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चीनी उद्योग के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की विवेचना करते हुए इसके विश्व-वितरण (प्रमुख क्षेत्रों) का वर्णन कीजिए।याविश्व में चीनी उद्योग के स्थानीयकरण के लिए उपयुक्त भौगोलिक कारकों का सोदाहरण वर्णन कीजिए।याचीनी उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों का विश्लेषण कीजिए। इसमें विश्व-वितरण एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का उल्लेख कीजिए। 

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विश्व में चीनी मानव को शक्ति एवं ऊर्जा प्रदान करने वाला महत्त्वपूर्ण स्रोत है। वर्तमान समय में यह खाद्य-पदार्थों में आवश्यक हो गयी है। चीनी उद्योग उन्हीं देशों में पनप सका है जहाँ इसके लिए कच्चा माल–गन्ना अथवा चुकन्दर-पर्याप्त मात्रा में उगाया जाता है। उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में चीनी गन्ने से प्राप्त की जाती है, जब कि शीतोष्ण कटिबन्धीय प्रदेशों में चुकन्दर से चीनी का निर्माण किया जाता है। यह उद्योग पूर्णत: कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है।

चीनी उद्योग के स्थानीयकरण के कारण

Reasons for Localisation of Sugar Industry
चीनी उद्योग के स्थानीयकरण के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाएँ आवश्यक होती हैं –

⦁    कच्चे माल की उपलब्धि – चीनी उद्योग का विकास उन्हीं देशों में अधिक हुआ है जहाँ इसके लिए कच्चे माल के रूप में पर्याप्त गन्ना अथवा चुकन्दर का उत्पादन किया जाता है। भारत, क्यूबा, ब्राजील एवं फिलीपीन्स इसके प्रमुख उत्पादक देश हैं जो गन्ने से चीनी का उत्पादन करते हैं।

⦁    सस्ते श्रमिकों की प्राप्ति – चीनी उद्योग के लिए पर्याप्त संख्या में सस्ते एवं कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। अधिकांश गन्ना उत्पादक देशों में सघन जनसंख्या निवास करती है; अत: पर्याप्त एवं कुशल श्रमिक सुगमता से उपलब्ध हो जाते हैं।

⦁    परिवहन के साधनों का विस्तार – इस उद्योग के लिए रेल परिवहन उपयुक्त एवं सस्ता पड़ता है। सड़क परिवहन भी आवश्यक है। इसी कारण गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में ही अधिकांश गन्ना-मिलें लगाई गयी हैं।

⦁    शक्ति के संसाधन – चीनी उद्योग का विकास उन्हीं क्षेत्रों में होता है, जहाँ पर इस उद्योग के लिए पर्याप्त शक्ति के स्रोत (जैसे-कोयला, जल-विद्युत शक्ति, लकड़ी आदि) उपलब्ध होते हैं।

⦁    बाजार की समीपता – जिन प्रदेशों में सघन जनसंख्या निवास करती है, वहीं इस उद्योग का विकास अधिक हुआ है। अन्य देशों की माँग भी इस उद्योग को प्रभावित करती है।

⦁    सहायक उद्योगों का विकास – चीनी उद्योग के साथ-साथ सहायक उद्योग (जैसे- गत्ता, कृत्रिम रबड़, एल्कोहॉल, कागज आदि) का विकास किया जाना नितान्त आवश्यक है। इससे चीनी उद्योग के व्यर्थ पदार्थों का उपयोग इन उद्योगों में ही हो जाता है। इससे चीनी का उत्पादन व्यय भी कम हो जाता है।

⦁    सरकारी प्रोत्साहन – इस उद्योग के लिए सरकारी प्रोत्साहन, संरक्षण, पर्याप्त पूँजी व्यवस्था, वित्तीय सहायता, निर्यात की सुविधाएँ भी मिलना अति आवश्यक हैं।

⦁    मशीनों तथा उपकरणों की आवश्यकता – चीनी उद्योग के लिए पर्याप्त मात्रा में मशीनों तथा उपकरणों की आवश्यकता होती है। चीनी बनाने का कार्य भारी मशीनों द्वारा ही सम्पन्न किया जाता है। जिन देशों में मशीनें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाती हैं, वहाँ चीनी उद्योग सुविधापूर्वक स्थापित हो। जाता है।

