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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

refers to an eroded area of the tissue lining in the stomach or duodenum.

Answer»

Peptic ulcer refers to an eroded area of the tissue lining in the stomach or duodenum.

2.

Which muscle regulates the opening of oesophagus into the stomach? (a) pyloric sphincter (b) cardiac sphincter (c) anal sphincter (d) epiglottis

Answer»

(a) pyloric sphincter

3.

Two masses of lymphoid tissues called are located at the sides of the pharynx.

Answer»

Tonsils Two masses of lymphoid tissues called are located at the sides of the pharynx.

4.

The inner wall of stomach has many folds called which unfolds to accommodate a large meal.

Answer»

Gastric rugae.

5.

The opening of the stomach into the duodenum is guarded by the ………

Answer»

Pyloric sphincter.

6.

खालसा के नियमों का वर्णन करो।

Answer»

खालसा की स्थापना 1699 ई० में गुरु गोबिन्द सिंह जी ने की । खालसा के नियम निम्नलिखित थे-

  1. प्रत्येक खालसा अपने नाम के साथ ‘सिंह’ शब्द लगाएगा । खालसा स्त्री अपने नाम के साथ ‘कौर’ शब्द लगाएगी ।
  2. खालसा में प्रवेश से पूर्व प्रत्येक व्यक्ति को ‘खण्डे के पाहुल’ का सेवन करना पड़ेगा । तभी वह स्वयं को खालसा कहलवाएगा।
  3. प्रत्येक ‘सिंह’ आवश्यक रूप से पांच ‘ककार’ धारण करेगा-केश, कड़ा, कंघा, किरपान तथा कछहरा।
  4. सभी सिक्ख प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करके उन पांच बाणियों का पाठ करेंगे जिनका उच्चारण ‘खण्डे का पाहुल’ तैयार करते समय किया गया था।
7.

Which of the following is exotic variety of fish? A) Catla B) Rohu C) Mangur D) None of these

Answer»

Correct Answer is: A) Catla 

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Indian major carps; Catla (Catla), Rohu (Labeo rohita), Mrigal (Cirrhinus mrigala) are the fastest growing fish available for freshwater aquaculture in the country.

A fish that grow relatively in short period of time using cheap feed sources is desirable for fish farmer.

8.

भंगानी के युद्ध के क्या कारण थे?

Answer»

भंगानी की लड़ाई 1688 ई० में पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द राय जी के बीच हुई । इस लड़ाई के निम्नलिखित कारण थे-

  1. पहाड़ी राजा गुरु गोबिन्द राय जी की सैनिक गतिविधियों को अपने लिए खतरा समझते थे।
  2. गुरु जी मूर्ति-पूजा के विरोधी थे । परन्तु पहाड़ी राजा मूर्ति-पूजा में विश्वास करते थे।
  3. गुरु जी ने मुगल सेना में से निकाले गए 500 पठानों को अपनी सेना में भर्ती कर लिया था। पहाड़ी राजा मुग़ल सरकार के स्वामिभक्त थे । इसलिए वे गुरु जी के विरुद्ध हो गए।
  4. मुग़ल फ़ौजदारों ने पहाड़ी राजाओं को गुरु जी के विरुद्ध उकसा दिया था।
  5. गुरु जी के साथ पहाड़ी राजा भीमचन्द की पुरानी शत्रुता थी। भीमचन्द के पुत्र की बारात गढ़वाल जा रही थी, परन्तु सिक्खों ने इन्हें पाऊंटा साहब से न गुज़रने दिया। परिणामस्वरूप पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी से युद्ध करने का निर्णय कर लिया।
9.

गुरु गोबिन्द जी ने शिक्षा ली(A) काजी पीर मुहम्मद(B) पटना में(C) भाई सतिदास(D) अमृतसर में

Answer»

सही विकल्प है (D) अमृतसर में

10.

