|
Answer» नगर महापालिकाओं के व्यय की मदें। 1. प्रशासन और कर-संग्रह पर व्यय – नगर महापालिकाओं को अपने प्रशासन हेतु कार्यालय व्यवस्था करनी होती है। अत: कार्यालयों के कर्मचारियों के वेतन तथा सामग्री पर व्यय करना पड़ता है। करों को वसूल करने में भी आय का पर्याप्त भाग व्यय होता है। 2. सार्वजनिक सुरक्षा पर व्यय – नगर महापालिकाएँ सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से आग बुझाने के लिए दमकलें रखती हैं, सड़कों के चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस के उड़े होने के लिए चबूतरे बनवाती हैं तथा सार्वजनिक स्थानों पर बिजली व रोशनी का प्रबन्ध करती हैं। इन मदों पर भी प्रतिवर्ष काफी व्यय होता है। 3. सार्वजनिक स्वास्थ्य व चिकित्सा – नगर महापालिकाएँ नि:शुल्क चिकित्सा व्यवस्था प्रदान करती हैं। चेचक, हैजा, प्लेग आदि रोगों की रोकथाम के लिए टीके लगवाती हैं, नगर की सफाई की व्यवस्था करती हैं तथा बाजार में बिकने वाली अशुद्ध वस्तुओं पर रोक लगाती हैं। इन सब कार्यों को पूरा करने के लिए नगर महापालिकाओं का पर्याप्त धन व्यय होता है। 4. शिक्षा पर व्यय – नगर महापालिकाएँ अपने क्षेत्र में प्राइमरी शिक्षा की व्यवस्था करती हैं। कुछ नगर महापालिकाएँ जू० हा० स्कूल, हाईस्कूल व इण्टरमीडिएट कॉलेज भी चलाती हैं। इस मद पर भी नगर महापालिकाएँ धन व्यय करती हैं। 5. सार्वजनिक निर्माण कार्य – नगर महापालिकाओं को उद्योगों व पार्को की व्यवस्था करनी पड़ती है। खेल के मैदान एवं व्यायामशालाओं आदि का निर्माण भी करना पड़ता है तथा अपने क्षेत्र में टूटी-फूटी सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत भी करानी पड़ती है। इन सभी कार्यों को सम्पादित करने में प्रतिवर्ष पर्याप्त धन व्यय करना पड़ता है। 6. पेयजल की व्यवस्था पर व्यय – नगर महापालिकाओं का एक प्रमुख कर्तव्य अपने क्षेत्र के नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध जल की व्यवस्था करना है। इस कार्य के लिए नगर महापालिकाएँ नलकूपों का निर्माण कराकर टंकियों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था करती हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नल भी लगवाती हैं। इस मद पर भी धन व्यय करना पड़ता है।
|