Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

उदाहरण के आधार पर प्रत्यय लगाकर शब्द पुनः लिखिए :(ई, ता, इत, इक) उदाहरण : नियम – नियमित

Answer»

(1) विदेश – विदेशी

(2) प्रकृति – प्राकृतिक

(3) पुत्र – पुत्री

(4) लापरवाह – लापरवाही

(5) चंचल – चंचलता

(6) यंत्र – यांत्रिक

(7) मानव – मानवता

(8) हँस – हँसी

2.

इस कविता का केन्द्रिय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

इस कविता का केन्द्रिय भाव छुआछूत है। यह मानवता के नाम पर कलंक है। जन्म के आधार पर किसी को अछूत मानना एक अपराध है। मंदिर जैसे पवित्र स्थानों पर अछूत होने पर किसी के प्रवेश पर रोक लगाना सर्वथा अनुचित है। कवि चाहता है कि इस प्रकार की सामाजिक विषमता का शीघ्र अंत हो। सभी को सामाजिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त हो।

3.

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −इस पेशे में आमतौर पर स्याह को सफ़ेद और सफ़ेद को स्याह करना होता था।

Answer»

 वकालत पेशे का काम झूठ को सच और सच को झूठ सिद्ध करना होता है। इसमें पूरी सच्चाई से काम नहीं होता था ।

4.

गांधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई कहाँ नौकरी करते थे?

Answer»

 गांधीजी से मिलने से पहले महादेव भाई सरकार के अनुवाद विभाग में नौकरी करते थे।

5.

महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?

Answer» महादेव भाई अपना परिचय गांधीजी के 'हम्माल' तथा 'पीर-बावर्ची-खर' के रूप में देते थे।
6.

गांधीजी ने 'यंग इंडिया' प्रकाशित करने के विषय में क्या निश्चय किया?

Answer»

गांधीजी ने 'यंग इंडिया' प्रकाशित करने के विषय में यह निश्चय किया कि यह हफ्ते में दो बार छपेगी।

7.

'यंग इंडिया' साप्ताहिक में लेखों की कमी क्यों रहने लगी थी?

Answer»

'यंग  इंडिया' साप्ताहिक के मुख्य लेखक हार्नीमैन को अंग्रेज़ सरकार ने देश निकाला  इंग्लैंड भेज दिया इसलिए लेखों की कमी रहने लगी थी।

8.

महादेव भाई के झोलों में क्या भरा रहता था?

Answer»

महादेव भाई के झोलों में समाचार पत्र, मासिक पत्रिकाएँ पत्र और पुस्तकें भरी रहती थीं।

9.

सुखिया के पिता पर कौन-सा आरोप लगाकर उसे दंडित किया गया?

Answer»

सुखिया के पिता पर मंदिर की पवित्रता भंग करने का आरोप लगाकर दंडित किया गया।

10.

बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की?

Answer»

बीमार बच्ची ने देवी माँ के प्रसाद का एक फूल की इच्छा प्रकट की।

11.

पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।

Answer»

 अंतिम बार गोद में बेटी 

तुझको ले न सका मैं हा 

एक फूल माँ का प्रसाद भी 

तुझको दे न सका मैं हा

12.

पुजारी से प्रसाद फूल पाने पर सुखिया के पिता की मन स्थिति।

Answer»

भूल गया उसका लेना झट 

परम लाभ-सा पाकर मैं। 

सोचा- बेटी को माँ के 

ये पुण्य-पुष्प दूँ जाकर मैं।

13.

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −'अपना परिचय उनके 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में देने में वे गौरवान्वित महसूस करते थे।

Answer»

महादेव जी गांधीजी के मंत्री थे। वे गांधीजी के छोटे-बड़े सभी कार्य कुशलता पूर्वक करते थे। इसी कारण वे स्वयं को गांधीजी के 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' कहते थे और उसमें गौरव का अनुभव करते थे।

14.

महादेव भाई ने गांधीजी की कौन-सी प्रसिद्ध पुस्तक का अनुवाद किया था?

Answer»

महादेव जी ने गांधीजी द्वारा लिखित 'सत्य के प्रयोग' का अंग्रेजी में अनुवाद किया था।

15.

जेल से छूटने के बाद सुखिया के पिता ने अपनी बच्ची को किस रूप में पाया?

