This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
| 1. |
जोतों की उच्चतम सीमा से क्या अभिप्राय है? |
|
Answer» जोतों की उच्चतम सीमा से अभिप्राय यह है कि भूमि-क्षेत्र की एक ऐसी सीमा निश्चित करना जिससे अधिक भूमि पर किसी व्यक्ति अथवा परिवार का अधिकार न रहे। |
|
| 2. |
कृषि में निम्न भूमि उत्पादकता क्यों है? |
|
Answer» क्योंकि इसमें उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। |
|
| 3. |
वर्तमान में कषि का भारत की राष्ट्रीय आय में क्या योगदान है?(A) 12.6(B) 15.3(C) 14.2(D) 15.8 |
|
Answer» सही विकल्प है (B) 15.3 |
|
| 4. |
HYV का अर्थ है(A) Haryana Youth Variety(B) Huge Yeild Variety(C) High Yeilding Variety(D) इनमें कोई नहीं |
|
Answer» सही विकल्प है (C) High Yeilding Variety |
|
| 5. |
हरित क्रान्ति पर टिप्पणी लिखिए। |
|
Answer» हरित क्रान्ति का अभिप्राय कृषि उत्पादन में उस तेज़ वृद्धि से है जो थोड़े समय में उन्नत किस्म के बीजों तथा रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के फलस्वरूप हुई है। हरित क्रान्ति योजना को कृषि की नई नीति भी कहा जाता है। इसे 1966 में शुरू किया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनाज का उत्पादन बढ़ाकर आत्म-निर्भर होना है। भारत जैसी घनी जनसंख्या और समय-समय पर अनाज की कमी वाले देश में इस योजना का बहुत ही अधिक महत्त्व है। इस योजना के अधीन विभिन्न राज्यों में कुल बोए जाने वाले क्षेत्र के चुने हुए भागों में गेहूँ तथा चावल की नई , किस्में तथा देश में विकसित अधिक उपज देने वाली मक्का, ज्वार, बाजरा की किस्मों का प्रयोग किया गया है। इसके साथ ही बहु-फसली कार्यक्रम, सिंचाई की व्यवस्था व पानी का ठीक प्रबन्ध तथा सूखे क्षेत्रों का योजनाबद्ध विकास किया गया जिससे अनेक फसलों का उत्पादन बढ़ा। यह क्रान्ति पंजाब और हरियाणा में आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई। |
|
| 6. |
“कृषि और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं न कि प्रतिद्वन्द्वी।” इस कथन की विवेचना कीजिए। |
|
Answer» कृषि और उद्योग एक-दूसरे के प्रतिद्वन्द्वी नहीं बल्कि पूरक हैं । कृषि द्वारा उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। उद्योग श्रमिकों की पूर्ति करते हैं। कई प्रकार के अनेक उद्योगों को कच्चे माल की पूर्ति कृषि द्वारा ही की जाती है, जैसे-कच्ची कपास, जूट, तिलहन, गन्ना ऐसे ही कृषि उत्पाद हैं जो उद्योगों को कच्चे माल के रूप में दिए जाते हैं। दूसरी ओर भारतीय कृषि हमारे औद्योगिक उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण खरीददार है, कृषि के लिए कृषि उपकरण जैसे-ट्रैक्टर, कम्बाइन, ड्रिल, हार्वेस्टर इत्यादि उद्योगों से प्राप्त होते हैं। कृषि को डीज़ल, बिजली, पेट्रोल उद्योगों से ही तो प्राप्त होते हैं। अतः हम देखते हैं कि कृषि तथा उद्योग एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। |
|
| 7. |
भारत में निम्न कृषि उत्पादकता के लिए उत्तरदायी किन्हीं तीन प्रमुख कारकों की व्याख्या करें। |
Answer»
|
|
| 8. |
भारत में हरित क्रान्ति के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो कारकों के नाम लिखिए। |
Answer»
|
|
| 9. |
भारत में जोतों की चकबन्दी के लाभ बताइए। |
|
Answer» भारत में चकबन्दी के मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं-
