This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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मानव-जीवन में मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्व को स्पष्ट कीजिए।याविभिन्न उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए कि मानव-जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रों में मनोविज्ञान उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण है। |
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Answer» मनोविज्ञान का मूल्य अथवा उपयोगिता एवं महत्त्व (1) व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान में मनोविज्ञान की उपयोगिता – आधुनिक मानव स्वयं को गम्भीर समस्याओं से घिरा पाता है। ये समस्याएँ जीवन के विभिन्न पक्षों से सम्बन्धित हैं और मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, सांवेगिक एवं आध्यात्मिक विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। मनोविज्ञान का ज्ञान इन अवरोधों को हटाने में हमारी पर्याप्त सहायता करता है। बहुत-सी शारीरिक समस्याओं का समाधान मनोवैज्ञानिक विश्लेषण द्वारा सम्भव है। अनुकूलन की समस्या भी मनोविज्ञान के ज्ञान द्वारा हल होती है। मनोविज्ञान के ज्ञान से विभिन्न मानसिक रोगों तथा समस्याओं को दूर करने में सहायता मिलती है। मानव व्यक्तित्व के सन्तुलन तथा विकास में मनोवैज्ञानिक निर्देशन की विशिष्ट भूमिका है। अच्छी आदतों तथा उत्तम चरित्र के निर्माण में मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होते हैं। इस भाँति मनुष्य की व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान में मनोविज्ञान के ज्ञान की अनिवार्यता निर्विवाद है। उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि मानव-जीवन के प्रत्येक पक्ष में मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्त्व स्वयंसिद्ध है। मनोविज्ञान का ज्ञान मनुष्य की दैनिक आवश्यकताओं में बहुमूल्य योगदान प्रदान कर रहा है। आधुनिक युग में मनोविज्ञान के अध्ययन की महती आवश्यकता है और इसकी उपेक्षा करके जन-कल्याण का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता। |
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औद्योगिक परिस्थितियों में मानवीय व्यवहार का अध्ययन करने वाली मनोविज्ञान की शाखा को कहते हैं –(क) व्यावहारिक मनोविज्ञान(ख) सामान्य मनोविज्ञान(ग) औद्योगिक मनोविज्ञान(घ) इनमें से कोई नहीं। |
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Answer» सही विकल्प है (ग) औद्योगिक मनोविज्ञान |
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मनोविज्ञान के अध्ययन क्षेत्र को स्पष्ट कीजिए।यामनोविज्ञान का क्षेत्र बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि इसका क्षेत्र दिनो-दिन बढ़ता जा रहा या मनोविज्ञान के बढ़ते हुए क्षेत्र पर विस्तार से प्रकाश डालिए।या‘बाल मनोविज्ञान से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» मनोविज्ञानं का क्षेत्र (1) सामान्य मनोविज्ञान – सामान्य मनोविज्ञान मानव-व्यवहार के सामान्य पक्षों तथा उसके सैद्धान्तिक स्वरूपों का अध्ययन करता है। यह मनोविज्ञान का एक व्यापक क्षेत्र है जिसके अन्तर्गत मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा, अध्ययन की विधियाँ, संवेग, प्रेरणा, प्रत्यक्षीकरण, सीखना, स्मृति, अवधान, चिन्तन एवं कल्पना, बुद्धि एवं व्यक्तित्व और संवेदना आदि का अध्ययन किया जाता है। मनोविज्ञान के गहन अध्ययन से पूर्व यह आवश्यक समझा जाता है कि मनोविज्ञान के समस्त क्षेत्रों के सामान्य सिद्धान्तों का अध्ययन किया जाए। मनोविज्ञान का क्षेत्र एवं विषय-विस्तार दिन-प्रतिदिन वृद्धि कर रहा है। आधुनिक युग में जीवन का कोई भी क्षेत्र एवं पक्ष ऐसा नहीं है जो मनोविज्ञान के अध्ययन-क्षेत्र से बाहर हो। सच तो यह है कि मनोविज्ञान की विस्तृत होती जा रही परिधि को संक्षिप्त विवरण में सीमित नहीं किया जा सकता है। |
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मनोविज्ञान से आप क्या समझते हैं। इसके आधुनिक स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।यामनोविज्ञान के विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए इसकी उपयुक्त परिभाषा निर्धारित कीजिए।या“मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।यामनोविज्ञान का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसकी आधुनिक परिभाषा का विवेचन कीजिए। |
