This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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सरकारी घाटे और सरकारी ऋण ग्रहण में क्या संबंध है? व्याख्या कीजिए। |
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Answer» सरकारी घाटा एक वर्ष में व्यय के लिए सरकार द्वारा लिए गए आवश्यक ऋणों की मात्रा को उजागर करती है। सरकार द्वारा अधिक ऋण लेने का अर्थ है भावी पीढ़ी के उपकरण और ब्याज का पुनर्भुगतान करने का भार अधिक होता है। वर्ष प्रति वर्ष जब ये ऋण भार अधिक होते जाते हैं तो भावी पीढियों के लिए उपलब्ध साधन कम होते जाते हैं। यह निश्चित रूप से वृद्धि की प्रक्रिया में एक प्रतिबंधक के रूप में काम करेगी। विशेषतः जब सरकार गैर-उत्पादकीय उद्देश्य के लिए ऋण लेती है। |
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बजट घाटे से अभिप्राय उस स्थिति से है, जिसमें सरकार का बजट व्यय सरकार की बजट प्राप्तियों से(क) कम होता है।(ख) अधिक होता है।(ग) बराबर होता है।(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) अधिक होता है। |
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सरकारी बजट में प्राथमिक घाटा की अवधारणा समझाइए। इससे क्या पता चलता है? |
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Answer» प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटा तथा भुगतान किए जाने वाले ब्याज का अंतर है। सूत्र के रूप में, राजकोषीय घाटा केवल सरकार की उधार संबंधी आवश्यकताओं को दर्शाता है। जिसमें संचित ऋणों पर ब्याज का भुगतान शामिल होता है, जबकि प्राथमिक घाटा सरकार की उधार संबंधी आवश्यकताओं को दर्शाता है जिसमें ब्याज का भुगतान शामिल नहीं होता है। इसका अर्थ यह है कि प्राथमिक घाटे के ऋण वित्तीय ऋणों के समान हैं, परंतु वे हमारी चालू वर्ष के व्यय तथा चालू वर्ष की प्राप्तियों से जो ऋण आवश्यकताएँ उत्पन्न हुई हैं, उन्हें बताता है। |
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सरकारी बजट में राजस्व घाटा’ समझाइए। इससे क्या पता चलता है? |
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Answer» राजस्व घाटे का संबंध सरकार के राजस्व व्यय तथा राजस्व प्राप्तियों से है। इसका घाटी राजस्व व्यय एवं राजस्व प्राप्तियों का अंतर है। सूत्र के रूप में, राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ राजस्व व्यय से हमें यह पता लगता है कि सरकार की चालू प्राप्तियाँ सरकार की चालू व्यय से कितनी कम हैं या अधिक। इसे एक परिवार के उदाहरण से समझा जा सकता है। एक परिवार को प्रतिमाह आय 10000 है और व्यय ₹ 12,000 है तो प्रत्येक माह ₹ 2000 की पूँजीगत प्राप्तियाँ चाहिए, चाहे ऋण के रूप में चाहे किसी परिसंपत्ति को बेचकर। यही बात सरकार पर लागू होती हैं, परंतु यदि सरकार इसी तरह ऋण लेकर या परिसंपत्तियाँ बेचकर राजस्व घाटे को पूरा करती रही, तो सरकार की वित्तीय हालत कमजोर होती जायेगी। अतः राजस्व घाटा सरकार के लिए चिंताजनक विषय है। |
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राजकोषीय घाटे का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है? |
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Answer» राजकोषीय घाटे का अर्थ है सरकार द्वारा लिए जाने वाले उधार/ऋण में वृद्धि। इस बढ़ते हुए ऋण के निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं। 1. स्फीतिकारी जाल-सरकार द्वारा लिये जाने वाले ऋण के कारण मुद्रा पूर्ति में वृद्धि होती है। मुद्रा पूर्ति में वृद्धि के कारण कीमत स्तर में वृद्धि होती है। कीमत स्तर में वृद्धि उच्च लाभ की आशा में निवेश को प्रेरित करती है, परंतु जब कीमत स्तर भयप्रद सीमाओं तक बढ़ने लगता है तो निवेश में कमी आती है, जिससे एक स्फीतिकारी जाल बन जाता है। ऐसी स्थिति में सकल घरेलू उत्पाद के एक प्रतिशत के रूप में एक लंबी समयावधि के लिए राजकोषीय घाटा उच्च बना रहता है तथा यहाँ दीर्घावधि आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है। (i) उच्च राजकोषीय घाटे के कारण सकल घरेलू उत्पाद की संवृद्धि दर कम होती है और |
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भुगतान संतुलन घाटे का अर्थ समझाइए। |
