This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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गंगा मैया ने सत्य को क्या कहा है? |
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Answer» गंगा मैया ने सत्य को निर्भय कहा है। |
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गंगा मैया से साक्षात्कार कहानी का सारांश लिखें। |
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Answer» प्रस्तुत पाठ में लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी ने गंगा मैया के माध्यम से भ्रष्टाचार, महँगाई तथा धार्मिक ढकोसलों पर व्यंग्य किया है। समाज में कई समस्याएँ बढ़ रही हैं। जैसे – ‘सेवा धर्म’ को लोग ‘मेवा धर्म’ समझने लगे हैं। अपराधी प्रवृत्ति बढ़ रही है। लोग समझते हैं कि वे कैसे भी कर्म करें, गंगा उन्हें तार देगी। प्रदूषण तो छुआछूत का रोग है। लोग गंगाजल को मलीन कर रहे हैं। महँगाई, रिश्वतखोरी, पाशविकता आदि बढ़ती जा रही है। धर्म का व्यापारीकरण हो रहा है। मनुष्यों के कुकर्मों पर पशु-पक्षी भी हँसने लगे हैं। मनुष्य को समझना चाहिए कि प्रकृति सर्वशक्तिमान है। पतन की जब पराकाष्ठा होती है, तब पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘पतन की जब पराकाष्ठा हो जाती है तभी पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘एक बार जब जबान पे चढ़ जाए तो फिर कुछ अच्छा नहीं लगता।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं। |
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किसका संकट चर्चा का विषय बना हुआ है? |
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Answer» ‘चरित्र का संकट’ चर्चा का विषय बना हुआ है। |
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माँ कहाँ विराज रही थी? |
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Answer» माँ मंदिर में विराज रही थी। |
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माँ के चेहरे पर क्या थी? |
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Answer» माँ के चेहरे पर उदासी थी। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘पतन की जब पराकाष्ठा हो जाती है तभी पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :सत्य बोलने से ही समाज में हमारा सम्मान हो सकेगा और हम आनंदपूर्वक हमारा समय बिता सकेंगे। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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लिंग पहचानिए :शक्ति, काम, धर्म, दृष्टि, बात, नौकरी, मार्ग, मिठाई। |
Answer»
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मन ज्यादा देर तक दुविधा में पड़ा रहा तो क्या आ घेरेगी? |
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Answer» यदि मन कुछ काल तक दुविधा में पड़ा रहा, तो स्वार्थपरता निश्चित रूप से आ घेरेगी। |
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लेखिका की बड़ी बहन का नाम लिखिए। |
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Answer» लेखिका की बड़ी बहन का नाम सुशीला था। |
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कोष्ठक में दिये गए उचित शब्दों से रिक्त स्थान भरिए :(सम्मान, घृणा, सत्य, कर्त्तव्य, प्रवृत्ति)1. सच्चाई की ओर हमारी …………… झुकती है।2. मनुष्य का परम धर्म ………….. बोलना है।3. स्वार्थी लोग अपने …………… पर ध्यान नहीं देते।4. कुत्सित लोगों से सभी ………….. करते हैं।5. सत्य बोलने से हमारा ………….. होगा। |
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Answer» 1. प्रवृत्ति 2. सत्य 3. कर्त्तव्य 4. घृणा 5. सम्मान |
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मन ज्यादा देर तक दुविधा में पड़ा रहा तो क्या आ घेरेगी? |
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Answer» यदि मन कुछ काल तक दुविधा में पड़ा रहा, तो स्वार्थपरता निश्चित रूप से आ घेरेगी। |
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धर्म-पालन करने में सबसे अधिक बाधा क्या है? |
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Answer» धर्म पालन करने के मार्ग में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता है। |
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धर्म-पालन करने में सबसे अधिक बाधा क्या है? |
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Answer» धर्म पालन करने के मार्ग में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता है। |