संक्षेप में चकबन्दी के द्वारा विखण्डन की समस्या सुलझ जाती है। खेतों का आकार बड़ा हो जाता है। इससे कृषि उपज बढ़ाने में बहुत अधिक सहायता मिलती है। |
|
| 10. |
“कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है।” इस कथन का स्पष्टीकरण कीजिए। |
|
Answer» कृषि का भारतीय अर्थ-व्यवस्था में एक केन्द्रीय स्थान हैं। कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था में रोजगार की दृष्टि से सबसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। इससे राष्ट्रीय आय में 15.3% की प्राप्ति होती है। कृषि क्षेत्र में कार्यशील जनसंख्या का 46.2% भाग प्रत्यक्ष रूप से लगा हुआ है। इसके अतिरिक्त बहुत-से व्यक्ति कृषि पर निर्भर व्यवसायों में कार्य करके जीविका प्राप्त करते हैं। यह औद्योगिक विकास में भी सहायक है। कृषि जनसंख्या की भोजन आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह व्यापार, यातायात व अन्य सेवाओं के विकास में भी सहायक है। वास्तव में, हमारी अर्थ-व्यवस्था की सम्पन्नता कृषि की सम्पन्नता पर निर्भर करती है। अत: यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कृषि भारतीय अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। |
|
| 11. |
हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए सुझाव दें। |
Answer»
|
|
| 12. |
भारत में हरित क्रान्ति लाने का श्रेय किन व्यक्तियों को जाता है? |
|
Answer» भारत में हरित क्रान्ति लाने का श्रेय डॉ० नोरमान वरलोग तथा डॉ० एम० एन० स्वामीनाथन को जाता है। |
|
| 13. |
भारत में हरित क्रान्ति का क्या प्रभाव पड़ा? |
|
Answer» किसानों की दशा में सुधार। |
|
| 14. |
भारत में हरित क्रान्ति के लिए उत्तरदायी एक तत्त्व बताएं। |
|
Answer» आधुनिक कृषि यन्त्रों का प्रयोग। |
|
| 15. |
भूमि की उच्चतम सीमा क्या है? |
|
Answer» भूमि की उच्चतम सीमा (Ceiling on Land Holding)- भूमि की उच्चतम सीमा का अर्थ है, “एक व्यक्ति या परिवार अधिक-से-अधिक कितनी खेती योग्य भूमि का स्वामी हो सकता है। उच्चतम सीमा से अधिक भूमि भू-स्वामियों से ले ली जाएगी। उन्हें इसके बदले मुआवजा दिया जाएगा।” इस प्रकार जो भूमि ली जाएगी उसे छोटे किसानों, काश्तकारों या भूमिहीन कृषि मजदूरों में बांट दिया जाएगा। भूमि की उच्चतम सीमा का उद्देश्य भूमि के समान तथा उचित प्रयोग को प्रोत्साहन देना है। |
|
| 16. |
हरित क्रान्ति क्या है ? इसे क्यों लागू किया गया और इससे किसानों को कैसे लाभ पहुँचा? संक्षेप में व्याख्या कीजिए। |
|
Answer» हरित क्रान्ति- भारत में यन्त्रीकरण के फलस्वरूप सन् 1967-68 में अनाज के उत्पादन में 1966-67 की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि हुई। किसी एक वर्ष में अनाज के उत्पादन में इतनी वृद्धि किसी क्रान्ति से कम नहीं थी। इसलिए अर्थशास्त्रियों ने इसे हरित क्रान्ति का नाम दिया। कारण- इसे लागू करने का मुख्य कारण कृषि क्षेत्र में अच्छे किस्म के बीज, रासायनिक खाद, आधुनिक यन्त्रों का प्रयोग करने कृषि उत्पादन को बढ़ाना था ताकि देश को खाद्यान्न पदार्थों के लिए विदेशों के आयात पर निर्भर न रहना पड़े। लाभ-
|
|
| 17. |
इस्पात बनाने में मैंगनीज़ का क्या महत्त्व है? |
|
Answer» मैंगनीज़ का मिश्रण इस्पात को मजबूती प्रदान करता है। |
|
| 18. |
निम्नलिखित देशों में से कौन-सा देश विकासशील देश है?(क) कनाडा(ख) चिली(ग) जर्मनी(घ) जापान |
|
