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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

वित्त आयोग पर एक टिप्पणी लिखिए।

Answer»

भारतीय संविधान की धारा 180 के अन्तर्गत यह व्यवस्था की गयी है कि भारत का राष्ट्रपति प्रति पाँच वर्ष के लिए एक वित्त आयोग का गठन करेगा। इसका कार्य केन्द्र व राज्यों के बीच आय, अनुदान आदि को सुनिश्चित करना तथा वित्त सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण सुझाव देना है।

2.

आयात शुल्क लगाने के दो उद्देश्य बताइए।

Answer»

आयात शुल्क लगाने के दो उद्देश्य हैं
⦁    आय प्राप्त करना तथा
⦁    स्वदेशी उद्योगों को संरक्षण प्रदान करना।

3.

उत्पाद शुल्क किस सरकार से सम्बन्धित है?

Answer»

केन्द्र सरकार।

4.

अपने राज्य की नगर महापालिकाओं की आय के स्रोतों की व्याख्या कीजिए।यानगर महापालिकाओं की आय की प्रमुख मदें (मुख्य स्रोत) लिखिए।

Answer»

नगर महापालिकाओं की आय के प्रमुख स्रोत (प्रमुख मदें)
नगर महापालिकाओं की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं

1. सम्पत्ति-कर – यह नगर महापालिकाओं की आय का एक प्रमुख स्रोत है। यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में स्थित भूमि, मकान तथा सम्पत्तियों के स्वामियो पर लगाया जाता है। यह दो प्रकार का होता हैं
⦁    गृह कर – भवन कर नगर महापालिका की आय का एक प्रमुख स्रोत है। यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में स्थित भूमि, मकान तथा सम्पत्तियों से वसूल किया जाता है।
⦁     विकास कर – नगर महापालिकाओं द्वारा जब किसी क्षेत्र में विकास; जैसे–सड़कों का निर्माण, पुलों का निर्माण आदि किया जाता है तो नगर महापालिका कर वसूल करती है। इसे विकास कर कहते हैं।
2. जल-कर – नगर महापालिकाएँ अपने नागरिकों के लिए स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था करती हैं। इसके बदले में वे जल-कर प्राप्त करती हैं।
3. चुंगी कर – चुंगी कर के द्वारा नगर महापालिकाओं को पर्याप्त आय होती है। चुंगी उन वस्तुओं पर लगायी जाती है जिनका नगर महापालिकाओं के क्षेत्र में आयात होता है अर्थात् जो वस्तुएँ नगर की सीमा से बाहर के क्षेत्रों से नगर की सीमा में आती हैं। उत्तर प्रदेश में अब यह कर बन्द कर दिया गया है।
4. सीमा कर – यह कर उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जो रेल द्वारा नगर महापालिका के क्षेत्र में आती हैं।।
5. मार्ग कर – यह कर नगर महापालिकाओं की सीमा में पड़ने वाले पुलों, सड़कों, नदियों पर से गुजरने वाले व्यक्तियों, पशुओं तथा वाहनों पर उनके भार अथवा संख्या के आधार पर लगाया जाता है।
6. यात्री कर – यह कर तीर्थस्थानों की नगर महापालिकाओं या नगर पालिकाओं द्वारा लगाया जाता है। नगर महापालिकाएँ बाहर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यय स्वास्थ्य, सफाई व जलापूर्ति पर करती हैं। इस कारण वे यह कर वसूल करती हैं। अब इस कर को केन्द्रीय सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है।
7. तहबाजारी – यह कर अस्थायी दुकानदारों से वसूल किया जाता है। जो दुकानदार सड़क की पटरियों पर रखकर सामान बेचते हैं; जैसे-खोमचे वाले, फेरी वाले, हॉकर्स आदि; इनसे यह कर प्रतिदिन वसूल किया जाता है।
8. वाहन कर या लाइसेंस से आय – नगर महापालिकाएँ मोटरों, ऊँटगाड़ियों, बैलगाड़ियो. घोड़े-ताँगों, ठेलों, रिक्शा आदि पर कर लगाती हैं तथा उन्हें लाइसेंस प्रदान करती हैं।
9. राज्य सरकार से अनुदान – राज्य सरकार नगर महापालिकाओं को उनके व्यय की पूर्ति हेतु अनुदान देती है।

5.

विशेष धारक बॉण्ड योजना क्या है ?

Answer»

विशेष धारक बॉण्ड योजना में यह घोषित किया गया कि जो लोग इस योजनान्तर्गत विशेष बॉण्ड खरीदेगे, उनसे यह नहीं पूछा जाएगा कि यह धन उनके पास कहाँ से आया।

6.

केन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले किन्हीं चार करों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

केन्द्र सरकार की आय के स्रोतों को मुख्यत: निम्नलिखित भागों में बाँटा जा सकता है

(अ) करों से प्राप्त आय
विभिन्न प्रकार के करों के द्वारा केन्द्र सरकार को आय प्राप्त होती है, जिनमें मुख्य कर निम्नलिखित हैं