⦁    पर्याप्त पूँजी – चीनी उद्योग स्थापित करने में पर्याप्त पूँजी की व्यवस्था करनी पड़ती है। पूँजी, पूँजीपतियों द्वारा लगाई जाती है अथवा वित्तीय संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। जिन राष्ट्रों में पूँजी पर्याप्त मात्रा में सुलभ हो जाती है, वहाँ चीनी उद्योग का स्थानीयकरण हो जाता है।

⦁    अन्य सुविधाएँ – रासायनिक पदार्थों की उपलब्धता, ईंधन, स्वच्छ जल, परिवहन तन्त्र की सुव्यवस्था आदि अन्य कारक भी चीनी उद्योग के स्थानीयकरण में पर्याप्त सहयोग प्रदान करते हैं

विश्व में गन्ने की चीनी के उत्पादक देश
Countries Producing Sugar from Sugarcane in the World

विश्व में चीनी का उत्पादन व्यावसायिक दृष्टिकोण से गन्ने एवं चुकन्दर से किया जाता है। विगत वर्षों में चीनी के उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई है। विश्व में गन्ने द्वारा चीनी उत्पादन करने वाले देशों में ब्राजील, भारत, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, क्यूबा, थाईलैण्ड, मैक्सिको आदि प्रमुख हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है –

(1) ब्राजील – गन्ने द्वारा चीनी उत्पादन में ब्राजील का विश्व में प्रथम स्थान है, जहाँ विश्व का 24% गन्ना पैदा होता है। उत्तर-पूर्वी समुद्रतटीय प्रदेश एवं दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र चीनी के प्रमुख उत्पादक हैं। इस देश की जलवायु गन्ना-उत्पादन के लिए ही अनुकूल है। यहाँ विश्व की 15.2% चीनी का उत्पादन होता है।

(2) भारत – भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में द्वितीय स्थान है। यहाँ पर गन्ने से गुड़ भी बड़ी मात्रा में बनाया जाता है। चीनी उत्पादक प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक एवं तमिलनाडु हैं। भारत विश्व की लगभग 14% चीनी पैदा करता है।

(3) क्यूबा – चीनी के उत्पादन में क्यूबा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहाँ विश्व का 6.8% से अधिक गन्ने का उत्पादन किया जाता है। गन्ने का उत्पादन बड़े-बड़े फार्मों पर यान्त्रिक ढंग से किया जाता है; अत: चीनी मिलें कृषि-फार्मों के समीप ही स्थापित की गयी हैं।

(4) अन्य उत्पादक देश – चीनी के अन्य उत्पादक देशों में ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, चीन, पाकिस्तान, कोलम्बिया, फिलीपीन्स, दक्षिणी अफ्रीका, अर्जेण्टीना, थाईलैण्ड, हवाई द्वीप, पीरू, मॉरीशस, इण्डोनेशिया एवं वेनेजुएला प्रमुख हैं।

विश्व में चुकन्दर की चीनी के उत्पादक देश
Countries Producing Sugar from Sugarbeets in the World

विश्व में चीनी उत्पादन का दूसरा महत्त्वपूर्ण स्रोत चुकन्दर है। उन्नीसवीं शताब्दी में जब यूरोपीय देशों के सामने चीनी की समस्या आयी तो उन्हें चुकन्दर का आश्रय लेना पड़ा, क्योंकि इन देशों में गन्ना उत्पादन के लिए भौगोलिक दशाएँ अनुकूल नहीं थीं। विश्व में चीनी की कुल मात्रा के उत्पादन के दृष्टिकोण से चुकन्दर से निर्मित चीनी का स्थान लगभग आधा है। चुकन्दर की चीनी के उत्पादन में ‘निम्नलिखित देश प्रमुख स्थान रखते हैं –

⦁    रूस – संयुक्त देशों का राष्ट्रकुल विश्व की सर्वाधिक चुकन्दर उत्पन्न करता है तथा यहाँ इससे विश्व की 30% चीनी उत्पन्न की जाती है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्र यूक्रेन, पश्चिमी साइबेरिया, कजाकिस्तान खिरगीज एंवं ट्रांस काकेशिया हैं।

