This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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मध्य उच्च भूमि के विस्तार के बारे में वर्णन करें। |
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Answer» यह उच्च भूमि मालवा के पठार के अधिकतर भागों में फैली हुई है। विंध्य श्रृंखला दक्षिण में मध्य उच्च भूमि तथा उत्तर पश्चिम में अरावली से घिरी है। पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई तथा पथरीले मरुस्थल से मिल जाता है। इस पठार के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है। इसके और पूर्व के विस्तार को दामोदर नदी द्वारा अपवाहित छोटानागपुर पठार दर्शाता है। |
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पश्चिमी तटवर्ती मैदान को कितने भागों में बाँटा जाता है? |
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Answer» पश्चिमी तटवर्ती मैदानों को तीन प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है- ⦁ कोंकण तट, |
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गोंडवाना भूमि, वितरिकाएँ, दून का अर्थ बताएँ। |
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Answer» ⦁ गोंडवाना भूमि – प्राचीन विशाल महाद्वीप पैंजिया का दक्षिणतम भाग है जिसके उत्तरी भाग में अंगारा भूमि है। ⦁ वितरिकाएँ – जब नदी अपने निचले भाग में जाकर गाद के जमा होने के कारण कई धाराओं में बँट जाती है तो उन्हें वितरिकाएँ कहते हैं। ⦁ दून – निम्न हिमाचल एवं शिवालिक के बीच स्थित लंबवत् घाटी को दून के नाम से जाना जाता है। |
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“भारत एक सुगठित भौगोलिक इकाई है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए। |
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Answer» भारत को तीन भौतिक भागों में बाँटा गया है–उत्तर का विशाल हिमालय पर्वत, उत्तर का विशाल मैदान तथा प्रायद्वीपीय पठार। इनका न केवल आपस में एक-दूसरे से सम्बद्ध हैं, बल्कि ये एक-दूसरे के पूरक भी हैं। इस तरह इन भौतिक विभागों ने मिलकर भारत को एक सुगठित भौगोलिक इकाई बनाने में अपना योगदान दिया है। इन तीनों प्रमुख खण्डों का वर्णन इस प्रकार है- भारत का प्रायद्वीपीय पठारी प्रदेश – यहाँ लौह-अयस्क, कोयला, ताँबा, बॉक्साइट, मैंगनीज, अभ्रक आदि खनिजों के अपार भंडार हैं। खनिजों पर आधारित उद्योगों के विकास के कारण आज भारत विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों में गिना जाता है। कहवा, रबड़, गर्म मसाले आदि की उपज के निर्यात द्वारा देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत एक सुगठित भौगोलिक इकाई है तथा देश को ऐसा बनाने में उसके विभिन्न भौतिक विभागों ने पूर्ण योगदान दिया है। उत्तरी विशाल मैदान – ये मैदान हिमालय पर्वतीय प्रदेश से निकलने वाली नदियों के द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बने हैं। ये मैदान बहुत उपजाऊ हैं। यहाँ विभिन्न खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ व्यापारिक फसलें, जैसे-गन्ना, कपास तथा पटसन पैदा की जाती हैं जिन पर यहाँ के कई उद्योग निर्भर करते हैं। जीविकोपार्जन की सुविधाएँ सुलभ होने के कारण देश की आधी से अधिक जनसंख्या इस मैदानी भाग में रहती है। विशाल हिमालय पर्वत – हिमालय पर्वत का प्रदेश उत्तर दिशा में भारत के प्रहरी का कार्य करता है। इस प्रकार शांति व सुरक्षा के साथ प्रगति करने का अवसर देता है। ऐतिहासिक काल से ऐसा होते रहने से ही भारत अपनी संस्कृति व सभ्यता का विकास कर पाया। हिमालय पर्वत के कारण ही देश को मानसूनी एकता प्राप्त हुई। वर्ष के विभिन्न समयों में ऋतु क्रम की एकता व फसलें पैदा करने के लिए पूरे वर्ष का वर्धन काल भी इसी भौतिक विभाग की देन है। हिमालय पर्वत अपार जल संपदा तथा वन संपदा के लिए जाने जाते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के फल, जड़ी-बूटियाँ तथा चाय के भण्डार हैं, जो देश के अन्य भौतिक भागों में रहने वाले लोगों द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं। |
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प्राकृतिक विभिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदान को कितने भागों में बाँटा जा सकता है? |
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Answer» प्राकृतिक विभिन्नता के आधार पर उत्तरी मैदान को चार भागों में बाँटा जा सकता है- ⦁ भाबर क्षेत्र |
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प्रायद्वीपीय पठार की तीन विशेषताएँ बताएँ। |
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Answer» प्रायद्वीपीय पठार की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – ⦁ यह तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है। |
