This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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What is meant by power of accommodation of the eye ? Name the muscles of the eye responsible for the same. |
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Answer» The power of accommodation of the eye is the process of adjusting the focal length of the lens according to the near or distant objects. The ciliary muscles attached to the lens controls its curvature and alters its focal length. |
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What is meant by power of accommodation of the eye? Name the muscles of the eye responsible for the same ………… |
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Answer» The process of focusing the eye at different distances is called the power of accommodation. The ciliary muscles are responsible for the power of accommodation. |
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इन्द्रपुरी किसके सामने पानी भरती है? |
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Answer» इन्द्रपुरी इन्द्रप्रस्थ के सामने पानी भरती है। |
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युद्ध क्षेत्र में कौन डट कर लड़ते रहे? |
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Answer» युद्ध क्षेत्र में गोरा और बादल डट कर लड़ते रहे। |
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बिहार राज्य की भव्यता का वर्णन कीजिए। |
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Answer» बिहार की भूमि में पितरों का तर्पण होता है। यहीं पर जयप्रकाश नारायण जिन्हें प्यार से लोग जे.पी. कहते थे, उनकी मध्यस्थता, विचारों से प्रभावित होकर डाकू लोग भी आत्म-समर्पण कर देते थे। यहीं पर विश्वविख्यात नालंदा, वैशाली विश्वविद्यालय हैं। गौतम बुद्ध, महावीर आदि ने यहीं पर अपने उपदेशों से लोगों को प्रभावित किया। इस प्रदेश में नूतनता नित्य उभरती है। |
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अपने बल पर कौन अड़ा है? |
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Answer» अपने बल पर पंजाब केसरी अड़ा है। |
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हरा-भरा हरियाणा किनका स्थल है? |
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Answer» हरा-भरा हरियाणा अर्जुन, भीम और युधिष्ठिर का स्थल है। |
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विश्वगुरु कौन कहलाते हैं? |
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Answer» नालन्दा-वैशाली विश्वगुरु कहलाते हैं। |
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हरियाणा की सांस्कृतिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» डॉ. पुण्यमचन्द ‘मानव’ ने ‘भारत की धरती’ कविता में भारत के विभिन्न प्रान्तों की विशेषताओं का वर्णन किया है। हरियाणा के बारे में वे कहते हैं – हरित भरित हरियाणा की संस्कृति बहुत ही प्राचीन है। यहीं पर अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर आदि महापुरुषों की क्रीडास्थली है। यहीं पर कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध में कौरव-पाण्डवों ने भाग लिया। ‘भगवद्गीता’ के श्लोक यहीं पर श्रीकृष्ण के मुख से सुनाये गये। यहाँ धर्म-कर्म-संस्कृति-सभ्यता-बल-पौरुष का संबल है। यहाँ इन्द्रप्रस्थ के सम्मुख इन्द्रपुरी भी पानी भरती है। |
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दक्षिण प्रदेश की महत्ता को अपने शब्दों में लिखिए। |
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Answer» ‘मानव’ जी ने ‘भारत की धरती’ कविता में भारत के विभिन्न प्रांतों का वर्णन किया है। दक्षिण के प्रदेशों को उन्होंने रत्नों की खान कहा है। तमिलनाडु में कम्ब ने रामायण का ज्ञान दिया। केरल और आंध्रप्रदेश सभ्यता, संस्कृति और धर्म के विधायक हैं। महाराष्ट्र में वीर शिवाजी का गुणगान होता है। कर्नाटक में कावेरी नदी बहती है। यहीं पर टीपू और रानी चेन्नम्मा के बलिदानों की कहानियाँ मिलती हैं तो दूसरी ओर बसवेश्वर, अक्कमहादेवी, रामानुज जैसे संतों ने अपने ज्ञान से संसार को प्रकाशित किया। इस प्रकार दक्षिण प्रदेश धर्म-कर्म, साहित्य-कला, संस्कृति आदि का पालन करनेवाला प्रदेश है। |