Answer»

जेल से छूटने के बाद सुखिया के पिता ने अपनी बच्ची को राख की ढेरी के रूप में पाया।

16.

पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।

Answer»

ऊँचे शैल-शिखर के ऊपर 

मंदिर था विस्तीर्ण विशाल 

स्वर्ण कलश सरसिज विहसित थे 

पाकर समुदित रवि कर जाल।

17.

सुखिया के बाहर जाने पर पिता का हृ्दय काँप उठता था।

Answer»

मेरा हृदय काँप उठता था 

बाहर गई निहार उसे 

यही मनाता था कि बचा लूँ 

किसी भाँति इस बार उसे।

18.

इस कविता में से कुछ भाषिक प्रतीकों बिंबों को छाँटकर लिखिए − उदाहरण : अंधकार की छाया (i) .............................                (ii) ................................. (iii) ...........................                 (iv) ................................. (v) .............................

Answer»

(i) निज कृश रव में 

(ii) स्वर्ण-घनों में कब रवि डूबा 

(iii) जलते से अंगारे 

(iv) विस्तीर्ण विशाल 

(v) पतित-तारिणी पाप हारिणी

19.

महादेव जी की लिखावट की क्या विशेषताएँ थीं ?

Answer»

महादेव जी की लिखावट बहुत सुंदर थी। उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था। उनके लिखे नोटों में कॉमा- हलंत तक की गलती नही होती थी। वाइसराय को जाने वाले पत्र गांधीजी हमेशा महादेव जी से ही लिखाते थे। उनका लेखन सबको मंत्रमुग्ध कर देता था। बड़े-बड़े सिविलियन और गवर्नर कहा करते थे कि सारी ब्रिटिश सर्विसों में उनके समान अक्षर लिखने वाला कोई नहीं था।

20.

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −देश और दुनिया को मुग्ध करके शुक्रतारे की तरह ही अचानक अस्त हो गए।

Answer»

जिस तरह शुक्रतारा थोड़े समय में ही अपनी छटा से  मोहित कर देता है और फिर छिप जाता है उसी प्रकार महादेव जी भी थोड़े ही समय में अपनी कार्यकुशलता से सबके लाडले बन गए परन्तु अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए।

21.

निम्नलिखित पंक्तियों का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए −  (क) अविश्रांत बरसा करके भी  आँखे तनिक नहीं रीतीं (ख) बुझी पड़ी थी चिता वहाँ पर छाती धधक उठी मेरी (ग) हाय! वही चुपचाप पड़ी थी अटल शांति-सी धारण कर (घ) पापी ने मंदिर में घुसकर किया अनर्थ बड़ा भारी

Answer»

(क) आँखें हमेशा रोती रहती हैं।  उनसे आँसू रूपी पानी बरसता रहता है। आँसू कभी समाप्त नहीं होते हैं। इन पंक्तियों में पिता के लगातार निरंतर रोने की दशा का वर्णन किया गया है।  

(ख) सुखिया की चिता की आग अब बुझ गई थी। लेकिन उसे देखकर पिता के दिल में दुख से उपजी वेदना की चिता जलने लगी। अर्थ की सुंदरता यह है कि एक चिता बाहर जलकर अभी बुझी है और दूसरी चिता दिल के अंदर जलनी आरंभ हो गई है। इसमें पिता के दुख और उससे उत्पन्न वेदना का वर्णन किया गया है।  

(ग) चंचल सुखिया बीमारी से पीड़ित होकर ऐसे चुपचाप लेटी हुई थी मानो उसने अटल शांति धारण कर ली हो। यहाँ नटखट बालिका का शांत भाव से पड़े रहने की दशा का वर्णन है।  

(घ) मंदिर में आए लोगों ने जब सुखिया के पिता को मंदिर में देखा, तो उन्हें बड़ा गुस्सा आया। लोगों को मंदिर में एक अछूत का आना पसंद नहीं आया। वे एक अछूत का मंदिर में इस प्रकार चले आने को अनर्थ मानने लगे।

22.

महादेव जी के किन गुणों ने उन्हें सबका लाड़ला बना दिया था?

