| 1. |
भारतीय कृषि में किन्हीं पाँच कृषि निविष्टियों के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।याकृषि निविष्टियों से क्या तात्पर्य है? भारतीय कृषि के लिए किन्हीं पाँच निविष्टियों की विस्तृत विवेचना कीजिए।याकृषि निविष्टियों से क्या तात्पर्य है ? कृषि उत्पादन बढ़ने में किन्हीं चार निविष्टियों का महत्त्व बताइए।याकृषि की किन्हीं छः निविष्टियों की विवेचना कीजिए।याकृषि की किन्हीं तीन निविष्टियों का महत्त्व बताइए। |
|
Answer» कृषि निविष्टियाँ (इन्पुट्स) कृषि भारत का प्रधान व्यवसाय है। अत: भारतीय कृषकों को कृषि उत्पादन को सम्पन्न क़रने में जिन वस्तुओं तथा सेवाओं की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें कृषि निविष्टियाँ (Inputs) कहा जाता है। प्रमुख कृषि निविष्टियों का विवरण इस प्रकार है – 1. तकनीकी जानकारी – कृषि-कार्य की यह महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कृषि करने की सही तकनीकी की जानकारी शिक्षा के अनौपचारिक तरीकों से ही प्राप्त की जा सकती है। तकनीकी जानकारी के अन्तर्गत बीजों के प्रकार, उर्वरक, फसल-प्रबन्ध, भण्डारण, फसल बीमा, विपणन आदि की जानकारी आती है। खेती की आधुनिक विधियों का प्रयोग करने के लिए किसान को इन सभी की पर्याप्त जानकारी होनी आवश्यक है। 2. स्वयं का श्रम – किसान का निजी एवं उसके परिवार के सदस्यों का श्रम भी कृषि की महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कभी-कभी इनकी संख्या कार्य की आवश्यकता से भी अधिक हो जाती है। 3. भाड़े का श्रम – मजदूरी पर रखे गये श्रम को भाड़े का श्रम कहते हैं। कृषि-कार्य में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। ऐसे श्रमिकों का भारत में कोई संगठित बाजार नहीं है। फलत: भाड़े के श्रमिकों को उनके श्रम के लिए मजदूरी कम दी जाती है तथा अधिकांशतः मुद्रा के रूप में नहीं दी जाती। 4. पशुधन – बैल, गाय, भैंस आदि पशुधन हैं। पशुधन खेती के लिए बहुत ही मूल्यवान समझा जाता है। ये भी कृषि की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि हैं। जिस कृषक-परिवार के पास जितना अधिक पशुधन होता है, वह उतना ही अधिक सम्पन्न परिवार माना जाता है। 5. कृषि-उपकरण – कृषि-उपकरण में खेती में प्रयुक्त उपस्कर तथा मशीनें आती हैं। इस श्रेणी में लकड़ी एवं लोहे के हल जैसे परम्परागत उपकरण तथा बैलगाड़ी; जैसे-यातायात उपकरण, आधुनिक उपकरण तथा मशीनें; जैसे—नलकूप, ट्रैक्टर, यातायात के लिए तेज गति से चलने वाले ट्रक तथा तीन पहियों वाले वाहन सम्मिलित किये जाते हैं। ये भी कृषि-क्षेत्र की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि हैं। 6. सिंचाई – इसमें परम्परागत एवं आधुनिक दोनों प्रकार के साधन सम्मिलित हैं। यद्यपि सिंचाई के साधनों का प्रयोग सभी प्रकार की खेती के तरीकों तथा फसलों के लिए महत्त्वपूर्ण है, परन्तु विशिष्ट फसलों के उगाने में इनका बहुत अधिक महत्त्व है। खेती के परम्परागत तरीकों की अपेक्षा आधुनिक तरीके सिंचाई पर अधिक निर्भर करते हैं। 7. बीज – बीज कृषि के लिए एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। कृषि में उत्पादन बीज की किस्मों पर निर्भर करता है। बीजों की कई किस्में होती हैं। कुछ बीज अधिक उपज देने वाले होते हैं। बीजों का चुनाव उनकी कीमतों तथा अन्य निविष्टियों (जल, उर्वरक आदि) पर निर्भर करता है। 8. उर्वरक एवं कीटनाशी दवाइयाँ – आधुनिक दृष्टि से ये दो महत्त्वपूर्ण निविष्टियाँ हैं। उर्वरक भूमि का उपजाऊपन बढ़ा देता है और कीटनाशी दवाइयाँ फसलों को कीड़े आदि लगने से बचाती हैं। जब इन्हें सिंचाई तथा उत्तम बीज जैसी अन्य निविष्टियों के साथ उचित मात्रा में प्रयोग किया जाता है तो ये भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाकर उत्पादन में तीव्र गति से वृद्धि करते हैं। 9. भण्डारण –भण्डारण की सुविधा से अनाज को कीड़ों तथा मौसम से नष्ट होने से बचाया जा सकता है। यह भी कृषि-क्षेत्र की एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। इसकी उचित सुविधाओं के अभाव में भारत में उत्पन्न अनाज का एक बड़ा भाग प्रति वर्ष नष्ट हो जाता है। 10. विपणन –कृषि के उत्पादन के लिए सामयिक वसूली एवं विपणन की सुविधाओं की उचित व्यवस्था करना आवश्यक है। अतः विपणन-सुविधा भी एक महत्त्वपूर्ण निविष्टि है। 11. बीमा और साख – फसलों का बीमा करवाने से फसलों की चोरी, नुकसान अथवा अन्य हानियों से पर्याप्त सीमा तक बचा जा सकता है। अत: कृषि के लिए बीमा और साख भी आवश्यक निविष्टियाँ हैं। इससे कृषि उत्पादन की अनिश्चितता पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। 12. वित्त – कृषि में भी उत्पादक को अन्य उत्पादक क्रियाओं की तरह अपने उत्पादन के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है। उत्पादन के बाद भी उसे प्रतीक्षा करनी पड़ती है जब तक कि वह बिक नहीं जाता। प्रतीक्षा की इस अवधि के दौरान उसे वित्त (साख) की आवश्यकता पड़ती है। प्रायः वित्त के लिए उसे सहकारी समितियों, साहूकारों, व्यावसायिक बैंकों व ग्रामीण बैंकों से ऋण लेना पड़ता है। निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि कृषि निविष्टियों के अन्तर्गत तकनीकी जानकारी तथा कृषि उपकरण सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके अभाव में कृषि उत्पादन सम्भव नहीं है। |
|