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राजस्थान की वीरता के संबंध में ‘मानव’ के क्या विचार हैं? |
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Answer» राजस्थान में राणा की हुंकार है। यहाँ की हल्दी घाटी की चट्टानों पर वीरों की तलवार खनकी है। यहाँ के वीरों के मस्तक स्वाभिमान से ऊँचे थे जो कट सकते थे पर झुके नहीं। युद्ध क्षेत्र में गोरा-बादल अंग भंग होने पर भी युद्ध करते हैं। यहाँ पर वीरता, सेनानी और जौहर की कीर्ति उभर आती है। इस प्रकार मानव ने राजस्थान की वीरता के सम्बंध में अपने विचार व्यक्त किये हैं। |
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मलिक मुहम्मद जायसी की पुस्तक …….. है ।(A) रामचरित मानस(B) पद्मावत(C) आशिका(D) नूर |
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Answer» सही विकल्प है (B) पद्मावत |
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पंजाब केसरी की महत्ता प्रकट कीजिए। |
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Answer» हमारे भारतवर्ष की उत्तरी सीमा पर विशाल हिमराज हिमालय खड़ा है। उसकी तराई में पंजाब अपने में अति उर्वरक एवं उपजाऊ भूमि है। जिसके बल पर हिमालय पर्वत ऊँचा मस्तक किए खड़ा हुआ है, वह पंजाब केसरी अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ वीर सिक्खों ने जन्म लिया है। तेज बहादूर की वीरता व रणकौशल तथा गुरुनानक की संत वाणी सबको मोह लेती है। इस धरती की गर्जना से सारे जगत की गर्जना होती है। |
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नालन्दा-वैशाली विश्वगुरु कहलाते हैं। |
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Answer» महाराष्ट्र में मरहठे शिवाजी के कृत्यों के गायक है। |
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कर्नाटक में किसके बलिदानों की एक कहानी है? |
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Answer» कर्नाटक में रानी चेन्नमा के बलिदानों की एक कहानी है। |
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कर्नाटक की परम पुनीत नदी कौन-सी है? |
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Answer» कर्नाटक की परम पुनीत नदी कावेरी है। |
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‘मानव’ ने उत्तर प्रदेश की किन विशेषताओं का वर्णन किया है? |
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Answer» डॉ. पुण्यमचन्द ‘मानव’ भारत की धरती का वर्णन करते हुए उत्तर प्रदेश की विशेषताओं के बारे में बताते हैं कि उत्तर में उत्तर प्रदेश, काशी, प्रयाग, हरिद्वार जैसे पुण्य स्थल हैं। मल्लिक मुहम्मद जायसी, कबीर, तुलसीदास के उद्गार यहीं पर मिलते हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे तीर्थस्थल यहीं पर स्थित हैं। कृष्ण-कन्हैया की भूमि यहीं पर है। रावण, कंस जैसे दुष्ट राक्षसों का नाश इसी भूमि पर हुआ है। इस प्रकार कवि ने उत्तर प्रदेश को वीरों, सन्तों की भूमि कहा है। |
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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :उत्तर में उत्तर प्रदेश, काशी, प्रयाग, हरिद्वार जहाँ।मलिक मुहम्मद के, कबीर के, तुलसी के उद्गार जहाँ।बद्रीनाथ, केदारनाथ-से, तीर्थों का यह स्थल पावनमाखन भोग लगाने वाला, कृष्ण कन्हैया मनभावन॥ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘भारत की धरती’ नामक आधुनिक कविता से लिया गया है, जिसके रचयिता डॉ. पुण्यमचन्द ‘मानव’ हैं। संदर्भ : प्रस्तुत कविता में कवि ने भारत की गौरवशाली संस्कृति का यशोगान किया है। भाव स्पष्टीकरण : कवि उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक, साहित्यिक विशेषताओं का बखान करते हुए कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में हमारे सांस्कृतिक, धार्मिक महत्त्व के केंद्र, काशी, प्रयाग (इलाहाबाद), हरिद्वार स्थित है। वहीं यह साहित्य मनीषियों से भी उर्वर रही है। यहाँ मलिक मुहम्मद जायसी’, कबीर एवं तुलसी दास हुए हैं। भक्ति आंदोलन के यह श्रेष्ठ रचनाकार है जिनके पद आज भी घर घर में गाए जाते हैं। यह धरती बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे तीर्थों का स्थान है। कृष्ण की नगरी मथुरा भी इसी प्रांत में स्थित है। मथुरा का नाम सुनते ही मनभावन कृष्ण कन्हैया की छवि मस्तिष्क में तैर जाती है। कृष्ण की बाललीलाओं का क्रीडास्थल यही उत्तर प्रदेश की धरती है। विशेष : खड़ी बोली हिन्दी का प्रयोग। भारत-महिमा का वर्णन किया गया है। |
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विश्व ने किसकी शक्ति मानी है? |
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Answer» विश्व ने टीपू सुल्तान की शक्ति मानी है। |
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कर्नाटक में किसकी शीतल मंद सुगंध विचरती है? |
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Answer» कर्नाटक में मलयज शीतल मंद सुगंध विचरती है। |
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भारत की धरती कवि परिचय : |
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Answer» कवि पुण्यमचन्द ‘मानव’ का जन्म 24 फरवरी 1932 ई. में भिवानी (हरियाणा) में हुआ। आपने उच्च शिक्षा प्राप्ति के उपरांत 1954 ई. से 1964 ई. तक वैश्य हायर सेकंडरी स्कूल, भिवानी तथा 1964 ई. से 1989 तक राष्ट्रीय मिलिटरी स्कूल, बेंगलूर में हिन्दी प्राध्यापक के पद पर कार्य किया। आपका जीवन संघर्षपूर्ण रहा। आपने समाज के प्रति अपने दायित्व को निष्ठापूर्वक निभाते हुए उच्च कोटि की साहित्य साधना की है। आपके शोध प्रबंध ‘हिन्दी लावणी साहित्य पर हिन्दी संत-साहित्य का प्रभाव’ पर कर्नाटक सरकार द्वारा 1972 ई. में विशेष सम्मान एवं नकद पुरस्कार तथा विधान सभा के विशेष समारोह में सम्मानित किया गया। आपको हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य सेवा के लिए हरियाणा गौरव सम्मान 2011′ से अलंकृत किया गया। प्रकाशित पुस्तकें : ‘वैदिक पथ प्रदर्शक’, ‘मधुप्याला’, ‘राष्ट्रपूजा’, ‘जीवन गीत’, ‘काव्यांजलि’ आदि। |
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भारत माता की धरती किसकी धरती है? |
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Answer» भारत माता की धरती वीरों और संतों की धरती है। |
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भारत की धरती कविता का सारांश अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» In this poem, the poet Dr Punyamchand ‘Manar’ has described the proud history of the various regions of India and also given beautiful descriptions of the various Indian cultures and traditions. The land of India is the birthplace of many brave warriors, great saints, even Lord Rama and Lord Krishna themselves. This land gives great pleasure to the mind. Uttar Pradesh is home to many sacred sites such as Kashi, Prayag, Haridwar, Badrinath, Kedarnath (the latter three are part of present-day Uttarakhand state). Even the voices of great poets, saints and thinkers such as Malik Mohammed, Kabir and Tulsidas have been born and heard in this state. It is also the birthplace of Lord Krishna. It is also the land of brave warriors and great saints. On the forehead of India stand the Himalayas. The voices of Punjab Kesari, Tegh Bahadur and Guru Nanak were heard in this region. This whole world fears the roar of this land (India). Such is this land – the homeland of saints and brave warriors. The green and nurturing environment of Haryana has given us great epics and texts such as the Vedas, the Upanishads, and the Bhagavad Gita. On the banks of river Saraswati, the chants of Vedic priests is heard. This is the land of Arjuna, Bhima and