1. संघीय उत्पादन शुल्क – संघीय उत्पादन कर केन्द्रीय सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है। यह कर देश में उत्पन्न होने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है। कुछ वस्तुओं को छोड़कर (जैसे-शराब-भाँग आदि) देश में उत्पन्न होने वाली प्राय: सभी वस्तुओं पर संघ सरकार द्वारा उत्पादन कर लगाया जाता है; जैसे-कपड़ा, चीनी, दियासलाई, टायर-ट्यूब, बिजली के सामान, रेडियो, मोटरगाड़ियाँ आदि। इस कर से प्राप्त आय का एक पूर्वनिश्चित भाग राज्यों में बाँट दिया जाता है।
2. आयकर – यह एक प्रत्यक्ष कर है जो गैर-कृषि आय पर लगाया जाता है। इस कर को लगाने व वसूल करने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। आयकर से प्राप्त निवल आय का विभाजन केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच होता है। आयकर भारत में प्रगतिशील कर है। इस कर से केन्द्र सरकार को पर्याप्त आय प्राप्त होती है।
3. निगम कर – निगम कर से अभिप्राय, देशी व विदेशी कम्पनियों की वार्षिक आय पर लगाये गये अति कर Super Tax से है। यह कर सम्पूर्ण आय पर एक निश्चित दर से लगाया जाता है। सरकार को इससे भी आय होती है।
4. सम्पत्ति कर – भारत में यह कर 1957-58 से लागू किया गया है। जिन व्यक्तियों के पास 15, लाख रुपये से अधिक की सम्पत्ति होती है, उन्हें सम्पत्ति कर देना पड़ता है। इस कर से कुछ खम्पत्तियों को मुक्त रखा गया है; जैसे – कृषि भूमि, गाँवों में रहने के मकान, धार्मिक स्थानों की सम्पत्ति, बीमा व भविष्य निधि कोष आदि। इस कर की दर आरोही है। केन्द्रीय सरकार को इस कर से भी आय प्राप्त होती है।
5. उपहार कर – यह कर केन्द्रीय सरकार द्वारा 1958-59 ई० से लागू किया गया। यह कर उन व्यक्तियों पर लगाया जाता है जो अपने जीवन काल में निश्चित मूल्य से अधिक के उपहार अपने सम्बन्धियों या अन्य व्यक्तियों को देते हैं। इस कर का उद्देश्य मृत सम्पत्ति, कर की चोरी रोकना तथा धन के वितरण की विषमता को कम करना है। अब इस कर को समाप्त कर दिया गया है।
6. सीमा शुल्क-आयात – निर्यात कर को ही सीमा शुल्क कहते हैं। जब ये शुल्क मूल्य के आधार पर लगाये जाते हैं, तब इन्हें मूल्यानुसार शुल्क और जब ये शुल्क परिमाण या संख्या के अनुसार लगाये जाते हैं, तब इन्हें परिमाणानुसार शुल्क कहते हैं। भारत में ये दोनों प्रकार के शुल्क लगाये जाते हैं।
केन्द्रीय सरकार को निर्यात शुल्क की अपेक्षा आयात शुल्क से अधिक आय प्राप्त होती है। विगत दस, बारह वर्षों में सीमा शुल्कों से प्राप्त आय में निरन्तर वृद्धि हो रही है।

7.

घाटे की वित्त-व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।

Answer»

घाटे की वित्त-व्यवस्था एक ऐसी स्थिति को बतलाती है जिसमें सरकार का व्यये उसकी कुल आय से अधिक होता है। सरकार बजट के इस घाटे को पूरा करने के लिए या तो केन्द्रीय बैंक से अथवा जनता से ऋण लेती है या नई मुद्रा जारी करती है। इस प्रकार कोई भी व्यय जो सार्वजनिक ऋण से पूरा किया जाता है, घाटे की वित्त-व्यवस्था के अन्तर्गत आ जाता है। किसी प्रकार के वित्त-प्रबन्ध को घाटे की वित्त-व्यवस्था कहने से पूर्व इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उसके परिणामस्वरूप समाज में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होती है अथवा नहीं। जब सरकार की आये उसके द्वारा किये जाने वाले व्यय से कम रह जाती है तो बजट में इस प्रकार उत्पन्न होने वाले घाटे को पूरा करने के लिए जो व्यवस्था की जाती है, उसे घाटे की वित्त-व्यवस्था कहते हैं। ऐसा दो प्रकार से किया जा सकता है

⦁    नई मुद्रा के निर्गमन द्वारा तथा
⦁    संचित नकद बकाया को खातों से निकालकर।
रोजगार बढ़ाने, मन्दी की दशाओं को दूर करने तथा आर्थिक विकास की योजनाओं को पूरा करने के लिए विकासशील देशों में घाटे की वित्त-व्यवस्था को अपनाया जाना आवश्यक है, किन्तु इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए हर सम्भव प्रयास किये जाने चाहिए।

8.

राज्यों की आय के दो कर-स्रोतों के नाम लिखिए।

Answer»

(1) भू-राजस्व या मालगुजारी तथा
(2) विद्युत कर।

9.

संघीय उत्पादन शुल्क के दो उद्देश्य बताइए।

Answer»

संघीय उत्पादन शुल्क के दो उद्देश्य हैं
⦁    आर्थिक विकास के कार्यों को कार्यान्वित करने के लिए तथा,
⦁    देश में मुद्रास्फीति की दशाओं पर रोक लगाने के लिए।

10.

निम्नलिखित में से कौन-सा अप्रत्यक्ष कर है?(क) संपत्ति कर(ख) उत्पाद कर(ग) आय कर(घ) संपत्ति कर

Answer»

सही विकल्प है (ख) उत्पाद कर

11.

निम्नलिखित में से प्रत्यक्ष कर का उदाहरण कौन-सा है?(क) आयात-निर्यात कर(ख) उत्पादन कर(ग) बिक्री कर(घ) आयकर

Answer»

सही विकल्प है (घ) आयकर

12.

प्रगतिशील कर का उद्देश्य होता है।(क) आय का समान बँटवारा(ख) कर में वृद्धि(ग) हानिप्रद उपभोग पर प्रतिबंध(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (क) आय का समान बँटवारा

13.

वित्तीय घाटा तथा ब्याज भुगतान के अंतर को कहा जाता है।(क) राजस्व घाटा(ख) प्राथमिक घाटा(ग) बजट प्राप्तियाँ(घ) पूँजी घाटा

Answer»

सही विकल्प है (ख) प्राथमिक घाटा

14.

निम्नलिखित में से कौन सा असंतुलित बजट है?(क) बचत का बजट(ख) घाटे का बजट(ग) (क) और (ख) दोनों(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं ।

Answer»

सही विकल्प है (ग) (क) और (ख) दोनों

15.

सरकारी बजट क्या होता है? बजटीय नीति के तीन उद्देश्य बताइए।

Answer»

बजट सरकार की प्रत्याशित आय तथा प्रत्याशित व्यय का ऐसा ब्यौरा है, जो एक वित्तीय वर्ष में 1 से मार्च 31 तक के अनुमानों को प्रकट करता है। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा कमियों से संबंधित रिपोर्ट भी सम्मिलित होती है। अन्य शब्दों में, “सरकारी बजट एक वित्तिय वर्ष की अवधि के दौरान होता है सरकार की अनुमानित आय और व्ययों का विवरण होता है। 

सरकारी बजट के उद्देश्य निम्नलिखित हैं| 

(i) आय तथा संपत्ति का पुनः वितरण
(ii) संसाधनों का कुशल आबंटन
(iii) आर्थिक स्थिरता बनाए रखना
(iv) सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन

16.

