This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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नगर महापालिकाओं की आय के चार स्रोत लिखिए। |
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Answer» नगर महापालिकाओं की आय के चार स्रोत हैं-गृह कर, सम्पत्ति कर, भूमि कर तथा जल कर। |
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उत्तर प्रदेश के नगर निगम या नगरपालिका की आय के स्रोतों तथा व्यय की प्रमुख मदों का वर्णन कीजिए।यानगरपालिका की आय के स्रोत लिखिए।यानगरपालिकाओं के व्यय की तीन मुख्य मदें लिखिए।यानगरनिगमों की आय के स्रोत लिखिए। |
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Answer» नगर निगम उत्तर प्रदेश के महानगरों (जैसे-लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, गोरखपुर, मुरादाबाद, बरेली व मेरठ) की व्यवस्था करते हैं। ये प्राय: वही कार्य करते हैं, जो पूर्व में नगर महापालिकाएँ किया करती थीं; अन्तर केवल इतना ही है कि ये अधिक शक्तिशाली होते हैं, इनका कार्य-क्षेत्र अधिकं विस्तृत होता है, इन्हें कर लगाने तथा वसूल करने के अधिक अधिकार प्राप्त होते हैं तथा इन पर राज्य सरकार का उतना नियन्त्रण नहीं होता जितना नगर महापालिकाओं पर होता है। नगर निगम या नगरपालिका की आय के स्रोत नगर निगम या नगरपालिका की आय के दो प्रमुख साधन हैं –
(अ) कर आगम – नगर निगम को निम्नलिखित करों से आय प्राप्त होती है 1. सम्पत्ति कर – यह नगर निगम की आय का प्रमुख स्रोत है। यह कर उसकी सीमा में स्थित भूमि, मकान तथा सम्पत्तियों के स्वामियों पर लगाया जाता है। ये निम्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं
2. चुंगी – नगर निगमों की सीमा में प्रवेश करने वाले माल पर जो कर लगाया जाता है, उसे चुंगी कहते हैं। नगर निगम की आय का यह सबसे बड़ा स्रोत है। चुंगी वस्तुओं की तोल पर या मूल्यानुसार लगायी जाती है। उत्तर प्रदेश में चुंगी समाप्त कर दी गयी है। 3. सीमा कर – यह कर रेल द्वारा किसी स्थानीय क्षेत्र में आने वाले पदार्थों पर लगाया जाता है। 4. मार्ग-कर – यह कर किसी स्थान, पुल या सड़क पर से गुजरने वाले प्रत्येक व्यक्ति, पशु, घोड़ागाड़ी आदि वाहनों से निश्चित दर (भार अथवा संख्या) पर वसूल किया जाता है। 5. तहबाजारी – यह कर अस्थायी अर्थात् ऐसे दुकानदारों से वसूल किया जाता है, जो सड़क की पटरियों पर रखकर अपना सामान बेचते हैं; जैसे-खोमचेवाले, फेरीवाले, हॉकर्स आदि। 6. शुल्क या अनुज्ञा-पत्र – इसके अन्तर्गत निम्नलिखित प्रकार के शुल्क सम्मिलित हैं
(ब) गैर-कर आगम – नगर निगम की गैर-कर आगम से प्राप्त आय के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं
(i) आवर्ती अनुदान, जो प्रति वर्ष दिये जाते हैं तथा (ii) अनावर्ती अनुदान, जो किसी विशेष कार्य को सम्पन्न करने के लिए दिये जाते हैं। नगर निगम या नगरपालिका की व्यय की प्रमुख मदें नगर निगम या नगरपालिका की व्यय की प्रमुख मदों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है – 1. शिक्षा – नगर निगम प्राथमिक शिक्षा, जूनियर शिक्षा व कभी-कभी माध्यमिक शिक्षा का भी प्रबन्ध करती है। स्कूलों का निर्माण करना, उनके संचालन के लिए आवश्यक सामग्री जुटाना, अध्यापकों को वेतन देना आदि व्यय इस मद में सम्मिलित होते हैं। 2. जन-स्वास्थ्य सेवाएँ – इस मद में ये व्यय सम्मिलित होते हैं-शुद्ध जल की व्यवस्था करना, गन्दे पानी की निकासी की व्यवस्था करना, सफाई का प्रबन्ध करना, महामारियों की रोकथाम करना, टीका लगवाना, खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकना, चिकित्सालयों की व्यवस्था करना आदि। नगर निगमों का पर्याप्त धन इन मदों पर व्यय होता है। 3. सार्वजनिक सुरक्षा – इस मद में ये व्यय आते हैं—आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड का प्रबन्ध करना, गलियों में प्रकाश की व्यवस्था करना, हानिकारक पशुओं से रक्षा करना, सड़कों के चौराहों पर पुलिस के खड़े होने के लिए चबूतरे बनवाना, सार्वजनिक स्थानों पर बिजली व प्रकाश का प्रबन्ध करना आदि। 