1.

विश्व के लौह-अयस्क उत्पादक क्षेत्रों का वितरण तथा उसके अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार का वर्णन कीजिएयालोहा तथा इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के प्रमुख कारकों का वर्णन कीजिए तथा विश्व में इस उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों या केन्द्रों का उल्लेख कीजिएयासंयुक्त राज्य अमेरिका या जर्मनी के लोहा तथा इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।याचीन के लोहा-इस्पात उद्योग का वर्णन कीजिए।याविश्व के किन्हीं दो देशों में लौह-अयस्क के वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए।यालोहा एवं इस्पात उद्योग के स्थानीयकरण के कारकों की विवेचना कीजिए तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में इस उद्योग के प्रमुख केन्द्रों का वर्णन कीजिए। यासंयुक्त राज्य अमेरिका में लौह-इस्पात उद्योग के विकास के प्रमुख कारकों का विवेचन कीजिए तथा इस उद्योग के प्रमुख क्षेत्रों एवं केन्द्रों का वर्णन कीजिए। याविश्व में लौह-अयस्क का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए(क) उत्पादक क्षेत्र(ख) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार। 

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लोहा एवं इस्पात का महत्त्व Importance of Iron and Steel

वर्तमान में यान्त्रिक एवं औद्योगिक सभ्यता का आधार लोहा एवं इस्पात माना जाता है, क्योंकि अन्य उद्योगों के लिए लोहा-इस्पात कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। मानव-जाति की वर्तमान एवं भावी समृद्धि लोहे एवं इस्पात के उत्पादन पर निर्भर करती है। विश्व में जितनी भी धातुओं का उत्पादन किया जाता है, उसमें लगभग 90% भाग लोहे का ही होता है। वर्तमान अन्तरिक्ष युग में कुछ हल्की धातुओं (ऐलुमिनियम) का प्रयोग अधिक किया जाने लगा है, परन्तु लोहे की कठोरता, प्रबलता, स्थायित्व, लचीलेपन एवं सस्तेपन आदि गुणों के कारण अन्य धातुएँ इसका स्थान नहीं ले सकी हैं। इसके उपर्युक्त विशेष गुणों के कारण ही इसे विभिन्न रूपों में ढाला जा सकता है।
लोहा-इस्पात उद्योग की अवस्थिति के लिए उत्तरदायी कारक – लोहा-इस्पात उद्योग की स्थापना के लिए निम्नलिखित कारकों का योगदान सर्वोपरि रहती है –

⦁    भूमि का विस्तृत क्षेत्र;
⦁    कच्चे माल की उपलब्धि –
⦁    स्वच्छ जल
⦁    तप्त वायु
⦁    कोक योग्य कोयला
⦁    लौह-अयस्क
⦁    चूना-पत्थर
⦁    स्क्रैप एवं
⦁    मिश्र धातुएँ;
⦁    बाजार की सुविधा;
⦁    परिवहन के विकसित साधन;
⦁    पर्याप्त मात्रा में पूँजी की उपलब्धता;
⦁    मानवीय श्रम की पर्याप्तता;
⦁    सरकारी नीतियाँ एवं प्रोत्साहन;
⦁    सस्ता और कुशल श्रम;
⦁    पर्याप्त मशीनें तथा उपकरण;
⦁    शक्ति के सुलभ साधन।

विश्व में लौह-इस्पात उद्योग का वितरण एवं उत्पादन
Distribution and Production of Iron-Steel in the World

विश्व के अग्रणी लोहा-इस्पात उत्पादक देश क्रमश: जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, यूक्रेन, जर्मनी, भारत, इटली, कनाडा, ब्रिटेन, बेल्जियम तथा स्पेन हैं।

(अ) संयुक्त राज्य अमेरिका का लोहा-इस्पात उद्योग
Iron-Steel Industry of U.S.A.

