This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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नवीन पारंपरिक विचारधारा के जनक (प्रणेता) किसे कहा जाता है ? |
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Answer» नवीन पारंपरिक विचारधारा के जनक ऐल्टन मेयो को कहा जाता है । |
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पारंपरिक विचारधारा की मर्यादाएँ बताइए । |
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Answer» पारंपरिक विचारधारा की मर्यादाएँ मुख्यतः
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श्री हेनरी फेयोल ने सफल नेतृत्व की कुंजी किसे माना है ? |
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Answer» श्री हेनरी फेयोल ने सफल नेतृत्व की कुँजी अनुशासन को माना है । |
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हेनरी फेयोल ने संचालन के कितने सिद्धान्त प्रस्तुत किये है ?(A) 08(B) 14(C) 05(D) 03 |
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Answer» सही विकल्प है (B) 14 |
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हेनरी फेयोल ने औद्योगिक साहस की प्रवृत्तियों को कौन-से छ भागों में बाँटा गया है ? |
Answer»
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नवीन पारंपरिक विचारधारा किसे कहा जाता है ? |
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Answer» संचालन की पारंपरिक विचारधारा की कई कमियों को दूर करने के लिए कई संचालनशास्त्रीयो ने उसमें सुधार करके नये अभिगम/ विचार प्रस्थापित किये, जिसे नवीन पारंपरिक विचारधारा के रूप में कहा जाता है । |
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संचालन के सिद्धांतों का स्वरूप विस्तार से समझाइए । |
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Answer» संचालन के सिद्धांतों के आधार पर इनके स्वरूप निम्नलिखित होते हैं : (1) सर्वव्यापकता : संचालन के सिद्धांतों को अधिकांशतः धन्धाकीय इकाइयों में लागू किया जा सकता है । जहाँ जहाँ पर सामुहिक मानवीय प्रयत्नों की आवश्यकता पड़ती है । विशेष रूप से वृहद इकाईयों में संचालन के सिद्धांतों को लागू किया जा सकता है । जिससे कहा जा सकता है कि संचालन के सिद्धांत सर्वव्यापक या सार्वत्रिक है । (2) परिवर्तनशील : संचालन के सिद्धांत कठोर नहीं, परंतु परिवर्तनशील है । संचालक को जब व जिस परिस्थिति में आवश्यक लगे तब उनमें परिवर्तन किया जाता है । यदि कई परिस्थिति में यह सिद्धांत लागू न पड़ सके ऐसा हो तो संचालक को इनमें परिवर्तन करने की छूट होती है । जैसे कार्य विभाजन का सिद्धांत वृहद इकाइयों में एक समान लागू किया जा सकता है, लेकिन छोटी इकाइयों में उतनी ही मात्रा में कार्य विभाजन का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता । (3) मार्गदर्शिका के रूप में : संचालन के सिद्धांत सामान्यत: मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं । जो कि अलग-अलग परिस्थिति में से अलग-अलग निष्णांतो के अनुभव पर निर्भर है । इकाई के संचालन के दौरान अनेक कठिन से कठिन समस्याएँ आती है । इन प्रत्येक समस्या का स्वरूप इकाई के अनुसार अलग-अलग होता है, जो प्रत्येक परिस्थिति में प्रत्येक इकाई के लिए एकसमान न्याय नहीं दिया जा सकता । अत: संचालन के सिद्धांत कठोरता से लागू नहीं किये जा सकते हैं व यह सिद्धांत केवल मार्गदर्शन के रूप में उपयोग में लाते हुए इच्छित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । (4) मानवीय स्वभाव पर आधारित : संचालन के सिद्धांतों का आधार मानवीय स्वभाव तथा व्यवहार से जुड़ा हुआ होता है । प्रत्येक की मानसिक परिस्थिति भी अलग-अलग होने से सिद्धांतों की सफलता का प्रमाण भिन्न होता है । मनोवैज्ञानिक परिस्थिति को भी संचालन के सिद्धांतो को अमल में लाते समय ध्यान में लेना चाहिए । (5) आकस्मिकता का तत्त्व : संचालन के सिद्धांतो को लागू करने के लिए आकस्मिकता का तत्त्व भी प्रभावित करता है । किसी एक निश्चित अनिवार्य परिस्थिति में सिद्धांतों के उपयोग द्वारा संस्था में निर्णय लेकर, लक्ष्य प्राप्ति सरल बना सकते है । जैसे कि, कर्मचारियों को योग्य तथा उचित प्रतिफल चुकाया जाना चाहिए । यह योग्य व उचित प्रतिफल क्या है ? यह आकरिमकता अथवा आवश्यकता के आधार पर असर करनेवाले परिबलों या तत्त्वों को ध्यान में लेकर तय किये जा सकते हैं । |