एक सरकारी बजट में प्राथमिक घाटा 500 करोड़ है तथा ब्याज का भुगतान में 200 करोड़ है। राजकोषीय घाटा कितना है?

Answer»

प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज का भुगतान
500 करोड़ = राजस्व घाटा – 200 करोड़
रोजकोषीय घाटा = 500 करोड़ + 200 करोड़ = 700 करोड़

17.

क्या राजकोषीय घाटे की स्थिति प्राथमिक घाटा शून्य हो सकता है? समझाइए।

Answer»

हाँ, राजकोषीय घाटे की स्थिति में भी प्राथमिक घाटा शून्य हो सकता है। इसका अर्थ यह है कि सरकार को केवल इसीलिए ऋण लेना पड़ रहा है, ताकि वह अपने ब्याज के भुगतान के दायित्व को पूरा कर सके। इस दायित्व के अतिरिक्त वह किसी अन्य ध्येय के लिए वर्तमान ऋणों में कोई और वृद्धि नहीं कर रही है। वास्तव में, यह राजकोषीय अनुशासन का प्राण है अर्थात् सरकार अपने राजकोषीय उत्तरदायित्व को पूरा कर रही है। इसके विपरीत उच्च प्राथमिक घाटा सरकार की राजकोषीय गैर जिम्मेदारी का प्रतीक है।

18.

सरकारी बजट के बारे में निम्नलिखित आँकड़ों से(a) राजस्व घाटा,(b) राजकोषीय घाटा और(c) प्राथमिक घाटा ज्ञात कीजिए 

Answer»

(a) राजस्व घाटा = राजस्व व्यये – राजस्व प्राप्तियाँ (कर राजस्व + गैर – कर राजस्व)
80 अरब – ( 47 अरब + 10 अरब) = 80 अरब – 57 अरब = 23 अरब

(b) राजकोषीय घाटा = उधार = 32 अरब

(c) प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगता = 32 अरब – 20 अरब = 12 अरब

(a) राजस्व घाटा = 23 अरब,
(b) राजकोषीय घाटा = 32 अरब,
(c) प्राथमिक घाटा = 12 अरब

19.

निम्नलिखित में से कौन-सी पूँजीगत प्राप्ति है।(क) कर राजस्व(ख) सरकारी निवेश से प्राप्त आय(ग) फीस व जुर्माने से प्राप्त राशि(घ) उधार ली गई राशि

Answer»

सही विकल्प है (घ) उधार ली गई राशि

20.

एक सरकारी बजट में प्राथमिक घाटी र 500 करोड़ है तथा ब्याज का भुगतान 200 करोड़ है। राजकोषीय घाटा कितना है।

Answer»

प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज़ का भुगतान

500 करोड़ = राजकोषीय घाटा – 200 करोड़

राजकोषीय घाटा = 500 करोड़ + 200 करोड़ = 700 करोड़

21.

राजस्व व्यय वह व्यय है जिसके फलस्वरूप(क) सरकार की परिसंपत्ति का निर्माण होता है(ख) सरकार की परिसंपत्ति का निर्माण नहीं होता(ग) सरकार की देयता में कमी होती है।(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

22.

बजट बचत से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें सरकार का बजट व्यय(क) बजट प्राप्तियों से कम होता है।(ख) बजट प्राप्तियों से अधिक होता है।(ग) बजट प्राप्तियों से बराबर(घ) इनमें से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (क) बजट प्राप्तियों से कम होता है।

23.

क्या राजस्व घाटे के बिना राजकोषीय घाटा हो सकता है? समझाइए।

Answer»

हाँ, राजस्व घाटे के बिना भी राजकोषीय घाटा हो सकता है।
राजकोषीय घाटा = राजस्व घाटा + {(पूँजीगत व्यय – पूँजीगत प्राप्तियाँ (ऋण के अतिरिक्त)}
अतः राजकोषीय घाटे का अनुमान सरकार की दोनों राजस्व तथा पूँजी प्राप्तियों और व्यय की गणना करके लगाया जाता है इसलिए जब राजस्व प्राप्तियाँ और राजस्व व्यय संतुलन की अवस्था में हैं तब भी पूँजी प्राप्तियों के ऊपर पूँजी व्यय का आधिक्य हो सकता है, जिसके कारण राजकोषीय घाटा हो सकता है।

24.

सरकारी बजट के बारे में निम्नलिखित आँकड़ों से(a) राजस्व घाटा,(b) राजकोषीय घाटा और(c) प्राथमिक घाटा ज्ञात कीजिए। 

Answer»

(a) राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ = 100 अरब – 80 अरब = 20 अरब

(b) राजकोषीय घाटा = राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ – पूँजीगत प्राप्तियाँ उधार के अतिरिक्त
= 100 अरब + 110 अरब – 80 अरब – 95 अरब
= 210 अरब – 175 अरब = 35 अरब

(c) प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान = 35 अरब – 10 अरब = 25 अरब

25.

सरकारी बजट क्या है? इसके क्या उद्देश्य हैं?

Answer»

बजट सरकार की प्रत्याशित आय तथा प्रत्याशित व्यय का ऐसा ब्यौरा है जो एक वित्तीय वर्ष में अप्रैल 1 से मार्च 31 तक के अनुमानों को प्रकट करता है। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा कमियों से संबंधित रिपोर्ट भी सम्मिलित होती है। अन्य शब्दों में, सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान सरकार की अनुमानित आय और व्ययों का विवरण होता है। सरकारी बजट का उद्देश्य निम्नलिखित है