Yudhistira. This is the land of Dharma and Karma, of ancient traditions and etiquette. It is the land of Indraprastha. In Rajasthan, one can hear the roar of the Ranas and the clanging of the swords on the rocks of Haldighati. It was here that Rana Pratap fought bravely against the Mughal Emperor Akbar. This is the land of white clouds, of Senani (Rajput warriors) and Jauhar (the act of self-immolation when a battle was lost). Such is the land of Rajasthan. The land of Bihar is the land where our deceased ancestors are provided gratification. It was here that dacoits surrendered due to the efforts of J.P. (Jaya Prakash Narayan). This is the land of the great ancient universities of Nalanda and Vaishali. It is the land of Gautama Buddha and Mahaveer Jain. In the south, the seas wash the feet of India. Tamil Nadu’s Kamba Ramayan (a version of the epic Ramayana written by the Tamil poet Kamban), and the beautiful and diverse culture of Kerala and Andhra, the heroism of Chhatrapati Shivaji of Maharashtra, the serene, calm and sweet atmosphere of Malayagiri in Karnataka are all very inviting. What can be said about the pride and respect of the home of nature, Karnataka? It is the land where Tipu Sultan and Rani Chennamma made great sacrifices, and their stories still reverberate among the land. The beauty, pride and respect of the land of Kannada is unparalleled. The calm water flow of the river Cauvery, the home of Pampa Mahakavi, the vachanas of Basaveshwara and Akkamahadevi, the Darshan (sighting) of Ramanujacharya’s Melukote (where he stayed for 14 years), the land of Dharma (faith) and tradition, the land of the fine arts and of classical music is the land of Karnataka. Such is the land of the motherland, India. Such is the rich tradition and history of India, the land of brave warriors and great saints. |
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क्लाइनेफेल्टर्स सिण्ड्रोम किसे कहते हैं? यह कैसे बनते हैं? ऐसे मनुष्यों जिनमें यह उपस्थित है, के लक्षण लिखिए।या लिंग गुणसूत्रीय ट्राइसोमी पर टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» क्लाइनेफेल्टर्स सिण्ड्रोम – यह सिण्ड्रोम लिंग गुणसूत्रों की ट्राइसोमी के कारण होता है। इनमें XXY लिंग गुणसूत्र होते हैं। अत: इनमें 47 (44 + XXY) गुणसूत्र होते हैं। इनमें पुरुष व स्त्रियों के लक्षणों का मिश्रण पाया जाता है। Y-गुणसूत्र की उपस्थिति के कारण इनका शरीर लम्बा व सामान्य पुरुषों जैसा होता है लेकिन अतिरिक्त x गुणसूत्र के कारण इनके वृषण तथा अन्य जननांग व जनन ग्रन्थियाँ अल्प-विकसित होती हैं। इसे हाइपोगोनेडिज्म (hypogonedism) कहते हैं। इनमें शुक्राणुओं का निर्माण नहीं होता अतः ये नर बंध्य (male sterile) होते हैं। स्त्रियों के समान इनके चेहरे और शरीर पर बाल कम होते हैं और स्त्रियों के समान स्तन भी विकसित हो जाते हैं। इसे गाइनोकोमेस्टिया(gynaecomastia) कहते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिक एच०एफ० क्लाइनेफेल्टर (H.E Klinefelter) ने सन् 1942 में इस प्रकार के असामान्य पुरुषों का वर्णन किया। लगभग 500 पुरुषों में से एक में क्लाइनेफेल्टर्स सिण्ड्रोम पाया जाता है। ये असामान्य पुरुष असामान्य अण्डों (XX eggs) व सामान्य शुक्राणुओं (Y sperms) से या सामान्य अण्डों (X eggs) व असामान्य शुक्राणुओं (XY sperms) में निषेचन के फलस्वरूप बनते हैं। ये असामान्य अण्डे या शुक्राणु ४ गुणसूत्रों के अवियोजन (non-disjunction) से बनते हैं। ऐसे क्लाइनेफेल्टर्स सिण्ड्रोम भी होते हैं जिनमें लिंग गुणसूत्रXYY या XXX या तीन से अधिक XXXY, XXXXY, XXXXXY होते हैं। XYY सिण्ड्रोम वाले पुरुष लम्बे, मूर्ख, कामुक और गुस्सैल एवं उग्र स्वभाव के अतिनर (supermales) होते हैं। इसके विपरीत XXX या XXXX वाली अतिमादाएँ (superfemale or metafemales) मूर्ख और बाँझ होती हैं। दो या दो से अधिक X-गुणसूत्र वाले सभी नर नपुंसक होते हैं। |