Answer» सही विकल्प है (ख) चिली |
|
| 19. |
हरित क्रान्ति भारत की खाद्य समस्या के समाधान में किस प्रकार सहायक हुई है? |
|
Answer» इसके मुख्य कारण हैं —
इसका मुख्य कारण देश में उत्पादन का अधिक होना है। – (ii) व्यापार में वृद्धि-हरित क्रान्ति के फलस्वरूप उत्पादन में काफ़ी वृद्धि हुई है। इससे कृषि उत्पादों को बाज़ार पूर्ति में वृद्धि हुई है, इससे घरेलू व विदेशी व्यापार बढ़ा है। बढ़ा हुआ कृषि उत्पादन निर्यात भी किया जाने लगा है। |
|
| 20. |
कौन-सा देश विकासशील देशों की श्रेणी में नहीं आता है?(क) भारत(ख) चीन(ग) जापान(घ) ब्राजील |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) जापान |
|
| 21. |
भूमि-सुधार से किसानों को मिलने वाले चार लाभों का उल्लेख कीजिए। |
|
Answer» भूमि सुधार से किसानों को मिलने वाले चार लाभ निम्नलिखित हैं –
|
|
| 22. |
यूरेनियम धातु किस प्रकार की ऊर्जा बनाने के काम आती है? |
|
Answer» यूरेनियम धातु परमाणु ऊर्जा बनाने के काम आती है। |
|
| 23. |
भारत में मैंगनीज़ उत्पादन के प्रमुख राज्य कौन-कौन से हैं? |
|
Answer» भारत में उड़ीसा सबसे बड़ा मैंगनीज़ उत्पादक राज्य है। इसके पश्चात् मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान है। आन्ध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात और बिहार राज्यों में भी मैंगनीज़ का उत्पादन होता है। उड़ीसा में मैंगनीज़ की प्रमुख खानें क्योंझर, कालाहांडी तथा मयूरभंज में हैं। मध्य प्रदेश में इस खनिज की खाने बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर आदि में हैं। |
|
| 24. |
विकासशील देशों में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है(क) भारत(ख) जापान(ग) चीन(घ) इण्डोनेशिया |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) चीन |
|
| 25. |
सागर सम्राट नाम के जलपोत से क्या काम लिया जाता है? |
|
Answer» जापान द्वारा निर्मित सागर सम्राट नामक जलपोत से सागरीय क्षेत्र में तेल खोजने का काम लिया जाता है। |
|
| 26. |
बॉक्साइट उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों के नाम बताओ। |
|
Answer» भारत के अनेक क्षेत्रों में बॉक्साइट के निक्षेप पाए जाते हैं। झारखण्ड, गुजरात तथा छत्तीसगढ़ बॉक्साइट के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में भी इसके उत्तम कोटि के भण्डार हैं। विगत कुछ वर्षों में उड़ीसा के बॉक्साइट निक्षेपों का विकास किया गया है। यहां अल्यूमीना तथा एल्यूमीनियम बनाने के लिए एशिया का सबसे बड़ा कारखाना लगाया गया है। |
|
| 27. |
खनिजों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है? |
|
Answer» खनिजों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बड़ा महत्त्व है। निम्नलिखित तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो जाएगी-
|
|
| 28. |
तांबा उत्पादक क्षेत्रों के नाम बताओ। |
|
Answer» आजकल देश का अधिकांश तांबा झारखण्ड के सिंहभूम, मध्य प्रदेश के बालाघाट और राजस्थान के झुंझनु एवं अलवर जिलों से निकाला जाता है। आन्ध्र प्रदेश के खम्मम, कर्नाटक के चित्रदुर्ग और हसन जिलों तथा सिक्किम में भी थोड़े बहुत तांबे का उत्पादन किया जाता है। |
|
| 29. |
मध्य प्रदेश के ऐसे दो जिलों के नाम बताओ जहां लौह-अयस्क पाया जाता है? |
|
Answer» जबलपुर तथा बालाघाट जिलों में लौह-अयस्क पाया जाता है। |
|
| 30. |