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वाक्य शुद्ध कीजिए :1. मन में ऐसा शक्ति है।2. तुम तुम्हारे धर्म का पालन करो।3. उसे दिखावा नहीं रुचती है।4. लोगों ने झूठी चाटुकारी करके बड़े-बड़े नौकरियाँ पा लीं।5. मनुष्य के जीवन कर्त्तव्य से भरा पड़ा है। |
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Answer» 1. मन में ऐसी शक्ति है। 2. तुम अपने धर्म का पालन करो। 3. उसे दिखावा नहीं रुचती है। 4. लोगों ने झूठी चाटुकारी करके बड़ी-बड़ी नौकरियाँ पा लीं। 5. मनुष्य का जीवन कर्त्तव्य से भरा पड़ा है। |
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मन की शक्ति कैसी है? |
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Answer» ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ निबन्ध में डॉ. श्यामसुंदर दास कहते हैं कि हम लोगों के मन में एक ऐसी शक्ति है जो हमें सभी बुरे कामों को करने से रोकती है और अच्छे कामों की ओर हमारी प्रवृत्ति को झुकाती है। यह बहुधा देखा गया है कि जब कोई बुरा काम करता है तब बिना किसी के कहे आप ही लजाता है और मन में दुःखी होता है। इसलिए हमारा यह धर्म है कि हमारी आत्मा हमें जो कहे, उसके अनुसार हम करें। हमारा मन किसी काम को करने से हिचकिचाए और दूर भागे तब कभी उस काम को नहीं करना चाहिए। दृढ़विश्वास और साहस से मन को धर्म-पालन करने की ओर लगाना चाहिए। |
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अजमेर से पहले मन्नू के पिता कहाँ थे? |
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Answer» अजमेर से पहले मन्नू के पिता इंदौर में थे। |
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जो मनुष्य सत्य बोलता है, वह किससे दूर भागता है? |
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Answer» जो मनुष्य सत्य बोलता है, वह आडंबर से दूर भागता है और उसे दिखावा नहीं रुचता है। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘सत्य बोलने से ही समाज में हमारा सम्मान हो सकेगा और हम आनंदपूर्वक हमारा समय बिता सकेंगे। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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झूठ बोलने का परिणाम क्या होगा? |
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Answer» झूठ बोलने का परिणाम यह होगा कि काम नहीं होगा और दुःख भोगना पड़ेगा। |
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कर्त्तव्य करना किस पर निर्भर है? |
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Answer» कर्त्तव्य करना न्याय पर निर्भर है। |
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धर्म-पालन करने के मार्ग में क्या-क्या अड़चनें आती हैं? |
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Answer» धर्म-पालन करने के मार्ग में सबसे अधिक बाधा चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता से पड़ती है। मनुष्य के कर्त्तव्य-मार्ग में एक ओर तो आत्मा के भले और बुरे कामों का ज्ञान और दूसरी ओर आलस्य और स्वार्थपरता रहती है। बस, मनुष्य इन्हीं दोनों के बीच में पड़ा रहता है और अंत में यदि उसका मन पक्का हुआ तो वह आत्मा की आज्ञा मानकर अपने धर्म का पालन करता है। यदि उसका मन कुछ काल तक द्विविधा में पड़ा रहा तो स्वार्थपरता निश्चय उसे आ घेरेगी और उसका चरित्र घृणा के योग्य हो जायेगा। |
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झूठ बोलने का परिणाम क्या होगा? |
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Answer» झूठ बोलने का परिणाम यह होगा कि काम नहीं होगा और दुःख भोगना पड़ेगा। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘इसलिए हमारा यह धर्म है कि हमारी आत्मा हमें जो कहे, उसके अनुसार हम करें।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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मन्नू भंडारी का जन्म किस गाँव में हुआ? |
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Answer» मन्नू भंडारी का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में 1931 ई. में हुआ। |
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जो मनुष्य सत्य बोलता है, वह किससे दूर भागता है? |
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Answer» जो मनुष्य सत्य बोलता है, वह आडंबर से दूर भागता है और उसे दिखावा नहीं रुचता है। |
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लेखक मकर-संक्रान्ति के दिन कहाँ थे? |
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Answer» लेखक मकर-संक्रांति के दिन इलाहाबाद में थे। |