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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :ले-देकर जीना क्या जीना?कब तक गम के आँसू पीना?मानवता ने सींचा तुझकोबहा युगों तक खून-पसीना। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कायर मत बन’ नामक आधुनिक कविता से लिया गया है, जिसके रचयिता नरेन्द्र शर्मा हैं। संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने मनुष्य को कायर न बनने का संदेश देते हुए कहा है कि मनुष्य को मनुष्यता का ध्यान भी रखना अवश्यक है। भाव स्पष्टीकरण : कवि इसमें मानवता को अत्यधिक महत्व देते हुए दुष्टों के सम्मुख आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं। हमेशा समझौता करके, हार के, ले-देकर जीना, जीना नहीं है। कब तक तुम दुःख के आँसू पीते हुए, कष्ट सहते ही रहोगे? मानवता ने तुमको अमृत जल से सींचा है। तुम्हें सुख भोगने का अधिकार है। इसलिए शत्रुओं से डटकर मुकाबला करो, कायरता छोड़ दो, साहसी बनो। |
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कौन राह रोकता है? |
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Answer» पाहन (पत्थर) राह रोकता है। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य को कैसे नहीं जीना चाहिए? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य को कायरतापूर्वक नहीं जीना चाहिए। |
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ओटोसोमल ट्राइसोमी के दो उदाहरण दीजिए तथा इनमें गुणसूत्रों की संख्या एवं अन्य अपसामान्यताएँ बताइए। या मानव में गुणसूत्रीय व्यतिक्रम से उत्पन्न होने वाले दो रोगों के नाम तथा उनके गुणसूत्र विन्यास लिखिए। |
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Answer» 1. 21वें ओटोसोमल गुणसूत्र की ट्राइसोमी के कारण मंगोलिज्म या डाउन्स सिण्ड्रोम विकसित होता है। इनमें गुणसूत्रों की कुल संख्या 47 होती है। 2. 18वें ओटोसोमल गुणसूत्र की ट्राइसोमी के कारण एडवर्ड्स सिण्ड्रोम विकसित होता है। इनमें गुणसूत्रों की कुल संख्या 47 होती है। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य को किसने सींचा है? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य को मानवता ने सींचा है। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा ने किसे अधिक अपावन कहा है? |
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Answer» कवि की दृष्टि में कायरता अधिक अपावन है। |
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‘मंगोली जड़ता’ किसके कारण होती है?(क) लिंग गुणसूत्रों की एकलसूत्रता (ख) 21वीं जोड़ी के अलिंगसूत्रों की एकलसूत्रता (ग) लिंग गुणसूत्रों की एकाधिसूत्रता (घ) 21वीं जोड़ी के अलिंगसूत्रों की एकाधिसूत्रता |
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Answer» (घ) 21वीं जोड़ी के अलिंगसूत्रों की एकाधिसूत्रता |
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आनुवंशिकी में टी०एच० मॉर्गन के योगदान का संक्षेप में उल्लेख कीजिए। |
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Answer» आनुवंशिकी में टी०एच० मॉर्गन के योगदान निम्नवत् हैं – 1. मॉर्गन ने ड्रोसोफिला पर अपने प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि जीन, गुणसूत्र पर स्थित होते हैं। 2. मॉर्गन ने क्रिस-क्रॉस वंशागति की खोज की। 3. मॉर्गन व उनके साथियों ने गुणसूत्र पर स्थित जीन्स युग्मों के बीच पुनर्योजन की आवृत्ति को जीन्स के बीच की दूरी मानकर, आनुवंशिक मानचित्र की रचना की जो गुणसूत्रों पर जीन्स की स्थिति को दर्शाता है। 4. मॉर्गन ने जीन्स के उत्परिवर्तन की खोज की। 5. मॉर्गन ने विनिमय, सहलग्नता की खोज की। 6. उन्होंने सहलग्नता के गुणसूत्रीय सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। 7. मॉर्गन ने अजनकीय जीन संयोजनों को पुनर्योजन (recombination) का नाम दिया था। |
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मानवता ने मनुष्य को कैसे सींचा है? |