4. जनसाधारण की सुविधा – इस मद में ये व्यय सम्मिलित किये जाते हैं-सड़क, पुल व नाली बनवाना; पुस्तकालय या वाचनालय का प्रबन्ध करना; सड़कों पर पानी छिड़कवाना; सड़कों के दोनों ओर छायादार वृक्ष लगवाना; बाजार, मेले व प्रदर्शनियों आदि का आयोजन करना। 5. प्रशासन और कर-संग्रह पर व्यय – इन्हें अपने प्रशासन हेतु कार्यालयों की व्यवस्था करनी होती है। अत: कार्यालयों के कर्मचारियों के वेतन तथा सामग्री पर व्यय करना पड़ता है। करों को वसूल करने में भी आय का पर्याप्त भाग व्यय हो जाता है। 6. सार्वजनिक निर्माण-कार्य – नगरपालिकाओं को उद्यानों व पार्को की व्यवस्था करनी पड़ती है, खेल के मैदान एवं व्यायामशालाओं आदि का निर्माण भी करना पड़ता है तथा अपने क्षेत्र की टूटी-फूटी सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत भी करानी पड़ती है। इन सभी कार्यों को सम्पादित करने में उसे प्रति वर्ष पर्याप्त धन व्यय करना पड़ता है। 7. पेयजल की व्यवस्था पर व्यय – नागरिकों के पीने के लिए शुद्ध जल की व्यवस्था करने के लिए नगरपालिकाएँ नलकूपों का निर्माण कराकर टंकियों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था करती हैं तथा सार्वजनिक स्थानों पर नल भी लगवाती हैं। इस मद पर भी इन्हें धन व्यय करना पड़ता है। |
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उत्तर प्रदेश में जिला परिषदों की आय के स्रोतों एवं व्यय की प्रमुख मदों का वर्णन कीजिए।याजिला परिषदों के व्यय की तीन मदें लिखिए। |
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Answer» जिला परिषदों के कार्य-क्षेत्र के अन्तर्गत जिले का सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र आता है। इन परिषदों के मुख्य कार्य सड़कों का निर्माण व मरम्मत, शिक्षा की व्यवस्था, मानव, व पशु चिकित्सालयों की व्यवस्था, दुर्भिक्ष निवारण कार्य, विश्रामगृहों की स्थापना, प्रशिक्षण व्यवस्था, मेलों पर नियन्त्रण, बाजार आदि की व्यवस्था, सफाई आदि हैं। जिला परिषद् की आय के स्रोत जिला परिषद् की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं – 1. भूमि उप-कर – जिला परिषदों की आय का सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोत भूमि उप-कर है। यह मालगुजारी पर अधिभार होता है, जिसको राज्य सरकारें स्थानीय संस्थाओं के लिए एकत्रित करती हैं। उत्तर प्रदेश में इस उप-कर को मालगुजारी में विलीन कर दिया गया है और इसके बदले में राज्य सरकार जिला परिषदों को क्षतिपूर्ति अनुदान देती है। 2. सम्पत्ति कर – यह मनुष्य की कुल सम्पत्ति अथवा आय के आधार पर लगाया जाता है। इस कर की प्रकृति प्रगतिशील होती है। 3. महसूल या मार्ग शुल्क – जिला परिषद् नदी के घाट, पुल, सड़क एवं तालाबों पर कर (महसूल) | लेती है। जो व्यक्ति अपने पशु अथवा वाहन से इन पुलों, सड़कों या घाटों से आते-जाते हैं, उन्हें यह मार्ग शुल्क देना पड़ता है। 4. काँजी हाउस – आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए जिला परिषद् कॉजी हाउस की व्यवस्था करती | है। इसमें आवारा घूमने वाले पशुओं को बन्द कर दिया जाता है और पशु मालिकों से जुर्माना लेकर ही पशुओं को छोड़ा जाता है। 5. किराया व शुल्क – जिला परिषद् सराय, हाट, डाक बंगले, मकान, दुकान आदि से किराये के रूप में तथा संस्थाओं व चिकित्सालयों से फीस के रूप में आय प्राप्त करती है। 6. अनुज्ञा-पत्र शुल्क – जिला परिषद् कसाइयों से, गोश्त की दुकानों से, वनस्पति घी की दुकानों से, आटे की चक्की आदि से अनुज्ञा-पत्र जारी करके शुल्क प्राप्त करती है। 7. मेलों, प्रदर्शनियों व बाजारों से आय – जिला पंचायतों के क्षेत्र में जिन प्रमुख मेलों व प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाता है, उसका प्रबन्धन जिला पंचायत को करना पड़ता है। इसके आयोजन से जो आय प्राप्त होती है, वह जिला परिषद् को मिल जाती है। 