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Answer» प्राणी कोई व्यवहार कब, क्यों और कैसे करता है? इन प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए ही मनोविज्ञान का जन्म हुआ। मनोविज्ञान के अध्ययन की परम्परा के साथ ही इसकी परिभाषा का प्रश्न उत्पन्न हुआ, क्योंकि परिभाषा के अभाव में किसी विषय का समुचित ज्ञान हो पाना सम्भव नहीं है। लेकिन मनोविज्ञान के अर्थ की परिभाषा को लेकर एक लम्बे समय तक विवाद चलता रहा है। मनोविज्ञान के विकास-क्रम में भिन्न-भिन्न स्तरों पर इसके अर्थ में परिवर्तन किया जाता रहा है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मनोविज्ञान (Psychology) के शाब्दिक अर्थ तथा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का सामान्य विवरण निम्नलिखित है– मनोविज्ञान का अर्थ (Meaning of Psychology) मनोविज्ञान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि(Historical Background of Psychology) लिपजिंग विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला की स्थापना के साथ-साथ यह विषय प्रयोगात्मक विज्ञान की श्रेणी में आ गया और चेतना का विज्ञान स्वीकार किया गया। इस अर्थ में मनोविज्ञान की विषय-वस्तु चेतना की क्रियाओं का अध्ययन करना था। 1913 ई० में वाटसन द्वारा व्यवहारवाद की स्थापना के साथ ही मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान कहा जाने लगा। इस प्रकार समय में परिवर्तन के साथ-साथ मनोविज्ञान का अर्थ भी परिवर्तित होता गया। मनोविज्ञान का अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र 9 मनोविज्ञान के प्रारम्भिक अर्थ से इसके आधुनिक एवं प्रचलित अर्थ तक पहुँचने में निम्नलिखित सोपान प्रकाश-स्तम्भ का कार्य करते हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है प्रथम चरण: आत्म-दर्शन-ईसा से लगभग 500 वर्ष पूर्व, प्रारम्भिक काल में मनोविज्ञान का अध्ययने दर्शनशास्त्र के अन्तर्गत किया जाता था। यूनानी दार्शनिकों ने इस शास्त्र को ‘आत्म-दर्शन’ या ‘मानसिक दर्शन’ कहकर पुकारा था। प्लेटो ने मन और विचार को एक समझा तथा अरस्तू ने इसे ‘मानव की आत्मा का अध्ययन स्वीकार किया। इस प्रकार अपने प्रारम्भिक चरण में मनोविज्ञान का अर्थ ‘मानव की आत्मा के चारों ओर परिक्रमा कर रहा था। द्वितीय चरण : मानसिक व्यापार–सत्रहवीं से अठारहवीं शताब्दी के मध्य चिन्तन की क्रियाओं का क्षेत्र विकसित हुआ जिसने साहचर्यवाद की विचारधारा को पुष्ट किया। अब मानसिक रोगियों तथा अपराधियों का अध्ययन मनोवैज्ञानिक दृष्टि से होने लगा था। इस चरण के प्रमुख विचारकों में रेन डेकार्ते, लाइबनीज, स्पीनोजा, बर्कले तथा डेविड ह्यूम का नाम प्रमुख है। अब मनोविज्ञान का अर्थ प्राणियों के मानसिक व्यापार तथा अनुभवों की ओर केन्द्रित होता जा रहा था। तृतीय चरण : वैज्ञानिक प्रकृति-उन्नीसवीं शताब्दी के आस-पास मनोविज्ञान में जीव विज्ञान तथा भौतिक विज्ञान के नियमों के प्रवेश से मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक समझी जाने लगी। वुण्ट के प्रयासों से लिपजिग (जर्मनी) में मनोविज्ञान की प्रयोगशाला सबसे पहले स्थापित हुई और मेन अथवा चेतना के अनुभवों का मापन प्रयोगों की मदद से सम्भव हो सका। फलत: मनोविज्ञान का अर्थ मानव चेतना से मानव व्यवहार की ओर खिसकने लगा। इस चरण के विचारकों में वुण्ट के अलावा वेबर, गाल्टन, फेकनर, कैटल, जेम्स तथा ऐबिंगहास के नाम मुख्य हैं। चतुर्थ चरण : व्यवहारवादी दृष्टिकोण–पावलोव के प्रतिबद्ध अनुक्रिया सिद्धान्त से प्रभावित वाटसन ने मनोविज्ञान को व्यवहार का नया अर्थ प्रदान किया। मैक्डूगल ने मनोविज्ञान को जीवित वस्तुओं के व्यवहार का विधायक विज्ञान बताया। मनोविश्लेषक फ्रायड ने अतृप्त इच्छाओं, कर्टलीविन ने ‘मनोवैज्ञानिक क्षेत्र की परिकल्पना’ तथा वर्दाईमर, कोहलर व कोफ्का ने ‘गेस्टाल्टवाद’ की क्विारधारा के माध्यम से मानव-व्यवहार को समझाया। स्पष्टत: बीसवीं शताब्दी के इस चरण में मनोविज्ञान को व्यवहारवादी दृष्टि से युक्त एक नया अर्थ मिला। मनोविज्ञान के ऐतिहासिक अध्ययन पर आधारित उपर्युक्त चारों सोपान स्पष्ट करते हैं कि आत्मा, मन और चेतना-सम्बन्धी अर्थ बदलता हुआ मनोविज्ञान धीरे-धीरे व्यवहार के विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित हो गया। इस सन्दर्भ में मनोविज्ञान की बदलती हुई परिभाषाओं का विवरण निम्नवर्णित है मनोविज्ञान की परिभाषा(Definition of Psychology) (1) मनोविज्ञान आत्मा का विज्ञान है (Psychology is the Science of Soul) – सर्वप्रथम प्लेटो ने मनोविज्ञान को आत्मा का विज्ञान बताया। बाद में अरस्तू ने भी इसकी पुष्टि की। मनोविज्ञान की आधुनिक परिभाषाएँ (Modern Definitions of Psychology) ⦁ मैक्डूगल के अनुसार, “मनोविज्ञान एक ऐसा विधेयक विज्ञान है जिसमें जीवों के व्यवहार