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This section includes InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

16901.

छत्तीसगढ़ की राजधानी कहां है?

Answer»
Raipur is capital of Chhattisgarh.
16902.

Write a review of the poem 'tintern Abbey'.

Answer»

The full title of this poem is “Lines Composed a Few Miles above Tintern Abbey, on Revisiting the Banks of the Wye during a Tour. July 13, 1798.” It opens with the speaker’s declaration that five years have passed since he last visited this location, encountered its tranquil, rustic scenery, and heard the murmuring waters of the river. He recites the objects he sees again, and describes their effect upon him: the “steep and lofty cliffs” impress upon him “thoughts of more deep seclusion”; he leans against the dark sycamore tree and looks at the cottage-grounds and the orchard trees, whose fruit is still unripe. He sees the “wreaths of smoke” rising up from cottage chimneys between the trees, and imagines that they might rise from “vagrant dwellers in the houseless woods,” or from the cave of a hermit in the deep forest.

16903.

शिकार साहित्य से सम्बद्ध एक रचना का नाम लिखिए।

Answer»

शिकार साहित्य से सम्बद्ध एक रचना का नाम ‘शिकारं’ है।

16904.

हिन्दी के शिकार साहित्य के सुप्रसिद्ध लेखक का नाम लिखिए।

Answer»

श्रीराम शर्मा।

16905.

भेटवार्ता से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Answer»

किसी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति से मिलकर, किसी विशेष विषय पर उसके विचारों को प्रश्नोत्तर के माध्यम से प्राप्त करके लेखक जब उन्हें यथावत लिपिबद्ध करता है तो उसे ‘भेटवार्ता’ कहते हैं। ‘भेटवार्ता शब्द अंग्रेजी भाषा के इण्टरव्यू का समानार्थी है। भेटवार्ता वास्तविक भी  होती है और काल्पनिक भी। हिन्दी-साहित्य में इसके दोनों रूप प्राप्त होते हैं। इस विधा का प्रारम्भ छायावादी युग से माना जाता है।

16906.

यात्रा-साहित्य और रिपोर्ताज के एक-एक लेखक का नामोल्लेख कीजिए।अथवायात्रा-साहित्य के लेखकों में से किन्हीं दो के नाम लिखिए।अथवाहिन्दी में यात्रा-साहित्य के किसी एक लेखक का नाम बताइए।

Answer»
  • यात्रा-साहित्य के लेखक – राहुल सांकृत्यायन तथा देवेन्द्र सत्यार्थी।
  • रिपोर्ताज के लेखक – विष्णु प्रभाकर तथा डॉ० प्रभाकर माचवे।
16907.

रिपोर्ताज से आप क्या समझते हैं ? इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

Answer»

‘रिपोर्ट’ के कलात्मक एवं साहित्यिक रूप को ‘रिपोर्ताज’ कहते हैं। इसमें सम-सामयिक घटनाओं को उनके यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

रिपोर्ताज लेखक के लिए स्वयं घटना का प्रत्यक्ष निरीक्षण करना आवश्यक होता है, इसमें कल्पना का कोई स्थान नहीं होता। इसका उपयोग पत्रकारिता के क्षेत्र में अधिक होता है। घटना का यथार्थ चित्रण, कुशल अभिव्यक्ति, प्रभावोत्पादकता आदि रिपोर्ताज की विशेषताएँ हैं । इस विधा का विकास छायावादोत्तर युग में हुआ है।

16908.

रिपोर्ताज की विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए और दो रिपोर्ताज-लेखकों के नाम लिखिए।

Answer»

विशेषताएँ-

  • रिपोर्ताज आँखों-देखा वर्णन जैसा प्रतीत होता है।
  • इसमें समसामयिक घटनाओं को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
  • इसमें निजी सूक्ष्म निरीक्षण के आधार पर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण होता है।
  • इसकी शैली विवरणात्मक तथा वर्णनात्मक होती है।
  • यह पत्रकारिता के गुणों से सम्पन्न होता है।

रिपोर्ताज-लेखक-

  • विष्णु प्रभाकर
  • डॉ० प्रभाकर माचवे।
16909.

रिपोर्ताज की विशेषताओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

Answer»

विशेषताएँ-

⦁    रिपोर्ताज ऑखों देखा वर्णन जैसा प्रतीत होता है।
⦁    इसमें सम-सामयिक घटनाओं को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
⦁    इसमें निजी-सूक्ष्म निरीक्षण के आधार पर मनोवैज्ञानिक विश्लेषण होता है।
⦁    इसकी शैली विवरणात्मक तथा वर्णनात्मक होती है।
⦁    यह पत्रकारिता के गुणों से सम्पन्न होता है।

16910.

हिन्दी की साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक लेख लिखने के लिए प्रसिद्ध एक लेखक का नाम बताइए।

Answer»

साहित्यिक शैली में वैज्ञानिक लेख लिखने के लिए प्रसिद्ध लेखक जयप्रकाश भारती हैं।

16911.

यात्रा-साहित्य के किसी एक प्रमुख लेखक तथा उनके एक यात्रा-वृत्तान्त का नामोल्लेख | कीजिए।यायात्रा-साहित्य की एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।

Answer»

यात्रा-साहित्य के लेखकों में श्री विनयमोहन शर्मा का नाम उल्लेखनीय है। इन्होंने ‘दक्षिण भारत की एक झलक’ शीर्षक यात्रा-वृत्तान्त लिखा है।

16912.

