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ग्राम पंचायतों की आय के स्रोत एवं व्यय की प्रमुख मदों का वर्णन कीजिए।याग्राम पंचायत के किन्हीं दो आय के साधनों का उल्लेख कीजिए।

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भारत की शासन-प्रणाली प्रजातान्त्रिक है। प्रजातन्त्र को गाँवों तक पहुँचाने के उद्देश्य से हमारे संविधान में पंचायती राज की व्यवस्था की गयी है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश सरकार ने सन् 1947 ई० में पंचायती राज अधिनियम पारित करके ग्रामों में तीन प्रकार की संस्थाओं की स्थापना की-

  1. ग्राम सभा
  2. ग्राम पंचायत तथा
  3. न्याय पंचायत।

इस प्रकार ग्राम पंचायत ग्रामीण स्वशासन की दूसरी इकाई है। ग्राम पंचायत ग्राम सभा द्वारा निर्धारित नीतियों को लागू करती है।

ग्राम पंचायत की आय के स्रोत

ग्राम पंचायतों की आय के प्रमुख स्रोत निम्नलिखित हैं –

1. अनिवार्य कर –

  1. सम्पत्ति हस्तान्तरण पर चुंगी
  2. सवारी कर
  3. भूमि कर
  4. पेशा (उद्यम) कर।

2. महसूल –

  1. व्यापारिक फसलों के क्रय-विक्रय पर शुल्क
  2. भूमि उपकर एवं
  3. कृषि योग्य भूमि पर कर।

3. अन्य शुल्क –

  1. बाजारों पर शुल्क
  2. जमीन पर रोजगार शुल्क
  3. दलालों व एजेण्टों पर लाइसेन्स शुल्क
  4. अन्य कार्यों की स्वीकृति पर शुल्क
  5. बूचड़खानों पर शुल्क
  6. बैलगाड़ी ठहरने के स्थानों पर शुल्क
  7. सड़क व सार्वजनिक स्थानों पर शुल्क।

4. जिला बोर्ड से सहायता –

  1. प्राथमिक विद्यालय के व्यय के एक भाग की पूर्ति करना
  2. ग्रामीण बाजारों की व्यवस्था हेतु धनराशि प्राप्त करना
  3. घाटे की व्यवस्था करने पर आय-व्यय का अन्त।

ग्राम पंचायत की व्यय की मदें

ग्राम पंचायतों की व्यय की मुख्य मदें निम्नलिखित हैं –

  1. सफाई एवं प्रकाश की व्यवस्था पर व्यय।
  2. चिकित्सालय की व्यवस्था एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम पर किये जाने वाले व्यय।
  3. शवों के दाह-संस्कार की व्यवस्था पर व्यय।
  4. शिक्षा व्यवस्था पर व्यय।
  5. सार्वजनिक सुविधाएँ; जैसे-तालाब, पोखर, कुओं आदि उपलब्ध करने पर व्यय।
  6. शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पर व्यय।
  7. खेल-कूद व्यवस्था पर व्यय।
  8. बाजार, हाट व मेलों आदि के प्रबन्धं पर व्यय।
  9. पुस्तकालयों एवं वाचनालयों की व्यवस्था पर व्यय।
  10. बंजर एवं चरागाह भूमि के विकास पर व्यय।


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