सहकारी साख समितियों को सुदृढ़ बनाना चाहिए तथा कृषकों को साख उत्पादन क्षमता के आधार पर प्रदान करनी चाहिएं।
सेवा सहकारिताओं द्वारा उर्वरक, दवाइयां, उन्नत बीज, सुधरे हुए कृषि यन्त्र तथा अन्य उत्पादन की आवश्यकताएं उपलब्ध करानी चाहिएं। साख कृषकों को सरलता से प्राप्त होनी चाहिए।
चावल, गेहूं और मोटे अनाजों के लिए प्रेरणादायक मूल्य दो वर्ष पूर्व घोषित किए जाने चाहिएं।
कृषि उपज के विपणन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रत्येक गांव को सघन कृषि के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए तथा उनकी शैक्षणिक, तकनीकी और फार्म प्रबन्ध से सम्बन्धित सहायता करनी चाहिए।