यात्रा-साहित्य और रिपोर्ताज के एक-एक लेखक का नामोल्लेख कीजिए।यायात्रा-साहित्य के लेखकों में से किन्हीं दो के नाम लिखिए।याकिसी एक रिपोर्ताज लेखक का नाम लिखिए।यारिपोर्ताज विधा के किसी एक लेखक का नाम लिखिए।

Answer»

यात्रा-साहित्य के लेखक–

⦁    राहुल सांकृत्यायन तथा
⦁    देवेन्द्र सत्यार्थी।

रिपोर्ताज के लेखक–

⦁    विष्णु प्रभाकर तथा
⦁    प्रभाकर माचवे।

16913.

‘रिपोर्ताज’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Answer»

जिस गद्य-साहित्य में किसी घटना या घटना-स्थल का  आँखों देखा हाल जब साहित्यिक और कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे रिपोर्ताज’ कहते हैं।

16914.

निबन्ध किसे कहते हैं?

Answer»

निबन्ध उस गद्य विधा को कहते हैं, जो कलात्मक नियमों के बन्धन से मुक्त हो। इसमें लेखक स्वच्छन्दतापूर्वक अपने विचारों तथा भावों को प्रकट करता है।

16915.

‘नींव की ईंट’ बेनीपुरी जी की किस प्रकार की निबन्ध-रचना है?

Answer»

यह भावात्मक निबन्ध-रचना है।

16916.

‘नींव की ईंट’ निबन्ध में बेनीपुरी जी द्वारा प्रयुक्त दो शैलियों के नाम लिखिए।

Answer»

‘नींव की ईंट’ निबन्ध में प्रतीकात्मक तथा भावात्मक दो प्रमुख शैलियों का प्रयोग हुआ है।

16917.

‘यात्रा-साहित्य’ किसे कहते हैं ?

Answer»

जिस रचना में रचनाकार किसी यात्रा के अनुभव का यथावत् तथा कलात्मक वर्णन करता है, उसे ‘यात्रा-साहित्य’ कहते हैं।

16918.

हिन्दी निबन्ध-लेखन की विभिन्न शैलियों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

हिन्दी निबन्ध-लेखन में वर्णनात्मक, विवरणात्मक, विचारात्मक तथा भावात्मक शैलियों को अपनाया गया है।

16919.

निबन्ध:होली

Answer»

प्रस्तावना-हमारे देश में अनेक धर्मों व सम्प्रदायों के  मानने वाले व्यक्ति निवास करते हैं। सभी की अपनी-अपनी परम्पराएँ, मान्यताएँ, रहन-सहन व वेशभूषा हैं। सभी के द्वारा मनाये जाने वाले त्योहार भी। भिन्न-भिन्न हैं। यही कारण है कि हर मास किसी-न-किसी धर्म से सम्बन्धित त्योहार आते ही रहते हैं। कभी हिन्दू दीपावली की खुशियाँ मनाते हैं तो ईसाई प्रभु यीशु के जन्म-दिवस पर चर्च में प्रार्थना करते हैं तो मुसलमान ईद के अवसर पर गले मिलते व नमाज अदा करते दिखाई देते हैं। रंगों में सिमटा, खुशियों का त्योहार होली भी इसी प्रकार देश-भर में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह शुभ पर्व प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा के सुन्दर अवसर की शोभा बढ़ाने आता है।

प्राकृतिक वातावरण-रंगों का त्योहार होली वसन्त ऋतु का सन्देशवाहक है। इस ऋतु में मानव-मात्र के साथ-साथ प्रकृति भी इठला उठती है। चारों ओर प्रकृति के रूप और सौन्दर्य के दृश्य दृष्टिगत होते हैं। पुष्प-वाटिका में पपीहे की तान सुनने से मन-मयूर नृत्य कर उठता है। आम के झुरमुट से कोयल की कूक सुनकर तो हृदय भी झंकृत हो उठता है। ऋतुराज वसन्त का स्वागत अत्यधिक शान से सम्पन्न होता है। चारों ओर हर्ष और उल्लास छा जाता है।

धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण-होलिकोत्सव धार्मिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। एकता, मिलन और हर्षोल्लास के प्रतीक इस त्योहार को मनाने के पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। प्रमुखतः इस उत्सव का आधार हिरण्यकशिपु नामक अभिमानी राजा और उसके ईश्वर-भक्त पुत्र प्रह्लाद की कथा है। कहते हैं कि हिरण्यकशिपु बड़ा अत्याचारी था, किन्तु उसी का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर का अनन्य भक्त था। जब हिरण्यकशिपु ने यह बात सुनी तो वह बड़ा ही क्रोधित हुआ। उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश करे। होलिका को यह वरदान था कि अग्नि उसको जला नहीं सकती थी,  किन्तु ‘जाको राखे साइयाँ, मारन सकिहैं कोय’ के अनुसार होलिका तो आग में जल गयी और प्रह्लाद को बाल भी बॉका नहीं हुआ। उसी समय से परम्परागत रूप से होली के त्योहार के एक दिन पूर्व होलिका-दहन का आयोजन होता है। होली के शुभ अवसर पर जैन धर्मावलम्बी आठ दिन तक सिद्धचक्र की पूजा करते हैं। यह ‘अष्टाह्निका’ पर्व कहलाता है।

होली का राग-रंग-प्रथम दिन होलिका का दहन होता है। बच्चे घर-घर से लकड़ियाँ एकत्रित करके चौराहों पर होली तैयार करते हैं। सन्ध्या समय महिलाएँ इसकी पूजा करती हैं और रात्रि में यथा मुहूर्त होलिका दहन करते हैं। होलिका दहन के समय लोग जौ की बालों को भूनकर खाते भी हैं। होलिका का दहन इस बात का द्योतक है कि मानव अपने क्रोध, मान, माया और लोभ को भस्म कर अपने दिल को उज्ज्वल व निर्मल बनाये। यह बुराइयों पर अच्छाइयों की विजय है।