का अध्ययन होता है।” निष्कर्ष – उपर्युक्त परिभाषाओं का अध्ययन करने पर मनोविज्ञान की निम्नलिखित विशेषताओं पर प्रकाश पड़ता है. मनोविज्ञान की उपयुक्त परिभाषा – मनोविज्ञान की उपयुक्त परिभाषाओं की समीक्षा करने से यह ज्ञात होता है कि इनमें से कोई भी परिभाषा सर्वमान्य कहलाने की अधिकारी नहीं है। प्रत्येक परिभाषा में कुछ-न-कुछ दोष अवश्य है। अत: यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि एक आदर्श परिभाषा की कसौटी पर किस परिभाषा को खरा समझा जाए। यद्यपि मैक्डूगल और वुडवर्थ की परिभाषाएँ एक ही सीमा तक तर्क संगत समझी जाती हैं, तथापि उसके आधार पर यह जोड़ना उचित होगा कि “मनोविज्ञान प्राणियों के व्यवहार का विधायक विज्ञान है और वातावरण के प्रति उन समस्त अनुक्रियाओं का क्रमबद्ध अध्ययन करता है जो उसके परिवेश के साथ समायोजन में सहायक होते हैं।” |
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उद्योग मनोविज्ञान से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» औद्योगिक मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है जिसका सम्बन्ध मनोविज्ञान के व्यावहारिक पक्ष से है। औद्योगिक मनोविज्ञान के अन्तर्गत मुख्य रूप से औद्योगिक एवं व्यावसायिक पर्यावरण में होने वाले मानवीय व्यवहार का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। औद्योगिक मनोविज्ञान सम्बन्धित क्षेत्र की समस्याओं के लक्षणों, कारणों एवं समाधान के उपायों का भी अध्ययन करता है। |
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मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्त्व के मुख्य क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» मानव-जीवन के प्रायः सभी क्षेत्रों में मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्त्व को स्वीकार किया जा चुका है। मनोविज्ञान के महत्त्व एवं उपयोगिता के मुख्य क्षेत्र हैं – ⦁ व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान का क्षेत्र |
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निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए –⦁ साइकोलॉजी (Psychology) का शाब्दिक अर्थ है ………………………. |⦁ मनोविज्ञान को प्रारम्भिक अर्थ ………………………. था।⦁ प्रारम्भिक काल में मनोविज्ञान का अध्ययन ………………………. के अन्तर्गत किया जाता था।⦁ अरस्तू ने मनोविज्ञान को ………………………. के रूप में प्रतिपादित किया था।⦁ सत्रहवीं तथा अठारहवीं शताब्दी में मनोविज्ञान को ………………………. माना जाता था।⦁ विलियम जेम्स के अनुसार मनोविज्ञान ………………………. का विज्ञान है।⦁ प्राणी के व्यवहार का अध्ययन ………………………. विषय के अन्तर्गत किया जाता है।⦁ मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान मानने वाले विद्वानों को ………………………. कहते हैं।⦁ मनोविज्ञान ………………………. का वैज्ञानिक अध्ययन है।⦁ मनोविज्ञान व्यवहार का ………………………. विज्ञान है।⦁ मनोविज्ञान वह विज्ञान है जो विभिन्न परिस्थितियों में प्राणी के ………………………. का अध्ययन करता है।⦁ जब मनुष्य का व्यवहार सामान्य नहीं होता है तो उसे ………………………. व्यवहार कहा जाता है।⦁ एडविन जी० बोरिंग के अनुसार मनोविज्ञान ………………………. का अध्ययन है।⦁ मनोविज्ञान की एक विशेषता तथ्यात्मकता है और यह ………………………. कहलाता है।⦁ मनोविज्ञान द्वारा प्रतिपादित समस्त सिद्धान्त ………………………. आधारित होते हैं।⦁ मनोविज्ञान का अध्ययन-क्षेत्र ………………………. है।⦁ मनोविज्ञान न केवल सैद्धान्तिक दृष्टिकोण से बल्कि ………………………. दृष्टिकोण से भी उपयोगी है।⦁ मनोविज्ञान द्वारा व्यक्ति के सामान्य तथा ………………………. दोनों प्रकार के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।⦁ मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना ………………………. ने की थी।⦁ विलियम वुण्ट के प्रयासों से विश्व में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला ………………………. में स्थापित की गयी थी।⦁ बच्चों की समस्याओं तथा व्यवहार के अध्ययन से सम्बन्धित मनोविज्ञान का क्षेत्र है ………………………. | |
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Answer» ⦁ साइकोलॉजी (Psychology) का शाब्दिक अर्थ है आत्मा का विज्ञान | |
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मनोविज्ञान की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» मनोविज्ञान एक नव-विकसित विज्ञान है। विकास-क्रम में मनोविज्ञान को भिन्न-भिन्न रूप में प्रतिपादित किया जाता रहा है, परन्तु अब इसका अर्थ एवं क्षेत्र आदि निर्धारित हो गया है। वर्तमान मान्यताओं के अनुसार मनोविज्ञान की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं ⦁ मनोविज्ञान मनाव और पशु दोनों के व्यवहार का अध्ययन करने वाला एक विधायक विज्ञान है। |