विश्व के लौह-इस्पात उत्पादक देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका तीसरा स्थान रखता है। यहाँ लोहा-इस्पात उत्पादन के छः क्षेत्र मुख्य स्थान रखते हैं, जिनका विवरण निम्नलिखित है –

(1) पिट्सबर्ग-यंग्सटाउन क्षेत्र – इस प्रदेश में संयुक्त राज्य का लगभग एक-तिहाई इस्पात का उत्पादन किया जाता है। इसमें इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित तीन उप-क्षेत्र हैं –

⦁    पिट्सबर्ग क्षेत्र – यहाँ ओहियो, माननघेला एवं अलेघनी नदियों की घाटियों में इस्पात उद्योग के कारखाने स्थापित हुए हैं। इस्पात-निर्माण के सभी केन्द्र पिट्सबर्ग से 65 किमी के भीतर स्थित हैं

⦁    यंग्सटाउन क्षेत्र – यंग्सटाउन से 50 किमी की दूरी पर शेनांगो एवं माहोनिंग नदियों की घाटियों में इस्पात के कारखाने विकसित हुए हैं।

⦁    जोन्सटाउन क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार कोनेमाघ नदी की घाटी में हुआ है। प्रमुख इस्पात केन्द्र पिट्सबर्ग, यंग्सटाउन, ह्वीलिंग, हंटिंगटन, पोसमाउथ, जोन्सटाउन आदि हैं।

(2) शिकागो – गैरी क्षेत्र – संयुक्त राज्य में इस क्षेत्र का लोहा-इस्पात उत्पादन में प्रथम स्थान है, जहाँ देश का 35% इस्पात निर्मित किया जाता है। इस क्षेत्र में लौह-अयस्क, कोयला स्थानीय, कुछ लौह-अयस्क झील परिवहन द्वारा आयात, मिशीगन राज्य से चूना-पत्थर, स्वच्छ जल की प्राप्ति, बाजार की समीपता आदि भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्र शिकागो, गैरी, इण्डियाना हार्वर, मिलवाकी एवं सेण्ट-लुईस हैं।

(3) झीलतटीय क्षेत्र – झीलों के तटीय भागों में सबसे बड़ी सुविधा लौह-अयस्क की प्राप्ति का होना है। इस क्षेत्र के इस्पात केन्द्र आयातित कोयले पर निर्भर करते हैं। प्रमुख इस्पात केन्द्रों में बफैलो, क्लीवलैण्ड, डेट्रायट, डुलूथ, ईरी, टोलेडो एवं लॉरेन आदि प्रमुख हैं। डेट्रायट संयुक्त राज्य के दो बड़े केन्द्रों में से एक है।

(4) मध्य अटलांटिक तटीय क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार न्यू इंग्लैण्ड राज्यों से वर्जीनिया राज्य तक विस्तृत है। बेथलेहम, स्पैरोजप्वाइण्ट, मोरिसविले मुकडेन, ईस्टर्न एवं फिलिप्सबर्ग प्रमुख इस्पात-निर्माण के केन्द्र हैं। इस क्षेत्र को सबसे बड़ी सुविधा विदेशों से लौह-अयस्क आयात करने की है, जो कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, पीरू, चिली, अल्जीरिया एवं दक्षिणी-अफ्रीकी देशों से आयात किया जाता है। इस क्षेत्र में स्थित स्पैरोजप्वाइण्ट विश्व का सबसे बड़ा इस्पात-निर्माण केन्द्र है। तटीय स्थिति होने के कारण इस क्षेत्र के भावी विकास की अधिक सम्भावनाएँ हैं।

(5) दक्षिणी क्षेत्र – इस क्षेत्र में बर्मिंघम सबसे बड़ा एवं महत्त्वपूर्ण केन्द्र है। यहाँ पर कोयला, लौह-अयस्क एवं चूना-पत्थर स्थानीय रूप से उपलब्ध हैं। टेक्सास राज्य में हाउस्टन, फ्लोरेंस, शाण्यनुगा एवं डेंगरफील्ड अन्य मुख्य इस्पात केन्द्र हैं। इस क्षेत्र में कच्चे माल तथा स्थानीय बाजार की पर्याप्त सुविधाएँ हैं।

(6) पश्चिमी क्षेत्र – संयुक्त राज्य के पश्चिम में प्रशान्त तट के सहारे-सहारे इस्पात केन्द्र विकसित हुए हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्र प्यूबलो, डेनेवर, प्रोवो, जेनेवा, टेकोमा, सेनफ्रांसिस्को, लॉस-एंजिल्स एवं फोटाना हैं।