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वाक्य शुद्ध कीजिए :1. मैंने जाकर माँ की चरण छुए।2. वह एक दिन मेरा पास आया था।3. उसे किसी की डर नहीं है।4. पाशविकता बढ़ता चला जा रहा है।5. मैंने कभी भेदभाव नहीं की। |
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Answer» 1. मैंने जाकर माँ के चरण छुए। 2. वह एक दिन मेरे पास आया था। 3. उसे किसी का डर नहीं है। 4. पाशविकता बढ़ती चली जा रही है। 5. मैंने कभी भेदभाव नहीं किया। |
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माँ कहाँ विराज रही थी? |
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Answer» माँ मंदिर में विराज रही थी। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘कर्तव्य करना न्याय पर निर्भर है।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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झूठ की उत्पत्ति और उसके कई रूपों के बारे में लिखिए। |
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Answer» प्रश्न झूठ की उत्पत्ति पाप, कुटिलता और कायरता के कारण होती है। बहुत से लोग अपने सेवकों को स्वयं झूठ बोलना सिखाते हैं। लोग नीति और आवश्यकता के बहाने झूठ की रक्षा करते हैं। कुछ लोग झूठ बोलने में अपनी चतुराई समझते हैं और सत्य को छिपाकर धोखा देने या झूठ बोलकर अपने को बचा लेने में ही अपना परम गौरव मानते हैं। झूठ बोलना और भी कई रूपों में दिखाई पड़ता है। जैसे चुप रहना, किसी बात को बढ़ाकर कहना, किसी बात को छिपाना, भेद बदलना, झूठ-मूठ दूसरों के साथ हाँ में हाँ मिलाना, प्रतिज्ञा करके उसे पूरा न करना, सत्य को न बोलना, इत्यादि। |
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गंगा मैया से साक्षात्कार कहानी का सारांश अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» In this lesson, the writer Dr Barsane Lal Chaturvedi, through an imaginary interview with river Ganga, talks about corruption, inflation and religious hypocrisy. With regard to pollution, Ganga (river) says that she does not understand why it is happening. When the atmosphere of the whole nation itself is polluted, how can I (Ganga) be saved? Today, there is a crisis of character. The character has become a thing of the past. In society, many of our problems are increasing. For example, Seva (Service) Dharma has become Mewa (Money) Dharma. The criminal mindset has taken root in society. People believe that whatever sins they commit, the Ganga will wash them off. Pollution is a disease like untouchability. People are dirtying the water of the Ganges. Inflation, bribery and beastliness and other such ills are increasing in magnitude. Nowadays, one group fights with another. Even within groups, there is infighting. The reasons given are many; however, the fighting always happens only for the sake of a chair. This chair represents many things – power, respect and wealth. Faith is being bartered these days. Even the birds and animals are laughing at the evil that men do. Man needs to understand that nature is all-pervading and all-powerful. When the decline reaches a climax, then the rays of rebirth will be seen. |
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मनुष्य का परम धर्म क्या है? उसकी रक्षा कैसे करनी चाहिए? |
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Answer» मनुष्य का परम धर्म है – ‘सत्यता के साथ कर्त्तव्य पालन करना।’ सत्य बोलने को सबसे श्रेष्ठ मानना चाहिए और कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए, चाहे उससे कितनी ही अधिक हानि क्यों न होती हो। सत्य बोलने से ही समाज में हमारा सम्मान हो सकेगा और हम आनंदपूर्वक अपना समय बिता सकेंगे क्योंकि सच्चे को सब लोग चाहते हैं और झूठे से सभी घृणा करते हैं। यदि हम सदा सत्य बोलना अपना धर्म मानेंगे तो हमें अपने कर्त्तव्य-पालन करने में कुछ भी कष्ट न होगा और बिना किसी परिश्रम और कष्ट के हम अपने मन में संतुष्ट और सुखी बने रहेंगे। अपनी आत्मा के कहने के अनुसार दृढ़ विश्वास और साहस से काम लेकर सत्य की रक्षा करनी चाहिए। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘जिधर देखो उधर कर्त्तव्य ही कर्तव्य देख पड़ते हैं।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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किनसे सभी घृणा करते हैं? |
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Answer» झूठे से हर कोई घृणा करते हैं। |
