This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता हैं ? |
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Answer» शहनाई की दुनिया में डुमराँव को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि शहनाई के प्रसिद्ध वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म इसी डुमरांव गाँव में हुआ था। इसके अलावा शहनाई में उपयोगी की जानेवाली रीड, नटकट इसी गांव और सोन नदी के आसपास मिलती है। इस तरह शहनाई और डुमराँव एकदूसरे के पूरक हैं। |
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इतिहास में शहनाई का उल्लेख किस तरह मिलता है? |
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Answer» वैदिक इतिहास में शहनाई का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। संगीत शास्त्रों में इसे सुषिर वाद्य के रूप में गिना जाता है। अरब देश में नरकट या रीड वाले वाद्य यंत्रों को नये कहा जाता है। शहनाई को सुषिर वाद्यों में शाह की उपाधि प्रदान की गई है। सोलहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में तानसेन द्वारा रचित बंदिश में शहनाई आदि का उल्लेख मिलता है। |
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रीड क्या है? शहनाई के लिए इसकी क्या उपयोगिता है? |
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Answer» रीड, एक प्रकार की घास ‘नरकट’ से बनाई जाती है। यह बिहार के डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाती है। रीड अंदर से पोली खोखली होती है। इसी के सहारे शहनाई में हवा फेंकी जाती है। इसी की मदद से शहनाई बजती है। यदि रीड न हो तो शहनाई बजना कठिन हो जाएगा। |
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बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक क्यों कहा गया है? |
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Answer» बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक इसलिए कहा गया है क्योंकि शहनाई की ध्वनि मंगलदायी मानी जाती है। इसका वादन मांगलिक अवसरों पर किया जाता है। बिस्मिल्ला खाँ अस्सी बरस से भी अधिक समय तक शहनाई बजाते रहे। उनकी गणना भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक के रूप में की जाती है। उन्होंने शहनाई को भारत ही नहीं विश्व में लोकप्रिय बनाया। |
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Fill in the blanks1. Poverty is a ……………….. concept.2. The rate of …………… remain high due to mat nutrition.3. ……………. gave the concept of poverty line first.4. The maximum poverty is observed in ………… the state in India.5. ……….. is the heart of Indian economy. |
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Answer» 1. qualitative 2. child death 3. WHO 4. Chhattisgarh 5. Villages |
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Literacy can help to solve the problem of poverty. Give reason. |
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Answer» Literacy makes people aware of their rights and duties. Literacy can bring about a reduction in inequalities. Literacy helps in eradicating the evils of society such as landlordism, blind faith, superstitions, etc. A literate person can demand and enjoy his rights, he can fight against exploitation done to him and can also find various new employment opportunities. Thus, literacy helps in solving the problem of poverty. |
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Development programmes have not been effective for remomng poverty. Give reason. |
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Answer» Government has implemented many development programmes for removing poverty. But these programmes along cannot remove poverty. They need coordination with many other factors. For example, over and above these programmes, the inequalities of income should be reduced, public distribution system has to be made effective, literacy must be increased and superstitions and blind beliefs must decrease. When the above things do not occur, the benefits of development programmes are enjoys only by rich and literate. Because of all these reasons, development programmes have not been effective for removing poverty. |