(ब) जापान का लोहा-इस्पात उद्योग
Iron-Steel Industry of Japan

विश्व के लोहा – इस्पात देशों में जापान की अब द्वितीय स्थान है, जिसने बिना लौह-अयस्क के अपने उत्पादन में वृद्धि कर ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस आदि देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। जापान में लौह-अयस्क एवं कोयला, दोनों ही कच्चे पदार्थों की कमी आरम्भ से ही रही है; अत: शक्ति के लिए जल-विद्युत का उपयोग किया जाता है। यहाँ पर कोकिंग कोयला संयुक्त सज्य अमेरिका, कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया से आयात किया जाता है। लौह-अयस्क भारत, मलेशिया, फिलीपीन्स, वेनेजुएला, पीरू तथा ब्राजील से आयात की जाती है तथा स्क्रैप संयुक्त राज्य से मँगाई जाती है। कच्चे माल को आयात करने की सुविधा के कारण जापान में इस्पात केन्द्रों की स्थापना सागरतटीय क्षेत्रों में की गयी है। जापान के लोहा-इस्पात उद्योग में निम्नलिखित प्रदेश प्रमुख स्थान रखते हैं –

⦁    मौजी प्रदेश – इस प्रदेश में जापान का तीन-चौथाई इस्पात का उत्पादन किया जाता है। आयातित कच्चे माल पर यहाँ इस्पात उद्योग का विकास किया गया है। उत्तरी क्यूशू में मौजी एक प्रमुख औद्योगिक प्रदेश है। यहाँ पर यावाता, तोबाता, मौजी, फुकुओका, कोकुरा, ओगुता, शिमोनोसेकी एवं नागासाकी प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र हैं।

⦁    कैमेशी प्रदेश – होशू द्वीप के पूर्वी भाग में इस्पात प्रदेश की स्थाफ्ना हुई है। इस प्रदेश को कुछ लौह-अयस्क स्थानीय रूप से कुंजी एवं सेण्डाई की खानों से प्राप्त हो जाती है। आन्तरिक सागर के पूर्वी सिरे पर कोबे एवं ओसाका इस्पात केन्द्र स्थित हैं। होंशू द्वीप के पूर्वी भाग में टोकियो एवं याकोहामा महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र हैं। अन्य केन्द्रों में हिरोहिता, चिबा, अमागासाकी, सकाई, वाकायामा, कावासाकी एवं मित्सुके प्रमुख हैं।

⦁    मुरारां प्रदेश – इस प्रदेश का विस्तार होकैडो द्वीप में है। यहाँ पर कुछ कच्चा माल स्थानीय रूप से उपलब्ध हो जाता है। कुछ लोहा स्थानीय रूप से मुरारां की खानों से तथा लौह-अयस्क इशीकारी की खानों से प्राप्त होती है। वैनिशी, सपारो, मुरारां एवं हैकोडेट प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र हैं।
जापान में क्यूशू द्वीप पर स्थित मौजी प्रदेश में देश का 75% इस्पात-निर्माण किया जाता है। इस्पात-निर्माण में वृद्धि के कारण यहाँ इन्जीनियरिंग, यन्त्र-निर्माण, जलपोत-निर्माण आदि उद्योगों को विकास हुआ है। इसी कारण जापान एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा औद्योगिक देश बन गया है।

(स) जर्मनी का लोहा-इस्पात उद्योग
Iron-Steel Industry of Germany

विश्व में जर्मनी का लोहा-इस्पात उत्पादन में छठा स्थान है। इस देश में लोहा-इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख स्थान रखते हैं –

(1) र प्रदेश – जर्मनी के लौह-इस्पात उद्योग का सबसे सघन संकेन्द्रण रूर क्षेत्र में हुआ है। रूर नदी-बेसिन के नाम पर इस प्रदेश का नामकरण हुआ है। यह नदी राइन नदी में आकर मिलती है। रूर क्षेत्र यूरोप महाद्वीप का सबसे बड़ा लौह-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है। इसे निम्नलिखिते भौगोलिक सुविधाएँ प्राप्त हैं –

⦁    रूर बेसिन में सर्वोत्तम प्रकार के एन्थ्रासाइट एवं कोकिंग कोयले के भण्डार हैं। यहाँ एमेस्चेर घाटी में भी कोयला मिलता है।

