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भारत की सुरक्षा, जलवायु विभाजक, जल एवं वन संपदा के लिए हिमालय की उपयोगिता प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» सुरक्षा – हिमालय भारत की उत्तरी सीमा पर प्रहरी की भाँति प्राचीनकाल से भारत की निरंतर सुरक्षा करता आ रहा है। हिमालय की उच्च पर्वत श्रृंखलाओं को पार करना कठिन है, इसीलिए विदेशी आक्रान्ताओं ने इस ओर से भारत को अतिक्रमण करने का साहस नहीं किया। किन्तु आधुनिक सैन्य उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रे के चलते यह अब अभेद्य नहीं रह गया है। जलवायु विभाजक – भारत का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में और उत्तरी भाग शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है, परंतु हिमालय की स्थिति के कारण ही सम्पूर्ण भारत की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है। हिमालय पर्वत श्रेणी के कारण भारत में स्पष्ट रूप से ऋतुचक्र चलता है। हिमालय शीत ऋतु में उत्तर-पूर्वी एशिया से आने वाली ठंडी और शुष्क पवनों को रोककर भारत को अधिक ठंडा और शुष्क होने से बचाता है। दूसरी ओर, ग्रीष्म ऋतु में दक्षिण-पश्चिम मानसून पवनों को रोककर, भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा करने में सहायक होता है। इस प्रकार हिमालय पर्वत जलवायु विभाजक का काम करे, भारत को एक विशिष्ट रूप प्रदान करता है। जल संपदी का भण्डार – हिमालय हिम का घर है। हिमानियाँ मीठे जल का प्रमुख स्रोत हैं। ये हिमानियाँ भारत की प्रमुख नदियों की उद्गम स्थल हैं। अतः इन नदियों में सदैव पानी बना रहता है। ये नदियाँ न केवल पेय जल का स्रोत हैं, अपितु सिंचाई व जल विद्युत के निर्माण में भी ये बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। हिमालय से निकलने वाली नदियों में देश की कुल संभावित जल शक्ति की 60 प्रतिशत क्षमता है। इसके विकास से कृषि तथा उद्योगों के विकास में मदद मिलती है। वन-संपदा का भण्डार – हिमालय प्रदेश में संसार की सभी प्रकार की वनस्पति के दर्शन होते हैं। निम्न ढाल वाले क्षेत्र घने वनों से ढके हैं। हिमालय क्षेत्र में कठोर तथा मुलायम दोनों प्रकार की लकड़ी विपुल मात्रा में मिलती है। वनों की सघनता एवं विविधती पर्याप्त मात्रा में विविध प्रकार की लकड़ी प्रदान करती है। वन वन्य प्राणियों के घर हैं। आज इन क्षेत्रों में दुर्लभ वन्य प्राणियों के भी दर्शन होते हैं। इन वनों में अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियाँ भी प्राप्त होती हैं। |
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