Answer»

महादेव जी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे। वे कर्तव्यनिष्ठ थे, विन्रम स्वभाव के थे, आने वालों के साथ सहयोग करते थे। उनकी लेखन शैली का सभी लोहा मानते थे। वे कट्टर विरोधियों के साथ भी सत्यनिष्ठता और विवेक युक्त बात करते थे। देश में ही नहीं विदेश में भी लोकप्रिय थे। इन्हीं सब करणों से वे सबके लाडले थे।

23.

अहमदाबाद से कौन-से दो साप्ताहिक निकलते थे?

Answer»

अहमदाबाद से यंग इंडिया और नवजीवन नामक दो साप्ताहिक निकलते थे।

24.

निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −उन पत्रों को देख देखकर दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय लंबी साँस उसाँस लेते रहते थे।

Answer»

गांधीजी के पत्र हमेशा महादेव जी की लिखावट में लिखे जाते थे। जिन पत्रों को गांधीजी दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय को भेजते उन पत्रों की लिखावट की सुन्दरता देखकर वे भी दांग रह जाते।

25.

एक फूल कि चाह पाठ का सार लिखे|

Answer»

प्रस्तुत पाठ ‘एक फूल की चाह’ छुआछूत की समस्या से संबंधित कविता है। महामारी के दौरान एक अछूत बालिका उसकी चपेट में आ जाती है। वह अपने जीवन की अंतिम साँसे ले रही है। वह अपने माता- पिता से कहती है कि वे उसे देवी के प्रसाद का एक फूल लाकर दें । पिता असमंजस में है कि वह मंदिर में कैसे जाए। मंदिर के पुजारी उसे अछूत समझते हैं और मंदिर में प्रवेश के योग्य नहीं समझते। फिर भी बच्ची का पिता अपनी बच्ची की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए मंदिर में जाता है। वह दीप और पुष्प अर्पित करता है और फूल लेकर लौटने लगता है। बच्ची के पास जाने की जल्दी में वह पुजारी से प्रसाद लेना भूल जाता है। इससे लोग उसे पहचान जाते हैं। वे उस पर आरोप लगाते हैं कि उसने वर्षों से बनाई हुई मंदिर की पवित्रता नष्ट कर दी। वह कहता है कि उनकी देवी की महिमा के सामने उनका कलुष कुछ भी नहीं है। परंतु मंदिर के पुजारी तथा अन्य लोग उसे थप्पड़-मुक्कों से पीट-पीटकर बाहर कर देते हैं। इसी मार-पीट में देवी का फूल भी उसके हाथों से छूट जाता है। भक्तजन उसे न्यायालय ले जाते हैं। न्यायालय उसे सात दिन की सज़ा सुनाता है। सात दिन के बाद वह बाहर आता है , तब उसे अपनी बेटी की ज़गह उसकी राख मिलती है।

इस प्रकार वह बेचारा अछूत होने के कारण अपनी मरणासन्न बेटी की अंतिम इच्छा पूरी नहीं कर पाता। इस मार्मिक प्रसंग को उठाकर कवि पाठकों को यह कहना चाहता है कि छुआछूत की कुप्रथा मानव-जाति पर कलंक है। यह मानवता के प्रति अपराध है।

26.

व्याख्या करे :अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी। प्रभु जी, तुम चंदन हम पानी , जाकी अँग-अँग बास समानी। प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा , जैसे चितवत चंद चकोरा। प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती , जाकी जोति बरै दिन राती। प्रभु जी, तुम मोती हम धागा , जैसे सोनहिं मिलत सुहागा। प्रभु जी, तुम तुम स्वामी हम दासा , ऐसी भक्ति करै रैदासा।

Answer»

प्रभु! हमारे मन में जो आपके नाम की रट लग गई है, वह कैसे छूट सकती है? अब मै आपका परम भक्त हो गया हूँ। जिस तरह चंदन के संपर्क में रहने से पानी में उसकी सुगंध फैल जाती है, उसी प्रकार मेरे तन मन में आपके प्रेम की सुगंध व्याप्त हो गई है । आप आकाश में छाए काले बादल के समान हो, मैं जंगल में नाचने वाला मोर हूँ। जैसे बरसात में घुमडते बादलों को देखकर मोर खुशी से नाचता है, उसी भाँति मैं आपके दर्शन् को पा कर खुशी से भावमुग्ध हो जाता हूँ। जैसे चकोर पक्षी सदा अपने चंद्रामा की ओर ताकता रहता है उसी भाँति मैं भी सदा आपका प्रेम पाने के लिए तरसता रहता हूँ।  