होलिंका के अगले दिन दुल्हैंडी मनायी जाती है। इस दिन मनुष्य अपने आपसी बैर-विरोध को भुलाकर आपस में एक-दूसरे पर रंग डालते हैं, गुलाल लगाते हैं और गले मिलते हैं। चारों तरफ हँसीमजाक का वातावरण फैल जाता है। क्या अमीर और क्या गरीब, सभी होली के रंगों से सराबोर हो उठते हैं। सारा वातावरण ही रंगमय प्रतीत होता है। बच्चे, औरतें व युवक सभी आनन्द व उमंग से भर उठते हैं। ब्रज की होली बड़ी मशहूर है। देश-विदेश के असंख्य लोग इसे देखने आते हैं। नगरों में सायंकाल अनेक स्थानों पर होली मिलन समारोह का आयोजन होता है जिसमें हास्य-कविताएँ, लतीफे व अन्य रंगारंग कार्यक्रम भी होते हैं।

त्योहार के कुछ दोष-होली के इस पवित्र व प्रेमपूर्ण त्योहार को कुछ लोग अश्लील आचरण और गलत हरकतों द्वारा गन्दा बनाते हैं। कुछ लोग एक-दूसरे पर कीचड़ उछालते हैं और गन्दगी फेंकते हैं। चेहरों पर कीचड़, पक्के रंग  या तारकोल पोतने तथा राहगीरों पर गुब्बारे फेंकते हैं। कुछ लोग भाँग, शराब आदि पीकर हुड़दंग करते हैं। ऐसी अनुचित व अनैतिक हरकतें इस पर्व की पवित्रता को दूषित करती हैं।

उपसंहार-होली प्रेम का त्योहार है, गले मिलने का त्योहार है, बैर और विरोध को मिटाने का त्योहार है। इस दिन शत्रु भी अपनी शत्रुता भुलाकर मित्र बन जाते हैं। यह त्योहार अमीर और गरीब के भेद को कम करके वातावरण में प्रेम की ज्योति को प्रज्वलित करता है। इसे एकता के त्योहार के  रूप में मनाया जाना चाहिए। निस्सन्देह होली का पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर है और इस परम्परा का पूर्ण निर्वाह करना। हमारा दायित्व है।

16920.

निबन्ध:आचारः परमो धर्मः

Answer»

प्रस्तावना-सदाचार मनुष्य का लक्षण है। सदाचार को धारण करना मानवता को प्राप्त करना है। सदाचारी व्यक्ति समाज में पूजित होता है। आचारहीन का कोई भी सम्मान नहीं करता, कोई भी उसका साथ नहीं देता, वेद भी उसका कल्याण नहीं करते।’  आचारहीनं न पुनन्ति वेदाः’-अर्थात् वेद भी आचारहीन व्यक्ति का उद्धार नहीं कर सकते।

सदाचार का अर्थ-सदाचार’ शब्द संस्कृत के ‘सत्’ और ‘आचार’ शब्दों से मिलकर बना है। इसका अर्थ है-सज्जन का आचरण अथवा शुभ आचरण। सत्य, अहिंसा, ईश्वर-विश्वास, मैत्री-भाव, महापुरुषों का अनुसरण करना आदि बातें सदाचार में गिनी जाती हैं। इस सदाचार को धारण करने वाला व्यक्ति सदाचारी कहलाता है। इसके विपरीत आचरण करने वाले व्यक्ति को दुराचारी कहते हैं।

सच्चरित्रता-सदाचार का महत्त्वपूर्ण अंग सच्चरित्रता है। सच्चरित्रता सदाचार का सर्वोत्तम साधन है। प्रसिद्ध कहावत है कि “यदि धन नष्ट हो जाए तो मनुष्य का कुछ भी नहीं बिगड़ता, स्वास्थ्य बिगड़ जाने पर कुछ हानि होती है और चरित्रहीन होने पर मनुष्य का सर्वस्व नष्ट हो जाता है। मनुष्य में जो कुछ भी मनुष्यत्व है, उसका प्रतिबिम्ब उसका चरित्र है। आचारहीन मनुष्य तो निरा पशु या राक्षस है।

सच्चरित्रता की सबसे आवश्यक बात है-भय की प्रवृत्ति पर नियन्त्रण करना। भय की प्रवृत्ति को वश में करके ही हमारे हृदय में ऊँचे आदर्श और स्वस्थ प्रेरणाएँ पनप सकती हैं। जो भय के वश में हो गया। हो, उसके चरित्र का विकास नहीं होता। उसकी शक्ति, आत्मबल और महत्त्वाकांक्षाएँ दुर्बल हो जाती हैं। इसी भय के कारण वह सत्य बात नहीं कर पाता और कदम-कदम पर कायरों की भाँति दूसरों के सामने घुटने टेकता है।

जीवन में अच्छे चारित्रिक संस्कारों का विकास हो सके, इसके लिए आवश्यक है कि बुरे वातावरण से स्वयं को दूर रखा जाए। यदि आपका वातावरण दूषित है तो आपका चरित्र भी गिर जाएगा। इसीलिए अपने चरित्र-निर्माण के लिए सदैव भले या बुद्धिमान् लोगों को संग करना चाहिए, बुरे लोगों का साथ छोड़ देना चाहिए तथा शुभ विचारों को मन में लाना चाहिए।