8. कृषि उपकरणों की बिक्री से आय – जिला परिषद् खाद, बीज, कृषि-यन्त्र आदि की बिक्री की भी व्यवस्था करती है। इनकी बिक्री से भी लाभ के रूप में उसे कुछ आय प्राप्त होती है। 9. सरकारी अनुदान – राज्य सरकार जिला परिषदों को पर्याप्त मात्रा में आर्थिक अनुदान (Grant) शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा आदि के विकास के लिए देती है। यह जिला परिषदों की कुल आय का40% तक होता है। जिला परिषद की व्यय की मदें जिला परिषदों के व्यय की प्रमुख मदें निम्नलिखित हैं – 1. शिक्षा – जिला परिष0द् ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी तथा जूनियर हाईस्कूल तथा वाचनालयों की व्यवस्था करती है। इस मद पर जिला परिषद् की आय का एक बड़ा भाग व्यय हो जाता है। 2. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पर व्यय – जिला परिषद् ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सालयों एवं जच्चा- बच्चा गृहों की व्यवस्था करती है तथा संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए नि:शुल्क टीके लगवाती है। 3. पशु चिकित्सालय – जिला परिषद् पशुओं की चिकित्सा के लिए पशु चिकित्सालयों की स्थापना | करती है। 4. सार्वजनिक निर्माण कार्य – जिला परिषद् घाटे व गाँवों में सड़कें बनवाने, तालाब व कुएँ खुदवाने, वृक्ष लगवाने, पुलों का निर्माण करने तथा इन सबकी मरम्मत कराने में पर्याप्त व्यय करती है। 5. प्रशासन व कर वसूली – जिला परिषद् अपने कार्यालय की व्यवस्था करने, अपने कर्मचारियों को वेतन देने व कर वसूलने में पर्याप्त व्यय करती है। 6. पंचायतों को सहायता – जिला परिषद् अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायतों तथा क्षेत्रीय समितियों के कार्यों का निरीक्षण करती है तथा उनके विकास के लिए आर्थिक अनुदान देती है। 7. मेले व प्रदर्शनियाँ – जिला परिषद् अपने क्षेत्र में मेले व प्रदर्शनियों की व्यवस्था पर पर्याप्त व्यय करती है। 8. अन्य मदें – जिला परिषद् दीन-दु:खियों तथा अपाहिजों की सहायता करती है, जन्म-मृत्यु का विवरण रखती है, कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करती है तथा पशुओं के रोगों की रोकथाम की व्यवस्था करती है। जिला परिषद् कभी-कभी जिले के आर्थिक विकास के लिए ऋण भी ले लेती है, जिस पर उसे ब्याज भी देना पड़ता है। |
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राज्य सरकार की आय के दो साधनों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» 1.भू-राजस्व की मालगुजारी 2.व्यापार कर। |
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‘बिक्रीकर’ आय का साधन है(क) केन्द्र सरकार का(ख) राज्य सरकार का(ग) जिला पंचायत का(घ) ग्राम पंचायत का |
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Answer» सही विकल्प है (ख) राज्य सरकार का |
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ग्राम पंचायतों की आय के स्रोत एवं व्यय की प्रमुख मदों का वर्णन कीजिए।याग्राम पंचायत के किन्हीं दो आय के साधनों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» भारत की शासन-प्रणाली प्रजातान्त्रिक है। प्रजातन्त्र को गाँवों तक पहुँचाने के उद्देश्य से हमारे संविधान में पंचायती राज की व्यवस्था की गयी है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश सरकार ने सन् 1947 ई० में पंचायती राज अधिनियम पारित करके ग्रामों में तीन प्रकार की संस्थाओं की स्थापना की-
इस प्रकार ग्राम पंचायत ग्रामीण स्वशासन की दूसरी इकाई है। ग्राम पंचायत ग्राम सभा द्वारा निर्धारित नीतियों को लागू करती है। ग्राम पंचायत की आय के स्रोत ग्राम पंचायतों की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं – 1. अनिवार्य कर –
2. महसूल –
3. अन्य शुल्क –
4. जिला बोर्ड से सहायता –