गुरु नानक देव जी के सुल्तानपुर लोधी के समय का वर्णन कीजिए।

Answer»

1486-87 ई० में गुरु साहिब को उनके पिता मेहता कालू राम जी ने स्थान बदलने के लिए सुल्तानपुर लोधी में भेज दिया। वहाँ वह अपने बहनोई (बीबी नानकी के पति) जैराम के पास रहने लगे।

मोदीखाने में नौकरी- गुरु जी को फ़ारसी तथा गणित का ज्ञान तो था। इसलिए उन्हें जैराम की सिफ़ारिश पर सुल्तानपुर लोधी के फ़ौजदार दौलत खाँ के सरकारी मोदीखाने (अनाज का भण्डार) में भण्डारी की नौकरी मिल गई। वहाँ वह अपना काम बड़ी ईमानदारी से करते रहे। फिर भी उनके विरुद्ध शिकायत की गई। शिकायत में कहा गया कि वह अनाज को साधुसन्तों में लुटा रहे हैं। परन्तु जब मोदीखाने की जांच की गई तो हिसाब-किताब बिल्कुल ठीक निकला।

गृहस्थ जीवन तथा प्रभु सिमरण- कुछ समय पश्चात् गुरु नानक साहिब ने अपनी पत्नी को भी सुल्तानपुर में ही बुला लिया। वह वहाँ सादा तथा पवित्र गृहस्थ जीवन बिताने लगे। प्रतिदिन सुबह वह शहर के साथ बहती हुए बेई नदी में स्नान करते, परमात्मा के नाम का स्मरण करते तथा आय का कुछ भाग ज़रूरतमन्दों को सहायता के लिए देते थे।

ज्ञान-प्राप्ति- जन्म साखी के अनुसार एक दिन गुरु नानक साहिब प्रतिदिन की तरह बेई नदी पर स्नान करने गए। परन्तु वह तीन दिन तक घर वापस न पहुँचे। इस पर सुल्तानपुर लोधी में गुरु जी के बेईं नदी में डूब जाने की अफवाह फैल गई। नानक जी के सगे सम्बन्धी तथा अन्य सज्जन चिन्ता में पड़ गए। लोग तरह-तरह की बातें भी बनाने लगे। परन्तु गुरु नानक जी ने वे तीन दिन गम्भीर चिंतन में बिताए। इसी बीच उन्होंने अपने आत्मिक ज्ञान को अन्तिम रूप देकर उसके प्रचार के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया।

ज्ञान- प्राप्ति के पश्चात् जब गुरु नानक देव जी सुल्तानपुर लोधी वापस पहुँचे तो वे चुप थे। जब उन्हें बोलने के लिए विवश किया गया तो उन्होंने केवल ये शब्द कहे-‘न कोई हिन्दू न कोई मुसलमान।’ लोगों ने गुरु साहिब से इस वाक्य का अर्थ पूछा। गुरु साहिब ने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि हिन्दू तथा मुसलमान दोनों ही अपने-अपने धर्म के सिद्धान्तों को भूल चुके हैं। इन शब्दों का अर्थ यह भी था कि हिन्दुओं और मुसलमानों में कोई भेद नहीं है। वे एक समान हैं । उन्होंने इन्हीं महत्त्वपूर्ण शब्दों से अपने सन्देश का प्रचार आरम्भ किया। इस उद्देश्य से उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे कर लम्बी यात्राएँ आरम्भ कर दी।

11.

गुरु नानक देव जी को सुल्तानपुर क्यों भेजा गया?

Answer»

गुरु नानक देव जी को उनकी बहन नानकी तथा जीजा जैराम के पास इसलिए भेजा गया ताकि वह कोई कारोबार कर सकें।

12.

भंगानी का युद्ध कब हुआ?(A) 1699 ई० में(B) 1705 ई० में(C) 1688 ई० में(D) 1675 ई० में

Answer»

सही विकल्प है (C) 1688 ई० में

13.

गुरु गोबिन्द राय जी ने किस-किस अध्यापक से शिक्षा ली?

Answer»

काज़ी पीर मुहम्मद, पण्डित हरजस, राजपूत बजर सिंह, भाई साहिब चन्द, भाई सतिदास आदि से।

14.

भंगानी के युद्ध ( 1688 ई०) का विस्तृत वर्णन कीजिए।

Answer»

भंगानी का युद्ध 1688 ई० में पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच हुआ। इस युद्ध में भाग लेने वाले प्रमुख पहाड़ी राजा थे-बिलासपुर का शासक भीमचन्द, कटोच का शासक कृपाल, श्रीनगर का शासक फतेहशाह, गुलेर का शासक गोपालचन्द तथा जस्सोवाल का शासक केसर चन्द। इन राजाओं का मुखिया बिलासपुर का राजा भीमचन्द था।

कारण- गुरु जी तथा पहाड़ी राजाओं के बीच भंगानी के युद्ध के मुख्य कारण निम्नलिखित थे