⦁    लौह – अयस्क स्थानीय रूप से सीज घाटी, साल्जगिटर एवं दक्षिणी भाग में बवेरिया से प्राप्त हो जाती है। शेष अयस्क अन्य यूरोपीय देशों से आयात की जाती है। फ्रांस के लॉरेन प्रदेश, लक्जमबर्ग, स्वीडन,तथा स्पेन से उच्च-कोटि का कच्चा लोहा आयात किया जाता है।

⦁    चूना – पत्थर रूर की दक्षिणी पहाड़ियों से प्राप्त हो जाता है।

⦁    रूर, राईन, लिप्पे नदियाँ, एम्स-डोर्टमण्ड कैनाल एवं अन्य बहुत-सी नहरें इस क्षेत्र को स्वच्छ जल की आपूर्ति करती हैं। नदियाँ सस्ते जल-परिवहन की सुविधा भी प्रदान करती हैं।

⦁    जर्मनी में परिवहन साधनों-सड़कों एवं रेलमार्गों-का जाल-सा बिछा हुआ है। जल-यातायात की सुविधा इस क्षेत्र को आसानी से प्राप्त है।

⦁    इस प्रदेश में जलमार्गों द्वारा लौह-अयस्क कनाडा, वेनेजुएला, ब्राजील, पीरू, गिनी एवं सियरालियोन से भी आयात की जाती है।
जर्मनी को 90% इस्पात-उत्पादन रूर क्षेत्र से प्राप्त होता है। इस प्रदेश के प्रमुख केन्द्र ऐसेन, डार्टमण्ड, ओवर हॉसेन, डूसेलडर्फ, बोचम, ग्लेसेनकिरचेन, डुइसबर्ग आदि हैं।

(2) साइलेशिया प्रदेश – जर्मनी के पूर्व में इस क्षेत्र की स्थिति है। इस प्रदेश में कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यहाँ लौह-अयस्क विदेशों से भी आयात किया जाता है। प्रमुख केन्द्रों में लिपजग, चिमनीज एवं ड्रेस्डन मुख्य हैं।

(3) दक्षिणी राइन प्रदेश – राइन प्रदेश में दोनों ही कच्चे माल-लौह-अयस्क एवं कोयला-विदेशों से आयात किये जाते हैं। यहाँ पर हल्के मशीनरी उपकरण एवं कृषि-यन्त्र बनाये जाते हैं। क्रेफील्ड, हनोवर, फ्रेंकफर्ट, ब्रीमेन, साल्जगिटर, स्टटगार्ट, शाफिन, लुडविग आदि महत्त्वपूर्ण इस्पात केन्द्र हैं।

(द) चीनं का लोहा-इस्पात उद्योग
Iron-Steel Industry of China

चीन में सन् 1949 में साम्यवादी सरकार की स्थापना के बाद से निर्माण उद्योगों के लिए विकास के पर्याप्त प्रयास किये गये हैं। पिछले 40 वर्षों से चीन ने इस्पात-निर्माण में तीव्र प्रगति की है। सन् 1953 में चीन का इस्पात उत्पादन बहुत कम था, परन्तु सन् 1980 तक यह ब्रिटेन एवं जर्मनी की समता करने लगा था। वर्तमान समय में चीन का विश्व इस्पात उत्पादन में प्रथम स्थान है। चीन में लौह-इस्पात उद्योग के लिए निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त हैं –

⦁    यहाँ उच्च-कोटि को कोकिंग कोयला मिलता है, जिसके विशाल भण्डार मंचूरिया, शेन्सी, शांसी, होनान एवं शाण्टंग प्रायद्वीप में स्थापित हैं।

⦁    चीन में लौह-अयस्क के अधिकांश भण्डार मंचूरिया में मिलते हैं, परन्तु शांसी, शाटुंग एवं यांगटिसीक्यांग की निम्न घाटी में भी लौह-अयस्क मिलती है।⦁    दक्षिणी चीन में लौह-मिश्र धातुएँ प्राप्त होती हैं।

चीन में इस्पात उत्पादन के निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख हैं –

⦁    मंचूरिया क्षेत्र – चीन का यह प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ देश का लगभग 40% इस्पात तैयार किया जाता है। प्रमुख केन्द्र आनशॉन, फुशुन, पेन्चिहू एवं मुकडेन हैं।

