें स्थापित की गयीं, जिनमें फाल-रिवर, न्यूब्रेडफोर्ड, लॉवेल, प्रॉविडेन्स, लारेंस एवं मानचेस्टर महत्त्वपूर्ण केन्द्र हैं। अन्य केन्द्रों में बोस्टन, वॉरसेस्टर, विवरले, पिचबर्ग, होलीओक, नार्थ-एडेम्स, बूनसॉ केट, ट्राउनटन आदि प्रमुख हैं। (3) दक्षिणी अप्लेशियन क्षेत्र – यह संयुक्त राज्य का सबसे बड़ा सूती वस्त्र उत्पादक प्रदेश है। उत्तरी एवं दक्षिणी केरोलिना, जॉर्जिया एवं टेनेसी आदि राज्य इसके अन्तर्गत सम्मिलित हैं। यहाँ सूती वस्त्र उद्योग का अधिक विकास सन् 1880 के बाद हुआ है। निर्यात – ब्राजील संयुक्त राज्य अमेरिका में बने सूती वस्त्रों का सबसे बड़ा ग्राहक है। इसके अतिरिक्त मैक्सिको, ग्वाटेमाला, निकारागुआ, जमैका, हवाना, क्यूबा, वेनेजुएला, कोलम्बियां, इक्वेडोर, अर्जेण्टाइना, चिली, बोलिविया, यूरोप आदि देशों को भी सूती वस्त्रों का निर्यात किया जाता है। (ब) जापान का सूती वस्त्र उद्योग सूती वस्त्र उत्पादन में जापान का स्थान विश्व में तो नगण्य है, परन्तु एशिया महाद्वीप में चीन, भारत एवं कोरिया के बाद चौथा स्थान है। जापान विदेशों से कपास का आयात कर, उसका वस्त्र तैयार कर अन्य देशों को निर्यात कर देता है। जापान में सूती वस्त्रों की पहली मिल 1868 ई० में स्थापित की गयी थी। प्रथम विश्वयुद्ध तक इस उद्योग की प्रगति बहुत ही मन्द रही। परन्तु प्रथम युद्ध-काल में जापान के इस उद्योग ने तीव्र गति से उन्नति की तथा जापान में बने वस्त्र चीन, भारत एवं अफ्रीकी देशों में पहुँच गये थे। इस प्रकार प्रगति करते-करते 1933 ई० तक जापान विश्व का प्रथम सूती वस्त्र निर्यातक देश बन गया था, परन्तु द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान के वस्त्र उद्योग को भारी हानि उठानी पड़ी, क्योंकि इस महायुद्ध में जापान की लगभग 80% सूत कातने वाली मिलें परमाणु बम के प्रहार से नष्ट-भ्रष्ट हो गयी थी। सन् 1946 तक जापान के इस उद्योग की दशा बड़ी ही शोचनीय थी। जापान ने अपने इस उद्योग का पुनर्निर्माण किया तथा आठ वर्षों के अन्तराल में ही अपनी मिलों को आधुनिक मशीनों से सुसज्जित कर लिया था। इस प्रकार 1954 ई० में जापान पुनः विश्व का सबसे बड़ा सूती वस्त्र निर्यातक देश बन गया था तथा आज तक उस स्थिति को बनाये हुए है। वर्तमान समय में उसे अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में चीन, संयुक्त राज्य, ब्रिटेन एवं भारतीय वस्त्रों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। जापान में सूती वस्त्र उद्योग के विकास के कारक ⦁ बड़ी संख्या में सस्ते श्रमिकों की प्राप्ति-जिनमें स्त्रियाँ एवं बच्चे श्रमिकों की संख्या अधिक होती है। जापानी श्रमिक दो पारियों में काम करते हैं। जापान की अधिकांश जनसंख्या तटीय भागों में ही निवास करती है। ⦁ कपास के रूप में कच्चा माल चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, मिस्र, सूडान एवं मैक्सिको आदि देशों से आयात किया जाता है। ⦁ जापान का अधिकांश धरातल ऊबड़-खाबड़ एवं पर्वतीय है, जिससे नदियाँ प्राकृतिक जल-प्रपातों का निर्माण करती हैं तथा बड़े पैमाने पर जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। सूती वस्त्र मिलों में जल-विद्युत शक्ति का ही उपयोग किया जाता है। ⦁ तटीय भागों में प्राकृतिक पत्तनों का विकास जिससे कपास को आयात करने एवं तैयार वस्त्रों को विदेशों में निर्यात करने की सुविधा रहती है। ⦁ जापान के वस्त्र उद्योग में देश में ही बनी आधुनिक मशीनें तथा प्रबन्ध में उच्च क्षमता रखी जाती है। मशीनों के घिसते ही तुरन्त नयी मशीनें बदल दी जाती हैं। ⦁ यहाँ स्वचालित करघों का उपयोग किया जाता है तथा छोटे रेशे की कपास को कातने की उपयुक्त मशीनों का आविष्कार कर लिया गया है, जिससे उत्पादन प्रति श्रमिक पाँच गुना हो गया है। ⦁ जापान की शीतोष्ण जलवायु आर्द्रता-प्रधान है, जिसमें निर्मित सूती धागा नहीं टूटता।⦁ सूती वस्त्र उद्योग का जापानी अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान होने के कारण इस उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन मिलता है। ⦁ वस्त्र उद्योग के लिए स्थानीय बाजार एवं निर्यात व्यापार के लिए अफ्रीकी एवं एशियाई देशों बल्कि यहाँ तक कि यूरोपीय, दक्षिणी अमेरिकी एवं ऑस्ट्रेलियाई देशों के बाजार उपलब्ध हैं। ⦁ किन्की प्रदेश – इस प्रदेश में सबसे अधिक सूती वस्त्रों का उत्पादन किया जाता है। यहाँ जापान का एक-तिहाई सूती वस्त्र तैयार किया जाता है। ओसाका एवं कोबे इस प्रदेश के प्रमुख केन्द्र हैं। ओसाका जापान का मानचेस्टर कहलाता है। अन्य केन्द्रों में किशीवादा प्रमुख है। ⦁ क्वाण्टो प्रदेश – जापान में स्थित क्वाण्टो का मैदान प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक प्रदेश है। इस प्रदेश में टोकियो एवं याकोहामा महत्त्वपूर्ण सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ नगोया प्रदेश – इस प्रदेश में नगोया नगर के समीपवर्ती भागों में स्थित छोटे-छोटे नगरीय केन्द्रों में सूती वस्त्र की मिलें स्थापित की गयी हैं। मिनोओबारी की खाड़ी के तटीय भागों में भी सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र विकसित हुए हैं। अन्य प्रमुख केन्द्रों में योकोच्ची, हामामात्सू तथ तयोर्हशी आदि महत्त्वपूर्ण हैं। इस प्रकार जापान ग्राहकों की रुचि का ख्याल कर उनकी माँग के अनुसार सस्ते कपड़े के उत्पादन का प्रयास करता है, जिससे उसे अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में भारत, हांगकांग, चीन, ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों से प्रतिस्पर्धा लेने में सुगमता रह सके। (स) रूस का सूती वस्त्र उद्योग मिलों द्वारा सूती वस्त्र उत्पादन में रूस का विश्व में चौथा स्थान है। यहाँ सूती वस्त्र उद्योग के लिए निम्नलिखित भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं – ⦁ यहाँ कच्चा माल पर्याप्त मात्रा में कजाकिस्तान तथा जॉर्जिया से प्राप्त होता है, जो पूर्ववर्ती सोवियत संघ के राज्य थे। रूस में सूती वस्त्र उत्पादक क्षेत्र ⦁ मास्को-इवानोवो प्रदेश – इस प्रदेश में सूती वस्त्र उद्योग का विकास 18वीं शताब्दी के अन्त में किया गया था। कपास ट्रांस-काकेशिया एवं मध्य एशिया से प्राप्त होती है। सोवियत क्रान्ति (1917) के बाद से यह प्रदेश कच्चे माल (कपास) के उत्पादन में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो गया है। इवानोवो को रूस का मानचेस्टर कहा जाता है। इसके चारों ओर सूती वस्त्र उत्पादक मिलों के नगरीय केन्द्रों का एक घेरा-सा विकसित हो गया है। यारोस्लाव, कोस्त्रोमोव, किनेशमा, शुया, कैमरोव, ओरेखोवो-जुयेवो, मास्को, नोगिन्स्क, पॉवलोवस्की-पोसाद, येगोरयेवस्क, सेरपुखोवु, ग्लुखोवो प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ लेनिनग्राड प्रदेश – इस प्रदेश में लेनिनग्राड, नार्वा, तल्लिन तथा बाल्टिक राज्यों में रीगा एवं कौनास प्रमुख वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ कालिनिन प्रदेश – मास्को के पश्चिम में इस प्रदेश में कालिनिन, विशनीय, वोलोस्चेक एवं यार्तसेवो प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ यूक्रेन प्रदेश – इस प्रदेश में सूत कातने एवं वस्त्र बुनने की मशीनों का निर्माण खेरसन में होता है। खारकोव एवं कीव प्रमुख वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ वोल्गा बेसिन – वोल्गा नदी की घाटी में चेवोकसरी, कणीशिन एवं ताम्बोव प्रमुख सूती वस्त्रोत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ यूराल प्रदेश – यूराल प्रदेश के पूर्व में स्थित चिल्याबिन्स्क प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र ⦁ ट्रांस-काकेशिया प्रदेश – गोर्की इस प्रदेश का सबसे बड़ा वस्त्रोत्पादक केन्द्र है। बाकू, किरिवबाद, कुताइसी, तिब्लिसी, लेनिनांकन प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ मध्य एशिया – यहाँ पर ताशकन्द, फरगना, बुखारा, लेनिनवाद, फुन्जे, अशखाबाद एवं दुशाम्बे प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ साइबेरिया – ओमस्क, नोवासिबिस्र्क, बरनोल, ब्रियस्क, कैमरोवकान्स्क, लेनिनस्ककुजनेत्स्क, अल्मा-अत्ता एवं कुस्तनाय प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। (द) ग्रेट ब्रिटेन का सूती वस्त्र उद्योग ग्रेट ब्रिटेन में औद्योगिक क्रान्ति का सूत्रपात सूती वस्त्र उद्योग से ही हुआ है। 19 वीं शताब्दी में इसने औद्योगिक क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन किया, किन्तु आज ब्रिटेन की स्थिति पहले जैसी नहीं रह गयी है। सूती वस्त्र के निर्माण में एक समय यह शिखर पर था, परन्तु वर्तमान में यह देश विश्वका केवल 0.45% (27.5 करोड़ वर्ग मी) मिश्रित सूती वस्त्र तैयार करता है। इसे सूती वस्त्र उद्योग के क्षेत्र में सदैव संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं भारत से प्रतिस्पर्धा लेनी पड़ती है। इस व्यवसाय ने यहाँ की जनसंख्या को आजीविका तथा देश को सुदृढ़ आर्थिक आधार प्रदान किया, इसलिए “सूती वस्त्र उद्योग को ग्रेट ब्रिटेन की रोटी” कहा जाता था। ग्रेट ब्रिटेन में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के कारण – यह आश्चर्य की बात है कि ग्रेट ब्रिटेन में कपास पैदा नहीं होती है फिर भी यहाँ सूती वस्त्र उद्योग का पर्याप्त विकास हुआ है। ग्रेट ब्रिटेन में सूती वस्त्रोद्योग के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित कारक उत्तरदायी हैं – ⦁ समुद्री आर्द्र जलवायु विश्व स्तर पर सूती वस्त्र उद्योग को आधुनिक मिल प्रणाली पर विकसित करने का श्रेय ब्रिटेन को ही है। सूती वस्त्र उद्योग का सबसे अधिक विकास लंकाशायर क्षेत्र में हुआ है। सूती वस्त्र उद्योग में मानचेस्टर यहाँ का विश्व-प्रसिद्ध सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र है। (1) लंकाशायर क्षेत्र – लंकाशायर क्षेत्र ग्रेट ब्रिटेन की महत्त्वपूर्ण तथा सबसे बड़ा सूती वस्त्र उत्पादक क्षेत्र है। इस क्षेत्र में सूती वस्त्र उद्योग के लिए नम जलवायु, पर्याप्त कोयला, आयातित कपास, पर्याप्त शक्ति के साधन, नदियों का स्वच्छ जल, पर्याप्त नवीन मशीनें, लंकाशायर का पत्तन, समीप में चैशायर से रासायनिक पदार्थों की उपलब्धता, विस्तृत भूमि, कुशल एवं सस्ते श्रमिक तथा पर्याप्त विदेशी माँग जैसी भौगोलिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। मानचेस्टर इस क्षेत्र का विश्व-प्रसिद्ध सूती वस्त्र उत्पादक केन्द्र है। इस क्षेत्र के अन्य सूती वस्त्र बनाने वाले केन्द्र प्रेस्टन, कालने, मेकलेराफील्ड, एकरिंगटन, डार्विन, नेलसन, बोल्टन, रोशडेल, स्टॉकपोर्ट, ब्लेकबर्न, ओल्डहम, बर्नले, बरी, नाटिंघम तथा लीसेस्टर आदि हैं। यहाँ रँग्राई का कार्य बिंगान, विडनेस व सैण्ट-हैलेन्स में किया जाता है। (2) ग्लासगो क्षेत्र – इस क्षेत्र में सूती वस्त्र उद्योग का विकास क्लाइड नदी की घाटी में विकसित हुआ है। यहाँ की नम समुद्री जलवायु, पर्याप्त शक्ति के साधन एवं सुलभ जल-यातायात ने इस उद्योग के विकास में विशेष योगदान दिया है। यहाँ सूत बनाने का कार्य बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है। इस क्षेत्र में सूती वस्त्र बनाने के प्रमुख केन्द्र ग्लासगो, ब्रेडफोर्ड तथा पैसले हैं। पैसले सूती धागा बनाने का भी प्रमुख केन्द्र है, जब कि ग्लासगो मलमल बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध है। (3) भावी सम्भावनाएँ – प्रथम विश्व युद्ध के आरम्भ तक ब्रिटेन को संसार के सूती वस्त्र उत्पादक देशों में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त था, परन्तु उसके बाद सूती वस्त्र के उत्पादन में जापान, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जर्मनी और फ्रांस इससे आगे बढ़ गये। भारत, जापान, चीन आदि देशों से कड़े मुकाबले के कारण अब ब्रिटेन का सूती वस्त्र उत्पादन बहुत घट गया है। इस उद्योग के पुनर्विकास की सम्भावनाएँ भी नहीं हैं, क्योंकि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था अब व्यापारोन्मुख हो गयी है जिसमें वेस्त्र उद्योग जैसे उपभोक्ता उद्योग के लिए कोई स्थान नहीं है। वैसे भी भारत, चीन तथा जापान के सस्ते वस्त्रों के सामने ब्रिटिश उत्पादों का महत्त्व नहीं रह गया है। |