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शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है? |
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Answer» शहनाई की दुनिया में डुमराँव को याद किए जाने के मुख्यतया दो कारण हैं • शहनाई बजाने में जिस रीड का प्रयोग किया है वह डुमराँव में ही सोन नदी के किनारे मिलती है। इस रीड के बिना शहनाई बजना मुश्किल है। • शहनाई की मंगल ध्वनि के नायक बिस्मिल्ला खाँ की जन्मस्थली डुमराँव ही है। |
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Write a short note on Deendayal Upadhyay Gram Jyoti Yojana. |
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Answer» Deendayal Upadhyay Gram Jyoti Yojana makes an effort to supply uninterrupted electricity to the rural areas 24 x 7, day and night. The scheme provides electricity to homes and farms at concessional rates. Under this scheme new sub-stations and electricity lines have been set-up to provide electricity facility 18,000 villages which do not have electricity. Then the government also provides subsidies to purchase agricultural equipment that run on electricity. This way the farms will get regular electricity and also their productivity will increase. The government also provides subsidy to obtain electricity through solar energy and to purchase solar equipment. |
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Who is helped under ‘Shri Bajpai Bankable Yojana’?(a) Urban Unemployed(b) Rural Unemployed(c) Trained Unemployed(d) Unemployed Women |
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Answer» (c) Trained Unemployed |
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What is poverty line? How is it determined? |
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Answer» Concept of poverty was first given by Director of World Health Organization (WHO). As per him, certain factors such as expenditure on food containing proper amount of required calories, clothing, accommodation, education, health, clean drinking water, electricity, sanitation facilities, transportation facilities, income, etc. determines the poverty of a person. Based on these factors the standard of living or say poverty line of the person is determined. This line is known as the poverty line. People who are unable to get these things on a regular and constant basis are said to be living below poverty line i.e., BPL. It should be noted that poverty is a ‘qualitative’ concept i.e., we cannot simply measure it like the way we can measure income, expense, etc. |
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महावीरप्रसाद विवेदी का निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है, कैसे? |
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Answer» महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का निबंध स्त्री शिक्षा का विरोध करने वालों तथा कुतर्क प्रस्तुत करने वालों पर व्यंग्य तथा उनकी सोच में बदलाव लाने का प्रयास है। दुविवेदी जी ने देखा कि समाज में स्त्री की दीन-हीन दशा का कारण शिक्षा की कमी है। यह कमी समाज का तथाकथित सुधार करने का ठेका लेने वालों की देन है। ये तथाकथित समाज सुधारक तथा उच्च शिक्षित लोग स्त्रियों को पढ़ने से रोकने की कुचाल रचे बैठे थे और स्त्री-शिक्षा में अड़ेंगे लगाते थे। ऐसे लोगों के हर कुतर्क का जवाब देते हुए विवेदी जी ने पौराणिक और रामायण से जुड़े उदाहरण ही नहीं पेश किए वरन् स्त्रीशिक्षा की अनिवार्यता और आवश्यकता पर जोर दिया। इससे स्पष्ट होता है कि यह निबंध उनकी दूरगामी और खुली सोच का परिचायक है। |
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लेखक ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों पर व्यंग्य करते हुए कहा है, इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता की बलिहारी! इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» लेखक कहता है कि हम सभी यह मानते हैं कि पुराने जमाने में यह विमान उड़ते थे। इनसे लोग दुवीप द्वीपांतरों को जाते थे, पर उनके बनाने का वर्णन करने वाले कोई ग्रंथ नहीं मिलते हैं। विमानों की यात्राओं के उदाहरण मात्र से उनका अस्तित्व स्वीकार कर लेते हैं पर पुराने ग्रंथों में प्रगल्भ पंडिताओं के नाम होने पर भी स्त्री-शिक्षा विरोधी स्त्रियों को मुर्ख, अपढ़ और गॅवार मानते हैं। लेखक उनकी इसी तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता पर बलिहारी होना चाहता है। |