धर्म की प्रधानता–भारत एक आध्यात्मिक देश है। यहाँ की संस्कृति एवं सभ्यता धर्मप्रधान है। धर्म से मनुष्य की लौकिक एवं आध्यात्मिक उन्नति होती है। लोक और परलोक की भलाई धर्म से ही सम्भव है। धर्म आत्मा को उन्नत करता है और उसे पतन की ओर जाने से रोकता है। धर्म के यदि इस रूप को ग्रहण किया जाए तो धर्म को सदाचार का पर्यायवाची भी कहा जा सकता है। दूसरे शब्दों में सदाचार में वे गुण हैं,

जो धर्म में हैं। सदाचार के आधार पर ही धर्म की स्थिति सम्भव है। जो आचरण  मनुष्य को ऊँचा उठाये, उसे चरित्रवान् बनाये, वह धर्म है, वही सदाचार है। सदाचारी होना ही धर्मात्मा होना है। महाभारत में कहा गया है-‘आचारः धर्मः’ अर्थात् धर्म की उत्पत्ति आचार से ही होती है।

शील : सदाचार की शक्ति-शील मानसिक उच्छंखलता के लिए अंकुश है। सदाचार मनुष्य की काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि वृत्तियों से रक्षा करता है। अहिंसा की भावना से मन की क्रूरता समाप्त होती है। और उसमें करुणा, सहानुभूति एवं दया की भावना जाग्रत होती है। क्षमा, सहनशीलता आदि गुणों से मनुष्य का नैतिक उत्थान होता है और मानव से लेकर पशु-पक्षी तक के प्रति उदारता की भावना पैदा होती है। इस प्रकार सदाचार का गुण धारण करने से मनुष्य का चरित्र उज्ज्वल होता है, उसमें कर्तव्यनिष्ठा एवं धर्मनिष्ठा पैदा होती है जो उसे अलौकिक शक्ति की प्राप्ति कराने में सहायक होती है।

सदाचार : सम्पूर्ण गुणों का सार-सदाचार मनुष्य के सम्पूर्ण गुणों का सार है, जो उसके जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। इसकी तुलना में विश्व की कोई भी मूल्यवान् वस्तु नहीं टिक सकती। व्यक्ति चाहे संसार के वैभव का स्वामी हो या सम्पूर्ण विद्याओं का पण्डित अथवा शस्त्र-संचालन में कुशल योद्धा, यदि वह सदाचार से रहित है तो कदापि पूजनीय नहीं हो सकता। सदाचार का बल संसार की सबसे बड़ी शक्ति है, जो कभी भी पराजित नहीं हो सकती। सदाचार के बल से मनुष्य मानसिक दुर्बलताओं का नाश करता है। जिस प्रकार दिग्दर्शक यन्त्र के बिना जहाज निर्दिष्ट स्थान पर नहीं पहुँच सकता, उसी प्रकार सदाचार के बिना मनुष्य कभी भी अपने जीवन-लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।

उपसंहार-वर्तमान युग में पाश्चात्य पद्धति की शिक्षा के प्रभाव से भारत के युवक-युवतियाँ सदाचार को निरर्थक समझने लगे हैं तथा सदाचार-विरोधी जीवन को आदर्श मानने लगे हैं। इसी कारण युवा वर्ग पतन की ओर बढ़ रहा है तथा उसके जीवन में विश्रृंखलता,  अनुशासनहीनता, उच्छृखलता बढ़ती जा रही है। लुटते हुए आचरण की रक्षा के लिए युवा वर्ग को सचेत होना चाहिए। उन्हें राम, कृष्ण, हरिश्चन्द्र, युधिष्ठिर, गाँधी एवं नेहरू के चरित्र को आदर्श मानकर सदाचरणप्रिय होना चाहिए। राष्ट्र का वास्तविक अभ्युत्थान तभी हो सकेगा, जब हमारे देशवासी सदाचारी बनेंगे।

16921.

निबन्ध:पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं

Answer»

प्रस्तावना–स्वाधीनता में महान् सुख है और पराधीनता में किंचित्-मात्र भी सुख नहीं। पराधीनता दु:खों की खान है। स्वाभिमानी व्यक्ति एक दिन भी परतन्त्र रहना पसन्द नहीं करता। उसका स्वाभिमान परतन्त्रता के बन्धन को तोड़ देना चाहता है। पराधीन व्यक्ति को चाहे कितना ही सुख, भोग और ऐश्वर्य प्राप्त हो, वह उसके लिए विष तुल्य ही है। पराधीन व्यक्ति की बुद्धि कुण्ठित हो जाती है, उसकी योग्यता का विकास अवरुद्ध हो जाता है, स्वतन्त्र चिन्तन का प्रवाह रुक जाता है और उसको पग-पग पर अपमानित व प्रताड़ित होना पड़ता है।

स्वतन्त्रता का सुख-मुक्त गगन में उन्मुक्त उड़ान भरने में जो आनन्द है, वह पिंजरे में कहाँ ? कल-कल नाद करने वाली नदियाँ भी पर्वतों की छाती को चीरकर आगे बढ़ जाती हैं। सिंह और चीते जैसे हिंसक पशु भी कठघरा तोड़कर बाहर निकलने को बेचैन रहते हैं।  हिरन, खरगोश आदि वन्य जीव तो मुक्त विचरण कर प्रसन्न रहते हैं। जब पशु-पक्षी-फूल-पत्ती आदि को भी स्वतन्त्रता से इतना उन्मुक्त प्यार है तो विवेकशील व्यक्ति परतन्त्र रहना कैसे पसन्द करेगा ? एक अंग्रेज लेखक का यह कथन कितना सत्य है– ‘It is better to be in hell than to be a slave in heaven.’ अर्थात् स्वर्ग में दास बनकर रहने से नरक में रहना कहीं अधिक अच्छा है। महर्षि व्यास ने भी प्रकारान्तर से यही बात कही है-‘पारतन्त्र्यं महोदुःखं स्वातन्त्र्यं परमं सुखम्।