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Answer» वास्तव में भुगतान शेष खाता दोहरी लेखांकन प्रणाली पर आधारित है। अत: यह सदा संतुलन में होता है। अतः जब हम कहते हैं कि भुगतान शेष चार्ट में है, तो इसका अर्थ यह होता है कि स्वायत्त मदों से प्राप्तियाँ स्वायत्त भुगतान से कम है। अतः इस घाटे की पूर्ति समायोजक सौदों द्वारा की जाती है। यदि समायोजिक सौदों पर पूँजी खाते के घटक के रूप में विचार किया जाए तो चालू खाते में कोई भी घाटा पूँजी खाते के समान आकार के आधिक्य द्वारा पूरा कर लिया जाता है तथा चालू खाते में कोई भी आधिक्य पूँजी खाते के सम आकार के घाटे द्वारा अवश्य पूरा कर लिया जाता है। |
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राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटी में संबंध समझाइए। |
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Answer» जब राजस्व व्यय, राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है तो इसे राजस्व घाटा कहा जाता है। सूत्र के रूप में, राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ दूसरी ओर बजट के अंतर्गत जब कुल व्यय कुल प्राप्तियों से अधिक होता है तो इस अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। राजकोषिय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ) |
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राजकोषीय घाटे से सरकार को ऋण ग्रहण की आवश्यकता होती है। समझाइए। |
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Answer» यह कहना बिल्कुल उचित है कि राजकोषीय घाटे से सरकार को ऋण की आवश्यकता होती है। राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और ऋण ग्रहण को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है। सकल राजकोषिय घाटा = कुल व्यये – (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ) हम जानते हैं दोहरे लेखांकन प्रणाली के अनुसार सरकार का कुल व्यय और कुल प्राप्तियाँ बराबर होनी ही चाहिए, क्योंकि सरकार ने जो व्यय किया है उसका भुगतान तो इसे करना ही होगा चाहे वह ऋण लेकर करे चाहे नये नोट छापकर जिसे घाटे की वित्त व्यवस्था कहा जाता है। अतः राजकोषीय घाटा सरकार की कुल ऋण ग्रहण की आवश्यकता के बराबर होता है। राजकोषीय घाटा = ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ |
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सार्वजनिक वस्तु सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए। क्यों? व्याख्या कीजिए। |
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Answer» सार्वजनिक वस्तुएँ ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है जिनकी कीमत का निर्धारण बाजार कीमत तंत्र द्वारा नहीं हो सकता। इनकी संतुलन कीमत व संतुलन मात्रा वैयक्तिक उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच संव्यवहार से नहीं हो सकती। उदाहरण-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा, सड़क, लोक प्रशासन आदि। सार्वजनिक वस्तुएँ सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए क्योंकि |
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सरकारी बजट में राजकोषीय घाटा की अवधारणा समझाइए इससे क्या पता चलता है? |
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Answer» राजकोषीय घाटे का संबंध सरकार के राजस्व तथा पूँजीगत दोनों प्रकार के व्ययों तथा राजस्व और उधार छोड़कर बाकी पूँजीगत प्राप्तियों से है। अन्य शब्दों में, राजकोषीय घाटा कुल व्यय (राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय) और उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियों का अंतर है। अथवा राजस्व घाटा + पूँजीगत व्यय – उधार छोड़कर पूँजीगत प्राप्तियाँ अथवा उधार/ऋण |
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सरकार ने गरीबों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सेवाएँ मुफ्त प्रदान करने पर अधिक व्यय करना शुरू कर दिया। यह किस आर्थिक मूल्य को दर्शाता है? समझाइए। |
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Answer» यह आय संपत्ति के पुनर्वितरण तथा समानता के मूल्य को दर्शाता है। जब सरकार गरीबों को शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी सेवाएँ देती है, तो इससे उनके जीवन स्तर में वृद्धि होती है। उन्हें जीवन में विकास के समान अवसर उपलब्ध हो पाते हैं और भविष्य में उनकी आय बढ़ती है। इससे आय और संपत्ति का पुनर्वितरण होता है और असमानताओं में कमी आती है। |
