| 1. |
संचालन के सिद्धांतों का स्वरूप विस्तार से समझाइए । |
|
Answer» संचालन के सिद्धांतों के आधार पर इनके स्वरूप निम्नलिखित होते हैं : (1) सर्वव्यापकता : संचालन के सिद्धांतों को अधिकांशतः धन्धाकीय इकाइयों में लागू किया जा सकता है । जहाँ जहाँ पर सामुहिक मानवीय प्रयत्नों की आवश्यकता पड़ती है । विशेष रूप से वृहद इकाईयों में संचालन के सिद्धांतों को लागू किया जा सकता है । जिससे कहा जा सकता है कि संचालन के सिद्धांत सर्वव्यापक या सार्वत्रिक है । (2) परिवर्तनशील : संचालन के सिद्धांत कठोर नहीं, परंतु परिवर्तनशील है । संचालक को जब व जिस परिस्थिति में आवश्यक लगे तब उनमें परिवर्तन किया जाता है । यदि कई परिस्थिति में यह सिद्धांत लागू न पड़ सके ऐसा हो तो संचालक को इनमें परिवर्तन करने की छूट होती है । जैसे कार्य विभाजन का सिद्धांत वृहद इकाइयों में एक समान लागू किया जा सकता है, लेकिन छोटी इकाइयों में उतनी ही मात्रा में कार्य विभाजन का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता । (3) मार्गदर्शिका के रूप में : संचालन के सिद्धांत सामान्यत: मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करते हैं । जो कि अलग-अलग परिस्थिति में से अलग-अलग निष्णांतो के अनुभव पर निर्भर है । इकाई के संचालन के दौरान अनेक कठिन से कठिन समस्याएँ आती है । इन प्रत्येक समस्या का स्वरूप इकाई के अनुसार अलग-अलग होता है, जो प्रत्येक परिस्थिति में प्रत्येक इकाई के लिए एकसमान न्याय नहीं दिया जा सकता । अत: संचालन के सिद्धांत कठोरता से लागू नहीं किये जा सकते हैं व यह सिद्धांत केवल मार्गदर्शन के रूप में उपयोग में लाते हुए इच्छित परिणाम प्राप्त किये जा सकते है । (4) मानवीय स्वभाव पर आधारित : संचालन के सिद्धांतों का आधार मानवीय स्वभाव तथा व्यवहार से जुड़ा हुआ होता है । प्रत्येक की मानसिक परिस्थिति भी अलग-अलग होने से सिद्धांतों की सफलता का प्रमाण भिन्न होता है । मनोवैज्ञानिक परिस्थिति को भी संचालन के सिद्धांतो को अमल में लाते समय ध्यान में लेना चाहिए । (5) आकस्मिकता का तत्त्व : संचालन के सिद्धांतो को लागू करने के लिए आकस्मिकता का तत्त्व भी प्रभावित करता है । किसी एक निश्चित अनिवार्य परिस्थिति में सिद्धांतों के उपयोग द्वारा संस्था में निर्णय लेकर, लक्ष्य प्राप्ति सरल बना सकते है । जैसे कि, कर्मचारियों को योग्य तथा उचित प्रतिफल चुकाया जाना चाहिए । यह योग्य व उचित प्रतिफल क्या है ? यह आकरिमकता अथवा आवश्यकता के आधार पर असर करनेवाले परिबलों या तत्त्वों को ध्यान में लेकर तय किये जा सकते हैं । |
|