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ससंदर्भ स्पष्टीकरण कीजिए :‘पतन की जब पराकाष्ठा हो जाती है तभी पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं।’

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गंगा मैया से साक्षात्कार’ नामक पाठ से लिया गया है जिसके लेखक डॉ. बरसाने लाल चतुर्वेदी हैं।
संदर्भ : लेखक के अंतिम प्रश्न के उत्तर में गंगा मैया कहती हैं कि प्रकृति सर्वशक्तिमान है। ऐसा पहले भी हुआ है, पतन की जब पराकाष्ठा हो जाती है तभी पुनः उत्थान की किरणें फूटती हैं।
स्पष्टीकरण : लेखक जब अंतिम प्रश्न करता है कि माँ, भविष्य में क्या संभावनाएँ हैं? तब गंगा मैया कहती है कि यह प्रकृति सर्वशक्तिमान है। पतन जब अधिक होना शुरू हो जाता है, तभी उत्थान का मार्ग खुलता है।



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