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मनोविज्ञान की मुख्य शाखाओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» मनोविज्ञान व्यवहार का विधायक विज्ञान है। व्यवहार के अनेक पक्ष एवं रूप हैं; अतः मनोविज्ञान का अध्ययन क्षेत्र भी अत्यधिक व्यापक है। अध्ययन की सुविधा के लिए मनोविज्ञान की विभिन्न शाखाएँ निर्धारित की गयी हैं। मनोविज्ञान की मुख्य शाखाएँ हैं – ⦁ सामान्य मनोविज्ञान |
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क्या मनोविज्ञान द्वारा पूर्वानुमान या भविष्यवाणी करना सम्भव है? |
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Answer» विज्ञान की एक अनिवार्य विशेषता है-अपने क्षेत्र में पूर्वानुमान या भविष्यवाणी करना। मनोविज्ञान भी एक विज्ञान होने के नाते अपने अध्ययन क्षेत्र से सम्बन्धित पूर्वानुमान या भविष्यवाणी प्रस्तुत करता है। मनोविज्ञान द्वारा विभिन्न परीक्षणों के आधार पर मानव-व्यवहार एवं व्यक्तित्व के विषय में पूर्वानुमान प्रस्तुत किये जाते हैं। इस प्रकार के पूर्वानुमान व्यावसायिक वरण एवं निर्देशन आदि के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध होते हैं। |
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मनोविज्ञान को मन का विज्ञान मानना क्यों छोड़ दिया गया? |
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Answer» मन के स्वरूप के स्पष्ट न हो पाने के कारण ही मनोविज्ञान को मन का विज्ञान मानना छोड़ दिया गया। |
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मनोविज्ञान की कोई आधुनिक परिभाषा लिखिए। |
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Answer» मनोविज्ञान की एक आधुनिक परिभाषा मैक्डूगल ने इन शब्दों में प्रतिपादित की है, मनोविज्ञान एक ऐसा विधायक विज्ञान है जिसमें जीवों के व्यवहार का अध्ययन होता है।” |
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प्राचीन यूनानी विद्वान मनोविज्ञान को किस रूप में प्रतिपादित करते थे? |
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Answer» प्राचीन यूनानी विद्वान मनोविज्ञान को ‘आत्म-दर्शन’ अथवा ‘मानसिक दर्शन के रूप में प्रतिपादित करते थे। |
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मनोविज्ञान द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त किस प्रकार के होते हैं? |
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Answer» प्रत्येक विज्ञान अपने व्यवस्थित अध्ययन के आधार पर कुछ सिद्धान्त प्रस्तुत करता है। मनोविज्ञान द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त सामान्य रूप से सार्वभौमिक (Universal) होते हैं। सार्वभौमिक सिद्धान्त उन सिद्धान्त को माना जाता है जिन पर देश-काल या पात्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मनोविज्ञान के सिद्धान्त भी देश-काल के प्रभाव से मुक्त हैं। समान परिस्थितियों में भिन्न-भिन्न देश-काल में मनोविज्ञान के सिद्धान्त पूर्ण रूप से प्रामाणिक सिद्ध होते हैं। |
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“मनोविज्ञान एक विधायक विज्ञान है।” इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» मनोविज्ञान की वैज्ञानिक प्रकृति को निर्धारित करते हुए यह कहा जाता है कि मनोविज्ञान एक विधायक विज्ञान (Positive Science) है। विज्ञानों की प्रकृति को ध्यान में रखकर किये गये वर्गीकरण के अन्तर्गत विज्ञान के दो मुख्य प्रकार निर्धारित किये गये हैं, जिन्हें क्रमश: ‘विधायक विज्ञान तथा नियामक विज्ञान’ कहा गया है। इस वर्गीकरण के अन्तर्गत विधायक विज्ञान उन विज्ञानों को कहा जाता है जो केवल तथ्यों का अध्ययन करते हैं तथा अपने अध्ययन के आधार पर तथ्यात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार विधायक विज्ञान क्या है की बात करते हैं। जहाँ तक नियामक विज्ञानों का प्रश्न है, वे मूल्यों एवं आदर्शों का अध्ययन एवं विवेचन करते हैं। ये विज्ञान अपने अध्ययन के आधार पर मूल्यात्मक निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं। नियामक विज्ञान सदैव ‘क्या होना चाहिए’ की बात करते हैं। अब प्रश्न उठता है कि मनोविज्ञान के अध्ययन किस प्रकार के होते हैं? मनोविज्ञान के समस्त अध्ययन तथ्यों से सम्बन्धित होते हैं। मनोविज्ञान द्वारा प्रतिपादित निष्कर्ष भी तथ्यात्मक होते हैं। मनोविज्ञान को मूल्यों एवं आदर्शों से कोई सरोकार नहीं होता। मनोविज्ञान के इस दृष्टिकोण को ही ध्यान में रखते हुए इसे एक विधायक विज्ञान स्वीकार किया गया है। |