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| 8. |
फ्रेडरिक विन्सलो टेलर कौन थे ?(A) अमेरिकन मिकेनिकल अभियन्ता(B) सिविल अभियन्ता(C) आस्ट्रेलियन कम्प्यूटर अभियन्ता(D) ब्रिटेन के चिकित्सक |
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Answer» सही विकल्प है (A) अमेरिकन मिकेनिकल अभियन्ता |
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कर्मचारियों की शक्ति का श्रेष्ठ उपयोग होता रहे इसके लिए कौन-सा सिद्धान्त अपनाना जरूरी है ?(A) केन्द्रीकरण(B) व्यवस्था(C) समानता(D) समूह भावना |
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Answer» सही विकल्प है (A) केन्द्रीकरण |
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टेक्नीकल प्रवृत्तियों में किस बात का समावेश होता है ? |
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Answer» टेक्नीकल प्रवृत्तियों में कारखाना-यंत्र तथा उत्पादन से सम्बन्धित प्रवृत्तियों का समावेश होता है । |
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अधिकार व दायित्व का विभाजन किस तरह होना चाहिए ? |
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Answer» अधिकार व दायित्व का विभाजन रैख्रीय स्वरूप में होना चाहिए । अर्थात् उच्च से निम्न की तरफ होना चाहिए । |
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वैज्ञानिक संचालन के सिद्धान्त समझाइए । |
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Answer» वैज्ञानिक संचालन के सिद्धांत निम्न है : (1) वैज्ञानिक पद्धति का सिद्धांत : इकाई में कार्य करने के लिए रुढ़िगत पद्धतियों को त्याग करके नई वैज्ञानिक पद्धति अपनानी चाहिए और कार्य का वैज्ञानिक विश्लेषण करके श्रेष्ठ कार्य किस तरह हो सकेगा इसके बारे में विचार करना चाहिए । (2) आयोजन तथा अमलीकरण का सिद्धांत : कर्मचारी रूढ़िगत पद्धति की तरह ही आयोजन तथा अमलीकरण का कार्य करे उसके बदले में आयोजन का काम निष्णांत करे तथा कर्मचारियों द्वारा उनका अमल हो ऐसा होना चाहिए । (3) कार्य-विश्लेषण का सिद्धांत : कम खर्च और शीघ्र काम लेने के लिए कार्य विश्लेषण उत्तम माना जाता है । जिसमें समय निरीक्षण, गति निरीक्षण और थकान निरीक्षण का अध्ययन करके कम खर्च अथवा कम लागत से उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है । (4) प्रमाणीकरण का सिद्धांत : प्रमाणीकरण तथा सरलीकरण वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो कि पहले से ही होना चाहिए । औजारों, (5) वैज्ञानिक चयन और प्रशिक्षण का सिद्धांत : कर्मचारियों का चयन वैज्ञानिक मापदण्ड के अनुसार होना चाहिए । वैज्ञानिक मापदण्ड हेतु कर्मचारियों में शिक्षण, कौशल्य, योग्यता, प्रशिक्षण शारीरिक शक्ति इत्यादि मापदण्डों को ध्यान में रखा जा सकता है । इसके उपरांत कर्मचारी को इस प्रकार का कार्य सौंपना चाहिए कि जो उसके शिक्षण, अध्ययन और कौशल्य के अनुरुप हो । इसके अलावा कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए प्रशिक्षण का उपयोग भी किया जाना चाहिए । जिससे, उनका कार्यसंतोष बढ़ सके इसके लिए विविध प्रकार की वैज्ञानिक कसौटी का उपयोग किया जाना चाहिए । (6) वित्तीय प्रोत्साहन का सिद्धांत : कुशल कर्मचारी को वित्तीय और अन्य उत्तेजना देनी चाहिए । इसके लिये विविध प्रकार की उत्तेजक वेतन योजना का सुझाव दिया गया है । प्रत्येक श्रमिक के व्यक्तिगत उत्पादन के आधार पर यह पद्धति अपनानी चाहिए और इसका वेतन दर धारणा के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन से पूर्व ही निर्धारित होना चाहिए । (7) मितव्ययिता का सिद्धांत : वैज्ञानिक संचालन के अमल के दौरान मात्र वैज्ञानिक और तकनिकी आधारों को ध्यान में नहीं लिया जाता बल्कि लाभ और मितव्ययिता के तत्व पर बल दिया जाना चाहिए । इस हेतु अनुमान तथा लागत नियंत्रण की पद्धतियों पर विचार करना पड़ता है और विचलनों को खोज कर उनका अध्ययन और समाधान करना पड़ता है । (8) मानसिक क्रान्ति का सिद्धांत : मालिकों और श्रमिकों के मध्य लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मानसिक क्रान्ति होनी चाहिए । मानसिक सुमेल से मालिकों तथा श्रमिकों के मध्य तनाव को घटाता है और लक्ष्य प्राप्ति सरल बन जाती है । |
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मालिक वर्ग तथा कर्मचारी वर्ग को किसमें अधिक रूचि होती है ? |
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Answer» मालिक अथवा संचालक का मुख्य हेतु लाभ एवं सम्पत्ति का महत्तमीकरण का होता है । कर्मचारी वर्ग को अधिक वेतन व कार्य संतोष में अधिक रूचि होती है । |
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संचालन के सिद्धान्त अनुसार किसके द्वारा कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि कर सकते है ? |
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Answer» संचालन के सिद्धान्त अनुसार विविध प्रोत्साहनों द्वारा कर्मचारी की कार्यक्षमता में वृद्धि कर सकते है । |
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पीटर एफ. ड्रकर का मुख्य योगदान किसमें था ? |
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Answer» पीटर एफ. ड्रकर का मुख्य योगदान ‘ध्येयलक्षी संचालन तथा स्वनियमन का सिद्धान्त में था ।’ |
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हिसाबी प्रवृत्तियों में कौन-कौन सी बातों का समावेश होता है ? |
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Answer» हिसाबी प्रवृत्तियों में वित्तीय हिसाब के पत्रक तथा आवश्यक आंकड़ाकीय जानकारी प्राप्त करने की प्रवृत्तियों का समावेश होता है । |
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अधिकार व दायित्व एकदूसरे के कैसे होते हैं ? |
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Answer» अधिकार व दायित्व एक-दूसरे के पूरक होते है अर्थात् एक सिक्के के दो पहलू हैं । |
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अधिकार सौंपते समय किन तत्त्वों को ध्यान में रखना चाहिए ? |
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Answer» अधिकार सौंपते समय कर्मचारी का पद, ज्ञान, योग्यता, अनुभव, नेतृत्वकी कला, परिपक्वता इत्यादि तत्त्वों को ध्यान में रखना चाहिए । |
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धन्धाकीय इकाई में मानवीय व्यवहार को अनुकूल बनाने के लिए अमुक नियम, सिद्धान्त बनाने पड़ते हैं, जिससे लक्ष्य प्राप्ति सरल हो जाती है । अर्थात् ………………………..(A) सिद्धान्त(B) मानवीय सिद्धान्त(C) संचालन के सिद्धान्त(D) ट्रस्टीशिप का सिद्धान्त |
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Answer» सही विकल्प है (C) संचालन के सिद्धान्त |
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पीटर एफ. ड्रकरने कौन-सी सम्पत्ति को धन्धाकीय इकाई में विशेष महत्त्व देने के लिए विशेष सिफारिश की थी ?(A) कोयला सम्पत्ति(B) खनिज सम्पत्ति(C) प्राकृतिक सम्पत्ति(D) मानव सम्पत्ति |
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Answer» सही विकल्प है (D) मानव सम्पत्ति |
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पीटर एफ. ड्रकर कौन थे ? |
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Answer» पीटर एफ. ड्रकर बहुत ही ख्याति प्राप्त संचालनशास्त्री के रूप में ख्यातिप्राप्त लेखक, चिंतक तथा शिक्षणविद थे । |
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नवीन पारंपरिक विचारधाराओं (Thoughts of Neo-classical Theory) के बारे में समझाइए । |