विकासशील देशों का प्रधान व्यवसाय है(क) कृषि(ख) उद्योग(ग) व्यापार(घ) पशुपालन |
|
Answer» सही विकल्प है (क) कृषि |
|
| 31. |
हरित क्रान्ति ने भारत की खाद्य समस्या को हल करने में क्या योगदान दिया है ? |
|
Answer» भारत की लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाद्य पदार्थ अथवा अन्न का अधिक-से-अधिक उत्पादन करना आवश्यक था, अत: सरकार ने खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि के लिए कृषि में उन्नत बीज, खाद, रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया, सुनिश्चित जलपूर्ति की व्यवस्था की तथा नवीन उपकरणों का प्रयोग किया। परिणामस्वरूप गेहूँ तथा चावल के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई। खाद्यान्नों के उत्पादन में लायी गयी इस क्रान्ति को ही हरित क्रान्ति कहते हैं। हरित क्रान्ति कार्यक्रम से देश के कृषि उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। सन् 1977 से पूर्व भारत खाद्यान्नों का आयात करता था, अब वह इस क्षेत्र में लगभ आत्मनिर्भर बन गया है। डॉ० सी०एच० हनुमन्तराव के शब्दों में, “हरित क्रान्ति के लाभों में गाँव के सभी वर्गों को हिस्सा मिला है और इससे वास्तविक मजदूरी तथा रोजगार में वृद्धि हुई है।” यदि हरित क्रान्ति को लगन तथा हृदय से लागू किया जाए तो यह कृषि जगत् के लिए वरदान सिद्ध होगी। |
|
| 32. |
हरित क्रान्ति क्या है ? हरित क्रान्ति के लाभों तथा हानियों का उल्लेख कीजिए।याहरित क्रान्ति को परिभाषित कीजिए एवं इसके कोई चार लाभ लिखिए।याहरित क्रान्ति किसे कहते हैं? भारत में हरित क्रान्ति के कोई दो लाभ बताइए।याहरित क्रान्ति से आप क्या समझते हैं? भारत में हरित क्रान्ति को सफल बनाने के लिए सुझाव दीजिए। |
|
Answer» हरित क्रान्ति हरित क्रान्ति का सम्बन्ध खेती की हरियाली और कृषि उत्पादकता को बढ़ाने से है। भारत की चौथी पंचवर्षीय योजना में देश को खाद्यान्नों के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य स्वीकार करते हुए हरित क्रान्ति का शुभारम्भ किया गया। हरित क्रान्ति का सम्बन्ध ऐसी रणनीति से है, जिसमें कृषि की परम्परागत तकनीक के स्थान पर आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि के प्रयास किये गये। आधुनिक कृषिगत उपकरणों, उन्नत बीजों, रासायनिक खादों, सिंचाई सुविधाओं का तेजी से प्रयोग बढ़ाते हुए कृषि क्षेत्र में उत्पादकता की दृष्टि से क्रान्ति लाने के प्रयास किये गये। उत्पादन तकनीक में सुधार करते हुए हल के स्थान पर ट्रैक्टर, गोबर खाद के स्थान पर रासायनिक खाद, परम्परागत घरेलू बीजों के स्थान पर उन्नत उर्वरता वाले बीज और मानसून पर सिंचाई की निर्भरता के स्थान पर ट्यूबवेल, पम्प आदि से सिंचाई करने के प्रयास हरित क्रान्ति के दौर से आरम्भ किये गये। हरित क्रान्ति के लाभ भारतीय कृषि पर हरित क्रान्ति के सफल प्रभावों में निम्नलिखित बिन्दु महत्त्वपूर्ण हैं – 1.हरित क्रान्ति से विभिन्न कृषि-फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। गेहूँ, ज्वार, बाजरा आदि खाद्य फसलों के उत्पादन में हुई तीव्र वृद्धि के कारण भारत आज खाद्यान्न में आत्मनिर्भर हो चुका है। 2.हरित क्रान्ति ने कृषि को एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। आज कृषि किसान के लिए केवल पेट भरने की एक साधन मात्र नहीं है, वरन् आय-अर्जन का एक प्रमुख स्रोत बन चुकी है। 3.