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उच्च आय वर्ग पर कर की दरें बढ़ा दी गई हैं। यह किस आर्थिक मूल्य को दर्शाता है? समझाइए। |
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Answer» यह समानता के मूल्य को दर्शाता है। उच्च वर्ग पर कर की दरें बढ़ाने से उनकी कर देयता बढ़ जायेगी और सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी। इस राजस्व को सरकार समाज के पिछड़े वर्ग के कल्याण अर्थ खर्च करेगी, जिससे उनका विकास होगा तथा जीवन स्तर में वृद्धि होगी। |
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निम्नलिखित में से सरकारी बजट के संबंध में कौन-सा कथन सही है?(क) यह एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित आय तथा व्यय का ब्यौरा(ख) यह एक वित्तीय वर्ष में सरकार की वास्तविक आय तथा व्यय(ग) इसमें बीते वर्ष की उपलब्धियों तथा कीमतों के संबंध में कोई चर्चा नहीं होती है।(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं |
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Answer» (क) यह एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित आय तथा व्यय का ब्यौरा |
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सरकार कुछ वस्तुओं का उत्पादन बढ़ाना चाहती है। सरकारी बजट नीति का प्रयोग करके सरकार बाजार के माध्यम से इनका उत्पादन कैसे बढ़ा सकती है? |
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Answer» सरकार इन वस्तुओं पर आर्थिक सहायता दे सकती है। आर्थिक सहायता मिलने से इन वस्तुओं की लागत कम हो जायेगी या लाभ बढ़ जायेगो फलस्वरूप इसकी पूर्ति में वृद्धि होगी? पूर्ति में वृद्धि होने से इनकी कीमतों में कमी होगी। कीमतें कम होने से इनकी माँग विस्तृत हो जायेगी और इन वस्तुओं का उत्पादन बढ़ जायेगा। |
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स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद का उपभोग कम करने के लिए बाजार के माध्यम से कौन-सा एक कदम उठाया जा सकता है? |
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Answer» सरकार इन उत्पादों पर कर लगा सकती है। यदि इन पर पहले से ही कर है तो उनकी दरें बढ़ाई जा सकती हैं। कर लगने से इन वस्तुओं की पूर्ति में कमी हो जायेगी और कीमतें बढ़ने से इनकी माँग संकुचित हो जायेंगी। और इन वस्तुओं का उपभोग कम हो जायेगा। |
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निम्नलिखित आँकड़ों से राजस्व घाटा ज्ञात करें- |
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Answer» राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ (जब राजस्व व्यय > राजस्व प्राप्तियाँ) |
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कागजी कर क्या है? इसके उदाहरण दीजिए। |
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Answer» कुछ कर ऐसे हैं जिनका महत्व केवल कागजों पर ही है। यह कर अपनी राजस्व आय के रूप में कुछ या बिल्कुल भी महत्वपूर्ण नहीं हैं। इन्हें कागजी कर कहा जाता है। |
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सरकारी बजट के बारे में निम्नलिखित आँकड़ों से(a) राजस्व घाटा,(b) राजकोषीय घाटा और(c) प्राथमिक घाटा ज्ञात कीजिए |
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Answer» (a) राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ = 100 अरब – 70 अरब = 30 अरब (b) राजकोषीय घाटा = राजस्व व्यय + योजनागत पूँजीगत व्यय + गैर-योजनागत पूँजीगत व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ – उधार छोड़कर पूँजीगत प्राप्तियाँ (c) प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान = 90 अरब – 30 अरब = 60 अरब |
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सरकार सार्वजनिक वस्तुओं के उत्पादन पर अपना व्यय बढ़ा देती है। यह किस आर्थिक मूल्य को दर्शाता है? समझाइए। |