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Answer» संचालन की पारंपरिक विचारधारा की कई कमियों को दूर करने के लिए कई संचालन शास्त्रीयों ने उसमें सुधार करके नये अभिगम/विचार प्रस्थापित किये, जिन्हें नवीन पारंपरिक विचारधारा के रूप में कहा जाता है । 19वीं शताब्दी के अन्त में औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात् इकाइयों में उद्योगों का स्वरूप बदला व नई संचालन शक्ति की आवश्यकता उत्पन्न हुई । 20वीं शताब्दी के आरम्भ में आष्टोलियन औद्योगिक मनोवैज्ञानिक ऐल्टन मेयोना होर्थोन, प्रयोगोने इस वर्तनवादी विचारधारा को जन्म दिया । जिससे ऐल्टन मेयोने नवीन पारंपरिक विचारधारा के प्रणेता/जनक कहते हैं । नवीन पारंपरिक विचारधारा संचालन के बारे में वर्तनलक्षी अभिगम तथा समूह वर्तन पर बल दिया जाता है । |
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वर्तन/व्यवहार सम्बन्धित, विचारधाराओं के बारे में समझाइए । |
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Answer» वर्तन सम्बन्धित विचारधारा (Thought of Behaviour Related) : अन्य व्यक्तियों के पास से काम लेने की कला । प्रो. उविक लिखते हैं, ‘तुम अपने कर्मचारियों का ध्यान रखो, वे शेष बातों का ध्यान तुम्हारे लिए रखेंगे ।’ Mind your men, men will mind everything for you.’ इस तरह कर्मचारी या व्यक्ति इकाई में बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान होता है । संचालन व्यक्ति के माध्यम से होने से संचालन का अध्ययन आन्तर व्यक्ति सम्बन्धों का अध्ययन बन जाता है । संचालकीय कार्य का महत्त्वपूर्ण केन्द्र बिन्दु मानव व्यवहार एवं मानवीय सम्बन्धों का है जिससे वर्तन सम्बन्धित विचारधारा, मनोवैज्ञानिक तारणो के उपयोग द्वारा कर्मचारी के कार्यसंतोष तथा कार्यक्षमता बढ़ाने पर बल देते हैं । वर्तन सम्बन्धित विचारधारा में आन्तर मानवीय सम्बन्ध, अभिप्रेरण, नेतृत्व, सूचनासंचार की प्रक्रिया, औद्योगिक झगड़ों का निराकरण आदि विचारों का समावेश होता है । |
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फ्रेडरिक विन्सलो टेलर कौन थे ? |
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Answer» फ्रेडरिक विन्सलो टेलर अमेरिकन मिकेनिकल इन्जीनियर थे । |
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वैज्ञानिक संचालन के पिता कौन कहलाए है ? |
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Answer» वैज्ञानिक संचालन के पिता फ्रेडरिक टेलर कहलाए हैं । |
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वाणिज्य प्रवृत्तियों में किन बातों का समावेश होता है ? |
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Answer» वाणिज्य प्रवृत्तियों में इकाई के क्रय, विक्रय, विनिमय जैसी प्रवृत्तियों का समावेश होता है । |
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व्यवस्था के सिद्धान्त में कितनी बातों पर बल दिया गया है ?(A) पाँच(B) दो(C) पन्द्रह(D) तीन |
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Answer» सही विकल्प है (D) बेथलहेम स्टील कम्पनी |
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श्रमिकों की कोई स्वतंत्र आवाज नहीं थी ? यह विधान कौन-से संचालन के बारे में दिया गया था ?(A) वैज्ञानिक संचालन(B) आधुनिक संचालन(C) वित्तीय संचालन(D) आपत्ति व्यवस्थापन |
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Answer» सही विकल्प है (A) वैज्ञानिक संचालन |
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रूढ़िगत संचालन के सामने एक क्रान्तिकारी विचार के रूप में वैज्ञानिक संचालन को प्रस्तुत किया, जिसमें मुख्य कितनी व कौन-कौन सी बातें देखने को मिलती है ? |
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Answer» इनमें तीन मुख्य बातें देखने को मिलती है ।
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वैज्ञानिक संचालन के सिद्धांत किसने प्रस्तुत किये थे ?(A) हेनरी फेयोल(B) फ्रेडरिक टेलर(C) कून्टज ओडोनेल(D) पीटर ड्रकर |