हे प्रभु ! आप दीपक हो और मैं उस दिए की बाती जो सदा आपके प्रेम में जलता है। प्रभु आप मोती के समान उज्ज्वल, पवित्र और सुंदर हो और मैं उसमें पिरोया हुआ धागा हूँ। आपका और मेरा मिलन सोने और सुहागे के मिलन के समान पवित्र है । जैसे सुहागे के संपर्क से सोना खरा हो जाता है, उसी तरह मैं आपके संपर्क से शुद्ध हो जाता हूँ। हे प्रभु! आप स्वामी हो मैं आपका दास हूँ।

27.

रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

 पहले पद का केंद्रिय भाव − जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती। कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है। भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है। 

दूसरे पद में − प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं। वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं। ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।

28.

व्याख्या करे :ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै। गरीब निवाजु गुसाईआ मेरा माथै छत्रु धरै॥ जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै। नीचउ ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै॥ नामदेव कबीरू तिलोचनु सधना सैनु तरै। कहि रविदासु सुनहु रे संतहु हरिजीउ ते सभै सरै॥

Answer»

हे प्रभु ! आपके बिना कौन कृपालु है। आप गरीब तथा दिन – दुखियों पर दया करने वाले हैं। आप ही ऐसे कृपालु स्वामी हैं जो मुझ जैसे अछूत और नीच के माथे पर राजाओं जैसा छत्र रख दिया। आपने मुझे राजाओं जैसा सम्मान प्रदान किया। मैं अभागा हूँ। मुझ पर आपकी असीम कृपा  है। आप मुझ पर द्रवित हो गए । हे स्वामी आपने मुझ जैसे नीच प्राणी को इतना उच्च सम्मान प्रदान किया। आपकी दया से नामदेव , कबीर जैसे जुलाहे , त्रिलोचन जैसे सामान्य , सधना जैसे कसाई और सैन जैसे नाई संसार से तर गए। उन्हें ज्ञान प्राप्त हो गया। अंतिम पंक्ति में रैदास कहते हैं – हे संतों, सुनो ! हरि जी सब कुछ करने में समर्थ हैं। वे कुछ भी सकते हैं।

29.

नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए − (क)जाकी अँग-अँग बास समानी (ख)जैसे चितवत चंद चकोरा (ग)जाकी जोति बरै दिन राती (घ)ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै (ङ)नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै

Answer» (क) कवि के अंग-अंग मे राम-नाम की सुगंध व्याप्त हो गई है। जैसे चंदन के पानी में रहने से पानी में उसकी सुगंध फैल जाती है, उसी प्रकार राम नाम के लेप की सुगन्धि उसके अंग-अंग में समा गयी है।  

(ख) चकोर पक्षी अपने प्रिय चाँद को एकटक निहारता रहता है, उसी तरह कवि अपने प्रभु राम को भी एकटक निहारता रहता है। इसीलिए कवि ने अपने को चकोर कहा है।

(ग) ईश्वर दीपक के समान है जिसकी ज्योति हमेशा जलती रहती है। उसका प्रकाश सर्वत्र सभी समय रहता है।  

(घ) भगवान को लाल कहा है कि भगवान ही सबका कल्याण करता है इसके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों को ऊपर उठाने का काम करता हो।  

(ङ) कवि का कहना है कि ईश्वर हर कार्य को करने में समर्थ हैं। वे नीच को भी ऊँचा बना लेता है। उनकी कृपा से निम्न जाति में जन्म लेने के उपरांत भी उच्च जाति जैसा सम्मान मिल जाता है।
30.

महादेव भाई दिन में कितनी देर काम करते थे?

Answer» महादेव भाई दिन में 17-18 घंटे काम करते थे।
31.

पंजाब में फ़ौजी शासन ने क्या कहर बरसाया?

Answer»

 पंजाब में फ़ौजी शासन ने अधिकतर नेताओं को गिरफ्तार करके, जन्म-क़ैद की सजाएँ देकर कालापानी भेज दिया। राष्ट्रीय दैनिक पत्र 'ट्रिब्यून' के संपादक को 10 साल की सज़ा मिली।

32.