कृषि-क्षेत्र के विकास ने देश के औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में कृषि का देश के पूँजी-निर्माण एवं बचतों में पर्याप्त योगदान है। 4.हरित क्रान्ति के कारण खाद्यान्नों की दृष्टि से भारत आत्मनिर्भर हो चुका है, जिससे देश में खाद्यान्नों के आयात में तेजी से कमी आयी है और भुगतान-सन्तुलन की प्रतिकूलता को कम करने में कृषि क्षेत्र ने पर्याप्त योगदान दिया है। 5.हरित क्रान्ति ने कृषि एवं सम्बन्धित क्रियाओं में रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित किये हैं, जिससे देश की व्यावसायिक संरचना विस्तृत एवं आय-अर्जक बन गयी है। 6.हरित क्रान्ति से कृषि श्रमिकों की आर्थिक दशा में सुधार आ गया है तथा यन्त्रों की सहायता मिलने से उनका कार्य भी सरल हो गया है। हरित क्रान्ति के दोष (हानियाँ) भारतीय कृषि पर हरित क्रान्ति के कुछ दोष भी हैं, जो निम्नवत् हैं – 1. कुछ फसलों तक सीमित – हरित क्रान्ति का प्रमुख दोष यह है कि यह गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि फसलों तक ही सीमित है। सभी फसलों को इसका लाभ नहीं मिल सका। व्यावसायिक फसलें इससे अछूती रही हैं। 2. कुछ राज्यों तक सीमित – हरित क्रान्ति कार्यक्रम केवल उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों तक ही सीमित रहा, जिससे राष्ट्र का सन्तुलित विकास नहीं हो पाया। अन्य प्रदेश इससे वंचित रह गये, जिससे प्रादेशिक विषमताएँ बढ़ गयीं। 3. बड़े कृषकों को लाभ – हरित क्रान्ति से केवल बड़े कृषकों को ही लाभ हुआ है, क्योंकि छोटे किसान साधनहीन होने के कारण इस कार्यक्रम का लाभ नहीं उठा सके हैं। 4. लक्ष्य से कम उत्पादन – हरित क्रान्ति का एक दोष यह है कि इसके आधार पर आशानुरूप उत्पादन की दिशा में सफलता प्राप्त नहीं हो सकी। अत: लोगों का विश्वास इस कार्यक्रम से हट गया। 5. पर्यावरण विघटन – हरित क्रान्ति के अनेक पर्यावरणीय दुष्परिणाम हुए हैं। अत्यधिक सिंचाई के कारण भूमिगत जल-स्तर नीचा हो गया है तथा मृदा अपरदन और भूमि उत्पादकता का ह्रास हुआ है। एक ही फसल लगातार बोने तथा उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि के प्राकृतिक तत्त्व विनष्ट हो जाते हैं। इनक दीर्घकालीन दुष्परिणाम होते हैं। हरित क्रान्ति की सफलता सम्बन्धी सुझाव हरित क्रान्ति को सफल बनाने के उपाय/सुझाव निम्नलिखित हैं –
|
|
| 33. |
कौन कृषि आगत नहीं है?(क) बीज(ख) सिंचाई(ग) उद्योग(घ) उर्वरक |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) उद्योग |
|
| 34. |
भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख कृषि पदार्थ हैं –(क) गेहूँ, चावल; चाय, कहवा(ख) चाय, कहवा, कपास, जूट(ग) चाय, मसाले, काजू, तम्बाकू(घ) गन्ना, फल, सब्ज़ियाँ, जूट |
|
Answer» सही विकल्प है (ग) चाय, मसाले, काजू, तम्बाकू |
|
| 35. |
भारत में सबसे अधिक अक किस राज्य में पाया जाता है?(A) बिहार(B) छत्तीसगढ़(C) झारखंड(D) मध्य प्रदेश |
|
Answer» सही विकल्प है (C) झारखंड |
|
| 36. |
आधुनिक युग में अभ्रक का महत्त्व बताओ। भारत में अभ्रक का उत्पादन करने वाले दो मुख्य राज्यों का वर्णन करो। |
|
Answer» महत्त्व-आधुनिक युग में उद्योगों के विकास के कारण अभ्रक का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। इस खनिज का अधिकतर उपयोग बिजली का सामान बनाने में किया जाता है। मोटरों तथा हवाई जहाज़ के शीशों में भी अभ्रक का प्रयोग किया जाता है। अभ्रक उत्पादन राज्य-भारत में अभ्रक का उत्पादन करने वाले मुख्य दो राज्य निम्नलिखित हैं —