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Answer» मानवता ने मनुष्य को खून पसीना बहाकर सींचा है। |
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रुधिर वर्ग ‘O’ वाली स्त्री ‘AB’ रुधिर वर्ग वाले पुरुष से शादी करती है। उनके पुत्र का रुधिर वर्ग कौन-सा हो सकता है?(क) A रुधिर वर्ग (ख) ‘B’ रुधिर वर्ग (ग) A या ‘B’ रुधिर वर्ग (घ) AB’ रुधिर वर्ग |
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Answer» (ग) A या ‘B’ रुधिर वर्ग |
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कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार प्रतिहिंसा क्या है? |
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Answer» कवि के अनुसार प्रतिहिंसा दुर्बलता है। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा मनुष्य को किसके बल पर जीतने को कहते हैं? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा कहते हैं कि या तो प्रीति के बल पर जीत, या दुश्मन तेरा पैर स्वयं चूमे, ऐसी जीत हासिल कर। |
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मानवता ने मनुष्य को खून पसीना बहाकर सींचा है। |
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Answer» युद्ध के समय हमें पीठ नहीं फेरना चाहिए। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा किसके सामने आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा दुष्ट के सामने आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य के अंदर का मानव कैसा है? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा के अनुसार मनुष्य के अन्दर का मानव अमोल है। |
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मानवता के प्रति कवि नरेन्द्र शर्मा के विचार प्रकट कीजिए। |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा ने ‘कायर मत बन’ कविता में मानव को कायर नहीं बनने का संदेश दिया है। कवि मानवता को अत्यधिक महत्व देते हुए दुष्टों के सम्मुख आत्मसमर्पण न करने के लिए कहते हैं। युगों तक खून-पसीना बहाकर, अत्यधिक परिश्रम से मानवता रूपी वृक्ष को जो निर्माण किया है, उसके तले आराम से जीना चाहिए। यदि कोई मूर्ख ‘युद्धम् देहि’ कहे तो उसका मुँह तोड़ जवाब देना चाहिए। या तो प्यार के बल पर से उसे जीतना चाहिए नहीं तो उसे सबक सिखाना चाहिए क्योंकि ‘मानव’ अमोल है। ले-दे कर जीना, जीना नहीं है। धैर्य और साहस से दुष्टों का विनाश करके प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। व्यक्तिगत तौर पर भी हमेशा गम के आँसू पीते कब तक हम रह सकते हैं? साहस से कष्टों का सामना कर मानवता के पथ पर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। |
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कवि नरेन्द्र शर्मा क्या न बनने का संदेश देते हैं? |
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Answer» कवि नरेन्द्र शर्मा कायर न बनने का सन्देश देते हैं। |
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पीर पर्वत हिमालय से क्या निकलनी चाहिए? |
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Answer» पीर पर्वत हिमालय से गंगा निकलनी चाहिए। |
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कवि दुष्यन्त कुमार के अनुसार जनता की पीड़ा किसके समान है? |
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Answer» कवि दुष्यंत कुमार के अनुसार जनता की पीड़ा पर्वत के समान है। |
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कवि के अनुसार क्या शर्त थी? |
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Answer» कवि के अनुसार शर्त यह थी कि बुनियाद हिलनी चाहिए। |
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दीवार किसकी तरह हिलने लगी? |
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Answer» दीवार परदों की तरह हिलने लगी। |
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कवि दुष्यन्त कुमार के अनुसार समाज में क्या फैला हुआ है? |