महादेव भाई की साहित्यिक देन क्या है?

Answer»

महादेव भाई ने 'सत्य का प्रयोग' का अंग्रेज़ी अनुवाद किया जो कि गांधीजी की आत्मकथा थी। वे प्रतिदिन डायरी लिखते थे। शरद बाबू, टैगोर आदि की कहानियों का भी अनुवाद किया, 'यंग इंडिया' में लेख लिखे।

33.

शुक्र तारे के समान पाठ का सार लिखे|

Answer»

प्रस्तुत पाठ ‘शुक्र तारे के समान’ में लेखक ने गाँधी जी के निजी सचिव महादेव भाई देसाई की बेजोड़ प्रतिभा और व्यस्ततम दिनचर्या को उकेरा है। उन्होंने महादेव भाई की तुलना शुक्र तारे से की है जो सारे आकाश को जगमगा कर, दुनिया को मुग्ध करके अस्त हो जाता है। सन 1917 में में वे गांधीजी से मिले तब गांधीजी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी का पद सौंप दिया। सन 1919 में जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के दिनों में गांधीजी ने गिरफ्तार होते समय महादेव जी को अपना वारिस कहा था। उन दिनों गांधीजी के सामने अंग्रेज़ों द्वारा अत्याचारों और जुल्मो की जो दल कहानियाँ सुनाने आते थे, महादेव भाई उनकी संक्ष्पित टिप्पणियाँ बनाकर उन्हें रु-बू-रु मिलवाते थे।

 'क्रॉनिकल' के संपादक हार्नीमैन को देश निकाले की सजा मिलने पर 'यंग इंडिया' साप्ताहिक में लेखों की कमी पड़ने लगी चूँकि हार्नीमैन ही मुख्य रूप से लेख लिखते थे। इसीलिए ये जिमेदारी गांधीजी ने ले ली, बाद में उनका काम बढ़ने के कारण इस अखबार को सप्ताह में दो बार निकालना पड़ा। कुछ दिन बाद अखबार की जिमेवारी लेखक के हाथों में आ गयी। महादेव भाई और गांधीजी का सारा समय देश-भम्रण में बीतने लगा, परन्तु महादेव जी जहाँ भी होते समय निकालकर लेख लिखते और भेजते। महादेव भाई गांधीजी के यात्राओं और दिन प्रतिदिन की गतिविधियों के बारे में लिखते, साथ ही देश-विदेश के समाचारों को पढ़कर उसपर टिका-टिप्पणियाँ भी लिखते।अपने तीर्व बुद्धि के कारण देसी-विदेशी समाचार पत्र वालों के ये लाड़ले बन गए। गांधीजी के पास आने से पहले ये सरकार के अनुवाद विभाग में नौकरी करते थे। इन्होने कई साहित्यों का अनुवाद किया था।

 गांधीजी के पत्रों में महादेव भाई की लिखावट होती थी। उनकी लिखावट लम्बी सी जेट की गति सी लिखी जाती थी, वे शॉर्टहैंड नही जानते थे, परन्तु उनकी लेखनी में कॉमा मात्र की भी गलती नही होती थी इसलिए गांधीजी भी अपने मिलने वालों से बातचीत को उनकी नोटबुक से मिलान करने को कहते थे। वे अपने बड़े-बड़े झोलों में ताजे समाचार पात्र और पुस्तकें रखा करते जिसे वे  रेलगाड़ी, रैलियों तथा सभाओं में पढ़ते थे या फिर 'नवजीवन' या 'यंग इंडिया' के लिए लेख लिखते रहते। वे इतने वयस्थ समय में अपने लिए कब वक्त निकालते पता नही चलता, एक घंटे में चार घंटो का काम निपटा देते। महादेव भाई गांधीजी के जीवन में इतने रच-बस-गए थे की उनके बिना महदेव भाई की अकेले कल्पना नही की जा सकती।  उन्होंने गांधीजी की पुस्तक 'सत्य का प्रयोग' का अंग्रेजी अनुवाद भी किया। सन 1934-35 में गांधीजी मगनवाड़ी से चलकर सेगांव चले गए परन्तु महादेव जी मगंवादी में ही रहे। वे रोज वहां से पैदल चलकर सेगांव जाते तथा शाम को काम निपटाकर वापस आते, जो की कुल 11 मिल था। इस कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और वे अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए। इनके मृत्यु का दुःख गांधीजी को आजीवन रहा।

34.