ग्राम पंचायत की व्यय की मदें ग्राम पंचायतों की व्यय की मुख्य मदें निम्नलिखित हैं –
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प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर के दो-दो उदाहरण दीजिए। या प्रत्यक्ष कर के दो उदाहरण लिखिए। |
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Answer» प्रत्यक्ष कर के दो उदाहरण-आयकर और निगम कर। अप्रत्यक्ष कर के दो उदाहरण–बिक्री कर और उत्पादन कर। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा कर केन्द्र सरकार द्वारा लगाया जाता है?(क) व्यापार कर(ख) मनोरंजन कर(ग) यात्री कर(घ) निगम कर |
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Answer» सही विकल्प है (घ) निगम कर |
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अप्रत्यक्ष कर का उदाहरण है(क) आयकर(ख) बिक्री कर(ग) सम्पत्ति कर(घ) उपहार कर |
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Answer» सही विकल्प है (ख) बिक्री कर |
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कर है –(क) अनिवार्य भुगतान(ख) ऐच्छिक भुगतान(ग) आर्थिक भुगतान(घ) गैर-आर्थिक भुगतान |
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Answer» सही विकल्प है (क) अनिवार्य भुगतान |
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जिला परिषद् के दो प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» जिला परिषद् के दो प्रमुख कार्य हैं – 1.शिक्षा तथा 2.सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सी। |
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ग्राम पंचायत के व्यय की दो मदें लिखिए। |
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Answer» ग्राम पंचायत के व्यय की दो मुख्य मदें हैं— 1.सफाई एवं प्रकाश की व्यवस्था तथा 2.चिकित्सालय की व्यवस्था एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम। |
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नगर निगम की आय के दो साधन लिखिए। |
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Answer» नगर निगम की आय के दो साधन हैं— 1.सम्पत्ति-कर या गृह-कर तथा 2.जल-कर। |
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ग्राम पंचायत की आय के दो स्रोत लिखिए। |
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Answer» ग्राम पंचायत की आय के दो स्रोत हैं— 1.अनिवार्य कर; जैसे—सवारी कर, भूमि कर, पेशा (उद्यम) कर। 2.जिला पंचायत तथा राज्य सरकार से अनुदान। |
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पूँजी की परिभाषा दीजिए।यापूँजी का अर्थ स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» पूँजी वह धन है जो आय प्रदान करती है या आय के उत्पादन में सहायक होती है। |
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पूँजी के कोई दो प्रमुख लक्षण लिखिए। |
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Answer» पूँजी के दो प्रमुख लक्षण हैं – 1.पूँजी उत्पादन का निष्क्रिय. साधन है तथा 2.पूँजी मनुष्यकृत साधन है। |
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लाभ की परिभाषा दीजिए। लाभ किसे प्राप्त होता है ?यालाभ से आप क्या समझते हैं ? |
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Answer» उत्पादन के पाँच उपादान हैं-भूमि, श्रम, पूँजी, संगठन और उद्यम। इनमें उद्यम सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है। उद्यमी (साहसी) ही उत्पादन के उपादानों को जुटाता है, उपादानों के स्वामियों को उनके प्रतिफल का भुगतान करता है और उत्पादन-सम्बन्धी सभी प्रकार की जोखिम उठाती है। उत्पादन के सभी उपादानों का भुगतान करने के बाद जो कुछ भी शेष बचता है, वही उसका प्रतिफल या लाभ होता है। अतः राष्ट्रीय आय का वह अंश, जो उद्यमी को प्राप्त होता है, लाभ कहलाता है। लाभ की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं – |
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राज्य सरकार कौन-कौन से कर लगाती है ? |
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Answer» राज्य सरकार द्वारा लगाये जाने वाले करों के नाम हैं- 1.भू-राजस्व 2.व्यापार कर 3.राज्य उत्पादन कर तथा 4.मनोरंजन कर। |
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पूँजी के दो भेद लिखिए। |
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Answer» पूँजी के दो भेद हैं – 1.चल पूँजी या अचल पूँजी तथा 2.राष्ट्रीय पूँजी एवं अन्तर्राष्ट्रीय पूँजी। |
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पूँजी की परिभाषा दीजिए। देश के आर्थिक विकास में पूँजी के दो कार्य भी लिखिए। |
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Answer» परिभाषा – “पूँजी वह धन है जो आय पैदा करता है अथवा आय के उत्पादन में सहायक होता है।” देश के आर्थिक विकास में पूँजी के दो प्रमुख कार्य हैं-
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नगर महापालिकाओं की आय के दो साधन लिखिए। |
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Answer» (1) सम्पत्ति-कर या गृहकर तथा |
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जिला परिषद् की आय के दो साधन बताइए। |
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Answer» (1) हैसियत या सम्पत्ति कर तथा |
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जिला परिषदों (जिला पंचायतों) की आय के स्रोतों और व्यय की प्रधान मदों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।याजिला परिषद् की आय के प्रमुख स्रोतों को समझाइए। |
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Answer» जिला परिषदों (जिला पंचायतों) की आय के प्रमुख स्रोत जिला पंचायतों की व्यय की प्रमुख मदें 1. शिक्षा पर व्यय – जिला पंचायत सबसे अधिक व्यय शिक्षा पर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार व प्रसार का उत्तरदायित्व जिला पंचायतों पर है। इसके लिए जिला पंचायत गाँवों में प्राइमरी स्कूल तथा जूनियर हाईस्कूल खोलती है। गाँवों में वाचनालय एवं पुस्तकालयों की भी व्यवस्था करती है। |
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स्थानीय निकाय की व्यय की दो मदों के नाम लिखिए। |
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Answer» (1) शिक्षा, |
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नगर महापालिकाओं की व्यय की दो प्रमुख मदों को लिखिए। |
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Answer» (1) शिक्षा तथा |
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नगर महापालिकाओं की व्यय की मदों को लिखिए। |
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Answer» नगर महापालिकाओं के व्यय की मदें। |
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राज्य सरकार द्वारा लगाये जाने वाले दो करों के नाम लिखिए। |
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Answer» राज्य सरकार द्वारा लगाये जाने वाले दो कर निम्नलिखित हैं ⦁ कृषि आयकर – भारत के संविधान के अनुसार राज्य सरकारों को अपने-अपने राज्य में कृषि आयकर लगाने का अधिकार दिया गया है। यह कर कृषकों पर प्रगतिशील दरों पर लगाया जाता है तथा उन व्यक्तियों पर ही लगाया जाता है जिनके पास सीमा से अधिक भूमि होती है। |
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भू-राजस्व के दो गुण बताइए। |
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Answer» भू-राजस्व के दो गुण हैं ⦁ भू-राजस्व से निश्चित आय प्राप्त होती है तथा |
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निम्नलिखित में से कौन राज्य सरकारों की आय का सीधा स्रोत नहीं है? (क) व्यापार कर(ख) आय कर(ग) मनोरंजन कर(घ) रजिस्ट्री शुल्क |