परतन्त्रता का दुःख-परतन्त्रता वास्तव में मानव के लिए कलंक है। उसे जीवन के हर क्षेत्र में पराश्रित रहना पड़ता है। उसकी प्रतिभा, कला-कौशल और योग्यता दूसरों के लिए होती है। उसका लाभ वह स्वयं नहीं ले पाता। वह पराधीनता के बन्धन में जकड़ा हुआ होने से आत्महीनता और तुच्छता का अनुभव करता है। वह अपने जीवन को उपेक्षित और पीड़ित समझता है और ऐसे जीवन को स्वप्न में भी नहीं चाहता।

पराधीनता अभिशाप है। पराधीनता मानव, समाज अथवा राष्ट्र के लिए कभी हितकर नहीं हो सकती। पराधीनता से उन्नति और विकास के सभी मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं। पराधीन राष्ट्र सभी सुख-साधनों से हीन होकर दूसरे शासकों की कठपुतली बन जाते हैं।

पराधीनता के विविध रूप-पराधीनता चाहे व्यक्ति की हो या राष्ट्र की दोनों ही गर्हित हैं। जिस प्रकार व्यक्तिगत पराधीनता से व्यक्ति का विकास रुक जाता है, उसी प्रकार राष्ट्र की पराधीनता से राष्ट्र पंगु बन जाता है। पराधीनता के अनेकानेक रूप होते हैं, जिनमें मुख्य निम्नलिखित हैं–

(क) राजनीतिक-राजनीतिक पराधीनता सबसे भयावह हैं। इसके अन्तर्गत एक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र का गुलाम बनकर रहना पड़ता है। राजनीतिक पराधीनता शासित देश के गौरव व सम्मान को खत्म कर उसे उपहास व घृणा का पात्र बना देती है।

(ख) आर्थिक–आज किसी देश को पराधीन रख पाना बहुत कठिन है। इसलिए शक्तिशाली राष्ट्रों; विशेषकर अमेरिका ने एक नया तरीका अपनाया है। वह राष्ट्रों को आर्थिक सहायता यो ऋण देकर उनके आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। यह पराधीनता भविष्य में बहुत कष्टकर होती है।

(ग) सांस्कृतिक—इसका तात्पर्य यह है कि किसी देश पर अपनी भाषा और साहित्य थोपकर  मानसिक दृष्टि से उसे अपना गुलाम बना लिया जाए। अंग्रेजों ने भारत में अंग्रेजी का प्रचलन कर तथा पाश्चात्य संस्कृति के प्रचार के माध्यम से देश को मानसिक गुलामी प्रदान की है।

(घ) सामाजिक-सामाजिक पराधीनता से आशय है–विभिन्न वर्गों में असमानता का होना। अंग्रेजों ने इसके लिए विभिन्न वर्गों में भेदभाव को प्रोत्साहन दिया। उन्होंने जातीयता, प्रान्तीयता व छुआछूत को भड़काकर देश में सर्वत्र अशान्ति और द्वेष-भावना को जाग्रत किया।

स्वाधीनता की महत्ता–स्वाधीनता का कोई सानी नहीं। स्वाधीनता की शीतल छाया में संस्कृति, सभ्यता और समृद्धि बढ़ती है। विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसकी अनुभूति करते हुए ईश्वर से कामना की है-“जहाँ मन में कोई डर न हो और मस्तक गर्व से ऊँचा हो, जहाँ ज्ञान के प्रवाह पर कोई प्रतिबन्ध न हो और स्पष्ट विचारों की निर्मल सरिता निरर्थक रूढ़िग्रस्तता के मरुस्थल में लुप्त न हो जाए, हे परमपिता! ऐसी स्वाधीनता के स्वर्ग में मेरा देश जाग्रत हो।”

स्वाधीनता के लिए संघर्ष-स्वतन्त्रता मनुष्य को जन्मसिद्ध अधिकार है। इस अधिकार को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक समाज और प्रत्येक राष्ट्र को सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए। आज हम भारतवासी राजनीतिक दृष्टिकोण से स्वाधीन हैं, परन्तु हम आज भी मानसिक रूप से विदेशियों (अंग्रेजों) के गुलाम हैं। हमें शीघ्र ही इस मानसिक गुलामी से भी मुक्त होना चाहिए।

उपसंहार-आज हमारा सौभाग्य है कि हम मुक्त भूमि पर मुक्त गगन के नीचे मुक्ति-गीत गा रहे हैं। हमारा देश चिर स्वतन्त्र बना रहे, इसके लिए हमें आपसी द्वेषभाव व वर्ग-विद्वेष को भूलकर राष्ट्रीय चेतना जाग्रत कर देश के गौरव और अक्षुण्णता को कायम रखने के लिए संकल्प लेना चाहिए। कश्मीर से कन्याकुमारी तक सम्पूर्ण देश एक है; अत: एकत्व की भावना को दृढ़ और मूर्त रूप देकर हमें गौरवशाली राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए।

16922.