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कागज उद्योग के स्थानीयकरण एवं विकास के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए। इस उद्योग में प्रसिद्ध प्रमुख देशों के नाम बताइए।याकागज उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(अ) स्थानीयकरण के कारण,(ब) विश्व में इस उद्योग के प्रमुख देश।याकागज उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों की विवेचना कीजिए तथा विश्व में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का वर्णन कीजिए।याटिप्पणी लिखिए-विश्व में कागज उद्योग। |
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Answer» कागज उद्योग वन उत्पादों पर आधारित सबसे महत्त्वपूर्ण उद्योग है। यदि यह कहा जाए कि वर्तमान सभ्यता कागज की ही देन है तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी। आज विश्व के जिस देश में जितने अधिक कागज का उपभोग किया जाता है, वह उतना ही सभ्य एवं उन्नत कहलाता है। Necessary Geographical Conditions for Paper Industry ⦁ कच्चे माल की प्राप्ति – कागज उद्योग के लिए कच्चा माल लुग्दी है। कोमल लकड़ी के वन-क्षेत्रों में पर्याप्त लुग्दी उपलब्ध हो सकती है; अतः इन्हीं क्षेत्रों में कागज उद्योग स्थापित किया जा सकता है। वर्तमान समय में भी 80 से 85% कागज का निर्माण लकड़ी की लुग्दी से ही किया जाता है। ⦁ कोमल लकड़ी के वनों का होना – कोमल लकड़ी से ही अच्छी लुग्दी प्राप्त हो सकती है। यही कारण है कि कागज उद्योग की स्थापना शीत एवं शीतोष्ण कटिबन्धीय वनों के समीपवर्ती क्षेत्रों में हुई है। स्पूस, हेमलॉक, फर एवं चीड़ की कोमल लकड़ी इसके लिए उपयुक्त रहती है। ⦁ स्वच्छ जल की उपलब्धि – कागज उद्योग के लिए प्रचुर मात्रा में स्वच्छ जल आवश्यक होता है, जिससे लुग्दी एवं लकड़ी के रेशों को साफ किया जाता है। ⦁ जल-विद्युत शक्ति का विकास – कागज उद्योग के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता पड़ती है; अतः नदी-घाटियों के समीपवर्ती भागों में इस उद्योग की स्थापना से सस्ती जल-शक्ति पर्थीप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाती है। ⦁ सहायक उद्योगों का विकास – इस उद्योग के लिए अनेक रासायनिक पदार्थ; जैसे-कास्टिक सोडा, सोडा ऐश, क्लोरीन, हड्डी का चूरा, चीनी-मिट्टी आदि की आवश्यकता पड़ती है। इसीलिए इन सहायक उद्योगों का विकास कागज उद्योग के समीपवर्ती भागों में ही किया जाना चाहिए, जिससे कागज की उत्पादन लागत सस्ती पड़ती है। ⦁ कुशल श्रमिकों की उपलब्धि – कागज उद्योग के लिए पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिकों की सुविधा होनी चाहिए जो सघन जनसंख्या के क्षेत्रों में सुगमता से उपलब्ध हो सकते हैं। ⦁ परिवहन के साधनों का विकास – कागज उद्योग के लिए आन्तरिक एवं बाह्य परिवहन के साधनों की आवश्यकता पड़ती है, जिससे माल को लाने एवं ले जाने में सुविधा रह सके। ⦁ बाजार की सुविधा – कागज उद्योग के निकटवर्ती क्षेत्रों में सघन जनसंख्या का होना अति आवश्यक है, जिससे तैयार माल की खपत होती रहे। इसके साथ ही इसे विदेशों को निर्यात करने की भी पर्याप्त सुविधाएँ होनी चाहिए। विश्व में कागज के प्रमुख उत्पादक देश विश्व में कागज का उत्पादन करने वाले देशों में कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, रूस एवं जापान प्रमुख हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है – (1) संयुक्त राज्य अमेरिका – संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का 28.4% कागज का उत्पादन करता है तथा विश्व में प्रथम स्थान पर है। यहाँ 80% कागज रासायनिक लुग्दी से तैयार किया जाता है। इस लुग्दी से उत्तम किस्म का कागज बनाया जाता है। अधिकांश कांगज की मिलें न्यू इंग्लैण्ड, वाशिंगटन एवं ओरेगन राज्यों में स्थित हैं जहाँ कोमल लकड़ी के क्षेत्र विस्तृत हैं। न्यू इंग्लैण्ड राज्य में ही 47 कागज की मिलें हैं। संयुक्त राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में पर्याप्त जल-विद्युत का उत्पादन कर लिया जाता है। मेसाचुसेट्स, न्यूयॉर्क, विस्कांसिन, मिशीगन, ओहियो तथा पेंसिलवानिया कागज उत्पादन के अन्य। महत्त्वपूर्ण राज्य हैं। (2) जापान – जापान विश्व का तीसरा बड़ा कागज उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 9.8% कागज का उत्पादन होता है। जापान के होकेडो द्वीप में शंकुल वन पाये जाते हैं जहाँ सुगी, हिकोरी, फर, स्पूस आदि नुकीली पत्ती वाले वन प्रमुख हैं जिनसे लुग्दी तैयार की जाती है। होंशू द्वीप के भीतरी पहाड़ी भागों से भी लुग्दी बनाने के लिए कोमल लकड़ी मिल जाती है। टोकियो-याकोहामा औद्योगिक प्रदेश में शिजूओका एवं शिमिजू; क्यूशू द्वीप में टोकाई औद्योगिक क्षेत्र तथा पूर्वी क्षेत्र में सुरुगाबान क्षेत्र में कागज का उत्पादन सन् 1880 से किया जा रहा है। (3) कनाडा – कनाडा विश्व का 6.5% कागज उत्पादन करके चौथे स्थान पर है। कनाडा में कोणधारी वृक्ष बहुतायत में मिलते हैं जिनसे कोमल लकड़ी की प्राप्ति होती है। इन वृक्षों से यान्त्रिक लुग्दी तैयार की जाती है। महान् झीलों का स्वच्छ जल इस उद्योग के लिए उपलब्ध है। इनसे प्रवाहित होने वाली नदियों पर बॉध बनाकर पर्याप्त जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। ब्रिटिश कोलम्बिया, कनाडियन शील्ड एवं न्यूफाउण्डलैण्ड कागज उद्योग के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्रिटेन एवं पाकिस्तान यहाँ के कागज के प्रमुख ग्राहक हैं। (4) ब्रिटेन – ब्रिटेन में कागज उद्योग के लिए नार्वे, स्वीडन, कनाडा एवं बाल्टिक सागरतटीय देशों से लुग्दी का आयात किया जाता है। इस देश को कागज उद्योग के लिए नदियों से स्वच्छ जल की पूर्ति, जल-विद्युत शक्ति, पश्चिमी यूरोपीय देशों के उपभोक्ता बाजार की निकटता तथा द्वीपीय स्थिति होने के कारण पत्तनों द्वारा लुग्दी आयात तथा तैयार माल के निर्यात जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कागज. उद्योग के केन्द्रों में केण्ट, रॉशडेल एवं हैम्पशायर प्रमुख हैं। (5) यूरोपीय देश – यूरोप महाद्वीप में नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, ऑस्ट्रिया तथा जर्मनी में कागज का उत्पादन किया जाता है। अखबारी कागज का उत्पादन सबसे अधिक नार्वे में ओस्लो, फियॉर्ड एवं सक्रान्टन के तटीय भागों में किया जाता है। रूस के यूराल एवं साइबेरिया क्षेत्र कागज उद्योग के प्रमुख क्षेत्र हैं, क्योंकि यहाँ साइबेरिया के कोणधारी वन क्षेत्रों से लुग्दी के लिए कोमल लकड़ी उपलब्ध हो जाती है। (6) भारत – भारत में बॉस, सवाई घास, रद्दी कागज, चिथड़े तथा चीड़ आदि वृक्षों से कागज बनाया जाता है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु एवं आन्ध्र प्रदेश प्रमुख कागज-उत्पादक राज्य हैं। यहाँ स्थानीय मॉग से बहुत कम उत्पादन होने के कारण विदेशों से कागज आयात करना पड़ता है। उच्चकोटि का कागज कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं यूरोपीय देशों से आयात किया जाता है। अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-निर्यातक देश – कनाडा, नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, जर्मनी, जापान एवं संयुक्त राज्य अमेरिका। आयातक देश – भारत, दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश, दक्षिणी अमेरिकी तथा दक्षिणी-पूर्वी यूरोपीय देश। |
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Take three test-tubes. Fill each of each with water. Label them A, B and C. Keep a snail in test-tube A, a water plant in test-tube B and in C, keep snail and plant both. Which test-tube would have the highest concentration of CO2? |
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Answer» Living organisms release CO2 during respiration whereas plant utilize CO2 for photosynthesis. So, the test tube A will have the highest concentration of carbon dioxide because the carbon dioxide as it comes only by respiration of snail. In test tubes B and C, a part of the carbon dioxide is utilized by the plant for photosynthesis and hence there is less concentration of carbon dioxide. |
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Given below is a square of letters in which are hidden different words related to respiration in organisms. These words may be present in any direction – upwards, downwards, or along the diagonals. Find the words for your respiratory system, clues about those words are given below the square.(i) The air tubes of insects(ii) Skeletal structures surrounding chest cavity(iii) Muscular floor of chest cavity(iv) Tiny pores on the surface of leaf(v) Small openings on the sides of the body of an insect(vi) The respiratory organs of human beings(vii) The openings through which we inhale(viii) An anaerobic organism(ix) An organism with tracheal system |
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Answer» (i) Trachea (ii) Ribs (iii) Diaphragm (iv) Stomata (v) Spiracles (vi) Lungs (vii) Nostrils (viii) Yeast (ix) Ant |
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Class 7 Science MCQ Questions of Respiration in Organisms with Answer? |