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तब की शिक्षा प्रणाली और अब की शिक्षा प्रणाली में क्या अंतर है? स्पष्ट करें। |
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Answer» तब अर्थात् प्राचीन भारत और वर्तमान शिक्षा प्रणाली में पर्याप्त अंतर है। उस समय शिक्षा गुरुकुलों में दी जाती थी जहाँ शिक्षा रटने की प्रणाली प्रचलित थी। इसके साथ उनमें उच्च मानवीय मूल्यों का विकास करने पर जोर दिया था ताकि वे बेहतर इंसान और समाजोपयोगी नागरिक बन सकें। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में रटने के बजाय समझने पर जोर दिया जाता है। आज की शिक्षा पुस्तकीय बनकर रह गई है जिससे मानवीय मूल्यों का उत्थान नहीं हो पा रहा है। शिक्षा की प्रणाली रोजगारपरक न होने के कारण यह आज बेरोजगारों की फ़ौज खड़ी कर रही है। |
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परंपरा के उन्हीं पक्षों को स्वीकार किया जाना चाहिए जो स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ाते हों-तर्क सहित उत्तर दीजिए। |
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Answer» हर परंपरा अपने काल, देश और परिस्थिति के अनुसार प्रासंगिक रहती है, परंतु बदलते समय के साथ उनमें से कुछ अपनी उपयोगिता एवं प्रासंगिकता खो बैठती है। इन्हीं में से एक थी पुरुष और स्त्रियों की शिक्षा में भेदभाव करने की परंपरा। इसके कारण स्त्री-पुरुष की स्थिति में असमानता उत्पन्न होने के अलावा बढ़ती जा रही थी। अतः इसे त्यागकर ऐसी परंपरा अपनाने की आवश्यकता थी जो दोनों में समानता पैदा करे। शिक्षा वह साधन है जिसका सहारा पाकर स्त्रियाँ पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं और लगभग हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। अतः लड़का-लड़की में भेदभाव न करने उनके पालन-पोषण, शिक्षा-दीक्षा तथा अवसरों में समानता देने की स्वस्थ परंपरा अपनानी चाहिए तथा स्त्री-पुरुष में समानता बढ़े। |
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प्राचीन भारत की किन्हीं दो विदुषी स्त्रियों का नामोल्लेख करते हुए यह भी बताइए कि उस समय स्त्रियों को कौन कौन-सी कलाएँ सीखने की अनुमति थी? |
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Answer» प्राचीन भारत की दो विदुषी स्त्रियाँ शीला और विज्जा हैं जिन्हें बड़े-बड़े पुरुष कवियों से आदर मिला है। शार्गंधर पद्धति में उनकी कविता के नमूने हैं। उस काल में कुमारी लड़कियों को चित्र बनाने, नाचने, गाने, बजाने, फूल चुनने, हार गूंथने, पैर मलने जैसी अनेक कलाएँ सीखने की अनुमति थी। |
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प्राचीन काल में प्राकृत का प्रयोग साहित्यिक एवं व्यावहारिक दोनों ही रूपों में होता था, सप्रमाण सिद्ध कीजिए। |
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Answer» प्राचीन काल में प्राकृत का प्रयोग साहित्यिक एवं व्यावहारिक दोनों ही रूपों में किया जाता था। इसका प्रमाण यह है कि प्राकृत भाषा में बौद्धों एवं जैनों के हजारों ग्रंथ लिखे गए। इसके अलावा भगवान शाक्य मुनि और उनके चेलों ने प्राकृत भाषा में धर्मोपदेश दिए। बौद्धों के त्रिपिटक ग्रंथ प्राकृत में ही रचे गए। पंडितों ने गाथा सप्तशती, सेतुबंधु महाकाव्य और कुमारपालचरित जैसे ग्रंथों की रचना प्राकृत भाषा में ही की थी। |
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‘हिंदी, बाँग्ला आजकल की प्राकृत हैं’ ऐसा कहकर लेखक ने क्या सिद्ध करना चाहा है? |
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Answer» जिस प्रकार हिंदी, बाँग्ला, मराठी आदि भाषाएँ पढ़कर हम इस जमाने में सभ्य, सुशिक्षित और विद्वान हो सकते हैं तथा इन्हीं भाषाओं में नाना प्रकार के साहित्य और समाचार पत्र पढ़ते हैं उसी प्रकार उस ज़माने में शौरसेनी, मागधी, पाली भी भाषाएँ थीं, जिनमें साहित्य रचे गए और ये भाषाएँ जनसमुदाय द्वारा व्यवहार में लाई जाती थी। इस आधार पर लेखक ने। यह सिद्ध करना चाहा है कि प्राकृत बोलने को हम अपढ़ कैसे कह सकते हैं। |
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लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अपढ़ होने का प्रमाण क्यों नहीं मानता है? |