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आधुनिक मनोविज्ञान को विज्ञान की श्रेणी में क्यों रखा जाता है ?याआप किस प्रकार सिद्ध करेंगे कि मनोविज्ञान एक विज्ञान है ?यामनोविज्ञान की प्रकृति का उल्लेख करते हुए इसकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।” |
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Answer» मनोविज्ञान की प्रकृति (Nature of Psychology) आधुनिक मनोविज्ञान एक विज्ञान है (Modern Psychology is a Science) (1) आनुभविक अध्ययन – मनोविज्ञान में प्राणी के व्यवहारों एवं मानसिक क्रियाओं का अध्ययन प्रयोग, तथा निरीक्षण विधि के द्वारा किया जाता है। अध्ययन के परिणाम वस्तुनिष्ठ और पूर्णतया विश्वसनीय होते हैं। मनोवैज्ञानिक प्रयोग के परिणामों की वैधता की जाँच प्रयोग की पुनरावृत्ति द्वारा कर सकते हैं। इसी भाँति आँकड़ों की जॉच भी की जा सकती है। विषय-वस्तु का ऐसा आनुभविक अध्ययुन विज्ञान के अन्तर्गत ही सम्भव है। इस तरह मनोविज्ञान एक विज्ञान की श्रेणी में आ जाता है। उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर निर्विरोध कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान का अध्ययन आनुभविक है। इसकी विषय-वस्तु से सम्बन्धित सभी तथ्य क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित हैं जिनके आधार पर किसी सिद्धान्त का प्रतिपादन किया ज़ सकता है। इसमें वैज्ञानिक प्रविधियों द्वारा व्यवहार एवं मानसिक क्रियाओं का मापन किया जा सकता है तथा इसके समस्त पद भली प्रकार परिभाषित हैं और इसी कारण मनोविज्ञान भी एक विज्ञान है। मनोविज्ञान की वैज्ञानिकता की विशेषताएँ(Characteristics of Psychology as a Science) मनोविज्ञान को विज्ञान सिद्ध करने वाली कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – निष्कर्षतः मनोविज्ञान की ये विशेषताएँ; यथा—वैज्ञानिक पद्धति, व्यापकता, तथ्यात्मकता, सार्वभौमिकता, कार्य-कारण सम्बन्ध तथा पूर्वानुमान; इसे पूरी तरह विज्ञान बना देते हैं। हाँ, मनोविज्ञान तथा प्राकृतिक विज्ञानों के बीच एक आधारभूत अन्तर अवश्य है। मनोविज्ञान प्राणियों के व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है, जबकि प्राकृतिक विज्ञान स्थूल तत्त्वों से सम्बन्ध रखते हैं। |
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मनोविज्ञान द्वारा किस प्रकार के मानव-व्यवहार का अध्ययन किया जाता है?(क) केवल सामान्य व्यवहार का(ख) केवल असामान्य व्यवहार का(ग) सामान्य तथा असामान्य दोनों प्रकार के व्यवहार का(घ) शिष्ट व्यवहार का |
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Answer» (ग) सामान्य तथा असामान्य दोनों प्रकार के व्यवहार का |
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“मनोविज्ञान एक ऐसा विधायक विज्ञान है जिसमें जीवों के व्यवहारों का अध्ययन होता है।” इस परिभाषा के प्रतिपादक हैं(क) विलियम जेम्स।(ख) विलियम मैक्डूगल(ग) विलियम वुण्ट(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) मिलियने मैक्डूगल |
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मनोविज्ञान की किस शाखा के अन्तर्गत व्यक्ति के असामान्य व्यवहार का अध्ययन किया जाता है? |
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Answer» असामान्य मनोविज्ञान। |
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मानव-जीवन में मनोविज्ञान की उपयोगिता को निर्धारित करने वाली मनोविज्ञान की शाखा को क्या कहते हैं? |
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Answer» व्यावहारिक मनोविज्ञान। |
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शैक्षिक परिस्थितियों में मानव-व्यवहार का अध्ययन करने वाली मनोविज्ञान की शाखा को कहते हैं(क) बाल मनोविज्ञान(ख) शिक्षा मनोविज्ञान(ग) व्यावहारिक मनोविज्ञान(घ) सामान्य मनोविज्ञान |
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Answer» सही विकल्प है (ख) शिक्षा मनोविज्ञान |
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मनोविज्ञान अपने आप में एक(क) रोचक विज्ञान है।(ख) आदर्श विज्ञान है ।(ग) भौतिक विज्ञान है।(घ) विधायक विज्ञान है। |
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Answer» सही विकल्प है (घ) विधायन विज्ञान है |
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मनोविज्ञान की किस शाखा को सम्बन्ध मानसिक समस्याओं के निदान से है?(क) विकासात्मक मनोविज्ञान(ख) वैयक्तिक मनोविज्ञान(ग) नैदानिक मनोविज्ञान(घ) तुलनात्मक मनोविज्ञान |
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Answer» (ग) नैदानिक मनोविज्ञान |