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Answer» कवि दुष्यंत कुमार कहते हैं कि समाज में अब तो दुःख, दर्द, पीड़ा हद से गुजर गयी है। दुःख के इस महा पर्वत को अब पिघलना ही चाहिए। जैसे हिमालय से गंगा की धार निकली वैसे दुःख की कोई राह निकलनी चाहिए। कवि यहाँ पर परिवर्तन की, क्रांति की बात कर रहे हैं। समाज में बदलाव लाना चाहते हैं। |
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पीड़ित व्यक्ति की संवेदना को कवि दुष्यन्त कुमार ने किस प्रकार व्यक्त किया है? |
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Answer» कवि दुष्यन्त कुमार द्वारा गजल शैली में लिखी गई कविता ‘हो गई है पीर पर्वत-सी’ में कवि ने पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। दुःखी लोगों की पीड़ा पर्वत सी बन गई है। उस पीड़ा रूपी पर्वत से कोई गंगा निकलनी चाहिए। मनुष्य-मनुष्य के बीच जो दीवारें बन गई हैं उसे खत्म करने की आवश्यकता है। सिर्फ हंगामा खड़ा करना उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जब तक यह सूरत नहीं बदलेगी तब तक बदलाव न हो सकेगा। कवि एक प्रकार की क्रांति चाहते हैं जिससे लोगों को दुख-दर्द से मुक्ति मिल सके। |
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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘हो गई है पीर पर्वत-सी’ नामक आधुनिक कविता से लिया गया है जिसके रचयिता दुष्यन्त कुमार हैं। संदर्भ : इस गजल में कवि ने देशवासियों को जागरण का संदेश देते हुए आमूल चूल परिवर्तन का आवाहन किया है। भाव स्पष्टीकरण : कवि कहते हैं कि आज यह जाति भेदभाव, धर्म और शोषण की दीवार ऐसे हिल रही है, मानो खिड़कियों व दरवाजों के लगे हुए परदे हिल रहे हैं। वास्तव में होना यह है कि सम्पूर्ण बुनियाद ही हिल जाये, ताकि फिर से कुछ नया निर्माण किया जा सके। ऐसी शर्त रख रहे हैं कि परिवर्तन की चाह है जिसमें धर्म-जाति, भेदभाव, शोषण, अत्याचार को जड़ से मिटाना चाहिए। |
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आनुवंशिक रोग क्या है? मनुष्य में इस रोग के दो उदाहरण लिखिए। |
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Answer» वे रोग जो किसी संतान को अपने माता-पिता से आनुवंशिक रूप से प्राप्त होते हैं, आनुवंशिक रोग कहलाते हैं। उदाहरणार्थ-वर्णान्धता तथा हीमोफीलिया। |
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कायर मत बन कविता का सारांश अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» In this poem, the poet Narendra Sharma advises the reader not to be a coward. The poet is advising mankind that it is not good to quarrel in life. How long can a person live a life of quarrelling and fighting, and by shedding tears of pain? Humanity has spent countless years of toil, blood and sweat to bring us to this stage. Thus, even without doing anything, we are doing something. The poet warns mankind not to cry over one’s weakness or cowardice. Once again, the poet tells the man that he is free to be anything but a coward. The poet tells mankind that when someone calls upon us to fight a war, we must not turn our back on them and ask others for help. The victory that is achieved through love must kiss the path that we tread. The poet asks the man if he does not know that taking revenge is not a good deed. However, cowardice is an even greater evil than revenge. Therefore, the poet tells the man to be everything except a coward. The poet says that no price is too much for the protection of mankind. It is a fact that mankind and humanity are priceless. When a person destroys his or her ego, mankind and humanity are protected. This is the measure of truth. The poet tells the man that he may renounce everything for the sake of humanity and mankind, but should never bow in front of the wicked or evil. Once again, the poet reminds man that he may choose to become anything, but not a coward. |
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