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Answer» लेखक नाटकों में स्त्रियों के प्राकृत बोलने को उनके अनपढ़ होने का प्रमाण इसलिए नहीं मानता है क्योंकि • उस समय का अधिकांश जन समुदाय प्राकृत बोलता है। • प्राकृत ही उस समय की जन प्रचलित भाषा थी। • संस्कृत का प्रयोग शिक्षित वर्ग ही करता था। • अनेक ग्रंथ प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं, अत: प्राकृत बोलने वालों को अनपढ़ कैसे कहा जा सकता है। |
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स्त्री-शिक्षा के विरोधी अपनी बात के समर्थन में क्या-क्या तर्क देते हैं? |
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Answer» स्त्री-शिक्षा के विरोधी अपनी बात के समर्थन में कई कुतर्क प्रस्तुत करते हैं; जैसे • स्त्रियों के प्राकृत बोलने से ज्ञात होता है कि इतिहास-पुराणादि में उनको पढ़ाने की नियमबद्ध प्रणाली नहीं थी। • स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होता है। शकुंतला प्रकरण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। • शकुंतला ने जिस भाषा में श्लोक रचा था, वह अपढ़ों की भाषा थी। |
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‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्को का खंडन’ पाठ का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» ‘स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्को का खंडन’ पाठ में स्त्रियों के लिए शिक्षा की उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज की उन्नति के लिए अत्यावश्यक बताया गया है। लेखक ने समाज में स्त्री शिक्षा विरोधियों के कुतर्को का जवाब देते हुए अपने तर्कों के माध्यम से लोहा लेने का प्रयास किया है। वे उन्हीं परंपराओं को अपनाने का आग्रह करते हैं। जो स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी हों। वे लोगों से स्वविवेक से फैसला लेने तथा शिक्षा के प्रति सड़ी-गली रूढ़ियों को त्यागने का आग्रह करते हैं। हर काल में स्त्री शिक्षा को प्रासंगिक एवं उपयोगी बताते हुए अनेकानेक उद्धरणों का उल्लेख किया है। |
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शिक्षा की व्यापकता के संदर्भ में लेखक का दृष्टिकोण स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» शिक्षा की व्यापकता के संदर्भ में लेखक का दृष्टिकोण यह है कि लेखक शिक्षा को अत्यंत व्यापक मानता है जिसमें सीखने योग्य अनेक विषयों का समावेश हो सकता है। पढ़ना-लिखना भी शिक्षा के अंतर्गत ही है। लेखक देश-काल और परिस्थिति के अनुरूप शिक्षा में बदलाव का पक्षधर है। वह चाहता है कि शिक्षा प्रणाली में भी सुधार करते रहना चाहिए तथा क्या पढाना है, कितना पढ़ाना है, कहाँ पढ़ाना है आदि विषयों पर बहस करके इसकी गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए तथा इसे समान रूप से सभी के लिए उपयोगी बनाए रखने पर विचार करना चाहिए। |
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लेखक ने स्त्री-शिक्षा के समर्थन में किस पौराणिक ग्रंथ का उल्लेख किया है? उसका कथ्य संक्षेप में स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» लेखक ने स्त्री-शिक्षा के समर्थन में तर्क प्रस्तुत करते हुए श्रीमद्भागवत नामक पौराणिक ग्रंथ दशमस्कंध के उत्तरार्ध का तिरंपनवाँ अध्याय का उल्लेख किया है, जिसमें रुक्मिणीहरण की कथा लिखी है। इसका कथ्य यह है कि रुक्मिणी ने एकांत में एक लंबा-चौड़ा खत लिखकर ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण को भिजवाया था। उस ग्रंथ में रुक्मिणी की विद्वता उनके पढ़े-लिखे होने का उल्लेख मिलता है। |
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स्त्री-शिक्षा विरोधी स्त्रियों के लिए पढ़ना कालकूट क्यों समझते थे? |
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Answer» स्त्री-शिक्षा विरोधी कभी नहीं चाहते थे कि स्त्रियाँ पढ़-लिखकर आगे बढ़े। उन्हें यह भय सताता रहता था कि इससे वे (पुरुष) स्त्रियों को शोषण नहीं कर पाएँगे। उनके सत्य-असत्य को चुनौती मिलनी शुरू हो जाएगी। वे अपने अभिमान पर इस तरह की चोट सहन नहीं कर सकते थे। अत्रि ऋषि की पत्नी द्वारा पत्नी-धर्म पर घंटों व्याख्यान देना, गार्गी दुद्वारा ब्रह्मवादियों को हराना, मंडन मिश्र की सहधर्मिणी द्वारा शंकराचार्य के छक्के छुड़ाने को आश्चर्यजनक और पाप समझते थे, इसलिए उनकी दृष्टि में स्त्रियों को पढ़ाना कालकूट जैसा था। |
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फ्रेंच ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्थापना की गई थी(क) 1600 ई० में(ख) 1611 ई० में(ग) 1615 ई० में(घ) 1664 ई० में |