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प्रायद्वीपीय पठार का निर्माण किन शैलों से हुआ है? |
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Answer» प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था। यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। |
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उत्तर के मैदान को उच्चावच विशेषताओं के आधार पर विभाजित कीजिए। |
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Answer» उत्तर के मैदान को विभिन्न उच्चावच विशेषताओं के आधार पर निम्न चार भागों में बाँटा गया है- ⦁ खादर क्षेत्र – बाढ़ के मैदानों में नए तथा युवा निक्षेपों को खादर कहा जाता है। लगभग प्रत्येक वर्ष इनका नवीकरण हो जाता है। ये बहुत उर्वर होते हैं तथा गहन कृषि के लिए आदर्श माने जाते हैं। ⦁ बांगर क्षेत्र – इन मैदानों का निर्माण पुरानी जलोढ़ मृदा से होता है। ये नदियों के बाढ़ के मैदानों के ऊपर स्थित । हैं तथा वेदिका जैसी आकृति प्रदर्शित करते हैं। ये मैदान नदी के बेसिन से दूर पाए जाते हैं। इस क्षेत्र में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में कंकड़’ कहा जाता है और यह कम उपजाऊ होती है। ⦁ भाबर क्षेत्र – इन मैदानों का निर्माण तंग पट्टी में कंकड़ों के जमा होने से होता है जो शिवालिक की ढलान के समानांतर पाई जाती हैं। इस पट्टी का निर्माण पहाड़ियों से नीचे उतरते समय विभिन्न नदियों द्वारा किया जाता है। सभी नदियाँ भाबर पट्टी में आकर विलुप्त हो जाती हैं ⦁ तराई क्षेत्र – यह क्षेत्र भाबर के बाद आती है और नए जलोढ़ से बना होता है। इस क्षेत्र का निर्माण नदियों के पुनः प्रकट होने से होता है जिसके कारण नदियाँ नम एवं दलदली क्षेत्र का निर्माण करती हैं जिसे तराई कहा जाता है। यह क्षेत्र गहन जंगलों वाला एवं जंगली जानवरों से भरपूर होता है। किन्तु विभाजन के उपरांत पाकिस्तान से आए प्रवासियों के लिए कृषि योग्य भूमि बनाने हेतु जंगलों को साफ कर दिया गया है। |
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पश्चिमी घाट का सबसे ऊँचा शिखर तथा इसकी ऊँचाई बताइए। |
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Answer» अनाईमुडी पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर है जिसकी ऊँचाई 2,695 मीटर है। |
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उत्तरी मैदान का निर्माण किस प्रकार हुआ है? |
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Answer» उत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों-सिंधु, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र तथा इनकी सहायक नदियों से बना है। लाखों वर्षों में हिमालय के गिरिपाद में स्थित बहुत बड़े बेसिन में जलोढ़ों का निक्षेप हुआ जिससे इस उपजाऊ मैदान का निर्माण हुआ है। |
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प्रायद्वीपीय पठार का वर्णन कीजिए। |
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Answer» प्रायद्वीपीय पठार पुराने क्रिस्टलीय, आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अफवाह के कारण बना था इसीलिए यह प्राचीनतम भू-भाग का हिस्सा है। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं। इस पठार के दो मुख्य भाग हैं-‘मध्य उच्च भूमि तथा ‘दक्कन का पठार। 1. मध्य उच्चभूमि – नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि के नाम से जाना जाता है। विंध्य श्रृंखला दक्षिण में मध्य उच्चभूमि तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है। 2. दक्कन का पठार – यह एक तिकोना भूखंड है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला है जबकि महादेव, कैमूर की पहाड़ियाँ एवं मैकाल श्रृंखला इसके पूर्वी विस्तार हैं। दक्कन के पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी सिरे पर क्रमशः पूर्वी तथा पश्चिमी घाट स्थित हैं। पठारी क्षेत्र बहुत पुरानी स्थलाकृति है जिसका क्षेत्र बहुत विशाल है। इस पठार की एक प्रमुख विशेषता काली मिट्टी है जिसे दक्कन टैप कहा जाता है। इसका उद्गम ज्वालामुखीय है और इसलिए चट्टानें आग्नेय हैं। पूरा दक्कन का पठार विषुवतीय क्षेत्र में स्थित है। इसमें वर्षा मध्यमे होती है। दक्कन टैप काली लावा मिट्टी से बना है जो कपास की खेती के लिए बहुत लाभदायक है। प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी एवं उत्तर पश्चिमी छोर पर अरावली पहाड़ियाँ स्थित हैं। ये गुजरात से दिल्ली तक दक्षिण-पश्चिम-उत्तरपूर्व दिशा में फैली हुई हैं। |
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बताइए, हिमालय का निर्माण कैसे हुआ था? |