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Answer» Students can ask this Respiration in Organisms Class 7 MCQ Questions with Answers and assess their preparation level. Revise all the concepts easily by taking help from the MCQ Questions for class 7 Science with Answers are prepared supported the newest exam pattern. Solving the Respiration in Organisms Multiple Choice Questions of class 7 Science MCQ Questions are often of utmost help as you'll remember of all the concepts. Practice MCQ Questions for Class 7 Science 1. Sometimes when we do heavy exercise, anaerobic respiration takes place in our muscle cells. What is produced during this process? (a) alcohol and lactic acid 2. Yeast is used in wine and beer industries because it respires. (a) aerobically producing oxygen 3. During the process of exhalation, the ribs move (a) down and inwards 4. Breathing is a process that (i) provides O2 to the body. Which of the following gives the correct combination of functions of breathing? (a) (i) and (ii) 5. Which are the gases involved in breathing? (a) O2 and NO2 6. Name the organ of the body in which the blood is oxygenated. (a) Heart 7. Yeasts are used in (a) wine and beer industry 8. Breathing rate in human beings in normal condition is (a) 12-15 times in a minute 9. The process of breakdown of food in the cell with the release of energy is called ________ (a) Respiration 10. Giving out of air rich in carbon dioxide is called __________ (a) Respiration 11. To which disease is smoking linked ? (a) Appendicitis 12. Name the organism which breathes through its skin (a) Cat 13. The small openings in the body of a cockroach are called (a) Holes 14. The air tubes that an insect has are useful for the exchange of________ (a) Gases 15. The network of air tube in insects for gaseous exchange is called as (a) Trachea 16. Which of the following is most likely to have a much higher breathing rate? (a) Man 17. The most common substrate for respiration is (a) fats 18. Which part of nose prevents the passage of smoke dust inside the body: (a) hair 19. Muscular floor of the chest cavity is called (a) Rib cage 20. The organisms which cannot be seen with the naked eyes are called (a) Plants 21. Oxidation of food inside cell takes place in (a) Golgi bodies 22. The chemical used to test the carbon dioxide gas in exhaled air is (a) Lime water 23. A molecule of haemoglobin carries oxygen molecules. (a) 1 24. Voice box is present in (a) Pharynx 25. Small thin walled balloon like structure that help in exchange of gases are (a) Arteries Answer: 1. Answer: (d) lactic acid only Explanation: While doing heavy exercise such as running, cycling, weightlifting, etc., we need high energy which creates an impermanent deficiency of oxygen in the muscle cells. In absence of oxygen, our body performs anaerobic respiration in which glucose present in the muscle cells is changed into lactic acid. 2. Answer: (c) anaerobically producing alcohol Explanation: Yeast respires anaerobically to produce ethanol and CO2. 3. Answer: (a) down and inwards Explanation: The procedure of "removing air from the lungs" which is rich in carbon dioxide is termed as exhalation. To remove the air from the lungs move downwards and inwards. 4. Answer: (c) (i) and (iii) Explanation: Breathing is the process of inhaling oxygen into the body and exhaling carbon dioxide out of the body. It provides O2 to the body and helps the body to get rid of CO2. 5. Answer: (d) O2 and CO2 Explanation: O2 and CO2 are the gases involved in breathing. Breathing is the process of inhalation of oxygen and exhalation of carbon dioxide for respiration. 6. Answer: (b) Lungs Explanation: The right ventricle pumps the blood to the lungs where it becomes oxygenated. The oxygenated blood is brought back to the heart by the pulmonary veins which enter the left atrium Oxygenation takes place in the lungs. 7. Answer: (a) wine and beer industry Explanation: Yeast is used in wine and beer industries because it respires Anaerobically producing alcohol. 8. Answer: (b) 15-18 times in a minute Explanation: Breathing (or ventilation) is the process of moving air into and out of the lungs to facilitate gas exchange with the internal environment, mostly by bringing in oxygen and flushing out carbon dioxide.The Normal range of breathing rate per minute in an average adult person at rest is 15-18. 9. Answer: (a) Respiration Explanation: The process of breakdown of food in the cell with the release of energy is called cellular respiration. Cellular respiration takes place in the cells of all organisms. 10. Answer: (c) Exhalation Explanation: Breathing the physical process of respiration where breathing-in and breathing-out of various gases take place. While exhaling, the carbon dioxide collected from various parts of the body is the major gas that is thrown out of the body. Since carbon dioxide is one the most abundant waste product formed in the body, the exhaled air is rich in carbon dioxide. 11. Answer: (b) Cancer Explanation:Tobacco use causes many types of cancer, including cancer of the lung, larynx (voice box), mouth, esophagus, throat, bladder, kidney, liver, stomach, pancreas, colon and rectum, and cervix, as well as acute myeloid leukemia. 12. Answer: (d) Earthworm Explanation: Earthworms breathe through their skins. The skin of an earthworm feels moist and slimy on touching. Gases can easily pass through them. Though frogs have a pair of lungs like human beings, they can also breathe through their skin, which is moist and slippery. 13. Answer: (b) Spiracles Explanation: In cockroaches, the respiratory system consists of a network of trachea that open outside through small holes that are present on lateral side of the body are called spiracles and are of 10 pairs. 14. Answer: (a) Gases Explanation: Insects use air-filled tubes called tracheae to exchange oxygen and carbon dioxide between their tissues and the air. This network of tubes is also called a tracheal system. Insect body contains small openings on the outer surface called spiracles. Spiracles are connected to the internal tubes. 15. Answer: (a) Trachea Explanation: In insects, the respiratory system has a network of the trachea. They are opened through 10 pairs of spiracles that are present on the lateral sides of the body. The trachea has network of air tubes for gaseous exchange. 16. Answer: (d) Fish Explanation:The smaller the size of the animal, higher is the metabolic rate and higher the respiratory (breathing) rate. This is because a smaller size means a higher surface area to volume ratio and, therefore, a higher need for oxygen to be supplied to the different tissues. Since fishes are smaller in size they will have a much higher breathing rate. 17. Answer: (c) glucose Explanation: The various organic substances such as carbohydrates, fats and proteins are respired completely to carbon dioxide and water are called respiratory substrates. Under natural conditions only carbohydrates are used. Glucose being the simplest monosaccharide hexose molecule acts as the chief respiratory substrate. 18. Answer: (a) hair Explanation: Hairlike structures called cilia line the mucous membrane and move the particles trapped in the mucus out of the nose. Inhaled air is moistened, warmed, and cleansed by the tissue that lines the nasal cavity. 19. Answer: (b) Diaphragm Explanation: The diaphragm is a large muscular sheet which forms the floor of the chest cavity. It is a domed shaped structure made up of muscles which separate thoracic cavity and abdominal cavity. 20. Answer: (b) Microorganisms Explanation: The microorganisms are the microscopic bodies which cannot be seen directly with the naked eye. These organisms are of the size in microns. The study which deals with the microbes is known as microbiology. There are the different types of microbes like bacteria, viruses, fungi, etc. 21. Answer: (b) Mitochondria Explanation: Mitochondria produces the energy currency, i.e., ATPs of the cell. Mitochondria is the power house of cell. It produces ATP by oxidising nutrients in the cell. This process is known as 'oxidative phosphorylation'. 22. Answer: (a) Lime water Explanation: Limewater (calcium hydroxide solution) will turn cloudy/milky when a certain amount of carbon dioxide is passed through it. It is a specific test for carbon dioxide. 23. Answer: (d) 4 Explanation: Each hemoglobin molecules is made of four polypeptide chains, and four oxygen molecules bind to one molecule of hemoglobin. 24. Answer: (d) Larynx Explanation: Larynx — also known as the voice box, the larynx is a cylindrical grouping of cartilages, muscles and soft tissue that contains the vocal cords. The larynx is the upper opening into the windpipe (trachea), the passageway to the lungs. 25. Answer: (d) Alveoli Explanation: In lungs, the bronchioles terminate in balloon-like structures called alveoli. The alveoli contains network of blood capillaries that increase the surface area for exchange of gases. Click here for Practice MCQ Questions for Respiration in Organisms Class 7 |