निबन्ध:भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ

Answer»

प्रस्तावना–हजारों वर्षों की परम्पराओं से पुष्ट भारतवर्ष किसी समय विश्व गुरु कहलाता था। जिस । समय आज के उन्नत एवं सभ्य कहे जाने वाले राष्ट्र अस्तित्वहीन थे या जंगली अवस्था में थे, उस समय । भारत-भूमि पर वैदिक ऋचाएँ लिखी जा रही थीं, वैदिक  मन्त्रों के गान पूँज रहे थे और यज्ञों की पवित्र ज्वालाओं का सुगन्धित धुआँ पूरे वातावरण को आनन्दमय बना रहा था। भारतवर्ष की सभ्यता और संस्कृति महान् है। कविवर इकबाल ने लिखा है कि

यूनान मिस्र रोमाँ, सब मिट गए जहाँ से,
लेकिन बचा है अब तक, नामो-निशां हमारा।

निश्चय ही उनका संकेत भारत की महान् संस्कृति की ओर ही था। हजारों वर्ष की पराधीनता का अन्धकार भी हमें हमारी प्राचीन विरासत से वंचित नहीं कर पाया। रामायण, महाभारत, वेद-पुराण आज भी हमारे पूज्य ग्रन्थ हैं और आज भी गंगा, नर्मदा, कावेरी हमारे लिए पवित्र हैं। भारतीय संस्कृति अजर-अमर है। क्योंकि यह समय के साथ बदलती रही है। इसमें मानव-मात्र की रक्षा का भाव निहित है।

संस्कृति क्या है ?–संस्कृति वह है जो श्रेष्ठ कृति अर्थात् कर्म के रूप में व्यक्त होती है। कर्म निश्चय ही विचार पर आधारित होता है। जो ज्ञान एवं भाव-सम्पदा हमारे कर्मों को श्रेष्ठ बनाती है वही संस्कृति है। मनुष्य में पशुता और देवत्व का वास साथ-साथ रहता है। जो भाव या विचार हमें पशुत्व से देवत्व की ओर ले जाते है, उन्हें संस्कृति का अंग माना जाना चाहिए।
मनुष्य, जब जन्म लेता है, तब वह प्राकृतिक अवस्था में होता है। समाज के प्रभाव एवं उसके अपने अनुभव उसे प्रकृति में विकृति की ओर ले जा सकते हैं और सृकृति की ओर भी। सुकृति अर्थात् अच्छे कार्यों की ओर ले जाना ही संस्कृति का कार्य है। दूध यदि विकृति की ओर जाएगा तो वह फट जाएगा। यदि सुकृति की ओर जाएगा तो दही, मक्खन आदि पदार्थों का निर्माण होगा और उसकी कीमत भी अधिक बढ़ जाएगी। इसी प्रकार मनुष्य यदि पशुत्व अथवा दानवत्व की ओर जाएगा तो उसकी हत्या करनी पड़ेगी और यदि वह देवत्व की ओर जाएगा, तो उसकी पूजा होगी। भारतीय संस्कृति ने सदा ही अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने की प्रार्थना की है; यथा–तमसो मा ज्योतिर्गमय। संस्कृति हमारे भौतिक जीवन को सुधारती है और हमारे ऐन्द्रिक जगत् को परिष्कृत करती है। विचारों एवं भावों का परिष्कार भी संस्कृति का ही कार्य है। संस्कृति यह कार्य साहित्य, विज्ञान एवं कलाओं का प्रचार-प्रसार करके करती है।

भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ-भारतीय संस्कृति की एक विशेषता यह है कि यह किसी एक जाति अथवा राष्ट्र तक सीमित नहीं। वैदिक ऋषि सारे विश्व को आर्य अर्थात् श्रेष्ठ बनाना चाहते हैं। वे अपने मन्त्रों में सम्पूर्ण सृष्टि के लिए मंगल-कामना करते हैं तथा मानव-मात्र को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने का प्रण दोहराते हैं।

भारतीय संस्कृति अध्यात्म प्रधान संस्कृति है। भौतिक उन्नति को हम भारतवासियों ने त्याज्य नहीं माना परन्तु उसे आत्मिक जीवन से ज्यादा महत्त्व भी नहीं दिया। साधु-महात्माओं की पर्ण कुटियों पर सम्राटों ने सदा ही सिर झुकाये हैं, सन्तोष एवं संयम को यहाँ सदा सम्मान मिला है। ईश्वर में अटल विश्वास रखने वाले अधनंगे फकीरों ने यहाँ के जन-जीवन को सम्राटों की अपेक्षा अधिक प्रभावित किया है। त्याग हमारी भारतीय संस्कृति में सदा से  ही सम्मान पाता रहा है।

भारतीय संस्कृति में नारी सदा ही सम्मान एवं पूजा की अधिकारिणी रही है। कृष्ण से पहले राधा और राम से पहले सीता का नाम केवल यहीं लिया जाता है। इसी देश में नारी को शक्ति के रूप में, ज्ञान के प्रकाश के रूप में, लक्ष्मी की उज्ज्वलता के रूप में देखा जा सकता है। विश्व की अन्य किसी भी संस्कृति में नारी-शक्ति को ऐसा गौरवपूर्ण स्थान नहीं मिला है।

भारतीय संस्कृति उदार, ग्रहणशील एवं समय के साथ परिवर्तनशील रही है। अनेक विदेशी संस्कृतियाँ इससे टकराकर नष्ट हो गयीं या इसी का अंग बन गयीं। यहाँ पर शक, कुषाण, हूण, पठान, मुसलमान, पारसी, यहूदी, ईसाई सभी आये और सभी ने यहाँ की संस्कृति को पुष्ट किया और इसी संस्कृति में धीरे-धीरे विलीन हो गये। भारतीय संस्कृति इस अर्थ में समन्वय प्रधान संस्कृति है। यह सुन्दर फूलों के एक ऐसे गुलदस्ते के समान है, जिसमें विभिन्न रंगों-वर्णो के फूल हैं।

उपसंहार–सार रूप में हम कह सकते हैं कि भारतीय संस्कृति सही अर्थों में मानव-संस्कृति है, उदार संस्कृति है, अध्यात्म-प्रधान और आदर्श-परक संस्कृति है तथा मनुष्य में ईश्वरत्व की प्रतिष्ठा करने वाली संस्कृति है।

16923.

