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Answer» मनोविज्ञान की प्रकृति (Nature of Psychology) प्रायः मनोविज्ञान की प्रकृति के विषय में यह प्रश्न किया जाता है कि इसे ‘विज्ञान’ कहा जाये या ‘कला’ और यदि यह एक विज्ञान है तो किस प्रकार का विज्ञान है ? विज्ञान का शाब्दिक अर्थ है-‘विशिष्ट ज्ञान अथवा किसी वस्तु या क्षेत्र के बारे में क्रमबद्ध ज्ञान। मनोविज्ञान में प्राकृतिक विज्ञानों के अनुरूप ही सभी विशेषताएँ पायी जाती हैं और यह अपनी विषय-वस्तु का क्रमबद्ध अध्ययन विशेष वैज्ञानिक तथा प्रयोगात्मक विधि के माध्यम से करता है। आधुनिक मनोविज्ञान एक विज्ञान है (Modern Psychology is a Science) आधुनिक मनोविज्ञान में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह उच्च वैज्ञानिक, सांख्यिकीय तथा गणितीय विधियों का प्रयोग किया जाता है। रॉबिन्सन, मॉर्गन तथा किंग आदि विद्वानों ने चार ऐसी विशेषताओं का वर्णन किया है जिनके आधार पर कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान एक विज्ञान है। ये विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – (1) आनुभविक अध्ययन – मनोविज्ञान में प्राणी के व्यवहारों एवं मानसिक क्रियाओं का अध्ययन प्रयोग, तथा निरीक्षण विधि के द्वारा किया जाता है। अध्ययन के परिणाम वस्तुनिष्ठ और पूर्णतया विश्वसनीय होते हैं। मनोवैज्ञानिक प्रयोग के परिणामों की वैधता की जाँच प्रयोग की पुनरावृत्ति द्वारा कर सकते हैं। इसी भाँति आँकड़ों की जॉच भी की जा सकती है। विषय-वस्तु का ऐसा आनुभविक अध्ययुन विज्ञान के अन्तर्गत ही सम्भव है। इस तरह मनोविज्ञान एक विज्ञान की श्रेणी में आ जाता है। (2) क्रमबद्ध दृष्टिकोण का सिद्धान्त – मनोविज्ञान के अन्तर्गत मनुष्य तथा पशु के व्यवहारों के विषय में प्रयोग एवं निरीक्षण विधि द्वारा जो आँकड़े प्राप्त किये जाते हैं, उन्हें अलग-अलग बिखरे हुए नहीं छोड़ा जाता, अपितु उन्हें क्रमबद्ध रूप से सारणियों में व्यवस्थित किया जाता है। अन्य प्राकृतिक विज्ञानों के समान, मनोवैज्ञानिक सांख्यिकीय एवं गणितीय विधियों के आधार पर सिद्धान्तों को प्रतिपादन करते हैं जिससे मनुष्य एवं पशु के व्यवहारों के बारे में भविष्यवाणी करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, थॉर्नडाइक ने बिल्ली पर प्रयोग करके उसके व्यवहार सम्बन्धी आँकड़ों को क्रमबद्ध किया और मनोविज्ञान का एक प्रमुख सिद्धान्त ‘प्रयत्न एवं भूल का सिद्धान्त’ (Trial and Error Theory) प्रतिपादित किया। (3) मापन की सुविधा – यथार्थ मापन की सुविधाएँ होने पर ही किसी विषय को विज्ञान कहा जा सकता है। मनोविज्ञान में प्राकृतिक विज्ञानों की तरह मापन की सुविधा उपलब्ध है। मनोवैज्ञानिकों ने प्राणियों के व्यवहार तथा मानसिक प्रक्रियाओं को मापने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रविधियाँ विकसित की हैं, जिन्हें मनोवैज्ञानिक परीक्षण (Psychological Test) कहा जाता है। इस प्रकार से विषय-वस्तु का मापन एक विज्ञान के अन्तर्गत ही सम्भव है। (4) पदों की परिभाषा – किसी विज्ञान का मनुष्य गुण यह भी है कि उसके पद (Terms) तथा सम्प्रत्यय (Concepts) सही ढंग से परिभाषित होते हैं। मनोविज्ञान के प्रमुख पद; जैसे-प्रेरणा, संवेदना, चिन्तन, अधिगम तथा बुद्धि आदि संक्रियात्मक एवं वैज्ञानिक ढंग से परिभाषित किये गये हैं। इसका यह लाभ है कि मनोविज्ञान की विषय-वस्तु को यथार्थ मापन सम्भव हो जाता है, उसका अध्ययन वस्तुनिष्ठ हो जाता है तथा पूर्वकथन भी सही होता है। उपर्युक्त विशेषताओं के आधार पर निर्विरोध कहा जा सकता है कि मनोविज्ञान का अध्ययन आनुभविक है। इसकी विषय-वस्तु से सम्बन्धित सभी तथ्य क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित हैं जिनके आधार पर किसी सिद्धान्त का प्रतिपादन किया ज़ सकता है। इसमें वैज्ञानिक प्रविधियों द्वारा व्यवहार एवं मानसिक क्रियाओं का