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Answer» सही विकल्प है (घ) 1664 ई० में |
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महावीर प्रसाद विवेदी ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों को किस संदर्भ में दशमस्कंध का तिरपनवाँ अध्याय पढ़ने का आग्रह किया है? |
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Answer» महावीर प्रसाद द्विवेदी ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों को इस संदर्भ में दशमस्कंध का तिरपनवाँ अध्याय पढ़ने का आग्रह किया है। जिससे वे यह जान सकें कि पुराने जमाने में सभी स्त्रियाँ अपढ़ नहीं होती थीं और उस समय भी उन्हें पढ़ने की इजाजत थी। वे क्षण भर के लिए भी अपने मन में यह बात न ला सकें कि उस जमाने में स्त्रियों को पढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं समझी जाती थी। |
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Which government has implemented “Maa Annapurna Yojana”? |
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Answer» Gujarat Government |
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Name the project/mission which is for the welfare of poor family women. |
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Answer» Mission Mangalam |
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द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोधी कुतर्को का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है; जैसे- ‘यह सब पापी पढ़ने का अपराध है। न वे पढ़तीं, न वे पूजनीय पुरुषों का मुकाबला करतीं।’ आप ऐसे अन्य अंशों को निबंध में से छाँटकर समझिए और लिखिए। |
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Answer» द्विवेदी जी ने स्त्री-शिक्षा विरोधियों के कुतर्को का खंडन करने के लिए व्यंग्य का सहारा लिया है। उनमें से कुछ व्यंग्य निम्नलिखित हैं • अच्छा तो उत्तररामचरित में ऋषियों की वेदांतपत्नियाँ कौन-सी भाषा बोलती थीं? उनकी संस्कृत क्या कोई संस्कृत थी • जिन पंडितों ने गाथा शप्तसती, सेतुबंधु महाकाव्य और कुमारपाल चरित आदि ग्रंथ प्राकृत में बनाए हैं, वे अपढ़ और गॅवार थे, तो हिंदी के प्रसिद्ध अखबार से संपादक को भी अपढ़ और गॅवार कहा जा सकता है। • पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं के नामोल्लेख देखकर भी कुछ लोग भारत की तत्कालीन स्त्रियों को मूर्ख, अपढ़ और आँवार बताते हैं। इस तर्कशास्त्रज्ञता और न्यायशीलता की बलिहारी। • स्त्रियों के लिए पढ़ना काल कूट और पुरुषों के लिए पीयूष का घूट। |
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डलहौजी ने हड़पनीति के अंतर्गत कौन-कौन से राज्य हड़प किए ? |
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Answer» डलहौजी ने निम्नलिखित राज्यों को हड़पा था :
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फ्रेंच ईस्ट इण्डिया कंपनी का भारत में व्यापार के लिए आगमन किस वर्ष हुआ ?(A) सन् 1608(B) सन् 1687(C) सन् 1668(D) सन् 1746 |
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Answer» (C) सन् 1668 |
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प्लासी के युद्ध का विस्तार से वर्णन कीजिए । |
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Answer» प्लासी का युद्ध (23 जून, 1757):
परिणाम:
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किस युद्ध से भारत में ईस्ट इण्डिया कंपनी की सत्ता की नींव पड़ी ?(A) प्लासी(B) बक्सर(C) कर्णाटक(D) प्रथम मराठा युद्ध |
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Answer» सही विकल्प है (A) प्लासी |
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उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:1. ई.स. …………………………. में तुर्क मुस्लिमों ने कॉन्स्टेन्टिनोपल जीता ।2. ई.स. …………………….. में भारत आने के जलमार्ग की खोज हुई ।3. ई.स. 1600 में ………………………….. रानी ने ईस्ट इण्डिया कंपनी को भारत के साथ व्यापार की अनुमती प्रदान की ।4. ई.स. 1668 में ……………………….. व्यापार करने के लिए भारत आयी ।5. अंग्रेजों ने ई.स. ………………………….. में अपनी प्रथम कोठी …………………………… में स्थापित की । |
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Answer» 1. (1453) 2. (1498) 3. (एलिजाबेथ) 4. (फ्रेन्च ईस्ट इण्डिया कंपनी) 5. (1613, सूरत) |
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किस गवर्नर जनरल ने तटस्थता की नीति अपनाई ?(A) कार्नवालिस(B) सर जोन शोर(C) हेस्टिंग्स(D) डलहौजी |