I. आर्य तथा संपत्ति को पुनः विवरण – आय की असमानताएँ दूर करने में सरकारी बजट की भूमिका है। बजटीय नीति का उपयोग करके आय की असमानताएँ दूर की जा सकती हैं। इसके लिए निम्नलिखित आयों को अपनाया जा सकता है
(i) अमीरों की आय पर प्रगतिशील आय प्रणाली का प्रयोग करके अधिक कर लगाकरे तथा उससे प्राप्त आय की गरीबों के कल्याण पर खर्च करना आय की असमानता कम की जा सकती है।
(ii) अमीरों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं पर अधिक कर लगाकर अमीरों की प्रयोज्य आय कम की जा सकती है।
(iii) गरीबों को आर्थिक सहायता देकर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ मुफ्त देकर और सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराकर आय में विषमता कम की जा सकती है।
(iv) सार्वजनिक व्यय द्वारा भी आय एवं संपत्ति की समानता लाने में सहायता मिल सकती है और इस व्यय के लिए राजस्व अमीरों पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
II. संसाधनों को कुशल आबंटन – देश के संसाधनों के आबंटन को पूर्ण रूपेण बाजार की शक्तियों पर नहीं छोड़ा जा सकता इसीलिए देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्राथमिकताओं के अनुसार सामाजिक व आर्थिक संतुलित विकास करना बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए कर नीति व आर्थिक सहायता की नीति बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।
(i) वांछनीय वस्तुओं पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार वृद्धि चाहती है जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि अनुपातों सरकारी क्षेत्र द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया जा सकता है या उन पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है।
(ii) अवांछनीय वस्तुओं पर उच्च दर पर कर लगाए जा सकते हैं। अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार कमी करना चाहती है। जैसे-सिगरेट, शराब, तंबाकू आदि उन्हें कर लगाकर पहले से अधि महँगा बनाया जा सकता है और उनके उत्पादन पर देश में संसाधन बढ़ाये जा सकते हैं।
III. आर्थिक स्थिरता – कर आर्थिक सहायता, सार्वजनिक व्यय के माध्यम से सरकार समग्र माँग को नियंत्रित करके मंदी व तेजी अथवा स्फीति अपस्फीति पा सकती है, जिससे आर्थिक स्थिरता लाई जा सकती हैं यह इस प्रकार किया जाता है
(i) स्फीति के समय सरकार अपने व्यय में कमी करती है और करों में वृद्धि होती है इससे समग्र माँग कम हो जाती है। समग्र माँग कम होने से स्फीति अंतराल समग्र हो जाता है। कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं स्फीतिकारी स्थिति स्थिरता में आ जाती है।
(ii) अपस्फीति के समय सरकार अपने व्यय में वृद्धि और करों में कमी करती है। इससे समग्र माँग बढ़ जाती है। समग्र माँग बढ़ने से अपस्फीति अंतराल समाप्त हो जाता है। कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं। और अपस्फीतिकारी स्थिति समाप्त हो जाती है।
IV. सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन-बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो निजी क्षेत्रकों द्वारा ही चलाए जा सकते हैं। इन क्षेत्रकों को सरकार को चलाना पड़ता है, क्योंकि ये उद्यम सामाजिक कल्याण की दृष्टि से तो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, परंतु ये लाभ नहीं देते। उदाहरण के लिए रेलवे, प्रशासनिक सेवाएँ आदि। सरकारी बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य इन सार्वजनिक उद्यमों को ठीक ढंग से प्रबंधित करता है।

26.

सरकारी बजट का आय का पुर्नवितरण उद्देश्य समझाइए। अथवाआय की असमानताएँ दूर करने में सरकारी बजट की भूमिका समझाइए। अथवाआय की असमानताओं को दूर करने के लिए बजटीय नीति का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

Answer»

आय की असमानताएँ दूर करना सरकारी बजट का एक मुख्य उद्देश्य है। बजटीय नीति का उपयोग करके आय की असमानताओं को दूर किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपायों को अपनाया जा सकता है

(i) अमीरों की आय पर प्रगतिशील आय प्रणाली का प्रयोग करके अधिक कर लगाकर तथा उससे प्राप्त आय को गरीबों के कल्याण पर खर्च करके आय की असमानता कम की जा सकती है।
(ii) अमीरों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं पर अधिक कर लगाकर अमीरों की प्रयोज्य आय कम की जा सकती है।
(iii) गरीबों को आर्थिक सहायता देकर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ मुफ्त देकर और सार्वजनिक व्यय द्वारा भी आय एवं संपत्ति की समानता लाने में सहायता मिल सकती है और इस व्यय के लिए राजस्व अमीरों पर प्रत्यक्ष एवं अपत्यक्ष करों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

27.

क्या आप ऐसा मानते हैं कि अर्थव्यवस्था में व्यावसायिक बैंक ही ‘मुद्रा का निर्माण करते हैं?

Answer»

हाँ, वाणिज्यिक बैंक अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। वे अपने द्वारा दिए गए ऋणों से संबंधित माँग जमाओं के रूप में साख का सृजन करते हैं। वाणिज्यिक बैंकों की माँग जमाएँ उनके नकद कोषों से कई गुणा अधिक होती है। यदि यह मान लें कि उनके नकद कोषों की राशि के 1000 है तथा माँग जमाएँ ₹ 10,000 है, तो अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति वाणिज्यिक बैंकों के नकद कोषों से दस गुणा अधिक हो जाएगी। इसी प्रकार नकद कोषों के ₹ 1,000 के आधार पर वाणिज्यिक बैंकों ने मुद्रा की पूर्ति में ₹ 10,000 का योगदान दिया।

28.

वैधानिक पत्र क्या है? कागजी मुद्रा क्या है?

Answer»

वैधानिक पत्र अथवा वैधानिक मुद्रा – इससे तात्पर्य उस मुद्रा से है जिसे कानून का समर्थन प्राप्त है और कोई भी व्यक्ति इसे अस्वीकार नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए, भारत की घरेलू सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार के लेन-देन के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गए 100 ₹ या उससे अधिक के नोटों को लेने से इंकार नहीं कर सकता।
कागजी मुद्रा – इससे तात्पर्य भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी करेंसी नोट और सिक्कों से हैं इसका सोने और चाँदी के सिक्कों की तरह कोई आंतरिक मूल्य नहीं होता और यह सरकार के आदेश पर प्रचलित होती है। इस मुद्रा को आदेश मुद्रा भी कहा जाता है।

29.

भारत में मुद्रा पूर्ति की वैकल्पिक परिभाषा क्या है?

Answer»

भारत में मुद्रा की पूर्ति की भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा चार वैकल्पिक परिभाषाएँ दी गई हैं नामतः M1, M2, M3 और M4 जो इस प्रकार हैं।

M1 = C + DD + OD
M2 = M1 + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमाएँ।
M3 = M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल आवधिक जमाएँ
M4 = M3 + डाकघर बचत संस्थाओं में कुल जमाएँ (राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्रों को छोड़कर)
जहाँ, C = जनता के पास करेंसी
DD = माँग जमाएँ।
OD = रिजर्व बैंक के पास अन्य जमाएँ
इसे M1 को संकुचित मुद्रा तथा M3 को व्यापक मुद्रा कहा जाता है?