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Answer» सही विकल्प है (ग) मनोरंजन कर। |
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राज्य सरकार द्वारा लगाये जाने वाले किन्हीं चार करों के नाम लिखिए। |
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Answer» (1) कृषि आयकर |
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सिनेमा पर मनोरंजन कर का भुगतान किसके द्वारा किया जाता है?(क) निर्माता द्वारा(ख) वित्त प्रबन्धक द्वारा(ग) निर्देशक द्वारा(घ) दर्शक द्वारा |
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Answer» सही विकल्प है (घ) दर्शक द्वारा। |
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कौन-सा कर राज्य सरकार की आय का स्रोत नहीं है?(क) निगम कर(ख) व्यापार कर(ग) मूल्य-संवर्धित कर(घ) मनोरंजन कर |
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Answer» सही विकल्प है (क) निगम कर। |
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उत्तर प्रदेश सरकार की आय में प्रत्यक्ष करों का अंश अप्रत्यक्ष करों की अपेक्षा कैसा है? |
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Answer» उत्तर प्रदेश सरकार की आय में प्रत्यक्ष करों का अंश अप्रत्यक्ष करों की अपेक्षा कम है। |
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राज्य उत्पादन शुल्क लगाया जाता है(क) केन्द्रीय सरकार द्वारा(ख) राज्य सरकार द्वारा(ग) स्थानीय सरकार द्वारा।(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) राज्य सरकार द्वारा। |
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उत्तर प्रदेश सरकार की आय, व्यय की अपेक्षा कम है, क्यों? कारण बताइए। |
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Answer» उत्तर प्रदेश सरकार की आय, व्यय की अपेक्षा कम होने के कारण – स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् राज्य सरकार की आय व व्यय दोनों में वृद्धि हुई है, परन्तु व्यय में वृद्धि आय की अपेक्षा अधिक हुई है। इसका कारण निम्नलिखित है ⦁ विकास व्यय में वृद्धि। राज्य सरकार की आय कम होने के कारण |
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अपने राज्य की सरकार की आय के प्रमुख स्रोतों और व्यय की प्रमुख मदों का विवरण दीजिए। याप्रदेश सरकार की आय के किन्हीं तीन स्रोतों तथा व्यय की किन्हीं तीन मदों का वर्णन कीजिए। याराज्य सरकार की कर आय के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» प्रदेश सरकार की आय के प्रमुख स्रोत उत्तर प्रदेश सरकार की व्यय की प्रमुख मदें (अ) विकास व्यय (ख) परोक्ष रूप से आर्थिक विकास करने वाली मदें – इस प्रकार के कार्यों की मदों का वर्णन हम संक्षेप में निम्नलिखित प्रकार से कर सकते हैं (ब) गैर-विकास व्यय |
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उत्तर प्रदेश सरकार की आय के साधन कम होने के चार कारण लिखिए। |
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Answer» उत्तर प्रदेश सरकार की आय के साधन अग्रलिखित कारणों से कम हैं |
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उत्तर प्रदेश सरकार अपने बढ़ते हुए व्यय को किस प्रकार कम कर सकती है? |
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Answer» उत्तर प्रदेश की आय एवं व्यय दोनों में निरन्तर वृद्धि होती जा रही है, परन्तु व्यय में वृद्धि आय की अपेक्षा अधिक हुई है। इसका प्रमुख कारण विकास व्यय, ऋण-सेवाएँ व्यय एवं प्रशासनिक व्यय में तीव्र गति से वृद्धि होना है। उत्तर प्रदेश सरकार की आय बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाने चाहिए ⦁ प्रशासनिक एवं अनावश्यक व्यय कम किये जाने चाहिए। |
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केन्द्रीय सरकार की व्यय की सबसे बड़ी मद कौन-सी है? |