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अन्तर्दर्शन विधि द्वारा किस प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है? |
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Answer» अन्तर्दर्शन विधि के अन्तर्गत सम्बन्धित व्यक्ति के आत्म-निरीक्षण के माध्यम से ही उसकी मानसिक क्रियाओं तथा अनुभवों आदि की जानकारी प्राप्त की जाती है। |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र-भौगोलिक सूचना तन्त्र (G.I.S.) एक ऐसा सूचना तन्त्र है जिसे भौगोलिक अथवा स्थानिक आँकड़ों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए बनाया गया है। यह वास्तव में एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों को शामिल करने के साथ-साथ उनके संसाधन और विश्लेषण की क्षमता भी होती है। भौगोलिक सूचना तन्त्र के प्रकार स्थानिक उपग्रहों के भण्डारण और विश्लेषण की तकनीक के आधार पर भौगोलिक सूचना तन्त्र निम्नलिखित दो प्रकार का होता है 1. रेखाएंज- यह मानचित्रों, फोटोग्राफों तथा अन्य दो आयामी वितरण को अंक रूप में भण्डारित करने की एक पद्धति है। यह पद्धति स्थान के अनुसार निरन्तर बदलने वाली परिघटनाओं को हैण्डल करने के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। यही कारण है कि पर्यावरण विज्ञानों में रेखाएंज पद्धति का उपयोग निरन्तर बढ़ रहा है। 2. सदिश- इस पद्धति में सभी वस्तुओं का अंकन बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में किया जाता है। अंकीकरण की इस पद्धति में ‘X’, ‘Y निर्देशांकों का उपयोग किया जाता है। |
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उपरिशायी विश्लेषण क्या है? |
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Answer» उपरिशायी विश्लेषण में भू-संदर्भित सूचना के प्रक्रमण, स्थिति निर्धारण आदि सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है। |
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किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक स्थान पर क्या है?” |
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Answer» रेखा(ज। किस पद्धति से पता चलता है कि “प्रत्येक वस्तु कहाँ है?” उत्तर-सदिश पद्धति से। |
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प्रमुख व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक का नाम है(क) पावलोव(ख) वाटसन(ग) होल(घ) एडलर |
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Answer» सही विकल्प है (ख) वाटसन |
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मनोवैज्ञानिक अध्ययन के लिए मुख्य रूप से कौन-कौन सी विधियाँ अपनायी जाती हैं? |
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Answer» ⦁ अन्तर्दर्शन विधि |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र एक आँकड़ा संचय तन्त्र है जिसमें भौगोलिक आँकड़ों का संचयन, संगणना और विश्लेषण किया जाता है। |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण क्या हैं? |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र में हस्तचलित विधि के गुण निम्नलिखित हैं ⦁ प्रयोक्ता प्रदर्शित किए जाने वाले स्थानिक लक्षणों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछ सकते हैं। |
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सदिश भौगोलिक सूचना तन्त्र में आँकड़ों का प्रदर्शन कैसे किया जाता है? |
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Answer» बिन्दुओं, रेखाओं और क्षेत्र के रूप में। |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र में किसी वस्तु या वाहन की स्थिति कैसे प्रदर्शित की जाती है? |
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Answer» अक्षांशों व देशान्तरों के माध्यम से स्थिति प्रदर्शित की जाती है। |
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अन्तर्दर्शन विधि को तटस्थ मूल्यांकन प्रस्तुत कीजिए |
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Answer» अन्तर्दर्शन विधि मनोवैज्ञानिक अध्ययन की एक मौलिक विधि है। भले ही इस विधि की कुछ सीमाएँ एवं कमियाँ हैं, परन्तु इन कमियों को अभ्यास, स्मृति एवं प्रशिक्षण के माध्यम से कम किया जा सकता है तथा इस विधि को अधिक विश्वसनीय, वैज्ञानिक एवं लाभप्रद बनाया जा सकता है। इस विधि के माध्यम से पशुओं, बालकों और असामान्य तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों का अध्ययन नहीं किया जा सकता। इस विधि के माध्यम से प्राप्त होने वाले निष्कर्ष आत्मगत होते हैं; अतः इस विधि द्वारा किये गये अध्ययन को कम वस्तुनिष्ठ तथा कम तथ्यात्मक माना जाता है। यही कारण है। कि मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में अन्तर्दर्शन विधि की तुलना में निरीक्षण तथा प्रयोगात्मक विधियों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है। वैसे यह सत्य है कि मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में अन्तर्दर्शन विधि का सैद्धान्तिक महत्त्व है तथा व्यवहार में इसे एक पूरक विधि के रूप में अपनाया जाता है। |