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Answer» (B) सर जोन शोर |
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सन् 1764 में कौन-सा युद्ध हुआ था ?(A) प्लासी(B) कर्णाटक(C) मराठा(D) बक्सर |
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Answer» सही विकल्प है (D) बक्सर |
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भारत के समुद्री मार्ग की खोज का सर्वप्रथम प्रोत्साहन किसने दिया ? |
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Answer» पूर्तगाल के राजा प्रिन्स हेनरी की प्रेरणा, प्रोत्साहन और आर्थिक सहायता से साहसिकों ने नए जलमार्ग की खोज के प्रयास शुरू किया । |
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इस्तंबुल को किसने और कब जीता था ? |
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Answer» ई.स. 1453 में तुर्क मुस्लिमों ने इस्तंबुल को जीता था । |
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प्लासी का युद्ध कब हुआ ?(A) सन् 1757(B) सन् 1773(C) सन् 1764(D) सन् 1864 |
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Answer» (A) सन् 1757 |
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कर्णाटक युद्ध किस-किस के बीच हुए ?(A) अंग्रेज – मराठा(B) मराठा – फ्रांसीसी(C) अंग्रेज – फ्रांसीसी(D) टीपू सुल्तान – अंग्रेज |
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Answer» (C) अंग्रेज – फ्रांसीसी |
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अमेरिका महाद्वीप का नाम किसके नाम पर पड़ा ? |
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Answer» अमेरिका महाद्वीप का नाम अमेरिगो वेस्चुपी के नाम पर पड़ा । |
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भारत के समुद्री मार्ग की खोज कब हुई ?(A) 1492(B) 1453(C) 1498(D) 1485 |
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Answer» सही विकल्प है (C) 1498 |
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अंग्रेज सरकार ने नियामक कानून कब पास किया ?(A) 1764 में(B) 1773 में(C) 1799 में(D) 1848 में |
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Answer» (B) 1773 में |
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युरोप के देशों में भारत की किन-किन वस्तुओं की माँग अधिक थी ? |
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Answer» भारत के गोलमिर्च, दालचीनी, लॉग, धनिया, गरम मसाले, मलमल, रेशमी कपड़े और नील आदि की युरोप के देशों में अधिक माँग थी । |
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नियामक कानून पारित करके क्या व्यवस्था की गयी ? |
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Answer» इस कानून के अनुसार बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल बनाया गया, कंपनी के राजनैतिक तथा व्यापारिक हितों तथा प्रवृत्तियों को सीधा उसके अंकुश में रखा गया । |
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रोबर्ट क्लाईव ने बंगाल के नवाब को पराजित करने के लिए किसका सहारा लिया ? |
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Answer» रोबर्ट क्लाईव ने दगाबाजी का सहारा लेकर नवाब के सेनापति मीरजाफर, सेठ अमीनचंद को षडयंत्र में शामिल किया । |
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चौथा मैसूर युद्ध कब हुआ ?(A) सन् 1864 में(B) सन् 1764 में(C) सन् 1799 में(D) सन् 1773 में |
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Answer» (C) सन् 1799 में |
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किस मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान की मृत्यु हुई ?(A) प्रथम(B) द्वितीय(C) तृतीय(D) चौथे |
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Answer» सही विकल्प है (D) चौथे |
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ईस्ट इण्डिया कंपनी की भारत में प्रथम कोठी कौन-से नगर में बनी ?(A) सूरत(B) कोलकाता(C) मुंबई(D) कालीकट |
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Answer» सही विकल्प है (A) सूरत |
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भारत में प्रथम गवर्नर जनरल कौन था ?(A) वारेन हेस्टिंग्स(B) वेलेस्ली(C) डलहौजी(D) केनिंग |
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Answer» (A) वारेन हेस्टिंग्स |
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