  1. गुरु जी ने अपने अनुयायियों को अपनी सेना में भर्ती करना आरम्भ कर दिया था। उन्होंने सैनिक सामग्री भी इकट्ठी करनी आरम्भ कर दी थी। पहाड़ी राजा गुरु जी की इन सैनिक गतिविधियों को सन्देह की दृष्टि से देखने लगे।
  2. पहाड़ी राजा मूर्ति-पूजा में विश्वास रखते थे, परन्तु गुरु जी ने पाऊंटा में रहते हुए मूर्ति-पूजा का घोर खण्डन किया।
  3. गुरु जी अब शाही ठाठ-बाठ से रहने लगे थे। उनके इस कार्य से भी पहाड़ी राजाओं के मन में ईर्ष्या पैदा हो गई।
  4. गुरु जी पहाड़ी प्रदेश में रहकर सैनिक तैयारियां कर रहे थे। अत: पहाड़ी राजा यह नहीं चाहते थे कि गुरु जी के कारण उन्हें सम्राट औरंगज़ेब से उलझना पड़े।
  5. सिक्ख गुरु जी को बहुमूल्य भेटें देते रहते थे। इन भेंटों के कारण पहाड़ी राजा गुरु जी से ईर्ष्या करने लगे थे।
  6. इस युद्ध का तात्कालिक कारण यह था कि बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द ने अपने पुत्र की बारात को पाऊंटा में से गुज़ारना चाहा। परन्तु गुरु जी को उसकी नीयत पर सन्देह था, इसलिए उन्होंने उसे ऐसा करने की अनुमति न दी। क्रोध में आकर उसने अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया।

घटनाएं- गुरु साहिब ने युद्ध के लिए भंगानी नामक स्थान को चुना। युद्ध शुरू होते ही गुरु जी के लगभग 500 पठान सैनिक उनका साथ छोड़ गए। परंतु उसी समय सढौरा के पीर बुद्ध शाह अपने चार पुत्रों तथा 700 अनुयायियों सहित गुरु जी से आ मिला। 22 सितंबर 1688 ई० को दोनों पक्षों में एक घमासान युद्ध हुआ। वीरतापूर्वक लड़ते हुए सिक्खों ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह हराया।

युद्ध का महत्त्व- भंगानी की विजय गुरु गोबिन्द सिंह जी के जीवन की पहली तथा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विजय थी। इसका निम्नलिखित महत्त्व था

  1. इस विजय से गुरु जी की शक्ति की धाक जम गई।
  2. गुरु जी को विश्वास हो गया कि वह अपने अनुयायियों को अच्छी तरह से संगठित करके मुग़लों के अत्याचारों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
  3. पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी का विरोध छोड़कर उनसे मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित कर लिए।
  4. इस विजय ने गुरु जी को पाऊंटा साहिब छोड़कर फिर से आनन्दपुर में जाने का अवसर प्रदान किया।
  5. राजा भीमचन्द ने विशेषकर गुरु जी से मित्रता की नीति अपनाई।
  6. गुरु साहिब ने भीमचन्द की मित्रता का लाभ उठाते हुए आनन्दपुर में आनन्दगढ़, केशगढ़, लोहगढ़ तथा फतेहगढ़ नामक चार किलों का निर्माण करवाया।
15.

खालसा की स्थापना पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।

Answer»

1699 ई० को वैशाखी के दिन गुरु गोबिन्द सिंह जी ने आनन्दपुर में एक विशाल सभा बुलाई। इस सभा में लगभग 80 हजार लोग शामिल हुए। जब सभी लोग अपने-अपने स्थान पर बैठ गए तो गुरु जी ने नंगी तलवार घुमाते हुए कहा-“क्या आप में कोई ऐसा सिक्ख है जो धर्म के लिए अपना सिर दे सके ?” गुरु जी ने इस वाक्य को तीन बार दोहराया। तब लाहौर निवासी दयाराम ने अपने को बलिदान के लिए पेश किया। गुरु जी उसे शिविर में ले गए। बाहर आकर उन्होंने एक बार फिर बलिदान की मांग की। तब क्रमशः धर्मदास, मोहकमचन्द, साहिब चन्द, हिम्मत राय बलिदान के लिए उपस्थित हुए। सिक्ख इतिहास में इन पांच व्यक्तियों को ‘पंज प्यारे’ कह कर पुकारा जाता है। गुरु जी ने दोधारी तलवार खण्डा से तैयार किया हुआ पाहुल अर्थात् अमृत उन्हें छकाया। वे ‘खालसा’ कहलाए और सिंह बन गए। गुरु जी ने स्वयं भी उनके हाथों से अमृतपान किया। इस प्रकार गुरु गोबिन्द राय से गुरु गोबिन्द सिंह जी बन गए।

16.

