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कागज उद्योग के स्थानीयकरण एवं विकास के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का वर्णन कीजिए। इस उद्योग में प्रसिद्ध प्रमुख देशों के नाम बताइए।याकागज उद्योग का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(अ) स्थानीयकरण के कारण,(ब) विश्व में इस उद्योग के प्रमुख देश।याकागज उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों की विवेचना कीजिए तथा विश्व में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का वर्णन कीजिए।याटिप्पणी लिखिए-विश्व में कागज उद्योग। 

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कागज उद्योग वन उत्पादों पर आधारित सबसे महत्त्वपूर्ण उद्योग है। यदि यह कहा जाए कि वर्तमान सभ्यता कागज की ही देन है तो कोई अत्युक्ति नहीं होगी। आज विश्व के जिस देश में जितने अधिक कागज का उपभोग किया जाता है, वह उतना ही सभ्य एवं उन्नत कहलाता है।
कागज उद्योग के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ

Necessary Geographical Conditions for Paper Industry
कागज उद्योग का स्थानीयकरण निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है –

⦁    कच्चे माल की प्राप्ति – कागज उद्योग के लिए कच्चा माल लुग्दी है। कोमल लकड़ी के वन-क्षेत्रों में पर्याप्त लुग्दी उपलब्ध हो सकती है; अतः इन्हीं क्षेत्रों में कागज उद्योग स्थापित किया जा सकता है। वर्तमान समय में भी 80 से 85% कागज का निर्माण लकड़ी की लुग्दी से ही किया जाता है।

⦁    कोमल लकड़ी के वनों का होना – कोमल लकड़ी से ही अच्छी लुग्दी प्राप्त हो सकती है। यही कारण है कि कागज उद्योग की स्थापना शीत एवं शीतोष्ण कटिबन्धीय वनों के समीपवर्ती क्षेत्रों में हुई है। स्पूस, हेमलॉक, फर एवं चीड़ की कोमल लकड़ी इसके लिए उपयुक्त रहती है।

⦁    स्वच्छ जल की उपलब्धि – कागज उद्योग के लिए प्रचुर मात्रा में स्वच्छ जल आवश्यक होता है, जिससे लुग्दी एवं लकड़ी के रेशों को साफ किया जाता है।

⦁    जल-विद्युत शक्ति का विकास – कागज उद्योग के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता पड़ती है; अतः नदी-घाटियों के समीपवर्ती भागों में इस उद्योग की स्थापना से सस्ती जल-शक्ति पर्थीप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाती है।

⦁    सहायक उद्योगों का विकास – इस उद्योग के लिए अनेक रासायनिक पदार्थ; जैसे-कास्टिक सोडा, सोडा ऐश, क्लोरीन, हड्डी का चूरा, चीनी-मिट्टी आदि की आवश्यकता पड़ती है। इसीलिए इन सहायक उद्योगों का विकास कागज उद्योग के समीपवर्ती भागों में ही किया जाना चाहिए, जिससे कागज की उत्पादन लागत सस्ती पड़ती है।

⦁    कुशल श्रमिकों की उपलब्धि – कागज उद्योग के लिए पर्याप्त संख्या में कुशल श्रमिकों की सुविधा होनी चाहिए जो सघन जनसंख्या के क्षेत्रों में सुगमता से उपलब्ध हो सकते हैं।

⦁    परिवहन के साधनों का विकास – कागज उद्योग के लिए आन्तरिक एवं बाह्य परिवहन के साधनों की आवश्यकता पड़ती है, जिससे माल को लाने एवं ले जाने में सुविधा रह सके।

⦁    बाजार की सुविधा – कागज उद्योग के निकटवर्ती क्षेत्रों में सघन जनसंख्या का होना अति आवश्यक है, जिससे तैयार माल की खपत होती रहे। इसके साथ ही इसे विदेशों को निर्यात करने की भी पर्याप्त सुविधाएँ होनी चाहिए।

विश्व में कागज के प्रमुख उत्पादक देश
Main Paper Producing Countries in the World

विश्व में कागज का उत्पादन करने वाले देशों में कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, रूस एवं जापान प्रमुख हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है –