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Answer» यह संसाधनों के कुशल आबंटन तथा समाज कल्याण के मूल्य को दर्शाती है। जब सरकार सार्वजनिक वस्तुओं के उत्पादन पर व्यय बढ़ा देती है तो सामाजिक कल्याण के स्तर में वृद्धि होती है तथा संसाधनों का कुशल आबंटन होता है। उदाहरण के लिए यदि सभी अपनी-अपनी कार या वाहन से कार्यालय जाएं तो ईंधन की खपत अधिक होगी। सरकार बेहतर बस सुविध द्वारा या मेट्रो निर्माण द्वारा लोगों को सार्वजनिक परिवहन प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर सकती है। इससे संसाधनों के आबंटन की कुशलता में वृद्धि होगी। |
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कारण देते हुए बताइए कि सरकारी बजट में निम्नलिखित को राजस्व व्यय माना जाएगा या पूँजीगत व्यय(i) छात्रवृत्ति पर व्यय ।(ii) पुल निर्माण पर व्यय |
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Answer» (i) यह राजस्व व्यय है, क्योंकि इसकी पुनरावृत्ति प्रकृति है तथा इससे सरकार की पूतिभूतियाँ या देयताएँ प्रभावित नहीं होती। (ii) यह पूँजीगत व्यय है, क्योंकि इससे सरकारी प्रतिभूतियों में वृद्धि होती है। |
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निम्नलिखित को कारण देते हुए पूँजीगत व्यय एवं राजस्व व्यय में वर्गीकृत करो।(i) ऋण की वापसी(ii) आर्थिक सहायता(iii) ब्याज का भुगतान(iv) सड़कों का निर्माण |
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Answer» (i) ऋण की वापसी-यह एक पूँजीगत व्यय है, क्योंकि इससे सरकार की देयता कम हो रही है। |
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ऋण का भुगतान एक पूँजीगत व्यय क्यों है? |
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Answer» ऋण का भुगतान पूँजीगत व्यय है क्योंकि (i) इससे सरकारी देयताओं में कमी होती है।। |
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निम्नलिखित को कारण देते हुए राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में वर्गीकृत करो।(i) सरकारी ऋणों पर दिया गया ब्याज(ii) ग्रामीण क्षेत्रों में हस्पताल बनाने के लिए खरीदी गई जमीन पर व्यय(iii) निर्धन परिवारों को खाद्य पदार्थों पर आर्थिक सहायता(iv) राज्य सरकारों को अनुदान(v) सरकार द्वारा xyz कम्पनी के शेयरों की खरीद पर व्यय(vi) सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों की पेंशन पर व्यय(vii) एक हाइवे परियोजना के अन्तर्गत सड़क निर्माण पर व्यय(viii) विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति(ix) सरकारी संस्था को दिया गया ऋण(x) सुरक्षा पर व्यय |
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Answer» (i) यह एक राजस्व व्यय है, क्योंकि इससे न तो देयता में कमी होती है और न ही परिसंपत्तियों में वृद्धि होती है। |
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राजकोषीय घाटा =(क) कुल व्यय – उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियाँ(ख) राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ(ग) पूँजीगत व्यय – पूँजीगत प्राप्तियाँ(घ) राजस्व व्यय + पूँजीगत व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ |
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Answer» (क) कुल व्यय – उधार को छोड़कर कुल प्राप्तियाँ |
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नीचे दी गई प्राप्तियों को कारण बताते हुए राजस्व प्राप्तियों एवं पूँजीगत प्राप्तियों में वर्गीकृत करो।(i) आय कर से प्राप्तियाँ(ii) बंगलादेश को दिए गए ऋण पर ब्याज की प्राप्ति(iii) एक सार्वजनिक उद्यम से लाभांश की प्राप्ति(iv) केन्द्रीय सरकार द्वारा लिया गया सार्वजनिक ऋण(v) एक दवाइयों की कंपनी को लाइसेंस जारी करने की फीस(vi) विश्व बैंक द्वारा आधारित संरचना सुधार के लिए लिया गया भारतीय सरकार का ऋण(vii) मारूती उद्योग में सरकारी शेयरों को बेचकर प्राप्त की गई राशि(viii) इंदिरा विकास पत्र बेचकर प्राप्त राशि(ix) सेल (SAIL) द्वारा केंद्रीय सरकार से लिए गए ऋण का भुगतान(x) कोर्ट द्वारा एक कंपनी पर लगाया गया जुर्माना |
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Answer» (i) यह एक राजस्व प्राप्ति है, क्योंकि इससे न तो सरकार की देयता उत्पन्न होती है न ही परिसंपत्ति कम होती है और यह पुनरावृत्ति प्रकृति वाली प्राप्ति है। |
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निम्नलिखित के दो-दो उदाहरण दीजिए(i) प्रशासनिक राजस्व प्राप्तियाँ(ii) गैर-कर राजस्व प्राप्तियाँ(iii) पूँजीगत व्यय(iv) प्रत्यक्ष कर(v) राजस्व व्यय(vi) पूँजीगत प्राप्तियाँ |
