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Answer» बजट सरकार की प्रत्याशित आय तथा प्रत्याशित व्यय का ऐसा ब्यौरा है जो एक वित्तीय वर्ष में अप्रैल 1 से मार्च 31 तक के अनुमानों को प्रकट करता है। इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा कमियों से संबंधित रिपोर्ट भी सम्मिलित होती है। अन्य शब्दों में, सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान सरकार की अनुमानित आय और व्ययों का विवरण होता है। सरकारी बजट का उद्देश्य निम्नलिखित है I. आर्य तथा संपत्ति को पुनः विवरण – आय की असमानताएँ दूर करने में सरकारी बजट की भूमिका है। बजटीय नीति का उपयोग करके आय की असमानताएँ दूर की जा सकती हैं। इसके लिए निम्नलिखित आयों को अपनाया जा सकता है (i) अमीरों की आय पर प्रगतिशील आय प्रणाली का प्रयोग करके अधिक कर लगाकरे तथा उससे प्राप्त आय की गरीबों के कल्याण पर खर्च करना आय की असमानता कम की जा सकती है। (ii) अमीरों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुओं पर अधिक कर लगाकर अमीरों की प्रयोज्य आय कम की जा सकती है। (iii) गरीबों को आर्थिक सहायता देकर, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएँ मुफ्त देकर और सस्ती दर पर राशन उपलब्ध कराकर आय में विषमता कम की जा सकती है। (iv) सार्वजनिक व्यय द्वारा भी आय एवं संपत्ति की समानता लाने में सहायता मिल सकती है और इस व्यय के लिए राजस्व अमीरों पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। II. संसाधनों को कुशल आबंटन – देश के संसाधनों के आबंटन को पूर्ण रूपेण बाजार की शक्तियों पर नहीं छोड़ा जा सकता इसीलिए देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्राथमिकताओं के अनुसार सामाजिक व आर्थिक संतुलित विकास करना बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए कर नीति व आर्थिक सहायता की नीति बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है। (i) वांछनीय वस्तुओं पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार वृद्धि चाहती है जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन आदि अनुपातों सरकारी क्षेत्र द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया जा सकता है या उन पर आर्थिक सहायता दी जा सकती है। (ii) अवांछनीय वस्तुओं पर उच्च दर पर कर लगाए जा सकते हैं। अर्थात् जिन वस्तुओं की पूर्ति में सरकार कमी करना चाहती है। जैसे-सिगरेट, शराब, तंबाकू आदि उन्हें कर लगाकर पहले से अधि महँगा बनाया जा सकता है और उनके उत्पादन पर देश में संसाधन बढ़ाये जा सकते हैं। III. आर्थिक स्थिरता – कर आर्थिक सहायता, सार्वजनिक व्यय के माध्यम से सरकार समग्र माँग को नियंत्रित करके मंदी व तेजी अथवा स्फीति अपस्फीति पा सकती है, जिससे आर्थिक स्थिरता लाई जा सकती हैं यह इस प्रकार किया जाता है (i) स्फीति के समय सरकार अपने व्यय में कमी करती है और करों में वृद्धि होती है इससे समग्र माँग कम हो जाती है। समग्र माँग कम होने से स्फीति अंतराल समग्र हो जाता है। कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं स्फीतिकारी स्थिति स्थिरता में आ जाती है। (ii) अपस्फीति के समय सरकार अपने व्यय में वृद्धि और करों में कमी करती है। इससे समग्र माँग बढ़ जाती है। समग्र माँग बढ़ने से अपस्फीति अंतराल समाप्त हो जाता है। कीमतें नियंत्रित हो जाती हैं। और अपस्फीतिकारी स्थिति समाप्त हो जाती है। IV. सार्वजनिक उद्यमों का प्रबंधन-बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो निजी क्षेत्रकों द्वारा ही चलाए जा सकते हैं। इन क्षेत्रकों को सरकार को चलाना पड़ता है, क्योंकि ये उद्यम सामाजिक कल्याण की दृष्टि से तो बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, परंतु ये लाभ नहीं देते। उदाहरण के लिए रेलवे, प्रशासनिक सेवाएँ आदि। सरकारी बजट का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य इन सार्वजनिक उद्यमों को ठीक ढंग से प्रबंधित करता है।
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