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका – संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व का 28.4% कागज का उत्पादन करता है तथा विश्व में प्रथम स्थान पर है। यहाँ 80% कागज रासायनिक लुग्दी से तैयार किया जाता है। इस लुग्दी से उत्तम किस्म का कागज बनाया जाता है। अधिकांश कांगज की मिलें न्यू इंग्लैण्ड, वाशिंगटन एवं ओरेगन राज्यों में स्थित हैं जहाँ कोमल लकड़ी के क्षेत्र विस्तृत हैं। न्यू इंग्लैण्ड राज्य में ही 47 कागज की मिलें हैं। संयुक्त राज्य के उत्तर-पूर्वी भाग में पर्याप्त जल-विद्युत का उत्पादन कर लिया जाता है। मेसाचुसेट्स, न्यूयॉर्क, विस्कांसिन, मिशीगन, ओहियो तथा पेंसिलवानिया कागज उत्पादन के अन्य। महत्त्वपूर्ण राज्य हैं।

(2) जापान – जापान विश्व का तीसरा बड़ा कागज उत्पादक देश है। यहाँ विश्व का 9.8% कागज का उत्पादन होता है। जापान के होकेडो द्वीप में शंकुल वन पाये जाते हैं जहाँ सुगी, हिकोरी, फर, स्पूस आदि नुकीली पत्ती वाले वन प्रमुख हैं जिनसे लुग्दी तैयार की जाती है। होंशू द्वीप के भीतरी पहाड़ी भागों से भी लुग्दी बनाने के लिए कोमल लकड़ी मिल जाती है। टोकियो-याकोहामा औद्योगिक प्रदेश में शिजूओका एवं शिमिजू; क्यूशू द्वीप में टोकाई औद्योगिक क्षेत्र तथा पूर्वी क्षेत्र में सुरुगाबान क्षेत्र में कागज का उत्पादन सन् 1880 से किया जा रहा है।

(3) कनाडा – कनाडा विश्व का 6.5% कागज उत्पादन करके चौथे स्थान पर है। कनाडा में कोणधारी वृक्ष बहुतायत में मिलते हैं जिनसे कोमल लकड़ी की प्राप्ति होती है। इन वृक्षों से यान्त्रिक लुग्दी तैयार की जाती है। महान् झीलों का स्वच्छ जल इस उद्योग के लिए उपलब्ध है। इनसे प्रवाहित होने वाली नदियों पर बॉध बनाकर पर्याप्त जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जाता है। ब्रिटिश कोलम्बिया, कनाडियन शील्ड एवं न्यूफाउण्डलैण्ड कागज उद्योग के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत, ब्रिटेन एवं पाकिस्तान यहाँ के कागज के प्रमुख ग्राहक हैं।

(4) ब्रिटेन – ब्रिटेन में कागज उद्योग के लिए नार्वे, स्वीडन, कनाडा एवं बाल्टिक सागरतटीय देशों से लुग्दी का आयात किया जाता है। इस देश को कागज उद्योग के लिए नदियों से स्वच्छ जल की पूर्ति, जल-विद्युत शक्ति, पश्चिमी यूरोपीय देशों के उपभोक्ता बाजार की निकटता तथा द्वीपीय स्थिति होने के कारण पत्तनों द्वारा लुग्दी आयात तथा तैयार माल के निर्यात जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कागज. उद्योग के केन्द्रों में केण्ट, रॉशडेल एवं हैम्पशायर प्रमुख हैं।

(5) यूरोपीय देश – यूरोप महाद्वीप में नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, ऑस्ट्रिया तथा जर्मनी में कागज का उत्पादन किया जाता है। अखबारी कागज का उत्पादन सबसे अधिक नार्वे में ओस्लो, फियॉर्ड एवं सक्रान्टन के तटीय भागों में किया जाता है। रूस के यूराल एवं साइबेरिया क्षेत्र कागज उद्योग के प्रमुख क्षेत्र हैं, क्योंकि यहाँ साइबेरिया के कोणधारी वन क्षेत्रों से लुग्दी के लिए कोमल लकड़ी उपलब्ध हो जाती है।

(6) भारत – भारत में बॉस, सवाई घास, रद्दी कागज, चिथड़े तथा चीड़ आदि वृक्षों से कागज बनाया जाता है। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु एवं आन्ध्र प्रदेश प्रमुख कागज-उत्पादक राज्य हैं। यहाँ स्थानीय मॉग से बहुत कम उत्पादन होने के कारण विदेशों से कागज आयात करना पड़ता है। उच्चकोटि का कागज कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान एवं यूरोपीय देशों से आयात किया जाता है।

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-निर्यातक देश – कनाडा, नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, जर्मनी, जापान एवं संयुक्त राज्य अमेरिका।

आयातक देश – भारत, दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश, दक्षिणी अमेरिकी तथा दक्षिणी-पूर्वी यूरोपीय देश।



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