मापन किया जा सकता है तथा इसके समस्त पद भली प्रकार परिभाषित हैं और इसी कारण मनोविज्ञान भी एक विज्ञान है। मनोविज्ञान की वैज्ञानिकता की विशेषताएँ(Characteristics of Psychology as a Science) मनोविज्ञान को विज्ञान सिद्ध करने वाली कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं – (1) वैज्ञानिक पद्धति – मनोविज्ञान के अन्तर्गत किये जाने वाले सभी अध्ययन वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होते हैं। विज्ञान की प्रयोग विधि में प्रयोगशाला, यन्त्र तथा उपकरणों का अधिकाधिक उपयोग किया जाता है एवं वांछित परिस्थितियों को नियन्त्रित किया जा सकता है। आजकल मनोवैज्ञानिक अध्ययन में प्रयोग विधि की इन सभी शर्तों का पालन किया जाता है। अत: मनोविज्ञान की वैज्ञानिक पद्धति स्पष्ट एवं निश्चित कही जा सकती है। (2) व्यापकता – मनोविज्ञान एक व्यापक अध्ययन है, जिसमें मनुष्य से लेकर पशु तक के व्यवहारों को सम्मिलित किया गया है। मनोविज्ञान मानव तथा पशु-समाज के अन्तर्गत आने वाली समस्त इकाइयों का पृथक् तथा समूहगत दोनों प्रकार से अध्ययन करता है। इतना ही नहीं, यह तो गर्भ में पल रहे शिशु से लेकर प्रौढ़ मनुष्य तक की समस्त अवस्थाओं में उसके विकास तथा क्रियाओं का भी अध्ययन करता है। (3) विधायक विज्ञान या तथ्यात्मकता – मनोविज्ञान की एक विशेषता तथ्यात्मकता है। यह एक विधायक विज्ञान है जो प्रत्येक वस्तु का अध्ययन तथ्य के रूप में करता है। इसका अर्थ यह है कि यह ‘क्या है ?’ का अध्ययन करता है। इसका इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि क्या होना चाहिए ? विधायक विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान का एक गुण तटस्थता भी है, क्योंकि तथ्यात्मक अध्ययन के परिणाम न तो किसी के पक्ष में होते हैं और न किसी के विपक्ष में। वे तो केवल तथ्य को प्रकट करते हैं। (4) सार्वभौमिकता – मनोविज्ञान के सिद्धान्त सार्वभौमिक (universal) होते हैं। इसका अभिप्राय यह है कि मनोविज्ञान के सामान्य सिद्धान्तों पर देश, काल एवं पात्र की भिन्नता का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यदि परिस्थितियाँ एकसमान हैं तो प्रत्येक समय में, प्रत्येक स्थान पर मनोविज्ञान के सिद्धान्तों को सदा ही प्रमाणित किया जा सकता है। (5) कार्य-कारण सम्बन्धों का अध्ययन – प्रत्येक क्रिया अथवा प्रघटना का कुछ-न-कुछ कारण अवश्य होता है। इसी प्रकार प्रत्येक मानव-व्यवहार के पीछे भी कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है। मनोविज्ञान इस बात का विश्लेषण करती है कि विशिष्ट व्यवहार का क्या कारण है एवं किस विशिष्ट व्यवहार से प्रभावित होकर मनुष्य क्या व्यवहार करेगा ? कार्य-कारण सम्बन्धों के अध्ययन से मनोविज्ञान व्यवहार के सामान्य नियम निर्धारित करता है। ये नियम और सिद्धान्त सही तथा निश्चित होते हैं। (6) पूर्वानुमान या भविष्यवाणी – मनोवैज्ञानिक पूर्वानुमान या भविष्यवाणियाँ कार्य-कारण सम्बन्ध पर आधारित होती हैं। यदि हम एक घटना (अर्थात् कारण) को जानते हैं तो हम दूसरी घटना (अर्थात् परिणाम) की भविष्यवाणी कर सकते हैं। आधुनिक समय में मनोवैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से मानव व्यवहार के सम्बन्ध में पूर्वानुमान किये जा सकते हैं। पूर्वानुमान उचित व्यवसाय के लिए उचित व्यक्ति का चुनाव करने में मदद करते हैं। निष्कर्षतः मनोविज्ञान की ये विशेषताएँ; यथा—वैज्ञानिक पद्धति, व्यापकता, तथ्यात्मकता, सार्वभौमिकता, कार्य-कारण सम्बन्ध तथा पूर्वानुमान; इसे पूरी तरह विज्ञान बना देते हैं। हाँ, मनोविज्ञान तथा प्राकृतिक विज्ञानों के बीच एक आधारभूत अन्तर अवश्य है। मनोविज्ञान प्राणियों के व्यवहार एवं मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है, जबकि प्राकृतिक विज्ञान स्थूल तत्त्वों से सम्बन्ध रखते हैं।
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