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हरित क्रान्ति ने भारत की खाद्य समस्या को हल करने में क्या योगदान दिया है ? |
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Answer» भारत की लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाद्य पदार्थ अथवा अन्न का अधिक-से-अधिक उत्पादन करना आवश्यक था, अत: सरकार ने खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि के लिए कृषि में उन्नत बीज, खाद, रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया, सुनिश्चित जलपूर्ति की व्यवस्था की तथा नवीन उपकरणों का प्रयोग किया। परिणामस्वरूप गेहूँ तथा चावल के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि हुई। खाद्यान्नों के उत्पादन में लायी गयी इस क्रान्ति को ही हरित क्रान्ति कहते हैं। हरित क्रान्ति कार्यक्रम से देश के कृषि उत्पादन में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। सन् 1977 से पूर्व भारत खाद्यान्नों का आयात करता था, अब वह इस क्षेत्र में लगभ आत्मनिर्भर बन गया है। डॉ० सी०एच० हनुमन्तराव के शब्दों में, “हरित क्रान्ति के लाभों में गाँव के सभी वर्गों को हिस्सा मिला है और इससे वास्तविक मजदूरी तथा रोजगार में वृद्धि हुई है।” यदि हरित क्रान्ति को लगन तथा हृदय से लागू किया जाए तो यह कृषि जगत् के लिए वरदान सिद्ध होगी। |
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