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Answer» (i) प्रशासनिक राजस्व प्राप्तियाँ – (a) लाइसेंस फीस, (b) जुर्माना |
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सरकारी बजट के संदर्भ में निम्नलिखित राजस्व प्राप्ति है या पूँजीगत प्राप्ति और क्यों?(i) कर प्राप्तियाँ ।(ii) विनिवेश |
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Answer» (i) कर प्राप्तियाँ – यह राजस्व प्राप्ति है, क्योंकि (i) यह बार-बार प्राप्त होने वाली प्राप्ति है (ii) यह सरकार की प्रतिभूतियों तथा देयताओं को प्रभावित नहीं करती। |
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निम्नलिखित में से कौन-सी गैर-राजस्व प्राप्ति नहीं है?(क) फीस(ख) उपहार कर(ग) जुर्माना(घ) अनुदान |
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Answer» सही विकल्प है (ख) उपहार कर |
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यदि राजकोषीय घाटा ₹ 2000 करोड़ है और ब्याज भुगतान ₹ 2000 करोड़ है तो प्राथमिक घाटा कितना होगा?(क) 1800(ख) 1600(ग) 2200(घ) 2400 |
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Answer» सही विकल्प है (क) 1800 |
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कर एक(क) ऐच्छिक भुगतान है।(ख) अनिवार्य भुगतान है।(ग) एक कानूनी भुगतान नहीं है।(घ) उपर्युक्त सभी |
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Answer» सही विकल्प है (ख) अनिवार्य भुगतान है। |
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नगर निगम के मुख्य पदाधिकारी को कहते हैं(क) जिलाधीश(ख) नगर-प्रमुख(ग) स्वास्थ्य अधिकारी(घ) पुलिस अधीक्षक |
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Answer» सही विकल्प है (ख) नगर-प्रमुख। |
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जिला पंचायत एक संस्था है(क) स्थायी(ख) अस्थायी(ग) स्थायी एवं अस्थायी दोनों(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (क) स्थायी। |
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स्थानीय संस्थाओं की व्यय की मदों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» स्थानीय संस्थाओं की व्यय की मदें निम्नलिखित हैं ⦁ चिकित्सा व स्वास्थ्य – इस कार्य में अस्पताल, दवा, डॉक्टर आदि का व्यय सम्मिलित होता है। |
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उत्तर प्रदेश के नगर निगमों के नगरों के नाम लिखिए। |
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Answer» (1) कानपुर, |
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स्थानीय निकायों को अनुदान दिये जाते हैं(क) राज्य सरकार द्वारा(ख) केन्द्रीय सरकार द्वारा(ग) केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा(घ) इनमें से किसी के द्वारा नहीं। |
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Answer» सही विकल्प है (क) राज्य सरकार द्वारा। |
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स्थानीय निकाय की आय का एक स्रोत लिखिए। |
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Answer» स्थानीय निकाय की आय का एक स्रोत गृह-कर। |
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भारत में केन्द्र सरकार की आय के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए। याभारत में केन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले प्रमुख करों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।याभारत में केन्द्र सरकार की आय के प्रमुख स्रोत क्या हैं? विवेचना कीजिए। |
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Answer» केन्द्र सरकार की आय के स्रोत (अ) करों से प्राप्त आय 1. संघीय उत्पादन शुल्क – संघीय उत्पादन कर केन्द्रीय सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है। यह कर देश में उत्पन्न होने वाली वस्तुओं पर लगाया जाता है। कुछ वस्तुओं को छोड़कर (जैसे-शराब-भाँग आदि) देश में उत्पन्न होने वाली प्राय: सभी वस्तुओं पर संघ सरकार द्वारा उत्पादन कर लगाया जाता है; जैसे-कपड़ा, चीनी, दियासलाई, टायर-ट्यूब, बिजली के सामान, रेडियो, मोटरगाड़ियाँ आदि। इस कर से प्राप्त आय का एक पूर्वनिश्चित भाग राज्यों में बाँट दिया जाता है। (ब) गैर-कर आय 1. ब्याज एवं लाभांश से प्राप्तियाँ – केन्द्रीय सरकार राज्य सरकारों के अन्य संस्थाओं को एक बहुत बड़ी मात्रा में ऋण देती है। अत: इसको प्रतिवर्ष इन ऋणों की ब्याज से करोड़ों रुपये की आय होती है। |