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निरीक्षण विधि के मुख्य चरणों अथवा पदों का उल्लेख कीजिए।यानिरीक्षण विधि के चरणों को सोदाहरण समझाइए। |
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Answer» निरीक्षण विधि के प्रमुख चरण अथवा पद निम्नलिखित हैं (1) उपयुक्त योजना को निर्माण – अध्ययन को उद्देश्यपूर्ण बनाने की दृष्टि से अध्ययनकर्ता को सबसे पहले समस्या के सम्बन्ध में उपयुक्त योजना बना लेनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि किन व्यक्तियों के किस प्रकार के व्यवहार का निरीक्षण किया जाना है। अध्ययन का समय, आवश्यक यन्त्र तथा क्षेत्र आदि का निश्चय भी पहले से ही कर लेना चाहिए। |
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निम्नलिखित वाक्यों में रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए –⦁ मनोविज्ञान के विकास के प्रथम चरण में अध्ययन की मुख्य विधि …………………. ही थी।⦁ जब व्यक्ति अपनी मानसिक क्रियाओं को स्वयं अनुभव एवं विश्लेषण करता है, तो अध्ययन की यह विधि …………………. कहलाती है।⦁ मनोविज्ञान की अन्तर्दर्शन विधि को …………………. भी कहा जाता है।⦁ …………………. अध्ययन विधि का प्रमुख दोष आत्मगत परिणाम का होना है।⦁ अन्तर्दर्शन विधि को …………………. नहीं माना जा सकता।⦁ अन्तर्दर्शन विधि द्वारा प्राप्त होने वाली जानकारी सदैव …………………. ही होती है।⦁ एक अबोध बालक के व्यवहार के अध्ययन के लिए …………………. को नहीं अपनाया जा सकता।⦁ सम्बन्धित व्यक्ति के व्यवहार का प्रत्यक्ष अध्ययन करने वाली विधि को …………………. कहते हैं।⦁ छोटे बच्चों, असामान्य व्यक्तियों तथा पशुओं के व्यवहार के अध्ययन के लिए …………………. ही सर्वोत्तम घिधि मानी जाती है।⦁ सामान्य रूप से …………………. परिस्थितियों में निरीक्षण विधि द्वारा अध्ययन किया जाता है।⦁ निरीक्षणकर्ता की …………………. से निरीक्षण विधि द्वारा प्राप्त निष्कर्षों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।⦁ निरीक्षणकर्ता के पूर्वाग्रह निरीक्षण विधि द्वारा किये गये अध्ययन के निष्कर्षों पर …………………. प्रभाव डालते हैं।⦁ मनोविज्ञान के आधुनिक विद्वानों के अनुसार मनोविज्ञान की सर्वोत्तम अध्ययन विधि …………………. है।⦁ मनोविज्ञान की अध्ययन विधियों में सबसे अधिक वैज्ञानिक …………………. विधि है।⦁ मनोविज्ञान को विज्ञान का दर्जा दिलाने का श्रेय इसकी …………………. अध्ययन विधि का है।⦁ सामान्यत: चर …………………. और …………………. प्रकार के होते हैं।⦁ प्रहस्तन द्वारा जिस चर को घटा-बढ़ाकर व्यवहार पर उसका प्रभाव ज्ञात किया जाता है, उसे …………………. चर कहते हैं।⦁ मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला …………………. विश्वविद्यालय में …………………. द्वारा स्थापित की गई।⦁ 1879 में लिपजिंग में मनोविज्ञान की प्रथम प्रयोगशाला की स्थापना …………………. ने की थी।⦁ प्रयोग विधि के माध्यम से अध्ययन करने के लिए सर्वप्रथम एक …………………. का निर्माण किया जाता है।⦁ असामान्य व्यवहार तथा मनोविकारों के कारणों को जानने के लिए …………………. विधि को अपनाया जाता है।⦁ निरीक्षण विधि की तुलना में नैदानिक विधि का क्षेत्र …………………. है।⦁ प्रयोगात्मक विधि एक वैज्ञानिक विधि है तथा अन्तर्दर्शन विधि …………………. है। |
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Answer» ⦁ अन्तर्दर्शन विधि |
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भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक क्या हैं? |
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Answer» भौगोलिक सूचना तन्त्र के महत्त्वपूर्ण घटक हैं ⦁ हार्डवेयर |
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कितने प्रकार के आँकड़े भौगोलिक सूचना प्रदान करते हैं(a) दो(b) तीन(c) चार(d) पाँच। |
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Answer» सही विकल्प है (a) दो। |
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स्थानीय आँकड़ों का प्रकार है(a) बिन्दु(b) रेखा(c) क्षेत्र(d) ये सभी। |
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Answer» सही विकल्प है (d) ये सभी। |