गांधीजी ने महादेव को अपना वारिस कब कहा था?

Answer»

गांधीजी जब 1919 में जलियाँ वाल बाग हत्याकांड के बाद पंजाब जा रहे थे तो पलवल रेलवे स्टेशन पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। तभी गांधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।

35.

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए −(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए −उदाहरण :         दीपक        बाती                ................  .............             ................  ..............            .................   ..............            .................  ..............(घ) दूसरे पद में कवि ने 'गरीब निवाजु' किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।(ङ) दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।(च) 'रैदास' ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए − मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसइआ

Answer»

(क) पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना निम्नलिखित चीज़ों से की गई हैं−  

(1) भगवान की घन बन से, भक्त की मोर से 

(2) भगवान की चंद्र से, भक्त की चकोर से 

(3) भगवान की दीपक से, भक्त की बाती से 

(4) भगवान की मोती से, भक्त की धागे से 

(5) भगवान की सुहागे से, भक्त की सोने से 

(6) भगवान की चंदन से, भक्त की पानी से

(ख) 

मोरा     चकोरा 

दासा      रैदासा

 बाती      राती 

धागा      सुहागा

(ग) 

मोती             धागा 

घन बन         मोर 

सुहागा          सोना 

चंदन            पानी 

दासा             स्वामी

(घ) 'गरीब निवाजु' का अर्थ है, गरीबों पर दया करने वाला। कवि ने भगवान को 'गरीब निवाजु' कहा है क्योंकि ईश्वर ही गरीबों का उद्धार करते हैं, सम्मान दिलाते हैं, सबके कष्ट हरते हैं और भवसागर से पार उतारते हैं।  

(ङ) 'जाकी छोति जगत कउ लागै' का अर्थ है जिसकी छूत संसार के लोगों को लगती है और 'ता पर तुहीं ढरै' का अर्थ है उन पर तू ही (दयालु) द्रवित होता है। पूरी पंक्ति का अर्थ है गरीब और निम्नवर्ग के लोगों को समाज सम्मान नहीं देता। उनसे दूर रहता है। परन्तु ईश्वर कोई भेदभाव न करके उन पर दया करते हैं, उनकी मद्द करते हैं, उनकी पीड़ा हरते हैं।  

(च) रैदास ने अपने स्वामी को गुसईया, गरीब निवाज़, गरीब निवाज़ लाला प्रभु आदि नामों से पुकारा है।

(छ)  

मोरा             - मोर 

चंद            - चन्द्रमा 

बाती          -   बत्ती 

बरै            - जले  

राती         - रात 

छत्रु        -      छत्र 

धरै        -     रखे 

छोति        -    छुआछूत 

तुहीं        -    तुम्हीं 

राती        -    रात 

गुसइआ  - गौसाई

36.

गाँधीजी से मिलने आनेवालों के लिए महादेव भाई क्या करते थे?

Answer»

 गाँधीजी से मिलने आनेवालों से महादेव जी खुद मिलते थे, उनकी समस्याएँ सुनते, उनकी संक्षिप्त टिप्पणी तैयार करते और गांधीजी को बताते। इसके बाद वे आने वालों को गांधीजी से मिलवाते थे।

37.

महादेव भाई से गांधीजी की निकटता किस वाक्य से सिद्ध होती है?

Answer»

महादेव भाई से गांधीजी की निकटता निम्न वाक्य से सिद्ध होती है −'ए रे जख्म जोगे नहि जशे' − यह घाव कभी योग से भरेगा नहीं।

38.

महादेव भाई के लिखे नोट के विषय में गांधीजी क्या कहते थे?

Answer»

महादेव भाई के लिखे नोट के विषय में गांधीजी कहते थे कि वे सटीक होते हैं। उनमें कभी कोमा तक की गलती भी नहीं होती है। अगर किसी की टाइप करवाई हुई बातचीत में खामियां निकल जाती तो गांधीजी  उन्हें कहते महादेव के लिखे नोट से मिलान कर लेना चाहिए था ना।

39.

महादेव भाई की अकाल मृत्यु का कारण क्या था?