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Answer» जिस स्थान पर आज हिमालय स्थित है, उस स्थान पर कभी टेथीस नामक सागर हिलोरें लेता था। यह एक लम्बा और उथला सागर था। यह दो विशाल भूखण्डों से घिरा हुआ था। इसके उत्तर में अंगारालैण्ड और दक्षिण में गोंडवानालैण्ड नाम के भूखण्ड थे। ऐसा माना जाता है कि लाखों वर्ष पहले भारत एक बड़े महाद्वीप गोंडवाना भूमि का भाग था। सबसे प्राचीन भूखंड (प्रायद्वीपीय भाग) गोंडवाना भूमि का हिस्सा था। वर्तमान आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका एवं दक्षिण अमेरिका भी इसी भूखंड में शामिल थे। यह दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित था। संवहनीय धाराओं के कारण इसकी भू-पर्पटी कई टुकड़ों में टूट गई जिससे इंडो-आस्ट्रेलियाई प्लेट गोंडवानालैण्ड से अलग होकर उत्तर की ओर सरक गई। प्लेट विवर्तन सिद्धांत के अनुसार भू-पर्पटी पहले एक ही विशालकाय महाद्वीप था जिसे पैंजिया कहा जाता था। उत्तरी भाग में अंगारा भूमि थी दक्षिणी भाग में गोंडवाना भूमि। भूपर्पटी के नीचे मौजूद पिघले हुए पदार्थ ने भूपर्पटी या लीथोस्फीयर को कई बड़े टुकड़ों में बाँट दिया जिन्हें लीथोस्फेरिक या टैक्टोनिक प्लेट कहा जाता है। जो अवसादी चट्टान टक्कर के कारण वलित इकड़े हो गए उन्हें टेथीस के नाम से जाना जाता है। गोंडवाना भूमि से अलग होने के बाद इंडोआस्ट्रेलियाई प्लेट उत्तर में यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक गई। यह दो प्लेटों में टकराव का कारण बना और इस टकराव के कारण टेथीस की अवसादी चट्टानें वलित होकर पश्चिमी एशिया की पर्वतीय श्रृंखला तथा हिमालय के रूप में उभर गईं। |
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भारत के उत्तरी मैदान का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भारत का उत्तरी मैदान उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा बहाकर लायी गयी मिट्टी से बना है। इस मिट्टी को जलोढ़क कहते हैं। इसीलिए इस मैदान को जलोढ़ मैदान कहते हैं। इस मैदान के उत्तर में हिमालय पर्वत स्थित है और दक्षिणी भाग में पठार का विस्तार है। यह मैदान 7 लाख वर्ग किमी में फैला हुआ है। यह मैदान 2400 किमी लंबा तथा 240-320 किमी चौड़ा है। समृद्ध मृदा के आवरण, भरपूर पानी की आपूर्ति एवं अनुकूल जलवायु ने उत्तरी मैदान को कृषि की दृष्टि से भारत का अत्यधिक उपजाऊ भाग बना दिया है। इसी कारण यहाँ का जनसंख्या घनत्व भारत के सभी भौगोलिक विभाजनों की अपेक्षा इस क्षेत्र में सर्वाधिक है। उत्तरी मैदान के पश्चिमी भाग को पंजाब कहा जाता है। गंग का मैदान घग्घर एवं तिस्ता नदियों के बीच स्थित है। यह उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों जैसे हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखण्ड के कुछ भाग एवं पश्चिम बंगाल के पूर्व में फैला हुआ है। उत्तरी मैदान का निर्माण दो नदी तंत्रों के सहयोग से हुआ है । ⦁ पश्चिम में सिन्धु नदी तंत्र द्वारा, ⦁ पूर्व में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा। 1. सिंधु नदी तंत्र ⦁ उत्तरी मैदान के उत्तरी-पश्चिमी भाग की रचना सिंधु और उसकी सहायक नदियों ने की है। सतलुज, व्यास, राबी, चिनाब और झेलम इसकी प्रमुख नदियाँ हैं। ⦁ इस मैदान का विस्तार दक्षिण-पश्चिम में अरब सागर से लेकर पश्चिमी हिमालय के गिरिपाद तक है। यह 1,200 किलोमीटर की लंबाई में फैला है। ⦁ सिंधु नदी तंत्र द्वारा निर्मित मैदान को दो भागों में बाँट सकते हैं-पश्चिमी मरुभूमि और पंजाब का मैदान। 2. गंगा-ब्रह्मपुत्र का नदी तंत्र उत्तर के मैदान का अधिकांश भाग गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों की ही देन है। गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान को दो भागों में बाँटा जा सकता है-गंगा का मैदान तथा ब्रह्मपुत्र को मैदान। ⦁ गंगा का मैदान सबसे अधिक विस्तृत है। इसका निर्माण गंगा और गंगा की सहायक नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी के जमाव से हुआ है। इस मैदान का ढाल पूर्व की ओर है। उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिमी बंगाल पूर्णतः तथा हरियाणा, राजस्थान तथा मध्य प्रदेश राज्यों के अधिकांश मैदानी भाग गंगा तन्त्र की देन हैं। ⦁ ब्रह्मपुत्र का मैदान उत्तर का विशाल पूर्वी भाग है। इसका विस्तार असोम और मेघालय राज्यों में है। इसका निर्माण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के द्वारा लाए गए अवसादों के जमाव से हुआ है। |
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भ्रंश घाटी किसे कहते हैं? |
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Answer» पृथ्वी की आंतरिक हलचलों के कारण पृथ्वी पर भ्रंश पड़ जाते हैं। इन भ्रंशों के किनारे ऊपर उठने तथा बीच का भाग नीचे धंसने से भू-भ्रंश घाटी का निर्माण होता है। |