सुल्तानपुर में गुरु नानक देव जी ने क्या किया?

Answer»

सुल्तानपुर में गुरु नानक देव जी ने दौलत खाँ लोधी के मोदीखाने में दस वर्ष तक कार्य किया।

17.

खिदराना की लड़ाई का वर्णन करो।

Answer»

चमकौर के युद्ध के पश्चात् गुरु गोबिन्द सिंह जी खिदराना में दाब नामक स्थान पर पहुंचे। वहां मुग़लों से उनका अन्तिम युद्ध हुआ। इस युद्ध में वे 40 सिक्ख भी गुरु जी के साथ आ मिले जो आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में उनका साथ छोड़ गए थे। उन्होंने अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया और लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी इस गुरु भक्ति तथा बलिदान से गुरु जी बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने वहां इन शहीदों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की । ये 40 शहीद इतिहास में ’40 मुक्ते ‘ कहलाते हैं। इस लड़ाई में माई भागो विशेष रूप से गुरु साहिब के पक्ष में लड़ने के लिए पहुंची थी। वह भी बुरी तरह से घायल हुई। अंत में गुरु साहिब विजयी रहे और मुग़ल सेना परास्त होकर भाग खड़ी हुई।

18.

पहाड़ी राजाओं तथा गुरु गोबिन्द सिंह जी के बीच भंगानी के युद्ध ( 1688 ई०) पर एक संक्षिप्त नोट लिखो।

Answer»

पहाड़ी राजा गुरु जी द्वारा की जा रही सैनिक तैयारियों को अपने लिए खतरा समझते थे। इस कारण वे गुरु जी के विरुद्ध थे। इन्हीं दिनों एक और घटना घटी। बिलासपुर के पहाड़ी राजा भीमचन्द ने अपने पुत्र की बारात को पाऊंटा से गुजारना चाहा, परन्तु गुरु जी ने उसे पाऊंटा से गुजरने की आज्ञा न दी। भीमचन्द ने इसे अपना अपमान समझा और उसने पुत्र के विवाह के पश्चात् अन्य पहाड़ी राजाओं की सहायता से गुरु जी पर आक्रमण कर दिया। पाऊंटा से कोई 6 मील दूर भंगानी नामक स्थान पर घमासान लड़ाई लड़ी गई। युद्ध में पठान तथा उदासी सैनिक गुरु जी का साथ छोड़ गए। परन्तु ठीक उसी समय सढौरा का पीर बुद्धू शाह गुरु जी की सहायता के लिए आ पहुंचा। अपने 4 पुत्रों और 700 शिष्यों सहित उनकी सहायता से गुरु जी ने पहाड़ी राजाओं को बुरी तरह परास्त किया। यह गुरु जी की पहली महत्त्वपूर्ण विजय थी।

19.

भंगानी की विजय के बाद गुरु गोबिन्द राय ने कौन-कौन से किले बनवाए?

Answer»

आनन्दगढ़, केशगढ़, लोहगढ़ तथा फतेहगढ़।

20.

गुरु गोबिन्द सिंह जी के सेनानायक के रूप में व्यक्तित्व का वर्णन करो।

Answer»

गुरु गोबिन्द सिंह जी एक कुशल सेनापति तथा वीर सैनिक थे । पहाड़ी राजाओं तथा मुग़लों के विरुद्ध लड़े गए प्रत्येक युद्ध में उन्होंने अपने वीर सैनिक होने का परिचय दिया। तीर चलाने, तलवार चलाने तथा घुड़सवारी करने में तो वे विशेष रूप से निपुण थे। गुरु जी में एक उच्च कोटि के सेनानायक के भी सभी गुण विद्यमान थे। उन्होंने कम सैनिक तथा कम युद्ध सामग्री के होते हुए भी पहाड़ी राजाओं तथा मुग़लों के नाक में दम कर दिया। चमकौर की लड़ाई में तो उनके साथ केवल चालीस सिक्ख थे, परन्तु गुरु जी के नेतृत्व में उन्होंने वे हाथ दिखाए कि एक बार तो हज़ारों की मुग़ल सेना घबरा उठी।

21.

आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में किसकी विजय हुई?

Answer»

आनन्दपुर के दूसरे युद्ध में गुरु गोबिन्द सिंह जी की विजय हई।

22.