30.

मुद्रा की सट्टा माँग और ब्याज की दर में विलोम संबंध क्यों होता है?

Answer»

जब हम मुद्रा को सट्टा माँग के उद्देश्य से अपने पास रखते हैं तो मुद्रा को नकदी रूप में अपने पास रखने की अवसर लागत ब्याज दर है। यदि हम 5000 बैंक में रखें और यह हमें 10% प्रति वर्ष ब्याज देता है तो इस 5000 को अपने पास नकदी के रूप में रखने की अवसर लागत 500 है, परन्तु यदि ब्याज दर कम होकर 5% हो जाए तो अवसर लागत भी कम होकर ₹ 250 हो जायेगी।
अतः ब्याज की दर अधिक तो नकदी रखने की अवसर लागत अधिक और तदनुसार मुद्रा की सट्टा माँग कम होगी और विपरीत।। इसे अन्य शब्दों में भी समझा जा सकता है। एक व्यक्ति के पास दो विकल्प हैं एक वह अपने पास उपलब्ध नकद मुद्रा को बान्ड में निवेश कर दे और दूसरा वह उसे सट्टा उद्देश्य के लिए अपने पास रखे। यदि वह नकदी को सट्टा उद्देश्य के लिए अपने पास रखता है तो उसे वह आय छोड़नी होगी, जो वह इसे बॉण्ड में निवेश करके ब्याज के रूप में प्राप्त कर सकता है। इसे हम नकदी रखने की कीमत कह सकते हैं। माँग के नियम के अनुसार, कीमत बढ़ने पर माँगी गई मात्रा कम होती है तथा विपरीत अतः ब्याज दर बढ़ने पर सट्टा उद्देश्य के लिए माँगी गई मुद्रा की मात्रा में कमी होगी तथा विपरीत। अतः मुद्रा की सट्टा माँग और ब्याज दर में विपरीत संबंध है।

31.

व्यावसायिक बैंक के कार्यों का वर्णन कीजिए।

Answer»

व्यावसायिक बैंक के कार्य-बैंकों के दो सबसे अधिक महत्वपूर्ण कार्य हैं-जमा स्वीकार करना और ऋण देना।

1. जमा स्वीकार करना-बैंक लोगों की बचतों को जमा करता है। बैंकों के साथ हम तीन प्रकार के खाते खोल सकते हैं-
(i) बचत खाता
(ii) चालू खाता
(iii) सावधि खाता
(i) बचत खाता – यह खाता छोटी-छोटी बचतों को प्रोत्साहित करने के लिए होता है। यह परिवारों के लिए लाभदायक है, जिनको एक बार रुपया जमा करवाने के बाद तुरंत ज़रूरत नहीं पड़ती है। एक निश्चित सीमा तक ही रकम को इस खाते से हम निकलवा सकते हैं। इसमें ब्याज की दर सावधि जमा से कम होती है।
(ii) चालू खाता – यह ऐसी जमा होती है जिनका भुगतान बैंको को खाताधारियों की माँग पर तत्काल करना होता है इस खाते में जमा राशियाँ, माँग जमा कहलाती हैं, क्योंकि माँगने पर कभी भी निकलवा सकते हैं। यह खाता व्यापारी लोगों के लिए उपयोगी होता है, जिनको दिन में कई बार रुपया निकलवाने की जरूरत पड़ती है। चूंकि बैंक को इस खाते का पैसा सदा तैयार रखना पड़ता है, इसलिए इस खाते में बैंक ब्याज नहीं देता, बल्कि उनसे कुछ-न-कुछ लेता है। चेक द्वारा पैसा निकालने की सुविधा उपलब्ध रहती है।
(iii) सावधि खाता-सावधि जमा वह होती है जिसकी परिपक्वता की अवधि निर्धारित होती है। इसमें दीर्घ व निश्चित काल के लिए जमा स्वीकार की जाती है, इसलिए इस खाते में ब्याज की रकम अधिक होती है। यह निश्चित अवधि के लिए होता है और समय पूरा होने पर ही इसे निकलवा सकते हैं इससे पहले नहीं। इसमें चेक की सुविधा नहीं होती। यह बहुत ही धनी लोगों के लिए लाभकारी है, जिनको कभी रुपए की जरूरत नहीं होती। मियादी जमा की एक किस्म आवती जमा भी है जिसमें खाता धारक एक निश्चित अवधि तक हर महीन निश्चित राशि जमा करता है। जैसे-3 वर्षों तक 100 ₹ प्रति मास जमा करना। इसे मुद्रा की पूर्ति में शामिल नहीं किया जाता।।
2. ऋण देना-बैंक का दूसरा मुख्य कार्य ग्राहकों को ऋण देना है। बैंक दूसरे लोगों से जमा स्वीकार करता है, उसका एक निश्चित भाग सुरक्षा कोष में रखकर, शेष राशि व्यापारियों व उद्यमियों को उत्पादक कार्यों के लिए उधार दे देता है और उस पर ब्याज कमाता है। वास्तव में बैंक की आय का यही मुख्य स्त्रोत है। बैंक निम्नलिखित रूपों में ऋण तथा अग्रिम प्रदान करता है। बैंक ऋण निम्नलिखित रूपों में दिया जा सकता है. 

(i) नकद साख

(ii) मांग उधार

(iii) अल्पावधि ऋण

(iv) ओवर ड्राफ्ट

(v) विनिमय बिलों पर कटौती

3. एजेंसी कार्य-बैंक अपने ग्राहकों का एजेंट के रूप में भी काम करता है जिसके लिए बैंक कुछ कमीशन लेता है। बैंक द्वारा प्रदत्त एजेंसी सेवाएँ निम्नलिखित हैं|

(i) नकद कोषों का हस्तांतरण-बैंक-ड्राफ्ट उधारे खाते की चिट्ठी तथा अन्य साख-पत्रों द्वारा बैंक एक स्थान से दूसरे स्थान को रकम का स्थानांतरण करता हैं ये सेवा कम लागत, शीघ्रता और सुरक्षायुक्त होती है।
(ii) बैंक अपने ग्राहकों के लिए कंपनियों के शेयर बेचता और खरीदता है। यह कंपनियों के नाम पर हिस्सेदारी में लाभ को बाँटता है।
(iii) नकद संग्रह करना-बैंक अपने ग्राहकों के लिए उनके आदेश पर चेक, धनादेश, हुंडियों आदि की रकम उनके दाताओं से वसूल करता है।
(iv) ग्राहकों को आयकर संबंधी परामर्श देता है और उनके आयकर का भुगतान करता है।
4. सामान्य उपयोगी सेवाएँ-बैंक द्वारा उपलब्ध अन्य उपयोगी सेवाएँ निम्नलिखित हैं
(i) बैंक, विदेशी मुद्रा का क्रय-विक्रय करता है।
(ii) कीमती वस्तुएँ जैसे-जेवरात, सोना, चाँदी, कागज पत्रों को सुरक्षित रखने के लिए लाकर्स उपलब्ध करता है।
(iii) पर्यटक चेक और उपहार चेक जारी करता है।

32.