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दक्कन के पठार से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» दक्कन का पठार एक तिकोना भूखण्ड है, जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर की ओर इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की श्रृंखला स्थित है जबकि कैमूर की पहाड़ियाँ, मैकाल की श्रृंखला एवं महादेव इसका पूर्वी विस्तार है। दक्कन का पठार पश्चिम में ऊँचा तथा पूर्व में कम ढलान वाला है। इस पठार का एक भाग उत्तर-पूर्व में भी देखा जाता है जिसे स्थानीय रूप से ‘मेघालय’, ‘कार्बी एंगलौंग पठार’ तथा ‘उत्तर कचार पहाड़ी’ के नाम से जाना जाता है। यह एक भ्रंश के द्वारा छोटा नागपुर पठार से अलग हो गया है। पश्चिम से पूर्व की ओर तीन महत्त्वपूर्ण श्रृंखलाएँ गारो, खासी तथा जयंतिया हैं। दक्कन के पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी सिरे पर क्रमशः पूर्वी तथा पश्चिमी घाट स्थित हैं। |
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निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए-⦁ अपसारी तथा अभिसारी भूगर्भीय प्लेटें⦁ बांगर और खादर⦁ पूर्वी घाट तथा पश्चिमी घाट |
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Answer» अपसारी तथा अभिसारी भूगर्भीय प्लेटों में अंतर
बांगर व खादर में अंतर
पूर्वी एवं पश्चिमी घाट में अंतर
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जलोढ़ मैदान किसे कहते हैं? |
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Answer» नदियों द्वारा बहाकर लायी मिट्टी से बने मैदान को जलोढ़ मैदान कहते हैं। जलोढ़ मैदान की मिट्टी महीन पंक जैसी होती है जिसे जलोढ़क भी कहते हैं। इसीलिए इसे मिट्टी से बने मैदान को जलोढ़ मैदान कहा जाता है। |
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उत्तर के विशाल मैदान का संक्षेप में वर्णन कीजिए। |
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Answer» हिमालय के पर्वतीय प्रदेश तथा प्रायद्वीपीय पठार के बीच में उत्तर का विशाल मैदान स्थित है। पश्चिम में राजस्थान वे पंजाब से लेकर असम तक इसका विस्तार है। यह मैदान 2,400 किमी. लंबा तथा 240 से 320 किमी. तक चौड़ा है। इस मैदान का निर्माण हिमालय पर्वत तथा प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा बहाकर लायी गयी जलोढ़क के जमाव से हुआ है। इसे विश्व के सर्वाधिक समतल एवं उपजाऊ मैदानों में शामिल किया जाता है। यह 7 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका निर्माण दो नदी तंत्रों-पश्चिम में सिंधु नदी तंत्र और पूर्व में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र द्वारा सम्मिलित रूप से किया गया है। सिंधु नदी तंत्र- ⦁ उत्तरी मैदान के उत्तरी – पश्चिमी भाग की रचना सिंधु और उसकी सहायक नदियों ने की है। सतलुज, व्यास, राबी, चिनाब और झेलम इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। ⦁ इस मैदान का विस्तार दक्षिण – पश्चिम में अरब सागर से लेकर पश्चिमी हिमालय के गिरपाद तक है। यह 1,200 किलोमीटर की लंबाई में फैला है। | सिंधू नदी तंत्र द्वारा निर्मित मैदान को दो भागों में बाँट सकते हैं ⦁ पश्चिमी मरुभूमि और ⦁ गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र – उत्तर के मैदान का अधिकांश भाग गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों की ही देन है। गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान को दो भागों में बाँटा जा सकता है- ⦁ गंगा का मैदान तथा |
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भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग कौन-से हैं?हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अंतर है? |
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Answer» भारत के प्रमुख भू-आकृतिक विभाग- ⦁ उत्तर के विशाल पर्वत हिमालय क्षेत्र तथा प्रायद्वीपीय पठार के उच्चावच लक्षणों में अंतर
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पूर्वी तटीय मैदानों के कोई दो लक्षण बताइए। |
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Answer» ⦁ इस मैदान में नदियों द्वारा उपजाऊ डेल्टा का निर्माण किया जाता है। ⦁ यह मैदान पूर्वी घाट एवं बंगाल की खाड़ी के मध्य स्थित है। |
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हिमालय पर्वत का विवेचन कीजिए। |
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Answer» हिमालय पर्वत श्रृंखला, विश्व की सबसे ऊँची श्रृंखला है। इस युवा वलित पर्वत का भारत की उत्तरी सीमा पर 2,400 किमी तक विस्तार है। हिमालय का उच्चावच अत्यधिक अनियमित है। इसमें ऊँचे पर्वत शिखर तथा गहरी घाटियाँ दोनों पाएँ जाते हैं। यह पर्वत श्रृंखला पश्चिम-पूर्व दिशा में सिन्धु नदी से ब्रह्मपुत्र की ओर जाती हैं। हिमालय विश्व की सर्वाधिक ऊँची एवं मजबूत बाधाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह एक अर्द्धवृत्त जैसा आकार बनाता है जो 2,400 किमी दूर तक फैली है। इनकी चौड़ाई कश्मीर में 400 किमी से लेकर अरुणाचल प्रदेश में 150 किमी तक है। हिमालय पर्वत श्रृंखला अपने देशांतरीय विस्तार में तीन समानांतर श्रृंखलाओं से मिलकर बना है – ⦁ महान या आंतरिक हिमालये अथवा हिमाद्रि, |