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Answer» सही विकल्प है (B) फ्रेडरिक टेलर |
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वैज्ञानिक संचालन के बारे में मुख्यतः कितने बातें देखने को मिलती है ?(A) पाँच(B) आठ(C) तीन(D) चार |
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Answer» सही विकल्प है (C) तीन |
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समानता का सिद्धान्त क्या सूचित करता है ? |
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Answer» कर्मचारी उत्पादन का एक भाग है । कर्मचारी यह एक जीवित व्यक्ति है, अत: इनके पास से कार्य लेने के लिए हमेशा व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है । इसके लिए प्रत्येक कर्मचारी के प्रति समानता रखनी पड़ती है । इसके लिए औपचारिक मनोवृत्ति बहुत प्रभावशाली नहीं होती है । बदलती परिस्थिति में अनौपचारिक भी होना पड़ता है जिससे मालिक और कर्मचारियों के मध्य सुमेल पैदा होता है । क्योंकि र्मचारियों की संचालकों के कार्य के प्रति व्यवहार, निष्ठा और मनोवृत्ति, समानता और न्याय पर आधारित है । |
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वैज्ञानिक संचालन से आप क्या समझते है ? |
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Answer» वैज्ञानिक संचालन किसी भी विशेष इकाई में या कारखाने में, कर्मचारियों के पक्ष में सम्पूर्ण मानसिक क्रान्ति है । उन्हें उनके कार्य, जिम्मेदारी, सहकर्मियों और मालिकों के प्रति सम्पूर्ण मानसिक क्रान्ति है । |
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संचालन विचारधाराएँ से आप क्या समझते है ? |
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Answer» संचालन की विचारधाराओं में अनेक संचालनशास्त्रीओं ने अलग मंतव्य देकर पृथक-पृथक सिद्धान्त प्रस्तुत किए है, जिसे संचालन की विचारधाराएँ कहा जाता है । |
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कपास से सूती वस्त्र बनाने में प्रयुक्त प्रक्रमों को क्रम में लिखिए? |
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Answer» तंतु/रेशा → धागा → कपड़ा → वस्त्र |
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निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यावर्तित परिवर्तन है –(i) दूध का फट जाना(ii) मोम का पिघलना(iii) मोमबत्ती का जलना(iv) सब्जी का पकना |
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Answer» सही विकल्प है (ii) मोम का पिघलना |
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चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के शासन काल में चीनी यात्री भारत आया-(अ) फाह्यान(ब) वेनसांग(स) मेगस्थनीज(द) इत्सिंग |
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Answer» सही विकल्प है (अ) फाह्यान |
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ज्वालामुखी का फूटना –(i) मंद परिवर्तन है।(ii) अनुकूल परिवर्तन है।(iii) प्रत्यावर्तित परिवर्तन है।(iv) अनियमित परिवर्तन है। |
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Answer» सही विकल्प है (iv) अनियमित परिवर्तन है। |
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What was the result of the revolt of 1857 ? |
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Answer» Results of the revolt of 1857 : 1. Though the revolt was not successful, it ushered in a new era of change. 2. The Company rule came to an end and India came under the direct rule of the Crown. 3. Interference in internal affairs of princely states was stopped. 4. The British government was compelled to change its policies towards India. 5. Salaries, allowances and facilities given to Indian soldiers / sepoys were increased. 6. The feeling of nationalism was evoked in Indians because of this revolution. |