|
|
| 37. |
भारत के लौह-अयस्क का सबसे बड़ा आयातक देश है(A) चीन(B) जापान(C) अमेरिका(D) दक्षिण कोरिया |
|
Answer» सही विकल्प है (B) जापान |
|
| 38. |
ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्त्रोतों के नाम बताइए। |
|
Answer» ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोतों के नाम निम्नलिखित हैं-
|
|
| 39. |
भारत में सबसे पुराना परमाणु केंद्र है(A) कल्पाक्कम(B) नरौरा(C) रावत भाटा(D) तारापुर |
|
Answer» सही विकल्प है (D) तारापुर |
|
| 40. |
पवन ऊर्जा के महत्त्व एवं भारत में उपयोग को बताइए। |
|
Answer» पवन ऊर्जा अक्षय है और इसके प्रयोग में खर्चा भी कम बैठता है। दूसरे, दूर स्थित मरुस्थलीय स्थानों पर पवन ऊर्जा के बल परं नये उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। भारत में उपयोग-
|
|
| 41. |
रिक्त स्थानों की पूर्ति करिए(क) सौर ऊर्जा का स्रोत ___ है।(ख) सी०एन०जी० का प्रयोग ___ में करते हैं।(ग) एल०पी०जी० का प्रयोग ___ पकाने में करते हैं।(घ) कमरा छोड़ते समय बिजली, पंखा का स्विच ___ कर देना चाहिए। |
|
Answer» (क) सौर ऊर्जा का स्रोत सूर्य है। |
|
| 42. |
जैव गैस से आप क्या समझते हैं ? |
|
Answer» ग्रामीण क्षेत्रे में गोबर तथा कृषि अपशिष्ट सरलता से उपलब्ध होते हैं। कुछ समय पूर्व तक इन्हें सीधे जलाकर ऊर्जा प्राप्त की जाती थी। किन्तु इससे वायु प्रदूषण होता था और ऊर्जा की हानि भी। अतः अब इनके द्वारा उत्तम गैसीय ईंधने प्राप्त किया जाता है। इन्हें बायोगैस या जैव गैस कहते हैं। |
|
| 43. |
इकोफ्रेन्डिली तकनीकी को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए? |
|
Answer» पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई तकनीक को इकोफ्रेन्डिली तकनीक कहते । हैं। जैसे-कारखानों की चिमनियों में धूम अवक्षेपक लगाना, ईंट-भट्ठे की चिमनियों को ऊँचा करना, बैटरी चालित वाहनों का प्रयोग करना, कारखानों के आस-पास पौधरोपण करना आदि। |
|
| 44. |
ऊर्जा संरक्षण के उपाय लिखिए। |
|
Answer» ऊर्जा संरक्षण के उपाय –
|
|
| 45. |
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार देश के कितने प्रतिशत क्षेत्र पर वनावरण होना चाहिए? |
|
Answer» राष्ट्रीय वन-नीति के अनुसार देश के 33.3% क्षेत्र पर वन होने चाहिए। |
|
| 46. |
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्त्व दर्शाने वाले दो प्रमुख बिन्दु लिखिए। |
|
Answer» भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्त्व दर्शाने वाले दो प्रमुख बिन्दु निम्नलिखित हैं – 1.राजस्व की प्राप्ति 2.उद्योगों का आधार। |
|
| 47. |
ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का मुख्य स्रोत क्या है?(क) नौकरी(ख) व्यापार(ग) उद्योग(घ) कृषि |
|
Answer» सही विकल्प है (घ) कृषि |
|
| 48. |
हरित क्रान्ति सम्बन्धित है –(क) कृषि के व्यापारीकरण से(ख) कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता से(ग) पशुधन विकास से(घ) कृषि उत्पादन में वृद्धि से |
|
Answer» सही विकल्प है (घ) कृषि उत्पादन में वृद्धि से |
|
| 49. |
भारतीय कृषि में किन्हीं पाँच कृषि निविष्टियों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।याकृषि निविष्टियों से क्या तात्पर्य है? भारतीय कृषि के लिए किन्हीं पाँच निविष्टियों की विस्तृत विवेचना कीजिए।याकृषि निविष्टियों से क्या तात्पर्य है ? कृषि उत्पादन बढ़ने में किन्हीं चार निविष्टियों का महत्त्व बताइए।याकृषि की किन्हीं छः निविष्टियों की विवेचना कीजिए।याकृषि की किन्हीं तीन निविष्टियों का महत्त्व बताइए। |