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लेखक मकर-संक्रान्ति के दिन कहाँ थे? |
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Answer» लेखक मकर-संक्रांति के दिन इलाहाबाद में थे। |
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मनुष्य का परम धर्म क्या है? उसकी रक्षा कैसे करनी चाहिए? |
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Answer» मनुष्य का परम धर्म है – ‘सत्यता के साथ कर्त्तव्य पालन करना।’ सत्य बोलने को सबसे श्रेष्ठ मानना चाहिए और कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए, चाहे उससे कितनी ही अधिक हानि क्यों न होती हो। सत्य बोलने से ही समाज में हमारा सम्मान हो सकेगा और हम आनंदपूर्वक अपना समय बिता सकेंगे क्योंकि सच्चे को सब लोग चाहते हैं और झूठे से सभी घृणा करते हैं। यदि हम सदा सत्य बोलना अपना धर्म मानेंगे तो हमें अपने कर्त्तव्य-पालन करने में कुछ भी कष्ट न होगा और बिना किसी परिश्रम और कष्ट के हम अपने मन में संतुष्ट और सुखी बने रहेंगे। अपनी आत्मा के कहने के अनुसार दृढ़ विश्वास और साहस से काम लेकर सत्य की रक्षा करनी चाहिए। |
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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘जिधर देखो उधर कर्त्तव्य ही कर्तव्य देख पड़ते हैं।’ |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘कर्त्तव्य और सत्यता’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. श्यामसुन्दर दास हैं। |
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'उषा’ कविता में ‘नीलजल’ से किसकी तुलना की गई है? |
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Answer» कविता में नील जल से नीले आकाश की तुलना की गई है। |
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कर्तव्य और सत्यता कहानी का सारांश लिखें। |
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Answer» कर्त्तव्य करना हम लोगों का परम धर्म है। कर्त्तव्य करने का आरंभ घर से ही शुरू होता है। कर्त्तव्य करना न्याय पर निर्भर है। इससे हमारा सन्तोष और आदर बढ़ता है। घर के बाहर, समाज में भी मित्रों, पड़ोसियों, नागरिकों के परस्पर कर्तव्यों को देखा जा सकता है। इस प्रकार संसार में मनुष्य का जीवन कर्त्तव्यों से भरा पड़ा है। मनुष्य समाज में रहता है। अतः आस-पास के लोगों के प्रति, समाज के प्रति और देश के प्रति हर एक के कई कर्त्तव्य होते हैं। कर्तव्यों के पालन से चरित्र की शोभा बढ़ती है। मन की शक्ति हमें बुरे कर्मों से रोकती है और अच्छे कर्मों की ओर मोड़ती है। बुरे कर्मों से मन दुखी होता है और पछतावा होता है। अतः इन चीजों से सदा बचते रहना चाहिए। कुछ लोग ठग विद्या को अपनाकर झूठ का सहारा लेकर, चाटुकारिता को अपनाकर धन कमाते हैं। जीवन में आगे बढ़ते हैं और समाज में सम्मान पाते हैं। बुराई से भरे इस मार्ग को नहीं अपनाना चाहिए। सन्मार्ग पर चलने वालों को समाधान होता है, उन्हें तृप्ति मिलती है। धर्म के मामले में चित्त की चंचलता, उद्देश्य की अस्थिरता और मन की निर्बलता बाधा डालती है। स्वार्थी प्रवृत्ति भी अड़चन पैदा करती है। आलस्य और भले-बुरे कर्मो का ज्ञान, यह भी बाधक है। डूबते जहाज का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि पुरुषों ने अपने प्राणों की चिंता किए बिना स्त्रियों को बचाने का कर्तव्य-पालन किया। कर्त्तव्य और सत्यता का चोली-दामन का रिश्ता है। संसार में कोई काम झूठ बोलने से नहीं चल सकता। कुछ लोग अप्रिय सत्य का सहारा लेकर झूठ बोलते हैं। लेखक की दृष्टि में यह पाप है। ऐसे लोगों की पोल एक दिन खुल ही जाती है। संसार में कई लोग ऐसे हैं, जो झूठ बोलने को चतुराई समझते हैं। कई प्रकार के झूठ बोलनेवाले लोग संसार को नष्ट कर देते हैं। मनुष्य का परम धर्म है सत्य बोलना। सत्य बोलने से ही समाज में हमारा सम्मान बढ़ता है। लेखक अंत में ‘सत्यम् वद, धर्मम चर’ की उक्ति के माध्यम से कहते हैं कि सत्य बोलने से ही धर्म की रक्षा होती है। इस प्रकार कर्त्तव्य और सत्यता से सुख और संतोष की प्राप्ति होती है। |
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‘उषा’ कविता की प्रमुख विशेषताएँ हैं –(क) भोर के नभ का वर्णन(ख) अलंकार योजना(ग) नवीन बिम्ब-योजना(घ) भाषा-शैली |
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Answer» (ग) नवीन बिम्ब-योजना |
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कर्तव्य पालन और सत्यता में कैसा संबंध है? |
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Answer» कर्तव्य पालन और सत्यता में बडा घनिष्ठ संबंध है। |
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कर्तव्य और सत्यता कहानी का सारांश अँग्रेजी में लिखें। |