Answer»

महादेव भाई भरी गर्मी में वर्घा से पैदल चलकर सेवाग्राम आते थे और जाते थे। 11 मील रोज़ गर्मी में पैदल चलने से स्वास्थय पर बुरा प्रभाव पड़ा और उनकी अकाल मृत्यु हो गई।

40.

प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इनमें से कहानियाँ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। कुछ कहानियों का मंचन भी कीजिए।

Answer»

‘मानसरोवर’ के आठ भागों में लगभग तीन सौ कहानियाँ संकलित हैं। मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित इन कहानियों में ‘नमक का दारोगा’, ‘ईदगाह’, ‘पंच परमेश्वर’, ‘बूढ़ी काकी’, ‘अलगोझा’, ‘पूस की रात’, ‘ठाकुर का कुआँ’, ‘गिल्ली-डंडा’ आदि हैं। छात्र इन्हें पढ़े और इनका मंचन स्वयं करें।

41.

निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए −वारिस -.............. जिगरी -.............. कहर - .............. मुकाम -.............. रूबरू - .............. फ़र्क - .............. तालीम -.............. गिरफ़्तार -..............

Answer»

वारिस    -   वंश, उत्तराधिकारी 

मुकाम    -   लक्ष्य, मंज़िल 

तालीम    -   शिक्षा, ज्ञान, सीख 

जिगरी    -    पक्का, घनिष्ठ 

फ़र्क             -    अंतर, भेद 

गिरफ़्तार     -    कैद, बंदी

42.

निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए − आड़े हाथों लेना                           अस्त हो जाना दाँतों तले अँगुली दबाना            मंत्र मुग्ध करना लोहे के चने चबाना

Answer»

1. आड़े हाथों लेना         - पुलिस ने चोर को आड़े हाथों ले लिया। 

2. दाँतों तले अँगुली दबाना   − पाँच वर्ष के बालक को कम्प्यूटर पर काम करते देखा तो सबने दाँतों तले अँगुली दबा ली। 

3. लोहे के चने चबाना    − आतंकवादियों ने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भी लोहे के चने चबवा दिए। 

4. अस्त हो जाना    − बहुत मेहनत के बाद भारतीय अंग्रेजी राज्य के सूर्य को अस्त करने में सफल रहे। 

5. मंत्र-मुग्ध करना    − उसने अपने भाषण से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।

43.

उदाहरण के अनुसार वाक्य बदलिए − उदाहरण : गाँधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था। गाँधीजी महादेव भाई को अपना वारिस कहा करते थे। 1. महादेव भाई अपना परिचय 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में देते थे। 2. पीड़ितों के दल-के-दल ग्रामदेवी के मणिभवन पर उमड़ते रहते थे। 3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकलते थे। 4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी करते थे। 5. गांधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाते थे।

Answer»

1. महादेव भाई अपना परिचय 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में दिया करते थे। 

2. पीड़ितों के दल-के-दल ग्रामदेवी के मणिभवन पर उमड़ा करते थे। 

3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकला करते थे। 

4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी किया करते थे। 

5. गांधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाया करते थे।

44.

‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए- विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार

Answer»

विचार – वैचारिक 

नीति – नैतिक 

इतिहास – ऐतिहासिक 

प्रयोग – प्रायोगिक 

संसार – सांसारिक 

अधिकार – आधिकारिक 

दिन – दैनिक

45.

'इक' प्रत्यय लगाकर शब्दों का निर्माण कीजिए − सप्ताह - साप्ताहिक साहित्य - ..............व्यक्ति - ..............राजनीति - ..............अर्थ - ..............धर्म - ..............मास - ..............वर्ष - ..............

Answer»

1. सप्ताह        - साप्ताहिक 

2. साहित्य          - साहित्यिक 

3. व्यक्ति            - वैयक्तिक 

4. राजनीति         - राजनीतिक 

5. अर्थ                  -       आर्थिक 

6. धर्म                   -       धार्मिक 

7. मास                   -      मासिक 

8. वर्ष                     -     वार्षिक

46.