|
Answer» कृषि निविष्टियाँ (इन्पुट्स) कृषि भारत का प्रधान व्यवसाय है। अत: भारतीय कृषकों को कृषि उत्पादन को सम्पन्न क़रने में जिन वस्तुओं तथा सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें कृषि निविष्टियाँ (Inputs) कहा जाता है। प्रमुख कृषि निविष्टियों का विवरण इस प्रकार है – 1. तकनीकी जानकारी – कृषि-कार्य की यह महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कृषि करने की सही तकनीकी की जानकारी शिक्षा के अनौपचारिक तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है। तकनीकी जानकारी के अन्तर्गत बीजों के प्रकार, उर्वरक, फसल-प्रबन्ध, भण्डारण, फसल बीमा, विपणन आदि की जानकारी आती है। खेती की आधुनिक विधियों का प्रयोग करने के लिए किसान को इन सभी की पर्याप्त जानकारी होनी आवश्यक है। 2. स्वयं का श्रम – किसान का निजी एवं उसके परिवार के सदस्यों का श्रम भी कृषि की महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कभी-कभी इनकी संख्या कार्य की आवश्यकता से भी अधिक हो जाती है। 3. भाड़े का श्रम – मजदूरी पर रखे गये श्रम को भाड़े का श्रम कहते हैं। कृषि-कार्य में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे श्रमिकों का भारत में कोई संगठित बाजार नहीं है। फलत: भाड़े के श्रमिकों को उनके श्रम के लिए मजदूरी कम दी जाती है तथा अधिकांशतः मुद्रा के रूप में नहीं दी जाती। 4. पशुधन – बैल, गाय, भैंस आदि पशुधन हैं। पशुधन खेती के लिए बहुत ही मूल्यवान समझा जाता है। ये भी कृषि की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि हैं। जिस कृषक-परिवार के पास जितना अधिक पशुधन होता है, वह उतना ही अधिक सम्पन्न परिवार माना जाता है। 5. कृषि-उपकरण – कृषि-उपकरण में खेती में प्रयुक्त उपस्कर तथा मशीनें आती हैं। इस श्रेणी में लकड़ी एवं लोहे के हल जैसे परम्परागत उपकरण तथा बैलगाड़ी; जैसे-यातायात उपकरण, आधुनिक उपकरण तथा मशीनें; जैसे—नलकूप, ट्रैक्टर, यातायात के लिए तेज गति से चलने वाले ट्रक तथा तीन पहियों वाले वाहन सम्मिलित किये जाते हैं। ये भी कृषि-क्षेत्र की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि हैं। 6. सिंचाई – इसमें परम्परागत एवं आधुनिक दोनों प्रकार के साधन सम्मिलित हैं। यद्यपि सिंचाई के साधनों का प्रयोग सभी प्रकार की खेती के तरीकों तथा फसलों के लिए महत्त्वपूर्ण है, परन्तु विशिष्ट फसलों के उगाने में इनका बहुत अधिक महत्त्व है। खेती के परम्परागत तरीकों की अपेक्षा आधुनिक तरीके सिंचाई पर अधिक निर्भर करते हैं। 7. बीज – बीज कृषि के लिए एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कृषि में उत्पादन बीज की किस्मों पर निर्भर करता है। बीजों की कई किस्में होती हैं। कुछ बीज अधिक उपज देने वाले होते हैं। बीजों का चुनाव उनकी कीमतों तथा अन्य निविष्टियों (जल, उर्वरक आदि) पर निर्भर करता है। 8. उर्वरक एवं कीटनाशी दवाइयाँ – आधुनिक दृष्टि से ये दो महत्त्वपूर्ण निविष्टियाँ हैं। उर्वरक भूमि का उपजाऊपन बढ़ा देता है और कीटनाशी दवाइयाँ फसलों को कीड़े आदि लगने से बचाती हैं। जब इन्हें सिंचाई तथा उत्तम बीज जैसी अन्य निविष्टियों के साथ उचित मात्रा में प्रयोग किया जाता है तो ये भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाकर उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि करते हैं। 