प्रतापनारायण मिश्र द्वारा रचित दो प्रसिद्ध निबन्धों और नाटकों के नाम लिखिए।

Answer»

निबन्ध-

  • रिश्वत
  • समझदार की मौत।

नाटक-

  • हठी हम्मीर
  • कलि कौतुक।
16924.

हिन्दी के प्रमुख ललित निबन्धकारों के नाम बताइए।

Answer»

हिन्दी के प्रमुख ललित निबन्धकार हैं-आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, शिवप्रसाद सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी, कुबेरनाथ राय, डॉ० विद्यानिवास मिश्र, डॉ० वासुदेवशरण अग्रवाल, जगदीशचन्द्र माथुर, डॉ० धर्मवीर भारती, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी।

16925.

निबन्ध के विकास में योगदान करनेवाले किन्हीं दो निबन्धकारों के नाम बताइए।

Answer»
  • आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल।
16926.

हिन्दी साहित्य के दो विचारात्मक निबन्धकारों के नाम लिखिए।

Answer»
  • डॉ० श्यामसुन्दर दास
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
16927.

विचारात्मक तथा भावात्मक निबन्ध-लेखकों में से एक-एक निबन्ध-लेखक का नाम लिखिए।

Answer»
  • आचार्य रामचन्द्र शुक्ल-विचारात्मक निबन्ध लेखक
  • वियोगी हरि-भावात्मक निबन्ध लेखक
16928.

Characteristics of fifth generation computers?

Answer»

Characteristics of fifth generation computers:

  • Portable PCs are much smaller and handy than PCs of fourth generation allowing users to use computing facility even while traveling.
  • Fifth-generation desktop PCs and workstations are several times powerful than PCs of fourth generation.
  • These generation computer consume less power than their predecessors do.
  • They are more reliable and less prone to hardware failures than their predecessors were, requiring negligible maintenance cost.
  • Computer have faster and larger primary and secondary storage as compared to their predecessors.
  • They were general purpose machines.
  • Use of standard high level programing languages allows programs written for one computer to be properly ported to and executed on another computer.
  • More user friendly interface with multimedia features make the system easier to learn and use by anyone, including children.
16929.

What is the name of the first emote you get in Fortnite?1.orange justice 2.groove jam 3.DAME TU COSITA 4.chicken

Answer» It's the chicken. Chicken is the name of one of the emotes which are in the game Fortnite.
16930.

Gaseous HCl is a poor conductor of electricity while its aqueous solution is a good conductor this is because(a) H2O is a good conductor of electricity(b) a gas cannot conduct electricity but a liquid can(c) HCl gas does not obey Ohm’s law, whereas the solution does(d) HCl ionises in aqueous solution

Answer»

(d) In gaseous state the HCl is covalent in nature while in aqueous solution it ionises to give H+ and Cl- ions

16931.

Why the Statement of Affairs is prepared?

Answer»

To find out capital i.e. both opening as well a/c losing capital. 

16932.

Keshav Prajapati

Answer» Hii
Please ask your question in place of your name..........
16933.

Expand AlS...

Answer»

Accounting information system.

16934.

Give an example for Accounting Software.

Answer»

Tally, ERP..

16935.

Sonesh tagaya ki orse raskabandan ki subha kamana

Answer»

Raksha Bandhan is one such festival that is all about affection, fraternity and sublime sentiments. It is also known as Raksha Bandhan which means a 'bond of protection'. This is an occasion to flourish love, care, affection and sacred feeling of brotherhood.

Not a single festival in India is complete without the typical Indian festivities, the gatherings, celebrations, exchange of sweets and gifts, lots of noise, singing and dancing. Raksha Bandhan is a regional celebration to celebrate the sacred relation between brothers and sisters. Primarily, this festival belongs to north and western region of India but soon the world has started celebrating this festival with the same verse and spirit. Rakhi has become an integral part of those customs.

16936.

Define Accounting.

Answer»

“The art of recording classifying and summarising in a significant manner and in terms of money transactions event which are, in part atleast, of a financial character and interpreting the results there of “American certificed public accountants”

16937.

Dhansingh

Answer»

A computer is an electronic device which is capable of receiving information data in a particular form and performing the sequence.

C- Common

O- Operation

M- Machine

U- Used for

T- Technical

E- Educational and

R- Research 

16938.

What is Double Entry System?

Answer»

The system of making two sides in the books of each contracting party for recording a transactions completely called double entry system.

16939.

State the Rules of Debit and Credit of Assets Account.

Answer»

Debit what comes in credit what goes out.

16940.

Why the Bank Reconciliation Statement is prepared?

Answer»

To reconcile, two Balance i.e., Balance as per cash book, Balance as per pass book.

16941.

In case lesser amount is recorded in sales invoice by mistake, then a ……. Is sentA. Debit NoteB. Credit NoteC. Cash NoteD. Debit or Credit Note

Answer» Correct Answer - A
16942.