गुरु नानक देव जी की पत्नी बीबी सुलखनी रहने वाली थीं(A) बटाला की(B) अमृतसर की(C) भठिण्डा की(D) कीरतपुर साहिब की

Answer»

सही विकल्प है (A) बटाला की

23.

गुरु नानक देव जी ने एक नए भाई-चारे का आरम्भ किन दो संस्थाओं द्वारा किया?

Answer»

गुरु नानक देव जी ने इसका श्री गणेश संगत तथा पंगत नामक दो संस्थाओं द्वारा किया।

24.

बाबर ने गुरु नानक देव जी को बन्दी बनाया(A) सियालकोट में(B) कीरतपुर साहिब में(C) सैय्यदपुर में(D) पाकपट्टन में

Answer»

सही विकल्प है (C) सैय्यदपुर में

25.

रिक्त स्थानों की पूर्ति-गुरु नानक देव जी द्वारा व्यापार के लिए दिए गए 20 रुपयों से साधु-संतों को भोजन कराने को ………….. नामक घटना के नाम से जाना जाता है।…………… गुरु नानक देव जी की पत्नी थीं।गुरु नानक देव जी के पुत्रों के नाम …………… तथा …………गुरु नानक देव जी की ‘वार मल्हार’, ‘वार आसा’ …………… और ……….. नामक चार वाणियां हैं।गुरु नानक जी का जन्म लाहौर के समीप …………… नामक गांव में हुआ।गुरुद्वारा पंजा साहिब …………… में स्थित है।

Answer»
  1. सच्चा सौदा
  2. बीबी सुलखनी
  3. श्रीचंद तथा लक्षमी दास
  4. जपुजी साहिब, बारह माहा
  5. तलवंडी
  6. सियालकोट
26.

(i) भंगानी का युद्ध कब हुआ?(ii) दो पहाड़ी राजाओं के नाम बताओ जो इस युद्ध में गुरु गोबिन्द सिंह जी के विरुद्ध लड़े।

Answer»

(i) भंगानी का युद्ध 1688 ई० में हुआ।

(ii) इस युद्ध में बिलासपुर का राजा भीमचन्द तथा कांगड़ा का राजा कृपाल चन्द गुरु साहिब के विरुद्ध लड़े।

27.

(i) गुरु गोबिन्द सिंह जी के बचपन का क्या नाम था?(ii) उन्होंने कब से कब तक गुरु गद्दी का संचालन किया?

Answer»

(i) गुरु गोबिन्द सिंह जी के बचपन का नाम गोबिन्द राय था।

(ii) उन्होंने 1675 ई० में गुरु गद्दी सम्भाली। गुरु जी ने 1708 ई० तक गुरु गद्दी का संचालन किया।

28.

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने कौन-सा नगारा बनवाया?

Answer»

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने एक नगारा बनवाया जिसे रणजीत नगारा के नाम से पुकारा जाता था।

29.

करतारपुर की स्थापना की(A) गुरु अंगद देव जी ने(B) श्री गुरु नानक देव जी ने(C) गुरु रामदास जी ने(D) गुरु अर्जन देव जी ने

Answer»

सही विकल्प है (B) श्री गुरु नानक देव जी ने

30.

श्री गुरु नानक देव जी की माता जी थीं(A) सुलखनी जी(B) तृप्ता जी(C) नानकी जी(D) बीबी अमरो जी

Answer»

सही विकल्प है (B) तृप्ता जी

31.

गुरु नानक देव जी की पहली उदासी (यात्रा) के बारे में विस्तार से लिखिए।

Answer»

गुरु नानक देव जी अपनी पहली उदासी में भारत की पूर्वी तथा दक्षिणी दिशाओं में गए। यह यात्रा लगभग 1500 ई० में आरम्भ हुई। उन्होंने अपने प्रसिद्ध शिष्य भाई मरदाना को अपने साथ लिया। मरदाना रबाब बजाने में कुशल था। इस यात्रा के दौरान गुरुजी ने निम्नलिखित स्थानों का भ्रमण किया