9. भण्डारण –भण्डारण की सुविधा से अनाज को कीड़ों तथा मौसम से नष्ट होने से बचाया जा सकता है। यह भी कृषि-क्षेत्र की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। इसकी उचित सुविधाओं के अभाव में भारत में उत्पन्न अनाज का एक बड़ा भाग प्रति वर्ष नष्ट हो जाता है। 10. विपणन –कृषि के उत्पादन के लिए सामयिक वसूली एवं विपणन की सुविधाओं की उचित व्यवस्था करना आवश्यक है। अतः विपणन-सुविधा भी एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। 11. बीमा और साख – फसलों का बीमा करवाने से फसलों की चोरी, नुकसान अथवा अन्य हानियों से पर्याप्त सीमा तक बचा जा सकता है। अत: कृषि के लिए बीमा और साख भी आवश्यक निविष्टियाँ हैं। इससे कृषि उत्पादन की अनिश्चितता पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। 12. वित्त – कृषि में भी उत्पादक को अन्य उत्पादक क्रियाओं की तरह अपने उत्पादन के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। उत्पादन के बाद भी उसे प्रतीक्षा करनी पड़ती है जब तक कि वह बिक नहीं जाता। प्रतीक्षा की इस अवधि के दौरान उसे वित्त (साख) की आवश्यकता पड़ती है। प्रायः वित्त के लिए उसे सहकारी समितियों, साहूकारों, व्यावसायिक बैंकों व ग्रामीण बैंकों से ऋण लेना पड़ता है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कृषि निविष्टियों के अन्तर्गत तकनीकी जानकारी तथा कृषि उपकरण सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके अभाव में कृषि उत्पादन सम्भव नहीं है। |
|
| 50. |
ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों के विकास एवं महत्त्व पर विस्तार से लिखें। |
|
Answer» ऊर्जा के गैर-परम्परागत साधनों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-हाीय ऊर्जा, जैव पदार्थों से प्राप्त ऊर्जा आदि सम्मिलित हैं। विकास- ऊर्जा के गैर-परम्परागत स्रोतों के प्रयोग को बढ़ाने पर हाल के वर्षों में अत्यधिक बल दिया जा रहा है। इस ऊर्जा का वनारोपण, पर्यावरण सुधार, ऊर्जा संरक्षण, रोजगार वृद्धि, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुधार, सामाजिक कल्याण, खेतों में सिंचाई, जैविक खाद उत्पादन आदि क्षेत्रों में विशेष योगदान है। मार्च, 1981 में केन्द्र सरकार ने एक उच्च अधिकार प्राप्त आयोग की स्थापना की थी ताकि अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों का पता लगाया जा सके। 1982 में गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों का विभाग, ऊर्जा मन्त्रालय में स्थापित किया गया। अब गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों के लिए अलग से एक मन्त्रालय स्थापित कर दिया गया है। राज्य सरकारों ने भी अपने यहां गैर-परम्परागत ऊर्जा साधनों के लिए अलग से एजेन्सी स्थापित की हुई है। स्थानीय लोगों की भागीदारी से स्थानीय स्तर पर खाना पकाने की गैस, लघु सिंचाई योजना, पीने का पानी तथा सड़कों पर रोशनी की व्यवस्था के कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पवन ऊर्जा से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था में सहायता मिली है। कई स्थानों पर पवन केन्द्र कार्य कर रहे हैं। यहां से उत्पन्न बिजली को ग्रिड प्रणाली में शामिल कर लिया गया है।
|
|