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विश्व के लौह-अयस्क उत्पादक क्षेत्रों का वितरण तथा उसके अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का वर्णन कीजिएयालोहा तथा इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए तथा विश्व में इस उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों या केन्द्रों का उल्लेख कीजिएयासंयुक्त राज्य अमेरिका या जर्मनी के लोहा तथा इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।याचीन के लोहा-इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।याविश्व के किन्हीं दो देशों में लौह-अयस्क के वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए।यालोहा एवं इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों की विवेचना कीजिए तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का वर्णन कीजिए। यासंयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उद्योग के विकास के प्रमुख कारकों का विवेचन कीजिए तथा इस उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों एवं केन्द्रों का वर्णन कीजिए। याविश्व में लौह-अयस्क का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(क) उत्पादक क्षेत्र(ख) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार। |
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Answer» लोहा एवं इस्पात का महत्त्व Importance of Iron and Steel वर्तमान में यान्त्रिक एवं औद्योगिक सभ्यता का आधार लोहा एवं इस्पात माना जाता है, क्योंकि अन्य उद्योगों के लिए लोहा-इस्पात कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। मानव-जाति की वर्तमान एवं भावी समृद्धि लोहे एवं इस्पात के उत्पादन पर निर्भर करती है। विश्व में जितनी भी धातुओं का उत्पादन किया जाता है, उसमें लगभग 90% भाग लोहे का ही होता है। वर्तमान अन्तरिक्ष युग में कुछ हल्की धातुओं (ऐलुमिनियम) का प्रयोग अधिक किया जाने लगा है, परन्तु लोहे की कठोरता, प्रबलता, स्थायित्व, लचीलेपन एवं सस्तेपन आदि गुणों के कारण अन्य धातुएँ इसका स्थान नहीं ले सकी हैं। इसके उपर्युक्त विशेष गुणों के कारण ही इसे विभिन्न रूपों में ढाला जा सकता है। ⦁ भूमि का विस्तृत क्षेत्र; विश्व में लौह-इस्पात उद्योग का वितरण एवं उत्पादन विश्व के अग्रणी लोहा-इस्पात उत्पादक देश क्रमश: जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, यूक्रेन, जर्मनी, भारत, इटली, कनाडा, ब्रिटेन, बेल्जियम तथा स्पेन हैं। (अ) संयुक्त राज्य अमेरिका का लोहा-इस्पात उद्योग विश्व के लौह-इस्पात उत्पादक देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका तीसरा स्थान रखता है। यहाँ लोहा-इस्पात उत्पादन के छः क्षेत्र मुख्य स्थान रखते हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है – (1) पिट्सबर्ग-यंग्सटाउन क्षेत्र – इस प्रदेश में संयुक्त राज्य का लगभग एक-तिहाई इस्पात का उत्पादन किया जाता है। इसमें इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित तीन उप-क्षेत्र हैं – ⦁ पिट्सबर्ग क्षेत्र – यहाँ ओहियो, माननघेला एवं अलेघनी नदियों की घाटियों में इस्पात उद्योग के कारखाने स्थापित हुए हैं। इस्पात-निर्माण के सभी केन्द्र पिट्सबर्ग से 65 किमी के भीतर स्थित हैं ⦁ यंग्सटाउन क्षेत्र – यंग्सटाउन से 50 किमी की दूरी पर शेनांगो एवं माहोनिंग नदियों की घाटियों में इस्पात के कारखाने विकसित हुए हैं। ⦁ जोन्सटाउन क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार कोनेमाघ नदी की घाटी में हुआ है। प्रमुख इस्पात केन्द्र पिट्सबर्ग, यंग्सटाउन, ह्वीलिंग, हंटिंगटन, पोसमाउथ, जोन्सटाउन आदि हैं। (2) शिकागो – गैरी क्षेत्र – संयुक्त राज्य में इस क्षेत्र का लोहा-इस्पात उत्पादन में प्रथम स्थान है, जहाँ देश का 35% इस्पात निर्मित किया जाता है। इस क्षेत्र में लौह-अयस्क, कोयला स्थानीय, कुछ लौह-अयस्क झील परिवहन द्वारा आयात, मिशीगन राज्य से चूना-पत्थर, स्वच्छ जल की प्राप्ति, बाजार की समीपता आदि भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्र शिकागो, गैरी, इण्डियाना हार्वर, मिलवाकी एवं सेण्ट-लुईस हैं। (3) झीलतटीय क्षेत्र – झीलों के तटीय भागों में सबसे बड़ी सुविधा लौह-अयस्क की प्राप्ति का होना है। इस क्षेत्र के इस्पात केन्द्र आयातित कोयले पर निर्भर करते हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्रों में बफैलो, क्लीवलैण्ड, डेट्रायट, डुलूथ, ईरी, टोलेडो एवं लॉरेन आदि प्रमुख हैं। डेट्रायट संयुक्त राज्य के दो बड़े केन्द्रों में से एक है। (4) मध्य अटलांटिक तटीय क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार न्यू इंग्लैण्ड राज्यों से वर्जीनिया राज्य तक विस्तृत है। बेथलेहम, स्पैरोजप्वाइण्ट, मोरिसविले मुकडेन, ईस्टर्न एवं फिलिप्सबर्ग प्रमुख इस्पात-निर्माण के केन्द्र हैं। इस क्षेत्र को सबसे बड़ी सुविधा विदेशों से लौह-अयस्क आयात करने की है, जो कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, पीरू, चिली, अल्जीरिया एवं दक्षिणी-अफ्रीकी देशों से आयात किया जाता है। इस क्षेत्र में स्थित स्पैरोजप्वाइण्ट विश्व का सबसे बड़ा इस्पात-निर्माण केन्द्र है। तटीय स्थिति होने के कारण इस क्षेत्र के भावी विकास की अधिक सम्भावनाएँ हैं। (5) दक्षिणी क्षेत्र – इस क्षेत्र में बर्मिंघम सबसे बड़ा एवं महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ पर कोयला, लौह-अयस्क एवं चूना-पत्थर स्थानीय रूप से उपलब्ध हैं। टेक्सास राज्य में हाउस्टन, फ्लोरेंस, शाण्यनुगा एवं डेंगरफील्ड अन्य मुख्य इस्पात केन्द्र हैं। इस क्षेत्र में कच्चे माल तथा स्थानीय बाजार की पर्याप्त सुविधाएँ हैं। (6) पश्चिमी क्षेत्र – संयुक्त राज्य के पश्चिम में प्रशान्त तट के सहारे-सहारे इस्पात केन्द्र विकसित हुए हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्र प्यूबलो, डेनेवर, प्रोवो, जेनेवा, टेकोमा, सेनफ्रांसिस्को, लॉस-एंजिल्स एवं फोटाना हैं। (ब) जापान का लोहा-इस्पात उद्योग विश्व के लोहा – इस्पात देशों में जापान की अब द्वितीय स्थान है, जिसने बिना लौह-अयस्क के अपने उत्पादन में वृद्धि कर ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस आदि देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। जापान में लौह-अयस्क एवं कोयला, दोनों ही कच्चे पदार्थों की कमी आरम्भ से ही रही है; अत: शक्ति के लिए जल-विद्युत का उपयोग किया जाता है। यहाँ पर कोकिंग कोयला संयुक्त सज्य अमेरिका, कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाता है। लौह-अयस्क भारत, मलेशिया, फिलीपीन्स, वेनेजुएला, पीरू तथा ब्राजील से आयात की जाती है तथा स्क्रैप संयुक्त राज्य से मँगाई जाती है। कच्चे माल को आयात करने की सुविधा के कारण जापान में इस्पात केन्द्रों की स्थापना सागरतटीय क्षेत्रों में की गयी है। जापान के लोहा-इस्पात उद्योग में निम्नलिखित प्रदेश प्रमुख स्थान रखते हैं – ⦁ मौजी प्रदेश – इस प्रदेश में जापान का तीन-चौथाई इस्पात का उत्पादन किया जाता है। आयातित कच्चे माल पर यहाँ इस्पात उद्योग का विकास किया गया है। उत्तरी क्यूशू में मौजी एक प्रमुख औद्योगिक प्रदेश है। यहाँ पर यावाता, तोबाता, मौजी, फुकुओका, कोकुरा, ओगुता, शिमोनोसेकी एवं नागासाकी प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र हैं। ⦁ कैमेशी प्रदेश – होशू द्वीप के पूर्वी भाग में इस्पात प्रदेश की स्थाफ्ना हुई है। इस प्रदेश को कुछ लौह-अयस्क स्थानीय रूप से कुंजी एवं सेण्डाई की खानों से प्राप्त हो जाती है। आन्तरिक सागर के पूर्वी सिरे पर कोबे एवं ओसाका इस्पात केन्द्र स्थित हैं। होंशू द्वीप के पूर्वी भाग में टोकियो एवं याकोहामा महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र हैं। अन्य केन्द्रों में हिरोहिता, चिबा, अमागासाकी, सकाई, वाकायामा, कावासाकी एवं मित्सुके प्रमुख हैं। ⦁ मुरारां प्रदेश – इस प्रदेश का विस्तार होकैडो द्वीप में है। यहाँ पर कुछ कच्चा माल स्थानीय रूप से उपलब्ध हो जाता है। कुछ लोहा स्थानीय रूप से मुरारां की खानों से तथा लौह-अयस्क इशीकारी की खानों से प्राप्त होती है। वैनिशी, सपारो, मुरारां एवं हैकोडेट प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र हैं। (स) जर्मनी का लोहा-इस्पात उद्योग विश्व में जर्मनी का लोहा-इस्पात उत्पादन में छठा स्थान है। इस देश में लोहा-इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख स्थान रखते हैं – (1) र प्रदेश – जर्मनी के लौह-इस्पात उद्योग का सबसे सघन संकेन्द्रण रूर क्षेत्र में हुआ है। रूर नदी-बेसिन के नाम पर इस प्रदेश का नामकरण हुआ है। यह नदी राइन नदी में आकर मिलती है। रूर क्षेत्र यूरोप महाद्वीप का सबसे बड़ा लौह-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है। इसे निम्नलिखिते भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं – ⦁ रूर बेसिन में सर्वोत्तम प्रकार के एन्थ्रासाइट एवं कोकिंग कोयले के भण्डार हैं। यहाँ एमेस्चेर घाटी में भी कोयला मिलता है। ⦁ लौह – अयस्क स्थानीय रूप से सीज घाटी, साल्जगिटर एवं दक्षिणी भाग में बवेरिया से प्राप्त हो जाती है। शेष अयस्क अन्य यूरोपीय देशों से आयात की जाती है। फ्रांस के लॉरेन प्रदेश, लक्जमबर्ग, स्वीडन,तथा स्पेन से उच्च-कोटि का कच्चा लोहा आयात किया जाता है। ⦁ चूना – पत्थर रूर की दक्षिणी पहाड़ियों से प्राप्त हो जाता है। ⦁ रूर, राईन, लिप्पे नदियाँ, एम्स-डोर्टमण्ड कैनाल एवं अन्य बहुत-सी नहरें इस क्षेत्र को स्वच्छ जल की आपूर्ति करती हैं। नदियाँ सस्ते जल-परिवहन की सुविधा भी प्रदान करती हैं। ⦁ जर्मनी में परिवहन साधनों-सड़कों एवं रेलमार्गों-का जाल-सा बिछा हुआ है। जल-यातायात की सुविधा इस क्षेत्र को आसानी से प्राप्त है। ⦁ इस प्रदेश में जलमार्गों द्वारा लौह-अयस्क कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, पीरू, गिनी एवं सियरालियोन से भी आयात की जाती है। (2) साइलेशिया प्रदेश – जर्मनी के पूर्व में इस क्षेत्र की स्थिति है। इस प्रदेश में कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यहाँ लौह-अयस्क विदेशों से भी आयात किया जाता है। प्रमुख केन्द्रों में लिपजग, चिमनीज एवं ड्रेस्डन मुख्य हैं। (3) दक्षिणी राइन प्रदेश – राइन प्रदेश में दोनों ही कच्चे माल-लौह-अयस्क एवं कोयला-विदेशों से आयात किये जाते हैं। यहाँ पर हल्के मशीनरी उपकरण एवं कृषि-यन्त्र बनाये जाते हैं। क्रेफील्ड, हनोवर, फ्रेंकफर्ट, ब्रीमेन, साल्जगिटर, स्टटगार्ट, शाफिन, लुडविग आदि महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र हैं। (द) चीनं का लोहा-इस्पात उद्योग चीन में सन् 1949 में साम्यवादी सरकार की स्थापना के बाद से निर्माण उद्योगों के लिए विकास के पर्याप्त प्रयास किये गये हैं। पिछले 40 वर्षों से चीन ने इस्पात-निर्माण में तीव्र प्रगति की है। सन् 1953 में चीन का इस्पात उत्पादन बहुत कम था, परन्तु सन् 1980 तक यह ब्रिटेन एवं जर्मनी की समता करने लगा था। वर्तमान समय में चीन का विश्व इस्पात उत्पादन में प्रथम स्थान है। चीन में लौह-इस्पात उद्योग के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं – ⦁ यहाँ उच्च-कोटि को कोकिंग कोयला मिलता है, जिसके विशाल भण्डार मंचूरिया, शेन्सी, शांसी, होनान एवं शाण्टंग प्रायद्वीप में स्थापित हैं। ⦁ चीन में लौह-अयस्क के अधिकांश भण्डार मंचूरिया में मिलते हैं, परन्तु शांसी, शाटुंग एवं यांगटिसीक्यांग की निम्न घाटी में भी लौह-अयस्क मिलती है।