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“भारत एक सुगठित भौगोलिक इकाई है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।

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भारत को तीन भौतिक भागों में बाँटा गया है–उत्तर का विशाल हिमालय पर्वत, उत्तर का विशाल मैदान तथा प्रायद्वीपीय पठार। इनका न केवल आपस में एक-दूसरे से सम्बद्ध हैं, बल्कि ये एक-दूसरे के पूरक भी हैं। इस तरह इन भौतिक विभागों ने मिलकर भारत को एक सुगठित भौगोलिक इकाई बनाने में अपना योगदान दिया है। 

इन तीनों प्रमुख खण्डों का वर्णन इस प्रकार है-

भारत का प्रायद्वीपीय पठारी प्रदेश  – यहाँ लौह-अयस्क, कोयला, ताँबा, बॉक्साइट, मैंगनीज, अभ्रक आदि खनिजों के अपार भंडार हैं। खनिजों पर आधारित उद्योगों के विकास के कारण आज भारत विश्व के प्रमुख औद्योगिक देशों में गिना जाता है। कहवा, रबड़, गर्म मसाले आदि की उपज के निर्यात द्वारा देश को विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत एक सुगठित भौगोलिक इकाई है तथा देश को ऐसा बनाने में उसके विभिन्न भौतिक विभागों ने पूर्ण योगदान दिया है।

उत्तरी विशाल मैदान – ये मैदान हिमालय पर्वतीय प्रदेश से निकलने वाली नदियों के द्वारा लाई गई जलोढ़ मिट्टी से बने हैं। ये मैदान बहुत उपजाऊ हैं। यहाँ विभिन्न खाद्यान्न फसलों के साथ-साथ व्यापारिक फसलें, जैसे-गन्ना, कपास तथा पटसन पैदा की जाती हैं जिन पर यहाँ के कई उद्योग निर्भर करते हैं। जीविकोपार्जन की सुविधाएँ सुलभ होने के कारण देश की आधी से अधिक जनसंख्या इस मैदानी भाग में रहती है।

विशाल हिमालय पर्वत – हिमालय पर्वत का प्रदेश उत्तर दिशा में भारत के प्रहरी का कार्य करता है। इस प्रकार शांति व सुरक्षा के साथ प्रगति करने का अवसर देता है। ऐतिहासिक काल से ऐसा होते रहने से ही भारत अपनी संस्कृति व सभ्यता का विकास कर पाया। हिमालय पर्वत के कारण ही देश को मानसूनी एकता प्राप्त हुई। वर्ष के विभिन्न समयों में ऋतु क्रम की एकता व फसलें पैदा करने के लिए पूरे वर्ष का वर्धन काल भी इसी भौतिक विभाग की देन है। हिमालय पर्वत अपार जल संपदा तथा वन संपदा के लिए जाने जाते हैं। यहाँ अनेक प्रकार के फल, जड़ी-बूटियाँ तथा चाय के भण्डार हैं, जो देश के अन्य भौतिक भागों में रहने वाले लोगों द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं।



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