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निरीक्षण विधि के मुख्य चरणों अथवा पदों का उल्लेख कीजिए।यानिरीक्षण विधि के चरणों को सोदाहरण समझाइए।

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निरीक्षण विधि के प्रमुख चरण अथवा पद निम्नलिखित हैं

(1) उपयुक्त योजना को निर्माण – अध्ययन को उद्देश्यपूर्ण बनाने की दृष्टि से अध्ययनकर्ता को सबसे पहले समस्या के सम्बन्ध में उपयुक्त योजना बना लेनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि किन व्यक्तियों के किस प्रकार के व्यवहार का निरीक्षण किया जाना है। अध्ययन का समय, आवश्यक यन्त्र तथा क्षेत्र आदि का निश्चय भी पहले से ही कर लेना चाहिए।
(2) व्यवहार का प्रत्यक्ष अवलोकन – निरीक्षण विधि के अन्तर्गत व्यवहार का प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन किया जाना चाहिए। अध्ययनकर्ता समस्या से सम्बन्धित प्रत्येक पक्ष का सूक्ष्म एवं प्रत्यक्ष अध्ययन करता है। यह अध्ययन उसी स्थान पर किया जाता है जहाँ व्यवहार स्वाभाविक रूप में विद्यमान है।
(3) व्यवहार का लेखन – व्यवहार का अवलोकन करते समय उसे नोट करते जाना चाहिए; अन्यथा अध्ययनकर्ता तत्सम्बन्धी तथ्यों को या तो बाद में भूल जायेगा या उन्हें यथार्थ से भिन्न करके याद रख पायेगा। व्यवहार को संचित करने के लिए टेपरिकॉर्डर या मूवी कैमरा जैसे उपकरणों का भी प्रयोग किया जा सकता है। व्यवहार को नोट करते समय उन पक्षों पर अधिकाधिक ध्यान रखा जाना चाहिए जिनका सम्बन्ध उस समस्या से होता है।
(4) व्यवहार का विश्लेषण एवं व्याख्या – व्यवहार को नोट करने के पश्चात् उसका विश्लेषण किया जाता है। सुविधा की दृष्टि से लिखित व्यवहार को अंकों (Scores) में बदल लेना चाहिए तथा उनका सारणीयन (Tabulation) करके सांख्यिकीय विधियों की सहायता से विश्लेषण करना चाहिए। विश्लेषण कार्य से प्राप्त परिणामों की व्याख्या के उपरान्त जो सामान्य निष्कर्ष निकाले जाते हैं, उन्हें वर्ग विशेष या जाति विशेष की समस्त जनसंख्या के लिए सामान्यीकृत कर दिया जाता है। इसका अर्थ यह है कि इन्हें ऐसे सामान्य सिद्धान्तों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जो सामान्य रूप से सही स्वीकार कर लिये गये हों। मनोविज्ञान के नियम सामान्यीकृत होते हैं।



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