  1. सैय्यदपुर- गुरु साहिब सुल्तानपुर लोधी से चल कर सबसे पहले सैय्यदपुर गए। वहाँ उन्होंने लालो नामक बढ़ई को अपना श्रद्धालु बनाया।
  2. तुलम्बा अथवा तालुम्बा- सैय्यदपुर से गुरु नानक देव जी मुल्तान जिला में स्थित तुलम्बा नामक स्थान पर पहुंचे। यहां सज्जन नामक एक व्यक्ति रहता था जो बड़ा धर्मात्मा कहलाता था। परन्तु वास्तव में वह ठगों का नेता था। गुरु नानक देव जी के प्रभाव में आकर उसने ठगी का धन्धा छोड़ धर्म प्रचार की राह अपना ली। तेजा सिंह ने ठीक ही कहा है कि गुरु जी की अपार कृपा से “अपराध की गुफ़ा ईश्वर की उपासना का मन्दिर बन गई।” (“The criminal’s den became a temple for God worship.”)
  3. कुरुक्षेत्र- तुलम्बा से गुरु साहिब हिन्दुओं के प्रसिद्ध तीर्थ-स्थान कुरुक्षेत्र पहुंचे। उस वर्ष वहां सूर्य ग्रहण के अवसर पर हज़ारों ब्राह्मण, साधु-फ़कीर तथा हिन्दू यात्री एकत्रित थे। गुरु जी ने एकत्र लोगों को यह उपदेश दिया कि मनुष्य को बाहरी अथवा शारीरिक पवित्रता की बजाय मन तथा आत्मा की पवित्रता पर बल देना चाहिए।
  4. पानीपत, दिल्ली तथा हरिद्वार- कुरुक्षेत्र से गुरु जी पानीपत पहुँचे। यहाँ से वह दिल्ली होते हुए हरिद्वार पहुँचे। यहाँ गुरु जी ने लोगों को सूर्य की ओर मुँह करके अपने पूर्वजों को पानी देते देखा। इस अन्धविश्वास को दूर करने के लिए गुरु साहिब ने उल्टी ओर पानी देना आरम्भ कर दिया। लोगों के पूछने पर गुरु जी ने बताया कि वह पंजाब में अपने खेतों को पानी दे रहे हैं। लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। इस पर गुरु जी ने उनसे यह प्रश्न पूछा कि यदि मेरा पानी कुछ मील दूर नहीं जा सकता तो आप का पानी करोड़ों मील दूर पूर्वजों तक कैसे जा सकता है ? इस उत्तर से अनेक लोग प्रभावित हुए।
  5. गोरखमता- हरिद्वार के बाद गुरु जी केदारनाथ, बद्रीनाथ, जोशीमठ आदि स्थानों का भ्रमण करते हुए गोरखमता पहुंचे। वहाँ उन्होंने गोरखनाथ के अनुयायियों को मोक्ष प्राप्ति का सही मार्ग दिखाया।
  6. बनारस- गोरखमता से गुरु जी बनारस पहुँचे। यहाँ उनकी भेंट पण्डित चतुरदास से हुई। वह गुरु जी के उपदेशों से इतना अधिक प्रभावित हुआ कि वह अपने शिष्यों सहित गुरुजी का अनुयायी बन गया।
  7. गया- बनारस से चल कर गुरु जी बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध तीर्थ स्थान ‘गया’ पहुँचे। यहाँ उन्होंने बहुत-से लोगों को अपने विचारों से प्रभावित किया और उन्हें अपना श्रद्धालु बनाया।यहाँ से वह पटना तथा हाजीपुर भी गए तथा लोगों को अपने विचारों से प्रभावित किया।
  8. आसाम- गुरु नानक देव जी बिहार तथा बंगाल होते हुए आसाम पहुँचे। वहाँ उन्होंने कामरूप की एक जादूगरनी को उपदेश दिया कि सच्ची सुन्दरता सच्चरित्र में है।
  9. ढाका, कटक तथा जगन्नाथपुरी- तत्पश्चात् गुरु जी ढाका पहुँचे। वहाँ पर उन्होंने विभिन्न धर्मों के नेताओं से मुलाकात की। ढाका से कटक होते हुए गुरु जी उड़ीसा में जगन्नाथपुरी गए। पुरी के मन्दिर में उन्होंने बहुत-से लोगों को विष्णु जी की मूर्ति पूजा तथा आरती करते देखा। वहाँ पर गुरु जी ने उपदेश दिया कि मूर्ति पूजा व्यर्थ है। ईश्वर सर्वव्यापक है।
  10. दक्षिणी भारत- पुरी से गुरु नानक देव जी दक्षिण की ओर गए। वह गंटूर, कांचीपुरम, त्रिचन्नापल्ली, नागापट्टम, रामेश्वरम, त्रिवेन्द्रम होते हुए लंका पहुँचे। वहाँ का राजा शिवनाभ गुरु जी के व्यक्तित्व तथा वाणी से बहुत प्रभावित हुआ और वह गुरु जी का शिष्य बन गया। लंका में गुरु साहिब ने झंडा बेदी नामक एक श्रद्धालु को ईश्वर का प्रचार करने के लिए भी नियुक्त किया। 
  11. वापसी यात्रा- लंका से वापसी पर गुरु जी कुछ समय के लिए पाकपट्टन पहुँचे। वहाँ पर उनकी भेंट शेख फरीद के दसवें उत्तराधिकारी शेख ब्रह्म अथवा शेख इब्राहिम के साथ हुई। वह गुरु जी के विचार सुन कर बहुत प्रसन्न हुआ।पाकपट्टन से दीपालपुर होते हुए गुरु साहिब वापिस सुल्तानपुर लोधी आ गए।
32.