उच्च शक्तिशाली मुद्रा क्या है?

Answer»

उच्च शक्तिशाली मुद्रा से तात्पर्य देश के मौद्रिक प्राधिकरण द्वारा निगमित की गई मुद्रा से है, इसे मौद्रिक आधार के नाम से भी जाना जाता है। उच्च शक्तिशाली मुद्रा में करेंसी तथा व्यावसायिक बैंक के पास माँग जमाएँ तथा भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखी अन्य जमाएँ शामिल की जाती हैं। यह भारतीय रिजर्व बैंक की देश की मौद्रिक प्राधिकरण की संपूर्ण देयता को दिखाता है। यदि कोई आम जनता भारतीय रिजर्व बैंक को करेंसी नोट प्रस्तुत करता है, तो रिजर्व बैंक को उस मुद्रा के मूल्य पर अंकित मूल्य की राशि के बराबर का भुगतान करना होता है। इसी तरह भारतीय रिजर्व बैंक में जमा की गई राशि भी लौटाए जाने योग्य होती है, जब जमाधारी इसकी माँग करते हैं।

33.

भारतीय रिज़र्व बैंक की किस भूमिका को अंतिम ऋणदाता कहा जाता है?

Answer»

अंतिम ऋणदाता के रूप में केंद्रीय बैंक वित्तीय संकट के दौरान वाणिज्यिक बैंकों के लिए गारंटीकर्ता के रूप में तैयार होता है। वाणिज्यिक बैंक अपनी जमाओं को सामूहिक रूप से तुरंत निकलवाने के लिए तत्पर रहने वाले जमाकर्ताओं का विश्वास खो सकते हैं, चूंकि वाणिज्यिक बैंकों के नकद कोष उनकी माँग जमाओं का एक छोटा-सा भाग होते हैं, कोष बाहर जा सकते हैं, जिसके कारण बैंक में वित्तीय संकट आ जाता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ही होता * है जो वाणिज्यिक बैंक के लिए गारंटीकर्ता की भांति तैयार रहता है तथा उसे दिवालियापन से बचाता है।

34.

राजस्व घाटे को कैसे कम किया जा सकता है?

Answer»

राजस्व घाटे को कम करने के दो तरीके हैं

(i) राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि – सरकार कर तथा गैर कर प्राप्तियों द्वारा राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि करे। इसके लिए आय की दरों को बढ़ाया जा सकता है। सरकार जुर्माने, फीस (लाइसेंस फीस, कॉपी राइट फीस) आदि भी बढ़ा सकती है।
(ii) राजस्व व्यय में कमी – इसे आर्थिक सहायता में कमी कर भी खत्म किया जा सकता है। इसके लिए सरकार, आर्थिक सहायता में कमी कर सकती है अथवा सरकार अपने प्रशासनिक खर्चे में कटौती करके भी इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकती है।

35.

किस प्रकार बजटीय नीति का प्रयोग करके आय की असमानताओं को कम किया जा सकता है?

Answer»

आय की असमानताओं को कम करना सरकारी बजट का एक मुख्य उद्देश्य है। बजटीय नीति का उपयोग करके आय की असमानताओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए निम्नलिखित उपायों को अपनाया जा सकता है।

(i) अमीरों की आय पर प्रगतिशील आय प्रणाली का प्रयोग करके अधिक कर लगाकर या उससे प्राप्त आय को गरीबों के कल्याण पर खर्च करके आय की असमानता कम की जा सकती है।
(ii) अमीरों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं पर अधिक कर लगाकर अमीरों की प्रयोज्य आय कम की जा सकती है।
(iii) गरीबों को आर्थिक सहायता देकर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ मुफ्त देकर और सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराकर आय में विषमता कम की जा सकती है।
(iv) सार्वजनिक व्यय द्वारा भी आय एवं संपत्ति की समानता लाने में सहायता मिल सकती है और इस व्यय के लिए राजस्व अमीरों पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

36.

राजकोषीय घाटा सदा हानिकारक होता है? क्या आप सहमत हैं? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

Answer»

नहीं, यह आवश्यक नहीं है कि राजकोषीय घाटा सदा हानिकारक होता है। राजकोषीय घाटा तब लाभकारी होता है जब

(i) इससे पूँजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण हो।
(ii) अर्थव्यवस्था की भविष्य उत्पादकता में वृद्धि हो।
(iii) उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो जैसे इसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया जाने पर हो सकता है।
(iv) इसका उपयोग अतीत के ऋणों का भुगतान करने के लिए किया जाए, परन्तु यदि इनका उपयोग फिजूल खर्च गैर-विकासात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाए तो यह बहुत हानिकारक होता है।

37.

बजट में(क) पिछले वर्ष की आय का विवरण होता है।(ख) चालू वर्ष की आय-व्यय की संशोधित स्थिति होती है।(ग) आगामी वर्ष की आय व्यय के अनुमान होते हैं।(घ) उपर्युक्त सभी

Answer»

(ग) आगामी वर्ष की आय व्यय के अनुमान होते हैं।

38.

सार्वजनिक वस्तुओं की विशेषता है।(क) ये अप्रतिस्पर्धी होती हैं।(ख) ये अवयं होती हैं।(ग) इनके उपयोग का शुल्क संग्रह करना कठिन होता है।(घ) उपर्युक्त सभी

Answer»

सही विकल्प है (घ) उपर्युक्त सभी

39.

पूँजीगत व्यय सरकार के वे अनुमानित व्यय हैं जो सरकार की ।(क) परिसंपत्ति में वृद्धि करते हैं।(ख) देयता को कम करते हैं।(ग) (क) तथा (ख) दोनों(घ) देयता को बढ़ाते हैं।

Answer»

सही विकल्प है (ग) (क) तथा (ख) दोनों

40.