⦁    यांगटिसीक्यांग घाटी क्षेत्र – इस क्षेत्र का विस्तार मध्य चीन में है। इस घाटी का प्रमुख इस्पात केन्द्र वुहान है। अन्य केन्द्रों में मानशॉन, हुआंगशिन, शंघाई, हैंकाऊ एवं तापेह प्रमुख हैं।

⦁    उत्तरी क्षेत्र – इसे शांसी क्षेत्र के नाम से भी पुकारा जाता है। पाओटोव प्रमुख इस्पात उत्पादक केन्द्र है। यांगचुआन, टिएंटसिन, अनशॉन, बीजिंग, सिंहचिंगशॉन, ताइयुआन अन्य प्रमुख इस्पात केन्द्र हैं।

⦁    अन्य छिटपुट केन्द्र – चीन में इस्पात उत्पादन के अन्य छिटपुट केन्द्र केण्टन, चुंगकिंग, शंघाई, पेनकी, चिचिआंग, सिंगटाओ, हुआंगसी, चिनलिंग, चेन एवं होपे हैं।
चीन में अधिकांश इस्पात केन्द्र कोयला क्षेत्रों में या उनके निकट स्थापित किये गये हैं। यहाँ का वार्षिक इस्पात उत्पादन 475 लाख मीटरी टन है।
विश्व के अन्य इस्पात उत्पादक देशों में स्वीडन, फ्रांस, इटली, भारत, नीदरलैण्ड, पोलैण्ड, कनाडा, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया आदि मुख्य हैं।

(य) ग्रेट ब्रिटेन का लोहा-इस्पात उद्योग
Iron-Steel Industry of U.K.

लोहा-इस्पात उद्योग का सूत्रपात सबसे पहले अट्ठारहर्वी शताब्दी में ग्रेट ब्रिटेन में ही हुआ था। अब लोहा-इस्पात उद्योग में ग्रेट ब्रिटेन का विश्व में तेरहवाँ स्थान हो गया है। इस देश में कोयला पर्याप्त मात्रा में निकाला जाता है, परन्तु लौह-अयस्क का अभाव है, जिसकी पूर्ति अल्जीरिया, स्पेन, स्वीडन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से आयात कर की जाती है। यहाँ लोहा-इस्पात उद्योग के केन्द्र तटीय भागों में स्थापित किये गये हैं, जहाँ कोयले की खाने समीप हैं तथा लौह-अयस्क आयात करने की सुविधा रहती है। यह देश विश्व का 3 प्रतिशत लोहा एवं इस्पात तैयार करता है। यहाँ लोह्म-इस्पात के प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं –

(1) दक्षिणी वेल्स प्रदेश – यह ब्रिटेन का सबसे बड़ा लोहा-इस्पात उत्पादक क्षेत्र है जहाँ देश का लगभग 25% इस्पात तैयार किया जाता है। यहाँ कोयला स्थानीय खानों से तथा लौह-अयस्क स्पेन व अल्जीरिया से आयात की जाती है। इस क्षेत्र में टिन-प्लेट, इस्पात की चादरें, रेल-इंजिन, पटरियाँ तथा जलयान बनाये जाते हैं। यहाँ के मुख्य लोहा-इस्पात केन्द्र टैलबोट, न्यूपोर्ट, वेल्स, स्वाँसी, कार्डिफ, बारो आदि हैं।

(2) उत्तर-पूर्वी तटीय प्रदेश – यह ग्रेट ब्रिटेन का दूसरा प्रमुख लोहा-इस्पात उत्पादक प्रदेश है। इस क्षेत्र को नार्थम्बरलैण्ड तथा डरहम क्षेत्रों से कोकिंग कोयला प्राप्त हो जाता है तथा स्थानीय क्लीवलैण्ड की खानों से लौह-अयस्क की प्राप्ति होती है। यहाँ लोहे के शहतीर, जलयान, गर्डर, पुल, पटरियाँ तथा छड़ें बनाई जाती हैं। इस प्रदेश के प्रधान केन्द्र न्यूकैसिल, सुन्दरलैण्ड, डार्लिंगटन, डरहम, हार्टलपुल, साउथशील्ड, स्टॉकटन तथा मिडिल्सबरो आदि हैं।