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Who were the main leaders in the revolt of 1857? |
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Answer» Leaders like Nanasaheb Peshwa, Moghul Emperor Bahadur Shah Zafar, Kunwarsingh, Shah of Avadh (Ayodhya) joined hands with Tatya Tope, an efficient military commander, Rango Bapuji, an accomplished planner and Azimullah Khan, a lawyer and journalist, Laxmibai the Queen of Jhansi, etc. were the main leaders of the 1857 revolt. |
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Make suitable pairs:Section ‘A’Section ‘B’(1) The first martyr of the revolt(1) Nanasaheb(2) The leader of the revolt in Delhi(2) Kunwarsingh(3) The leader of the revolt in Kanpur(3) Jagdishsingh(4) The leader of the revolt in Bihar(4) Mangal Pandey(5) Bahadur Shah Zafar |
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Answer» (1 – 4), (2 – 5), (3 – 1), (4 – 2). |
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State whether the following statements are true or false:1. The aim of the British was to bring prosperity to India at the cost of England.2. The British officers considered Indian soldiers very low and thought that they lacked dignity.3. The 19th battalion of Barrackpore was the first to refuse to use the cartridges with fat.4. Roti and Rose were used as the secret symbols of the revolt.5. Tatya Tope was the first martyr of the revolt of 1857 C.E.6. Kunwarsingh was the landlord of Jagdishpur.7. According to the opinion of the British officials, Queen Laxmibai was the best among the women leaders of the revolt of 1857 C.E.8. Kunwarsingh of Jagdishpur died in April, 1858 due to fatal injuries received during the war.9. The revolt succeeded because of the sharp feeling of sacrifice among the soldiers fighting in the revolt.10. With the end of the revolt, company rule also ended and British rule was established. |
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Answer» 1. False 2. True 3. True 4. False 5. False 6. True 7. True 8. True 9. False 10. True |
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Why did the revolutionaries find it difficult to fight against the British army? |
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Answer» The freedom fighters of the revolt faced problems while fighting against the British army because they were not given full military training to fight with arms and they did not have modern weapons like camions and rifles as well as ammunition. |
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Who started the revolt against the British in Kheda district? |
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Answer» Garbad Das Patel, the headman of Anand in Kheda district collected 2000 volunteers of the Koli and Nayakada communities to join the revolt. He was supported by Jivabhai Thakor of Khanpur, Malaji Joshi and Krishna Das Dave. However, these supporters were captured by the British, tied to mouths of cannons and blown off. Garbad Das was exiled to Andaman where he, too, died |
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Give information about the main events of the 1857 revolt. |