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हिमालय पर्वतों का क्षेत्रीय वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» हिमालय पर्वत श्रृंखला पश्चिम से पूर्व की ओर क्षेत्र के आधार पर बाँटी गयी है- ⦁ सिंधु तथा सतलुज नदी के मध्य के हिमालय के भाग को पारंपरिक रूप से पंजाब हिमालय के नाम से जाना जाता है। लेकिन क्षेत्रीय रूप से इसे क्रमशः कश्मीर और हिमाचल हिमालय के नाम से जाना जाता है। ⦁ काली नदी और सतलुज नदी के बीच के क्षेत्र को कुमाऊँ हिमालय के नाम से जाना जाता है। ⦁ काली और तिस्ता नदी के बीच का क्षेत्र नेपाल हिमालय के नाम से एवं तिस्ता व दिहांग नदी के बीच का क्षेत्र असम हिमालय के नाम से विख्यात है। ⦁ दिहांग महाखड्डू के बाद हिमालय पर्वत तेजी से दक्षिण दिशा में मुड़ता है और भारत की पूर्वी सीमा के साथ फैल जाता है। इसे पूर्वांचल या पूर्वी पहाड़ियों एवं पर्वतों के नाम से जाना जाता है। पूर्वांचल में पटकाई, नागा, मणिपुर एवं मीजो पहाड़ियाँ आती हैं। |
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पूर्वी एवं पश्चिमी हिमालय की तुलना कीजिए। |
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Answer» पूर्वी एवं पश्चिमी हिमालय में निम्नलिखित अन्तर
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भारत की सुरक्षा, जलवायु विभाजक, जल एवं वन संपदा के लिए हिमालय की उपयोगिता प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» सुरक्षा – हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर प्रहरी की भाँति प्राचीनकाल से भारत की निरंतर सुरक्षा करता आ रहा है। हिमालय की उच्च पर्वत श्रृंखलाओं को पार करना कठिन है, इसीलिए विदेशी आक्रान्ताओं ने इस ओर से भारत को अतिक्रमण करने का साहस नहीं किया। किन्तु आधुनिक सैन्य उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रे के चलते यह अब अभेद्य नहीं रह गया है। जलवायु विभाजक – भारत का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में और उत्तरी भाग शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है, परंतु हिमालय की स्थिति के कारण ही सम्पूर्ण भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है। हिमालय पर्वत श्रेणी के कारण भारत में स्पष्ट रूप से ऋतुचक्र चलता है। हिमालय शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी एशिया से आने वाली ठंडी और शुष्क पवनों को रोककर भारत को अधिक ठंडा और शुष्क होने से बचाता है। दूसरी ओर, ग्रीष्म ऋतु में दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनों को रोककर, भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा करने में सहायक होता है। इस प्रकार हिमालय पर्वत जलवायु विभाजक का काम करे, भारत को एक विशिष्ट रूप प्रदान करता है। जल संपदी का भण्डार – हिमालय हिम का घर है। हिमानियाँ मीठे जल का प्रमुख स्रोत हैं। ये हिमानियाँ भारत की प्रमुख नदियों की उद्गम स्थल हैं। अतः इन नदियों में सदैव पानी बना रहता है। ये नदियाँ न केवल पेय जल का स्रोत हैं, अपितु सिंचाई व जल विद्युत के निर्माण में भी ये बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हिमालय से निकलने वाली नदियों में देश की कुल संभावित जल शक्ति की 60 प्रतिशत क्षमता है। इसके विकास से कृषि तथा उद्योगों के विकास में मदद मिलती है। वन-संपदा का भण्डार – हिमालय प्रदेश में संसार की सभी प्रकार की वनस्पति के दर्शन होते हैं। निम्न ढाल वाले क्षेत्र घने वनों से ढके हैं। हिमालय क्षेत्र में कठोर तथा मुलायम दोनों प्रकार की लकड़ी विपुल मात्रा में मिलती है। वनों की सघनता एवं विविधती पर्याप्त मात्रा में विविध प्रकार की लकड़ी प्रदान करती है। वन वन्य प्राणियों के घर हैं। आज इन क्षेत्रों में दुर्लभ वन्य प्राणियों के भी दर्शन होते हैं। इन वनों में अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियाँ भी प्राप्त होती हैं। |
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शिवालिक के कोई दो प्रमुख लक्षण बताइए। |
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Answer» ⦁ इस भाग में अक्सर भूकंप आते रहते हैं तथा भूस्खलन भी होते रहते हैं। हिमालय की इसी श्रेणी में सर्वाधिक मृदा अपरदन भी होता है। ⦁ यह पर्वत श्रेणी जलोढ़ अवसादों से निर्मित है। इसीलिए इसकी शैलें कमजोर हैं। |