प्रगतिशील कर पद्धति में(क) आय वृद्धि के साथ-साथ कर का प्रतिशत कम होता रहता है।(ख) आय वृद्धि के साथ-साथ कर का प्रतिशत बढ़ता जाता है।(ग) आय कम हो या अधिक कर का प्रतिशत समान रहता है।(घ) निर्धनों पर कर का भार अधिक पड़ता है।

Answer»

(ख) आय वृद्धि के साथ-साथ कर का प्रतिशत बढ़ता जाता है।

41.

सरकारी बजट का ‘आर्थिक स्थिरता’ उद्देश्य समझाइए।अथवाआर्थिक स्थिरता लाने में सरकारी बजट की भूमिका समझाइए। 

Answer»

कर, आर्थिक सहायता, सार्वजनिक व्यय के माध्यम से सरकार समग्र माँग को नियंत्रित करके मंदी व तेजी अथवा | स्फीति व अपस्फीति पर नियंत्रण पा सकती है, जिससे आर्थिक स्थिरता लाई जा सकती है। यह इस प्रकार किया जाता है

(i) स्फीति के समय सरकार अपने व्यय में कमी करती है और करों में वृद्धि करती है। इससे समग्र माँग कम हो जाती हैं समग्र माँग कम होने से स्फीति अंतराल समाप्त हो जाता है, कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं और स्फीतिकारी स्थिति स्थिरता में आ जाती है।
(ii) अपस्फीति के समय सरकार अपने व्यय में वृद्धि और करों में कमी करती है। इससे समग्र माँग बढ़ जाती है। समग्र माँग बढ़ने से अपस्फीति अंतराल समाप्त हो जाता है, कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं और अपस्फीतिकारी स्थिति समाप्त हो जाती है।

42.

सरकारी बजट का संसाधनों का आबंटन उद्देश्य समझाइए। अथवासंसाधनों के आबंटन में सरकार की भूमिका समझाइए। 

Answer»

देश के संसाधनों के आबंटन को पूर्ण रूपेण बाजार की शक्तियों पर नहीं छोड़ा जा सकता इसीलिए देश के विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकताओं के अनुसार सामाजिक व आर्थिक संतुलित विकास करना बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है इसके लिए कर नीति व आर्थिक सहायता की नीति बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है|

(i) वांछनीय वस्तुओं पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार वृद्धि चाहती है जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि उन्हें या तो सरकारी क्षेत्र द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया जा सकता है। या उन पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है।
(ii) अवांछनीय वस्तुओं पर उच्च दर पर कर लगाए जा सकते हैं अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार कमी करना चाहती है जैसे सिगरेट, शराब, तम्बाकू आदि उन्हें कर लगाकर पहले से अधिक महँगा बनाया जा सकता है और उनके उत्पादन पर देश के संसाधन प्रयोग होने से रोके जा सकते हैं।

43.

सरकारी बजट के निम्नलिखित में से कौन-से उद्देश्य हैं?(क) आय और संपत्ति का पुनः वितरण(ख) संसाधनों का कुशलतम आबंटन(ग) आर्थिक स्थिरता(घ) उपरोक्त सभी

Answer»

सही विकल्प है (घ) उपरोक्त सभी

44.

क्या राजकोषीय घाटा आवश्यक रूप से स्फीतिकारी होता है?

Answer»

यह हमेशा स्फीतिकारी हो यह आवश्यक नहीं। यदि राजकोषीय घाटे का प्रयोग उत्पादक क्रियाओं के लिए किया गया हो, जिससे अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की पूर्ति में वृद्धि हो तो संभव है कि राजकोषीय घाटा स्फीतिकारी सिद्ध न हो, परंतु वास्तव में सरकार द्वारा लिये जाने वाले उधार का एक महत्वपूर्ण संघटक भारतीय रिजर्व बैंक है। इसके कारण अर्थव्यवस्था में मुद्रा पूर्ति में वृद्धि होती है। मुद्रा पूर्ति में वृद्धि के कारण प्राय: कीमत स्तर में वृद्धि होती है। कीमत स्तर में साधारण वृद्धि उच्च लाभों के द्वारा अधिक निवेश को प्रेरित कर सकती है। परन्तु जब कीमत वृद्धि का स्तर भयाप्रद सीमाओं तक बढ़ जाता है, तो इसके कारण
(i) आगतों को लागतों में वृद्धि तथा
(ii) मुद्रा की गिरती क्रय क्षमता के कारण समग्र माँग में कमी होती है। आगतों की लागतों में वृद्धि तथा समग्र माँग में कमी एक साथ मिलकर निवेश में कमी करते हैं, जिसके कारण सकल घरेलू उत्पाद में कमी होती है। अंततः अर्थव्यवस्था में AD कम होने से अपस्फीति भी हो सकती है और आर्थिक मंदी भी जन्म ले सकती है।

45.

शिक्षा, प्रशिक्षण, जनस्वास्थ्य आदि पर व्यय कहलाता है।(क) पूँजीगत निर्माण(ख) मानव पूँजीगत(ग) विकासात्मक व्यय(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Answer»

सही विकल्प है (ग) विकासात्मक व्यय

46.

सार्वजनिक व्यय का एक अर्थव्यवस्था के विकास में क्या महत्व है? स्पष्ट करो।

Answer»

सार्वजनिक व्यय का एक अर्थव्यवस्था के विकास में बहुत अधिक महत्व है। इसे निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है – बजट सरकार की प्रत्याशित आय तथा प्रत्याशित व्यय का ऐसा ब्यौरा है जो | एक वित्तीय वर्ष में अप्रैल 1 से मार्च 31 तक के अनुमानों को प्रकट करता है। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा कीमतों से संबंधित रिपोर्ट भी सम्मिलित होती है। अन्य शब्दों में, सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान सरकार की अनुमानित आय और व्ययों का विवरण होता है।

1. आय तथा संपत्ति को पुनः विवरण-आय की असमानताएँ दूर करने में सरकारी बजट की भूमिका है। बजटीय नीति का उपयोग करके आय की असमानताएँ दूर की जा सकती हैं।
2. संसाधनों का कुशल आबंटन-देश के संसाधनों के आबंटन को पूर्णरूपेण बाजार की शक्तियों पर नहीं छोड़ा जा सकता इसलिए देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्राथमिकताओं के अनुसार सामाजिक व आर्थिक संतुलित विकास करना बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए कर नीति व आर्थिक सहायता की नीति बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है।
3. आर्थिक स्थिरता-कर आर्थिक सहायता, सार्वजनिक व्यय के माध्यम से सरकार समग्र माँग को नियंत्रित | करके मंदी व तेजी अथवा स्फीति अवस्फीति पा सकती है, जिससे आर्थिक स्थिरता लाई जा सकती है।
4. सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन-बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो निजी क्षेत्रों के द्वारा भी चनाए जा सकते हैं। इन क्षेत्रकों को सरकार को चलाना पड़ता है, क्योंकि ये उद्यम सामाजिक कल्याण की दृष्टि से तो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, परंतु ये उत्तम लाभ नहीं देते हैं।

47.