गुरु नानक देव जी की उदासियों से क्या अभिप्राय है?

Answer»

गुरु नानक देव जी की उदासियों से अभिप्राय उन यात्राओं से है जो उन्होंने एक उदासी के वेश में की।

33.

परमात्मा के बारे में गुरु नानक देव जी के विचारों का सार उनकी किस वाणी में मिलता है?

Answer»

जपुजी साहिब में।

34.

गुरु नानक देव जी ने ज्ञान प्राप्ति के बाद क्या शब्द कहे तथा उनका क्या भाव था?

Answer»

गुरु नानक देव जी ने ज्ञान पाप्ति के बाद ये शब्द कहे-‘न कोई हिन्दू न कोई मुसलमान।’ इसका भाव था कि हिन्दू तथा मुसलमान दोनों ही अपने धर्म के मार्ग से भटक चुके हैं।

35.

‘धुबरी’ नामक स्थान पर गुरु नानक देव जी की मुलाकात किस से हुई?

Answer»

सन्त शंकर देव से।

36.

सज्जन ठग से श्री गुरु नानक देव जी की भेंट हुई(A) पटना में(B) सियालकोट में(C) तुलम्बा में(D) करतारपुर में

Answer»

सही विकल्प है (C) तुलम्बा में

37.

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खिदराना (मुक्तसर) में मुगल सेना को कब हराया?

Answer»

गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खिदराना (मुक्तसर) में मुगल सेना को 1705 में हराया।

38.

गुरु नानक देव जी की सज्जन ठग से भेंट कहां हुई?

Answer»

सज्जन ठग से गुरु नानक देव जी की भेंट तुलम्बा में हुई।

39.

गुरु गोबिन्द सिंह जी ज्योति जोत कैसे समाए?

Answer»

एक पठान ने गुरु साहिब के पेट में छुरा घोंप दिया।

40.

गुरु गोबिन्द सिंह जी की दस्तारबंदी कहां हुई?

Answer»

गुरु गोबिन्द सिंह जी की दस्तारबंदी लखनौर में हुई।

41.

गुरु गोबिन्द राय जी का जन्म कब और कहां हुआ ? उनके माता-पिता का नाम भी बताओ।

Answer»

22 दिसम्बर, 1666 ई० को पटना में। उनकी माता का नाम गुजरी जी और पिता का नाम श्री गुरु तेग़ बहादुर जी था।

42.

गुरु नानक देव जी ने किस स्थान पर एक जादूगरनी को उपदेश दिया?

Answer»

गुरु नानक देव जी ने कामरूप स्थान पर एक जादूगरनी को उपदेश दिया।

43.

किस मुगल बादशाह ने हिन्दुओं को इस्लाम धर्म अपनाने पर विवश किया?

Answer»

औरंगजेब ने मुगल बादशाह ने हिन्दुओं को इस्लाम धर्म अपनाने पर विवश किया।

44.

लंगर प्रथा से क्या अभिप्राय है?

Answer»

सभी लोगों द्वारा बिना किसी भेदभाव के एक स्थान पर बैठ कर भोजन करना।

45.

गुरु नानक देव जी ने अपनी तीसरी उदासी का आरम्भ किस स्थान से किया?

Answer»

गुरु नानक देव जी ने अपनी तीसरी उदासी का आरम्भ पाकपट्टन स्थान से किया।

46.