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हिमालय की समानान्तर श्रेणियों का विवरण प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» हिमालय पर्वत श्रृंखला अपने देशान्तरीय विस्तार में तीन समानांतर श्रेणियों के सम्मिलने से बना है, जो इस प्रकार है- (i) महान हिमालय (हिमाद्रि) – हिमालय पर्वत श्रृंखला के सबसे उत्तरी भाग में स्थित श्रृंखला को महान् (आंतरिक हिमालय या हिमाद्रि) हिमालय कहते हैं। इस श्रृंखला की औसत ऊँचाई 6,000 मी0 है। इस श्रेणी के बीच में अनेक गहरी घाटियाँ भी हैं। सभी प्रमुख हिमालयी चोटियाँ इस श्रेणी के अंतर्गत आती हैं। यह क्षेत्र वर्ष भर हिमाच्छादित रहता है। (ii) निम्न हिमालय (हिमाचल) – महान हिमालय के दक्षिण में स्थित श्रृंखला हिमालय पर्वत श्रृंखला में सबसे अधिक असम है और हिमाचल या मध्य या निम्न हिमालय के नाम से जानी जाती है। यह श्रृंखला मुख्यतः अत्यधिक संपीड़ित कायांतरित चट्टानों से बनी है। पीर पंजाल श्रृंखला सबसे बड़ी एवं सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण श्रृंखला का निर्माण करती है। कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण श्रृंखलाएँ धौलाधार और महाभारत श्रृंखलाएँ हैं। इसी श्रृंखला में कश्मीर की घाटी तथा हिमाचल के कांगड़ा एवं कुल्लू की घाटियाँ स्थित हैं। इस क्षेत्र को पहाड़ी नगरों जैसे शिमला, नैनीताल, मसूरी, दार्जीलिंग, श्रीनगर एवं कांगड़ा आदि के लिए जाना जाता है। (iii) बाह्य हिमालय (शिवालिक) – हिमालय की बाह्य श्रृंखला को शिवालिक कहा जाता है। इसका विस्तार 1050 किमी0 की चौड़ाई में है और ऊँचाई 900 मी0 से 1,100 मी0 के बीच है। यह हिमालय की सबसे कम ऊँचाई की पर्वत श्रृंखला है। ये श्रृंखलाएँ उत्तर में स्थित मुख्य हिमालय की श्रृंखलाओं से नदियों द्वारा लायी गयी असंपीडित अवसादों से बनी हैं। ये घाटियाँ बजरी तथा जलोढ़ की मोटी परत से ढकी हुई हैं। निम्न हिमाचल तथा शिवालिक के बीच में स्थित लंबवत् घाटी को दून के नाम से जाना जाता है। दून इस श्रेणी की विशेषता हैं। कुछ प्रसिद्ध दून हैं-देहरादून, कोटलीदून एवं. पाटलीदून। |
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रात और दिन के मौसम में क्या-क्या अन्तर हो सकते हैं? |
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Answer» मौसम में ठंड हो सकती है, गर्मी हो सकती है, वर्षा हो सकती है, तेज हवा और आँधी चल सकती है तथा सुहावना मौसम भी हो सकता है। |
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कोई स्थान अधिक ठंडा क्यों होता है? |
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Answer» कम ताप और समुद्र तल से अधिक ऊँचाई पर ठंड अधिक होती है। |
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सम जलवायु और विषम जलवायु में क्या अन्तर है? |
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Answer» सम जलवायु सर्दी और गर्मी के मौसम में एक जैसी स्थिति रहने को कहते हैं। अर्थात सर्दियों में अधिक सर्दी नहीं और गर्मियों में अधिक गर्मी नहीं, को सम-जलवायु कहते हैं। विषम जलवायु इसके विपरीत होती है। जाड़ों में अधिक जाड़ा, गर्मियों में अधिक गर्मी, कभी वर्षा, कभी सूखा, कभी बाढ़ और लू चलने वाला मौसम विषम जलवायु है। |
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हिमालय की हिमाद्रि एवं शिवालिक श्रेणियों की विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» हिमाद्रि की विशेषताएँ- ⦁ इस क्षेत्र में वर्षपर्यन्त बर्फ जमीं रहती है। शिवालिक की विशेषताएँ- ⦁ भूकम्प और भूस्खलन इस श्रेणी की सामान्य घटना है। यह सबसे नवीन पर्वत श्रेणी है। अतः इसमें मृदा अपरदन भी सबसे अधिक होता है। |
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पूर्वी तटीय मैदानों के उत्तरी तथा दक्षिणी भागों को किस-किस नाम से पुकारा जाता है? |
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Answer» उत्तरी सरकार तथा कोरोमण्डल तट। |
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Give a brief introduction of Brazil. |
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Answer» Brazil:
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कौन-सा मानसून भारत के पूर्वी भाग में वर्षा करता है ? |
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Answer» हिन्द महासागर (बंगाल की खाड़ी) से आने वाला मानसून (दक्षिण-पूर्वी मानसून) भारत के पूर्वी भाग में वर्षा करता है। |
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भारत का सबसे अधिक वर्षा वाला नगर। |
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Answer» भारत का सबसे अधिक वर्षा वाला नगर चेरापूँजी। |
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जाड़े की ऋतु में वर्षा वाले क्षेत्र। |
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Answer» तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश। |
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पश्चिमी तटीय मैदान की भौगोलिक स्थिति एवं विस्तार तथा उसकी तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।याभारत के पश्चिमी तटीय भाग के दोनों नामों को स्थिति सहित लिखिए। |