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Answer» केन्द्रीय सरकार की व्यय की सबसे बड़ी मद प्रतिरक्षा सेवा है। |
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प्रतिरक्षा व्यय को कौन-सी सरकार वहन करती है ? |
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Answer» प्रतिरक्षा व्यय’ को केन्द्रीय सरकार वहन करती है। |
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आयकर किसके द्वारा लगाया जाता है ? |
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Answer» आयकर केन्द्रीय सरकार द्वारा लगाया जाता है। |
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भारत में केन्द्र सरकार के व्यय के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए। |
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Answer» केन्द्र सरकार के व्यय के स्रोत (मदे) 1. करों को एकत्रित करने पर व्यय – केन्द्रीय सरकार को प्रतिवर्ष करों की धनराशि को एकत्रित करने पर बहुत बड़ी धनराशि व्यय करनी पड़ती है। |
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निगम कर किसके द्वारा लगाया जाता है? |
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Answer» केन्द्र सरकार द्वारा। |
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भारत में योजना आयोग का अध्यक्ष कौन होता है ? |
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Answer» भारत में योजना आयोग का अध्यक्ष प्रधानमन्त्री होता है। |
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ऐसे कर जिनका प्रभाव सम्पूर्ण देश पर पड़ता है, लगाने का अधिकार किसे है ? |
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Answer» ऐसे कर जिनका प्रभाव सम्पूर्ण देश पर पड़ता है, को लगाने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। |
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निगम कर कैसा कर है? |
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Answer» प्रत्यक्ष कर। |
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भारत में ‘आयकर’ किस प्रकार का कर है ? |
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Answer» भारत में आयकर प्रगतिशील कर है, क्योंकि कर की दर, आय की वृद्धि के साथ बढ़ती जाती है। |
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भारत की मुख्य आर्थिक आधारित संरचनाएं कौन सी हैं ? वर्णन करो। |
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Answer» आर्थिक आधारित संरचना से अभिप्राय उस पूंजी स्टॉक से है जो उत्पादन प्रणाली को प्रत्यक्ष सेवाएं प्रदान करता है। दूसरे शब्दों में, आर्थिक आधारित संरचनाएं वे सुविधाएं तथा सेवाएं हैं जो उत्पादन तथा वितरण प्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
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आधारित संरचना से क्या अभिप्राय है ? इसकी क्या आवश्यकता है? |
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Answer» आधारित संरचना- आधारित संरचना से आशय उन सुविधाओं, क्रियाओं तथा सेवाओं से है जो अन्य क्षेत्रों के संचालन तथा विकास में सहायक होती हैं। आधारित संरचना की आवश्यकता वास्तव में, प्रत्येक देश के आर्थिक विकास के लिए आधारित संरचना एक पूर्व शर्त है। इसकी पर्याप्त उपलब्धता विकास का आधार है तथा इसकी अपर्याप्त उपलब्धता विकास में सबसे बड़ी बाधा है। |
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आधारिक संरचना से क्या अभिप्राय है? |
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Answer» अर्थ-व्यवस्था के पूंजी स्टॉक का वह भाग जो विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करने की दृष्टि से आवश्यक होता है, अर्थ-व्यवस्था का सहायक ढांचा अथवा आर्थिक संरचना कहलाता है। |
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