गुरु नानक देव जी की तीसरी उदासी (यात्रा) के महत्त्वपूर्ण स्थानों के बारे में बताओ।

Answer»

गुरु साहिब ने अपनी तीसरी उदासी का आरम्भ पाकपट्टन से किया। अन्ततः वह सैय्यदपुर से आ गए। इस बीच उन्होंने निम्नलिखित स्थानों की यात्रा की-

  1. मुल्तान
  2. मक्का
  3. मदीना
  4. बग़दाद
  5. तेहरान
  6. कंधार
  7. पेशावर
  8. हसन अब्दाल तथा
  9. गुजरात।
47.

अपनी दूसरी उदासी में गुरु नानक देव जी कहाँ गए?

Answer»

भारत के उत्तर में।

48.

गुरु नानक देव जी की दूसरी उदासी का वर्णन करो।

Answer»

गुरु नानक देव जी ने अपनी दूसरी उदासी (यात्रा) 1514 ई० में आरम्भ की। इस बार वह उत्तर दिशा में गए। इस यात्रा के दौरान गुरु जी निम्नलिखित स्थानों पर गए —

  1. हिमाचल प्रदेश- गुरु जी ने पंजाब के प्रदेशों में से गुजरते हुए आधुनिक हिमाचल प्रदेश में प्रवेश किया। वहाँ पर सबसे पहले उनकी भेंट पीर बुड्डन शाह से हुई। वह पीर गुरु जी का अनुयायी बन गया। हिमाचल में गुरु जी बिलासपुर, मंडी, सुकेत, रिवालसर, ज्वाला जी, कांगड़ा, कुल्लू, स्पीति आदि स्थानों पर गए और वहाँ के विभिन्न सम्प्रदायों के लोगों को अपना शिष्य बनाया।
  2. तिब्बत- स्पीति घाटी पार करके गुरु नानक साहिब ने तिब्बत में प्रवेश किया। जब वह मानसरोवर झील तथा कैलाश पर्वत पर पहुँचे तो यहां पर उन्होंने अनेक सिद्ध योगियों से भेंट की। गुरु जी ने उन्हें उपदेश दिया कि पहाड़ों पर बैठने से कोई लाभ नहीं। उन्हें मैदानों में जाकरं अज्ञान के अन्धेरे में भटक रहे लोगों को ज्ञान का मार्ग दिखाना चाहिए।
  3. लद्दाख- कैलाश पर्वत के पश्चात् गुरु जी लद्दाख गए। वहाँ पर अनेक श्रद्धालुओं ने उनकी याद में एक गुरुद्वारे का निर्माण किया।
  4. कश्मीर- सकारदू तथा कारगिल होते हुए गुरु जी कश्मीर में अमरनाथ की गुफ़ा में गए। इसके बाद वह पहलगांव तथा मटन नामक स्थानों पर पहुंचे। मटन में उनकी भेंट पण्डित ब्रह्मदास से हुई जो वेद-शास्त्रों का बहुत बड़ा ज्ञानी माना जाता था। गुरु जी ने उसे उपदेश दिया कि केवल शास्त्रों को पढ़ लेने मात्र से ही मोक्ष प्राप्त नहीं हो जाता। यहाँ से गुरु जी बारामूला, अनंतनाग तथा श्रीनगर भी गए।
  5. हसन अब्दाल- कश्मीर से वापस आते हुए गुरु जी रावलपिंडी के उत्तर-पश्चिम में स्थित हसन अब्दाल नामक स्थान पर ठहरे। वहाँ उन्हें एक अहंकारी मुसलमान फ़कीर वली कंधारी ने पहाड़ी से पत्थर फेंक कर मारने का प्रयास किया। परन्तु गुरु जी ने उस पत्थर को अपने पंजे से रोक लिया। आजकल वहां एक सुन्दर गुरुद्वारा पंजा साहिब बना हुआ है।
  6. सियालकोट- जेहलम तथा चिनाब नदियों को पार करने के पश्चात् गुरु नानक साहिब सियालकोट पहुँचे। वहाँ पर भी उन्होंने अपने प्रवचनों से अपने श्रद्धालुओं को प्रभावित किया। अंत में गुरु जी अपने निवास स्थान करतारपुर में चले गए।
49.

गुरु गोबिन्द सिंह जी कब और कहां ज्योति जोत समाए?

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गुरु गोबिन्द सिंह जी 7 अक्तूबर, 1708 को नंदेड़ में ज्योति जोत समाए।

50.

गुरु नानक देव जी ने अपनी तीसरी उदासी कब आरम्भ की?

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गुरु नानक देव जी ने अपनी तीसरी उदासी 1517 ई० में आरम्भ की।