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Answer» पश्चिमी तटीय मैदान एक सँकरी पट्टी के रूप में विस्तृत हैं। प्रायद्वीप के पश्चिम में खम्भात की खाड़ी से लेकर कुमारी अन्तरीप तक इस मैदान का विस्तार है। इसकी औसत चौड़ाई 64 किमी है, जबकि नर्मदा एवं ताप्ती नदियों के मुहाने के निकट ये 80 किमी तक चौड़े हैं। इस मैदान के उत्तरी भाग को कोंकण तथा दक्षिणी भाग को मालाबार कहते हैं। यहाँ सघन जनसंख्या पायी जाती है। इनकी स्थिति का विवरण निम्नलिखित है| 1. कोंकण का मैदान इस मैदान का विस्तार दमन से लेकर गोआ तक 500 किमी की लम्बाई में | है। इस मैदान की चौड़ाई 50 से 60 किमी के बीच है तथा मुम्बई के निकट सबसे अधिक है। 2. मालाबार का तटीय मैदान–इस मैदान का विस्तार मंगलोर से लेकर कन्याकुमारी तक 500 किमी की लम्बाई में है। इस पर लैगून नामक छोटी-छोटी तटीय झीलें पायी जाती हैं। पश्चिमी तटीय मैदानों की प्रमुख तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ ये मैदान एक सँकरी पट्टी के रूप में विस्तृत हैं। गुजरात में ये अधिकतम चौड़े हैं तथा दक्षिण की ⦁ इस तट पर अनेक ज्वारनदमुख स्थित हैं जिनमें नर्मदा और ताप्ती के ज्वारनदमुख (एस्चुरी) मुख्य हैं। ⦁ दक्षिण में केरल में अनेक लैगून या पश्चजल स्थित हैं। उनके मुख पर बालूमिति या रोधिकाएँ स्थित हैं। |
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डेल्टा की निर्माण प्रक्रिया बताइए। गंगा-ब्रह्मपुत्र के डेल्टा की विशेषताएँ बताइए। |
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Answer» नदी जल में प्रवाह की गति के अनुरूप अवसाद परिवहन की अपार क्षमता होती है। नदी अपने प्रवाह के क्रम में अपने साथ भारी मात्रा में कंकड़, पत्थर, बजरी, बालू, मिट्टी, गाद आदि बहाकर लाती है। नदी के प्रवाह की गति मंद होने से अवसादों का जमाव होने लगता है। मुहाने के निकट जिन नदियों की गति मंद होती है वे नदियों अपने मुंहानों पर बारीक से बारीक तलछट जमा करने को बाध्य हो जाती हैं। यही जमाव नदी के मार्ग में अवरोध बनकर उसे विभिन्न शाखाओं में विभाजित कर देता है। इस प्रकार विभिन्न शाखाओं के द्वारा अवसाद का जमाव विस्तृत भू-भाग पर त्रिभुजाकार रूप ले लेता है। मुहाने पर बने त्रिभुजाकार मैदान को डेल्टा कहते हैं। डेल्टा बहुत समतल और उपजाऊ मैदान है। गंगा-ब्रह्मपुत्र का डेल्टा विश्व में सबसे बड़ा डेल्टा है। गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा की विशेषताएँ- ⦁ यह संसार का सबसे बड़ा डेल्टा है। इसका विस्तार बांग्लादेश और भारत के पश्चिमी बंगाल में है। |
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यदि एक व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो वह कौन-से तटीय मैदान से होकर जाएगा और क्यों? |
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Answer» यदि किसी व्यक्ति को लक्षद्वीप जाना हो तो उसे पश्चिमी तटीय मैदान होकर जाना होगा, क्योंकि यही उसके लिए निकटतम दूरी वाला मार्ग होगा। यह द्वीप केरल तट से 280 किलोमीटर दूर है। |
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हिमालय की तीन प्रमुख श्रेणियों के नाम लिखिए। |
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Answer» (1) महान् या हिमाद्रि हिमालय (2) लघु या मध्य हिमालय (3) बाह्य या शिवालिक हिमालय |
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भारत में ठण्डा मरुस्थल कहाँ स्थित है? इस क्षेत्र की मुख्य श्रेणियों के नाम बताएँ। |
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Answer» भारत में उत्तरी-पश्चिमी यो कश्मीर हिमालय क्षेत्र ठण्डा मरुस्थल कहलाता है। यहाँ वर्षभर तापमान निम्न रहने के कारण सम्पूर्ण क्षेत्र हिमाच्छादित रहता है, इसलिए यह निर्जन क्षेत्र ठण्डा मरुस्थल कहलाता है। वास्तव में यह क्षेत्र वृहत् हिमालय और कराकोरम श्रेणियों के बीच स्थित है। इस क्षेत्र में कराकोरम, जास्कर और लद्दाख श्रेणियाँ हैं। |
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भारत की त्रिस्तरीय भू-आकृति में क्या-क्या समानताएँ पाई जाती हैं? |
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Answer» भारत की त्रिस्तरीय भू-आकृति में निम्नलिखित समानताएँ पाई जाती हैं ⦁ भारत के प्रायद्वीपीय पठार पर युवा स्थलाकृतियाँ पाई जाती हैं जो हिमालय पर्वत क्षेत्र की विशेषता | है। दूसरी ओर हिमालय पर भी घर्षित धरातल मिलते हैं जो प्रायद्वीपीय पठार की विशेषता है। ⦁ प्रायद्वीपीय पठार तथा हिमालय पर्वतमाला के निर्माण की प्रक्रिया में समानता दिखाई देती है। | हिमालय पर्वत के उत्थान के समय प्रायद्वीपीय पठार का एक भाग तथा अरावली पहाड़ियाँ भी। प्रभावित हुई हैं। ⦁ उत्तरी मैदान के निर्माण में हिमालय की तलछट तथा प्रायद्वीपीय पठार की तलछट दोनों का योगदान रहा है। |