⦁ दक्षिणी चीन में लौह-मिश्र धातुएँ प्राप्त होती हैं। चीन में इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख हैं – ⦁ मंचूरिया क्षेत्र – चीन का यह प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ देश का लगभग 40% इस्पात तैयार किया जाता है। प्रमुख केन्द्र आनशॉन, फुशुन, पेन्चिहू एवं मुकडेन हैं। ⦁ यांगटिसीक्यांग घाटी क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार मध्य चीन में है। इस घाटी का प्रमुख इस्पात केन्द्र वुहान है। अन्य केन्द्रों में मानशॉन, हुआंगशिन, शंघाई, हैंकाऊ एवं तापेह प्रमुख हैं। ⦁ उत्तरी क्षेत्र – इसे शांसी क्षेत्र के नाम से भी पुकारा जाता है। पाओटोव प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र है। यांगचुआन, टिएंटसिन, अनशॉन, बीजिंग, सिंहचिंगशॉन, ताइयुआन अन्य प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं। ⦁ अन्य छिटपुट केन्द्र – चीन में इस्पात उत्पादन के अन्य छिटपुट केन्द्र केण्टन, चुंगकिंग, शंघाई, पेनकी, चिचिआंग, सिंगटाओ, हुआंगसी, चिनलिंग, चेन एवं होपे हैं। (य) ग्रेट ब्रिटेन का लोहा-इस्पात उद्योग लोहा-इस्पात उद्योग का सूत्रपात सबसे पहले अट्ठारहर्वी शताब्दी में ग्रेट ब्रिटेन में ही हुआ था। अब लोहा-इस्पात उद्योग में ग्रेट ब्रिटेन का विश्व में तेरहवाँ स्थान हो गया है। इस देश में कोयला पर्याप्त मात्रा में निकाला जाता है, परन्तु लौह-अयस्क का अभाव है, जिसकी पूर्ति अल्जीरिया, स्पेन, स्वीडन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से आयात कर की जाती है। यहाँ लोहा-इस्पात उद्योग के केन्द्र तटीय भागों में स्थापित किये गये हैं, जहाँ कोयले की खाने समीप हैं तथा लौह-अयस्क आयात करने की सुविधा रहती है। यह देश विश्व का 3 प्रतिशत लोहा एवं इस्पात तैयार करता है। यहाँ लोह्म-इस्पात के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं – (1) दक्षिणी वेल्स प्रदेश – यह ब्रिटेन का सबसे बड़ा लोहा-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है जहाँ देश का लगभग 25% इस्पात तैयार किया जाता है। यहाँ कोयला स्थानीय खानों से तथा लौह-अयस्क स्पेन व अल्जीरिया से आयात की जाती है। इस क्षेत्र में टिन-प्लेट, इस्पात की चादरें, रेल-इंजिन, पटरियाँ तथा जलयान बनाये जाते हैं। यहाँ के मुख्य लोहा-इस्पात केन्द्र टैलबोट, न्यूपोर्ट, वेल्स, स्वाँसी, कार्डिफ, बारो आदि हैं। (2) उत्तर-पूर्वी तटीय प्रदेश – यह ग्रेट ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख लोहा-इस्पात उत्पादक प्रदेश है। इस क्षेत्र को नार्थम्बरलैण्ड तथा डरहम क्षेत्रों से कोकिंग कोयला प्राप्त हो जाता है तथा स्थानीय क्लीवलैण्ड की खानों से लौह-अयस्क की प्राप्ति होती है। यहाँ लोहे के शहतीर, जलयान, गर्डर, पुल, पटरियाँ तथा छड़ें बनाई जाती हैं। इस प्रदेश के प्रधान केन्द्र न्यूकैसिल, सुन्दरलैण्ड, डार्लिंगटन, डरहम, हार्टलपुल, साउथशील्ड, स्टॉकटन तथा मिडिल्सबरो आदि हैं। (3) दक्षिणी यार्कशायर प्रदेश – इस क्षेत्र का लोहा-इस्पात के उत्पादन में ग्रेट ब्रिटेन में तीसरा स्थान है। यहाँ स्थानीय रूप से लौह-अयस्क कुछ मात्रा में प्राप्त होती है, परन्तु यह पर्याप्त नहीं है; अतः इस प्रदेश को लौह-अयस्क स्वीडन से आयात करनी पड़ती है। यहाँ शक्ति हेतु लकड़ी का कोयला प्रयोग में लाया जाता है तथा तीव्र प्रवाह वाली नदियों से जलशक्ति भी प्राप्त की जाती है। यह प्रदेश विश्व भर में लोहा-इस्पात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ देश का लगभग 12% इस्पात तैयार किया जाता है। इसके प्रधान केन्द्र लीड्स, चैस्टरफील्ड, डॉनकास्टर, शैफील्ड, नाटिंघम तथा राथरडम आदि हैं। (4) ब्लैक कण्ट्री प्रदेश – यह क्षेत्र स्टेफर्डशायर तथा उत्तरी वारविकशायर तक फैला हुआ है। यहाँ कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय है। इस प्रदेश में हल्की तथा मूल्यवान वस्तुएँ; जैसे—सुइयाँ, कीलें, जंजीरें, मशीनों के पुर्जे, सैन्य अस्त्र-शस्त्र, बन्दूकें, पिस्तौल आदि बनाई जाती हैं। इस क्षेत्र का प्रमुख केन्द्र बर्मिंघम है। अन्य केन्द्रों में डेडले, रेडिस, कवेण्ट्री आदि मुख्य हैं। (5) उत्तर-पश्चिमी तटीय प्रदेश – यह क्षेत्र ग्रेट ब्रिटेन के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। यहाँ लौह-अयस्क पर्याप्त मात्रा में निकाली जाती है। कोयले की आपूर्ति डरहम तथा यार्कशायर की खानों से मँगाकर की जाती है। इस क्षेत्र में रेल की पटरियाँ तथा जलयान बनाये जाते हैं। यहाँ के प्रमुख लोहा-इस्पात केन्द्र डाइडहैण्ड तथा बर्मिंघम हैं। (6) स्कॉटलैण्ड मध्य घाटी प्रदेश (क्लाइड नदी की घाटी) – यह प्रदेश स्कॉटलैण्ड में क्लाइड नदी की घाटी में फैला हुआ है। लौह-अयस्क यहाँ पर्याप्त मात्रा में निकाली जाती है, जब कि कोयला लेनार्क क्षेत्र से मँगाया जाता है। यहाँ जलयान, गर्डर विशेष रूप से बनाये जाते हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्र ग्लासगो, हैमिल्टन, मदरसविले, कोटब्रिज, कैरेन, जोन्सटाउन आदि हैं। लौह-इस्पात का विश्व-व्यापार इस्पात का अधिकांश व्यापार स्थानीय होता है। विश्व के सभी इस्पात उत्पादक देश इस्पात उत्पादन में वृद्धि हेतु प्रयासरत हैं। जापान तथा पश्चिमी यूरोपीय देशों से इस्पात निर्यात किया जाता है। प्रमुख आयातक एवं निर्यातक देश निम्नलिखित हैं – ⦁ इस्पात निर्यातक देश – रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, चेक और स्लोवाकिया मुख्य हैं। ⦁ इस्पात आयातक देश – अधिकांश इस्पात आयातक देश विकासशील हैं, जिनमें दक्षिणी एशियाई, अफ्रीकी एवं लैटिन अमेरिकी देश हैं। भारत इस्पात का आयात रूस, जापान, जर्मनी एवं ब्रिटेन से करता है। |
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चीनी उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करते हुए इसके विश्व-वितरण (प्रमुख क्षेत्रों) का वर्णन कीजिए।याविश्व में चीनी उद्योग के स्थानीयकरण के लिए उपयुक्त भौगोलिक कारकों का सोदाहरण वर्णन कीजिए।याचीनी उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों का विश्लेषण कीजिए। इसमें विश्व-वितरण एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» विश्व में चीनी मानव को शक्ति एवं ऊर्जा प्रदान करने वाला महत्त्वपूर्ण स्रोत है। वर्तमान समय में यह खाद्य-पदार्थों में आवश्यक हो गयी है। चीनी उद्योग उन्हीं देशों में पनप सका है जहाँ इसके लिए कच्चा माल–गन्ना अथवा चुकन्दर-पर्याप्त मात्रा में उगाया जाता है। उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में चीनी गन्ने से प्राप्त की जाती है, जब कि शीतोष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में चुकन्दर से चीनी का निर्माण किया जाता है। यह उद्योग पूर्णत: कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है। चीनी उद्योग के स्थानीयकरण के कारण Reasons for Localisation of Sugar Industry ⦁ कच्चे माल की उपलब्धि – चीनी उद्योग का विकास उन्हीं देशों में अधिक हुआ है जहाँ इसके लिए कच्चे माल के रूप में पर्याप्त गन्ना अथवा चुकन्दर का उत्पादन किया जाता है। भारत, क्यूबा, ब्राजील एवं फिलीपीन्स इसके प्रमुख उत्पादक देश हैं जो गन्ने से चीनी का उत्पादन करते हैं। ⦁ सस्ते श्रमिकों की प्राप्ति – चीनी उद्योग के लिए पर्याप्त संख्या में सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। अधिकांश गन्ना उत्पादक देशों में सघन जनसंख्या निवास करती है; अत: पर्याप्त एवं कुशल श्रमिक सुगमता से उपलब्ध हो जाते हैं। ⦁ परिवहन के साधनों का विस्तार – इस उद्योग के लिए रेल परिवहन उपयुक्त एवं सस्ता पड़ता है। सड़क परिवहन भी आवश्यक है। इसी कारण गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में ही अधिकांश गन्ना-मिलें लगाई गयी हैं। ⦁ शक्ति के संसाधन – चीनी उद्योग का विकास उन्हीं क्षेत्रों में होता है, जहाँ पर इस उद्योग के लिए पर्याप्त शक्ति के स्रोत (जैसे-कोयला, जल-विद्युत शक्ति, लकड़ी आदि) उपलब्ध होते हैं। ⦁ बाजार की समीपता – जिन प्रदेशों में सघन जनसंख्या निवास करती है, वहीं इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। अन्य देशों की माँग भी इस उद्योग को प्रभावित करती है। ⦁ सहायक उद्योगों का विकास – चीनी उद्योग के साथ-साथ सहायक उद्योग (जैसे- गत्ता, कृत्रिम रबड़, एल्कोहॉल, कागज आदि) का विकास किया जाना नितान्त आवश्यक है। इससे चीनी उद्योग के व्यर्थ पदार्थों का उपयोग इन उद्योगों में ही हो जाता है। इससे चीनी का उत्पादन व्यय भी कम हो जाता है। ⦁ सरकारी प्रोत्साहन – इस उद्योग के लिए सरकारी प्रोत्साहन, संरक्षण, पर्याप्त पूँजी व्यवस्था, वित्तीय सहायता, निर्यात की सुविधाएँ भी मिलना अति आवश्यक हैं। ⦁ मशीनों तथा उपकरणों की आवश्यकता – चीनी उद्योग के लिए पर्याप्त मात्रा में मशीनों तथा उपकरणों की आवश्यकता होती है। चीनी बनाने का कार्य भारी मशीनों द्वारा ही सम्पन्न किया जाता है। जिन देशों में मशीनें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाती हैं, वहाँ चीनी उद्योग सुविधापूर्वक स्थापित हो। जाता है। ⦁ पर्याप्त पूँजी – चीनी उद्योग स्थापित करने में पर्याप्त पूँजी की व्यवस्था करनी पड़ती है। पूँजी, पूँजीपतियों द्वारा लगाई जाती है अथवा वित्तीय संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। जिन राष्ट्रों में पूँजी पर्याप्त मात्रा में सुलभ हो जाती है, वहाँ चीनी उद्योग का स्थानीयकरण हो जाता है। ⦁ अन्य सुविधाएँ – रासायनिक पदार्थों की उपलब्धता, ईंधन, स्वच्छ जल, परिवहन तन्त्र की सुव्यवस्था आदि अन्य कारक भी चीनी उद्योग के स्थानीयकरण में पर्याप्त सहयोग प्रदान करते हैं विश्व में गन्ने की चीनी के उत्पादक देश विश्व में चीनी का उत्पादन व्यावसायिक दृष्टिकोण से गन्ने एवं चुकन्दर से किया जाता है। विगत वर्षों में चीनी के उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है। विश्व में गन्ने द्वारा चीनी उत्पादन करने वाले देशों में ब्राजील, भारत, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, क्यूबा, थाईलैण्ड, मैक्सिको आदि प्रमुख हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है – (1) ब्राजील – गन्ने द्वारा चीनी उत्पादन में ब्राजील का विश्व में प्रथम स्थान है, जहाँ विश्व का 24% गन्ना पैदा होता है। उत्तर-पूर्वी समुद्रतटीय प्रदेश एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र चीनी के प्रमुख उत्पादक हैं। इस देश की जलवायु गन्ना-उत्पादन के लिए ही अनुकूल है। यहाँ विश्व की 15.2% चीनी का उत्पादन होता है। (2) भारत – भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में द्वितीय स्थान है। यहाँ पर गन्ने से गुड़ भी बड़ी मात्रा में बनाया जाता है। चीनी उत्पादक प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु हैं। भारत विश्व की लगभग 14% चीनी पैदा करता है। (3) क्यूबा – चीनी के उत्पादन में क्यूबा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहाँ विश्व का 6.8% से अधिक गन्ने का उत्पादन किया जाता है। गन्ने का उत्पादन बड़े-बड़े फार्मों पर यान्त्रिक ढंग से किया जाता है; अत: चीनी मिलें कृषि-फार्मों के समीप ही स्थापित की गयी हैं। (4) अन्य उत्पादक देश – चीनी के अन्य उत्पादक देशों में ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, चीन, पाकिस्तान, कोलम्बिया, फिलीपीन्स, दक्षिणी अफ्रीका, अर्जेण्टीना, थाईलैण्ड, हवाई द्वीप, पीरू, मॉरीशस, इण्डोनेशिया एवं वेनेजुएला प्रमुख हैं। विश्व में चुकन्दर की चीनी के उत्पादक देश विश्व में चीनी उत्पादन का दूसरा महत्त्वपूर्ण स्रोत चुकन्दर है। उन्नीसवीं शताब्दी में जब यूरोपीय देशों के सामने चीनी की समस्या आयी तो उन्हें चुकन्दर का आश्रय लेना पड़ा, क्योंकि इन देशों में गन्ना उत्पादन के लिए भौगोलिक दशाएँ अनुकूल नहीं थीं। विश्व में चीनी की कुल मात्रा के उत्पादन के दृष्टिकोण से चुकन्दर से निर्मित चीनी का स्थान लगभग आधा है। चुकन्दर की चीनी के उत्पादन में ‘निम्नलिखित देश प्रमुख स्थान रखते हैं – ⦁ रूस – संयुक्त देशों का राष्ट्रकुल विश्व की सर्वाधिक चुकन्दर उत्पन्न करता है तथा यहाँ इससे विश्व की 30% चीनी उत्पन्न की जाती है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र यूक्रेन, पश्चिमी साइबेरिया, कजाकिस्तान खिरगीज एंवं ट्रांस काकेशिया हैं। ⦁ संयुक्त राज्य अमेरिका – चुकन्दर से बनी चीनी उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका का विश्व में दूसरी स्थान है। यहाँ चुकन्दर एवं गन्ना दोनों ही उत्पन्न किये जाते हैं। इसके उपरान्त भी इसे विदेशों से चीनी आयात करनी पड़ती है। चुकन्दर की चीनी के उत्पादक क्षेत्रों में कोलोरेडो; पश्चिम में कन्सास से उत्तर में कनाडा की सीमा तक तथा पश्चिम में वाशिंगटन राज्य मुख्य हैं। ⦁ चीन – चीन में चुकन्दर से चीनी के उत्पादक क्षेत्रों में शांसी-शेन्सी का मैदान, जेचवान बेसिन, ह्वांग्हो, यांगटिसीक्यांग एवं सीक्यांग नदियों के बेसिन प्रमुख हैं। चीन को चुकन्दर क़ी चीनी उत्पादन में तीसरा स्थान है। ⦁ जर्मनी – चुकन्दर से निर्मित चीनी उत्पादन में जर्मनी का विश्व में चौथा स्थान है। प्रमुख रूप से इसका उत्पादन पश्चिमी जर्मनी में किया जाता है। ⦁ अन्य उत्पादक देश – चुकन्दर निर्मित चीनी के अन्य उत्पादक देशों में फ्रांस, इटली. पोलैण्ड, स्पेन, नीदरलैण्डे, रोमानिया, यूगोस्लाविया, ग्रेट ब्रिटेन, हंगरी आदि हैं। चीनी का विश्व व्यापार गन्ने से निर्मित चीनी का विश्व व्यापार लगभग 300 लाख मी टन वार्षिक होता है। विश्व की कुल चीनी का 50% विकासशील देश, 30% विकसित देश तथा 20% भाग कम्युनिस्ट देश उत्पादन करते हैं, जब कि निर्यात मात्रा में 75% भाग विकासशील देशों द्वारा किया जाता है। प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व चुकन्दर से निर्मित चीनी के निर्यातक देश जर्मनी, हंगरी एवं नीदरलैण्ड थे तथा आयातक देश ग्रेट ब्रिटेन था, परन्तु गन्ने की चीनी के विश्व व्यापार में आ जाने के कारण अब चुकन्दर की चीनी का व्यापार कम हो गया है, क्योंकि गन्ने की चीनी इससे सस्ती पड़ती है। वर्तमान समय में अधिकांश चुकन्दर की चीनी उत्पादक देश अपने उपभोग के लिए ही चीनी का उत्पादन करते हैं, परन्तु अधिकांश यूरोपीय देश एवं संयुक्त राज्य अमेरिका गन्ने द्वारा निर्मित चीनी का आयात करते हैं। चेक एवं स्लोवाकिया, हंगरी, पोलैण्ड एवं नीदरलैण्ड चुकन्दर से बनी चीनी का निर्यात करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं ब्रिटेन इसके प्रमुख आयातक देश हैं। |
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Important Class 7 Science MCQ Questions of Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate with Answers? |
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Answer» Students can practice the Class 7 Science MCQ Questions of Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate with Answers is available here. Revise all the concepts easily by taking help from the MCQ Questions for Class 7 Science with Answers are prepared based on the latest exam pattern suggested by CBSE. Students can refer to these Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Class 7 MCQ Questions with Answers and assess their preparation level. These MCQ Questions on Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Class 7 with answers pave for a quick revision of the Chapter thereby helping you to enhance subject knowledge. Just Know your preparation level by practicing MCQ Questions for Class 7 with Answers on daily basis. It also helps students to the understanding and concept of the chapter very well. Practice MCQ Questions for Class 7 Science 1. Which among the following is generally not predicted in a daily weather report? (a) Temperature 2. Weather changes (a) week after week 3. Rainfall is measured by (a) rain gauge 4. Which of the following statement is incorrect for penguins? (a) They huddle together 5. Choose the odd one from the following options: (a) Thick layer of fat under the skin 6. Which of the following is not an adaptive feature in polar bear? (a) White fur 7. Which is the characteristic feature of tropical rainforests? (a) Hot and humid climate 8. Which of the following is the climate found in Kerala? (a) Very hot and wet 9. An organism’s body is streamlined, the habitat of organism should be (a) Mountain 10. The sun rises late and sets early during: (a) summer season 11.The source of weather in first place is: (a) due to sun 12. Nights in deserts are much cooler because (a) humidity becomes high 13. Fish uses which organ to breath in water? (a) Skin 14. The annual record of long-term average temperature and rainfall at a particular place is known as (a) climate 15. Which of the following organism is the slowest mover? (a) Rabbit 16. To reduce loss of water in desert areas the leaves of cactus are modified into _. (a) branches 17. The coldest region on earth is the: (a) polar region 18. The weather reports are prepared by the: (a) meteorological department 19. A long winter sleep of animals is called (a) Cold sleep 20. The use of any combination of materials, coloration for riding of an animals is called (a) Camouflage adaptation Answer 1. Answer: (b) Pressure Explanation: Pressure is not the part of daily weather report. Pressure of air can not be written because there should be sudden rise in pressure. 2. Answer: (d) in any of the above time period Explanation:change within a short period of time, week after week, day after day. 3. Answer: (a) rain gauge Explanation: The standard instrument for the measurement of rainfall is the 203mm (8 inch) rain gauge. This is essentially a circular funnel with a diameter of 203mm which collects the rain into a graduated and calibrated cylinder. The measuring cylinder can record up to 25mm of precipitation. 4. Answer: (b) They cannot swim Explanation: Penguins are white and blend in well with their surroundings. To shield itself from the cold, it has a thick skin and a lot of fat. Penguins huddled close together in order to stay warm. 5. Answer: (c) Long grasping tail Explanation: All the given options except 'Long grasping tail' are an adaption of polar region animals. The adaption 'Long grasping tail' is fund in tropical region animals. 6. Answer: (d) Long tail Explanation: Long tail is not an adaptive feature in polar bear. Polar bears can grow up to 3 meters in length. Polar bears do have tails, and like both the black bear and the brown bear, the tail is short. 7. Answer: (d) All of these Explanation:Tropical forest has a hot and humid climate, an enormous number and variety of species, and competition for food and agriculture. 8. Answer: (a) Very hot and wet Explanation: Kerala's climate is very hot and wet as it lies in the tropical region. 9. Answer: (b) Water Explanation: Aquatic animals have streamlined and slipper body as it gets easier for them to swim through the water currents without damaging their bodies. 10. Answer: (b) winter season Explanation: In winter, the Northern Hemisphere points away from the sun, resulting in fewer hours of sunshine and shorter days. 11. Answer: (a) due to sun Explanation:The sun is a huge sphere of hot gases at a very high temperature. The distance of the sun from us is very large. 12. Answer: (b) sand cools down faster Explanation: Nights are cooler in the deserts than in the plains because Sand radiates heat more quickly than the earth. Because deserts have such little water vapor in the air, it makes it harder to trap heat or cold in a desert. 13. Answer: (d) Gills Explanation: Fish gills are organs that allow fish to breathe underwater. Most fish exchange gases like oxygen and carbon dioxide using gills that are protected under gill covers (operculum) on both sides of the pharynx (throat). 14. Answer: (b) climate char Explanation: Climate is the weather pattern of a particular place over a long period. It depends on the long-term patterns in a place like rainfall, temperature, humidity, wind, etc. A climate chart is the annual record of the long-term average temperature and rainfall at a particular place. 15. Answer: (d) sloth Explanation: The sloth is the slowest mammal on earth. Land tortoises move at a speed of less than one mile per hour. It would take a snail 5 days and 12 hours to move a mile. 16. Answer: (c) spines Explanation: The plants which grow and survive in the desert conditions have certain modified adaptations. The cactus plants grow in the desert area. In order to prevent the loss of water in these arid conditions, the leaves of the plants have been modified into sharp pointed thin structures known as spines. These spines reduce the surface area for preventing loss of water. 17. Answer: (a) polar region Explanation:Polar region is the coldest region on the earth. 18. Answer: (a) meteorological department Explanation: It is the principal agency responsible for meteorological observations, weather forecasting and seismology. 19. Answer: (c) Hibernation Explanation: Hibernation is a state of minimal activity and metabolic depression. Hibernation is a seasonal heterothermy characterized by low body-temperature, slow breathing and heart-rate, and low metabolic rate. 20. Answer: (b) Behavioral adaptation Explanation: Behavioral adaptations are the things organisms do to survive. For example, bird calls and migration are behavioral adaptations. Click here for Practice MCQ Questions for Weather, Climate and Adaptations of Animals to Climate Class 7 |