⦁    संयुक्त राज्य अमेरिका – चुकन्दर से बनी चीनी उत्पादन में संयुक्त राज्य अमेरिका का विश्व में दूसरी स्थान है। यहाँ चुकन्दर एवं गन्ना दोनों ही उत्पन्न किये जाते हैं। इसके उपरान्त भी इसे विदेशों से चीनी आयात करनी पड़ती है। चुकन्दर की चीनी के उत्पादक क्षेत्रों में कोलोरेडो; पश्चिम में कन्सास से उत्तर में कनाडा की सीमा तक तथा पश्चिम में वाशिंगटन राज्य मुख्य हैं।

⦁    चीन – चीन में चुकन्दर से चीनी के उत्पादक क्षेत्रों में शांसी-शेन्सी का मैदान, जेचवान बेसिन, ह्वांग्हो, यांगटिसीक्यांग एवं सीक्यांग नदियों के बेसिन प्रमुख हैं। चीन को चुकन्दर क़ी चीनी उत्पादन में तीसरा स्थान है।

⦁    जर्मनी – चुकन्दर से निर्मित चीनी उत्पादन में जर्मनी का विश्व में चौथा स्थान है। प्रमुख रूप से इसका उत्पादन पश्चिमी जर्मनी में किया जाता है।

⦁    अन्य उत्पादक देश – चुकन्दर निर्मित चीनी के अन्य उत्पादक देशों में फ्रांस, इटली. पोलैण्ड, स्पेन, नीदरलैण्डे, रोमानिया, यूगोस्लाविया, ग्रेट ब्रिटेन, हंगरी आदि हैं।
यूरोपीय देशों के अतिरिक्त अर्जेण्टाइना, तुर्की एवं जापान में भी चुकन्दर की चीनी का उत्पादन किया जाता है।

चीनी का विश्व व्यापार
World Trade of Sugar

गन्ने से निर्मित चीनी का विश्व व्यापार लगभग 300 लाख मी टन वार्षिक होता है। विश्व की कुल चीनी का 50% विकासशील देश, 30% विकसित देश तथा 20% भाग कम्युनिस्ट देश उत्पादन करते हैं, जब कि निर्यात मात्रा में 75% भाग विकासशील देशों द्वारा किया जाता है।
गन्ने की चीनी के निर्यातक देशों में ब्राजील, क्यूबा, भारत, फिलीपीन्स, हवाई द्वीप, प्यूर्टोरिको, ऑस्ट्रेलिया, ताईवाने, मॉरीशस एवं मैक्सिको हैं; जबकि आयातक देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, फ्रांस एवं स्विट्जरलैण्ड प्रमुख हैं। पाकिस्तान, मिस्र, ईरान आदि देश अपनी आवश्यकता के अनुसार चीनी का उत्पादन कर लेते हैं। इस प्रकार गन्ने से बनी चीनी का व्यापार चुकन्दर से बनी चीनी से अधिक होता है।

प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व चुकन्दर से निर्मित चीनी के निर्यातक देश जर्मनी, हंगरी एवं नीदरलैण्ड थे तथा आयातक देश ग्रेट ब्रिटेन था, परन्तु गन्ने की चीनी के विश्व व्यापार में आ जाने के कारण अब चुकन्दर की चीनी का व्यापार कम हो गया है, क्योंकि गन्ने की चीनी इससे सस्ती पड़ती है। वर्तमान समय में अधिकांश चुकन्दर की चीनी उत्पादक देश अपने उपभोग के लिए ही चीनी का उत्पादन करते हैं, परन्तु अधिकांश यूरोपीय देश एवं संयुक्त राज्य अमेरिका गन्ने द्वारा निर्मित चीनी का आयात करते हैं। चेक एवं स्लोवाकिया, हंगरी, पोलैण्ड एवं नीदरलैण्ड चुकन्दर से बनी चीनी का निर्यात करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं ब्रिटेन इसके प्रमुख आयातक देश हैं।



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