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Answer» The following were the main events of the revolt of 1857 C.E. : (1) Mangal Pandey, a soldier of Barrackpore battalion, opposed to use the cow-and-pig-fat greased cartridge of the new Enfield Rifle. As a result the revolt began earlier than the fixed date. So he was arrested, tried and sentenced to death. This disrupted the planning and the objectives of the revolt could not be achieved. (2) Indian soldiers reached Delhi from Merath (Meerut) on 11th May and captured Delhi with the help of Indian soldiers present there. They then convinced the 80-year- old Mughal Emperor Bahadur Shah Zafar to accept the leadership of the revolt. This infused new life in the revolt and many Indian regions joined it. (3) Kanpur joined the revolt on 4th June, 1857 and Nanasaheb Peshwa was asked to assume leadership. However, because of acute food shortage due to the 22-day long seige they had to surrender to the British. (4) Patna and Jagdishpur were the main centres of the revolt in Bihar under the leadership of 70-year-old landlord Kunwarsingh. While fighting bravely with the British, he was shot in the arm. To stop the poison from spreading to his body, he chopped off his arm from’- the elbow. He succeeded in freeing Jagdishpur from the’ British before he died. (5) Laxmibai, the Queen of Jhansi, was a great warrior. When the British refused to accept her adopted son as the heir to the throne and tried to annex Jhansi, she joined the revolt. She had also prepared an army of women to fight against the British. Even British officials appreciated her valour by saying that she was one of the greatest women leaders of the 1857 revolt. (6) Tatya Tope was Nanasaheb Peshwa’s army commander at Kanpur. As commander, he successfully freed Kanpur. During the next two years he played a significant role in the revolt. (7) Soldiers from Bareli, Banaras, Allahabad, Agra, Azamgadh and Gorakhpur in the North; Ajmer, Nasirabad and Abu from the Rajputana and Gwalior, Mandsore, Indore and Dhar from Central India, Satara, Kolhapur, Sawantwadi, Nargadh, Dharwad, etc. in the South-joined the revolt. (8) The 7th battalion of the British army joined the ^ revolt in Ahmedabad, Gujarat, in June 1857. However, it was halted almost immediately. |
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What was the immediate result of the revolt I of 1857 C.E. ? |
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Answer» The immediate result of the revolt of 1857 C.E. was that the Company Rule ended in India and the British Rule was established. |
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दोपहर का भोजन कहानी का आशय अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» Amarkant is one of the foremost Hindi story writers. In his stories, one can get a glimpse into the lives of middle-class families. In this story, we can see a touching description of the hunger of a poor middle-class family. Chandrika Prasad was a clerk in a government office. Due to retrenchment, he was removed from his job. He had three sons – Ramachandra, Mohan and Pramod. His wife was Siddeshwari. Chandrika Prasad would go around from morning to evening in search of a job. However, it did not seem as if he would find a job. His eldest son, Ramachandra, was studying to become a proofreader. He did not even earn a stipend. The second son, Mohan, wanted to give his high school exams as a private student. He would waste his time roaming around here and there. The third and youngest son was Pramod. proofreader. He did not even earn a stipend. The second son, Mohan, wanted to give his high school exams as a private student. He would waste his time roaming around here and there. The third and youngest son was Pramod. Chandrika Prasad arrived quite late. He was very dejected. Siddeshwari tried to cheer up her husband. He ate his lunch and then stretched out on the cot, thinking about something, and fell asleep. Siddeshwari had more or less lost her appetite. She sat down in front of the plate. Only one roti was left and so, she cut it into two parts. One half she saved for her youngest son Pramod, who had cried a lot before falling asleep. As soon as Siddeshwari put a piece of roti into her mouth, tears began to roll down her cheeks. |
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मुंशी चंद्रिका प्रसाद की लाचारी का वर्णन कीजिए। |
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Answer» मुंशी चंद्रिका प्रसाद की डेढ़ महीने पूर्व मकान-किराया नियंत्रण विभाग की क्लर्की से छंटनी हो गयी थी। दूसरी कहीं भी नौकरी नहीं मिली थी। घर में बीमार लड़का। बड़े लड़के को कहीं अच्छी नौकरी नहीं। मँझला प्राईवेट ही हाईस्कूल परीक्षा के लिए बैठा है। दो वक्त का भोजन भी नहीं मिल पाता। इनके फटे-पुराने गर्द लगे जूते, पत्नी की गंदी साड़ी, गंदगी से भरा मक्खियाँ से भिनभिनाता घर, बच्चों का खाने-पीने के लिए तरसना आदि…. इस लाचारी के सामने वे बेबस थे। |
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कड़ी धूप में आये रामचंद्र की स्थिति का वर्णन कीजिए। |
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Answer» रामचन्द्र कड़ी धूप से आकर धम-से चौकी पर बैठ गया और फिर वहीं बेजान सा लेट गया। उसका मुँह लाल तथा चढ़ा हुआ था। उसके बाल अस्त-व्यस्त थे और उसके फटे-पुराने जूतों पर धूल जमी हुई थी। |
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दोपहर का भोजन कहानी का आशय लिखें। |
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Answer» अमरकांत हिन्दी कहानीकारों में अग्रगण्य हैं। इनकी कहानियों में मध्यवर्गीय परिवारों का जीवन चित्रित हुआ है। प्रस्तुत कहानी में भी एक गरीब निम्न मध्यवर्गीय परिवार की भूख का मार्मिक चित्रण किया गया है। चंद्रिका प्रसाद एक सरकारी-विभाग में क्लर्की करता था। छंटनी के कारण वह नौकरी से निकाल दिया गया। उसके तीन बेटे थे – रामचन्द्र, मोहन और प्रमोद। उसकी पत्नी का नाम सिद्धेश्वरी था। चंद्रिका प्रसाद नौकरी की तलाश में सुबह से शाम तक घूमा करता था। परन्तु नौकरी मिलने के लक्षण नहीं दिखे। बड़ा लड़का रामचन्द्र प्रूफरीडरी सीख रहा था। उसे वेतन के रूप में कुछ नहीं मिलता था। दूसरा बेटा मोहन प्राइवेट रूप से हाईस्कूल की परीक्षा देना चाहता था। वह बेकार इधर-उधर घूमा करता था। तीसरा सबसे छोटा था प्रमोद। चंद्रिका प्रसाद की स्थिति बुरी थी। उसकी पत्नी सिद्धेश्वरी दुःख की मूर्ति बनी हुई थी। वह रोटियाँ और दाल बनाकर पति व बेटों की राह देख रही थी। दुपहर का समय था। गर्मी झुलसा देनेवाली थी। बड़ा बेटा रामचंद्र भोजन के लिए बैठा। सिद्धेश्वरी ने थाली में दो रोटियाँ, दाल और चने की तरकारी रखी थी। वह अनमने भाव से रोटियाँ खाकर उठ गया। उसने बाबूजी और भाइयों के बारे में पूछा, तो माँ ने अपने बेटे को झूठ-मूठ जवाब दिया। रामचंद्र कुछ बोला नहीं। मंझला बेटा मोहन आया। वह थाली के सामने बैठकर खाने लगा। वह मुश्किल से जली रोटियाँ खा पाया। चंद्रिका प्रसाद भी देरी से आया। वह बहुत ही उदास था। सिद्धेश्वरी ने पति का हौसला बढ़ाया। वह खाना खाकर खटोले पर सोचते हुए सो गया। सिद्धेश्वरी की भूख लगभग मिट गई थी। वह थाली के सामने बैठ गई। एक ही रोंटी बची थी, उसने उस रोटी के दो टुकड़े किए। एक टुकड़ा छोटे बेटे प्रमोद के लिए रख दिया। वह रो-रोकर सो गया था। उसने रोटी के टुकड़े को मुँह में रखते ही, उसकी आँखों में से आँसू टपकने लगे। |
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