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कागज-लुग्दी उत्पादन में प्रथम स्थान है –(क) जापान का(ख) नार्वे का(ग) कनाडा का(घ) फ्रांस का |
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Answer» (ग) कनाडा का। |
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कनाडा में कागज उद्योग क्यों विकसित है? |
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Answer» कागज उद्योग की स्थापना के लिए कोमल लकड़ी के वनों का होना आवश्यक है जिनसे लुग्दी बनायी जाती है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ जल, जल-विद्युत शक्ति, रासायनिक पदार्थों की प्राप्ति, परिवहन के साधनों, कुशल श्रमिकों तथा बाजार का होना आवश्यक है। ये सभी आवश्यक भौगोलिक सुविधाएँ कनाडा में उपलब्ध हैं। कनाडा में कोणधारीवृक्ष बहुतायत में मिलते हैं। इनसे यान्त्रिक लुग्दी तैयार की जाती है। यहाँ महान् झीलों का स्वच्छ जल भी उपलब्ध है। नदियों पर बाँध बनाकंरपर्याप्त जल- विद्युत शक्ति भी उत्पन्न की जाती है। इसीलिए ब्रिटिश कोलम्बिया, कनाडियन शील्ड तथा न्यूफाउण्डलैण्ड में कागज उद्योग विकसित हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्रिटेन तथा पाकिस्तान कागजं के प्रमुख ग्राहक हैं। |
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जापान में सूती वस्त्रोद्योग स्थानीयकरण के दो प्रमुख कारण बताइए। |
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Answer» जापान में सूती वस्त्रोद्योग स्थानीयकरण के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं – ⦁ कच्चे माल की सुलभता – कपास के रूप में कच्चा माल चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, मिस्र, सूडान, मैक्सिको आदि देशों से आसानी से प्राप्त हो जाता है। ⦁ बड़ी संख्या में सस्ते श्रमिकों की प्राप्ति – इन उद्योगों में कार्य करने के लिए जापान में बड़ी संख्या में सस्ते श्रमिक, जिनमें स्त्रियों व बच्चों की संख्या अधिक रहती है, आसानी से मिल जाते हैं। जापानी श्रमिक दो पारियों में कार्य करते हैं। |
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कागज उद्योग में महत्त्वपूर्ण देशों के नाम बताइए। |
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Answer» कागज उद्योग में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, जापान, कनाडा, जर्मनी, फिनलैण्डे, स्वीडन, फ्रांस, इटली, ब्रिटेन तथा कोरिया महत्त्वपूर्ण देश हैं। |
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कागज का सर्वप्रथम आविष्कार कहाँ हुआ? |
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Answer» कागज का सर्वप्रथम आविष्कार 105 ई० में चीन के साइलुन नामक शिल्पी ने फटे-पुराने चीथड़ों से किया। |
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ऊनी वस्त्रोद्योग में अग्रणी उत्पादक देशों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» ऊनी वस्त्रोद्योग में चीन, इटली, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, यूक्रेन आदि अग्रणी देश हैं। |
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जापान के किन क्षेत्रों में लोहा-इस्पात उद्योग विकसित है? याजापान के लोहा है। इस्पात उद्योग के दो केन्द्रों के नाम लिखिए। |
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Answer» जापान में तीन प्रमुख क्षेत्रों में लोहा-इस्पात उद्योग विकसित हैं- ⦁ क्यूशू द्वीप पर मौजी क्षेत्र |
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जर्मनी में लोहा-इस्पात उद्योग किस क्षेत्र में सर्वाधिक विकसित है? |
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Answer» जर्मनी में लोहा-इस्पात उद्योग ‘रूर बेसिन’ में सर्वाधिक विकसित है। |
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चीन में लोहा-इस्पात उद्योग सर्वाधिक कहाँ विकसित है? |
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Answer» चीन में लोहा-इस्पात उद्योग मंचूरिया क्षेत्र में सर्वाधिक विकसित है। |
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ग्रेट ब्रिटेन में ऊनी वस्त्रोद्योग के स्थानीयकरण के कारणों की समीक्षा कीजिए तथा इस.उद्योग के केन्द्रों का विवरण दीजिए। |
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Answer» ग्रेट ब्रिटेन का ऊनी वस्त्र उद्योग ग्रेट ब्रिटेन:ऊनी वस्त्र उत्पादन में विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहाँ के बने ऊनी वस्त्र विश्व के सभी देशों में पसन्द किये जाते हैं। ऊनी वस्त्रों के उत्पादन में ग्रेट ब्रिटेन का विश्व में तीसरा स्थान है। ब्रिटेन के औद्योगीकरण के साथ-साथ 17वीं शताब्दी के प्रारम्भ में इस उद्योग को भी श्रीगणेश हो गया था, परन्तु वास्तविक विकास द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुआ। यहाँ ऊनी वस्त्रं उद्योग घरेलू एवं कुटीर दोनों ही रूपों में किया जाता है। विश्व के अन्य देशों में ऊनी वस्त्रों का उत्पादन बढ़ जाने से इस उद्योग का ब्रिटेन में ह्रास हुआ है। ब्रिटेन में इस उद्योग को निम्नलिखित भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं – ⦁ कच्चा माल – ग्रेट ब्रिटेन में पिनाईन पर्वत के समीपवर्ती भागों में चरागाहों के विकास के कारण भेड़पालन व्यवसाय अधिक किया जाता है, जिनसे पर्याप्त ऊन प्राप्त हो जाती है। कुछ कच्चा माल ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड एवं अर्जेण्टाइना आदि देशों से भी आयात किया जाता है। ⦁ समशीतोष्ण आर्द्र जलवायु – ब्रिटेन की जलवायु शीतल एवं आर्द्रता-प्रधान है। यह जलवायु इस उद्योग के लिए अधिक उपयुक्त है। ⦁ कुशल श्रमिकों की प्राप्ति – ऊनी वस्त्र उद्योग ब्रिटेन का अति प्राचीन व्यवसाय है; अतः यहाँ कुशल एवं सस्ते श्रमिक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हो जाते हैं। सूती वस्त्र उद्योग भी इस उद्योग को श्रम की पूर्ति कराने में सहायक है। ⦁ शक्ति-संसाधनों की उपलब्धि – ब्रिटेन में इस उद्योग के लिए शक्ति संसाधनों में पर्याप्त जल-विद्युत शक्ति एवं कोयला उपलब्ध है। यार्कशायर क्षेत्र में पर्याप्त कोयला उपलब्ध हो जाता है, जहाँ ऊनी वस्त्र उद्योग के महत्त्वपूर्ण केन्द्र विकसित हुए हैं। ⦁ स्वच्छ जल की आपूर्ति – ब्रिटेन में पिनाइन पर्वत-श्रेणी से प्रवाहित होने वाली नदियों काल्डेर, कोलने एवं आयर से चूनारहित स्वच्छ जल प्राप्त हो जाता है, जिससे ऊन धोने में सुविधा रहती है। ⦁ मशीन एवं उपकरणों की सुविधा – ब्रिटेन में लोहा-इस्पात पूर्व से ही प्रगति के पथ पर अग्रसर है; अतः नवीन मशीनें एवं उपकरण सुविधा से उपलब्ध हो जाते हैं। लीड्स में इस उद्योग से सम्बन्धित मशीनों एवं उपकरणों का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन किया जाता है। ⦁ पर्याप्त पूँजी की सुलभता – ब्रिटेन के पूंजीपतियों ने ऊनी वस्त्र उद्योग की स्थापना में बहुत सहयोग दिया है, क्योंकि सूती वस्त्र उद्योग का उन्हें पर्याप्त अनुभव है। इसके अतिरिक्त सरकारी प्रोत्साहन भी महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। ⦁ परिवहन के विकसित साधन – ब्रिटेन की द्वीपीय स्थिति होने के कारण तटीय भागों में प्राकृतिक पत्तनों का पर्याप्त विकास हुआ है, जिससे ऊनी वस्त्रों को निर्यात करने की जल-यातायात की पर्याप्त सुविधा रहती है। देश के भीतरी भागों में रेल एवं सड़क परिवहन का पर्याप्त विकास किया गया है। ⦁ पर्याप्त विदेशी माँग – यूरोप महाद्वीप के शीत-प्रधान देशों में ग्रेट ब्रिटेन में निर्मित ऊनी वस्त्रों की क्र्याप्त माँग रहती है। निकटवर्ती भागों में खपत क्षेत्र स्थित होने के कारण ब्रिटेन का यह उद्योग अधिक विकसित हुआ है। ग्रेट ब्रिटेन में ऊनी वस्त्र उद्योग के क्षेत्र (केन्द्र) ऊनी स्त्रों के उत्पादन की दृष्टि से ग्रेट ब्रिटेन का विश्व में तीसरा स्थान है। पिनाइन पर्वत श्रेणी के पूर्वी क्षेत्रों में नदियों की घाटियों में इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष 200 लाख वर्ग मीटर ऊनी वस्त्रों का उत्पादन किया जाता है। निम्नलिखित क्षेत्र ऊनी वस्त्रों के उत्पादन में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं – (1) वेस्ट राइडिंग क्षेत्र – इस क्षेत्र में ग्रेट ब्रिटेन का तीन-चौथाई से भी अधिक ऊनी व्रस्त्रों का उत्पादन किया जाता है। यार्कशायर प्रदेश में इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। यहाँ कोलने एवं आयर नदियों की घाटियों में ऊनी वस्त्र उत्पादक केन्द्र विकसित हुए हैं। ब्रेडफोर्ड, हैलीफैक्स, बेकफील्ड, हङ्सफील्ड, ड्यूसबरी एवं बाटले प्रमुख ऊनी वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। (2) स्कॉटलैण्ड ट्वीड घाटी क्षेत्र – ग्रेट ब्रिटेन में यह दूसरा महत्त्वपूर्ण क्षेत्र स्कॉटलैण्ड में ट्वीड नदी की मध्य घाटी में विस्तृत है। यहाँ भेड़ अधिक पाली जाती हैं; अत: पर्याप्त कच्ची ऊन उपलब्ध हो जाती है। कोयला एवं स्वच्छ जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाता है। इस क्षेत्र में उत्तम किस्म का ट्वीड बनाया जाता है। वारविक, सेलकिर्क एवं गेलेशील्ड प्रमुख ऊनी वस्त्र उत्पादकः केन्द्र हैं। (3) कॉट्सबोल्ड क्षेत्र – इंग्लैण्ड के दक्षिणी-पश्चिमी भाग में एवन नदी की घाटी में कॉट्सबोल्ड तीसरा महत्त्वपूर्ण ऊनी वस्त्र उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ सर्ज एवं कॉट्सवूल का उत्तम कोटि का ऊनी कपड़ा तैयार किया जाता है। स्ट्राउड, ट्राउब्रिज, ब्रेडफोर्ड-ऑन-एवन एवं फ्रोम प्रमुख ऊनी वस्त्र उत्पादक केन्द्र हैं। स्ट्राउड सर्ज बनाने के लिए विश्वविख्यात केन्द्र है। |
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जापान में लौह-इस्पात केन्द्रों की स्थापना सागरतटीय क्षेत्रों में क्यों की गयी है? |
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Answer» जापान को लगभग पूरा लौह-अयस्क आयात करना पड़ता है। कच्चे माल को आयात करने की सुविधा के कारण जापान में लौह-इस्पात केन्द्रों की स्थापना सागरतटीय क्षेत्रों में की गयी है। |