उदाहरण के आधार पर उपसर्ग लगाकर शब्द पुनः लिखिए :(वि, प्र, अ, दुर्, अध, निर्, गैर) उदाहरण : भिन्न – विभिन्न

Answer»

(1) देश – विदेश

(2) पका – अधपका

(3) गम – दुर्गम

(4) योग – प्रयोग

(5) जीव – निर्जीव

(6) बल – निर्बल

(7) समझ – गैरसमझ

(8) सुविधा – असुविधा

(9) वांछित – अवांछित

47.

चित्र के आधार पर काव्य की रचना कीजिए :घड़ी लगी दीवार पर टिकटिक कर तू चलती है,

Answer»

घड़ी लगी दीवार पर

टिक टिक कर तू चलती है,

दिन हो, चाहे रात हो

जाड़ा या बरसात हो

कभी नहीं तू रुकती है।

48.

नीचे दिए हुए मुद्दों के आधार पर ‘विज्ञान वरदान या अभिशाप’ इस विषय पर कोई एक पक्ष में अपने विचार कारण सहित बताइए।(प्रदूषण, बिजली, अंतरिक्ष की खोज, डॉक्टरी सुविधा, दूरभाष, कम्प्यूटर, परमाणु बम्ब, पिस्तौल, यातायात, ग्लोबल वॉर्मिंग)

Answer»

प्रत्येक वस्तु के दो पहलू होते हैं। एक पहलू उसकी अच्छाइयाँ बताता है, दूसरे में उसकी बुराइयाँ दिखाई जाती है। विज्ञान को भी इस कसौटी पर कसें । तो सबसे पहले उसके अच्छे पहलू हमारे सामने आते हैं।

विज्ञान ने बिजली की खोज कर मानवजाति पर बड़ा उपकार किया है। ट्यूबलाइट, पंखे, ए.सी., कूलर, फ्रीज, गीजर, लिफ्ट तथा बिजली से चलनेवाली अन्य । मशीनें विज्ञान की अद्भुत देन है। डॉक्टरी पेशे के तमाम उपकरण, एलोपेथी दवाइयाँ, विज्ञान ने ही हमें दी हैं। टेलीफोन और मोबाइल हमें विज्ञान से मिले हैं। फिल्में और दूरदर्शन विज्ञान के ही उपहार हैं। कम्प्यूटर देकर तो विज्ञान ने आज की दुनिया ही बदल डाली है। मोटर, बस, ट्रेन, हेलिकोप्टर, हवाई जहाज आदि वाहन भी विज्ञान के ही दिए हुए हैं। विज्ञान के कारण आज मनुष्य अंतरिक्ष में पहुँच गया है। चाँद की धरती पर उसने अपने कदम रख दिए हैं। विज्ञान के इन अनमोल वरदानों के कारण मानव आज धरती पर ही स्वर्ग के सुख लूट रहा है।

इन सब वैज्ञानिक आविष्कारों के साथ ही विज्ञान ने बंदूक, पिस्तौल, परमाणु बम्ब जैसे हिंसा और विनाश के साधन भी हमें दिए हैं। विज्ञान के कारण आज जल, थल और वायु में प्रदूषण भी बढ़ा है। इसमें संदेह नहीं कि ये विज्ञान के अभिशाप है। परंतु विज्ञान के वरदानों की तुलना में उसके अभिशाप खतरनाक होने पर भी कमजोर पड़ जाते हैं। सच तो यही है कि यदि विज्ञान न होता तो मानवजाति आज भी वही जीवन जीती जो आदिकाल में जंगलों में रहनेवाले लोग जीते थे। इसलिए हमें विज्ञान को वरदान और आधुनिक वैज्ञानिकों का आभार मानना चाहिए। उनके प्रयत्नों से ही हमें वे वैज्ञानिक सुविधाएँ मिली हैं।

49.

निम्नलिखित वाक्यों में से अव्यय छाँटकर लिखिए :(1) उमंग और स्मित घर चले गए।(2) मुझे अपने जन्मदिन पर कैमरा चाहिए या मोबाइल फोन?(3) वाह! क्या कैच लिया है!(4) दुर्योधन तथा कर्ण में गहरी मित्रता थी।(5) वह तेज दौड़ा।

Answer»

(1) और

(2) या

(3) वाह

(4) तथा

(5) तेज

50.

Even though they are famous cine artistes they work for dramas.A) Gollapudi Maruthi Rao B) Naseeruddin Shah C) Both A and B D) Tenali Rama Krishna

Answer»

(C) Both A and B