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Answer» कर्तव्य और सत्यता Summary in English As human beings, our foremost duty is to do our work. Work begins at home. Doing our duty is a question of justice. Doing our duty increases our satisfaction and self-respect. When we step out of our home and into society, we are obliged to work mutually, in association with friends, neighbours and townsfolk. In this manner, a person’s whole life is filled with various responsibilities and duties. Man is a social animal. Therefore, there are many duties that a man has towards his fellow beings, towards society and towards the nation. By doing our duty, we improve upon our character. The power of the mind can prevent us from doing an evil deed and instead, turn us towards good deeds. Evil deeds make our mind unhappy and we feel regret. Therefore, we must always stay away from bad deeds. Some people use the art of trickery and deceit, some make use of lies and falsehood, and some turn to flattery and false praise to get ahead in life and to earn money. Such people also get ahead in life, make a name for themselves and earn respect in society. However, one must not walk down this path. Those who walk on the righteous path have their doubts and objections removed, they are reconciled to the truth and they find satisfaction and gratification in life. The volatility of the intellect, the instability of our goals and objectives, and the weaknesses of our mind are all obstacles in the path of righteousness. A selfish nature also creates hindrances. Laziness and ignorance of right and wrong are also impediments. The example of a sinking ship has been given often to show that men have taken up the obligation of saving women’s lives even at the cost of their own. Duty and truth have a very close relationship. In life, no work can be done by telling lies. Some people swear upon the truth and tell lies. According to the author, this is a great sin. Such people are exposed sooner or later. In the world, there are many people who think that telling lies is nothing but smartness. Many different types of liars have brought ruin to the world. Speaking the truth is the foremost duty and responsibility of every person. Only by speaking the truth does our respect in society increase. In conclusion, the writer tells us of a proverb – ‘Satyam vada, dharma chakra’ – which means that only by telling the truth can righteousness be preserved in the world. In this manner, doing our duty and telling the truth give us happiness and satisfaction in life. |
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लेखक ने किनसे साक्षात्कार लिया है? |
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Answer» लेखक ने गंगा मैया से साक्षात्कार (इंटरव्यू) लिया है। |
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‘गौर झिलमिल देह’ द्वारा किस दृश्य का चित्रण हुआ है? |
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Answer» ‘गौर झिलमिल देह’ द्वारा सूर्योदय से पूर्व आकाश में छा रहे प्रकाश के दृश्य का चित्रण हुआ है। |
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‘लाल खड़िया चाक से मली गई स्लेट’ इस पंक्ति में ‘लाल खड़िया’ और ‘स्लेट’ किनके लिए प्रयुक्त हुए हैं? |
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Answer» लाल खड़िया उषा की लाली के लिए और स्लेट आकाश के लिए प्रयुक्त हुआ है। |
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'उषा’ कविता के रचयिता कौन हैं? |
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Answer» ‘उषा’ कविता के रचयिता कवि शमशेर बहादुर सिंह हैं। |
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कवि ने ‘नील जल में ……………गौर झिलमिल देह’ में वर्णन किया है –(क) हिलते हुए सरसों के फूलों का(ख) नीले जल में नहाती गोरी स्त्री का(ग) नीले आकाश में छाए पीले प्रकाश का(घ) प्रात: के धुंधले प्रकाश में दूर जलती आग का |
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Answer» (ग) नीले आकाश में छाए पीले प्रकाश का |
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