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संयुक्त राज्य अमेरिका के किस क्षेत्र में सर्वाधिक लोहा-इस्पात तैयार किया जाता है? |
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Answer» संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो-गैरी क्षेत्र में सर्वाधिक (देश का 35%) लोहा-इस्पात तैयार किया जाता है। |
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ग्रेट ब्रिटेन का कौन-सा नगर सूती वस्त्र उद्योग के लिए विख्यात है? |
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Answer» ग्रेट ब्रिटेन में मानचेस्टर नगर सूती वस्त्र उद्योग के लिए विख्यात है। |
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संयुक्त राज्य अमेरिका के किसी एक सूती वस्त्र उत्पादन क्षेत्र का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» न्यू इंग्लैण्ड क्षेत्र संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादन क्षेत्र है। इस क्षेत्र में रोड्स द्वीप, कनेक्टीकट, मैसाचुसेट्स एवं हैम्पशायर केन्द्र हैं। |
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जापान में लौह-इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक महत्त्वपूर्ण नहीं है?(क) पूर्वारम्भ(ख) राजकीय प्रोत्साहन(ग) स्थानीय खनिज सम्पदा(घ) सामुद्रिक स्थिति |
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Answer» (ग) स्थानीय खनिज सम्पदाँ। |
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चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक देश है –(क) भारत(ख) क्यूबा(ग) ब्राजील(घ) संयुक्त राज्य अमेरिका |
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Answer» सही विकल्प है (ग) ब्राजील। |
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सूती वस्त्र उद्योग के लिए उपयोगी है –(क) शुष्क जलवायु(ख) नर्म जलवायु(ग) (के) और (ख) दोनों(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» (ख) नम जलवायु। |
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जापान सूती वस्त्र उद्योग के लिए कपास कहाँ से आयात करता है? |
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Answer» जापान सूती वस्त्र उद्योग के लिए कपास प्राय: अमेरिका, पाकिस्तान, चीन, पूर्वी अफ्रीका व भारत से आयात करता है। |
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संयुक्त राज्य अमेरिका के सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक महत्त्वपूर्ण नहीं है?(क) यू० एस० ए० की कमास मेखला(ख) अफ्रीका से गुलामों की प्राप्ति(ग) चीन की विशाल जनसंख्या(घ) सस्ती जल-शक्ति की आपूर्ति |
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Answer» (क) यू० एस० ए० की कपास मेखला। |
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जापान के सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक महत्त्वपूर्ण नहीं है?(क) अनुकूलं जलवायु(ख) शक्ति संसाधन(ग) कच्चे माल की उपलब्धता(घ) उच्च प्रौद्योगिकी |
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Answer» (ग) कच्चे माल की उपलब्धता। |
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विश्व में सूती वस्त्र उद्योग के चार अग्रणी देशों का नामोल्लेख कीजिए। |
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Answer» ⦁ चीन |
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सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योग परस्पर किस प्रकार सहयोगी हैं ? |
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Answer» भारत जैसे मिश्रित अर्थव्यवस्था वाले देश में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र का सह-अस्तित्व है। भारतीय अर्थव्यवस्था में यद्यपि सार्वजनिक एवं निजी उद्योगों के लिए अलग-अलग कार्य-क्षेत्र निर्धारित हैं, तथापि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र आपस में एक-दूसरे के लिए पूरक एवं सहयोगी भी हैं। सरकार अपने अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से निजी क्षेत्र के उद्योगों को विभिन्न सुविधाएँ प्रदान करती है, जिससे इस क्षेत्र का तेजी से विकास हो सके। रेल, सड़क परिवहन, बन्दरगाह, विद्युत व्यवस्था, सिंचाई व्यवस्था आदि अनेक सुविधाएँ देकर सरकार निजी क्षेत्र के उद्योगों के विकास में सहायता प्रदान करती है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र अपनी उत्पादकता द्वारा देश में पूँजी-निर्माण की गति को बढ़ाने में सहायता देते हैं, जिससे सरकार नये-नये सार्वजनिक उद्योगों की स्थापना एवं विकास करने में सफल होती है। |
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सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के उद्योगों में अन्तर स्पष्ट कीजिए तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के चार दोषों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों में मूल अन्तर स्वामित्व का होता है। वे उपक्रम जिन पर सरकारी विभागों अथवा केन्द्र या राज्यों द्वारा स्थापित संस्थाओं का स्वामित्व होता है, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम कहलाते हैं; जैसे-भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लि०, भिलाई इस्पात लि० आदि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम हैं। इसके विपरीत वे उद्योग जिनका स्वामित्व कुछ व्यक्तियों या कम्पनियों के पास होता है, निजी क्षेत्र के उद्यम कहलाते हैं; जैसे-टाटा आयरन एण्ड स्टील कम्पनी। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के दोष यद्यपि सार्वजनिक क्षेत्र के अनेक उद्यमों की प्रगति एवं कार्य सन्तोषजनक है; जैसे – भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग, भारतीय जीवन बीमा निगम आदि; तथापि इस क्षेत्र के अधिकांश उद्यमों का कार्य सन्तोषजनक नहीं है। वे अनेक दोषों से ग्रस्त हैं, जिनमें से चार का विवरण निम्नलिखित हैं – 1. भ्रष्टाचार – सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के उच्च अधिकारी अपने कर्तव्य को सार्वजनिक हित में न लेकर, एक स्व-हितकारी व्यवसाय के रूप में लेते हैं। वे व्यक्तिगत आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हैं तथा अपने सार्वजनिक या जन-सामान्य के हितों की अवहेलना करते हैं। इसका सीधा असर उस उद्यम की वित्त-व्यवस्था पर पड़ता है, जो निरन्तर घाटे की ओर बढ़ती चली जाती है। 2. दक्षता एवं कार्यकुशलता का अभाव – सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में शीर्ष स्थान पर बहुधा प्रशासनिक अधिकारी बैठे होते हैं, जिनको उस उद्यम का तकनीकी ज्ञान नहीं होता। परिणामस्वरूप, वे उद्यमकर्मियों का सही मार्गदर्शन करने में असमर्थ होते हैं। यह अभाव भी इन उद्यमों में गिरती कार्यकुशलता एवं दक्षता के लिए जिम्मेदार है। 3. सुधार व अनुसन्धानिक दृष्टि का अभाव – सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सुधार व अनुसन्धान कार्यों के लिए एक लम्बी व उबाऊ प्रक्रिया अपनायी जाती है। लालफीताशाही, जिम्मेदारी की कमी, व्यक्तिगत आर्थिक हितों के लिए प्राथमिकता तथा दकियानूसी सोच के कारण इन उद्यमों में सुधार कछुवा- गति से होते हैं। 4. प्रतिस्पर्धात्मक सोच का अभाव – आज का युग कड़ी प्रतिस्पर्धा का युग है। निजी क्षेत्र इस प्रतिस्पर्धा में जी-जान से लगते हैं। विभिन्न माध्यमों से वे विज्ञापनों का सहारा लेकर अपने उत्पादनों की खपत बढ़ाने तथा उसका बाजार हथियाने में लगे हैं। इसके विपरीत, सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश उद्यम इसे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गये हैं। नियोजक के हितों की अपेक्षा निजी आर्थिक हितों को प्राथमिकता देना भी प्रतिस्पर्धात्मक सोच को आगे नहीं बढ़ने देता। |
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निम्नलिखित में से भारत का सबसे बड़ा प्रतिष्ठान कौन-सा है?(क) वायु परिवहन(ख) सड़क परिवहन(ग) रेल परिवहन(घ) जल परिवहन |
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Answer» सही विकल्प है (ग) रेल परिवहन |
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ऐसे सभी उपक्रम जिन पर सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था और निजी उद्यम का संयुक्त स्वामित्व होता है, कहलाते हैं(क) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम(ख) निजी क्षेत्र के उपक्रम(ग) संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ग) संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम |
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निम्नलिखित में से कौन-सा इस्पात कारखाना सार्वजनिक क्षेत्र से सम्बन्धित है?(क) जमशेदपुर(ख) बर्नपुर(ग) दुर्गापुर(घ) भद्रावती |
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Answer» सही विकल्प है (ग) दुर्गापुर |
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टाटा आयरन व स्टील कम्पनी (इस्पात कारखाना) किस क्षेत्र में है?(क) निजी(ख) संयुक्त(ग) सार्वजनिक(घ) स्पष्ट नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) निजी |
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Identify the appropriate term from the given options and rewrite it against the given statement.Unity, Language, Race, Regionalism, Class, Gender fluidity, North East, Jajmani, Sexuality, Culture, Egalitarian society, Secularism, Kannada, Northeast, Ethnocentrism, Totalitarianism(i) The exchange of goods and services between various jatis.(ii) People belonging to different religious feel that their religion is superior.(iii) Respect and tolerance for people of all faith.(iv) Loyalty to one’s own state or region before one’s nation.(v) It is based on the principle of cultural(vi) It is caused by Religious fundamentalism.(vii) Malnutrition deaths of infants. |
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Answer» (i) Jajmani (ii) Ethnocentrism (iii) Secularism (iv) Regionalism (v) National Anthem (vii) Terrorism (vii) Below Poverty Line |
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लौहयुक्त खनिज से आपका क्या आशय है? |
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Answer» जिन खनिजों में लौह अंश पाया जाता है, उन्हें ‘लौहयुक्त धात्विक खनिज’ कहा जाता है; जैसे-लौह-अयस्क, मैंगनीज, टंगस्टन, निकिल आदि। |
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धात्विक व अधात्विक खनिज के दो-दो उदाहरण दीजिए। |
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Answer» धात्विक खनिज के उदाहरण ⦁ लौह-अयस्क अधात्विक खनिज के उदाहरण ⦁ चूना पत्थर |
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