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भारत का कौन-सा भू-भाग प्राचीनतम है? |
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Answer» भारत का प्राचीनतम भू-भाग दक्षिण का पठार है। यह कठोर आग्नेय तथा रूपान्तरित शैलों से बना है। यह भाग प्राचीनतम गोण्डवानालैण्ड का भाग है। |
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करेवा भू-आकृति कहाँ पाई जाती है?(क) उत्तरी-पूर्वी हिमालय(ख) पूर्वी हिमालय(ग) हिमाचल-उत्तरांचल हिमालय(घ) कश्मीर हिमालय |
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Answer» सही विकल्प है (घ) कश्मीर हिमालय |
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| 44. |
State whether True or False.A view is a kind of table whose contents are taken from other tables. |
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Answer» This is True. |
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___________ link data from individual tables to increase the usefulness of the database. (A) Relationships (B) Primary Key(C) Foreign Key (D) Table |
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Answer» (A) Relationships |
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What are the advantages of a DBMS? |
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Answer» Advantages of a DBMS: 1. Redundancy is controlled: In File Processing System, duplicate data is created in many places because all the programs have their own files. This creates data redundancy which in turn wastes labor and space. ‘In Database Management System, all the files are integrated into a single database. The whole data is stored only once in a single place so there is no chance of duplicate data. 2. Sharing of Data: In a database, the users of the database can share the data among themselves. There are various levels of authorization to access the data. And consequently, the data can only be shared based on the correct authorization protocols being followed. 3. Data Security: Data Security is a vital concept in a database. Only authorized users should be allowed to access the database and their identity should be authenticated using a username and password. Unauthorized users should not be allowed to access the database under any circumstances as it violates the integrity constraints. 4. Enforces integrity constraints: Constraints are used to store accurate data because there are many users who feed data in the database. Data stored in the database should always be correct and accurate. DBMS provides the capability to enforce these constraints on the database. 5. Provides backup and recovery of data: Data loss is a very big problem for all organizations. In a traditional tile processing system, a user needs to back up the database after a regular interval of time that wastes lots of time and resources. If the volume of data is large then this process may take a very long time. |
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How to define the Domain of a column ‘subject 1’ of MARKS relation. |
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Answer» Range of values from 0 to 100. |
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Match the following. A BDomainTableTupleNo. of rows in a relationAttributeNo. of columns in a relationCardinalityRows in a relationDegreeA pool of valuesRelationColumn in a Table |
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Answer»
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State whether true or False. A view is a kind of table whose contents are taken from other tables. |
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Answer» A view is a king of table whose contents are taken from other tables is True. |
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1. ___________ link data from individual tables to increase the usefulness of the database.2. A ___________ in the context of databases, is a situation that exists between two relational database tables. |
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Answer» 1. Relationships 2. Relationships Relationships Relationships. this is correct answer.
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