A trade entered into following transactions. As a result, total of Purchase Column in the Purchases Book will be : (i) Goods purchased from Gaurav Rs. 8,000 (ii) Goods Purchased from Sudhir for Cash Rs. 10,000 (iii) Goods purchased from Kamal on credit Rs. 25,000 (iv) Machinery purchased from Dinesh on credit Rs. 40,000A. Rs. 83,000B. RS. 73,000C. Rs. 33,000D. Rs. 25,000

Answer» Correct Answer - C
16943.

Purchase of Machinery for 25,000 has been entered in the Purchases Book. Give the Rectifying Entry.

Answer»

Machinery a/c Dr 25000

To purchase a/c 25000 

(Being machinery purchased on credit wrongly entered in purchase book know rectified).

16944.

Name any two example of ‘Provision’.

Answer»

1. Provision for depreciation 

2. Provision for taxation.

16945.

Give an example for Closing Entry. 

Answer»

Trading a/c Dr XXX 

To opening stock a/c XXX 

(Being opening stock a/c closed by transferring to debit side of trading account)

16946.

What is cash book? Explain the types of cash book.

Answer»

Cash Book is a book of original entry. It records all transactions related to receipts and payments of cash and deposits in and withdrawals from a bank in a chronological order. In the debit side of the cash book, the cash receipts are recorded in the cash column while all deposits into bank account are recorded in the bank column.

On the contrary, in the credit side of the cash book, all cash payments are recorded in the cash column, while all payments through cheques are recorded in the bank column. Usually, it is prepared on monthly basis. Cashbook also serves the purpose of principle book (i.e. cash account and bank account). 

a. Single column Cash Book: A single column Cash Book contains one column of amount on both sides, i.e., one in the debit side and other in the credit side. In the single column Cash Book, only cash transactions are recorded. In the debit side of the Cash Book, all cash receipts are recorded, while in the credit side all cash payments are recorded.

b. Double column Cash Book: A double column Cash Book contains two columns of amount, namely cash column and bank column on both sides. In the cash column of Cash Book, all cash receipts and payments are recorded, according to the rule of Real Accounts. All deposits either in cash or through cheques into the bank account of the business are debited in the bank column and al withdrawals of cash and payments through cheques are credited in the bank column.

c. Triple column Cash Book: In a triple column Cash Book, there are three columns of amount namely, cash, bank and discount. Discount allowed and discount received are recorded in the discount column. While in the debit side, discount allowed is recorded along with the receipts, either in cash or through cheque; whereas, in the credit side, discount received is recorded, along with the payments made either in cash or by issuing cheques.

d. Petty Cash Book: This book is used for recording payment of petty expensed, which are of smaller denominations like, postage, stationery, conveyance, refreshment, etc. is known as petty cash book.

16947.

What are the functional components of Computer System?

Answer»
  • Input unit 
  • Untral processing unit 
  • Output unit
16948.

Explain the classifications of accounting under American system.

Answer»

Every business organisation have properties, liabilities capital. For running business it will earn certain income or revenue or has to incur expenses or losses.

As per American approach accounts of a business can classified into five heads. They are,

1. Assets accounts: Assets are properties of Business. The rights and resources owned by business for running its activities as per objectives come under Assets accounts. 

Example: Land and Building, Machinery, Furniture etc.

2. Liabilities accounts: These are the amounts of credit or debt owed by business to external persons.

Example: Creditors Bank loan, Bills payable, outstanding expenses etc.

3. Capital accounts: It represent owner’s fund or internal funds, owners claim on assets of the business. Capital is an excess of Assets over liabilities. It includes fund invested by owners, reserves and surplus. Capital is personal accounts of owner. 

4. Income accounts: Amount received or receivable by business from sale or service of its product. Example: Commission Discounts, Rent Interests, dividend received etc. These accounts are same as the “Nominal A/c” in English system.

5. Expenses accounts: Amount paid or payable for service obtained by business from outsiders are recorded in these a/c. These Expenses need for carrying out business operations. Example: Salary, Rent, Carriage, Advertising etc.

16949.

Classify the following Accounts into Assets, Liabilities, Capital, Revenue/Gains & Expenses/Losses:

Answer»

Cash a/c – Asset – Real A/c 

Purchase a/c – Asset – Real A/c 

Computer a/c – liability – personal a/c 

Building a/c – Asset – Real a/c

Salary a/c – Expenses – Nominal A/c

Interestion investment a/c – Income – nominal a/c

Sales -a/c Assets – Real a/c

Liability-personal a/c

Liability- personal a/c

Asset-real A/c

Assets – personal a/c

16950.

Who among the following bestowed upon Milkha Singh the title of the ‘Flying Sikh’?1. Jawaharlal Nehru2. Lal Bahadur Shastri3. General Ayub Khan4. General Yahya Khan

Answer» Correct Answer - Option 3 : General Ayub Khan

The correct answer is General Ayub Khan.

  • General Ayub Khan bestowed upon Milkha Singh the title of the ‘Flying Sikh’.

  • Gen Ayub Khan was Pakistan's second president.
  • Milkha Singh became the first Indian male to reach the final of an Olympic athletics event when he placed fourth in the 400-meter race at the 1960 Olympic Games in Rome.
  • He won both the 200-meter and 400-meter races in the 1958 Asian Games.
  • Milkha Singh was awarded the Padma Shri in 1959. 
  • He also served as the director of sports in Punjab.
  • The Race of My Life is his autobiography co-written by his daughter Sonia Sanwalka, was published in 2013.