सरकारी बजट घाटे से आप क्या समझते हैं?

Answer»

बजट घाटे से अभिप्राय उस स्थिति से है जिसमें सरकार का बजट व्यय सरकार की बजट प्राप्तियों से अधिक होता है। दूसरे शब्दों में बजट घाटा सरकार के कुल व्यय की कुल प्राप्तियों पर आधिकता है।भारत सरकार के बजट से संबंधित मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन प्रकार के बजट घाटा हैं|
1. राजस्व घाटा
2. राजकोषीय घाटा
3. प्राथमिक घाटा

(i) वित्त व्यवस्था – इससे अभिप्राय सरकार द्वारा केंद्रीय बैंक से ट्रेजरी बिल के बदले उधार लेना है। केंद्रीय बैंक इन बिलों को नए नोट देकर सरकार से खरीदता है। इन करेंसी नोटों द्वारा घाटे की वित्त व्यवस्था की जाती है। इससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा की पूर्ति में वृद्धि होती है। अतः बजट के घाटे की वित्त अवस्था के रूप में घाटे की वित्त व्यवस्था की प्रायः सिफारिश नहीं की जाती है यदि अर्थव्यवस्था में पहले से ही मुद्रा स्फीति की दर अधिक है।
(ii) जनता से उधार लेकर – सरकार विभिन्न प्रकार के बाँण्ड जनता को जारी करके उनसे ऋण लेती है। इससे ब्याज के भुगतान का भार सरकार पर पड़ता है। इसे ‘सार्वजनिक ऋण पर ब्याज’ कहा जाता है।
(iii) विनिवेश – जब सरकार सार्वजनिक क्षेत्र तथा संयुक्त क्षेत्र के उद्यमों के अपने शेयरों को बेचने का निर्णय लेती है तो इसे विनिवेश कहते हैं।

48.

घाटे में कटौती के विषय में विमर्श कीजिए।

Answer»

घाटे में कटौती के लिए दो विधियाँ अपनाई जा सकती हैं

(i) करों में वृद्धि – भारत में सरकार कर राजस्व में वृद्धि करने के लिए प्रत्यक्ष करों पर ज्यादा भरोसा करती है। इसका कारण यह है कि अप्रत्यक्ष कर अपनी प्रकृति में प्रतिगामी होता है। इसका प्रभाव सभी आय समूह के लोगों पर समान रूप से पड़ती है।
(ii) व्यय में कमी – सरकार ने घाटे में कटौती के लिए सरकारी व्यय को कम करने के लिए कटौती पर बल दिया है। सरकार के कार्यकलापों को सुनियोजित कार्यक्रमों और सुशासनों के माध्यम से संचालित करने से ही सरकारी व्यय में कटौती की जा सकती है। परंतु कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, निर्धनता, निवारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सरकार के कार्यक्रमों को रोकने से अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः पूर्व निर्धारित स्तरों पर व्यय में वृद्धि नहीं करने के लिए सरकार स्वयं पर प्रतिबंधों का आरोपण करती है। इसके अतिरिक्त सरकार व्यय में कमी करने के लिए जिन क्षेत्रों में कार्यरत है स्वयं को उनमें से कुछ क्षेत्रों से निकाल लेती है। इस प्रकार सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की बिक्री के द्वारा भी प्राप्तियों में बढ़ोत्तरी करने का एक प्रयास किया जाता है।

49.

आपके अनुसार प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष कर में किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए और क्यों?

Answer»

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर एक दूसरे के प्रतियोगी नहीं हैं, बल्कि एक दूसरे के प्रतिपूरक हैं। सरकार को आर्थिक एवं सामाजिक उद्देश्यों के लिए दोनों की ही आवश्यकता पड़ती है। परन्तु अप्रतयक्ष कर संसाधनों के आबंटन उद्देश्य की पूर्ति के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं और प्रत्यक्ष कर आय के समान वितरण के उद्देश्य में अधिक महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि प्रत्यक्ष कर प्रगतिशील होते हैं और अप्रत्यक्ष कर प्रतिगामी होते हैं। अतः प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

50.

क्या सार्वजनिक ऋण बोझ बनता है? व्याख्या कीजिए।

Answer»

हाँ सार्वजनिक ऋण एक बोझ बनता है। आवर्ती उधार भावी पीढ़ी के लिए राष्ट्रीय ऋणों को संचित करता है। भावी पीढ़ी को विरासत में एक पिछड़ी हुई अर्थव्यवस्था मिलती है, जिसमें राष्ट्रीय सकल उत्पाद की वृद्धि निरंतर कम रहती है। इसके फलस्वरूप सकल राष्ट्रीय उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा ऋणों के पुनर्भुगतान या ब्याज भुगतान के लिए खपत होती है और घरेलू निवेश निचले स्तर पर बनी रहती है। जब सकल राष्ट्रीय उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा राजकोषीय घाटा होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जहाँ एक दुश्चक्र जन्म लेता है, उच्च राजकोषीय घाटे के कारण सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि दर कम होती है और निम्न सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि के कारण राजकोषीय घाटा उच्च होता है। अतः प्राप्तियाँ संकुचित होती हैं जबकि व्यय में विस्तार होता है। इससे राजकोषीय घाटा बढ़ता है। राजकोषीय घाटा बढ़ने से सरकारी व्यय का बड़ा हिस्सा कल्याण संबंधी व्ययों पर खर्च किया जाता है।