(3) दक्षिणी यार्कशायर प्रदेश – इस क्षेत्र का लोहा-इस्पात के उत्पादन में ग्रेट ब्रिटेन में तीसरा स्थान है। यहाँ स्थानीय रूप से लौह-अयस्क कुछ मात्रा में प्राप्त होती है, परन्तु यह पर्याप्त नहीं है; अतः इस प्रदेश को लौह-अयस्क स्वीडन से आयात करनी पड़ती है। यहाँ शक्ति हेतु लकड़ी का कोयला प्रयोग में लाया जाता है तथा तीव्र प्रवाह वाली नदियों से जलशक्ति भी प्राप्त की जाती है। यह प्रदेश विश्व भर में लोहा-इस्पात उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ देश का लगभग 12% इस्पात तैयार किया जाता है। इसके प्रधान केन्द्र लीड्स, चैस्टरफील्ड, डॉनकास्टर, शैफील्ड, नाटिंघम तथा राथरडम आदि हैं।

(4) ब्लैक कण्ट्री प्रदेश – यह क्षेत्र स्टेफर्डशायर तथा उत्तरी वारविकशायर तक फैला हुआ है। यहाँ कच्चे माल की आपूर्ति स्थानीय है। इस प्रदेश में हल्की तथा मूल्यवान वस्तुएँ; जैसे—सुइयाँ, कीलें, जंजीरें, मशीनों के पुर्जे, सैन्य अस्त्र-शस्त्र, बन्दूकें, पिस्तौल आदि बनाई जाती हैं। इस क्षेत्र का प्रमुख केन्द्र बर्मिंघम है। अन्य केन्द्रों में डेडले, रेडिस, कवेण्ट्री आदि मुख्य हैं।

(5) उत्तर-पश्चिमी तटीय प्रदेश – यह क्षेत्र ग्रेट ब्रिटेन के उत्तर-पश्चिमी तट पर स्थित है। यहाँ लौह-अयस्क पर्याप्त मात्रा में निकाली जाती है। कोयले की आपूर्ति डरहम तथा यार्कशायर की खानों से मँगाकर की जाती है। इस क्षेत्र में रेल की पटरियाँ तथा जलयान बनाये जाते हैं। यहाँ के प्रमुख लोहा-इस्पात केन्द्र डाइडहैण्ड तथा बर्मिंघम हैं।

(6) स्कॉटलैण्ड मध्य घाटी प्रदेश (क्लाइड नदी की घाटी) – यह प्रदेश स्कॉटलैण्ड में क्लाइड नदी की घाटी में फैला हुआ है। लौह-अयस्क यहाँ पर्याप्त मात्रा में निकाली जाती है, जब कि कोयला लेनार्क क्षेत्र से मँगाया जाता है। यहाँ जलयान, गर्डर विशेष रूप से बनाये जाते हैं। इस क्षेत्र के प्रमुख केन्द्र ग्लासगो, हैमिल्टन, मदरसविले, कोटब्रिज, कैरेन, जोन्सटाउन आदि हैं।
ग्रेट ब्रिटेन से भारी मात्रा में लोहा-इस्पात एवं उससे निर्मित वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। अत: इसकी गणना विश्व के प्रमुख लोहा-इस्पात निर्यातक देशों में की जाती है। परन्तु पिछले कुछ वर्षों से उत्पादन में उत्तरोत्तर कमी आने से अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी निर्यात मात्रा घटती जा रही है।

लौह-इस्पात का विश्व-व्यापार
World-Trade of Iron-Steel

इस्पात का अधिकांश व्यापार स्थानीय होता है। विश्व के सभी इस्पात उत्पादक देश इस्पात उत्पादन में वृद्धि हेतु प्रयासरत हैं। जापान तथा पश्चिमी यूरोपीय देशों से इस्पात निर्यात किया जाता है। प्रमुख आयातक एवं निर्यातक देश निम्नलिखित हैं –

⦁    इस्पात निर्यातक देश – रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, चेक और स्लोवाकिया मुख्य हैं।

⦁    इस्पात आयातक देश – अधिकांश इस्पात आयातक देश विकासशील हैं, जिनमें दक्षिणी एशियाई, अफ्रीकी एवं लैटिन अमेरिकी देश हैं। भारत इस्पात का आयात रूस, जापान, जर्मनी एवं ब्रिटेन से करता है।



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