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केन्द्र सरकार द्वारा कौन-कौन से कर लगाये जाते हैं ?याकेन्द्र सरकार की कर-आय के दो प्रमुख स्रोतों के नाम बताइए। याकेन्द्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले किन्हीं दो करों के नाम लिखिए। |
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Answer» केन्द्र सरकार द्वारा लगाये जाने वाले कर हैं |
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भारत सरकार की आय में किस प्रकार के करों का अधिक महत्त्व है ? |
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Answer» भारत सरकार की आय में परोक्ष करो का अधिक महत्त्व है। |
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काले धन को बाहर निकालने के लिए सरकार ने कौन-सी योजना चलाई ? |
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Answer» केन्द्र सरकार ने काले धन को बाहर निकालने के लिए 12 जनवरी, 1981 ई० को ‘विशेष धारक बॉण्ड योजना प्रारम्भ की। |
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केन्द्र सरकार की विकास व्यय की मदें क्या हैं ? |
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Answer» ⦁ सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाएँ तथा |
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केन्द्रीय सरकार की व्यय को दो मदें लिखिए। |
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Answer» ⦁ देश की सुरक्षा पर व्यय तथा |
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निम्नलिखित में से किस कर को केन्द्रीय सरकार नहीं लगाती है ? यानिम्नलिखित में से कौन-सा कर राज्य सरकार द्वारा लगाया जाता है?(क) आय कर(ख) निगम कर(ग) सम्पत्ति कर(घ) मनोरंजन कर |
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Answer» सही विकल्प है (घ) मनोरंजन कर। |
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भारत में आय कर लगाया जाता है(क) केन्द्र सरकार द्वारा(ख) राज्य सरकार द्वारा(ग) स्थानीय सरकार द्वारा(घ) इन सभी के द्वारा |
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Answer» सही विकल्प है (क) केन्द्र सरकार द्वारा। |
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निम्नलिखित में से कौन-सा कर स्थानीय निकायों द्वारा लगाया जाता है? (क) गृह-कर(ख) बिक्री-कर(ग) भू-राजस्व(घ) आय-कर |
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Answer» सही विकल्प है (क) गृह-कर। |
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कौन-सी सरकार सेवा कर लगाती है? |
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Answer» केन्द्रीय सरकार। |
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संघीय सरकार की व्यय की सबसे बड़ी मद कौन-सी है ?(क) प्रतिरक्षा सेवा(ख) सामाजिक तथा विकासार्थ व्यय(ग) ऋण सेवा(घ) प्रशासनिक सेवा |
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Answer» सही विकल्प है (क) प्रतिरक्षा सेवा। |
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निम्नलिखित में से किस कर को केन्द्रीय सरकार लगाती है ? (क) आय कर(ख) बिक्री कर(ग) मनोरंजन कर(घ) भू-राजस्व |
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Answer» सही विकल्प है (क) आय कर। |
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भू-राजस्व किसकी आय का स्रोत है?(क) केन्द्रीय सरकार की(ख) भू स्वामी की(ग) राज्य सरकार की(घ) स्थानीय सरकार की |
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Answer» सही विकल्प है (ग) राज्य सरकार की। |
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राज्य सरकार के व्यय को कम करने के दो उपाय बताइए। |
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Answer» ⦁ प्रशासनिक व्यय में कटौती की जाए तथा |
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