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चित्ररेखापुंज (रैस्टर) आँकड़ा फॉरमेट का एक अवगुण क्या है(क) सरल आँकड़ा संरचना(ख) सहज एवं कुशल उपरिशायी(ग) सुदूर संवेदन प्रतिबिम्ब के लिए सक्षम(घ) कठिन परिपथ चाल विश्लेषण। |
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Answer» (क) सरल ऑकड़ा संरचना। |
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निरीक्षण विधि की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के लिए अपनायी जाने वाली निरीक्षण विधि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – ⦁ निरीक्षण विधि के अन्तर्गत सम्बन्धित विषय, व्यवहार या घटना का अध्ययन पूर्ण सावधानीपूर्वक किया जाता है। |
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शैक्षिक समस्या के निदान के लिए आप किस विधि का उपयोग उचित समझते हैं? समझाइए। |
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Answer» शैक्षिक समस्या से आशय है किसी बालक के शैक्षिक परिस्थितियों में व्यवहार की असामान्यता; जैसे—बालक का प्रतिदिन स्कूल से भाग जाना या गृह-कार्य को बिल्कुल नहीं करना। इस प्रकार के असामान्य व्यवहार अर्थात् शैक्षिक समस्या के निदान के लिए नैदानिक निरीक्षण विधि को उपयोग में लाना उचित होता है। नैदानिक निरीक्षण द्वारा असामान्य व्यवहार का उचित निदान हो जाता है तथा इस निदान के आधार पर ही उस असामान्य व्यवहार का सुधार भी किया जा सकता है। |
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निरीक्षण विधि के कोई दो गुण स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» (i) निरीक्षण विधि में पर्याप्त वस्तुनिष्ठता पायी जाती है तथा इसके माध्यम से व्यापक क्षेत्र में अध्ययन किया जा सकता है। इसके साथ इस विधि के माध्यम से स्वाभाविक परिस्थितियों में अध्ययन किया जाता है। (ii) मनोविज्ञान सामान्य व्यक्तियों के साथ-ही-साथ असामान्य व्यक्तियों के व्यवहार का भी अध्ययन करता है। यह अध्ययन निरीक्षण विधि द्वारा ही किया जा सकता है। इसी प्रकार पशु व्यवहार का अध्ययन भी निरीक्षण विधि द्वारा ही किया जाता है। |
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स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी में शामिल है(a) सुदूर संवेदन(b) भौगोलिक सूचना तन्त्र(c) वैश्विक स्थिति-निर्धारण तन्त्र(d) उपर्युक्त सभी। |
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Answer» (d) उपर्युक्त सभी। |
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स्थानिक सूचना तन्त्र का घटक है(a) हार्डवेयर(b) सॉफ्टवेयर(c) आँकड़े(d) ये सभी। |
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Answer» सही विकल्प है (d) ये सभी। |
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स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» स्थानिक सूचना प्रौद्योगिकी से तात्पर्य किसी क्षेत्र से सम्बन्धित सूचनाओं का कम्प्यूटर में संचयन, संगणना, भण्डारण और उपयोग से है। |
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विश्लेषक मॉड्यूल सॉफ्टवेयर के लिए कौन-सा एक प्रचालन आवश्यक है(क) आँकड़ा संग्रहण(ख) आँकड़ा प्रदर्शन(ग) आँकड़ा निष्कर्षण(घ) बफरिंग। |
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Answer» (क) आँकड़ा संग्रहण। |
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नैदानिक विधि की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» मनोचिकित्सा के क्षेत्र में अपनायी जाने वाली मुख्य अध्ययन विधि नैदानिक विधि है। इसे नैदानिक निरीक्षण विधि भी कहते हैं। इस विधि की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – ⦁ नैदानिक विधि मानसिक रोगियों तथा असामान्य व्यक्तियों के व्यवहार के अध्ययन के लिए अपनायी जाने वाली विधि है। |
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आँकड़ा प्रक्रमण और प्रदर्शन की हस्तेन विधियों की तुलना में कम्प्यूटर के प्रयोग के क्या लाभ हैं? |
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Answer» कम्प्यूटर का प्रयोग अधिक सर्वोन्मुखी है। यह स्क्रीन पर पाठ के सम्पादन पर प्रतिलिपि बनाने, उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने या यहाँ तक कि अवांछित पाठ को विलुप्त करने को भी सुगम बनाता है। |
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स्थानिक आँकड़ों के लक्षण निम्नांकित स्वरूप में दिखाई देते हैं(क) अवस्थितिक(ख) रैखिक(ग) क्षेत्रीय(घ) उपर्युक्त सभी स्वरूपों में। |
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Answer» (क) अवस्थितिक। |
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